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Blog: शब्दों का शहर

Blogger: Mahesh Soni
हम ही पंछी हम ही पिंजर हम ही तूफां हम ही लंगर   कवियत्री  पारुल खख्खर कवियत्री ने मत्ले में संकेत दीये हैं। इस ग़ज़ल में वो व्यक्तित्व के दो ध्रुवों को पेश करेगी। कवियत्री कहती है हम ही पंछी...इन्सान सदियों से पंखी की तरह उड़ने के स्वप्न देख रहा है। स्वप्न को पूरा करने ... Read more
clicks 366 View   Vote 0 Like   4:34pm 23 Aug 2012 #
Blogger: Mahesh Soni
ख्वाब जैसे ख्याल होते हैंइश्क में ये कमाल होते हैंसीमा गुप्ता प्रसिद्ध कवियत्री हैं। अपनी उर्दू गज़लों में वे ज्यादातर प्यार से संबंधित विविध भावों को व्यक्त करती हैं।प्रस्तुत शेर के उला मिसरे में कवियत्री ने विचार (ख्याल) को स्वप्न सामान कहा है। नींद के दौरान दिखन... Read more
clicks 467 View   Vote 0 Like   3:28pm 16 Aug 2012 #
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