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Blog: प्यार

Blogger: rewa tibrewal
जैसे जैसे बारिश की बूंदेंमिट्टी पर गिरती हैंमिट्टी नमी सोखने लगती हैबारिश जब ज्यादा हो जाये तोमिट्टी की सतह उसे औरसोख नहीं पाती औरपानी इकट्ठा हो जाता है याबहने लगता हैमेरा मन भी उसी मिट्टी कीतरह हैकड़वाहट की बारिशझेल लेता है पर ज्यादा हो तोअक्सर आँखों के रास्तेबहने ... Read more
clicks 11 View   Vote 0 Like   3:24pm 10 Oct 2019 #
Blogger: rewa tibrewal
बचपन में हमने खूब किया है न ये परीक्षा में, होमवर्क में क्लासवर्क में "खाली स्थान भरो"सही हो या गलत हम इस सवाल को पूरा करते ही थेसमय आभाव मेंही इसे छोड़ते थेरिश्ते भी ऐसे ही होते हैं रिश्तों में कभी गर खाली स्थान रह गया तो सही हो या गलतकोई न कोई भर ही देता हैकभी कभी वैसे ही र... Read more
clicks 1 View   Vote 0 Like   4:58am 29 Sep 2019 #
Blogger: rewa tibrewal
मुझे जब तुम्हारी जरूरत थी जब मैं टूटने लगी थी जगह जगह दरारें पड़ने लगी थी तुम देख कर समझ न पाएमैंने तुम्हें आवाज़ लगाई एक बार दो बार नहीं कई कई बार पर हर बार अपनी उलझनों में उलझे तुम्हें मैं, मेरे एहसास जरूरी न लगेपर मैं टूटी नहीं बिखरी नहीं ख़ुद को समेटा अपनी दरारों कोभर तो ... Read more
clicks 44 View   Vote 0 Like   12:20pm 28 Aug 2019 #
Blogger: rewa tibrewal
क्या कोई सुन सकता हैदेख सकता हैखामोशी के अंदर का शोरमन के अंदर छुपी बैठी वो अलिखित कविता वो मन के कोने में बैठा एक छोटा सा बच्चामहीने भर का हिसाब किताब और उसमे छिपा बचतउस बचत से जाने क्या कुछ न ख़रीद लेने की योजनाएंघर के सारे दिन के काम काज के बीच आसमान के टुकड़े के साथ कुछ ... Read more
clicks 14 View   Vote 0 Like   7:21am 27 Jul 2019 #
Blogger: rewa tibrewal
जब कविता शायरी सेमिलती है तो होता है इश्क़जब साहिर अमृता से मिलते हैं तो होता है इश्क़जब भक्त भगवान से मिलते हैं तो होता है इश्क़जब राधा कृष्ण मिलते हैं तो होता है इश्क़ जब तेरे शहर से होकर हवा मुझे छू जाती है तो होता है इश्क़#रेवा#इश्क़... Read more
clicks 86 View   Vote 0 Like   9:23am 23 Jul 2019 #
Blogger: rewa tibrewal
आओ नइन गूंगों की बस्ती में तुम्हारा भी स्वागत है यहां पर सिर्फ रंग चलता हैसफेद, हरा, लाल, भगवाब्लू, काला,पीला यह फतओं औरफरमानों की बस्ती है यहाँ चुप्पी का रिवाज़ हैलुटती है बीच सड़क इज़्ज़तपर सभी चुप होकर रंग मिला कर बैठ जाते हैं शांतकोई इंकलाब पैदा नहीं होतानित नई लाशें ... Read more
clicks 94 View   Vote 0 Like   10:03am 2 Jul 2019 #
Blogger: rewa tibrewal
उस मकान को देख रहे हैं न उसको घर बनाने का सचक्या पता है आपको ??कितनी बहसकितने आँसूकितने तकरार कितने अरमान कितने रत जगे लगे हैंसारी जिंदगी नौकरी करने वाले कीपसीने से जमा की हुई पूंजी लगी हैबूढ़े बाप का सपना बीवी का अरमान बच्चों का ख़्वाब बहनों का आशीर्वाद लगा हैउस एक मका... Read more
clicks 33 View   Vote 0 Like   9:03am 18 Jun 2019 #
Blogger: rewa tibrewal
तू ही तो पालनहार हैतू ही तो खेवनहार है पर तू है कहाँ सुना है तू कण कण में है बच्चों के मन में है तो फिर उनकी रक्षा क्यों नहीं करता ??ईमानदार निश्छल इंसान की तू सुनता है ऐसा सुना था पर वो खून के आंसू रोते हैं तू उनकी सुनता क्यों नहीं ??सुना है तुझे सिर्फ दिल से याद करो, आडम्बरोँ... Read more
clicks 70 View   Vote 0 Like   11:39am 14 Jun 2019 #
Blogger: rewa tibrewal
आँखें बहुत कुछ देखती है कहती हैंजो देखती है समझती हैं उससे चहरे के भावबदलते हैंआँखों की भाषाबहुत मुश्किल हैपर गर मन से पढ़ा जाए तोपढ़ना बहुत आसान हैयहाँ मेरे जीवन से जुड़ीतीन परिस्थितियों कावर्णन करना चाहूँगीजो मुझे कभी भूलती नहींदेखी थी मैंने माँ की आँखेंबेटी को ... Read more
clicks 30 View   Vote 0 Like   7:54am 12 Jun 2019 #
Blogger: rewa tibrewal
अमृता का प्यारसदाबहार उसके गले का हार साहिर बस  साहिरउसका चैन उसका गुरूर उसकी आदत उसकी चाहतउसका सुकून उसकी मंज़िलसाहिर बस साहिरउसकी ताकत उसकी हिम्मत उसकी लेखनी उसकी कहानी साहिर बस साहिरउसका दिल उसकी सांसें उसकी जिंदगी उसकी बंदगीउसकी आशिकी उसकी ख़लबलीसाहिर बस सा... Read more
clicks 27 View   Vote 0 Like   7:04am 8 Jun 2019 #
Blogger: rewa tibrewal
कैसे लिखूं कविताक्या लिखूं कीगरीब माएं मजबूरी मेंबेटियों को धन्धे परलगा देती हैं ताकि पेट भरता रहेक्या लिखूं कीकूड़े के ढेर से चुन करसड़ी गली चीज़ें खाते हैंबच्चे ताकि उनकीभूख मिट सकेक्या लिखूं कीफेक दी जाती है बेटियाँपैदा होते हीया कभी कभी पैदाइशीसे पहले गिरा दी ज... Read more
clicks 27 View   Vote 0 Like   12:40pm 4 Jun 2019 #
Blogger: rewa tibrewal
अपने घर का एहसास कुछ अलग ही होता है ऐसी शांति मन को मिलती हैजिसे शब्दों में बयां करनानामुमकिन हैएक अजीब सा रूहानीसुकून महसूस होता हैहर एक ज़र्रे हर एककोने से प्यार हो जाता हैघर का ईट ईटलगता है हमारे एहसासोंसे जुड़ा हैअपना एक कोना मिलजाता हैजो कोई नहीं छीन सकताज़िन... Read more
clicks 29 View   Vote 0 Like   8:20am 9 May 2019 #
Blogger: rewa tibrewal
बंद करो रक्त पातबंद करो युद्ध की बातबंद करो अहंकार का ये खेलकहीं कोई भी मरे सब इंसान हैकम से कम ये तो देख माँ का भाल न लाल के खून सेलाल करोइंसान हो जानवरों सी बात न करोबंद करो रक्त पातबंद करो युद्ध की बात#रेवा... Read more
clicks 91 View   Vote 0 Like   12:38pm 11 Mar 2019 #
Blogger: rewa tibrewal
हाँ मैं हूँ एक माँखड़ी ढाल की तरहअपने बच्चों के साथ उनके हर तकलीफ़ मेंडट कर सामना करने कोउन्हें बचाने को तैयारचाहे हालात कैसे भी होचाहे मुसीबत कैसी भी होपर फिर भी हूँ इन्सानउस दिन उस शामकुछ मिनट पहले हीदेखा था अपनी दस साल कीबच्ची को खेलते हुएऔर बाद के कुछ मिनटों नेदु... Read more
clicks 78 View   Vote 0 Like   9:11am 5 Mar 2019 #
Blogger: rewa tibrewal
उलझे रहे हम ज़िन्दगी के सफर में इस कदर न दिन की रही खबर न ही शाम का रहा ख्यालथक कर हर रात बस ख़्वाबों की गोद में पनाह ले ली कभी देखा ही नहींसुबह की सिंदूरी रोशनी कभी सुना ही नहीं पंछियों का कलरव कभी महसूस नहीं किया सुहाना मौसम भागते रहे बस हर रोज़ चिन्ता लिए कैसे होगा सब ??सी... Read more
clicks 49 View   Vote 0 Like   5:42am 26 Feb 2019 #
Blogger: rewa tibrewal
कभी ध्यान सेदेखा है उन भिखारियों को जो कटोरा लेकर पीछे पीछे आते हैं गिड़गिड़ाते रहते हैं किसी भी तरह पीछा नहीं छोड़ते चाहे उनका अपमान करो या डांट लगाओ तरह तरह से कोशिश करते रहते हैं वैसा ही हाल होता है उन लोगों का जो वोट मांगते हैं तरह तरह से प्रलोभन देते हैं ५ साल में काया ... Read more
clicks 53 View   Vote 0 Like   12:27pm 8 Feb 2019 #
Blogger: rewa tibrewal
लिखने के लिए बहुत कुछ है राजनीति, समाज मैं फैली गंदगी का सचआँखों में रड़कते धूल के कण का सचनक़ाब के पीछे चेहरे का सचमिट्टी का सचसादा लिबास और रंग का सच मंदिर, मस्जिद ,चर्च और गुरुद्वारे का सच नाजायज़ शब्द का सच रिश्तों में पनपते रिश्ते का सच फ़कीर और भिखारी का सच इट पत्थर और घ... Read more
clicks 47 View   Vote 0 Like   11:04am 4 Feb 2019 #
Blogger: rewa tibrewal
मैं एक गृहिणी हूँ सुबह के आकाश का रंग देखना चाहती हूँपर नहीं पहचानती नहीं छू पाती सूरज की किरण नहीं सुन पाती मधुर संगीतनहीं महसूस कर पाती वो ताज़ी हवा नहीं जी पाती सुबहवो उठते ही दौड़ती है रसोई में वही है उसका आकाश सूरज की बजाय वो आग का रंग देखती है संगीत की बजाय सुनती है ... Read more
clicks 97 View   Vote 0 Like   6:50am 31 Jan 2019 #
Blogger: rewa tibrewal
तुम्हें ये महज़ बातें लगती हैं मुझे एहसास तुम्हें ये बरसात नज़र आती है मुझे मिट्टी की खुश्बूतुम्हें सिर्फ़ आँखें नज़र आती हैं मुझे उनमें घुलते जज़्बात तुम्हें एक ख़याल छू कर चला जाता है मुझे रेशमी याद तुम्हें ज़रूरत समझ आती है मुझे इश्क़ तुम्हें लॉजिक चाहिए मुझे प्यार और ख... Read more
clicks 122 View   Vote 0 Like   2:21pm 22 Jan 2019 #
Blogger: rewa tibrewal
चलो बादलों कीजेब सेसूरज चुरा लायेंरख दे फिर उसेउन गरीबों की बस्ती मेंताकि कोई भीठंड से न होउन्ही बादलों के हवालेरात फिर ठण्डीहवाओं कोभर देंबादलों केजैकेट मेंऔर ओस की बूंदों कोचाँद की टोपीमें छुपा देंताकि ठंड में भीसो सके फुटपाथों परसुकून की नींद#रेवा#ग़रीब... Read more
clicks 53 View   Vote 0 Like   3:45pm 20 Jan 2019 #
Blogger: rewa tibrewal
वो लम्हा वो पलकुछ उसमें मैं रह गयी हूँ कुछ वो मुझ में समा गया है उस पल को जितना जीती हूँ वो मुझे उतनी ही ऊर्जा से भर देता है चाहे वो पल क्षणिक ही थापर धीरे धीरे दिल की तहों में घुल  करजीने का बहाना बनगया हैमैं जानती हूँ जीवन में अब कभी वो पल दोबारा नहीं आएगा मैं चाहती भी नह... Read more
clicks 116 View   Vote 0 Like   1:02pm 1 Jan 2019 #
Blogger: rewa tibrewal
दर्द जब करवट बदलता था सीने में और आँखें नम रहती थीं तब तुम आए थेदर्द के समंदर सेखिंच लाये मुझेबैठाया मुझे अपने पासपूछा दिल की बातमैं अपनी दर्द की डायरी केसफे पलटने लगीऔर तुम्हें सुनाती रही कितने दिन तुम बस मूक सुनते रहे जब तूफ़ान आता तो मुझे डूबने से बचाते रहे उदास आं... Read more
clicks 61 View   Vote 0 Like   8:28am 28 Dec 2018 #
Blogger: rewa tibrewal
मैंने अपने दिल में तिनका तिनका जोड़ कर तेरे इश्क़ का एक घोसला बनाया है जिसमें हम रह रहे हैं साथ साथअपनी दुनिया बसा करहर दुख सुख साझा करते हुए समय आने परबच्चे उड़ कर चले जाएंगेअपने अपने घरौंदों की ओर रह जाएंगे बस तुम और मैंएक चाहत है मेरी जब हमारी उड़ने की आये बारीतो हम उड़े ... Read more
clicks 94 View   Vote 0 Like   5:14am 25 Dec 2018 #
Blogger: rewa tibrewal
मेरे लिए वो सिर्फ एक कपड़ा था जिसका अब कोई महत्व नहीं था ,बिल्कुल फीका पड़ चुका था और इसलिए मेरी अलमारी में वो अपनी जगह खो चुका था,लेकिन उसके लिए वो तन ढकने का उसे ठंड से बचाने का सामान था बक्से में पड़े चीथड़ों के बीच एक पूरा बिना फटा कपड़ा#रेवा... Read more
clicks 122 View   Vote 0 Like   11:47am 23 Dec 2018 #
Blogger: rewa tibrewal
जब पहली बार थामा था तुमने मेरा हाथहम दोनों कि रेखाओं की भी हुई थी वो पहली मुलाकात उस दिन से आज तक रोज़ जब जब वो मिलते हैं वो एकाकार होते जाते हैं जब जीवन के डगर में आते है टेढ़े मेढ़े रास्ते और हम दोनों विश्वास से भरपूरथामते हैं एक दूजे का हाथ तब और मजबूत हो जाता है इन रेखाओं क... Read more
clicks 57 View   Vote 0 Like   1:34pm 22 Dec 2018 #
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