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Blog: काविशी

Blogger: हबीब काविशी
गज़लजिसे हम कहते हैं दुनिया वो इक दुनिया ख्याली हैबड़ी दिलकश है उपर से मगर अन्दर से ख़ाली हैहकीक़त  पर न  कादिर हो ख्यालों पर तो कादिर हैहर इक इन्सान की बस इसलिए दुनिया निराली हैभला ऐसी नमाज़ों से जनाबे शेख़ क्या हासिलसलामत दाग है दिल का जबीं सजदों से काली हैहै दावा ब... Read more
clicks 281 View   Vote 0 Like   12:09pm 13 Sep 2012 #
Blogger: हबीब काविशी
 Ghazal In Persion (Farsi) And Translation In Urdu And Hindi (1) Persion توئی کہ جز توُ ترا خود حجاب دیگر نیستبغیر نور رخت را نقاب دیگر نیست(1) Urduتو ہے کہ تیرے سوا دوسرا حجاب نہیںسوائے نور کے تیرے کوئی نقاب نہیں(1) Hindiतू है कि तेरे सिवा दूसरा कोई पर्दा नहीं है सिवाय नूर के तेरे कोई तेरा नक़ाब नहीं है (2) Persionتوئی معّرفِ خود لا جرم بدہی گشتکہ در تصور تو اکتساب دیگر نیست(2) Urduفقط توہی ہے... Read more
clicks 207 View   Vote 0 Like   7:05am 10 Sep 2012 #
Blogger: हबीब काविशी
 Ghazal In Persion (Farsi) And Translation in Urdu and Hindi (1) Persion توئی کہ جز توُ ترا خود حجاب دیگر نیستبغیر نور رخت را نقاب دیگر نیست(1) Urduتو ہے کہ تیرے سوا دوسرا حجاب نہیںسوائے نور کے تیرے کوئی نقاب نہیں(1) Hindiतू है कि तेरे सिवा दूसरा कोई हिजाब नहीं है सिवाय नूर के तेरे कोई तेरा नक़ाब नहीं है (2) Persionتوئی معّرفِ خود لا جرم بدہی گشتکہ در تصور تو اکتساب دیگر نیست(2) Urduفقط توہی ہے... Read more
clicks 207 View   Vote 0 Like   7:05am 10 Sep 2012 #
Blogger: हबीब काविशी
जो कहा जा सकता है वह धर्म नहीं होगा। जो कल्पना से परे है, वह बोलने की शक्ति में नहीं हो सकता है। किताबों में जो है वह धर्म नहीं है, केवल शब्द ही &... Read more
clicks 288 View   Vote 1 Like   3:15am 6 Sep 2012 #
Blogger: हबीब काविशी
कोई पंछी खुले आकाश में जब गीत गाता हैज़माना अपनी आज़ादी का हमको याद आता हैकभी बाहर के मन चाहे नज़ारे देखते थे हम कभी लहरों को दरया के किनारे देखते थे हमकभी बागों में खिलते फूल सारे देखते थे हमकभी अपनी छतों से चाँद तारे देखते थे हमये पंछी आज हम को याद वो यादे दिलात... Read more
clicks 127 View   Vote 0 Like   6:06am 4 Sep 2012 #
Blogger: हबीब काविशी
कैदी की फरयाद कोई पंछी खुले आकाश में जब गीत गाता हैज़माना अपनी आज़ादी का हम को याद आता हैकभी बाहर के मन चाहे नज़ारे देखते थे हम कभी लहरों को दरया के किनारे देखते थे हमकभी बागों में खिलते फूल सारे देखते थे हमकभी अपनी छतों से चाँद तारे देखते थे हमये पंछी आज हम को याद वो या... Read more
clicks 267 View   Vote 1 Like   5:11am 4 Sep 2012 #
Blogger: हबीब काविशी
ग़ज़लनज़रों से तेरी जाम पिए जा रहा हूँ मैं और अल्विदाए होश किये जा रहा हूँ मैं बे खौफ जिन्दगी को जिए जा रहा हूँ मैं बस नाम तेरा नाम लिए जा रहा हूँ मैंबरसा रहा है तीरे नज़र दिल पे वो मेरे और मुस्करा के दाद दिए जा रहा हूँ मैं सूई में तेरे ज़िक्र का ध... Read more
clicks 154 View   Vote 0 Like   10:12am 23 Aug 2012 #
Blogger: हबीब काविशी
ग़ज़ल हिंदी में नज़रों से तेरी जाम पिए जा रहा हूँ में और अल्विदाए होश किये जा रहा हूँ में बे खौफ जिन्दगी को जिए जा रहा हूँ में बस नाम तेरा नाम लिए जा रहा हूँ में बरसा रहा है तीरे नज़र दिल पे वो मेरे और मुस्करा के दाद दिए जा रहा हूँ में सूई में तेरे ज़िक्र का धागा पिरो क... Read more
clicks 213 View   Vote 0 Like   10:12am 23 Aug 2012 #
Blogger: हबीब काविशी
मेरी गाफिल तबियत को मकामे होश दे साकी.में आऊ होश में जिस से वो जामे होश दे साकी.                                                ज़माने के फरेबों का नशा सर से उतर जाए.                                                तेरे जलवे वहीँ देखूं नज़र मेरी जिधर जाए .मुझे अपनी नज़र से वो पयामे होश दे साकी.में आऊ होश में जिस से... Read more
clicks 235 View   Vote 0 Like   1:49pm 20 Aug 2012 #
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