| बसपांचमिनटकापड़ाव उसस्टेशनपर देखरहीहूँउसपारकिसतरह वो उसहथौड़ेको अपनेसरकेऊपरतकलेजाकर खटाकसेवारकररहाहै उसलोहेपरजिसको चूड़ियोंसेभरेदो हाथ थामरहेहैंदोनोंऔरसे कितनाआत्मविशवासहै उनदोनोंकोअपने उनहाथोंपर लोहा इच्छित आकार लेताजारहाहैधीरे-धीरेसोचरही... |
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| (1)जहां कदमो के निशाँ बनते थेवो माटी न रही इस शहर मेंदोस्तों ,कहाँ से गुजरेंगेकोई कैसे ढूँढेगा ?? (2)वो दरक का दर्द क्या जानेजिसने जिन्दगी में कभी आईना नहीं देखा। हर शहर आसमाँ छूने की होड़ में हैजमीं खफ़ा हो गई तो क्या होगा ??(३)जानती हूँ हम नदी के दो किनारे ... |
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| मैं कैसेसोऊँ ??नौ माह का अंकुर पूर्ण हुआ व्याकुल जग पंथ निहारता जब गर्भ नाल में हुई पीड़ा रक्त माँ- माँ कह पुकारता मैं कैसे सोऊँ ?जब बिस्तर उसका हुआ गीला वो करवट करवट जागता मुख ,उँगलियाँ मचलती वक्ष पर पय उदधि हिलौरे मारता मैं कैसे सोऊँ ?मैं रोटी का कौर... |
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| (घनाक्षरी) प्रज्ञा पुंज(1)हिंदी भाषा के शिंगार रस छंद अलंकार नव शब्द माल लेके गीत तो बनाइए संधि प्रत्यय समास, हों मुहावरे भी ख़ास भाव रंगों में डुबो के कविता रचाइए गीत या निबन्ध हो नवल भाव सुगंध हो साहित्य सरोवर में डुबकी लगाइए विद्या वरदान मिले ... |
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| दोस्तों के भेजे गए फूलों से दिन का शुभारम्भ फिर लहराई सुभागी ,गुलाबी गोटेदारचुनरिया जिसकासितारोंभराआसमाँ प्रत्यक्षदर्शीहैउन अविस्मरणीयलम्होंका जिसकेएकछोरमें कियागयाथागठबंधन प्रियतमकीपीलीचादर केछोरसे ,उसछोरकीसिलवटें जसकीतस आजभी... |
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| खुरदुरीहथेलियाँ कटी फटीउंगलियाँ पच्चीसकीउम्रमें पचासकेजैसीप्रौढ़ताकी चेहरेपरलकीरें दसबीसइंटोंसेभरा तसलासरपरढोती बीच- बीचमेंदूरएकझाड़ीपर बंधेपुरानेचिथड़ोंसेबने झूलेपरनजरडालती ,नाजानेउसकानन्हा कबभूखसेबिलबिलानेलगे सोचकरअपनेभीगेब्लाउजको अपनीफट... |
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| निजस्वारथमेंजोकिये ,जल संसाधनव्यर्थ। भुगतोगेउसकीसजा ,कहेअनुर्वरअर्थ॥ कभीकभीलगताहै नारी भीएकधराहैउसमे भीकईसागरनिहितहैं स्नेहसागर ,धैर्यसागर ,प्रेमसागर सहनशीलता, सहिष्णुतासागर उनमे भीज्वारभाटाआताहै वहीँकिसीकौनेमेंसुनामीभीछुपीहोतीहै मतलोपरीक्षा... |
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| सखीरीमोरेअंगनामेंधूप खिलीआज मनकीप्रणय पातीसाजन की मिलीआज हुआ यकायकमुझे अंदेशा भेजाउसनेकोईसंदेशा नेहनीरबिना शुष्कहुईथी देहप्रीतबिना रुष्टहुईथी लिपटपवन संग हियतरुकीडारि हिलीआज सखीरीमोरेअंगनामेंधूप खिलीआज आह्लादित मन लहका-लहकाप्रीत उपवन है म... |
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| गीतकेजिससे बहलतीशामहैमाँउसीसंगीतकाहीनामहैमाँबिनातोनज़्मभीपूरीनहीहरग़ज़ल की तर्ज़ भीनाकामहैआजजिसआकाशपरमैंउड़रहीयेउसीआशीषकापरिणाम हैगोदमेंउसकीहमेशासोचतीअबयहाँआरामहीआरामहैजिंदगीकीदौड़जबमैंजीतती आजभीदेतीमुझेईनामहैयादमेंउसकीभरीसंदूकचीयेधरो... |
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| गोलगोल ये बनती जाती चकलेबेलनपर घुमाती जोअपनीहै भूखमिटाती माँकहाँसे आई चपाती ??खेतोसेजबगेहूं पककरघरमेंआताहै तेरापापाउसको चक्कीमेंपिसवाता है आटे कीबोरीजब आती उससे ही बनतीहै चपाती।।अहा सुन्दर फ्राकहैमेराउसपररेशमकाहैघेरा जोप्रकाशमेंकरताचम्चम... |
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| कमला बाई को सुबह -सुबह दरवाजे पर बुरी हालत में देख रीना का माथा ठनका । एक्सीडेंट के कारण अस्पताल में भर्ती हुई कल ही तो एक हफ्ते बाद वापस लौटी है ,सर पर पट्टी गले की हंसली टूटने पर पीछे हाथ कर बांधी हुई पूरी छाती पर पट्टी, आँखे सूजी हुई देखते ही फफक -फफक कर रो पड़ी कमला रीना ... |
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| फूलों को तू सूंघ मत ,आज अप्रैल फूल|हो सकता है फूल में ,हो मिर्ची की धूल|| आज अप्रैल फूल है ,नहीं बोलती झूठ| पिया जो मायके गया ,मैं जाउंगी रूठ|| तू देख वतन पश्चिमी ,कितने होते धूर्त| मूर्ख दिवस देकर हमें ,कहते हमको मूर्ख||नेता को देखो सड़क ,गलत कर रहा पार|अंध... |
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| उड़ती हुई उन्मुक्त गगन में भिगोये पंख डूबे सप्त रंगों में हुई नारंगी मरीचि मिलन में बिखेरी छटा प्रकृति आँगन में हर्षित धरा मुकुलाई मन में फूटे अंकुर पुलकित तन में मुस्काये पुष्प अगणित रंगों ... |
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| चिलमन गिरा के मारा चिलमन उठा के मारादिल फेंक आशिकों को यूँ दिल जला के मारानाराजआशिकोंमेंहोतीरहीयेचर्चाजिसरूपकेदीवानेउसनेजलाकेमाराहोली की आड़ में था उसका घिनौना मकसद गुझिया में भांग विष की मदिरा पिला के मारा बच्चों से जा के उलझा वो भांग के नशे में इसको हँसा के म... |
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| मौसममेंभीमचरही, फागुनकीअबधूम|झूमेंहँस-हँसमंजरी, भँवरेजाते चूम||डाल-डालपरखिलरहे,केसरटेसूफूल| आपसमेंघुलमिलगए,बैरभावकोभूल||महकीडालीआमकी,मादक-मादकभोर| लिखतीपातीप्रेमकी,होकरमस्तविभोर||कान्हाकोफुसलारही,फागुनप्रीतबयार| राधाजीकोभारही,स्नेहिलरंगफुहार||चन्दानेफै... |
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| (दो कुण्डलियाँ एक दोहा) (1)नारी अब अबला नहीं ,ना समझो कमजोर सहती थी जब जुर्म ये ,चला गया वो दौर चला गया वो दौर ,शबनम बनी है शोला समझ न इसको फूल ,है बारूद का गोलाकामी, नीच , निकृष्ट, अधम पापी व्यभ... |
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| (पिक्चर गूगल से साभार)बेवड़े केहाथमेंअबज़ाम हैझिलमिलाईनालियोंकीशामहैहोशमेंतोरास्तामैंरोकतीसामनेअबहरजतननाकामहैमानजायेगासुनाथाप्यारसेछूटदेनेकायहीअंजामहैनालियोंमेंलेटकरवोसोचताअबयहाँआरामहीआरामहैभागआईछोड़करमाँबापकोबदगुमानीकायहीईनामहैप्यारकाह... |
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| घर सूना कर बेटियाँ ,जाती हैं ससुराल| दूजे घर की बेटियाँ ,कर देती खुशहाल||बेटा !बेटीमारमत ,बेटीहैअनमोल|बेटीसेबेटे मिलें ,बेटाआँखेंखोल||घरकीरौनकबेटियाँ,दो-दोघरकीलाज|उनकोहीआहतकरे ,कैसाकुटिलसमाज|| खाली कमरारहगया,अबबिटियाकेबाद|चौखट भी है सीलती,जब-जबआयेयाद||बेटोंकोसबम... |
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| जहाँ तू नहीं फिर कमी तो रहेगीउदासी ज़हन में जमी तो रहेगीहटेगी नहीं जब ये कुहरे की चादरवहाँ बस्तियों में नमी तो रहेगीनहीं जब तलक कोई साहिल मिलेगामुहब्बत की कश्ती थमी तो रहेगीकरे तू जो शिरकत जरा इस चमन मेंहवा ये सुगन्धित रमी तो रहेगीमिले ना मिले 'राज' तुझको ये दौलतफ़क... |
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February 25, 2013, 2:01 pm |
| उफ्फयेस्वप्न!!हृदयविदारककैसेजन्मासुषुप्तमनमें ?रेंगतीसंवेदनाएं कंपकपाएँजड़जमाएं भयभीतमनमेंअतीतहैयाभावी दर्पणउथलपुथलहैमनउलझनमेंगरवर्तमान है बनके प्रश्न खड़ाहुआ नेपथ्यतममें क्यास्वप्नजो नयनों में पलेवोभीजले आतंकी अगनमें क्यों यादनहीरंगसिन्द... |
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February 22, 2013, 1:21 pm |
| 122, 122 22 (छोटी बहर की ग़ज़ल)जमाया हथौड़ा रब्बा कहीं का न छोड़ा रब्बा बना काँच का था नाज़ुक मुकद्दर का घोड़ा रब्बा हवा में उड़ाया उसने जतन से था जोड़ा रब्बातबाही का आलम उसने मेरी और मोड़ा रब्बा बेरह्मी से दिल को यूँ कई बार तोड़ा रब्बा रगों से लहू को मेरेबराबर निचोड़... |
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February 20, 2013, 1:23 pm |
| सभ्यता और संस्कृति जब तक| लौ जीवन की जलती तब तक ||पत्थरमेंहीरापह्चानो|सद्गुणरुपसकलतुमजानो||जलबिनकमलचाँदबिनअंबरगुणबिनवदनमानमतसुंदर||आदर्शोंसेचलतीनैया|मिटजाएँतोकौनखिवैया||सम सुसंस्कृत देश है मेरा|उसपेअखंडताका बसेरा||सभ्यतापहचानहो जिसकी|सुसंस्कृतिहीजानहै... |
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February 18, 2013, 1:58 pm |
| (कुछ दोहे)प्रेम प्रणय का आज क्यूँ ,हो पाता इज़हार |प्रीत दिवस के बाद क्या ,खो जाता है प्यार ?सच्चे मन से कीजिये ,सच्चे दिल का प्यार |निश्छल दिल ही दीजिये,जब करना इज़हार||पश्चिम का तो चढ़ रहा ,प्रेम दिवस उन्माद |अपने पर्वों के लिए ,पाल रहे अवसाद||युवक युवतियों के लिए ,दिन है बहु... |
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February 15, 2013, 8:42 am |
| (कुण्डलिया)पीलेपीलेवेशमें,आयाआजबसंतपरिवर्तनकीगोदमें,जाबैठाहेमंतजाबैठाहेमंत,खेतमेंसरसोंफूलीमहकउठाऋतुकंत,प्रेयसीझूलाझूलीरसिकभ्रमरकोभाय,मनोहरवदनसजीलेकहऋतुराजबसंत,अमियरसपीलेपीले *****************************... |
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February 13, 2013, 1:59 pm |
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