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कुछ मेरी कलम से kuch meri kalam se **

तुम्हे मैंनेजितना जाना बूंद बूंद ही जाना तुम वह नहीं ,जो दिखते   थे ..,तुम्हे जान कर भीअनजान रही मैं ....दो रूपों में ढले हुए तुम एक वह जिसे मैंने ..रचा अपनी कल्पनाओं में ...अपनी कामनाओं में ..अपनी इच्छाओं के साथ बुना और चाहा शिद्दत से और ....एक तुम वह थेजो थे अपनी ही राह केचलते मुस...
कुछ मेरी कलम से kuch meri kalam se **...
रंजना [रंजू भाटिया]
Tag :kuch yun hi kavita ..poem
  July 10, 2012, 1:26 pm
ज़िंदगी में अक्सर हमे पूर्वभास होने लगता है .किसी का ख़्याल अचानक से आ जाता है, संसार में जो कुछ होता है उसके पीछे कुछ ना कुछ कारण ज़रूर होता है कुछ का पता लग जाता है ! कुछ हम नही जान पाते टेलीपेथी से कई बार हम दूर घटने वाली घटनाओं को महसूस कर लेते हैं! कभी कभी ऐसी बाते आ ...
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रंजना [रंजू भाटिया]
Tag :lekh ....
  June 30, 2012, 11:52 am
न जाने क्यों ठहरे हुए पानी की तरह मेरे लफ्ज़ भी काई से कहीं मनमें ठिठक गए हैं ,सन्नाटे की आहट में न कोई एहसास न आंसुओं की गिरती बूंदें इसमें कोई लहर नहीं बनाती पर इस जमे हुए सन्नाटे में तेरे होने की सरसराहट सी एक उम्मीद जगाती हैकी कहीं से प्रेम की अमृत धारा फिर से इन जमे हु...
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रंजना [रंजू भाटिया]
Tag :kavita khmoshi .kuch yun hi
  June 22, 2012, 12:32 pm
 ऐ ज़िन्दगी ....कभी तू .....पढ़ लिया करती थी मेरे उन अनकहे सफों को भी जो आँखों के कोनो में सिमट कर बिखर जाया करते थे समेट लेती थी तब उन्हें अपने इस अंदाज़ से कि दिल के हर कोने के अँधेरे ,उजाले में बदल जाया करते थे बदलते मौसम के बिखराव की तरह रोज़ पीले गिरते पत्ते हरियाले और नयी कलि...
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रंजना [रंजू भाटिया]
Tag :.kuch yun hi
  June 6, 2012, 10:36 am
क्यों बना लिए हैंहमने ....कुछ सपनो के पुलजिस पर उड़ रहे हैंहम.......कागज की चिन्दियों की तरहकुछ भी तो नही है शेषअब .......मेरे -तुम्हारे बीचक्यों हमने....यह कल्पना के पंख लगा केरिश्तों को दे दिया है एक नाम ..जिस पर .....रुकना -चलना-मिलनाफ़िर अलग होनासिर्फ़ हवा है .....जो बाँध ली है बंद मुट्ठ...
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रंजना [रंजू भाटिया]
Tag :dayari ke puraane panno se ..kavita
  June 1, 2012, 6:19 pm
तुम्हे मैंने जितना जाना बूंद बूंद ही जाना ...तुम वह नहीं ,जो दिखते  थे तुम्हे जान कर भी ..अनजान रही मैं ..दो रूपों में ढले हुए तुम एक वह ,जिसे मैंने रचा अपनी कल्पनाओं में ..अपनी कामनाओं में ..अपनी इच्छाओं के साथ बुना और चाहा ..शिद्दत से और एक तुम वह थे ..जो थे अपनी ही राह केचलते मुस...
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रंजना [रंजू भाटिया]
Tag :kavita khmoshi .kuch yun hi
  May 25, 2012, 12:44 pm
पुस्तक "स्त्री होकर सवाल करती है "( बोधि प्रकाशन ) -----------------------------------------------------------कवयित्री -रंजू भाटिया ----------------------------------------------------------रंजू भाटिया ,मोनालिसा की तस्वीर देख रही हैं !फिर खुद को देख रही हैं !मोनालिसा के होठों की मुस्कान और उसकी आँखों की उदासी को समझने की कोशिश कर रही हैं रंजू !...
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रंजना [रंजू भाटिया]
Tag :samiksha
  May 21, 2012, 3:35 pm
नींद भी अजब होती है ..ज़िन्दगी और सपनो सी यह भी आँख मिचोली खेलती रहती है ..इसी नींद के कुछ रंग यूँ उतरे हैं इस कलम से ... नहीं खरीद पाती बीतती रातों से अब कोई ख्वाब यह आँखे उफ़ !!!यह नींदभी अब कितनी महंगी है ......... **********************क्यों आज कल हर पल रहती है मेरी आँखे नींद से बोझिल क्य...
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रंजना [रंजू भाटिया]
Tag :नींद सपने ख्वाब कुछ यूँ ही
  May 15, 2012, 1:08 pm
बहुत पहले साहिर ने लिखा ...एक बादशाह ने बना के हसीं ताजमहल..दुनिया को मुहब्बत की निशानी दी है...|| और यह ताजमहल वाकई  दुनिया में प्रेम का प्रतीक  बन  गया है आगरा कई बार जाना हुआ है और हर बार ताजमहल  के साथ साथ आगरा शहर को भी देखा है पर वह वही जहाँ जैसे बना था वैसे ह...
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रंजना [रंजू भाटिया]
Tag :VYANG
  May 12, 2012, 2:45 pm
कल्पना का संसार सपनो से अधिक बड़ा होता है ,सपने जो हमे आते हैं वो असल में कही ना कही हमारी कल्पना से ही जुड़े होते हैं !जब हम बच्चे होते हैं तो तब हमारा मस्तिष्क एक कोरे काग़ज़ की तरह होता है धीरे धीरे जैसे जैसे हमारा मस्तिष्क परिपक्व होता जाता है वैसे वैसे उस में हम...
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रंजना [रंजू भाटिया]
Tag :lekh kalpana
  May 9, 2012, 3:57 pm
एक दफा वो याद है तुमको ,बिन बत्ती जब साईकल का चालान हुआ था हमने कैसे भूखे प्यासों बेचारों सी एक्टिंग की थी हवलदार ने उल्टा .एक अट्ठनी दे कर भेज दिया था एक चवन्नी मेरी थी ,वो भिजवा दो ....सब भिजवा दो मेरा वो समान लौटा दो ....एक इजाजत दे दो बस ,जब इसको दफना उंगी मैं भी वही सो जाउंगी .....
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रंजना [रंजू भाटिया]
Tag :pustak samiksha gulzar ijajat
  May 1, 2012, 5:45 pm
रिश्तेरोड पर लगे नियोन साइन सेकभी जलते कभी बुझतेकभी रंग बदलतेपर हमेशा लुभातेफरिश्ते से रिश्ते दर्द में रिसतेपल पल को तरसते मिल के भी नही मिलते जाने कैसे हैं इस के रस्ते.गहराई में डूबे हुए सम्पूर्ण रिश्ते अक्सर बेनाम ही होते हैंन जाने फ़िर क्यों जरुरी होता है इनको कोई ...
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रंजना [रंजू भाटिया]
Tag :kuch yu hi kavita short poems rishte
  April 29, 2012, 11:36 am
तुम्हे मैंने जितना जानाबूंद बूंद ही जाना तुम वह नहीं ,जो दिखते  थे तुम्हे जान कर भी अनजान रही "मैं "दो रूपों में ढले हुए तुम ..एक वह जिसे मैंने रचा अपनी कल्पनाओं में ,अपनी कामनाओं में ,अपनी इच्छाओं के साथ बुना और चाहा शिद्दत से और एक तुम वह थे जो थे अपनी ही राह के चलते मुसफ़ि...
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रंजना [रंजू भाटिया]
Tag :kuch yun hi kavita ..apni baat
  April 23, 2012, 11:40 am
पढ़ रही हूँ ..ज़िन्दगी की किताब आहिस्ता आहिस्ता वर्क दर वर्क पन्ना दर पन्ना लफ्ज़ बा लफ्ज़ फिर इसके एक एक हर्फ को उतारूँ अपने जलते हुए सीने में और इस तरह फिर बीता दूँ अपनी लम्बी ज़िन्दगी की तन्हा रात ..वर्ना यह अँधेरे मुझे अपने में समेट कर खाली किताब सा कर देंगे !!!...
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रंजना [रंजू भाटिया]
Tag :kuch yun hi kavita ..apni baat
  April 18, 2012, 6:32 pm
जाने कब तक उम्र बीतेगी इन्तजार में एक मुद्दत से है राह पर नजर टिकी हुई चल रहे हैं वक्त का यही है तकाजा उस पार क्या है यह किसको खबर हुई मिली तो मिली बस रुसवाइयां जिंदगी में मौत के आने की धड़ी है अब ठहरी  हुई बाँट गई सब खुशियाँ जो साथ थी तन्हाई की अब तो आदत हमको हुई कह तो रहे हैं...
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रंजना [रंजू भाटिया]
Tag :kuch yu hi ...
  April 13, 2012, 12:49 pm
कौन कहता है कि..हो जाता है एक नज़र में प्यारदो दिल न जाने कब एक साथधड़कने लगते हैं...तोड़ लायेंगे चाँद सितारेऔर बिछा देंगे फलकक़दमों के नीचेऐसे सिरफिरे वायदे भीकसमों की जुबान होते हैं,पर सब खो जाता हैकुछ ही पलों में...वो दर्द को छूने की कोशिश..वो इंतज़ार के बेकली के लम्हे..आंखो...
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रंजना [रंजू भाटिया]
Tag :dayari ke puraane panno se ..kavita
  April 7, 2012, 1:14 pm
कोईतोहोता ......दिलकीबातसमझनेवालासुबहकेआगोशसेउभरासूरजसादहकतारातभरचाँदसाचमकनेवालापनीलीआखोंमेंहैखवाबकई ...कोईसंजोलेता ..इनमेंसंवरनेवालाथरथरातेलबोंपरठहराहैलफ्जोंकासावनकोईतोहोता ..इनमेंभीगनेवालादिलकीधडकनोंमेंकांपतेहैंकितनेहीएहसासकोईतोहोता ..इनएहसासों...
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रंजना [रंजू भाटिया]
Tag :dayari ke puraane panno se ..kavita
  April 1, 2012, 12:13 pm
सुबह की पहली किरणे सी मैं न जाने कितनी उमंगें और सपनों के रंग ले कर तुमसे बतियाने आई थी ...लम्हे .पल सब बीत गए मिले बैठे मुस्कराए हम दोनों ही पर चाह कर भी कुछ कह न पाये बीते जितने पल वह बीते कुछ रीते कुछ अनकहे भीतर ही भीतर रिसते रहे छलकते रहे चुप्पी के बोल   इस दिल से उस दिल की ...
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रंजना [रंजू भाटिया]
Tag :kuch yun hi kavita ..poem
  March 21, 2012, 1:34 pm
अमृता इमरोजलेखिका – उमात्रिलोकमूल्य – 120प्रकाशक – पेंगुइन बुक्स इंडिया प्रा. लि. भारतउमात्रिलोककी किताब को पढ़ना मुझे सिर्फ़ इस लिए अच्छा नही लगा कि यह मेरी सबसे मनपसंद और रुह में बसने वाली अमृता के बारे में लिखी हुई है ..बल्कि या मेरे इस लिए भी ख़ास है कि इसको इमरोज़ न...
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रंजना [रंजू भाटिया]
Tag :PUSTAK SAMIKSHA AMRITA IMROZ AMRITA PREETAM
  March 17, 2012, 12:10 pm
जब कहा मैंने उस से कि मैं तो  हूँबहती नदिया एक निरतंर बहती धारा लम्हों से टकराती बल खाती इठलाती अपनी मंजिल सागर से मिलने चलती जाती हूँ सुन कर वो हंसा और बोला .कि कैसे मानूँ  ..?खड़ा था मैं भी वहीँ  किनारे अपनी दोनों बाहें  पसारे चला भी था साथ तुम्हारे चाहे वह दो ही कदम थे पर ...
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रंजना [रंजू भाटिया]
Tag :kavita ..
  March 12, 2012, 11:32 am
छलक रहा है जो रंग नजरों से  यही तो रंग सजना  प्यार का हैदिल में उठ रही  हैं जो धीरे से हिलोरेयह नशा सब  बसन्ती बयार  का हैउड़ा के ले गया है चैन और करार मेरा आंखो में ख्वाब इन्द्रधनुषी बहार का है पलकों में बंद है बस एक सूरत तेरी दिल में नशा तेरे ही दुलार का है  निहारूं  हर पल म...
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रंजना [रंजू भाटिया]
Tag :holi kavita ..
  March 5, 2012, 1:07 pm
तुम याद आए आज फिर_सुबह उठते ही गरम चIय के साथ,जब जीभ जल गयी थी,पेपरवाले ने ज़ोर से फेंका अख़बार जब,मुह्न पर आकर लगा था ज़ोर से,बाथरूम मैं जाते वक़्त,जब मेरा पैर भी दरवाज़े से उलझ गया था,फिर सब्ज़ी काटते वक़्त जब उंगली काट बैठी थी,नहाते वक़्त उसी कटी अंगुली में जब साबुन लगा थ...
कुछ मेरी कलम से kuch meri kalam se **...
रंजना [रंजू भाटिया]
Tag :.kuch yun hi
  February 29, 2012, 1:58 pm
जीवन की रेल पेल में हर संघर्ष को झेलते हर सुख दुःख को सहते कभी मैंने चाही नही इनसे मुक्ति पर कभी बैठे बैठे यूं ही अचानक जब भी याद आई तुम्हारी तब यह मन आज भी भीगने सा लगता है चटकने लगते हैं तन मन मेंजैसे मोंगारे के फूलऔर जैसे सर्दी से कांपते बदन में तेरी याद का साया गुनगुनी ...
कुछ मेरी कलम से kuch meri kalam se **...
रंजना [रंजू भाटिया]
Tag :.kuch yun hi
  February 27, 2012, 6:00 pm
प्रेमकेविषयमेंबहुतकुछपढ़ाऔरसमझागया है...प्रेमकानामसोचते ही ...नारीकाध्यानख़ुदहीआजाताहै ...क्यों कि  नारीऔर प्रेमकोअलगकरकेदेखाहीनहीजाता|मैनेजितनीबारअमृताज़ीकोपढ़ाप्रेमकाएकनयारूपदिखानारी मेंऔरउनकीकुछपंक्तियां दिलकोछूगयी |उनकेलिखेएकनॉवल ""दीवारोकेसाए''म...
कुछ मेरी कलम से kuch meri kalam se **...
रंजना [रंजू भाटिया]
Tag :prem ehsaas kuch baate
  February 20, 2012, 2:47 pm
बसंती  ब्यार साखिले  पुष्प साउस अनदेखे साए ने भरा दिल कोप्रीत की गहराई से,खाली सा मेरा मनगुम हुआ हर पल उस मेंऔर  झूठे भ्रम कोसच समझता रहा ,मृगतृष्णा बना यह  जीवन  भटकता रहा न जाने किन राहों परह्रदय में लिए झरना अपार स्नेह का यूं ही निर्झर  बहता रहा,प्यास बुझ न सकी दिल की  ...
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रंजना [रंजू भाटिया]
Tag :.kuch yun hi
  February 1, 2012, 3:54 pm
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