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माँ तुम हमेशा विश्‍वास की उँगली थमा देती हो जिद् की मुट्ठी में जो नहीं छोड़ती फिर तुम्‍हें किसी भी परीस्थिति में  !... तुम कर्तव्‍य के घाट पर  से जब भी निकलती हो साहस की नाव लेकर लहरें आपस में बातें करती हैं नदिया का जल तुम्‍हारी हथेली की अंजुरी में समा स्‍वयं का अभिषेक कर...
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  June 26, 2013, 10:07 am
मजबूत हैं मेरे इरादे, व्‍यक्तित्‍व मेरा मेरे लिये हर पल आईना रहा, किसी ने कुछ भी कहा हो पर मैने खुद से कभी भी झूठ नहीं कहा खुद को कभी भी मैने थपकी नहीं दी झूठी तसल्‍ली की विश्‍वास के साथ उठती रही रोज़ वैसे ही जैसे प्रतिदिन निकलती थीं रश्मियाँ सूरज के आने से पहले  ... न‍हीं ड...
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  June 15, 2013, 10:07 am
कुछ ईमानदार से शब्‍द मेरी कलम से जब भी उतरते मुझे उन शब्‍दों पर बस फ़ख्र करने का मन करताईमानदारी व्‍यक्तित्‍व की हो या फिर शब्‍दों की हमेशा प्रेरक होती है व्‍यक्तित्‍व अनुकरणीय होता है और शब्‍द विस्‍मरणीय !....एक ईमानदारी के पुल को देखोबरसों बरस खड़ा रहता है अडिगता से ज...
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  May 31, 2013, 10:07 am
कोई दर्द की बात करता है तो वो मुस्‍करा देता है ये भी एक दिन अपने साथ जीना सिखा देता है ।रास्‍तो पे उसने रखीं थी निशानियां तेरे वास्‍ते ही, जो भी पूछ़ता वो तेरे जाने का सबब बता देता है । अहम टूटकर बिखरा तो वफ़ा खुलकर मुस्‍कराई, ये प्रेम ही है वो जो सच का आईना दिखा देता है । धड...
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  May 28, 2013, 10:17 am
नया सीखोगे जिंदगी की किताब पढ़ोगे जब !.... चुनौतियाँ भी रास्‍ते बदलती तो अच्‍छा होता न !.... सन्‍नाटे भी तो शोर करते हैं न सुना तुमने !... कीमत होती यक़ीन की नहीं तो करता कौन !....दर्द बाँटा तो मुस्‍कराहट आई गम तड़पा !... प्रेम राग है जीवन बेला में ही इसको जी लो ... ...
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  May 24, 2013, 10:07 am
प्रेम ने कब भाषा का लिबास पहना हैं, इसने तो बस मन का गहना पहना है । कभी तकरार कहाँ हुई इसकी बोलियों से, कहता है कह लो जिसको जो भी कहना है । लाख दूरियाँ वक्‍त ले आये परवाह नहीं, हमको तो एक दूसरे के दिल में रहना है । दिखावट का आईना नहीं होता प्रेम कभी,हकीकत की धरा पर इसको तो बहना...
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  May 20, 2013, 9:57 am
मेहनतकश चींटी को कण-कण से जीवन यापन करते देखा है, बाधायें कैसी भी आ जाये जीवन में उनसे पार उतरते देखा है ! हर मुश्किल में निर्णय लेती हैं मिल-जुलकर सम्‍बंधों का ऐसा, अटल विश्‍वास संजोये ये जीव अनूठा हर पल चलते  देखा है !समर्पण की सीढ़ी चढ़कर श्रम का दान ये करती हैं तेरा-मेर...
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  May 16, 2013, 4:37 pm
मां सोचती हूँ कई बार तुम्‍हारा प्‍यार  और तुम्‍हारे बारे मेंजब भी तो बस यही ख्‍याल आता है क्‍या कभी शब्‍दों में व्‍यक्‍त हो सकता हैतुम्‍हारा प्‍यार  तुम्‍हारा समर्पण, तुम्‍हारी ममता तुम्‍हारा निस्‍वार्थ भाव से किया गया हर बच्‍चे से समानता का स्‍नेह .......मां तुम्‍हार...
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  May 10, 2013, 10:07 am
हर बार मेरे हिस्‍से तुम्‍हारी दूरियाँ आईं नजदीकियों ने हँसकर जब भी विदा किया एक कोना उदासी का लिपट कर तुम्‍हारे काँधे से सिसका पल भर को फिर एक थपकी हौसले की मेरी पीठ पर तुम्‍हारी हथेलियों नेरख दी चलते-चलते !..... मेरे कदम ठिठक गए पल भर कितने कीमती लम्‍हे थे उस थपकी में जिनक...
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  May 6, 2013, 10:07 am
कभी कुछ होता है कहने कोपर जाने क्‍यूँ मौन उतर आता है बड़ी ही तेजी से धड़धड़ाते हुए सब दुबक कर बैठ जाते हैं सारी ख्‍़वाहिशों की बोलती बंद अरमान अपना कमरा बंद करते हैं तो पलकें बंद होकर लाइट ऑफ  !.... नहीं समझ आता मुझे मौन का कभी यूँ सभी को सताना जहाँ सब डरे-सहम से रहते हैं कौन ...
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  May 2, 2013, 10:17 am
बड़ी बेचैन रहती है कविता, शब्‍दों में ढलने से पहले ख्‍यालों की रहगुज़र  से होकर मन ही मन कितना पिघलती है कविता !... घुटती है सिसकती हैजाने कितना सिहरती है वो  शब्‍द-शब्‍द जब कलम की नोक पर उतरती है कविता !!.... कभी मासूम़ सवालों के  देती है जवाब तो कभी खामोशी से  रहकरजाने खुद से ...
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  April 30, 2013, 10:07 am
कुछ शब्‍द चोटिल हैं, कुछ के मन में दर्द है अभिव्‍यक्ति का, हाथ में कलम हो तो सबसे पहले खींच लो एक हद़ की लक़ीर जिसे ना लांघा जा सके यूँ सरेआम बना लो ऐसा कोई नियम कि फिर पश्‍चाताप की अग्नि में ना जलना पड़ेमन की खिन्‍नता ज़बान का कड़वापन जिन्‍हें शब्‍दों में उतारकर तुमने उन...
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  April 26, 2013, 10:07 am
शब्‍द आहत हो गये हैं चीखते-चीखते मर्यादायें सारी बेपर्दा हुई हैं जबसे  !माँ मुझे तुमने खेलने के लिये गुडि़या नहीं बल्कि हथियार दिये होते तो हर बुरी नज़र के उठने से पहले ही मैने जाने उन पर कितने ही वार किये होते !!.... नज़र बदली है इनकी तो, तुम भी हौसले से अपनी सारी नसीहते बदल ...
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  April 22, 2013, 12:58 pm
शब्‍द आहत हो गये हैं चीखते-चीखते मर्यादायें सारी बेपर्दा हुई हैं जबसे  !माँ मुझे तुमने खेलने के लिये गुडि़या नहीं बल्कि हथियार दिये होते तो हर बुरी नज़र के उठने से पहले ही मैने जाने उन पर कितने ही वार किये होते !!.... नज़र बदली है इनकी तो, तुम भी हौसले से अपनी सारी नसीहते बदल ...
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  April 22, 2013, 12:58 pm
अतीत के धागों को कितना भी काटूँ मन के माँझे से फिर भी यह जिंदगी की पतंग  उड़कर दूर पहुँच ही जाती बादलों के पार वही ख्‍वाहिशें मस्‍ती की, वही ऊँचाइयों की जिद हथेलियों में डोर रहती किसी और के फिर भी कहाँ परवाह रहती इसे इन बातों की यह दिल तो सिर्फ उड़ान भरना जानता है !... जिद् क...
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  April 20, 2013, 10:17 am
मन हारता तो है कभी, मुश्किलों से भागता भी है कभी पर एक कोना मन में आज भी विश्‍वास का जिंदा है वही है जो हार कर भी मुझे हारने नहीं देतापरीस्थितियाँ कितने भी तूफां लाएं, ये उन्‍हें बदलने पर मजबूर करशीतल बयार सा कर देता है !... उम्‍मीदों के सोपान चढ़ते हुए जाना, कितना कठिन होता ...
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  April 15, 2013, 10:27 am
शब्‍दों का मरहम तो लगाया होगा तुमने जाने कितनी बार कभी रोते हुये को भी हँसाया होगा तुमने जाने कितनी बार  । सहमी है जिंदगी कतरा-कतरा हर ख्‍वाब दफन होता हो जहां, इन हालातों में कहते हो संभल के चलना जाने कितनी बार । रिश्‍तों की डोरियाँ बूढ़ी हो चली हैं जाने कब कौन साथ छोड़ द...
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  April 9, 2013, 3:57 pm
मन के आँगन में स्‍नेह का बीज बचपन से ही बो दिया गया था जो वक्‍त के साथ पल्लिवत होता रहा जिस पर सम्‍मान का जल सिचित करते-करते स्‍वाभिमान की डालियों ने अपना लचीलापन नहीं खोया जब भी आवश्‍यकता हुई वो झुकती रह‍ीं फिर चाहे उन्‍हें झुकाने वाला कोई बड़ा होता या बच्‍चा वो सहर्ष ...
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  April 6, 2013, 10:27 am
उसने मुझसे इक दिन भीगी आँखों से कहा ये मुहब्‍बत भी बहुत बुरी शय होती है किसी और की खबर रखते-रखते खुद से बेखबर हो जाती है ... कुछ टूटने से पहले आवाज हो ये जरूरी तो नहीं तुमने देखा तो होगा फूलों का खिलना और बिखर जाना चुपके से!!!.... ...
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  April 2, 2013, 12:47 pm
कभी मन के खिलाफ़ चली है आँधी तुम्‍हारे शब्‍दों की कभी नहीं चाहते हो जो लिखना वह भी लिख डालती है कलम एक ही झटके में वर्जनाओं के घेरे में करती परिक्रमा शब्‍दों की तोड़ती है अहम् की सरहदों के पार कुछ तिनके उड़कर दूर तलक़ जाते हैं कुछ घोसलों में सजाये जाते हैं कुछ कदमों तले ...
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  March 30, 2013, 2:47 pm
पुडि़या में रखे रंगमाँ की धरोहर हुआ करते थे,कितने भी नये रंग  खरीदे जाते पर माँ का सारा स्‍नेह उस पुडि़या पर ही टिका रहता हम हँसते क्‍या माँssssतो माँ भी हँस देती साथ ही पर !!!!पुडि़या का रंग सारा हम पर उड़ेल दिया जाता हम भी भावनाओं के आँगन में जमकर मस्‍ती करते !!!!... वहीं हरा रंग ...
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  March 25, 2013, 10:17 am
जिन्‍दगी को बेखौफ़ होकर जीने का अपना ही मजा है कुछ लोग मेरा अस्तित्‍व खत्‍म कर भले ही यह कहने की मंशा मन में पाले हुये हों कभी थी, कभी रही होगी, कभी रहना चाहती थी नारी उनसे मैं पूरे बुलन्‍द हौसलों के साथ कहना चाहती हूँ, मैं थी, मैं हूँ, मैं रहूँगी ....न्‍याय की अदालत में गीताक...
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  March 19, 2013, 11:07 am
जिद् की मुट्ठी में हर बार वो उम्‍मीदों के जुगनु लिये अंधेरे को चीरता चला जाताकभी जब दिल घबराया तोप्रयास की लाठी टेकी, लड़खड़ाते कदमों से उसने,जिम्‍मेदार हो हथेलियाँ तभीप्रदर्शित करती शक्ति को इस शक्ति की आस्‍था सेथम जाती कदमों की लड़खडा‍हटनिर्भय हो कदम से कदम साथ हो...
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  March 14, 2013, 12:47 pm
मन अक्‍सर प्रश्‍नबैंक हो जाता है, जाने कितने सवाल ???एक का जवाब दिया तो  दूसरा हाजिर कभी किसी सवाल का जवाब भय से ग्रसित होने के कारण दिया नहीं तो बस भय ने दबा दिया सारे साहस को कई बार पसीने छूट जाते इस भय की वजह से !!!... इस भय से पार पाने के लिये साहस की रस्‍सी पर दम साधे चलना पड़...
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  March 11, 2013, 2:57 pm
कई बार जिंदगी पर उदासियों का हक भी बनता हैखुशियों के मेले में भी कोई अकेला होता है जब बस मन के साथ होता है एक कोना उदासी का ... उस कोने में सिमटी होती है कुछ गठरियाँ यादों की जिनकी गिरह पर जमी धूल चाहती है झड़ जाना अपनत्‍व के स्‍पर्श से निकलना चाहती हैं बाहर कुछ बेचैन सी याद...
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  March 7, 2013, 12:57 pm
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