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शब्दों का शहर

हम ही पंछी हम ही पिंजर हम ही तूफां हम ही लंगर   कवियत्री  पारुल खख्खर कवियत्री ने मत्ले में संकेत दीये हैं। इस ग़ज़ल में वो व्यक्तित्व के दो ध्रुवों को पेश करेगी। कवियत्री कहती है हम ही पंछी...इन्सान सदियों से पंखी की तरह उड़ने के स्वप्न देख रहा है। स्वप्न को पूरा करने ...
शब्दों का शहर...
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  August 23, 2012, 10:04 pm
ख्वाब जैसे ख्याल होते हैंइश्क में ये कमाल होते हैंसीमा गुप्ता प्रसिद्ध कवियत्री हैं। अपनी उर्दू गज़लों में वे ज्यादातर प्यार से संबंधित विविध भावों को व्यक्त करती हैं।प्रस्तुत शेर के उला मिसरे में कवियत्री ने विचार (ख्याल) को स्वप्न सामान कहा है। नींद के दौरान दिखन...
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  August 16, 2012, 8:58 pm
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