पहचान (pehchan)

कैप्शन जोड़ेंज़रूरी नहीं कि हम पीटें ढिंढोरा कि हम अच्छे दोस्त हैं कि हमें आपस में प्यार है कि हम पडोसी भी हैं कि हमारे साझा रस्मो-रिवाज़ हैं कि हमारी मिली-जुली विरासतें हैं कतई ज़रूरी नहीं है ये कि हम दुनिया के सामने अपने प्यार का इज़हार करें क्योंकि जब दोस्ती टूटती है जब प...
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  March 10, 2013, 8:28 pm
जाने क्यों आजकल जब भी देखता / सुनता हूँ ख़बरें तो धड़कते दिल से यही सुनना चाहता हूँ न हो किसी आतंकी घटना में किसी मुसलमान का हाथ...अभी जांच कार्यवाही हो रही होती है कि आनन्-फानन टी वी करने लगता घोषणाएं कि फलां ब्लास्ट के पीछे है मुस्लिम आतंकवादी संगठन...बड़ी शर्मिंदगी होती है ...
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  February 26, 2013, 9:09 pm
मेरे यह सब कहने का मतलब यह नहीं है कि आज के जो भी जन आंदोलन हैं उनसे जुड़ी कविताएं एकदम नहीं लिखी जा रही हैं। ऐसी कविताएं लिखी जा रही हैं, पर वे कविताएं और कवि, हिन्दी कविकी मुख्यधरा से अलग हाशिये पर हैं और हाशिये की जिन्दगी की कविता लिखते हैं।अभी हाल में लीलाध्र मंडलोई क...
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  February 21, 2013, 8:41 pm
सफल पुरुष होता है एक अच्छा अभिनेता भी...सफल पुरुष होता है जिद्दी, सनकी, आत्म-केंद्रित...सफल पुरुष ... रखता है जिस सीढ़ी पर कदम उसके नीचे के पायदान तोड़ देता है ताकि चढ़े न कोई और पहुंचे न कोई और उन बुलंदियों तक जहां गाडना है झंडे सफल पुरुष को...भूल जाता है सफल पुरुष अपने बीते दिन पु...
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  February 18, 2013, 8:06 pm
पुराने लोग कहते हैं भरता है पाप का घडाएक दिन ज़रूर अन्याय का होता है अंत और मजलूम जनता के दुःख-दर्द दूर हो जाते हैं उस दिन...पुराने लोग कहते हैं इंसान को दुःख से नहीं चाहिए घबराना कि सोना भी निखरता है आग में तप-कर रंग लाती है हिना पत्थर में घिस जाने के बाद....पुराने लोग कहते है...
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  February 6, 2013, 8:52 pm
reviw of hindi novel pehchan published by rajkamal prakashan review by Zahid Khan ...
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  February 3, 2013, 8:17 pm
पहचान (pehchan): poster kavita: poster made by K Ravindra......
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  January 28, 2013, 6:37 pm
poster made by K Ravindra......
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  January 28, 2013, 6:15 pm
के रविन्द्र की पेंटिंग मेरी कविताओं में     नही दीखते उड़ान भरते पंछी नहीं दीखता शुभ्र-नीला आकाश नही दीखते चमचमाते नक्षत्र नही दीखता अथाह विशाल समुद्र नही दीखता सप्तरंगी इन्द्रधनुष क्या ऐसा इसलिए है कि भूमिगत कोयला खदान के अँधेरों में खो गयी मेरी कल्पना शक्ति खो गयी ...
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  January 25, 2013, 7:05 pm
हिना फिरदौस मेरी बिटिया वह बोलती रेखाओं की भाषा जीवन की इक नई परिभाषा देती पिता को भरपूर दिलासा पापा "मुझमे है आशा ही आशा!"...
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  January 19, 2013, 8:26 pm
तुम कैसे बहके-बहके हो तुम कैसे उलझे-सुलझे हो तुम कैसी बातें करते हो तुम कैसी हरकत करते हो कोई जान नहीं पाता है कोई बूझ नहीं पाता है सब तुमसे डरते रहते हैं सब तुमरी बातें करते हैं चाहे तुम उनको देखो न चाहे तुम उनको चाहो न चाहे तुम उनको दुतकरो फिर भी वो तुमपे मरते हैं सब तुमस...
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  January 19, 2013, 7:56 pm
मत भेजो मुझे प्यार भरे एसएमएसथोक भाव में समय-कुसमय रात-बिरात....मुझे मालूम है नही बना सकते तुम, भावनाओं से ओत-प्रोत ऐसे संदेशे... नही लिख सकते तुम प्रेम-प्रीत में डूबी ऐसी पंक्तियाँ...इन्हें ज़रूर किसी और ने भेजा है तुम्हें जिसे तुम बिना सोचे-समझे कर देते हो अग्रसारित...कि मैं...
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  January 14, 2013, 8:39 pm
चलो अच्छा हुआ तुमने खुद कर लिया किनारा तुमने खुद छुडा लिया दामन तुमने खुद बचा लिया खुद को ..................................मुझसेमेरी परछाई भी अब नही पड़ेगी तुम पर तुम निश्चिन्त रहो कागज़ के उन पन्नों से क्यों डरते हो वे तो मैं नष्ट कर दूँगा उन तस्वीरों से क्यों डरते हो उन्हें मैं जला दूँगा हा...
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  December 4, 2012, 7:40 pm
 K RAVINDRA'S PAINTINGS तुम बुड्ढे हो गए पिताअब तुम्हें मान लेना चाहिएआने वाला है ‘द एण्ड’तुम बुड्ढे हो गए पिताकि तुम्हारा इस रंगमंच मेंबचा बहुत थोड़ा-सा रोलज़रूरी नहीं कि फिल्म पूरी होने तकतुम्हारे हिस्से की रील जोड़ी ही जाएइसलिए क्यों इतनी तेज़ी दिखाते होचलो बैठो एक तरफबच्...
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  November 17, 2012, 6:33 pm
फिर कम आने लगे मज़दूर फिर रुकने लगा खदान का विकासफिर खिलखिलाने लगे खलिहानफिर वयस्त हुए किसान... ये फसल कटाई का उत्सव है दोस्तोंये सपने पूरे होने की अलामतें हैंये आशा और विश्वास वाले दिन हैंये एक साल और जी लेने की ख्वाहिशें हैं...देखो तो कितने खुश हैं किसान कितनी प्रफुल्ल...
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  November 1, 2012, 6:57 pm
सबूत कर रहा हूं इकट्ठा वो सारे सबूतवो सारे आंकडे जो सरासर झूटे हैंऔर जिसे बडी खूबसूरती सेतुमने सच का जामा पहनाया हैकितना बडा छलावा हैमेरे भोले-भाले मासूम जनब-आसानी आ जाते हैं झांसे मेंओ जादूगरों ओ हाथ की सफाई के माहिर लोगोंतुम्हारा तिलस्म है ऎसाकि सम्मोहित से लोग कर ...
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  October 24, 2012, 7:23 pm
जुनून (चित्रकार के रवीन्द्र के लिए) होना चाहिए जुनून तभी मिल सकता है सुकून वरना किसे फुर्सत है किसी का नाम ले तुम्हारा जुनून ही तुम्हारी पहचान है जो देती है तुम्हें नित नई ऊंचाईयां नित नई उडान..... ...
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  October 23, 2012, 9:01 pm
उसके बारे में प्रचलित है कि वह थकता नहीं वह हंसता नहीं वह रोता नहीं वह सोता नहीं उसके बारे में प्रचलित है कि डांटने-गरियाने का उस पर असर नहीं होता बडा ही ढीठ होता है चरित्र इनका पिन चुभोने से या कोडा मारने से उसे दर्द नहीं होता उसे लगती नहीं ठंड गरमी और बरसात कहते हैं कि उ...
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  October 21, 2012, 7:40 pm
औरत ने अपने लिए रच लिए हैं नए ग्रन्थ औरत ने अपने लिए तराश लिए हैं नए खुदा औरत ने अपने लिए बना ली हैं नै राहें ...खोज लिए हैं नए पद -चिन्ह ..अब औरत सिराज रही है एक नई पृथ्वी एक नया सूरज एक नया आसमान ढूंढ लिया है अपने लिए एक नया साथी ...एक नया हमसफ़र ......
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  September 30, 2012, 7:45 pm
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  September 26, 2012, 11:02 am
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  September 19, 2012, 8:36 pm
(के रविन्द्र के लिए )होना चाहिए जूनून तभी मिल सकता है सुकून वरना किसे फुर्सत है किसी का नाम ले तुम्हारा जूनून ही है तुम्हारी पहचान जो देती है तुम्हे नित नई ऊंचाइयां नित नई उड़ान..... ...
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  September 19, 2012, 7:19 pm
आज फिर बारिश बेजोड़ है आज फिर काम पर नही जा पाएंगे हमआज फिर खोजा जाएगा अनाज चूहे के बिलों से आज फिर फाक़े के आसार हैं...बेशक होगी बारिश तुम्हारे लिए ख़ुशी की बातहमारा वजूद इस बारिश में घुल जाएगा, मिट तो नही जाएगा.......
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  September 3, 2012, 9:29 pm
कितनी बार लोगे परीक्षा मेरी कब तक करोगे परेशान कब तक देना होगा मुझेअपनी वफादारी का इम्तिहान इतने सारे तुहमत मुझपर इतने हैं आरोप कि मुझसे और नही अब ढोया जाता अपनी बदकिस्मती का बोझा हमने भी मिटटी सानी है हमने भी गारा ढोया है हमने भी ईंटें जोड़ी हैं तभी बना ये घर हम सबका......
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  September 2, 2012, 6:41 pm
बहुत काला है ये कोयला कालापन इसकी खूबसूरती है कोयला यदि गोरा हो जाए तो पाए न एक भी खरीदार कोयला जब तक काला है तभी तक है उसकी कीमत और जलकर देखो कैसा सुर्ख लाल हो जाता है इतना लाल! कि आँखें फ़ैल जाएँ इतना लाल! कि आंच से रगों में खून और तेज़ी से दौड़ने लगे इतना लाल! कि जगमगा ज...
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  August 31, 2012, 7:17 pm
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