| जैसा कि लगभग हर 'प्यार' में होता है...लड़का और लड़की दोनों एक दूसरे से बेहिसाब मोहब्बत करते थे...फिर वक्त के आगे दोनों की न चली और दोनों के बीच अब बेहिसाब दूरियों ने जगह ले लिया... ऐसा नहीं था कि वह लड़का अब उस लड़की को भुला देने की तमाम कोशिशें कर चूका हो...वह अभी भी अ... |
| जब रात,आँखों से गुजरते हुए,दिन के करीब पहुँच जाए...जब पलकों के झपकने से ज्यादा,बदलने लगूँ करवटें...जब जीने की वजह,रातों में भी धुँधली दिखे...जब जज्बात बेबस होकर,उसूलों की परवाह न करें...जब मुस्कुराने की हर छोटी कोशिश,उदासी में गुम हों जाए...जब खुद की बनाई दुनिया ही,अजनबी-सी लगे... |
| तुम्हें लिखने की कोशिश-भर मेंलफ़्जों का दूर तलक चले जानाबोझिल पलकों से इंतजार,उन रूठे लफ़्जों कापर अफ़सोस किजज्बात,चढ़ते नहीं कलम परऔर फिर...अधूरी रह जाती हैतुम्हें याद करके लिखी जाने वाली,एक कविता-सा कुछ...उम्मीद है कितुम महसूस करोगेमेरी लिखी हुई अधूरी कविता से,उन ढे... |
| कहते हैं कि वक्त के साथ सभी चीझों का बदलना तय है,पर यादें कभी नहीं बदलती | हम चाहे ज़िंदगी के जिस किसी भी दौर से गुजर रहें हों,हमारी या हमसे जुड़ी किसी शख्स की यादें हमारा साथ देने आ ही जाती है | कभी उन्हें याद करके आँखों में नमी महसूस करते हैं तो अगले ही पल उन्हीं आँखों में ... |
| हर कोई जो कुछ सीखना चाहता है,वो गलतियाँ करता है या हो जाती है | गलतियाँ करके ही हम यह अनुभव कमाते हैं कि कोई काम किस हद तक सही या गलत है | हम कोई काम यह सोचकर करते हैं कि 'यह काम हमारे लिए सही होगा' तो उस काम में गलतियाँ हो जाने की भी उतनी ही गुंजाइश होनी चाहिए | फिर यह हम पर निर्भ... |
| "आँसू" अजीब होते हैं,हर ख़ुशी...हर ग़म में इनका आना तय होता है...इनके साथ होने से हमारी ख़ुशी और बढ़ जाती है और ग़म को भूल जाने का जरिया भी यहीं बनते हैं...आँसू,जब आँखों से बेदखल हो जाते हैं तब हमें केवल वहीँ सब दिखता है जो हम देखना चाहते हैं ? पर इनके पीछे की कहानी कुछ भी हों,हमें... |
| "हम जैसा चाहते हैं,ज़िंदगी उसी तरह आगे बढ़ती चली जाती है" पर यह बात शायद हर वक्त,हर जगह लागू न हों | कभी-कभी हमें अपने हिसाब से न चलाकर ज़िंदगी,जिस राह पर ले जाना चाहती है उसी तरफ चलना पड़ता है...पर कहीं न कहीं उस सही या गलत राह के लिए हम खुद ही जिम्मेदार होते हैं,यह बात हम खुद स... |
| मुंशी प्रेमचंद जी कहते हैं कि "जीवन का वास्तविक सुख,दूसरों को सुख देने में है,उनका सुख लूटने में नही"सबके पास अपनी-अपनी ज़िंदगी है,वक्त भी बहुत है पर शायद,दूसरों के लिए नही | जहाँ एक ओर हम कहते हैं कि ज़िंदगी के इस सफ़र में खुद से बड़ा कोई हमसफ़र नही होता वहीँ दूसरी तरफ कि ह... |
| कभी खुद का दीदार किए हों,कभी समझे हों,इस जहाँ मेंतुम्हारे होने का मतलबकभी सोचे हों,उम्मीद के कई धागे तुमसे जुड़े हैंतुम्हारा बस होना भर ही,किसी के लिए ज़िंदगी है...और तुम्हें इसकी खबर तक नही |कभी किए हों,कुछ सुलझाने की एक पहलखुद से उलझते जाते हों...फिर सामने होती है एक और प... |
| कितना अजीब था ना,इंसान ही उसे उस हाल में पहुंचाकरइंसान को ही उसके लिए रोते देखा थाखुद के इंसा होने का रंज देखा था |अगर दुनिया ऐसी ही है,तो अच्छा हुआ...उसे इस दुनिया से जाते हुए देखा था |उसे हमारी नाकामियों में कैद होते देखा थाउसे ज़िंदगी से लड़ते देखा थाउसे इंसानियत से हार... |
| बहाने लिए हुए जीने काचलते-चलते हुए यूँ ही राहों में,अजनबी सा कोई मिलता हैएहसास होता है हमारे खुद का |हमे फिकर होने लगती हैउसके हर गम के लिए,उसकी एक मुस्कान की खातिरभूल जाते हैं अपनी ज़िंदगी,हर वक्त उसके ही ख्यालों में जीनामुस्कुरानाकोई हों ऐसा,अजनबी पर अपना सा |हम पास ह... |
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February 27, 2013, 6:32 pm |
| नववर्ष आने को है और हम हर बार की तरह नए जोश,जूनून,संकल्प के साथ तैयार हैं प्रवेश करने के लिए. सभी चाहते है कि नया साल कुछ ऐसा हों जो पिछले साल की उम्मीद जो बाकि है,पूरी हों जाए.मै भी चाहता हूँ,पर कुछ नए की शुरुआत हों इसके लिए यह एक दिन ही क्यूँ,हम पूरे साल के एक-एक दिन को नए साल... |
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December 31, 2012, 12:54 pm |
| हर पल को कुछ यूँ जिया हूँ कि अगले पल की ना हों खबर..जो लाए हर खुशी,उन लम्हों को सजोंकर..उन बेरुखी से राहों से,आगे निकलकर...बुरे वक्त ने सबको कुचला है,पर सामने लाया है,कुछ सच्चे चेहरों को उभारकर...चलता जा रहा हूँ कुछ चेहरों को पढ़कर, कुछ को पीछे छोड़कर..इस ज़िंदगी की हर चाल को मै... |
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December 18, 2012, 7:21 pm |
| कुछ बाकि है अभी भी,कुछ कसक पूरे होने की...जिसका इंतजार है,हर बेजुबां तमन्ना को...जहाँ खत्म हों बुझी-बुझी सी सुबह,और तलाश है उस दिन की...हर सुबह की उम्मीद में,यूँ स्याह रातों का बीतना...अधूरे सपनों की चुभन से, यूँ नींद,आँखों में भरना...कि ये साजिश है वक्त की,या खेल उन धुँधले लकीरो... |
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December 5, 2012, 12:13 pm |
| कभी ज़िंदगी के साथ जीया हूँ,तो कभी छोड़ आता हूँ पीछे कहीं...कभी हर गम को पीता हूँ,तो कभी छोड़ देता हूँ आँसूओं के साथ उन्हें...कभी लिखता हूँ खुद कि तक़दीर को,तो कभी उसके भरोसे भी नही चल पाता हूँ...कभी हर दिल में घर बनाने की कोशिश करता हूँ,तो कभी बेदखल हों जाता हूँ खुद से ही...पर सो... |
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November 28, 2012, 11:21 pm |
| कहीं कुछ बाकी हैनिशां है,अभी भीआँखों को यकीं नहीपरआँसू आ जाते हैं गवाही देने |यूँ तो सांसों से शुरू हुई ज़िंदगी,अब यादों से है चलतीसाँसे तो अभी भी है,पर ज़िंदगी पीछे झाँक रही है |जो गुजरी है इस ज़िंदगी पर,ना कभी बतायेंगेबस कुछ बूँदे,घर बसाएबैठे हैं पलकों पर |कुछ मिलता है ... |
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November 17, 2012, 10:28 am |
| क्यूँफैला है सन्नाटापर छंटती नही भीड़ है...क्यूँरिश्ते है जुड़े हुए,पर एहसास का निशां नही...क्यूँसाथ है तुम्हारा,पर पास तुम अब भी नही...क्यूँउजाला है चारों तरफ,पर दिखता सिर्फ अँधेरा है...क्यूँराहें बनी है गुमराह,खबर नही मंजिल की भी...क्यूँजान नही पाया,अपने ही खुद को...क्यूँ... |
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November 12, 2012, 11:40 am |
| क्यूँ ओट हूँ मै खुद का,फिर कभी खींचता हूँ खुदी को...क्यूँ हर खुशी के पीछे भागता हूँ,फिर कभी साथ देता हूँ गम का...तो फिर कभी खामोशी का आसरा लेकरकह जाता हूँ बहुत कुछ...ये हैं मेरे उसूल या इन्हेंमानू जिंदगी के फलसफ़े...?जब दूर जाने लगती है जिंदगी,तब उसूल पीछे रह जाते हैंजज्बात सि... |
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November 2, 2012, 11:15 pm |
| जब होता है तुम्हें देखना,तब बंद कर लेता हूँ आँखेंऔरफिर तुम चली आती होंआँसू बन के...जब होता है तुम्हें पाना,तब महसूस कर लेता हूँहवाओं को,औरफिर तुम छू के निकल जाती हों...यूँ सरसराती...जब होता है तुम्हें छूना,तब सहारा लेता हूँस्याही और कागज काऔरफिर तुम आ जाती हों करीब...जब होता ... |
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October 31, 2012, 12:39 pm |
| एक दुनिया जो छोड़ आए,एक दुनिया बसाने के लिए...किसी अपनों को छोड़ आएउन्हीं अपनों को कभी,सहारा देने के लिए...चलता जा रहा हूँ सफर परजहाँ साथ है,खुशी,उमंगें,उम्मीद और हौसला...पर एक कोने में बैठी है,आँसू,गम और तन्हाई...जो याद दिलाती है,एक दुनिया जो छोड़ आए...आज अपनों से दूर सही,पर जुड... |
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October 25, 2012, 11:35 am |
| आपने किशोर दा का यह वाला गाना सुना ही होगा.... "आते-जाते खूबसूरत आवारा सड़कों पे... कभी-कभी इतेफ़ाक से,कितने अंजान लोग मिल जाते हैं... उनमें से कुछ लोग... भूल जाते हैं,कुछ याद रह जाते हैं..."इन चार लाइ... |
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October 22, 2012, 12:52 pm |
| कभी-कभी सोचता हूँ कि जिंदगी हमें चलाती है या हम उसे...क्या जिंदगी में बस वहीँ सब होना चाहिए जो केवल और केवल हम चाहते है...क्या जिंदगी में सबकुछ खुशी ही होती है या दुःख का मतलब भी समझ में आना चाहिए...हमें कभी-कभार अंदाजा भी नही लग पाता कि जिंदगी को हमसे क्या चाहिए...और हम उसे क्य... |
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October 20, 2012, 12:24 pm |
| कुछ रिश्ते होते हैं...जो नाम के मोहताज नही...उन्हें बेनामी रहना पसंद है,इस शर्त पर किएहसास कभी कम ना हों उन रिश्तों के लिए...कुछ रिश्ते होते हैं...जिन्हें दूरी पसंद हैऔर करीब आने का राश्ता,वे शायद भूला चुके होते हैं...कुछ रिश्ते होते हैं...नाकाब पहने...यूँ साथ चलते हैं जैसे...उन्... |
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October 16, 2012, 8:59 pm |
| जब-जब थामने की कोशिश करता हूँ, कुछ दूर जा खड़ी होती है गर बंद करना चाहूँ भी इसे, कुछ ढ़ीली सी पड़ जाती है | जब मतलब समझना चाहूँ,... |
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October 14, 2012, 3:46 pm |
| वो लड़का हर बार की तरह इस बार भी उस लड़की से मिल रहा था...जैसे ये दोनों पहले अनगिनत बार मिल चुके थे...और गवाह...ये फिजाएँ...बहती हवा...वक्त...इनकी मुस्कुराहट...पेड़-पौधे...चहचहाती चिडियाएँ थी...पर इस बार वक्त ने सबकुछ बदल दिया था...केवल इन दोनों को ही छोड़कर...फिजाएँ खामोश थी...हवाएँ कु... |
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October 11, 2012, 12:51 pm |
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