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Blog: प्यार

Blogger: rewa tibrewal
मुझे मलाल है की मैं बुलंदियों को छू ना पाई पर ये तस्सली भी है कि जितना कुछ हासिल किया अपने दमपर हासिल किया कभी किसी का सीढ़ीकी तरह इस्तेमाल नहीं किया मैं जानती हूँ मैं जहाँ हूँ वहां पहुँचनादूसरों की लिए   चुटकियों की बात होगी पर मैं संतुष्ट हूँ ख़ुद से और यही संत... Read more
clicks 6 View   Vote 0 Like   5:44am 28 Aug 2020 #
Blogger: rewa tibrewal
ये लाइट ऐसी वैसी नहीं है बहुत चमकदार है जो भी इसके पास आता हैवो चमक जाता है सूरज की रौशनी की तरह और अपनी एक पहचान बना लेता है इस लाइट के और भी कई गुण हैं ये धीरे धीरेज़मीन से उठा कर आसमान पर बैठा देता है इंसान खुद को भगवान तो नहींपर ऊँचे सिंहासन पर बैठा हुआ महसूस करता है कभी ... Read more
clicks 22 View   Vote 0 Like   5:49am 16 Jun 2020 #
Blogger: rewa tibrewal
बीज की कोख़में रहते हैं तमाम पेड़ पौधेजब बड़े होते है परिवार बढ़ता है उनका फूल,पत्ते, टहनियाँ,फल...... जब फूल,फल इनसे अलग होते हैं ये हमसे कुछ बोलते नहींबल्कि खुशी खुशी हमे दे देते  हैंजब पत्ते पीले होकरझड़ जाते हैंतब भी चुप रहते हैं...इन्हे आस होती है कि नए फूल पत्ते फिर खिल... Read more
clicks 16 View   Vote 0 Like   7:28am 5 Jun 2020 #
Blogger: rewa tibrewal
चुप खड़े रह कर जब सिर्फ हाँ में सर हिलाया तो सबको खूब पसंद आया दौड़ दौड़ कर सारे घर का काम निबटाया तो सबको खूब पसंद आया सज धज कर हर अनुष्ठान में सम्मिलित हुई तो सबको बहुत पसंद आया हर तरफ से अपना मन मार कर जब तक जिंदगी जीती रही औरों के लिए सबको खूब पसंद आया&nbs... Read more
clicks 15 View   Vote 0 Like   9:46am 2 Jun 2020 #
Blogger: rewa tibrewal
ये पौधे हैं न कभी भेद भाव नहीं करते पानी नाराज़गी से डालो या प्यार से ये अपनी पत्तियों के हरेपन और फूलों की खिलखिलाहट से मन खुश कर ही देते हैं ये चाँद है जो हर रात नज़र आता है आसमान पर और कभी कभी दिख जाता है खिड़की से भी ये हमारे मिज़ाज़ को नज़रअंदाज़ कर देता ह... Read more
clicks 23 View   Vote 0 Like   3:11pm 28 May 2020 #
Blogger: rewa tibrewal
तुम्हें पता है आज के जमाने में कैलक्यूलेटर का काम बहुत बढ़ गया है पहले तो ये सिर्फ हिसाब किताब में काम आते थे और समय बचाते थे पर अब तो ये लोगों केरिश्तों को कैलकुलेट करने के काम आते हैं मिलने से पहले ही दिमाग कैलकुलेशन करने लगता हैकौन कितना काम आएगा ... Read more
clicks 23 View   Vote 0 Like   10:03am 19 May 2020 #
Blogger: rewa tibrewal
अनुवाद सिर्फ एक भाषा का दूसरी भाषा में नहीं होता अनुवाद उससे भी कहीं इतर और वृहद होता हैपक्षियों की चहचाहटसंग उनका फुदकनाउनकी बोली का अनुवाद हैकवियों के लिए उनके मौन उनके एहसास का अनुवाद हैउनकी कविताएंहमारे अंतस में घट रही घटनाओं, व्यथा घुटन खुशी प्र... Read more
clicks 36 View   Vote 0 Like   5:03am 17 Apr 2020 #
Blogger: rewa tibrewal
कई बार तुम्हेंसपनों में आवाज़ लगायीधुंध में ढूंढने की कोशिश कीअपनी खुली बाँहों मेंसंभालना चाहा तनहाइयों में भी तुम्हें अपने साथ पाया भाइयों और बहनों केझगड़ों में तुम्हें महसूस कियामाँ की लोरी में सुनादोस्तों के बीच भी अनुभव कियातमाम रिश्तों के मूल में तुम ही... Read more
clicks 19 View   Vote 0 Like   8:32am 9 Apr 2020 #
Blogger: rewa tibrewal
क्या लिखूं अब तो शब्दकोश भी खाली हो गया हैनहीं बचे अब कोई शब्द जो बयां कर सके वो एहसास जो मैं शिद्दत से महसूस करती हूँ और जो तुम्हें छू कर भी नहीं जाती तकलीफ़ मुझे बहुत होती है पर जानते हो तुम्हारा कितना नुकसान हो रहा है तुम ज़िन्दगी जी नहीं रहे हो बस बी... Read more
clicks 21 View   Vote 0 Like   10:30am 31 Mar 2020 #
Blogger: rewa tibrewal
मैं वो औरत हूँ जिसने की है एक मर्द से दोस्ती जिसमें पाया है मैंनेअच्छा पक्का दोस्तजिसे मैं अपने दिल की हर बात साझा कर सकत... Read more
clicks 25 View   Vote 0 Like   4:58am 29 Mar 2020 #
Blogger: rewa tibrewal
समाज के कुछ तबकों कोऔरतों से इतनी नफ़रत है कि वेअनेकों घृणित नामों सेउसे नवाज़ते हैंकभी रखैल, कभी वैश्यातो कभी बदचलनसोचती हूँ मैंअगर मर्द होते ही नहींतो इन नामों काकोई मतलब ही नहीं रह जाताइन नामों सेसिर्फ औरतों को हीइसलिए जोडा़ जाता हैकि औरतेंप्रतिशोध से परे हैंलाज ... Read more
clicks 22 View   Vote 0 Like   12:46pm 20 Mar 2020 #
Blogger: rewa tibrewal
तुम्हें मांगने की कितनी आदत हो गयी है न शीर्ष पर पहुंचने की होड़ में प्रसिद्धि पाने के जोड़ तोड़ में इसका बहुत बड़ा हाथ है पहले तो थोड़े बहुत से काम चल जाता था परअब मांगते मांगते इतनी आदत हो गयी है कि जहां कुछ अच्छा दिखा बस माँग लिया ये जानते हो न... Read more
clicks 23 View   Vote 0 Like   6:10am 17 Feb 2020 #
Blogger: rewa tibrewal
बहुत दिनों बाद आज फिर दिखा मुझे अपनी खिड़की सेवो आधा चाँद जिसे देख मैं भाव विभोर हो गयी मुस्कुराते हुई तुरन्त लिख दी तुम्हारे नाम कविता और उसमे लिखी वो सारी अनकही बातें जो चाह कर भी मैं तुमसे कह नहीं पाती... जानते हो क्यों ??क्योंकि डरती हूँ कहीं वो ... Read more
clicks 21 View   Vote 0 Like   2:53pm 16 Feb 2020 #
Blogger: rewa tibrewal
ऊँचे उड़ान भरते पंछियों को देखा होगा न तुमने इनका मज़हब जानते हो क्या है दाना चुगना अपने और अपने बच्चों के लिए घोंसला बनाना और आसमान में उड़ान भरना ये खुद भी शांति से रहते हैं और अपने साथियों को भी शांति से रहने देते है पर हम ये जानते हैं कि हम में से किसी का मज़हब इतनी शांत... Read more
clicks 43 View   Vote 0 Like   11:44am 8 Feb 2020 #
Blogger: rewa tibrewal
एक ही माँ बाप की पैदाइश एक साथ खेले बड़े हुए रोटियाँ बांटी ख़ुशियाँ और ग़म बांटा लड़ाई झगड़े किये पर हर बार साथ हो लिए कभी किसी को अपने बीच न आने दिया जब बड़े हो जाते हैं तो समझदारी भी बढ़ जाती हैरिश्ता और आपसी समझ और मजबूत हो जानी चाहिए पर जैसे जैस... Read more
clicks 25 View   Vote 0 Like   10:03am 4 Feb 2020 #
Blogger: rewa tibrewal
शायद और कोई फरियाद भी माँगी होती तो आज पूरी हो जाती पता नहीं था सुबह मुझे के आज का दिन इतना ख़ास हो जाएगा आने वाले जन्मदिन के इंतज़ार में मैं वैसे ही खुशी के खजाने से भरी हुई थी चकित करने वाली बात ये थीकी आज मेरे बातों के साथी से मेरी एक छोटी मुलाकात हुई ... Read more
clicks 27 View   Vote 0 Like   10:40am 2 Feb 2020 #
Blogger: rewa tibrewal
सब अपनी अपनीज़िन्दगी जीते हैं अच्छी हो या बुरी मैं भी जी रही थी अपने हालात कोअपनी नियति मानसमझौता करते हुए हर मौसम एक सी रहते रहतेखुद को पत्थर ही समझने लगी थीलेकिन अचानक एक दिन एक टिमटिमाते सितारे ने मेरी उंगलीथाम ली पहले उसने आसमान की सैर करवाई और ... Read more
clicks 21 View   Vote 0 Like   10:01am 28 Jan 2020 #
Blogger: rewa tibrewal
जल रहा है देश मेराजल रहा है घर मेराइंसान को इंसान समझोमज़हबों में न बांटोवो बैठे हैं ऊँची कुर्सियों मेंउनका मज़हब उनका धर्मउनका ईमान बसपैसा और कुर्सीइसे समझोऐ कुर्सी वाले बख्श दोदेश के भविष्य कोबख्श दो हमारे बच्चों कोजिस देश में है बसेराचिड़ियों का उस देश कोगिध्दों क... Read more
clicks 99 View   Vote 0 Like   8:19am 24 Jan 2020 #
Blogger: rewa tibrewal
उस रात मैं किताब पढ़ रही थी एक पन्ने पर आ कर ठहर गयी आगे बढ़ ही नहीं पाई बुक मार्क लगाया और सो गई उस पन्ने का हर शब्द हमारे इश्क़ को बयां कर रहा था जिसे पढ़ कर तुम्हारी याद बेतरह आने लगी बताओ ज़रा तुम्हारी यादों से आगे कैसे बढ़ जाऊँ कैसे यादों से भरे उस... Read more
clicks 25 View   Vote 0 Like   8:03am 21 Jan 2020 #
Blogger: rewa tibrewal
जब मन उदास होता हैऔर तुम्हारा साथ नहींमिलतातो तुम्हारे लिखे शब्दपढ़ लेती हूँहर बार उन्हें पढ़ करचेहरे पर मुस्कुराहटतैर जाती हैसंतोष से भर उठता है मनके दुनिया के एक कोने मेंकोई है जो मुझे मुझसे बेहतरजानता हैजो हर बार कुछ ऐसा महसूसकराता है की जिंदगी सेप्यार हो जाता हैज... Read more
clicks 25 View   Vote 0 Like   10:43am 9 Jan 2020 #
Blogger: rewa tibrewal
गृहस्थी में भी और जिंदगी में भी अक्सर देखा गया है, नियंत्रित होने वाला और नियंत्रण करने वाला इन दोनों का जीने का एक तरीका बन जाता है।पर ये भी तो एक चक्र की तरह है न जब सालों बाद, यही उल्टा होता है तो रिश्ते में कड़वाहट आने लगती है। क्योंकि नियंत्रण करने वाले को आदत जो है अपन... Read more
clicks 45 View   Vote 0 Like   10:45am 3 Jan 2020 #
Blogger: rewa tibrewal
कभी कभी लगता हैजैसे मैं धंसती जारही हूँ अंधेरे कुएँ मेंचाहती हूं बाहर निकलनापर निकल नहीं पातीकभी रोती हूँ अपनेहाल परपर दूसरे ही पलमुस्कुरा देती हूँये सोच कर कीरोने से क्या होगालेकिन फिर भीकुछ बदल नहीं पातीऔर फिरनिराशा घेर लेती हैचारों ओर सेमेरी सोच किसीनिर्णय पर प... Read more
clicks 29 View   Vote 0 Like   4:21pm 10 Dec 2019 #
Blogger: rewa tibrewal
जैसे जैसे बारिश की बूंदेंमिट्टी पर गिरती हैंमिट्टी नमी सोखने लगती हैबारिश जब ज्यादा हो जाये तोमिट्टी की सतह उसे औरसोख नहीं पाती औरपानी इकट्ठा हो जाता है याबहने लगता हैमेरा मन भी उसी मिट्टी कीतरह हैकड़वाहट की बारिशझेल लेता है पर ज्यादा हो तोअक्सर आँखों के रास्तेबहने ... Read more
clicks 72 View   Vote 0 Like   3:24pm 10 Oct 2019 #
Blogger: rewa tibrewal
बचपन में हमने खूब किया है न ये परीक्षा में, होमवर्क में क्लासवर्क में "खाली स्थान भरो"सही हो या गलत हम इस सवाल को पूरा करते ही थेसमय आभाव मेंही इसे छोड़ते थेरिश्ते भी ऐसे ही होते हैं रिश्तों में कभी गर खाली स्थान रह गया तो सही हो या गलतकोई न कोई भर ही देता हैकभी कभी वैसे ही र... Read more
clicks 41 View   Vote 0 Like   4:58am 29 Sep 2019 #
Blogger: rewa tibrewal
मुझे जब तुम्हारी जरूरत थी जब मैं टूटने लगी थी जगह जगह दरारें पड़ने लगी थी तुम देख कर समझ न पाएमैंने तुम्हें आवाज़ लगाई एक बार दो बार नहीं कई कई बार पर हर बार अपनी उलझनों में उलझे तुम्हें मैं, मेरे एहसास जरूरी न लगेपर मैं टूटी नहीं बिखरी नहीं ख़ुद को समेटा अपनी दरारों कोभर तो ... Read more
clicks 97 View   Vote 0 Like   12:20pm 28 Aug 2019 #
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