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प्यार

अमृता जानती हो तुम्हारे नाम के साथ अमर जुड़ा हुआ है फिर कैसे जा सकती हो कहीं तुम कहीं गयीं नहीं हो यहीं तो हो हम सब के बीच अपनी कहानियों और नज़्मों में हर इश्क करने वाले के दिल में और हर पल धड़कती रहती हो इमरोज़ की धड़कन में मैं जानती हूँ और मानती भी हूँ कीतुम्हें बस प्यार ...
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  October 31, 2018, 1:02 pm
ऐ पुरुष तुम कितनी दोहरी मानसिकता लिए जीते हो तुम जब छोटे बॉक्सर पहन कर घूमते हो तो क्या वो छोटे नहीं होते ? कभी ये सोचा है तुम्हें इतने छोटे कपड़ों में देख कर लड़कियाँ भी कुछ बोल सकती हैं उनका भी तो मन है डोल सकता है न आखिर वो भी तो इन्सान है तुम्हारी तरह जब तुम कोई बड़े गले क...
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  October 29, 2018, 12:18 pm
एक से रिश्ता कोरे कागज़ सा एक से कोरे कागज़ में खींचती लकीरों सा एक के कोरे कागज़ पर वो जो चाहे लिख तो सकती थी पर वो पढ़ कर भी पढ़ा नहीं जाता था यानि सदा कोरा रह जाता दूजे कोरे कागज़ पर लकीरों में रंग भरा था जिसने मुलाकात करवाई जीवन के अनछुए पहलुओं से ज़ज्बातों से ऐसे जज़्बात जिसमे...
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  October 26, 2018, 8:48 pm
तू समझने की चीज़ थोड़े हैतू तो जीने की चीज़ है तू सवाल नहीं बदलती बस रोज़ नए जवाब थमादेती है तू निष्ठुर बिल्कुल भी नहीं हर बार नया दिन देती है जीने के लिए एक दिन गर आंसुओं के सैलाब से तर करती है तो दूजे दिन मुस्कुराहट का लिबास भी पहनाती है कभी विरहन की तरह मिलती है तो कभी प्रेय...
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  October 25, 2018, 6:04 pm
कभी कोई खुश्बू सांसों में समा जाए तो उसे हम नहीं कहते मुझे तुमसे मोहब्बत है कभी ठंडी पुरवाई बदन को छू जाए तो उसे भी हम नहीं कहते मुझे तुमसे मोहब्बत है वो रंग जो मन को भा जाते हैं उनसे भी नहीं कहते हम सुनो मुझे तुमसे मोहब्बत है प्रकृति की मनोहारी छटाजो दिल पर छप जाए उसे भ...
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  October 18, 2018, 9:50 pm
मैं बीज गाथा लिखना चाहती हूँ उस नन्ही सी बीज का जोबढ़ना चाहती है अपनी कोख़ में फल फूल को पालना चाहती है पर बेदर्दी से कुचल दिया जाता है उसे मैं अन्न की गाथा लिखना चाहती हूँजो सींची जाती थी किसान के पसीने से पर अब उस किसान को कुचल दिया जाता है और खूनी अन्न को लाश बनाबेच...
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  October 16, 2018, 8:53 pm
गर तुम चाहोमेरे करीब आना मुझे समझना मुझे पढ़ना तो ज़रिये मिल ही जायेंगे पर तबजब तुम चाहो तुम गर खुद में ही सिमटे रहे तो पढ़ना तो दूर मुझे समझना भी मुमकिन नहीं है कभी देखा है मेरे चेहरे को गौर से मेरी आँखों की भाषा क्या समझ आती है तुम्हें नहीं नअसल मेंजीवन की आपा धापी में हम...
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  October 15, 2018, 5:55 pm
जाने क्यों इतनी बड़ी हूँ मैं पर जब बात तुम्हारी आती है तो बच्चों सी हो जाती हूँ जाने क्यों तुम अगर मेरी बात ठीक से न सुनो तो चिढ़ जाती हूँफ़ोन न लो तो गुस्सा हो जाती हूँऔर अगर दो बार ऐसा करो तब तो भयंकर गुस्सा तुम्हें फोन पर तीन बार ब्लॉक ब्लॉक ब्लॉक लिख कर जाने कैसी संतुष...
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  October 12, 2018, 8:42 pm
ये जो मेरी काया है न यही तो मेरी कहानी है जब इस काया के पन्ने पलटती हूँ और पढ़ती हूँ अपने एहसास अपने ख़यालऔर अपने सवाल सारे समझ नहीं आती हैं कई बातें ये दुख सुख की सौगातें तब मेरे अंतर का दीयाकरता है रोशन मेरी राहेंकभी करती हूं सवाल इससे कैसे दिप दिप करते हो तुम सदा ? तो ज...
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  October 11, 2018, 6:18 pm
एक अधूरापन सा सदा रहता है दरम्यान.....चुभती हैं वो सारी बातें जो मैंने चाहा पर तुम समझ नहीं पाए .....बस जरुरत कीहर चीज़ देते गएये न सोचा कीदिल जरुरत से नहींप्यार से भरता है ....मकां तो दियारहने कोपर दिल खाली कर दिया ......ऐसा नहीं की इन बातों सेमुझे अब फर्क नहीं पड़तापर कब तक ...
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  October 10, 2018, 10:50 am
ये धरती चीख चीख कर कहती है मत काटो गला पेड़ पौधों का उनको बढ़ने दो उनके हरे पत्तों को धूप में चमकने और बरसात में नहाने दोअपने कंक्रीट में थोड़ी सी जगह इन्हें भी दो ताकि ये अपनी जवानी और बुढ़ापा जी सकेये ही तुम्हें साँस लेने लायक रखते हैं तुम्हारा पेट भरते हैं अपने दिमाग क...
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  October 8, 2018, 5:54 pm
हम भी मिले थे अचानक दूसरे प्रेमियों की तरह ही प्यार तो नहीं था तब दोस्ती भी नहीं थीपर कुछ तो था... धीरे-धीरे समय के साथ एहसास हुआ की ये पक्का दोस्ती तो नहींपर जो है उसे अपने पास फटकने देने से भी गुरेज़ है ...लेकिन अगर अपने ही बस में हो हर एहसास तो फिरग़म ही न हो ....तुम भी व...
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  October 5, 2018, 8:19 pm
आज एक अजीबसपना देखा ,देखा की मैं एक बहुत छोटी जगह बंद हो गयी हूँसब मुझे ढूंढरहे हैं जबकिमैं उन्ही के बीच हूँ उन्हें बार बार आवाज़ दे रही हूँदरवाज़ा खट खटारही हूँपर कोई सुन हीनहीं रहा ,इतने में वहां एक अजनबी आया उसने देखा औरदरवाज़ा खोल दियाजानते हो इस सपने का संकेत ,दरवाज़े क...
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  October 3, 2018, 10:01 pm
जहाँ मैं घर घर खेलीगुड्डे गुड़ियों की बनी सहेलीवो घर  मेरा भी था जहाँ मैं रूठी ,इठलाई और ज़िद्द में हर बात मनवाईवो घर मेरा भ...
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  October 1, 2018, 6:05 pm
बार बार लिखना चाहा पर वो शब्द ही नहीं मिलते जो उर्मिला के दर्द उसकी व्यथा उसके विरह को बयां कर सकेकितनी आसानी से नव ब्याहता ने पति के भ्राता प्रेम को मान देकर चौदह वर्ष की दूरीऔर विरह को बर्दाश्त करना स्वीकारा उसपर से ये वादा कि उसके आंखों से आँसू भी न बहे उफ्फ ऐसी व्य...
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  September 28, 2018, 4:03 pm
हर रोज़ टूटती हूँ पर हर रात ख़ुद को फिर जोड़ लेती हूँये टूटने और जोड़ने के गणित से कभी ऊबती या घबराती नहीं हूँ क्योंकि जब जब जोड़ती हूँ ख़ुद कोउन तमाम एहसासों को बातों को जिन्होंने मुझे टूटने पर मजबूर किया उन्हें फिर ख़ुद मेंजुड़ने नहीं देती और इस तरह हर बार मैं और बेहतर बनती...
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  September 27, 2018, 1:31 pm
मैं एक औरत हूँ पर हां तुम्हारी  ज़िम्मेदारी नहीं हूँमैं अपनी ज़िम्मेदारीख़ुद हूँ मैं औरत हूँ प्यार बेशुमार है दिल में पर उसके लिए तुमसे भीख नहीं मांगती वो मेरे अंदर है मेरा इश्क़ है मैं औरत हूँ सहनशक्ति बहुत है मुझमेपर तुम्हारी ग़लत बातों को सिर्फ परिवार चलाने के लिए न...
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  September 24, 2018, 11:39 am
वो जो मेरा कान्हा है न वो बादलों के बीच कहीं जा बैठा है कोई सीढ़ी उस तक अगर जाती तो मैं रोज़ पहुँच जाती लेकिन आज एक पगडंडी नज़र आयी हैजब आँखें बंद कर उसके सामने बैठती हूँ न तो वो आता है मुझसे मिलने मुस्कुराता है अपने अंदाज़ में और फिर झट जा कर छिप जाता है बादलों की ओट में उसकी इस...
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  September 20, 2018, 1:20 pm
भेजा था मैंनेयादों के डाकियेके साथ तुझेअपने एहसासों का ख़तपर वो बैरंग वापस आ गया ,यादों ने बहुत ढूंढा हर गली हर शहर तलाश किया पर वो पता जो उस ख़त पर लिखा था वो नहीं मिला ,लगता है तुमने अपना घर बदल लिया है ..पर मैं तो वहीं हूँ उसी पुराने घर, पुराने पते पर बदलना मेरी फितरत नहीं ...
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  September 17, 2018, 11:40 am
आज पुरानी संदूक खोलीतो हाथ आयातुम्हारा दिया हुआपहला और आखरीउपहार .....वो हरे जिल्द वाली किताबतुम्हें पता था नमुझे किताबें बहुत पसंद हैतभी मुझे हैरान करनेडाक से भेजा था,लिफाफा खोलते वक्तये नहीं लगा थाइसमे मेरी ज़िन्दगीकैद है  ....मैं बार-बार किताबखोलती थी पढ़नेपर हर ...
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  September 16, 2018, 12:19 pm
जानते होजब मैंमायके जाती थीतो लौटते समयअक्सर ट्रेन मेंगुलज़ार का लिखा ये गीतगुनगुनाती थी"दिल ढूँढता है फिर वहीफुर्सत के रात दिन  ......उस समय ऐसालगता थाजैसे समयबहुत धीरेचल रहा है ?ट्रेन की रफ़्तारमद्धिम हो गयी हैतुम्हें देखने की तड़पबढ़ने लगतीमन होता था दौड़ करतुम्हारे प...
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  September 14, 2018, 4:06 pm
मेरे अंतर में एक दीया सदाप्रजवलित रहता है जो मुझे हर ग़लती में आगाह करता है जो मेरी नकारत्मकता कोसकारात्मक ऊर्जा में बदलता है जो मेरे अंदर मानवता की लौ को किसी हाल में बुझने नहीं देता उस दीये की लौ की ऊष्मा से मेरे सारे दर्द वाश्प बन उड़ जाते है ये मुझे मेरी काया को पढ़ने ...
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  September 12, 2018, 1:43 pm
वो जीता है सालों से उसकी तस्वीरों उसके ख्यालों और अपने रंगों के साथ उसके लिए वो अभी भी इस दुनिया का हिस्सा है उसकी अलमारी उसकी किताबें उसकी तस्वीर सब जिंदा है वो दीवारों से भी उसकी बातें कर लिया करता है कमरे में अब भी उसकी खुश्बू मौज़ूद हैजो उसे...
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  September 10, 2018, 12:40 pm
मैं अपनी देह कोबना कर नौकाजीवन रूपी इस समुद्र को पार करती हूँरास्ते मेंआये तूफान को झेलते हुएलहरों के थपेड़ों से जूझतीऔर मजबूत बन जाती हूँ कई बार लपलपाती जीभ लिए मगरमच्छों से भी सामना हो जाता है मेरापर मैं टूटती नहीं हूँहारती नहीं हूँलड़ती हूं लहूलहान करती हूँमारती ह...
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  September 7, 2018, 12:12 pm
गंगा किनारे मैं बैठी थी चुप चाप संवेदना शून्य सीजब ठंडी हवाएं मेरे बालों को हौले से सहला रही थी तोमुझे सिहरन नही हो रही थी,न ही जब एक पत्ता मेरे गालों को चूम कर गिरा तो मेरे गाल सुर्ख़ हुए ....न ही जब खुद के ही कांधे पर खुद सर टिकाए चुप चाप बैठी रही तो कुछ महसूस हुआ ,जब सिमटन...
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  September 3, 2018, 2:51 pm
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