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HINDI KAVITAYEN ,AAPKE VICHAAR

२१२२  ११२२  ११२२  २२रमल मुसम्मन मखबून मकतूअडूबते वक़्त दिया जिसको सहारा उसनेकर लिया पार उतरते ही किनारा उसनेफालतू आज समझकर जो मुझे काट रहा मेरी ही छाँव में बचपन था गुजारा उसनेदेख बदले हुए हालात हवाओं  के रुखमौज में छोड़ दिया जिस्म-ए शिकारा उसनेबात होने ...
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  April 3, 2016, 11:54 am
 सतरंगी चुनरी पहन,आई फागुन भोरसतरंगी चुनरी पहन,आई फागुन भोर पिचकारी के मेह में,भीगे मन का मोर होली के सद्भाव में ,मुखड़े मिले अनेक नीले पीले रंग से ,हो जाते सब एक एक सूत्र में बाँधती,कई रंग की  डोर  सतरंगी  चुनरी पहन,आई फागुन भोर द्वेष क्लेश का त्याग ही,होली मूल प्रती...
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  April 3, 2016, 11:44 am
रिमझिम सावन की फुहार आज मेरा भैय्या आएगाआया तीजो  का त्यौहार साथ मुझे  लेके जाएगाअम्बर पे बादल छायेसखियों ने झूले पाएभाभी ने गायी कजरीबाबा जी घेवर लाएकर लूँ अब मैं तनिक सिंगार आज मेरा भैया आएगाआया तीजो  का त्यौहार साथ मुझे  लेके जाएगादीवार पे कागा बोलेयादों की...
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  August 22, 2015, 10:39 pm
जैसे ही कोई छुट्टी आती थी गाँव जाने का अवसर मिल जाता था चेहरा खिल उठता था  मन की मुराद पूरी जो हो जाती थी एक तो दादा जी, चाचा,चाची से मिलने की उत्सुकता दूसरे खेलने कूदने मस्ती करने की स्वछंदता हमेशा गाँव की ओर खींचती थी| उत्सुकता का एक कारण और भी था वो था  कौतुहल से बच्चो...
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  July 27, 2015, 10:29 pm
कुण्डलिया छंद ==========सखियाँ झूला झूलती ,मिलकर देखो चार|तीजो के त्यौहार में ,करके नव सिंगार||करके नव सिंगार ,पहन परिधान सजीला|सजे किनारी लाल ,रंग साड़ी का पीला||गजरा पहने श्वेत ,श्याम कजरारी अखियाँ|बढ़ा रही दो पेंग ,साथ बैठी दो सखियाँ||...
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  July 21, 2015, 7:17 pm
 बुरा णा मान्नो होळी सः खेल्यां खेल्यां मैं तो पक गी ,इन शहरां की होळी तः म्हारे गाम की बात निराळी,ये भी कोई होळी सः रंग णा चोक्खे इन शहरां के ,केमीकल की झिक झिक सः म्हारे गाम का गोबर कीचड, ही सबते ओरगेनिक सः ह्याँ होळी में डरें छोरियाँ,खुली हवा णा पावैं सः आँख मार दी किसी ...
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  March 7, 2015, 10:53 pm
त्रिभंगी छंद हे भोले बकुले , श्यामल नकुले, अभिनय तेरा चोखा  है|यूँ बैठा उखडू ,जैसे कुकडू ,कर को  जोड़े  ,धोखा है|| तेरे हथकंडे ,मत के फंडे, जाने सब ये, नारी है| हे उजले तन के, गिरगिट मन के, जनता तुझपे, भारी है|| भांडे धुलवाओ,कुछ करवाओ, वोट मुझी को ,देना जी| सड़कें जापानी, बिजली प...
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  February 26, 2015, 6:30 pm
लोग हुनरमंद कितने किसी को गुमाँ तक नहीं होता आग लगाते वो कुछ इस तरह जो धुआँ तक नहीं होता जह्र फैलाते हुए उम्र गुजरी भले  बाद में उनकी मैय्यत उठाने कोई यारों का कारवाँ तक नहीं होता आज यहाँ की बदल गई आबो हवा देखिये कितनी वृद्ध की माफ़िक झुका वो शजर जो जवाँ तक नहीं होता मूक ...
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  December 17, 2014, 9:54 pm
लोग हुनरमंद कितने किसी को गुमाँ तक नहीं होता आग लगाते वो कुछ इस तरह जो धुआँ तक नहीं होता जह्र फैलाते हुए उम्र गुजरी भले  बाद में उनकी मैय्यत उठाने कोई यारों का कारवाँ तक नहीं होता आज यहाँ की बदल गई आबो हवा देखिये कितनी वृद्ध की माफ़िक झुका वो शजर जो जवाँ तक नहीं होता मूक ...
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  December 17, 2014, 9:54 pm
आज तुमने बुलाया तो चली आई  मगर ये तुम भी जानते हो  न तुमने बुलाया दिल से न मैं दिल से आई  अच्छा हुआ जो तुम मेरी महफ़िल में नहीं आये क्यूंकि तुम अदब से आ नहीं सकते थे और मैं औपचारिकता निभा नहीं सकती थी आयोजन में कस के गले मिले और बोले  अरे बहुत दिनों बाद मिले हो अच्छा लगा...
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  November 16, 2014, 10:33 pm
क्षमता से भारी-भरकम लेके सवारियाँ, खड़ी हुई स्टेशन पे लोहपथगामिनीडिब्बों में मारामारी ठूँस-ठूँस भरके चली,भीड़ से बेहाल करे भोर हो या यामिनी सीट नहीं मिले कोई छत पे छलांग रही ,बड़ी है निडर लाल साड़ी वाली कामिनी दूजे बाजू उसका लाल डिब्बों का अंतराल,बनी डोर ममता की द्रुत गत...
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  November 6, 2014, 12:08 pm

                   सब को नवरात्रों की बधाई एवं शुभ कामनाएँआज का दोहा शक्ति रूपेण संस्थिता ,नवम स्वरूपा शक्ति|शारदीय नवरात्र में ,शैल सुता की भक्ति||...
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  September 25, 2014, 8:14 pm
“हेप्पी टीचर्स डे”(संस्मरण) सन १९८६ में विशाखापत्तनम  नेवल पब्लिक  स्कूल में शिक्षण काल के दौरान का ये वाकया.... छठी  कक्षा का सबसे शरारती छात्र आये दिन कोई न कोई शरारत करना और ढेर सारी डांट खाना|होम वर्क कभी पूरा करके ना लाना क्लास में दूसरे पढ़ते  हुए छात्रों को भी ...
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  September 5, 2014, 1:48 pm
सर्कस का संसार ,रहे कायम ये जबतक   अद्भुत कारोबार , चक्र सा चलता  तबतक  चलते फिरते गाँव ,शहर कस्बों में जाते विस्मित होते लोग ,नये करतब दिखलाते जोखिम में हैं जान ,नहीं पर चिंता इनको    कहाँ करें परवाह ,पेट भरना है जिनको कलाकार करतार ,करे इनकी  रखवाली करती ऊर्जाव...
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  August 26, 2014, 9:41 pm
“भाभी अगर कल तक मेरी राखी की पोस्ट आप तक नहीं पँहुची तो परसों मैं आपके यहाँ आ रही हूँ  भैया से कह देना ” कह कर रीना ने फोन रख दिया|अगले दिन भाभी ने सुबह ११ बजे ही फोन करके कहा ‘रीना राखी पँहुच गई हैं” पर भाभी मैंने तो इस बार राखी पोस्ट ही नहीं की थी!!! -----------------------------------------------------------...
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  August 21, 2014, 10:02 pm
ऋतु बड़ी सुहानी है घर आ जा बहना राखी बँधवानी है ||अम्बर पे बदरी है भैया आ जाओ तरसे मन गगरी है |बहना अब दूरी है कैसे आऊँ मैं मेरी मजबूरी है ||कोई मजबूरी नाआ न सको भैया इतनी भी दूरी ना ||नखरे थे वो झूठे मैं आ जाऊँगा बहना तू क्यूँ रूठे |परदेश बसी बहना रक्षा बंधन ह...
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  August 10, 2014, 10:18 pm
वृक्ष पीपल का खड़ा है, आज भी उस गाँव में बचपना मैंने गुजारा, था उसी की छाँव में   तीज में झूला झुलाती,गुदगुदाती  मस्तियाँ  गीत सावन के सुनाती ,सरसराती पत्तियाँगुह्य पुष्पक दिव्य अक्षय,प्लक्ष इसके नाम हैं  मूल में इसके सुशोभित, देवता के  धाम हैं स्वास्थ वर्धक ,व्य...
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  July 31, 2014, 9:44 am
तुम्हारे पाँव से कुचले हुए गुंचे दुहाई दें  फ़सुर्दा घास की आहें हमें अक्सर सुनाई दें तुम्हें उस झोंपड़ी में हुस्न का बाज़ार दिखता हैहमें फिरती हुई बेजान सी लाशें दिखाई दें तुम्हें क्या फ़र्क पड़ता है मजे से तोड़ते कलियाँ झुकी उस डाल में  हमको कई चीखें सुनाई दें कहाँ महफ़...
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  July 18, 2014, 8:22 pm
एक बाजू गर्वीला पर्वत अपनी ऊँचाई और धवलता पर इतराता क्यूँ देखेगा मेरी ओर? नजरें झुकाना तो उसकी तौहीन है न!   दूजी बाजू छिः !! यह तुच्छ बदसूरत बदरंग शिलाखंड  मैं क्यूँ देखूँ इसकी ओरकितना छोटा है यह मेरी इसकी क्या बराबरी  समक्ष,परोक्ष ये ईर्ष्यालू भीड़ उफ्फ!! जब सबकी अ...
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  July 5, 2014, 9:22 pm
“देखो नेहा वो अभी भी घूर रहा है” झूमू ने नेहा का हाथ पकडे-पकडे हरकी पैढ़ी पर  गंगा में डुबकी लगाते हुए कहा|”बहुत बेशर्म है अभी भी बैठा है इसको पता नहीं किस से पाला  पड़ा है, इसका मजनू पना अभी उतारते हैं शोर मचाकर” उसको थप्पड़ दिखाती हुई नेहा आस पास के लोगों को उकसाने लगी|इस...
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  June 30, 2014, 11:32 am
हे माँ श्वेता शारदे , विद्या का उपहार दे|श्रद्धानत हूँ प्यार दे , मति नभ को विस्तार दे||तू विद्या की खान है ,जीवन का अभिमान है|भाषा का सम्मान है ,ज्योतिर्मय वरदान है||नव शब्दों को रूप दे ,सदा ज्ञान की धूप दे|हे माँ श्वेता शारदे ,विद्या का उपहार दे||कमलं पुष्प वि...
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  June 21, 2014, 7:30 pm
उस दिन की याद आई ........पंद्रह जून २०१३ उमंगों के पंख लेकर हम तीन सखियाँ डॉ नूतन ,कल्पना बहुगुणा और मैं  हल्द्वानी कविसम्मेलन में पँहुची|वहाँ सभी साहित्कारों से साक्षात मिलने की ख़ुशी छुपाये नहीं छुप रही थी आभासी दुनिया से निकल कर हम सबसे साक्षात् मिल रहे थे |फिर कविसम्मे...
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  June 16, 2014, 4:00 pm
अँखियों से झर रहे,बूँद-बूँद मोती राधा पग-पग फिरे,विरह बीज बोतीसोच रही काश में ,कान्हा सँग होती चूम-चूम बाँसुरी,अँसुवन से धोती मथुरा पँहुच कर सखि,भूले कन्हाई  वृन्दावन नम हुआ ,पसरी तन्हाई मुरझाई देखता ,बगिया का माली तक-तक राह जमुना ,भई बहुत काली  खग,मृग, अम्बर, धरा,हँसना ...
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  June 11, 2014, 9:37 pm
माँ तेरी इन आँखों में क्यूँ दोरंगी तस्वीर दिखे इक नदिया से मोती बहते दूजे से क्यूँ नीर दिखेखुश रह ले तू इस जीवन में ऐसे क्यूँ हालात नहींगम को पीकर हँसती है तू पर बातों में पीर दिखेबेटी अपनी सावित्री या सीता का क़िरदार अगरदूजे  की बेटी में उनको फिर क्यूँ लैला हीर दिखेभा...
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  May 12, 2014, 10:18 am
(शादी की सेंतीस्वी सालगिरह पर ) कौन कहता है नदी के दो छोर मिल नहीं सकते मिले तो थे उस रोज,आज ही के दिन जब थामा था हमने इक दूजे का हाथ गंगा के उस पार की लहर तुम्हारी इस पार की मेरी ले आई हम दोनों को कितने करीब तुम्हारे विश्वास और मेरे समर्पण से बनी एक छोटी सी क...
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  May 3, 2014, 8:53 am
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