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मन का मंथन [man ka manthan]

ओ गुड़िया!तुम ने भी तोहवस के उन दरिंदों से अपनी रक्षा के लिये.द्रौपदी   की तरहईश्वर को हीपुकारा  होगापर तुम्हे बचाने  ....ईश्वर भी नहीं आए....ओ गुड़िया!तुम भी तोउसी देश की बेटी थीजहां बेटियों को देवी समझकर पूजा जाता हैजहां की संस्कृति  मेंकन्या ही दुर्गा का रूप है...
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Tag :चिंगारी
  July 20, 2017, 3:10 pm
[दिनांक 28 जून 2017 को पूजनीय पिता श्री की समृति में जन सेवा के उदेश्य से एक पीने के पानी का नल स्थापित किया गया साथ ही पूजा उपरांत पिता जी की फोटो दिवार पर स्थापित की गयी] ओ पिता जीअब तो तुम भीईश्वर बन गये हो,तभी तोईश्वर की तसवीर के साथतुम्हारी तसवीर भीहार पहनाकरदिवार पर टा...
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Tag :
  July 11, 2017, 3:13 pm
किसान आज से नहीं,सदियों से आत्महत्या कर रहे हैं,उगाते तो हम  अनाज हैं,पर खुद भूखे मर रहे हैं।मैंने एक और किसान कि आत्महत्या के बादआंदोलन कर रही भीड़ केएक बूढ़े किसान से पूछावो किसान क्यों मरा?"बेटा वो मरा नहींआज तो वो   जिवित हुआ,मरा तो वो पहले कई बार,  एक बार नहीं ...
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Tag :क्रांति
  June 24, 2017, 12:16 pm
[दिनांक 30 अप्रैल 2017 को मेरे पूजनीय पिता जी श्री ठाकुर  ईश्वर सिंह इस भू लोक को त्याग कर चले गये...जीवन में उनकी कठिन तपस्या से ही आज हम   सुखद जीवन जी पा रहे हैं....]"हे ईश्वर मेरे पूजनीय पिता जी को....अपने पावन चरणों में स्थान देना...."ओ मेरे  पूज्य    पिता जी,कल तक मैंखुद ...
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Tag :
  May 22, 2017, 4:04 pm
शूल की चुभन,बहुत पीड़ा देती है,पर शायदउतनी पीडा नहीं,जितनी फूल की चुभन,....देती है....वो बेटेभूल चुके हैं  सब कुछअपने  मां-बाप को भी,उन के सप नों को भी,जिन्हे  याद है अब ...केवल नशा ...जो माएं मांगती रही दुआलंबी आयु कीअपने बेटों  के लिये आज वो भी अपनी दुआ में,....अपनी खुशियांं&nb...
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Tag :नशा
  April 11, 2017, 12:43 pm
तुम बैठे हो आसन  परआज हम शोर मचाएंगे,तुम्हारे अच्छे कामों को भी,मिट्टी में ही  मिलाएंगे...तुमने भी यही किया,अब हम भी यही करेंगे,पहले तुमने हमे गिराया,अब फिर   तुम्हे गिराएंगे...जंता तो है घरों में बैठी,वो क्या जाने सत्य क्या है,किसी पर झूठे आरोप लगे हैं,कोई दोषी  भी ...
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Tag :लीडर
  February 1, 2017, 4:20 pm
इंडिया-इंडिया कहते-कहते,हम हिंदूस्तान को भूल गये,आजाद हो गये लेकिन फिर भी,अपनी पहचान ही भूल गये।...जलाते हैं दिवाली में पटाखे,खेलते हैं रंगों से होली,याद रहा रावण को जलाना,राम-कृष्ण को भूल गये...नहीं पता अब बच्चों को,बुद्ध,  महावीर, गोविंद  कौन हैं?मुगलों का इतिहास याद ह...
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Tag :कुलदीप की कविता।
  January 28, 2017, 3:31 pm
जो समझते रहे हमें वोट,हार उन्हे पहनाते रहे,गणतंत्र-दिवस मनाते-मनाते, गणतंत्र का अर्थ, अब जान गये।दिया किसी ने आरक्षण,किसी ने सस्ती दालें दी,खाकर सभाओं में लड्डू,बस तालियां बजाते रहे,गिराकर मंदिर-मस्जिद,बस करा दिये दंगे,उनको तो मिल गया राज,हम व्यर्थ ही खून बहाते रहे।ह...
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Tag :कुलदीप की कविता।
  January 27, 2017, 4:00 pm
इस कड़ाके की सर्दी में,वो इकठ्ठा परिवार ढूंढता   हूं। दादा दादी की कहानियां,चाचा-चाची का प्यार ढूंढता   हूं...खेलते थे अनेकों खेल,लगता था झमघट बच्चों का,मोबाइल, टीवी के शोर में,बच्चों का संसार ढूंढता  हूं...लगी रहती थी घर में,अतिथियों  से रौनक,पल-पल सुनाई देती आह...
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Tag :कुलदीप की कविता।
  January 18, 2017, 3:40 pm
हम आए अकेले, इस दुनियां में,न लाए साथ कुछ दुनियां में,शक्स ही रहे तो मर जाएंगे,बनो शक्सियत इस दुनियां में।जो भी मन में प्रश्न हैं,उनका उत्तर गीता में पाओ,जब ज्ञान दिया खुद ईश्वर ने,क्यों भटक रहे हो दुनियां में।जो ज्ञान न मिला भिष्म  को,न द्रौण को, न विदुर को,वो ही  ज्ञान ...
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Tag :कर्म
  January 13, 2017, 3:33 pm
नानक के इस धरा पर,हैं गुरु आज, कई हजार,पर  नानक सा   नहीं  है कोई,इसी लिये है अंधकार...जब भूल गये थे गीता को,श्री कृष्ण की अमर कविता को,   अन्याय, अधर्म  का राज्य था,हो रहा था शोषण जंता का।तब नानक ने गीता समझाई,गुरु ग्रंथ में लिखा सार...कहा था ये  दशम गुरु ने,गुरु ग्रं...
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Tag :
  November 19, 2016, 3:56 pm
जो  बच्चे, मां के साथ हैं,पापा को ढूंढ़ते हैं,जिन के पास, केवल  पापा हैं,वो तरसते हैं,मां की ममता को...बच्चों कोआवश्यक्ता होती है,दोनों के प्रेम की,दोनों में से,एक का न होना,बच्चे का सबसे बड़ा दुर्भाग्य होता है...जो माता-पिता,तलाक के लिये,कतार में खड़ें है,वे अपने बच्चों ...
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Tag :तलाक
  October 19, 2016, 3:37 pm
हम जलाते हैं हर बार,पुतला केवल रावण का,जिसने अपनी बहन के अपमान काबदला लेने की खातिरसीता जी का हरण किया।न स्पर्श किया,न अपमान किया,अशोक-वाटिका में,अतिथि सा मान दिया।हम दशहरे के दिन, भूल जाते हैं,आज के उन रावणों को,जिन्हें न तीन वर्ष की बेटी की,मासूमियत दिखती है,न कौलिज ज...
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Tag :कुलदीप की कविता।
  October 11, 2016, 5:29 pm
इन 32 वर्षों में,सब कुछ बदला है।पर्व, मेले,  त्योहार भी,रिति-रिवाज, संस्कार भी।पीपल नीम अब काट  दिये,नल, उपवन भी बांट दिये,अब चरखा भी कोई नहीं बुनता,दादा की कहानियां भी नहीं सुनता।मेरा गांव,  शहर बन गया,भाईचारा  अपनापन गया।पहले घर थे चार,पर नहीं थी बीच में दिवार।अब घर ...
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Tag :मां
  September 4, 2016, 12:21 pm
आज हर बहन खुद कोअसुर्क्षित महसूस कर रही है।राखी बांधते हुएअपने भाइयों  से कह रही है।केवल मेरी ही नहीं,हर लड़की की    करना रक्षा,भयभीत है आज सभी, सभी को चाहिये सुर्क्षा।जानते हो तुम भया, दुशासन खुले   घूम रहे  हैं,अकेली असहाय लड़कियों को,तबाह करने के लिये ...
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Tag :भारतीय त्योहार
  August 18, 2016, 11:07 am
हे भारतआज तुम बिलकुल अकेले हो,इस महाभारत के रण में,न कृष्ण हैन अर्जुन,न धर्मराज,आज विदुर भी,तुम्हारा हित नहीं चाहता।भिष्म द्रौणऔर कृपाचार्य की निष्ठा,आज मात्रभूमि के प्रति नहीं,कुर्सी के प्रति है...आज भी जंग भी,सिंहासन के लिये ही है,पर आज के राजा,तुम्हारी खुशहाली नहीं,अ...
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Tag :आम आदमी
  August 16, 2016, 11:59 am
आप सभी को भारत के पावन पर्व स्वतंत्रता दिवस की शुभकामनाएं...जो नहीं कहते  वंदे मातरम,पाकिस्तानी झंडा लहराते हैं,जो दे रहे हैं देश को गालीवो कौन है? वो कौन हैं?जो पनाह देते हैं, आतंकवादियों को,भारत को खंडित करना चाहते हैं,अफजल की फांसी का विरोध करने वाले,वो कौन है,? वो कौन ...
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Tag :कुलदीप की कविता।
  August 15, 2016, 5:02 pm
न बच्चों के हाथ में,कागज की कश्तियाँ न इंतजार है,परदेस से   पिया का।नहीं दिखते अब    झूलें बागों में,   न मेलों मे रौनक,न तीज त्योहारों में।अब तो सावनडराता है,विक्राल रूपदिखाता है।कहीं बाड़ आती है,कहीं फटते हैं बादल,होती है प्रलय,करहाते हैं मानव।सूखे नाले भीकोहर...
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Tag :आपदा
  August 1, 2016, 8:08 pm
मैं एकलव्य हूं,मेरी रुह आहत नहीं हुई,जब गुरु द्रोणाचार्य नेअर्जुन को विश्व का सर्वश्रेष्ठ धर्नुधारी बनाने के लिये  मुझ  से गुरु-दक्षिणा में,मेरे दाहिने हांथ का अँगूठा मांगा था...मेरे गुरु ने तो केवलमेरे दाहिने हांथ का अँगूठा ही  मांगा थाजो सहहर्ष मैंने दे दिया था,...
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Tag :कुलदीप की कविता।
  July 19, 2016, 4:33 pm
आतंकवाद का जन्मभूख से हुआ,जेहाद के कारण,पला-बढ़ा,जैसे त्रेता युग में,राक्षसों ने था आतंक मचाया,वैसे ही   सारी दुनिया में,भय है आतंकवाद का...आतंकवादी तो  बेचारा,क्या करे हालात  का मारा,खिलौने नहीं, शस्त्र  मिले,प्रेम नहीं, डंडे खाए, ज्ञान  नहीं, जनून बढ़ाया,मन से म...
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Tag :आतंकवाद
  July 8, 2016, 9:03 am
आज सुबह फिरमेरे पड़ोस से,हंसमुख दादा   कीवोही आवज सुनाई दी,"अब हाथ में लाठी,आंख पे ऐनक,थके पांव,तन पे झुर्रियाँ न मुंह में दांत,झड़ गये बालबोलो बेटा अब कहां जाऊं"...याद आया मुझे,एक दिन खलियान में,हंस मुख दादा,अपने मित्र से रोते हुए बोले थे,"एक ख्वाइश थी,अपना घर हो,ख्वाइश प...
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Tag :कुलदीप की कविता।
  June 28, 2016, 3:36 pm
शौक आदत बन गयीअब क्या करें?नशा है जहरअब क्या करें?आशाएं मां-बाप कीदर दर भटक रही,उनके बिखरे  अर्मानों का,अब क्या करें?समझाया था बहुतन सुनी तब  किसी की,ओ समझाने वालों बताओ,अब क्या करें?न होष है खुद कीन पास है कोई हितेशी,   जीवन है अनुमोल,अब क्या करें?वो दोस्त  भी तबाह ...
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Tag :कुलदीप की कविता।
  June 17, 2016, 3:16 pm
हम बंद कमरों में बैठे हैं,पंछी तो गीत गाते हैं,मां  के पास वक्त नहीं है, बच्चे लोरी सुनना चाहते हैं।न कल कल झरनों नदियों की,न किलकारियां मासूम बच्चों की,संगीत नहीं है जीवन में,निरसता में पल बिताते हैं।वर्षों बाद  गया    चमन में,लगा जैसे स्वर्ग यहीं है,क्रितरिम ह...
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Tag :जिंदगी
  May 17, 2016, 12:25 pm
[धन्यवाद... कुलदीप ठाकुर... ईमेल: kuldeepsingpinku@gmail.com संपर्क नंबर 9418485128, 9459385128]...
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Tag :क्रांतिकारी
  May 7, 2016, 4:25 pm
एक धर्म थावैदिक धर्मएक जाती थीमानव जाती,एक भाषा थीजिस में वेद रचे,एक शिक्षा थी,वैदिक शिक्षा,एक लोक थाभूलोक....नाम के लिये,आज धर्म कई हैं,जातियों की तोगिनती नहीं हैं,हर भाग की अपनी भाषाएं हैं,शिक्षा का कोईअब आधार नहीं है,धरा बंट चुकी हैकई भागों में...जब से बंटा हैये सब कुछ,ब...
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Tag :कुलदीप की कविता।
  May 2, 2016, 4:12 pm
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