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Kehna Padta Hai/कहना पड़ता है

यदि दो बच्चे आपस में झगड़ रहे हों और उनमें से एक अपने को कमज़ोर पा कर रो पड़े तो हम उनमें फिर से बराबरी की भावना जगाने के लिए एक का तात्कालिक पक्ष ले सकते हैं। किन्तु यदि ऐसा व्यवहार हमने सदा के लिए कर दिया तो भविष्य में उन दोनों को दुश्मन और हमें बेवकूफ़ बनने से कोई नहीं रोक ...
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  April 10, 2017, 8:35 am
वे कहते  हैं कि संयुक्त परिवार भारतीय समाज की विशेषता नहीं बल्कि मजबूरी है। यहाँ पर परिवार का कोई भी एक सदस्य आत्म निर्भरता के लिए शिक्षित-प्रशिक्षित नहीं है। कोई धनार्जन के लिए अशिक्षित है, कोई शारीरिक श्रम के लिए अक्षम या अनभ्यस्त है तो कोई घरेलू कामकाज में शून्य ह...
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  April 6, 2017, 10:11 pm
देश जल्दी ही एक नए राष्ट्रपति का नेतृत्व पाने को है। कहना पड़ता है कि राजनैतिक दलों का आपसी वैमनस्य और कटुता असहनीय होने की हद तक गिर चुके हैं। नैतिकता की कौन कहे,वैचारिकता तक संदिग्ध है।  ऐसे में नए राष्ट्रपति की मर्यादा और गरिमा तभी बनी रह सकेगी जबकि वह-प्रत्यक्ष र...
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  March 5, 2017, 9:05 pm
यदि लोकप्रियता, परिपक्वता,गरिमा,पहल और प्रभाव को सम्मिलित रूप से आधार बनाया जाए तो भारत के राष्ट्रपतियों के कार्यकाल के आधार पर उनकी स्थिति [रैंकिंग] इस प्रकार निकलती है-१. डॉ ए पी जे अब्दुल कलाम२. डॉ सर्वपल्ली राधाकृष्णन३. डॉ राजेंद्र प्रसाद४. डॉ ज़ाकिर हुसैन५. श्री प्र...
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  March 3, 2017, 10:30 pm
देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद पर पहुंचे इन शिखर व्यक्तित्वों ने तुलनात्मक रूप से जनमानस पर कैसा प्रभाव छोड़ा, आइये जानते हैं-1. डॉ ए पी जे अब्दुल कलाम2. डॉ राधाकृष्णन3. डॉ राजेंद्र प्रसाद4. डॉ ज़ाक़िर हुसैन5. श्री आर वेंकटरमण और श्री प्रणव मुखर्जी संयुक्त रूप से6. श्री वी वी गिर...
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  March 3, 2017, 10:08 pm
देश के राष्ट्रपतियों द्वारा की गयी पहल की प्रवृत्ति का मूल्याङ्कन इस तरह किया गया-1. डॉ ए पी जे अब्दुल कलाम2. डॉ राजेंद्र प्रसाद3. डॉ राधाकृष्णन और श्री वी वी गिरी संयुक्त रूप से4. डॉ ज़ाकिर हुसैन5. श्री प्रणव मुखर्जी6. श्री आर वेंकटरमण,डॉ शंकर दयाल शर्मा और श्रीमती प्रतिभा प...
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  March 3, 2017, 9:54 pm
क्या आप जानना चाहेंगे व्यक्तित्व के मानक पर पूर्ववर्ती राष्ट्रपतियों को कैसे आँका गया?-1. डॉ राधाकृष्णन और डॉ ज़ाकिर हुसैन संयुक्त रूप से2. डॉ राजेंद्र प्रसाद और डॉ ए पी जे अब्दुल कलाम को संयुक्त रूप से3. श्री प्रणब मुखर्जी4. श्री आर वेंकटरमण, डॉ शंकर दयाल शर्मा और श्रीमती ...
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  March 3, 2017, 9:39 pm
देखिये इस पद पर रहे व्यक्तियों की बौद्धिक "परिपक्वता"पर निष्पक्ष लोग क्या कहते हैं?-1. डॉ राधाकृष्णन और डॉ ए पी जे अब्दुल कलाम संयुक्त रूप से2. डॉ राजेंद्र प्रसाद और डॉ ज़ाकिर हुसैन संयुक्त रूप से3. श्री आर वेंकटरमण, डॉ शंकर दयाल शर्मा और श्री प्रणव मुखर्जी सम्मिलित रूप से4. ...
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  March 3, 2017, 2:39 pm
कुछ महीने बाद भारत को अपना नया राष्ट्रपति चुनना है। यदि हमें अपने शब्द-कोशों से "निष्पक्षता"जैसे शब्दों को बेदखल होने से बचाना है, तो कम से कम हमें राष्ट्र के इस सर्वोच्च नागरिक के सन्दर्भ में सोचते हुए पूर्णतः निष्पक्ष होना होगा।आइये देखें एक सर्वेक्षण में हमारे अब त...
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  March 2, 2017, 9:42 pm
संभवतः किसी भी क्षेत्र में नोबल पुरस्कार को सबसे अधिक प्रतिष्ठित और सम्मानजनक पुरस्कार माना जाता है। कई देश अपने इतिहास तक को जब-तब ये कह-कह कर कुरेदते रहते हैं कि अमुक को ये पुरस्कार क्यों नहीं मिला, अथवा फलाने को ये पुरस्कार कैसे मिल गया ?लेकिन इस वर्ष साहित्य के नो...
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  October 30, 2016, 2:26 pm
कुछ झिझकती सकुचाती धरा कोठरी में दबे पाँव घूम कर यहाँ-वहां रखे सामान को देखने लगी।उसकी नज़र सोते हुए नीलाम्बर पर ठहर नहीं पा रही थी। उसके चौड़े कन्धों से निकली पुष्ट बाँहों ने न जाने कैसे-कैसे अहसास समेट रखे थे।धरा ने आले पर रखी हुई छोटी सी वो तस्वीर हाथों में उठा ली...
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  May 10, 2016, 2:46 pm
माँ के चले जाने के बाद धरा का ध्यान इस बात पर गया कि आज पहली बार शायद माँ उसे अकेला छोड़ कर गयी है। ताज्जुब तो इस बात का था कि धरा ने खुद माँ से उसके साथ चलने की पेशकश की थी। पर माँ उसे घर में अकेले छोड़ कर चली गयी। इससे पहले तो कई बार ऐसा होता रहा था कि धरा कहती, मेरा जाने का मन ...
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  May 10, 2016, 8:07 am
भक्तन ने धरा के दोनों हाथ अपने हाथों में ले लिए और कंगन उसकी कलाई में फ़िरा कर देखने लगी। धरा ने धीरे से कंगन उतार कर माँ की गोद में रख दिए। फिर उसी तरह बैठी-बैठी आहिस्ता से बोली--"ये तुम्हें आज इनकी याद कैसे आ गयी?"-"इनकी याद नहीं आ गयी, मैं तो ऐसे ही देख रही थी,घर में इतने च...
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  May 9, 2016, 12:20 pm
 कभी-कभी बच्चे जब अपने माँ-बाप से दूर होते हैं तो दूसरे के माँ-बाप में अपने माँ-बाप को देख लेते हैं। शायद नीलाम्बर की याद में भी धरा की माँ के लिए ये सब करते हुए अपनी माँ रही होगी। नीलाम्बर ने अगर थोड़ा बहुत किया तो क्या अहसान किया किसी पर?भक्तन-माँ की देह पर ताप चढ़ा,वैद्यज...
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  May 9, 2016, 9:29 am
धरा को लगा जैसे उस से अनजाने में ही कोई भूल हो गयी।  यद्यपि उसे इस बात का अभी तक कोई सुराग नहीं मिला था कि आखिर इसमें गलत क्या है? बापू का नाम कार्ड में तो होगा ही। किसने कटवाया? कैसे कटवाया? कब कटवाया? क्यों कटवाया?नहीं कटवाया तो होगा ही। घर के राशन कार्ड में जिसका नाम होत...
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  May 8, 2016, 5:24 pm
नीलाम्बर के गाँव के उसके घर से उस चिट्ठी का जवाब आ गया था जो उसने राशन कार्ड के बाबत अपने पिता को लिखी थी। पिता ने लिखा था कि  यहाँ तो सभी का कार्ड है।  लिखावट से ज़ाहिर था कि पिता ने चिट्ठी उसकी छोटी बहिन से लिखवाई थी। लिखा था कि  यहाँ तो ग्यारह लोगों का कार्ड है।...
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  May 7, 2016, 12:23 pm
धरा आकर यहाँ लेट ज़रूर गयी पर उसे नींद तो क्या, चैन तक न आया। उसे अच्छी तरह मालूम था कि रसोई में उसकी खटर-पटर बंद हो जाने से माँ को ज़रूर मायूसी हुई होगी। माँ का ये चाय का समय था और धरा से तमाम नाराज़गी के बावजूद माँ बैठी यही सोच रही थी कि कपड़े बदल कर धरा चाय का पानी चढ़ाएगी।आँख...
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  May 6, 2016, 9:25 pm
माँ भी अजीब है। हर समय यही सोचती रहती है कि धरा कोई बच्ची है। अरे, अकेली तो गयी नहीं थी, साथ में छः हाथ का ये लड़का था।  और कोई बिना पूछे नहीं गयी थी।  यदि ऐसा ही था तो माँ पहले ही मना कर सकती थी। न जाती वह। भला उसे कौनसा घर काटने को दौड़ रहा था कि भरी दोपहरी में भटकने को घर स...
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  May 6, 2016, 9:43 am
भक्तन का ये नया युवा किराएदार धीरे-धीरे भक्तन के मन में भी जगह बनाने लगा। अब उसके व्यवहार से भक्तन के सोच की डाल पर बैठी वो चिड़िया उड़ कर कहीं ओझल हो गयी जो अकेले में सोते-जागते भी भक्तन की शंका-कुशंका को ठकठकाती रहती थी।और धरा ? उसके तो कहने ही क्या ?एक दिन जब नीलाम्बर न...
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  May 5, 2016, 9:15 pm
धरा फिर उलझ पड़ी --"कमाल करती हो माँ तुम भी ! अरे वो क्या कोई नवाब या राजा-महाराजा है जो सारी -सारी रात कहीं ऐश करने जाता होगा।  काम-धंधे वाला आदमी है, जब अपना घर-बार छोड़ कर यहाँ परदेस में अकेला पड़ा है,तो चार पैसे कमाने की फ़िक्र न करेगा? जहाँ काम मिलेगा, जब मिलेगा, जायेगा ही।...
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  May 3, 2016, 9:31 pm
सच, ऐसे ही तो होते हैं शहर।  जब तक आप ज़माने के साथ दौड़ो,सब कुछ ठीक है।  जहाँ कोई ज़रा सी ऊंच - नीच हुई कि आप समाज की कतार से बाहर।सीमेंट, पत्थर,चूने और लोहे के अल्लम-गल्लम से घिरे कितने ही मकान तो ऐसे होते हैं कि जिन्हें घर बनाने या बनाये रखने की कोशिशों में समूचे जीवन ख...
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  May 3, 2016, 6:12 pm
नीलाम्बर का गाँव यहाँ से बहुत दूर था, और ये उन्नीस वर्षीय युवक कुछ समय पहले अपने घर-गाँव के कष्टों का कोई आर्थिक तोड़ ढूँढ़ने के लिए किसी कागज़ की कश्ती में सवार भुनगे की भांति यहाँ चला आया था।  उसके पिता किसी बेहद मामूली से काम से रिटायर होकर अब घर के एक उम्रदराज़, पर अनुपय...
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  May 3, 2016, 2:16 pm
घर मानो सीधा सा हो गया। वो कहते हैं न, कि यदि किसी घर में औरत न हो, तो घर घर न होकर भूतों का सा डेरा लगता है। ठीक वैसे ही,अगर किसी घर में कोई मर्द-बच्चा न हो, तब भी घर घर न होकर बिना बांस का सा तम्बू लगता है, जिसे हवाएं कभी भी झिंझोड़ दें, कहीं भी उड़ा ले जाएँ। तिरछा सा ही रहता है ...
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  May 3, 2016, 9:18 am
बड़ी मुश्किल से धरा भक्तन-माँ को इस बात के लिए राज़ी कर पाई कि नीचे वाली कोठरी को किराए से दे दिया जाये। तरह-तरह के तर्क देकर समझाया तब कहीं जाकर माँ की समझ में ये बात बैठी कि बढ़ती मँहगाई के साथ घर के खर्च बढ़ते जाते हैं और मंदिर की आमदनी से इतना कुछ नहीं आता कि दोनों माँ-बेट...
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  April 18, 2016, 9:39 pm
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