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Blog: आँसू

Blogger: डॉ आलोक त्रिपाठी
(C) डॉ अलोक त्रिपाठी २०१९ ऐजिंदगीएकबातबताओजबकभीमुझसेमिलोगेतोमुझसेशर्माओगेतोनहीं ?मानामेराकोईकोईवजूदनहींतेरेआगेलेकिनयेअंतर्रामव्सबरीसेजयेदेतोनहीं ?ऐजिंदगीएकबातबताओमेरेहिसाबकिताबकालेखादेदोमेरेसरेगुनाहोंकानामदेदोनशर्माओं, नहिचकिचाओतुमतोसबसेअपने... Read more
clicks 26 View   Vote 0 Like   2:28pm 24 Sep 2019 #
Blogger: डॉ आलोक त्रिपाठी
https://newheavenonearth.files.wordpress.com/2011/11/hand-in-hand-with-the-sun.jpgतुम मिले थे एक मिसरा बन कर शब् हुई तो ग़ज़ल मुकम्मल हुई सुबह चुनता रहा ख्याब रात भर के जाने कब मोहब्बत मुसलसल हुई तुम बिन भी तो जिए जा रहे थे हम जब तुम आये तो जिंदगी असल हुई उम्र दीवार पर टंगे तारीखों सी फटती तुम आये बस ख्वाबो की फ... Read more
clicks 19 View   Vote 0 Like   3:34pm 17 Sep 2019 #
Blogger: डॉ आलोक त्रिपाठी
ऐप्रेम, तुमबसअव्यक्तरहो,अन्नन्तरहो, अशेषरहो।बिनआधारकेप्रवाहबनो,बिनध्यानकेअराध्यरहो।चेतनहोकरभीअवचेतनबनसृष्टिमेंतुमशाश्वतप्रवाहरहोआसक्ति, अनासक्तिसेसूदूर,अविरलअनन्य, परनिर्भावरहो।सासोंसदृशजीवनबनजियोतुमहोनेकीबसअनुभूतिरहोपरीक्षावपरिणामकोसोंदूरव... Read more
clicks 82 View   Vote 0 Like   10:51am 15 Sep 2019 #
Blogger: डॉ आलोक त्रिपाठी
आज फिर से घटायें छाई हैफिर सावन में भादो बरसेगासंध्यावेला में पूर्वाह्न के स्वपनआज फिर अपना ऋण मांगेंगेमाना प्रेम अमूल्य है, फिर भीआशक्ति का मूल्य तो होता हैविधाता का प्रेम अकारण सहीजीवन प्रवाह तो धरातल मांगेगाप्रेम, आशक्ति में भेद आवश्यकलौकिकता को लौकिक रहने दोक... Read more
clicks 26 View   Vote 0 Like   2:48pm 14 Sep 2019 #
Blogger: डॉ आलोक त्रिपाठी
http://aprendizdeafrodite.blogspot.com/2015/01/feitico-para-reunir-casal-separado.htmlवो कहता है कि चले जाओ मेरी जिंदगी सेमै जी लूंगा तुम्हारे बिन भी, यकीं भी कर लियाजिसमे एक पल के लिए भी हम अलग न थेभुला दोगे वो लम्हे भी हमेशा के लिए ?साथ गुजारी हमने एक एक पल जो सदियांसपने जो कभी जिए हम साथ साथजिसकी कड़ियाँ जोड़ी थी हमने मिलकर... Read more
clicks 86 View   Vote 0 Like   11:02am 14 Sep 2019 #
Blogger: डॉ आलोक त्रिपाठी
जब कभी मै उसकी तलाश था ही नही फिर खुद को तराशने से क्या फायदा?वो हर पल किसी और को ढूढ़ता रहा मै बस खुद को ही और सवारता रहा हर हमसफर मंजिल नही होता इश्क में जान ही नही पाया, बस मासूम बना रहा जब ये सच समझा तब बहुत देर हो गयीउसकी तलाश में मै एक हमराह बना रहा अप्रैल १२, २... Read more
clicks 52 View   Vote 0 Like   7:19pm 11 May 2019 #
Blogger: डॉ आलोक त्रिपाठी
ये बताओ न प्रिये, क्या मांगूगा उस वक्तजब ज़िन्दगी से मै आखिरी बार मिलूगां?तुम्हें चाहने की ख्वाईस, या तुम्हारी चाहत?चाहत को मै अपने शब्दों में कैसे समेटूगा?या तस्वीर सी उभरेगी चाहत के फलक पर?पर उस तस्वीर में सारे रंग कैसे भर पाऊगा?उसी से हर सांस में चाहने की चाहत मांगी ह... Read more
clicks 79 View   Vote 0 Like   7:08pm 9 May 2019 #
Blogger: डॉ आलोक त्रिपाठी
आँसू: दिल को कईयों में तक्सीम करने का मौसम आया: चाहत को जब से किश्तों में निभाने का चलन आया  यकीनन मोहब्बत से तौबा करने का मौसम आया  जमाना घुटन महसूस करने लगा किसी एक के साथ में  ...... Read more
clicks 72 View   Vote 0 Like   10:33am 28 Apr 2019 #
Blogger: डॉ आलोक त्रिपाठी
चाहत को जब से किश्तों में निभाने का चलन आया यकीनन मोहब्बत से तौबा करने का मौसम आया जमाना घुटन महसूस करने लगा किसी एक के साथ में गजब की दुनिया ये, बरसात में प्यासे मरने का मौसम आया हम तो किसी एक की चाहत में फना होना ही समझ आया पर उसने चाहत को कई चेहरे में बाटने का म... Read more
clicks 60 View   Vote 0 Like   10:22am 28 Apr 2019 #
Blogger: डॉ आलोक त्रिपाठी
कुछ लोगों सवरना किसी एक के लिए होता है जिन्दगी का सबब किसी का मुस्कुराना होता है लोग कहते है इसे ही इबादत, इसे ही तिजारत मेरा सर भी ऐसे ही इबादतों में झुका होता है उसके ख्यालों या उसके ‘ख्वाबों’ में गुम होता है वक्त का हर मंझर में एक ही अक्स बना होता है वो जो लग... Read more
clicks 119 View   Vote 0 Like   7:36pm 26 Sep 2018 #
Blogger: डॉ आलोक त्रिपाठी
दौलत मांगू, शोहरत मांगू, या सारी कायनात मांग लूंज्यादे क्या मांगू, सोचता हूँ कि उसकी रज़ा मांग लूंमेरे ख्वाबों की ताबीर बन कर आये मेरी जिन्दगी मेंइसीलिए सोचता हूँ बस असर अपनी दुआ में मांग लूंसजाऊ, सवारू, अपना लूं, छुपा लूं अपने ही आगोश मेंअपनी सांसों भर तेरी तकदीर में अप... Read more
clicks 206 View   Vote 0 Like   1:28pm 20 Sep 2018 #
Blogger: डॉ आलोक त्रिपाठी
मेरे आंसूँ को अपने आँखों का सैलाब बना लेते होऐ आजनवी मेरी खुशियों मे एक ज़िन्दगी जी लेते होतुमसे कोई रिश्ता जोडने की गुस्ताखी न्ही कर सकतागैर बन कर ही तुम मेरी सारी दुनिया सजा लेते होएक मासूम ने एक मजलूम को खुदा बना पूजा हैअपनी हर ख़ुशी उसने किसी पे यूँ ही कुर्बां कर दीखु... Read more
clicks 194 View   Vote 0 Like   9:27am 14 May 2018 #
Blogger: डॉ आलोक त्रिपाठी
जाने के बाद कुछ आँखो में नमी छोड जाऊँगामैं अपने किरदार में कुछ एहसास जोड जाऊँगाचाहे कोई याद करे ना करे अपनी उम्र तक मुझकोय़ादों का मखमली मासूम सिलसिला छोड जाऊँगारंज होगा उन्हे भी जो छोड गए अपने ख्वाबो के लिएजीते जी अपनी आवारगी का वो एहसास छोड जाऊँगामुझे भी वो याद रखे अ... Read more
clicks 123 View   Vote 0 Like   9:18am 14 May 2018 #
Blogger: डॉ आलोक त्रिपाठी
तुम्हारा हुसन एक गज़ल एक ख्वाब है मेरे हायात कातुमसे मिला तो मुझे लगा, जैसे मैं ज़िंदा हूँ तुम्हारे लिएअलोकतुम्हारी हर ह्रफे वफा पर कायम है ये साये जहां मेराये कैसे कहुं कि एक तेरी बेरुखी से दारक्ता है ये सायाअलोकपैमाने मे भी ज़िन्दगी के कई रंग छलकते, कभी गज़ल कभी मिस... Read more
clicks 200 View   Vote 0 Like   9:10am 14 May 2018 #
Blogger: डॉ आलोक त्रिपाठी
जब भी कभी दिल ने कहा की कुछ लिखू तेरे लिए फिर दिल ने कहा कि लिखता ही रहूँ बस तेरे लिए जज्बातों को सुलझता हूँ तो लब्ज़ उलझ जाते है लब्जों को सुलझाता हूँ तो ख्वाब बिखर जाते है फिर भी दिल करता है कि बस लिखता ही रहूँ तेरे लिए वो इक अफसाना है, जो जिन्दा रहा हमेशा ख्वाबों ... Read more
clicks 125 View   Vote 0 Like   7:00pm 19 Sep 2017 #
Blogger: डॉ आलोक त्रिपाठी
कही कोई तो तडापता तो होगा हीआखिर ये दिल यूँ ही क्यूँ उदास हो जाता है?किसी को तो, य़ा किसी से, मिलने की चाहत सुलगी होगी ?क्यूँ कोई यूँ ही मायूस हो जाता है एकाएक?ये गणित ज़रा मुश्किल तो है, वरना समझ गया होतावैसे भी ये  प्रमेय मुझसे कब हल हुये है, जो आज होंगेबस मेरा दिल कहता कही &nbs... Read more
clicks 251 View   Vote 0 Like   6:38am 7 Aug 2017 #
Blogger: डॉ आलोक त्रिपाठी
इस जामाने में, मेरे लिये कौन आया है मेरे पास ?ज़रूरततों के लिबास में हर कोई आया मेरे पासलोग कहते है कि चाहतों की भीड है मेरे पास,(ये दिल ही ज़ानता है कि बस....)आरजू के चेहरे में जुस्तजू के साथ आया मेरे पासगुनाह होगा अगर कहूँ कि खाली हाथ आया मेरे पासकुछ लाता नहीं तो लब्ज कहा से हो... Read more
clicks 131 View   Vote 0 Like   10:27am 18 Jul 2017 #
Blogger: डॉ आलोक त्रिपाठी
हमेशा रोया बहुत इन नज़रों की बेबसी पर अपनेफिरभी अंधों के शहर में आईना बेचने लाया हूँपूरी शिद्दत से जानता अपने इस कारोबार के फायदेनाउम्मीदी में ही सही काफिरों को खुदा बाटने आया हूँतुम हँसते हो या रोते, मेरी अक्ल पर तुम्हारी रजा हैखुश हूँ की जो करने आया था वही करने आया हू... Read more
clicks 148 View   Vote 0 Like   8:04am 30 May 2017 #
Blogger: डॉ आलोक त्रिपाठी
तुम तो अगाज थे मेरे,  अंजाम भी थे मेरे किरदार केख्वाबो के टूटे हर आईनों मे उभरे अक्स थे मेरेवजुद को तुमने ही ऊकेरा था हाकीकत कि ज़मी परमेरी ख्वाइसो को दुआवों मे सम्हाले फनकार थे मेरेफिजाओं मे बिखरी हँसी ने कितना सफर तय कियाकि उन्ही की खुसबू मे साँस लेती हुई ज़िन्दगी थे म... Read more
clicks 150 View   Vote 0 Like   9:10am 27 Feb 2017 #
Blogger: डॉ आलोक त्रिपाठी
आँसू: काफियों मे काटी है: वो गजल आज तक मुकाम्मल न हुई  उम्र ज़िसके लिये काफियों मे काटी है वजूद के इतने चेहरे नजर आये मुझे  जाने कितने सवालों मे ये ज़िन्द...... Read more
clicks 261 View   Vote 0 Like   7:44am 24 Dec 2016 #
Blogger: डॉ आलोक त्रिपाठी
वो गजल आज तक मुकाम्मल न हुई उम्र ज़िसके लिये काफियों मे काटी हैवजूद के इतने चेहरे नजर आये मुझे जाने कितने सवालों मे ये ज़िन्दगी बाटी हैहर मंझर पर ठहरता है दिल कि मंजिल है शक्ल जाने कितनी तस्वीरों मे ऊतारी हैज़रा समहल के रखो इस आईने को य़ारों बडी मुश्किल से उनकी तस्व... Read more
clicks 214 View   Vote 0 Like   7:42am 24 Dec 2016 #
Blogger: डॉ आलोक त्रिपाठी
ज़िन्दगी मे इसी मंझर का मुझे इंतजार अर्से से था शायद हजारो तुफान ज़िहन मे फिर भी ज़िक्र करने का जी नहींये शायद इसलिये भी हैं कि हर अक्स पर धुंध ही छाई हैं इस शोरगुल मे भी खुद के सन्नाटे से निकलने का जी नहीं कुछ काशिस तो हैं जो इस ज़िन्दगी से अब भी जोडे हैं मुझे वर्ना इस सफर मे ख... Read more
clicks 173 View   Vote 0 Like   6:20pm 22 Aug 2016 #
Blogger: डॉ आलोक त्रिपाठी
मुझे मंजिलों की जुस्तजू न रही मेरी आरजुएं है वेवफासरे राह बनगया मेरा हमसफर ये ठोकरें ही फलसफाचाहो तो इसका इलज़ाम सफर की थकन को दे दोइस पल का सच यही, ये ही है मेरा है हमनवांचाहे जितना भी हो बदशक्ल मेरे वजूद का है चेहराइस सफर से ही इश्क मुझे, नही मुझे है वस्ले आहजुस्तजू ने द... Read more
clicks 313 View   Vote 0 Like   11:14am 17 Mar 2016 #
Blogger: डॉ आलोक त्रिपाठी
कभी सोचता उन तमाम खवाइसो को क्या नाम दू?जो जली तो जी भर के पर कभी दिखी ही नही दिल में ही सुलगती रही जी भरके भठ्ठी की तरहपर कभी भी किन्ही अल्फाजो में दर्ज नही हुईयक़ीनन ‘अल्फाजो से बेरुखी’ शहादत का चेहरा रहाकभी वक्त, कभी हालत के जंजीरों को तोड़ नही पाईदफन होगयी माझी का एक खु... Read more
clicks 238 View   Vote 0 Like   9:28am 15 Oct 2015 #
Blogger: डॉ आलोक त्रिपाठी
चंद लब्ज़ों में कैसे कह दूं मै तुमसे क्या चहता हूँ? चाहता हूँ कि तुम्हे कहीं बहुत दूर ले जाऊं ज़माने की निगाहों से तुमको छुपा के तुम्हारे ख्वाबो के अस्मा के तले तुम्हारी ख़्वाइसों के घनेरे बादलों की जमी पर जहाँ तुम जी भर के जी सको एक पल में सारी जिंदगीखुश हो सको जि... Read more
clicks 198 View   Vote 0 Like   5:03pm 10 Oct 2015 #
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