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Blog: अनवर सुहैल का रचना संसार

Blogger: anwar suhail
ऐतराज़ क्यों है आपको जो हम खुद को भेड़-बकरी मानते हैं तकलीफ क्यों है आपको जो हम बने हुए हैं हुकुम के गुलाम झल्लाते क्यों है आप जो हम बा-अदब खड़े मिलते हैं सिर झुकाए नाराज़ क्यों होते हैं आप जो हम अपने निजात के लिए गढ़ते रहते हैं नित नए आका             &... Read more
clicks 241 View   Vote 0 Like   2:42pm 18 Dec 2013 #
Blogger: anwar suhail
उन्हें विरासत में मिली है सीखकि देश एक नक्शा है कागज़ काचार फोल्ड कर लोतो रुमाल बन कर जेब में आ जायेदेश का सारा खजानाउनके बटुवे में हैतभी तो कितनी फूली दीखती उनकी जेबइसीलिए वे करते घोषणाएंकि हमने तुम परउन लोगों के ज़रियेखूब लुटाये पैसेमुठ्ठियाँ भर-भर केविडम्बना ये क... Read more
clicks 233 View   Vote 0 Like   3:15pm 14 Dec 2013 #
Blogger: anwar suhail
उन्हें विरासत में मिली है सीखकि देश एक नक्शा है कागज़ काचार फोल्ड कर लोतो रुमाल बन कर जेब में आ जायेदेश का सारा खजानाउनके बटुवे में है तभी तो कितनी फूली दीखती उनकी जेबइसीलिए वे करते घोषणाएंकि हमने तुम परउन लोगों के ज़रियेखूब लुटाये पैसेमुठ्ठियाँ भर-भर केविडम्बना ये ... Read more
clicks 240 View   Vote 0 Like   2:10pm 9 Dec 2013 #
Blogger: anwar suhail
समीक्षा : पहचान डॉ. रोहिणी अग्रवाल 'जनपथ'में प्रकाशित समीक्षा ... Read more
clicks 234 View   Vote 0 Like   3:41pm 24 Nov 2013 #
Blogger: anwar suhail
1-बताया जा रहा हमेंसमझाया जा रहा हमेंकि हम हैं कितने महत्वपूर्णलोकतंत्र के इस महा-पर्व मेंकितनी महती भूमिका है हमारीईवीएम के पटल परहमारी एक ऊँगली केज़रा से दबाव सेबदल सकती है उनकी किस्मतकि हमें ही लिखनी हैकिस्मत उनकीइसका मतलबहम भगवान हो गए…वे बड़ी उम्मीदें लेकरआ... Read more
clicks 264 View   Vote 0 Like   5:26pm 14 Nov 2013 #
Blogger: anwar suhail
आकाश में छाये काले बादलकिसान के साथ-साथ अब मुझे भी डराने लगे हैं...ये काले बादलों का वक्त नही है ये तेज़ धुप और गुलाबी हवाओं का समय है कि खलिहान में आकर बालियों से धान अलग हो जाए कि धान के दाने घर में पारा-पारी पहुँचने लगें कि घर में समृद्धि के लक्षण दिखें कि दीप... Read more
clicks 175 View   Vote 0 Like   3:04pm 27 Oct 2013 #
Blogger: anwar suhail
छोड़ता नही मौकाउसे बेइज्ज़त करने का कोईपहली डाले गए डोरेउसे मान कर तितलीफिर फेंका गया जालउसे मान कर मछलीछींटा गया दानाउसे मान कर चिड़ियासदियों से विद्वानों नेमनन कर बनाया था सूत्र"स्त्री चरित्रं...पुरुषस्य भाग्यम..."इसीलिए उसने खिसिया करसार्वजनिक रूप सेउछाला उसके ... Read more
clicks 133 View   Vote 0 Like   4:45pm 25 Oct 2013 #
Blogger: anwar suhail
बड़े जतन से संजोई किताबेंहार्ड बाउंड किताबेंपेपरबैक किताबेंडिमाई और क्राउन साइज़ किताबेमोटी किताबें, पतली किताबेंक्रम से रखी नामी पत्रिकाओं के अंकघर में उपेक्षित हो रही हैं अब...इन किताबों को कोई पलटना नही चाहताखोजता हूँ कसबे में पुस्तकालय की संभावनाएंसमाज के कर... Read more
clicks 151 View   Vote 0 Like   2:17pm 19 Oct 2013 #
Blogger: anwar suhail
हम क्या हैंसिर्फ पैसा बनाने की मशीन भर नइसके लिए पांच बजे उठ करकरने लगते हैं जतनचाहे लगे न मनथका बदनऐंठ-ऊँठ कर करते तैयारखाके रोटियाँ चारनिकल पड़ते टिफिन बॉक्स में कैद होकरपराठों की तरह बासी होने की प्रक्रिया मेंसूरज की उठान की ऊर्जाकर देते न्योछावर नौकरी कोऔर शाम क... Read more
clicks 129 View   Vote 0 Like   2:54pm 4 Oct 2013 #
Blogger: anwar suhail
मैं कैसे बताऊँ बिटिया हमारे ज़माने में माँ कैसी होती थी तब अब्बू किसी तानाशाह के ओहदे पर बैठते थे तब अब्बू के नाम से कांपते थे बच्चे और माएं बारहा अब्बू की मार-डांट से हमें बचाती थीं हमारी छोटी-मोटी गलतियां अब्बू से छिपा लेती थीं हमारे बचपन की सबसे सुरक्षित ... Read more
clicks 160 View   Vote 0 Like   6:45am 30 Sep 2013 #
Blogger: anwar suhail
एक धमाका फिर कई धमाके भय और भगदड़....इंसानी जिस्मों के बिखरे चीथड़े टी वी चैनलों के ओ बी वेन संवाददाता, कैमरे, लाइव अपडेट्स मंत्रियों के बयान कायराना हरकत की निंदा मृतकों और घायलों के लिए अनुदान की घोषणाएं इस बीच किसी आतंकवादी संगठन द्वारा धमाके में लिप... Read more
clicks 160 View   Vote 0 Like   2:59pm 28 Sep 2013 #
Blogger: anwar suhail
उड़ रही है  धूल चारों ओरछा रहा धुंधलका मटमैली शाम काछोटे-छोटे कीड़े घुसना चाहते आँखों मेंओंठ प्यास से पपडिया गए हैंचेहरे  की चमड़ी खिंची जा रही हैछींक अब आई की तबकलेजा हलक को आ रहा हैदिल है कि बेतरतीब धड़क रहा हैसाँसे हफ़नी में बदल गई हैंबेबस, लाचार, मजबूर, बेदमऔर ऐस... Read more
clicks 155 View   Vote 0 Like   2:42pm 25 Sep 2013 #
Blogger: anwar suhail
ये क्या हो रहा है ये क्यों हो रहा है नकली चीज़ें बिक रही हैंनकली लोग पूजे जा रहे हैं... नकली सवाल खड़े हो रहे हैं नकली जवाब तलाशे जा रहे हैं नकली समस्याएं जगह पा रही हैं नकली आन्दोलन हो रहे हैं अरे कोई तो आओ... आओ आगे बढ़कर मेरे यार को समझाओउसे आवाज़ देकर बुल... Read more
clicks 149 View   Vote 0 Like   3:16pm 23 Sep 2013 #
Blogger: anwar suhail
ऐसा नही है कि रहता है वहाँ घुप्प अन्धेरा ऐसा नही है कि वहां सरसराते हैं सर्प ऐसा नही है कि वहाँ तेज़ धारदार कांटे ही कांटे हैं ऐसा नही है कि बजबजाते हैं कीड़े-मकोड़े ऐसा भी नही है कि मौत के खौफ का बसेरा है फिर क्योंवहाँ जाने से डरते हैं हमफिर क्योंवहाँ ... Read more
clicks 151 View   Vote 0 Like   1:36pm 21 Sep 2013 #
Blogger: anwar suhail
एक बार फिर इकट्ठा हो रही वही ताकतें एक बार फिर सज रहे वैसे ही मंच एक बार फिर जुट रही भीड़कुछ पा जाने की आस में              भूखे-नंगों की एक बार फिर सुनाई दे रहीं,           वही ध्वंसात्मक  धुनें एक बार फिर गूँज रही फ़ौजी जूतों की थाप  एक बार फ... Read more
clicks 158 View   Vote 0 Like   3:23pm 10 Sep 2013 #
Blogger: anwar suhail
जिसने जाना नही इस्लाम वो है दरिंदा वो है तालिबान...सदियों से खड़े थे चुपचाप बामियान में बुद्ध उसे क्यों ध्वंस किया तालिबान इस्लाम भी नही बदल पाया तुम्हे ओ तालिबान ले ली तुम्हारे विचारों ने सुष्मिता बेनर्जी की जान....कैसा है तुम्हारी व्यवस्था ओ तालिबान!... Read more
clicks 157 View   Vote 0 Like   5:59am 6 Sep 2013 #
Blogger: anwar suhail
जैसे टूटता  तटबंध और डूबने लगते बसेरे बन आती जान पर बह जाता, जतन  से धरा सब कुछ कुछ ऐसा ही होता है जब गिरती आस्था की दीवार जब टूटती विश्वास की डोरज़ख़्मी हो जाता दिल छितरा जाते जिस्म के पुर्जे ख़त्म हो जाती उम्मीदें हमारी आस्था के स्तम्भ ओ बेदर्द नि... Read more
clicks 146 View   Vote 0 Like   2:31pm 3 Sep 2013 #
Blogger: anwar suhail
k ravindraतुम मेरी बेटी नही बल्कि हो बेटा...इसीलिये मैंने तुम्हे दूर रक्खा श्रृंगार मेज से दूर रक्खा रसोई से दूर रक्खा झाडू-पोंछे से दूर रक्खा डर-भय के भाव से दूर रक्खा बिना अपराध माफ़ी मांगने की आदतों से दूर रक्खा दुसरे की आँख से देखने की लत से....और बार-बारकिसी क... Read more
clicks 112 View   Vote 0 Like   9:53am 30 Aug 2013 #
Blogger: anwar suhail
के रवीन्द्र की पेंटिंगतुम्हें रोने की आज़ादीतुम्हें मिल जाएंगे कंधेतुम्हें घुट-घुट के जीने कामुद्दत से तजुर्बा हैतुम्हें खामोश रहकरबात करना अच्छा आता हैगमों का बोझ आ जाए तोतुम गाते-गुनगुनाते होतुम्हारे गीत सुनकर वोहिलाते सिर देते दाद...इन्ही आदत के चलते येज़माना ... Read more
clicks 131 View   Vote 0 Like   3:44pm 1 Aug 2013 #
Blogger: anwar suhail
उसके कहने परहमने किये गुनाह खुद फंस जाने काजोखिम उठाते हुएउसकी खुशी के लियेहमने किये अत्याचारबेज़ुबानों परनिहत्थों परमासूमों पर..उसकी नज़दीकी पाने के लियेहमने की चुगलियांऎसे लोगों कीजो जेनुईन थेजो प्रतिबद्ध थेजो उसके निज़ाम के खिलाफ़ थे...उसने हमारी प्रतिभा काभर... Read more
clicks 141 View   Vote 0 Like   5:21pm 27 Jul 2013 #
Blogger: anwar suhail
पहचान पर प्रतिक्रिया दें कृपया राजकमल प्रकाशन सेप्रकाशितमेरे उपन्यासपहचान परआपकी प्रतिक्रियाएंअपेक्षित हैं...'सादरअनवर सुहैल ... Read more
clicks 166 View   Vote 0 Like   3:57pm 22 Jul 2013 #
Blogger: anwar suhail
बेशक तुमने देखी नही दुनिया बेशक तुम अभी नादान हो बेशक तुम आसानी सेहो जाती हो प्रभावित अनजानों से भी बेशक तुम कर लेती हो विश्वास किसी पर भी बेशक तुम भोली हो...मासूम हो लेकिन मेरी बिटिया होशियार रहना ये दुनिया ईतनी अच्छी नहीं है ये दुनिया इतनी भरोसे लायक ... Read more
clicks 166 View   Vote 0 Like   2:34pm 20 Jul 2013 #
Blogger: anwar suhail
Dr Rohini Aggrawalपहचान: अनवर सुहैलराजकमल प्रकाशन, दिल्ली प्रथम संस्करण 2009मूल्य दो सौ रुपए’पहचान’: वर्चस्व की राजनीति में पहचान की लड़ाई अनवर सुहैल का ताजा उपन्यास ’पहचान’ इस अर्थ में विशिष्ट रचना है कि यह बदलती परिस्थितियों के संदर्भ में अपने आसपास हो रहे परिवर्तनों को नए ... Read more
clicks 172 View   Vote 0 Like   3:17pm 3 Jul 2013 #
Blogger: anwar suhail
श्री उमाशंकर तिवारी : अवकाशप्राप्त डी आई जी के पत्रपत्र 1.                                             3/10/2011प्रिय अनवर,आप सोचते होंगे, मैं पोस्टकार्ड पर पार्ट बार्इ पार्ट अपने विचार लिखकर क्यों भेज रहा हूं? तो सुनो:-‘पहचान’ के पन्ने पलटते ही लगा, इस पुस्तक में कुछ है। जब पूरा पढ़ा तो पाय... Read more
clicks 173 View   Vote 0 Like   3:43pm 28 Jun 2013 #
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