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Blog: लफ्ज़-ए-ताइर

Blogger: शिशिर 'ताइर'
आज एक ऐसी फिल्म के बारे में बात करनी है जो की इस साल की सबसे कामियाब फिल्म बनने जा रही है...नाम है 'संजू'। पिछले हफ्ते रिलीज़ हुई इस फिल्म की ज़्यादातर लोग बहोत तारीफ़ कर रहे हैं और फिल्म ज़बरदस्त पैसा बना भी रही है । पर क्या वाकई ये इतनी उमदा और बेहतरीन फिल्म है??जवाब है... ना ।  स... Read more
clicks 30 View   Vote 0 Like   8:53am 5 Jul 2018 #
Blogger: शिशिर 'ताइर'
Barring Bahubali 2 (which wasn't an original Hindi film), 2017 has been a very dull year for Bollywood so far. Biggest names of the industry have garnered some of the weakest numbers, be it Tubelight, Jagga Jasoos or JHMS. Halls are running empty. So is this really surprising or alarming?There may be many factors and reasons for this dull show till date. But what I feel is, this is a healthy scenario which should have happened much earlier than this. Audiences were being taken for granted for last so many decades and till before few years, they had to accept whatever was offered to them. But things have changed drastically within last year or two. First there were smartphones and then c... Read more
clicks 37 View   Vote 0 Like   1:31pm 11 Aug 2017 #
Blogger: शिशिर 'ताइर'
आजकल देश की सेना पर रोज़ लगभग रोज़ हमले हो रहे हैं।  शायद देश को 'शहादत'की खबरों की इतनी आदत हो गई है की ज़्यादातर लोग अब इस बात पर गौर भी नहीं करते।  लेकिन सवाल ये है की आखिर कब तक हम यूँ ही सुनते रहे और सहते रहे? क्यों हमारे जवानों की ज़िन्दगी की अहमियत हम समझते नहीं? क्यों ह... Read more
clicks 52 View   Vote 0 Like   7:41am 2 May 2017 #
Blogger: शिशिर 'ताइर'
We are a nation highly obsessed with politics. Politics is what we eat, drink and breathe. It runs into our blood. People of our great nation turn to news channels for entertainment more than the real news. Checkout the shows!!! Starting from government forming to decision making at home, everything is filled with politics. We rarely think of something as 'for all'. Most of our thoughts are based upon what is there for me?Yes, it's human nature to think and behave for self benefit. But to become a great nation, we must rise above this. The people of great nations on this planet have taught us that, time and again.We are a nation surprisingly sentimental about things that matter less on a lar... Read more
clicks 53 View   Vote 0 Like   10:50am 7 Apr 2017 #
Blogger: शिशिर 'ताइर'
हम उस दौर में जी रहें हैं जहाँ टेक्नोलॉजीने हमारी ज़िन्दगी जितनी आसान कर दी है उतनी ही लाचार भी हैं। हम चीजों को आसान बनाने के चक्कर में शायद इतने उलझ गए की रुकना कहाँ है शायद हम समझ नहीं पा रहे।  और एक आम इंसान पर इसका फायदा जो हुआ है उतना ही नुकसान।मेरे हम उम्र लोग इस ... Read more
clicks 56 View   Vote 0 Like   8:50am 2 Apr 2017 #
Blogger: शिशिर 'ताइर'
करेंसी बैन ने जीवन परिवर्तन कर दिया। २ दिन से जहाँ देखो वहाँ बस कतारें ही नज़र आ रही है। यह स्थिति किसी के लिए बड़ी दर्द दायीं है तो कोई इस हाल का लुत्फ़ उठा रहा है। मैंने अपनी समझ के हिसाब से इसे शब्द देने की कोशीश की...लगी है ऐसी कतारेंबैंक और डाक खानों परसन्नाटा चींख रहा है... Read more
clicks 63 View   Vote 0 Like   2:28pm 13 Nov 2016 #
Blogger: शिशिर 'ताइर'
कितना हसीन ये मौसम लगता हैजब बादलों की रजाई ओढ़ेसूरज आसमान में सो जाता हैऔर पत्ते शाखों पर पहली बारिश में नहा करपूरे रंग से जब लहराते हैंपंछी चहचहाने लगेभीनी धरती से महेक उठेऔर हवाएँ मद्धम सी बहेतब गरम चाय की चुस्कियाँयारों की वो मस्तियाँसब यादें ताज़ा हो जाएऔर वो बा... Read more
clicks 63 View   Vote 0 Like   4:07am 18 Jul 2016 #
Blogger: शिशिर 'ताइर'
वो जो मेरी नाकामी की दुआएँ माँगते थे,सुना है अब खुदा पे ही यकीन नहीं रखते!इतनी खुराफ़ाती भी अच्छी नहीं है दिल,लोग बुरा मान जातें है, बेपर्दा जो मिल।मुनासिब कहाँ की सरेआम, हम ले नाम,दोस्तों का काम था, सो कर गए तमाम!थोड़ा 'हरामीपन'भी ज़रूरी है,साफ़ दिल, दुनिया समझे मज़बूरी है!रिश... Read more
clicks 58 View   Vote 0 Like   1:51pm 6 Jun 2016 #
Blogger: शिशिर 'ताइर'
पुणे में गुज़ारे ज़िन्दगी के कुछ यादगार सालों में एक सबसे अहम बात जो हुई वो थी 'अन्ना की टपरी'। ये गाना मेरे अज़ीज़ दोस्त अभय के भेजे की उपज थी और एमआईटी के हर स्टूडंट (?) की पसंद। यहाँ सबसे पहले उसी गाने की विडीओ लिंक है और उसके बाद… अन्ना की टपरी -२. अन्ना की टपरी -२अन्ना ... Read more
clicks 130 View   Vote 0 Like   3:31pm 8 Jan 2014 #
Blogger: शिशिर 'ताइर'
अब भी तुझसे कोई रिश्ता सा बना है,हाथ में हाथ नहीं, तू यादों से जुड़ा है। ख़त्म करने कि बात तू करना ना मुझसे,वजूद मेरा सिर्फ तेरे एहसास पे टिका है।  कोई बात नहीं गर तू वाक़िफ़ नहीं मुझसे,करता कहाँ कुबूल हर दुआ खुद है !अब भी अपने आप से घबराते है कितना,वो हर सुबह पत्थर से करते ... Read more
clicks 112 View   Vote 0 Like   8:37pm 21 Dec 2013 #
Blogger: शिशिर 'ताइर'
आओचलोहमभीकुछबवालमचातेहैं,अमन-ओ-सुकूंकोआवाज़लगातेहैं !बड़ेदिनहोगएकोईहरकतनहींकी,यारोंआजसारीहीकसरमिटातेहैं l कलतकजोबोलेतोअनसुनेरहें,अबचुपचापहमदास्ताँकहजातेंहैं l तेरीइनायतभीक्याखूबबरसतीहै,'काफ़िर' कहलाएवोजोसवालउठातेहैं l 'ताइर' कीबेफ़िक्रीपेशकक्योंह... Read more
clicks 102 View   Vote 0 Like   5:49pm 3 Jun 2013 #
Blogger: शिशिर 'ताइर'
इस हालात-ए-देश की बात क्या करूँ मैं गुस्सा हूँ, शर्मसार हूँ और फ़िर डरूं ?यहाँ रोज़ होता है मासूमों से खिलवाड़तबाह कर ज़िंदगियाँ  गुनहगार जिए आज़ादजिस 'औरत' को देवी बना के पूजा जाता हैउसी को हवस से सरेआम रौंदा जाता हैसंस्कृति और तहज़ीब का दावा होता हैपर आवाज़ जो उठ... Read more
clicks 103 View   Vote 0 Like   9:27am 23 Dec 2012 #
Blogger: शिशिर 'ताइर'
ना तहज़ीब की बात करेंगे ना मज़हब की,होगी जो बात, अब होगी हम सब की lछोटे छोटे टुकडो में बाँट लेना खुद को,फितरत-ए-इन्सा देखो चल रही गज़ब की l  मकसद लापता और राह चले गुमराह,इबादत भी ऐसी भला किस मतलब की।है अगर मौजूद वोह हर एक शेय में,मारते जिसे तुम वो भी औलाद है रब की।शामिल ना कर... Read more
clicks 128 View   Vote 0 Like   6:55pm 4 Dec 2012 #
Blogger: शिशिर 'ताइर'
अब उसे किस्तों में क्यों बाँट दिया हैदेश को 'बेच खाना'जब तय कर लिया है?कभी कच्चा तेल कभी ऍफ़डीआई रिटेल कभी पानी के नाम पर घोटाला किया है !सुनेहरे सपनों के झाल में यूँ उलझायामहंगाई का ज़हर सबने सब्र से पिया है l 'आम आदमी'की सरकार क्या खूब चलीहर एक 'भारतवासी'मर मर के ... Read more
clicks 91 View   Vote 0 Like   7:32pm 4 Oct 2012 #
Blogger: शिशिर 'ताइर'
अब उसे किस्तों में क्यों बाँट दिया हैदेश को 'बेच खाना' जब तय कर लिया है?कभी कच्चा तेल कभी ऍफ़डीआई रिटेल कभी पानी के नाम पर घोटाला किया है !सुनेहरे सपनों के झाल में यूँ उलझायामहंगाई का ज़हर सबने सब्र से पिया है l 'आम आदमी' की सरकार क्या खूब चलीहर एक 'भारतवासी' मर मर के जिय... Read more
clicks 110 View   Vote 0 Like   7:32pm 4 Oct 2012 #
Blogger: शिशिर 'ताइर'
इस तरह हर रोज़, नीलाम हो रहा सरेआम,वजूद-ए-हिन्दोस्ताँ मिट जाएगा, रहेगा सिर्फ नाम !जनता आम और ज़िन्दगी कोडियों के दाम,भ्रष्टाचारी और लाचारी, है सरकार का काम !एक होने की बात पर, एक एक कर बंट जाए,खुद का मतलब निकलते ही, हो जाए नियत हराम !सदियों पुरानी ग़लती बड़े फक्र से दोहराई ... Read more
clicks 117 View   Vote 0 Like   10:00pm 22 Sep 2012 #
Blogger: शिशिर 'ताइर'
सरकार 'लाचार' हैंदेश को लूटें बगैर चल नहीं सकतीजनता 'बीमार' हैंबातें करती हैं  पर लड़ नहीं सकती !सभी देशभक्त है यहाँ परखुद का फ़ायदा हो तब तकसभी ईमानदार है यहाँ परकिंमत छोटी हो तब तक !देश की चिंता सबको हैसिर्फ काम ना सूझे तब तकइज्ज़त सबकी सलामत हैकिस्सा ना खुले तब तक ! ... Read more
clicks 167 View   Vote 0 Like   8:21pm 13 Sep 2012 #
Blogger: शिशिर 'ताइर'
आज फिर एक बार चर्चे होंगे महान इतिहास केआज फिर रंगो से देशभक्ति ज़ाहिर होगीआज घर के बड़े, बच्चों को आज़ादी का पाठ देंगेमीडिया वाले नए 'फ्रीडम फाइटर्स' ढूंढ निकालेंगे !फिर भगतसिंह-सुखदेव की दास्ताँ कहेंगेफिर गाँधी के सत्याग्रह की दुहाई आज देंगेफिर सरदार के संकल्प की ... Read more
clicks 131 View   Vote 0 Like   9:30pm 15 Aug 2012 #
Blogger: शिशिर 'ताइर'
सुबह सुबह देखो अखबार के पन्नेगुनाहों का जैसे कोई ग्रन्थ होकहीं भ्रष्टाचार कहीं डकैतीकहीं खून तो कहीं बलात्कारकहीं आतंकी हमलाकहीं युद्ध का डंकाअच्छा कुछ पढने कोनया कुछ सिखने कोनज़र दौड़े भी तो कहाँ तक?मन में कभी व्यथा तो कभी खौफ़हावी हो जाते है इसकदरकी सवाल इतना ही ... Read more
clicks 147 View   Vote 0 Like   4:00am 18 Jun 2012 #
Blogger: शिशिर 'ताइर'
एक बिल्डिंग से निकल करवेहिकल पे थोड़ी दूर चल करएक बड़ी सी बिल्डिंग मेंघूस जाते है शौपिंग के बहानेया मूवी का लुत्फ़ उठानेऔर कुछ भी न सूझे तो खाना दबाने!वैसे तो कट जाता हैपर सोचो तो शहर का जीवनबहोत ही लगता है पकाने!पूरा हफ्ता कमाई में गुज़रेऔर वीकेंड फ़िज़ूल खर्ची करने ... Read more
clicks 124 View   Vote 0 Like   8:16am 4 Mar 2012 #
Blogger: शिशिर 'ताइर'
ऐसा भी नहीं की हमनें अब तक कुछ किया नहीं,पर बात ये भी है, जीना चाहिए जैसे, जिया नहीं।कभी दर्द कभी तनहाई कभी जश्न के बहाने पीया,पर ढूंढते रहे जिसको वो सुकून में ही पीया नहीं।कहने को तो जहाँ से किसी बात की कमी नहीं,दिल ने क्या कर ली उंस की ख्वाहिश, दिया नहीं।शुक्र कर खुदा 'ताइ... Read more
clicks 152 View   Vote 0 Like   7:50am 26 Jan 2012 #
Blogger: शिशिर 'ताइर'
अक्सरयूँहोताहैज़िन्दगीमेंकीहमजिनकेसाथरहनाचाहतेहोउनसेदूरहोनापड़ताहै l सफ़र चलता रहता हैं, लोग मिलते रहते हैं और बिछड़ते रहते हैं l वैसे तो आज कल 'सोसिअल नेटवर्किंग' और मोबाइल ने इन टच रहना बड़ा आसन कर दिया है...फिर भी साथ बने रहने का मज़ा अलग ही होता हैं l पर कभी कभी ऐसा ... Read more
clicks 130 View   Vote 0 Like   3:08pm 17 Nov 2010 #
Blogger: शिशिर 'ताइर'
एक लम्बे विराम के बाद फिर से ब्लॉग पर लिखाई की और लौटा हूँ । एक नयी ग़ज़ल, हज़ल की तरह पेश है...एक पूरा ही 'फ्यूज़न वर्ज़न'...सोच से लेकर लफ़्ज़ों तक...उम्मीद है पसंद आएगा आपको ।इस दौर में सबकुछ तो फ्यूज़न हो रहा हैं,तभी, एक-दूजे की समज का कंफ्यूज़न हो रहा हैं !इस असर से कुदरत भी कहाँ ... Read more
clicks 131 View   Vote 0 Like   7:25am 24 Oct 2010 #
Blogger: शिशिर 'ताइर'
पैसा...एक बिमारी कह लो या ज़रूरत...एक नशा कह लो या आदत...तुम चाह कर भी उस से मुह फेर नहीं सकते...और पा कर भी उसे हासिल कर नही सकते...क्यों की कमाते भी है तो उसे खर्च करने के लिए !और लोग क्या क्या नहीं करते उसके लिए...हर रोज़ कोई ना कोई नया करीना जान ने को मिलता हैं...और ये ही सब दिमाग में ... Read more
clicks 161 View   Vote 0 Like   8:15pm 16 Aug 2009 #
Blogger: शिशिर 'ताइर'
कल रात घर से थोडी दूरी पर एक विस्तार में एक छोटे से मन्दिर को ले कर बवाल मच गया। गुजरात हाई कोर्ट ने कुछ दिन पहले उस मन्दिर को हटाने का हुक्म जारी कर दिया था। पर जिनकी आस्था उस मन्दिर से जुड़ी हैं, उनको मंज़ूर नहीं। अब दो अलग अलग गुट हो गए, एक मन्दिर हटाने के समर्थन वाले और एक... Read more
clicks 126 View   Vote 0 Like   8:44am 4 Aug 2009 #
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