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बूँद-बूँद लम्हे

हाथों में मेहन्दी रचती रहे,चूड़ियाँ कलाई में खनकती रहें,माथे पे बिंदिया की झिलमिल रहे,माँग सिंदूरी दमकती रहे...!ख्वाबों की महफ़िल आबाद रहे,,होठों पे प्रीत गुनगुनाती रहे,आँखों में चंदा बहकता रहे..नज़रों से चाँदनी बरसती रहे !~ओ चाँद आसमाँ के.., देना.. मुझे ये वरदान.... "मेरे च...
बूँद-बूँद लम्हे...
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  October 12, 2014, 2:28 pm
चाँद का नूर,सितारे आँखों में लिए; चन्दन की सुगंध,बाँसुरी की धुन लिए;  तितली के रंग,फूलों की हँसी लिए; बूँदों की रुनझुन, बोली में खनक लिए;मेरे अँगना में उतरी एक नन्ही परी।  मेरी गोदी में खेली ,मेरी बाँहों में झूली,मेरी पलकों पर, बनकर वो सपना पली। धरती-आकाश में,&n...
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  September 13, 2014, 10:32 pm
गाडी अपनी रफ़्तार से दौड़ी जा रही थी और मेरे ख़याल उससे भी तेज़। रह-रह कर माँ का चेहरा आँखों के आगे आ जाता था। भैया का फ़ोन आया था , माँ की तबीयत ठीक नहीं थी। दवा तो चल रही थी , दुआओं की ज़रूरत भी बहुत थी।  तब से मेरे हाथ जो दुआ के लिए उठे तो उठे ही रहे।                     ज...
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  July 27, 2014, 1:09 pm
'समय'पत्रिका के जुलाई अंक 'प्रेम की बहार'विशेषांक में प्रकाशित मेरी कुछ प्रेम कविताएँ जो संपादक महोदय आ. हरमिंदर सिंह  जी ने बहुत ही ख़ूबसूरती के साथ प्रस्तुत कीं:समय पत्रिका ऑनलाइन पढ़ी जा सकती है,इस लिंक पर-समय...
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Tag :कविताएँ
  July 20, 2014, 7:03 pm
फोटो: अनिता ललित                                                     घटा  साँवरी                                                    पहन के पायल                                                    बूँदों से सज...
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  July 10, 2014, 4:30 pm
मेरी कविताएँ 'गर्भनाल'पत्रिका के जून २०१४ अंक में  (पृष्ठ संख्या ६८)~http://www.garbhanal.com/Garbhanal%2091.pdf1.प्रेम का धागालपेट दिया है मैनेंतुम्हारे चारों ओर.…तुम्हारा नाम पढ़ते हुए...तुमसे ही छुपा कर !और बाँध दी अपनी साँसें...मज़बूती से सभी गाँठों में !अब मन्नत पूरी होने के पहले...तुम चाहो तो भी ...
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  June 2, 2014, 4:42 pm
अंतरजाल पर साहित्य प्रेमियों की मासिक पत्रिका 'साहित्य कुञ्ज'के मई द्वितीय अंक में प्रकाशित मेरी कुछ क्षणिकाएँ http://www.sahityakunj.net/LEKHAK/A/AnitaLalit/kshanikayen.htm1.प्रेम की बेड़ियाँ... फूलों का हार,विरह के अश्रु...गंगा की धार,समझे जो वेदनाप्रिय के मन की... योग यही जीवन का...है यही सार !2.दिल की मिट...
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  May 23, 2014, 5:20 pm
1आँखों में है सावनदिल ममता-आँगनमाँ तू कितनी पावन।2हर दुःख को सह जातीउफ़ न कभी करतीमाँ तो बस मुस्काती !3आँचल में हैं सारे मुन्ने के सपनेक्या चन्दा , क्या तारे। 4जिस घर माँ मुस्कातीईश्वर की बातीकण-कण नूर खिलाती।5माँ पहला आखर हैनींव बने घर कीमाँ  ऐसा पत्थर  है  । 6.सब...
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  May 12, 2014, 5:48 pm
काव्य-संग्रह 'बूँद-बूँद लम्हे'के लोकार्पण (१२ अप्रैल २०१४)  की सूचना अगले दिन १३ अप्रैल २०१४ को विभिन्न समाचारपत्रों तथा ई पेपरों में दी गई (Newspapers & e-papers)...
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  April 16, 2014, 4:57 pm
          कुछ मख्मली एहसास,         ख़्वाबों का सफर तय करते हुए,         जब ताबीर में बदलते हैं ...        तो उनमें फूल खिल उठते हैं..          जो पूरी काइनात में खुश्बू बिखेर देते हैं ...                     ~ ऐसा ही एक एहसास, एक ऐसा ही ख़्वाब...   &n...
बूँद-बूँद लम्हे...
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  April 15, 2014, 1:12 pm
          कुछ मख्मली एहसास,         ख़्वाबों का सफर तय करते हुए,         जब ताबीर में बदलते हैं ...        तो उनमें फूल खिल उठते हैं..          जो पूरी काइनात में खुश्बू बिखेर देते हैं ...                     ~ ऐसा ही एक एहसास, एक ऐसा ही ख़्वाब...   &n...
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  April 15, 2014, 1:12 pm
मेरे पहले काव्य-संग्रह 'बूँद-बूँद लम्हे'का लोकार्पण १२ अप्रैल २०१४ को ~अनिता ललित ...
बूँद-बूँद लम्हे...
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  April 7, 2014, 4:43 pm

मेरे पहले काव्य-संग्रह 'बूँद-बूँद लम्हे'का लोकार्पण १२ अप्रैल २०१४ को !आपके आशीर्वाद एवं आपकी शुभकामनाओं की आकांक्षी ... :-)~अनिता ललित ...
बूँद-बूँद लम्हे...
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  April 7, 2014, 4:43 pm
मेरे पहले काव्य-संग्रह 'बूँद-बूँद लम्हे'का लोकार्पण १२ अप्रैल २०१४ को ~अनिता ललित ...
बूँद-बूँद लम्हे...
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  April 7, 2014, 4:43 pm
आसमाँ से बिखरता हल्दी-कुंकुम-महावर,हवा के मेहँदी लगे पाँवों में उलझती … सुनहरी पाजेब की रुनझुन,आँचल में लहराते-सिमटते चाँद-सितारे,सुर्ख़ डोरों से बोझिल … क्षितिज पर झुकती बादलों की पलकें,फूलों से टँकी रंग-बिरंगी चूनर की ओट में … लजाते हुए धरा के सिन्दूरी गाल ....~प्...
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  February 11, 2014, 4:25 pm
आसमाँ से बिखरता हल्दी-कुंकुम-महावर,हवा के मेहँदी लगे पाँवों में उलझती … सुनहरी पाजेब की रुनझुन,आँचल में लहराते-सिमटते चाँद-सितारे,सुर्ख़ डोरों से बोझिल … क्षितिज पर झुकती बादलों की पलकें,फूलों से टँकी रंग-बिरंगी चूनर की ओट में … लजाते हुए धरा के सिन्दूरी गाल ....~प्...
बूँद-बूँद लम्हे...
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  February 11, 2014, 4:25 pm
Photo: Anita Lalitगरजे मेघ,सूरज भागा, छिपा दूसरे देश।चीखे बादल, थर-थर काँपती भोर है आई। धरा है भीगी,बादलों की आँखें भी हुई हैं गीली।  मन  है रोया ग़रीबी की आड़ में मानव खोया। देखो ठिठुरी ग़रीब की झोंपड़ी जमी, पिघली। ...
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  January 21, 2014, 8:34 pm
Photo: Anita Lalitएहसासों की सूनी चौखट पर ...अब कोई चाँद नहीं रुकतादिल की इस बंजर ज़मीं पर...अब कोई ख्वाब नहीं उगता..!एक सन्नाटा गूँजता है...वीरान हुई इन आँखों  में...बर्फ़ीली पगडंडी पर जैसे...कोई खामोश कहानी ...चहलक़दमी करती हो...!एक सेहरा झुलसता है...सूखे हुए इन होठों पर...रौंद... पैरों के नि...
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  December 22, 2013, 9:13 pm
दीपशिखा सीजलती हरदमतेरे आँगनकुछ यूँ सुलगतीमैं पिघलतीअंदर ही अंदर!आँसू में डूबे  अरमान जलतेऔर फैलता उदासी का उजालातन्हाई ओढ़े!सुलगते जो ख़्वाब,सभी हो जातेख़ामोश, धुआँ-धुआँभीगता वो आँगन!...
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  November 25, 2013, 12:30 pm
मन में खिलेजब नेह के फूलसुरभि बहेरेशमी पगडंडीभाई औ बहन के दिलों के बीच !पा निःस्वार्थ फुहार,आस्था विश्वास,अपार उत्साह केमीठे बोलों सेमहके गुलशन !रिश्ता अनूठाये भाई-बहन कासबसे प्याराहै कितना पावन !ना दरकार,'नाम' के बंधन कीलहू-निशाँ की,ना ही सरहद की!दिलों से बहे,है दिल...
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  August 21, 2013, 12:21 am
      पिछले भाग में मैनें बताया था कि हम लोग स्विट्ज़रलैंड (Switzerland) में अपने होटेल पहुँचे ! ये होटेल एंजेलबर्ग ( Engelberg)  में था! बहुत ही मन मोहने वाली जगह, उसपर पहाड़ी पर अपना होटेल! जाने के लिए सुरंग और लिफ्ट से जाना पड़ता था! कमरा भी बहुत बढ़िया था और उसके सामने छत भी थी... ज...
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  August 6, 2013, 10:22 pm
      पिछले भाग में मैनें बताया था कि हम लोग स्विट्ज़रलैंड (Switzerland) में अपने होटेल पहुँचे ! ये होटेल एंजेलबर्ग ( Engelberg)  में था! बहुत ही मन मोहने वाली जगह, उसपर पहाड़ी पर अपना होटेल! जाने के लिए सुरंग और लिफ्ट से जाना पड़ता था! कमरा भी बहुत बढ़िया था और उसके सामने छत भी थी... ज...
बूँद-बूँद लम्हे...
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  August 6, 2013, 10:22 pm
 सुबह नाश्ते के बाद हम लोग निकले जर्मनी के लिए! जर्मनी पहुँचते-पहुँचते ग्यारह के आस-पास बज ही गये होंगे! रास्ते में मनीष, हमारे गाइड... हमें हिट्लर (Hitler) के बारे में बाताते आए! हिट्लर के जन्म से लेकर... उसके गुण, अवगुण, उसकी ग़लतियाँ... उसके अत्याचार तथा उसका अंत.. सबकुछ इतने रोच...
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  July 26, 2013, 1:40 pm
                     आज का दिन... हमारे परिवार के लिए बहुत ख़ास था! आज हमारे बेटे का जन्मदिन था! हमारे ग्रुप में भी अबतक सबको पता चल चुका था! हमारे टूर गाइड मनीष से बात कर के केक का इंतज़ाम भी हो चुका था!        हम लोग सुबह नाश्ते के बाद तैयार होकर निकले एम्सटेरड...
बूँद-बूँद लम्हे...
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  July 18, 2013, 10:10 pm
                     आज का दिन... हमारे परिवार के लिए बहुत ख़ास था! आज हमारे बेटे का जन्मदिन था! हमारे ग्रुप में भी अबतक सबको पता चल चुका था! हमारे टूर गाइड मनीष से बात कर के केक का इंतज़ाम भी हो चुका था!        हम लोग सुबह नाश्ते के बाद तैयार होकर निकले एम्सटेरड...
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  July 18, 2013, 10:10 pm
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