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Blog: अभिव्यक्ति

Blogger: Amod Kumar Srivastav
स्कूल का चौथा पिरीअड चल रहा था हमारे क्लास रूम में धुप बड़े आराम से पैर फैला रही थी और हाँ उस समय हमारे पास कोई घडी नहीं होती थी तो हम लोगों ने धुप के निशान को अपनी घडी बनाए हुये थे, जब धुप यहाँ तक आ जाएगी तो चौथा पिरिअड ख़त्म हो जाएगा और अगर यहाँ आ जायेगी तो इंटरवल शुरू हो जाय... Read more
clicks 27 View   Vote 0 Like   12:10pm 15 Jul 2019 #दिल की बात
Blogger: Amod Kumar Srivastav
.... छोटी होली के दिन से ही  एकदम काला, हरा और बैगनी रंग का इंतजाम होने लगता था ! और  पक्का रंग के चक्कर में बैटरी की कालिख भी  घोल कर रखते थे ! उस जमाने में  गुलाल का प्रयोग रंगने में नहीं किया जाता था .. गुलाल का प्रयोग  केवल होली की शाम होली मिलने के समय ही किया जाता था !श... Read more
clicks 114 View   Vote 0 Like   11:30am 28 Feb 2018 #
Blogger: Amod Kumar Srivastav
सुनो, गर्मी बहुत है अपने अहसासों की हवा को जरा और बहने दो यादों के पसीनों को और सूखने दो सुनो, गर्मी बहुत है गुलमोहर के फूलों से सड़कें पटी पड़ी हैं ये लाल रंग फूल का सूरज का अच्छा लगता है अपने प्यार की बरसात को बरसने दो बहुत प्यासी है धरती बह... Read more
clicks 132 View   Vote 0 Like   1:15pm 21 Jul 2017 #
Blogger: Amod Kumar Srivastav
कुछ सपने केवल सपने ही रह जाते हैं बिना पूरे हुये, बिना हकीकत हुये और हमे वो ही अच्छे लगते हैं अधूरे सपने, बिना अपने हुये हम जी लेते हैं उसी अधूरेपन कोउसी खालीपन कोसपने की चाहत मेंजानते हुये भी ....सपने तो सपने हैंसपने कहाँ अपने हैंयथार्थ को छोड़करपरिस्थिति से मुह ... Read more
clicks 280 View   Vote 0 Like   1:43am 23 Oct 2016 #
Blogger: Amod Kumar Srivastav
रात की चादर ओढ़े चुपचाप सोयी है वो पगडण्डी जो शहर से गाँव की ओर आती है पगडण्डी पर उगी घासें नाम हैं, भीगी हैं जैसे सुबक कर कोई चुप हो गया हो बहुत रोई होगी उस राहगीर के लिए जो लौट के न आया उसका घर छुटा वो भीतर से टुटा सन्नाटा है पसरा पगडण्डी अभी भी चुप है सुबक रही है ...... इंतज़ार ... Read more
clicks 206 View   Vote 0 Like   1:51pm 2 Sep 2016 #
Blogger: Amod Kumar Srivastav
यूँ ही सिकोड़ कर आलमारी के एक कोने में कहीं ... पुराने अखबार सी हो गयी है जिंदगी तिरस्कारित कल की खबर जिसको कोई पढता ही नहीं चिमुड़  गया है हर पेज चाहो तो भी खोल न पाओ .... उन्ही सीले हुए पेजों पर कही कही चमकते इश्तहार भी हैं जिसका वजूद धरातल पर कहीं नहीं है... Read more
clicks 249 View   Vote 0 Like   6:06am 14 Jun 2016 #
Blogger: Amod Kumar Srivastav
जाने कितने बार मुझे तुमने इस धरती पर जन्म दिया जाने कितने बार मुझे तुमने ये स्वरुप  दिया जाने कितने बार मुझे इस नाव पर चढ़ा दिया जानते कितने बार मुझे इस भवसागर से पार किया जाने कितने बार मुझे इस मृत्यु ने आलंगन किया जानते कितने बार मैंने इस मृत्यु का वरन किया&nbs... Read more
clicks 221 View   Vote 0 Like   5:55am 10 Nov 2015 #
Blogger: Amod Kumar Srivastav
कुछ भूली -बिसरी यादें हैं कुछ ताज़ी तरीन बातें हैं कुछ यादें मीठी मीठी हैं कुछ करेले सी कडवी हैं कुछ को भूलना चाहा  में कुछ यादों को में भूल गया कुछ को भुला कर भुला दिया कुछ यादों को मिटा दिया कुछ यादें पल दो पल की थीं कुछ यादें चिपक कर बैठी हैं में हरपल ... Read more
clicks 182 View   Vote 0 Like   5:50am 10 Nov 2015 #
Blogger: Amod Kumar Srivastav
आज बुरा है !!!तो क्या हुआ ... कल अच्छा होगा … बहुत सुना है बहुत गुना है कल जरूर अच्छा होगा और हम भागते रहे उसी कल की  ओर उसी अच्छे की ओर रोज सपने देखते रहे सँजोते रहे बुनते रहे,गुनते रहे ... उस अच्छे के लिए एक एक दिन गुजरता रहा हम इत्ते से उत्ते भी हो गए और कल हमेशा कल ही रहा .... दौड़... Read more
clicks 203 View   Vote 0 Like   4:51pm 1 Oct 2015 #
Blogger: Amod Kumar Srivastav
  जीवन के आपाधापी मे अच्छा और अच्छा होने की ललक मे “अम्मू”से “आमोद”बनने के सफर मे जो भी मिला उन हमसफर को मेरा धन्यवाद !साथ साथ चलते हुये न जाने कितने स्नेह कितने आत्मीयजन मिले जिनका प्रतिबिंब आँखों मे मेरी साँसों मे,खून मे धमनियों मेंअविरल गतिमान है उन हमसफर को मेरा... Read more
clicks 168 View   Vote 0 Like   4:48pm 1 Oct 2015 #
Blogger: Amod Kumar Srivastav
बड़े पापा के जाने के बाद भी मैं सुन सकता हूँ उनकी खाँसती आवाज और उस आवाज के साथ रेल की  आवाज भी वह मरफ़ी का ट्रांजिस्टर आलमारी मे लगा हुआ और उनका उसपर आकाशवाणी का समाचार बाहर आँगन मे लगे पौधे पीछे उगी कुछ सब्जियाँ,पपीते के पेड़ अमरूद मे पानी लगाने की चिंता सुबह सुबह अखबार क... Read more
clicks 163 View   Vote 0 Like   4:44pm 1 Oct 2015 #
Blogger: Amod Kumar Srivastav
यूं हींसड़क के किनारे पुलिया पर बैठे बैठे आते जाते लोगों को देखता अपनी मगन मे मस्त बैठा जिंदगी के तमाम सवालों पर खुद ही मुस्कराता कभी इठलाता सोचता, तभी अचानक साइकिल सवार आता दिखालिया था कुछ समान पीछे था तेल का कनस्तर चला जा रहा था अपनी मस्ती मे&... Read more
clicks 197 View   Vote 0 Like   2:32am 12 Jul 2015 #
Blogger: Amod Kumar Srivastav
जीवन के आपाधापी मे सृष्टि के अनुपम चित्र में उस महान चित्रकार की तूलिका से खत्म होता जा रहा रंग .... बेस्वाद होते टमाटर रोज चटकीले लाल नज़र आते हैं बैगनी रंग और चटकदार होता जा रहा है मगर स्वाद खत्म हो रहा है बैगन में अधरों पर मोहित मुस्कान लिए जो बाला बैठ... Read more
clicks 167 View   Vote 0 Like   2:03am 12 Jul 2015 #
Blogger: Amod Kumar Srivastav
तीन दिन पहले से ही सच कहूँ तो एक हफ्ते पहले से ही पच्चईयाँ (नाग पंचमी) का इंतजार रहता था .... एक एक दिन किसी तरह से काटते हुये आखिर, पच्चईयाँ आ ही जाती थी पच्चईयाँ वाले दिन सुबह ही सुबह अम्मा पूरा घर धोती थी, हम सब को कपड़े पहनाती थी सुबह सुबह ही गल... Read more
clicks 181 View   Vote 0 Like   7:06am 28 Jun 2015 #
Blogger: Amod Kumar Srivastav
सुनो, गर्मी बहुत है अपने अहसासों की हवा को जरा और बहने दो यादों के पसीनों को और सूखने दो सुनो, गर्मी बहुत है गुलमोहर के फूलों से सड़कें पटी पड़ी हैं ये लाल रंग फूल का सूरज का अच्छा लगता है अपने प्यार की बरसात को बरसने दो बहुत प्यासी है धरती बह... Read more
clicks 164 View   Vote 0 Like   2:59pm 25 Jun 2015 #
Blogger: Amod Kumar Srivastav
 शाम हो रही है सूरज का तेज अब मध्यम होता जा रहा है शाम और खेल का बड़ा अनूठा सायोंग है अब बस याद ही है खेल और उसका खेला की एक खेल था ऊंच-नीच समान्यतः यह खेल घरके आँगन मे ही खेलते थे, चबूतरे पर नाली की पगडंडियों पर हम सब ऊपर रहते थे और चोर नीचे हमे अप... Read more
clicks 169 View   Vote 0 Like   1:16am 24 Jun 2015 #
Blogger: Amod Kumar Srivastav
हम छोटे छोटे थे जब माँ कोयले की राख़ से गोले बनाती थी हम भी बैठे बैठे गोले बनाते थे ये वाला मेरा ये वाला तेरा मेरा गोला ज्यादा मोटा तेरा वाला पतला गोला धूप मे गोले फैला दिये जाते सूरज अपनी तपन से हवा अपने वेग से गोले को सूखा देते शाम को अम्मा उ... Read more
clicks 176 View   Vote 0 Like   3:23pm 9 Apr 2015 #
Blogger: Amod Kumar Srivastav
उम्मीद तो मुझे अपने आप से भी थी उम्मीद तो मुझे अपनों से भी थी ... सोचता तो अपने के लिए भी था सोचता तो दूसरों के लिए भी था सुधार की गुंजाईश अपने आप से भी थी सुधार की गुंजाईश दूसरों से भी थी इन्हीं ... उहापाहो मेंसफर काटता रहा ... जब उम्मीद अपनी पूरी नह... Read more
clicks 169 View   Vote 0 Like   3:10pm 11 Mar 2015 #
Blogger: Amod Kumar Srivastav
जीवन कठिनाईयों मे गुजर रहा है ऐ मौला रात गुजर रही है बगैर नींद के ऐ मौला बेपरवाह एक जुगनू खलल डाल रहा ऐ मौला सफर मे चला जा रहा हूँ मंजिल की तलाश मे ऐ मौलाकहता बहुत हूँ, चीखता बहुत हूँ सुनता कोई नहीं ऐ मौला काली रात कटेगी, सुबह तो होगी इंतजार मे हूँ ऐ मौला&nb... Read more
clicks 196 View   Vote 0 Like   3:15pm 25 Feb 2015 #
Blogger: Amod Kumar Srivastav
सुनो ,है ईश्वर ऐसा करोमुझे पागल कर दोशरीर से दिमाग कासंपर्क खत्म कर दोमेरे एहसासमेरी प्यासमेरी तृष्णामेरा प्यारमेरी लालसासे मेरा नाता खत्म कर दोन मर्म रहेन भावनान दर्द रहेन रोग . . . .सुनो . . . .है ईश्वर ऐसा करोमुझे पागल कर दोजीवन तो तब भी रहेगादौड़ेगा रगों मे खूनदेखुंगा, स... Read more
clicks 181 View   Vote 0 Like   1:47pm 2 Feb 2015 #
Blogger: Amod Kumar Srivastav
ईतनी घुटन क्यूँ हैं ... घर मे खिड़कियों के बावजूद जिंदगी उदास क्यूँ हैं खुशियों के बावजूद हमें बांटने वालों तुम्हें मालूम हों आकाश कायम रहेगा दीवारों के बावजूद हमने उसका दामन तक छुआ नहीं था कभी वो मेरे सबसे निकट था फ़ासलों के बावजूद ... ... Read more
clicks 176 View   Vote 0 Like   10:02am 21 Dec 2014 #
Blogger: Amod Kumar Srivastav
हर रोज दुआएं मांगता हूँ रब से ....घोसला टूट जाता है हवाओं से ...जब होना है जो मुकद्दर में हैतो दिमाग की कलम हांथ मे क्यूँ हैंकैसे कहूँ, ये तो होना ही है4 के बाद 5  तो आना ही हैकिस कदर गुजारी है ये तमाम उम्रबरगद की जटाएँ खुद बयां करती हैंहर रोज बस एक ही दुआ होती हैशाम होती है सुब... Read more
clicks 215 View   Vote 0 Like   8:24am 15 Oct 2014 #
Blogger: Amod Kumar Srivastav
जीवन के आपाधापी मे अच्छा और अच्छा होने की ललक मे “अम्मू”से “आमोद”बनने के सफर मे जो भी मिला उन हमसफर को मेरा धन्यवाद !साथ साथ चलते हुये न जाने कितने स्नेह कितने आत्मीयजन मिले जिनका प्रतिबिंब आँखों मे मेरी साँसों मे,खून मे धमनियों मेंअविरल गतिमान है उन हमसफर को मेरा धन्... Read more
clicks 216 View   Vote 0 Like   1:08am 26 Sep 2014 #
Blogger: Amod Kumar Srivastav
आज बुरा है !!!तो क्या हुआ ... कल अच्छा होगा … बहुत सुना है बहुत गुना है कल जरूर अच्छा होगा और हम भागते रहे उसी कल की  ओर उसी अच्छे की ओर रोज सपने देखते रहे सँजोते रहे बुनते रहे,गुनते रहे ... उस अच्छे के लिए एक एक दिन गुजरता रहा हम इत्ते से उत्ते भी हो गए और कल हमेशा कल ही रहा .... दौड़... Read more
clicks 185 View   Vote 0 Like   6:59pm 9 Aug 2014 #
Blogger: Amod Kumar Srivastav
डरी, सहमी सी लगती हैअंदर जो आवाज हैजिसे अन्तरात्मा कहते हैंवो चुप हैइस निःशब्द वातावरण मेवह चीख बनकेनिकलेंगे कब ?जिंदगी, आखिर ....शुरू होगी कब ?खुले मन से हँसीआएगी कब ?कब खिलखिलाकरसच सच कहूँ तोदाँत निपोर करआखिर हँसेंगे कब ?बरसों से इस जाल मे बंधीउसी राह पर चलते – चलतेआखिर... Read more
clicks 206 View   Vote 0 Like   4:58pm 3 Aug 2014 #
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