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Blog: मुक्ताकाश....

Blogger: Anand wardhan Ojha
[दूसरी किस्त]दूसरे दिन पिताजी इसी निश्चय के साथ उठे और उन्होंने हमें बताया--"मैंने निर्णय ले लिया है, मैं दिल्ली जाउंगा." मैंने झट-से कहा--"मैं जानता था, आप यही निश्चय करेंगे." उन्होंने पूछा--"तुम कैसे जानते थे ?" मैंने उन्हीं का बार-बार का कहा वाक्य दुहरा दिया. वह हंस पड़े और बो... Read more
clicks 199 View   Vote 0 Like   5:33am 13 Sep 2012
Blogger: Anand wardhan Ojha
विक्षुब्ध भाव से दूब वृक्ष से बोली हंसकर--'हे महावृक्ष !तुम्हारी विराट छाया मेंहर्षित-प्रफुल्लित ही रहती हूँ;किन्तु, मुझे धूप नहीं मिलतीखुला आकाश नहीं मिलताइस कारण से--तुम्हारी तरह महावृक्ष बन नहीं पाती,किसी को छाया का सुख दे नहीं पाती;क्या करूँ ?'महावृक्ष थोड़ी देर मौ... Read more
clicks 184 View   Vote 0 Like   7:51am 13 Aug 2012
Blogger: Anand wardhan Ojha
अपना सारा फल देकरवृक्ष मुस्कुरायाऔर उमंग में भरकरउसने कोमल टहनियों को ऊपर उठाया;जैसे अपने हाथ उठाकर सिरजनहार को धन्यवाद दे रहा हो,कृतज्ञता ज्ञापित कर रहा होऔर भार-मुक्त करने के लिएआभार व्यक्त कर रहा हो !मैंने पूछा--'हे वृक्ष !अपना सब कुछ देकरतुम खुश कैसे होते हो ?क्या अ... Read more
clicks 204 View   Vote 0 Like   5:46am 31 Jul 2012
Blogger: Anand wardhan Ojha
बात औकात की नहीं,बात हिम्मत की है,साहस की है ;लेकिन हाथों में पत्थर लिए लोगपहले से तैयार दीखते हैंऔर छाती ठोंककर पूछते हैं सवाल--'इतना साहस कोई कैसे कर सकता है ?समूचे तंत्र की शक्ल-सूरत बदलने का दमकोई कैसे भर सकता है ?कोई कैसे कर सकता है--अनुचित को अनुचित कहने का साहस ??'और अन... Read more
clicks 177 View   Vote 0 Like   5:28pm 25 Jul 2012
Blogger: Anand wardhan Ojha
कुछ तकलीफेंजी भरकर रो न सकींरुआंसी हो कर रह गईंहमेशा के लिए...!उस पौधे के कंटीले तन परएक गुलाब खिला--मुस्कुराता हुआ !मैंने पूछा--ये हंसी कैसी ?वह बोला कुछ नहीं,काँटों के सलीब परसर्द-सा मुस्कुराया;मैंने समझा--उसने अपनों से दर्द छुपाया !जाने कब और कैसेउसके नाखून खंजर हो गएऔर ... Read more
clicks 163 View   Vote 0 Like   3:48am 3 Feb 2012
Blogger: Anand wardhan Ojha
वर्षनया, उत्कर्षनया, संकल्पनयालायाहै,मेरेमनकेमहावृक्षमेंपत्रनयाआयाहै।इसपल्लवपरलिखनाहैएकगीतनयाजीवनका,नएवर्षमेंबरसपड़ेसुख-मेघसमग्रमेरेमनका ![नव-वर्षपरमेरीमंगल-कामनाएंस्वीकारकरें !--आनंदव. ओझा.]... Read more
clicks 169 View   Vote 0 Like   6:55am 1 Jan 2012
Blogger: Anand wardhan Ojha
[वर्षांत पर]आदमीबनकेउपजाथा--सामान्यआदमी !ज़िन्दगीभरचाहाआदमीहीबनारहूँ;लेकिनज़िन्दगीतोआदमीबननेकीकोशिशमेंहीगुज़रगई,स्याहकोसफ़ेदबनानेमेंउम्रबीतगई !अबसोचताहूँ,क्याहोगाठीक-ठाकआदमीबनकर ?छोड़ाहुआरास्ताक्याफिरमिलेगा ?औरजोबचीहुईडगरहै--वहइतनीकमहैकिउसेआदमीबनक... Read more
clicks 184 View   Vote 0 Like   12:20pm 28 Dec 2011
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