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Blog: Kehna Padta Hai/कहना पड़ता है

Blogger: prabodh kumar govil
कुछ लोग समझते हैं कि केवल सुन्दर,मनमोहक व सकारात्मक ही लिखा जाना चाहिए।  नहीं-नहीं,साहित्य को इतना सजावटी बनाने से कोई प्रयोजन सिद्ध नहीं होगा। साहित्य जीवन का दस्तावेज़ है। यदि आप अपने घर से बाहर निकल कर कुछ देखने का जोख़िम नहीं लेना चाहते,तो अपना घर ही देखिये-वहां भी ... Read more
clicks 31 View   Vote 0 Like   8:16am 12 Aug 2018 #
Blogger: prabodh kumar govil
यदि दो बच्चे आपस में झगड़ रहे हों और उनमें से एक अपने को कमज़ोर पा कर रो पड़े तो हम उनमें फिर से बराबरी की भावना जगाने के लिए एक का तात्कालिक पक्ष ले सकते हैं। किन्तु यदि ऐसा व्यवहार हमने सदा के लिए कर दिया तो भविष्य में उन दोनों को दुश्मन और हमें बेवकूफ़ बनने से कोई नहीं रोक ... Read more
clicks 50 View   Vote 0 Like   3:05am 10 Apr 2017 #
Blogger: prabodh kumar govil
वे कहते  हैं कि संयुक्त परिवार भारतीय समाज की विशेषता नहीं बल्कि मजबूरी है। यहाँ पर परिवार का कोई भी एक सदस्य आत्म निर्भरता के लिए शिक्षित-प्रशिक्षित नहीं है। कोई धनार्जन के लिए अशिक्षित है, कोई शारीरिक श्रम के लिए अक्षम या अनभ्यस्त है तो कोई घरेलू कामकाज में शून्य ह... Read more
clicks 66 View   Vote 0 Like   4:41pm 6 Apr 2017 #
Blogger: prabodh kumar govil
देश जल्दी ही एक नए राष्ट्रपति का नेतृत्व पाने को है। कहना पड़ता है कि राजनैतिक दलों का आपसी वैमनस्य और कटुता असहनीय होने की हद तक गिर चुके हैं। नैतिकता की कौन कहे,वैचारिकता तक संदिग्ध है।  ऐसे में नए राष्ट्रपति की मर्यादा और गरिमा तभी बनी रह सकेगी जबकि वह-प्रत्यक्ष र... Read more
clicks 60 View   Vote 0 Like   3:35pm 5 Mar 2017 #
Blogger: prabodh kumar govil
यदि लोकप्रियता, परिपक्वता,गरिमा,पहल और प्रभाव को सम्मिलित रूप से आधार बनाया जाए तो भारत के राष्ट्रपतियों के कार्यकाल के आधार पर उनकी स्थिति [रैंकिंग] इस प्रकार निकलती है-१. डॉ ए पी जे अब्दुल कलाम२. डॉ सर्वपल्ली राधाकृष्णन३. डॉ राजेंद्र प्रसाद४. डॉ ज़ाकिर हुसैन५. श्री प्र... Read more
clicks 57 View   Vote 0 Like   5:00pm 3 Mar 2017 #
Blogger: prabodh kumar govil
देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद पर पहुंचे इन शिखर व्यक्तित्वों ने तुलनात्मक रूप से जनमानस पर कैसा प्रभाव छोड़ा, आइये जानते हैं-1. डॉ ए पी जे अब्दुल कलाम2. डॉ राधाकृष्णन3. डॉ राजेंद्र प्रसाद4. डॉ ज़ाक़िर हुसैन5. श्री आर वेंकटरमण और श्री प्रणव मुखर्जी संयुक्त रूप से6. श्री वी वी गिर... Read more
clicks 61 View   Vote 0 Like   4:38pm 3 Mar 2017 #
Blogger: prabodh kumar govil
देश के राष्ट्रपतियों द्वारा की गयी पहल की प्रवृत्ति का मूल्याङ्कन इस तरह किया गया-1. डॉ ए पी जे अब्दुल कलाम2. डॉ राजेंद्र प्रसाद3. डॉ राधाकृष्णन और श्री वी वी गिरी संयुक्त रूप से4. डॉ ज़ाकिर हुसैन5. श्री प्रणव मुखर्जी6. श्री आर वेंकटरमण,डॉ शंकर दयाल शर्मा और श्रीमती प्रतिभा प... Read more
clicks 66 View   Vote 0 Like   4:24pm 3 Mar 2017 #
Blogger: prabodh kumar govil
क्या आप जानना चाहेंगे व्यक्तित्व के मानक पर पूर्ववर्ती राष्ट्रपतियों को कैसे आँका गया?-1. डॉ राधाकृष्णन और डॉ ज़ाकिर हुसैन संयुक्त रूप से2. डॉ राजेंद्र प्रसाद और डॉ ए पी जे अब्दुल कलाम को संयुक्त रूप से3. श्री प्रणब मुखर्जी4. श्री आर वेंकटरमण, डॉ शंकर दयाल शर्मा और श्रीमती ... Read more
clicks 65 View   Vote 0 Like   4:09pm 3 Mar 2017 #
Blogger: prabodh kumar govil
देखिये इस पद पर रहे व्यक्तियों की बौद्धिक "परिपक्वता"पर निष्पक्ष लोग क्या कहते हैं?-1. डॉ राधाकृष्णन और डॉ ए पी जे अब्दुल कलाम संयुक्त रूप से2. डॉ राजेंद्र प्रसाद और डॉ ज़ाकिर हुसैन संयुक्त रूप से3. श्री आर वेंकटरमण, डॉ शंकर दयाल शर्मा और श्री प्रणव मुखर्जी सम्मिलित रूप से4. ... Read more
clicks 63 View   Vote 0 Like   9:09am 3 Mar 2017 #
Blogger: prabodh kumar govil
कुछ महीने बाद भारत को अपना नया राष्ट्रपति चुनना है। यदि हमें अपने शब्द-कोशों से "निष्पक्षता"जैसे शब्दों को बेदखल होने से बचाना है, तो कम से कम हमें राष्ट्र के इस सर्वोच्च नागरिक के सन्दर्भ में सोचते हुए पूर्णतः निष्पक्ष होना होगा।आइये देखें एक सर्वेक्षण में हमारे अब त... Read more
clicks 66 View   Vote 0 Like   4:12pm 2 Mar 2017 #
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संभवतः किसी भी क्षेत्र में नोबल पुरस्कार को सबसे अधिक प्रतिष्ठित और सम्मानजनक पुरस्कार माना जाता है। कई देश अपने इतिहास तक को जब-तब ये कह-कह कर कुरेदते रहते हैं कि अमुक को ये पुरस्कार क्यों नहीं मिला, अथवा फलाने को ये पुरस्कार कैसे मिल गया ?लेकिन इस वर्ष साहित्य के नो... Read more
clicks 74 View   Vote 0 Like   8:56am 30 Oct 2016 #
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कुछ झिझकती सकुचाती धरा कोठरी में दबे पाँव घूम कर यहाँ-वहां रखे सामान को देखने लगी।उसकी नज़र सोते हुए नीलाम्बर पर ठहर नहीं पा रही थी। उसके चौड़े कन्धों से निकली पुष्ट बाँहों ने न जाने कैसे-कैसे अहसास समेट रखे थे।धरा ने आले पर रखी हुई छोटी सी वो तस्वीर हाथों में उठा ली... Read more
clicks 74 View   Vote 0 Like   9:16am 10 May 2016 #
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माँ के चले जाने के बाद धरा का ध्यान इस बात पर गया कि आज पहली बार शायद माँ उसे अकेला छोड़ कर गयी है। ताज्जुब तो इस बात का था कि धरा ने खुद माँ से उसके साथ चलने की पेशकश की थी। पर माँ उसे घर में अकेले छोड़ कर चली गयी। इससे पहले तो कई बार ऐसा होता रहा था कि धरा कहती, मेरा जाने का मन ... Read more
clicks 70 View   Vote 0 Like   2:37am 10 May 2016 #
Blogger: prabodh kumar govil
भक्तन ने धरा के दोनों हाथ अपने हाथों में ले लिए और कंगन उसकी कलाई में फ़िरा कर देखने लगी। धरा ने धीरे से कंगन उतार कर माँ की गोद में रख दिए। फिर उसी तरह बैठी-बैठी आहिस्ता से बोली--"ये तुम्हें आज इनकी याद कैसे आ गयी?"-"इनकी याद नहीं आ गयी, मैं तो ऐसे ही देख रही थी,घर में इतने च... Read more
clicks 89 View   Vote 0 Like   6:50am 9 May 2016 #
Blogger: prabodh kumar govil
 कभी-कभी बच्चे जब अपने माँ-बाप से दूर होते हैं तो दूसरे के माँ-बाप में अपने माँ-बाप को देख लेते हैं। शायद नीलाम्बर की याद में भी धरा की माँ के लिए ये सब करते हुए अपनी माँ रही होगी। नीलाम्बर ने अगर थोड़ा बहुत किया तो क्या अहसान किया किसी पर?भक्तन-माँ की देह पर ताप चढ़ा,वैद्यज... Read more
clicks 72 View   Vote 0 Like   3:59am 9 May 2016 #
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धरा को लगा जैसे उस से अनजाने में ही कोई भूल हो गयी।  यद्यपि उसे इस बात का अभी तक कोई सुराग नहीं मिला था कि आखिर इसमें गलत क्या है? बापू का नाम कार्ड में तो होगा ही। किसने कटवाया? कैसे कटवाया? कब कटवाया? क्यों कटवाया?नहीं कटवाया तो होगा ही। घर के राशन कार्ड में जिसका नाम होत... Read more
clicks 87 View   Vote 0 Like   11:54am 8 May 2016 #
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नीलाम्बर के गाँव के उसके घर से उस चिट्ठी का जवाब आ गया था जो उसने राशन कार्ड के बाबत अपने पिता को लिखी थी। पिता ने लिखा था कि  यहाँ तो सभी का कार्ड है।  लिखावट से ज़ाहिर था कि पिता ने चिट्ठी उसकी छोटी बहिन से लिखवाई थी। लिखा था कि  यहाँ तो ग्यारह लोगों का कार्ड है।... Read more
clicks 91 View   Vote 0 Like   6:53am 7 May 2016 #
Blogger: prabodh kumar govil
धरा आकर यहाँ लेट ज़रूर गयी पर उसे नींद तो क्या, चैन तक न आया। उसे अच्छी तरह मालूम था कि रसोई में उसकी खटर-पटर बंद हो जाने से माँ को ज़रूर मायूसी हुई होगी। माँ का ये चाय का समय था और धरा से तमाम नाराज़गी के बावजूद माँ बैठी यही सोच रही थी कि कपड़े बदल कर धरा चाय का पानी चढ़ाएगी।आँख... Read more
clicks 86 View   Vote 0 Like   3:55pm 6 May 2016 #
Blogger: prabodh kumar govil
माँ भी अजीब है। हर समय यही सोचती रहती है कि धरा कोई बच्ची है। अरे, अकेली तो गयी नहीं थी, साथ में छः हाथ का ये लड़का था।  और कोई बिना पूछे नहीं गयी थी।  यदि ऐसा ही था तो माँ पहले ही मना कर सकती थी। न जाती वह। भला उसे कौनसा घर काटने को दौड़ रहा था कि भरी दोपहरी में भटकने को घर स... Read more
clicks 77 View   Vote 0 Like   4:13am 6 May 2016 #
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भक्तन का ये नया युवा किराएदार धीरे-धीरे भक्तन के मन में भी जगह बनाने लगा। अब उसके व्यवहार से भक्तन के सोच की डाल पर बैठी वो चिड़िया उड़ कर कहीं ओझल हो गयी जो अकेले में सोते-जागते भी भक्तन की शंका-कुशंका को ठकठकाती रहती थी।और धरा ? उसके तो कहने ही क्या ?एक दिन जब नीलाम्बर न... Read more
clicks 59 View   Vote 0 Like   3:45pm 5 May 2016 #
Blogger: prabodh kumar govil
धरा फिर उलझ पड़ी --"कमाल करती हो माँ तुम भी ! अरे वो क्या कोई नवाब या राजा-महाराजा है जो सारी -सारी रात कहीं ऐश करने जाता होगा।  काम-धंधे वाला आदमी है, जब अपना घर-बार छोड़ कर यहाँ परदेस में अकेला पड़ा है,तो चार पैसे कमाने की फ़िक्र न करेगा? जहाँ काम मिलेगा, जब मिलेगा, जायेगा ही।... Read more
clicks 90 View   Vote 0 Like   4:01pm 3 May 2016 #
Blogger: prabodh kumar govil
सच, ऐसे ही तो होते हैं शहर।  जब तक आप ज़माने के साथ दौड़ो,सब कुछ ठीक है।  जहाँ कोई ज़रा सी ऊंच - नीच हुई कि आप समाज की कतार से बाहर।सीमेंट, पत्थर,चूने और लोहे के अल्लम-गल्लम से घिरे कितने ही मकान तो ऐसे होते हैं कि जिन्हें घर बनाने या बनाये रखने की कोशिशों में समूचे जीवन ख... Read more
clicks 82 View   Vote 0 Like   12:42pm 3 May 2016 #
Blogger: prabodh kumar govil
नीलाम्बर का गाँव यहाँ से बहुत दूर था, और ये उन्नीस वर्षीय युवक कुछ समय पहले अपने घर-गाँव के कष्टों का कोई आर्थिक तोड़ ढूँढ़ने के लिए किसी कागज़ की कश्ती में सवार भुनगे की भांति यहाँ चला आया था।  उसके पिता किसी बेहद मामूली से काम से रिटायर होकर अब घर के एक उम्रदराज़, पर अनुपय... Read more
clicks 80 View   Vote 0 Like   8:46am 3 May 2016 #
Blogger: prabodh kumar govil
घर मानो सीधा सा हो गया। वो कहते हैं न, कि यदि किसी घर में औरत न हो, तो घर घर न होकर भूतों का सा डेरा लगता है। ठीक वैसे ही,अगर किसी घर में कोई मर्द-बच्चा न हो, तब भी घर घर न होकर बिना बांस का सा तम्बू लगता है, जिसे हवाएं कभी भी झिंझोड़ दें, कहीं भी उड़ा ले जाएँ। तिरछा सा ही रहता है ... Read more
clicks 73 View   Vote 0 Like   3:48am 3 May 2016 #
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