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Blog: बातें अपने दिल की

Blogger: Nihar Ranjan
कब तक मिथ्या के आवरण में रौशनी भ्रम देती रहेगी कब तक भ्रामक रंगों में बहकर उम्मीद अपनी नैया खेती रहेगी ?आप पन्नों में लिपटे इतिहास को बार-बार खोल लें  वही शतरंज, वही बिसात, वही मोहरे वही सज्जनों के अस्तित्व पर छाये घने कोहरे, घने कोहरे हर युग की यही व्यथा है वही कल की कथा ... Read more
clicks 156 View   Vote 0 Like   5:00am 30 Oct 2014 #
Blogger: Nihar Ranjan
इस अंतहीन विस्तार में मैं देखता हूँ चालाक, चतुर आँखें सुनता हूँ, वासना की लपलपाती जीभ पर दौड़ते वीर्यधारी महापुरुषों का उद्घोष घोर तृप्ति, घोर संतोष पाता हूँ, अपने कर्णपटों पर सुतिक्त स्वाद आधुनिक सुप्रभ दुनिया का अपरिमित अभिमाद शिखर है, शिखर-रोहण की अदम्य चाह है ज्यों... Read more
clicks 129 View   Vote 0 Like   7:30am 21 Sep 2014 #
Blogger: Nihar Ranjan
आमावस्या के टिमटिमाते तारों की फ़ौज के बीच से पूर्णिमा की निर्मल विभा के बीच भागते हुए मन बार-बार यही पूछता है-आदमी क्या चाहता है? रंगहीन, रव-हीन आकाश की शून्यता से भागकर  इन्द्रधनुषी रंगों के बीच खड़ी वयसहीन आकृतियों से लिपटते हुए  ध्वनित मन बार-बार यही पूछता है-आदमी क... Read more
clicks 133 View   Vote 0 Like   10:28am 6 Sep 2014 #
Blogger: Nihar Ranjan
विहान की पहली भास से दिवस के अवकाश तक पल-पल में सब, है जाता बदलपरिवर्तन रहा अपनी चाल चल चढती, बढती, ढलती धूप रात्रि का भीतिकर स्वरुप लौटे विहग अपने नीड़ों में जो गए थे प्रात निकल परिवर्तन रहा अपनी चाल चल पोटली लिए किसान चले हैं  देख आसमान हो अन्नवर्षा या अकाल इस मौसम से उस ... Read more
clicks 133 View   Vote 0 Like   12:43am 29 Aug 2014 #
Blogger: Nihar Ranjan
इसमें कोई संदेह नहीं  आपका नमक खाया हैखाया है, पसीने में बहाया है पर आपने शोणितपान करते कभी सोचा है रक्त में निहित सामुद्रिक स्वाद के पीछे क्या हैअब कहिये नमकहराम कौन है ?(निहार रंजन, ऑर्चर्ड स्ट्रीट, १७ अगस्त २०१४)... Read more
clicks 128 View   Vote 0 Like   2:24am 18 Aug 2014 #
Blogger: Nihar Ranjan
कई वर्षो से मैंने यही महसूस किया किथोड़ा सा मान-मर्दन, थोड़ा सा राष्ट्रवाद थोड़ा सा स्वाभिमान, थोड़ी सी आत्माअगर मार दी जाए और थोड़ा सा घुटना झुका दिया जाए तो जीवन का हर सुख क़दमों में आ जाता है नील-दृगों का हरित विस्तार लावण्य का शहद और स्वेद का लवण अंतहीन यामिनी में बिखरे क्ष... Read more
clicks 188 View   Vote 0 Like   12:25am 9 Aug 2014 #
Blogger: Nihar Ranjan
प्रेमिका अनवरत मिलन-गीत गाती है और ये कदम हैं जो लौट नहीं पाते भेड़ियों के बारे कहा गया था वो आदिम शाकाहारी हैं गाँव में शहर के कुछ लोग ऐसी ही घोषणाएं करते हैं यही सब सुनकर मैं पलायन कर गया गाँव के चौक तक आकर माँ ने आवाज़ दी थीलेकिन बेटे के क्षुधा-क्रंदन ने मुझे विक्षिप्त क... Read more
clicks 133 View   Vote 0 Like   1:06am 30 Jul 2014 #
Blogger: Nihar Ranjan
इन सीलन भरी दीवारों वाले तमतृप्त वातायनहीन कमरे में सिलवट भरे बिस्तर, और  यादों की गठरी वाली इस तकिये पर एक टुकड़ा धूप, दो टुकड़ा चाँदतीन टुकड़े नेह के, चार टुकड़े मेंह केफाँकते हुएअसीरी के इस दमघोंटू माहौल मेंकविता कहती है कि दम घुट जाए तो अच्छा है नहीं गाये जाते हैं गीत ... Read more
clicks 144 View   Vote 0 Like   8:27am 18 Jul 2014 #
Blogger: Nihar Ranjan
कलम! धुंआ है, आग है, पानी है कलम! इसी से लिखनी तुझे कहानी है कलम! दुःख है, स्नेह है, निराशा है, आशा है कलम! सबके जीवन में इसी का बासा है कलम! दिल है कि बुझता है, जलता है कलम! दिल है कि पिघलता है, मचलता है कलम! देख लो क्या-क्या है जीवन की अदा में कलम! ढूंढो क्या छुपा है सिंजन की सदा में &... Read more
clicks 140 View   Vote 0 Like   12:04am 23 Jun 2014 #
Blogger: Nihar Ranjan
शोणित व नख व मांस, वसा अंगुल शिखरों तक कसा कसा  आड़ी तिरछी रेखाओं में  कहते, होता है भाग्य बसा हाथों की दुनिया इतनी सी वो उसका हो या मेरा हो फिर क्यों विभेद इन हाथों में गर चुम्बन लक्ष्य ही तेरा हो हाथें तब भी होंगी ये ही रुधिर में धार यही होगा  रेखाविहीन इन हाथों में जब ... Read more
clicks 152 View   Vote 0 Like   11:29pm 11 Jun 2014 #
Blogger: Nihar Ranjan
इस इक्कीसवी सदी में इतना हो चुका है पर आकुल ज्वाला के साथ आई इन अग्नि सिक्त फूलों में ना रंग है ना महक हैना दूर-दूर तक कोई चहक है बस, कसक ही कसक है और मेरे विक्षिप्त मन से निक्षिप्त शब्दों  में उद्वेलित सागर की उत्तरंग लहरों सा उफान है पर सच है, इन प्रश्नों का उत्तर बहुत म... Read more
clicks 154 View   Vote 0 Like   11:33pm 6 Jun 2014 #
Blogger: Nihar Ranjan
अबकी, जबकि मैं निकल पड़ा हूँ तोया जंगल में आग होगीया मेरे हाथों में नाग होगा पर इतना ज़रूर तय है कि मेरी छह-दो की यह काया दंश से बेदाग़ होगा पूरे जंगल में मैंने घूम कर देख लिया है दूध और बिना दूध के थनों और स्तनों को पी-पी कर एक तरफ धामिन और नाग का मिलाप हो रहा हैऔर दूसरी तरफ बस व... Read more
clicks 161 View   Vote 0 Like   3:45am 6 Jun 2014 #
Blogger: Nihar Ranjan
कौन जानता है किसकी दंतपंक्ति है,किसका हाथ है किसका 'तार'है कौन वो रूपोश हैकिसका ये विस्तार है नहीं, संगीत नहीं नहीं, नहीं, नहीं इनमें संगीत नहीं नाद नहीं,  नर्दन है  क्रंदन है, घोर क्रंदन हैअप्रत्यास्थ है, अखंडनीय है,  अधर्षनीय हैकितना जिद्दी है बजता ही रहता है प्रा... Read more
clicks 134 View   Vote 0 Like   11:52pm 30 May 2014 #
Blogger: Nihar Ranjan
उधर से तुम हाथ उठाओ, इधर से हम हाथ उठायेंइसी तरह से, चलो जश्न की रात बिताएंकई दिन हैं बीते, तो ये रात आई किस्सा बड़ा है, हम कैसे सुनायें मुन्तज़िर तुम भी थे, मुन्तजिर मैं भी था लो आखिर में चल ही पड़ी हैं हवाएं जुबां पर आ ना सकेगी दूरियों की बात खरामा-खरामा कदम तो ब... Read more
clicks 147 View   Vote 0 Like   8:46am 24 May 2014 #
Blogger: Nihar Ranjan
बहुत शान्ति है इस खटिये मेंजिसमे धंस कर, धंस जाता हूँ अपने आप मेंबहुत दूर, बहुत अंदर, आत्मिक-आलाप मेंजिसमे न बल्ब है, न रौशनी हैन शोर है, न मांग है, न आपूर्ति हैना विरोध है, ना स्वीकृति हैन स्वाप्तिक उपवन है, न अवचेतन है, न सच्ची जागृति हैहै तो बस खाट के ये चार खूंटेइनसे चिपट... Read more
clicks 139 View   Vote 0 Like   12:36am 18 May 2014 #
Blogger: Nihar Ranjan
प्रसंग एक- कुछ नया नहींयह गरीब! पिसता था, पिसता है, पिसता ही रहेगा  देह घिसता था, घिसता है, घिसता ही रहेगा किसी खेत में, किसी कारखाने में, किसी वेश्याघर में मरेगा, कटेगा, बिकेगा छला है, जलेगा, भुनेगा गिरेगा, गिरेगा, गिरेगा जब-जब चुनाव आयेंगे कोई गाल छूएगा कोई भाल चूमेगा कोई ... Read more
clicks 137 View   Vote 0 Like   5:14am 11 May 2014 #
Blogger: Nihar Ranjan
फिर उसी आनंद की तलाश में लौट आया हूँ पिया के पाश में कब कौन जी से चाहता, पिया से दूर जाना और पिया बिनहो वियोगी, कविता बनाना पर ये जीवन, हाय निर्मम! कभी हमसे पूछ पाता है कोई स्नेही, जिसे बिरहा लुभाता ? है कोई रागी, हो जिसे बिछोह-राग?   है कोई परितुष्ट, कर अपने कंज-मुखी का त्या... Read more
clicks 128 View   Vote 0 Like   2:28am 6 May 2014 #
Blogger: Nihar Ranjan
मैं जनता हूँ, अनिर्दिष्ट पथों में ही आत्मा सृत्वर है मैं जानता हूँ, भव-कूप का अंतहीन स्तर हैमैं जानता हूँ, कितना निर्दय काल का कर है मैं जानता हूँ, भूतल से नभ के बीच कितने यमित स्वर हैं मैं जानता हूँ, कितना निर्वचनीय यह आत्मिक समर हैऔर जब अपने यमित करों से आत्मिक स्पर्श ... Read more
clicks 177 View   Vote 0 Like   4:20am 5 May 2014 #
Blogger: Nihar Ranjan
कैद रहने दो मुझे दोस्त, कोई हवा ना दोरहने दो ज़ख्म मेरे साथ, कोई दवा ना दो इन तल्ख एहसासों को उतर जाने दो सुखन में लिखने दो दास्ताँ-ए-खला, मुझको नवा ना दो जज़्ब होने दो, हर कुछ जो है शब के पास   होने दो मह्व सितारों में, मुझको सदा ना दो इन सितारों में जो अक्स बन, फिरता है बारहा ... Read more
clicks 149 View   Vote 0 Like   12:44am 1 Mar 2014 #
Blogger: Nihar Ranjan
लाशें ये किसकी है, लाशों का पता, कौन कहेखून बिखरा है, मगर किसकी ख़ता, कौन कहे वो तो मकतूल की किस्मत थी, मौत आई थीऐसे में किस-किस को दें, कातिल बता, कौन कहे मत कहो उनके ही हाथों से,हुआ था गुनाह  वो तो हथियारों ने की रस्म अता, कौन कहे   ये नयी  बात  नहीं है, जो  तुम घबराते हो... Read more
clicks 128 View   Vote 0 Like   1:35am 13 Feb 2014 #
Blogger: Nihar Ranjan
आपके चेहरे की यह ललाई जो उभर आई हैमांसल-पिंडों की थपकियों से आपके मुंह से झड़ते ये ‘मधुर’ बोलजो बहुत सुनते आये हैं पूंजीवादियों से अब क्रय-और विक्रय केइस खेल में चिंतालीन हो पूछता रहता हूँ अपनी तन्हाइयों सेकि ये आदमी के अंदर कायह पूंजीवादी शैतान कब मरेगा सदा के लिए? अब आ... Read more
clicks 134 View   Vote 0 Like   1:28am 27 Jan 2014 #
Blogger: Nihar Ranjan
सावन भादो की बात नहींबारहमासी यह नाता है देखो कैसी नियति इसकी पानी भी आग लगाता है  उद्योग, वसन व भोजन में महता इसकी है जीवन में प्याले में, रस में, दर्पण में तन के दूषण के क्षालन में कभी लवण, कभी यौगिक बन जल घुल, बचता है जलने सेबचता है लपट में मिलने से पर मूल रूप में आत... Read more
clicks 197 View   Vote 0 Like   1:47am 21 Jan 2014 #
Blogger: Nihar Ranjan
जानता हूँ कि एक दिन   समय के साक्षी ये सारे शब्द जो लिखे हैं मुक्त या छंदबद्ध  कभी मस्ती में डूब कर कभी अपनी पीड़ा से ऊब कर  गुम हो जाएंगे एक दिन, मेरी तरहफिर भी लिखता हूँ कि लिखना है मुझे  समय का चाक घूमता रहेगा नयी भाषाएँ जन्म लेती रहेंगी शील और अश्लील के नए अर्थ हो... Read more
clicks 156 View   Vote 0 Like   3:23am 15 Jan 2014 #
Blogger: Nihar Ranjan
फिर वही, संध्या सुंदरी है फिर वही, कुसुम-निढाल चंचरी हैफिर वही, मनमोही अरुणाभा है फिर वही, वादियों में तिमिर जागा है फिर वही, क्षितिज में व्याप्त तन्हाई हैशाम घिर आई है फिर वही, रिक्त आकाश हैफिर वही, अभ्रित-भास है फिर वही, पक्षी-दल उड्डीन हैं फिर वही, घर लौटने सब लीन हैं फिर ... Read more
clicks 165 View   Vote 0 Like   2:09am 7 Jan 2014 #
Blogger: Nihar Ranjan
अस्त-व्यस्त अकुलायी लपटेंअकबर का प्रभाहीन स्वर्ण-क्षत्र  याचनारत श्रद्धालु यत्र-तत्र सर्वत्र बस इतना ही ज्वालामुखी मंदिर का विस्तार उसपर ये कुहासा और ठाड़ कहो क्या है रोमांच भरने को वहां ? यही सवाल थे और मैं चुप था क्योंकि मंदिर में वही है जो तुमने कहा है तुम या मैं य... Read more
clicks 163 View   Vote 0 Like   2:34am 24 Dec 2013 #
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