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संजीव खुदशाह Sanjeev Khudshah

तेज सिंह एक प्रखर आलोचक थेसंजीव खुदशाहप्रसिध्‍द अम्‍बेडकरवादी पत्रिका ‘अपेक्षा’ के सम्‍पादक के रूप में तेज सिंह की पहचान पूरे भारत मे थी और अभी भी है। एक सरल सादे कलेवर में निरंतर प्रकाशित होने वाली पत्रिका का सभी लेखकों पाठकों को बेसब्री से इंतजार रहता था। तेज सिं...
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  April 1, 2017, 10:29 pm
संजीव खुदशाहसन 1645 के आस पास शिंगणापुर गांव के पारस नाले में एक शिला बहकर आई और एक दिवा स्वप्न के आधार पर उस शिला को शनि के रूप में पूजा जाने लगा।जो बाद में शनि शिंगणापुर के नाम से प्रसिध्द हुआ। इसी प्रकार स्वप्न को आधार बताते हुये मूर्ति मिलना उसपर मंदिर निर्माण होना भ...
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  June 20, 2016, 4:15 pm
विश्‍वविद्यालय की आंधी से किसको खतरासंजीव खुदशाहविगत दिनों देश में ज्ञानार्जन संस्‍थान विद्रोह और दमन के केन्‍द्र बने हुये है। हैदराबाद विश्‍वविद्यालय के छात्र रोहित वेमुला की आत्‍महत्‍या से ये मुआमला तूल पकड़ने लगा।  लेकिन यदि हम कुछ साल पीछे की  घटनाओं को गौ...
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  March 17, 2016, 7:44 pm
हम तेजी से एक ऐसा समाज बनते जा रहे हैं, जिसमें मतभेदों को तर्क और बहस से नहीं बल्कि गोलियों से सुलझाया जाता हैमेरे मोबाइल में वाट्सएप में कुछ महीनों पूर्व एक संदेश आया, जिसका शीर्षक था, ”भारत में विज्ञान ने जनेऊ पहन लिया और चुटिया रख ली है’’। संदेश में उच्च शिक्षण संस्थ...
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  January 30, 2016, 9:13 am
ओबीसी साहित्य की जरूरतसंजीव खुदशाहचाहे इसे माने या न माने लेकिन ये बात तय है कि आज जो बहुजन साहित्य की अवधारणा की बात चली है उसके मूल में दलित साहित्य का कान्सेप्ट है। दलित साहित्य ने जिस मज़बूती के साथ साहित्य जगत में अपनी पैठ बनाई है उससे अन्य पीड़ित वर्ग निश्चित र...
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Tag :बहुजन साहित्य की अवधारण
  October 18, 2015, 9:50 pm
DALIT MOVEMENT ASSOCIATION दलित मुव्हमेंन्ट ऐसोशियेशन: सुदर्शन समाज का इतिहास: सुदर्शन समाज का इतिहास संजीव खुदशाह मूलत: बघेलखण्ड और बुंदेलखण्ड (आज मप्र और उप्र के कुछ हिस्से) में निवास करने वाली डोमार जाति जो भंग......
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  September 22, 2015, 9:45 am
सुदर्शन समाज की परिकल्पना का ऐतिहासिक परिदृश्यसुदर्शन समाज का इतिहाससंजीव खुदशाहमूलत: बघेलखण्ड और बुंदेलखण्ड (आज मप्र और उप्र के कुछ हिस्से) में निवास करने वाली डोमार जाति जो भंगी व्यवसाय में जुडी हुई है। ने अचानक 1941 के आस पास अपने आपको सुदर्शन नाम के पौराणिक ऋषि से ज...
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  September 22, 2015, 9:45 am
नये जमाने का अंधविश्‍वास है मिड ब्रेन एक्टिवेशनसंजीव खुदशाहयह लेख नवभारत अवकाश अंक की कवर स्‍टोरी में दिनांक 26 जुलाई 2015 को प्रकाशित हो चुका है, लेख काफी चर्चित रहा है, आज भी इसकी प्रतिक्रिया, और बधाई संदेश आ रहे है।   इसे पुन: संदर्भ के साथ्‍ा प्रकाशित किया जा सकता है...
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  August 15, 2015, 12:29 am
सकारात्मकता, समतावादी आंदोलन का आकर्षण हैसंजीव खुदशाहअगर कोई मुझसे कहता की मैं एक कट्टर बौध्‍द हूँ, या कट्टर आंबेडकरवादी हूँ, तो मैं उसे कट्टर तालीबानी के बराबर ही समझता हूँ। जिनका काम आपसी द्वेश फैलाना है। क्योकि बुध्द और आंबेडकर के विचार कट्टरता खत्म करते है नकी ब...
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  June 30, 2015, 7:10 pm
संजीवखुदशाह 16 दिसंबर2012 चर्चितदिल्लीरेपकेसकीआगअभीपूरीठंडीहुईहीनहीथीकी19 अप्रैल2013 कोएकपांचसालकीबच्चीकेसाथरेपहोनेकामामलासामनेआया।ज्ञातव्यहैकियहबच्ची15 अप्रैलकोग़ायबहुई।बच्चीकेमातापिताथानेमेंशिकायतकरनेगयेतोदिल्लीपुलिसनेउन्हे6 घंटेथानेमेंबिठायेरख...
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  June 16, 2015, 9:20 pm
हर पृष्‍ठ की हर लाईन है खास शायरी ‘नुमू’ कीसंजीव खुदशाहअरब का काव्‍य बहुत लंबा सफर तय करके भारत तक पहुचा। उसे भारत की आम समझ के लायक बनने के लिए काफी जद्दोजहद करने पड़ी। पहले मुसलमान बादशाहों के दरबार में गजल एवं शायरी पढ़ी जाती थी। ज्‍यादातर कसीदे बादशाहों के शान में...
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  April 20, 2015, 9:57 am
अंधविश्‍वास के खिलाफ जंगसंजीव खुदशाहदेश के जाने माने वैज्ञानिक डॉ नरेन्‍द्र नायक के द्वारा विगत दिनों रायपुर में प्रस्‍तुत अंधविश्‍वास और चमत्‍कार पर दिया गया उनका आडियों विडियों व्‍याख्‍यान बेहद सराहनीय रहा। सराहनीय इसलिए भी रहा क्‍योकि जहां आज के दौर में पढे ल...
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  April 3, 2015, 5:26 pm
प्रेम का संदेश देता संत वेलेन्‍टाईन दिवससंजीव खुदशाहसदियों से प्रेम और उसकी भावनाओं को धर्म और संस्कृति के ठेकेदारों ने अपनी पैरो की जूती समझा है तथा प्रेम के दीवानों पर सैंकड़ो सितम ढाये है। बावजूद इसके प्रेम के नाम पर अपने आपको न्‍यौछावर कर देने वाले संत वेलेन्‍ट...
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  February 10, 2015, 9:11 pm
मैगते चंग्नेइजैग से मेरी काँम बनने की कहानी फिल्म समीक्षा द्वारा संजीव खुदशाह...
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  January 22, 2015, 7:09 pm
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  October 12, 2014, 9:45 pm
पुस्तक समीक्षासंस्कृत सबसे नई और कृत्रिम भाष्‍ाा है।संजीव खुदशाहभाषाकी उत्पत्ति के विषय में अधिकांश प्राचीन जनों का यह विश्वास था कि यहईश्वर कृत है। बाइबिल के अनुसार भाषा की उत्पत्ति आदम के साथ हुई। वहदेवताओं की भाषा को समझते थे।कुरान की एक आयत के अनुसार भी “उसनेआ...
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Tag :संस्कृत का पहले व्याकरण बना फिर भाषा
  August 27, 2014, 6:55 pm
मै जानता हूं,अगर मै कुछ कहताये मेरी जीभ काट ली जाती।मै जानता हूं,अगर मै कुछ सुनतामेरे कानों में गर्म लावे ठूंस दिये जाते।जिसे बताते थे तुम अपना, रहस्य खजाने का जिस पर तुम आध्यात्म के नाम पर इठलाते थे इतनामैने आज इनको पढ़ लिया है।जान लिया है वो कारण,जीभ को काटने काकानो ...
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Tag :मै जानता हूं
  May 27, 2014, 3:31 pm
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Tag :गुलाबी गैंग के बहाने स्त्री चेतना
  April 11, 2014, 9:56 am
   संजीवखुदशाहआजपटवारीभारतकेजन मानसकाएकमहत्वपूर्णअंगहै।कोईभीगांवकीकहानीपटवारीकेजिक्रकेबिनापूरीनहीहोती।लोकगीतलोक-कथाओंमेंइसकीमौजूदगीगहरेपैठकोदर्शातीहै।पहलेपटवारियोंकेपासदोकोड़ेदार, ग्रामकोतवालऔरघोड़ेहुआकरतेथे।भारतकेज्ञातइतिहासमेंसर्वप्र...
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Tag :पटवारी तेरे कितने नाम
  February 28, 2014, 8:47 pm
संजीव खुदशाहफिल्म का नाम –बूट पॉलिशअवधि--153 मिनट निर्देशक—प्रकाश अरोराबैनर—राज कपूरयह फिल्म 1954 के आस पास बनी थी। इस ब्लैक एड व्हाइट फिल्म में राज कपूर ने एक ऐसा मुद्दा उठाया जिसे अन्य बैनर उठाने में हिचकिचाते थे। पहले पहल जो भी फ़िल्मे बनी उनमें धार्मिक फ़िल्मो की भर...
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Tag :सिनेमा
  February 9, 2014, 9:56 am
संजीव खुदशाहबहुत हद तक यह फिल्म अन्ना के आंदोलन से प्रभावित दिखती है। जिस प्रकार अन्ना का इलीट क्लास आंदोलन जनलोकपाल से सारे भ्रष्टाचार के सफाया का दावा करता था। उसी प्रकार यह फिल्म भी पेन्डीगं आवेदन के निराकरण से भ्रष्टाचार का सफ़ाया करने का अनोखा सत्याग्रह करता ह...
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  January 10, 2014, 10:21 am
संजीव खुदशाहफिल्म का नाम -- मद्रास कैफ़ेअवधि--130मिनटनिर्देशक--सुजित सरकारबैनर--Viacom 18 Motion Pictures                  राजीव गांधी की हत्या और तमिल समस्या पर केन्द्रित यह फिल्म एक ऐसे रॉ अधिकारी की कहानी है जो भारत के द्वारा श्रीलंका में भेजी गई शांति सेना को ल...
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  December 23, 2013, 10:22 am
पिक्चर अभी बाकी है मेरे दोस्त- जयभीम कामरेडसंजीव खुदशाहपिक्चर अभी बाकी है मेरे दोस्त। ये जुमला आनंद पटवर्धन की फिल्म ‘‘जयभीम कामरेड’’ पर सौ फीसदी सही बैठता है। उन्होने एक ऐसी फिल्म बनाई जो डाक्युमेन्ट्री होते हुए भी फिचर फिल्म की तरह आगे बढ़ती है। इसके पात्र असल जिंद...
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  September 30, 2013, 9:33 am
बुध्द जयंति पर विशेष लेखलाफिंग बुध्दासंजीव खुदशाहजब मै बाल अवस्था में था, गर्मियों की छुट्टी में पाठ्यक्रम के बाहर की किताबे पढने का मौका मिला, इस दौरान कई महापुरूषों की जीवनी का अध्ययन किया। लेकिन जब बुध्द की जीवनी को पढ़ा तो लगा मानो हिचकोले खाती नदी को शांत समुद्र...
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Tag :मुस्कराते बुध्द
  May 25, 2013, 12:05 pm
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