| राजू और मुंबईराजू एकअनाथपरईमानदार ,शिक्षित , भोला , हसमुखमनमेंकुछबननेकेसपनेसंजोयेहुएइलाहबादसेमुंबई आताहै. उसकेपासनारहनेकेलिएछतहैनाखानेकेलिएरोटीहै. न ही मुंबईमेंउसकाकोईअपना है. अपनेजापानीजूते, इंग्लिशपेंट, रूसीटोपीकोपहिनकरवहरस्तेमेंपैदलहीचलदेताहै. ... |
| यह है नरसिंहपुर की शारदा मढिया नरसिंहपुरशारदामढियाकोपुलकीमढियाकेनामसेभीजानाजाताहै. माँभगवतीशारदाजोनरसिंहपुरकीप्राचीनसींगरीनदीकेतटपरपीपलऔरबरगदकेसम्मलितवृक्षकेनीचेनिर्मितशारदामढियामेंजीवंतस्थापितहैंकेप्रतियहाँकेजनमानसमेंअटूटश्रद्धा, भक्तिऔ... |
Tag :धार्मिक स्थल: नरसिंहपुर
| यह है नरसिंहपुर की शारदा मढिया माँ भगवती शारदा जो नरसिंहपुर की प्राचीन सींगरी नदी के तट पर पीपल और बरगद के सम्मलित वृक्ष के नीचे निर्मित शारदा मढिया में जीवंत स्थापित हैं।नरसिंहपुर शारदा मढिया को पुल की मढिया के नाम से भी जाना जाता है के प्रति यहाँ ... |
Tag :धार्मिक स्थल: नरसिंहपुर
| प्रभातफेरी : मंत्र मुग्ध करती हुई रामधुन के साथ अन्धकार को दूर भगाता हुआ सूर्य का प्रकाश गगन मंडल पर जब छाने की बेला आ गयी हो और इस समय प्रभात फेरी में चाहे भारी बरसात हो या कड़ाके की सर्दी जब 50 से 70 स्त्री- पुरुष की टोली झूमते नाचते, गाते बजाते सभी मंदिर... |
| प्रभातफेरी सुबह सुबह धोती कुरता पहनते हुए वे राधेश्याम सीताराम धुन सुनते हुए अपने अपनेघरों से निकलने के लिए तैयार होते हैं। हाथों में मंजीरा, तुरही और लोकल वाद्य यन्त्र बजाते हुएअपने अपने घरों से निकल कर वे एक टोली बनाते हुए नरसिंह मंदिर तक पहुँचते हैं प्रातः... |
| परिधि असतोमासद्गमय,तमसोमाज्योतिर्गमयमृत्युर्माअमृतंगमय" "सभीसुखी, निरोगीरहे ,विश्वकाकल्याणहोप्राणीयोंमेंसद्भावनाहो" इसप्रकारकेउच्चविचाररखनेवालेअपनेहितोंकीतिलांजलिदेनेवालेमानवकेमूलस्वाभाव" परमार्थ " कीरक्षाकरनेहमारेभारतकेहीसंतहै .भारतकीइसीम... |
| परिधि 'परिधि' या'पिंजरा' वहहोताहैजिसमेपालतूपशु- पक्षियोंकोबंदकियाजाताहै .'अध्यात्मिक' अर्थमेंपिंजरा 'शरीर' कोभीकहाजाताहैजिसमे'आत्मा' कैदहोतीहैपिजरेमें बंदसभीजीवजंतुओंको'मुक्तिकीआकांक्षा' होतीहै. कुसंगतिहमेशाकुसंस्कार- हिंसा, नशा,स्वार्थ,रुढ़िवादीविचा... |
| अमर शहीद-दादाजी द्वितीय विश्व युद्ध के समय चीन , जापान , रंगून , बर्मा सभी भारत का ही अंश थे सुभाष चन्द्र बोस ने "तुम मुझे खून दो ,मैं तुम्हे आज़ादी दूंगा'' का नारा दिया। उस समय अपने परिवार का पालन पोषण करने हेतु भारतीय जनता ब्रिटिश फ़ौज में शामिल हुयी थी 'नेताजी' सुभाष चन्द... |
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February 7, 2013, 10:35 pm |
| जागो मोहन प्यारे...! डॉमनमोहनसिंहभारतकेचौदहवेंसुशिक्षित, समझदारऔरयोग्यप्रधानमंत्रीहैंजिन्होनेपंजाबविश्वविद्यालयसेअपनीमैट्रिकुलेशनपरीक्षाउत्तीर्णकीतथाअर्थशास्त्रकीशिक्षाग्रहणकरनेयूनिवर्सिटीऑफकैम्ब्रिज,ब्रिटेनगए, तत्पश्चातऑक्सफोर्डयूनिवर्सिट... |
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January 26, 2013, 10:10 pm |
| कलयुगीदशानन रावन का मर्दन क्यों हुआ इसके अनेक कारण है। पहला कारण है जब- जब दशानन रुपी झूठ, छल, कपट, वासना, क्रोध, भय, अहंकार , लालच, आसक्ति, इर्ष्या , द्वेष,घ्रणा की अति हुई तब- तब राम रुपी प्रेम, संयम, साहस , सादगी, निस्वार्थता, पुनर्जागरण, कर्मठता, मि... |
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November 10, 2012, 10:56 pm |
| From grandparents: maternal and paternal both till our Generation.There is a seed of inspiration in every family .Be it Patriotism, Spiritualism, Business, Politics, Education or any evil tradition of society.We inherit qualities from our parents. That is why it is said as the seed is sown .so will ripe. According to the need of Country It was indispensable to save Maa Bharati (Our Country India) from the powerful paws of Britishers to save our values, prosperity and other things. To fullfil this purpose My both Paternal and Maternal Side fought for freedom and some of them became IMMORTAL Martyr. ... |
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October 26, 2012, 2:44 pm |
| From grandparents: till our Generation There is a seed of inspiration in every family .Be it Patriotism, Spiritualism, Business, Politics, Education or any evil tradition of society.We inherit qualities from our parents. That is why it is said as the seed is sown .so will ripe. According to the need of Country It was indispensable to save Maa Bharati (Our Country India) from the powerful paws of Britishers to save our values, prosperity and other things. To fullfil this purpose My both Paternal and Maternal Side fought for freedom and some of them became IMMORTAL Martyr. ... |
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October 26, 2012, 2:44 pm |
| महिला जाति के साथ ये उपचार : मानवता पर शर्म दिल्लीकीहीनहींपूरेभारतकीमहिलाओंऔरयहाँतककीमासूमकन्याओंकी चीखहमसबसुनरहेहैं, "बचाओबचाओअरेकोईतोबचाओ" इसतरहशरीरकोमात्रएकखिलौनासमझके शारीरिकरूपसेअपमानितकरकेहमेंक्योंमारा जारहाहै ? आखिरहमारादोषक्याहै? हमखिलौ... |
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October 15, 2012, 11:19 pm |
| अद्वितीय अनुपम पाठशाला कुछ गंभीर चिंतन, मनन के बाद मन को हलका करने की बात हो तो सर्वप्रथम मनोरम स्थल पर घूमने की बात आती है. संगीत ,चुटकुले सुनना सुनाना या अपनी मनपसंद खरीद दारी तो आम तौर पर चलते -फिरते ही हो जाती हैं परन्तु मन को तरोताजा करने के लिए रमण... |
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October 14, 2012, 11:25 pm |
| पाठशाला कुछ गंभीर चिंतन, मनन के बाद मन को हलका करने की बात हो तो सर्वप्रथम मनोरम स्थल पर घूमने की बात आती है. संगीत ,चुटकुले सुनना सुनाना या अपनी मनपसंद खरीद दारी तो आम तौर पर चलते -फिरते ही हो जाती हैं परन्तु मन को तरोताजा करने के लिए रमणीक स्थलों का भ्... |
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October 14, 2012, 11:25 pm |
| अद्वितीय अनुपम पाठशाला कुछ गंभीर चिंतन, मनन के बाद मन को हलका करने की बात हो तो सर्वप्रथम मनोरम स्थल पर घूमने की बात आती है. संगीत ,चुटकुले सुनना सुनाना या अपनी मनपसंद खरीद दारी तो आम तौर पर चलते -फिरते ही हो जाती हैं परन्तु मन को तरोताजा करने के लिए रमण... |
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October 14, 2012, 11:25 pm |
| अंधेरे हैं मन के दिया तो जला ले “दोषसभीमेंहोताहै परन्तु लोगअपनेदोषोंकोनदेखतेहुएदूसरोंकेदोषोंकोदेखनेमेंअपनी बुद्धिमानीसमझतेहैं अगरस्वयंकाएकहाथटूटाहोतो येनहींदेखतेकि उनका एकहाथटूटाहैऔर दुसरेकाहाथटूटाहोतोउसे तुरंत लूला कहनेसेब... |
| " अहम् " ,'द्वन्द' और 'मंथन' से 'अतृप्त' अंतस ढूंढता है बस तेरा ही आश्रय जीवन व्यथित , सांसे क्षणिक क्या लाये थे क्या ले जाएंगे.भटकता है मन फिर भी जगत मेंअपने अन्तर में समेट लो ज्योति से परम -ज्योति कहलाऊं अब क्यूँ नहीं छुड़वाते 'झंझावात' जगत के,और ये संघर्ष समय क... |
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September 9, 2012, 9:19 pm |
| संस्कार "सभी सत्य पर चले ज्ञान के प्रकाश से अपने मन का हर एक कोना प्रकाशित रखे , हे प्रभु हमारे परिवार, समाज और देश को ही नहीं दुनिया को भी अंधकार से दूर ले जाने वाले ऐसे ज्योतिर्मय पथ पर ले चले. " हमारे भारत देश में अध्यात्मिक ज्योति को अखंड ज्वाला बनाने वाले ... |
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September 6, 2012, 2:55 pm |
| सभी सत्य पर चले ज्ञान के प्रकाश से अपने मन का हर एक कोना प्रकाशित रखे , हे प्रभु हमारे परिवार, समाज और देश को ही नहीं दुनिया को भी अंधकार से दूर ले जाने वाले ज्योतिर्मय पथ पर ले चले. हमारे देश में अध्यात्मिक ज्योति कि अखंड ज्वाला फ़ैलाने वाले साधू संत समय -समय पर अपने कृपा... |
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September 6, 2012, 2:55 pm |
| परिवर्तन का मतलब अपने संस्कारों वेद, पुरान आदि धर्म गर्न्थों के कारण भारत विश्व में " विश्वगुरु" कहलाता है. हिन्दू धर्म विश्व का सबसे प्राचीन धर्म है आज उसी हिन्दू धर्म के मूल्य ,संस्कार को पाश्चात्य सभ्यता के दानव ने अपने पाश में जकड लिया ... |
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September 3, 2012, 5:31 pm |
| भारत विश्व में अपने संस्कारों और वेद, पुरानों धर्म गर्न्थों के अध्ययन के कारन " विश्वगुरु" कहलाता है. आज यही मूल्य यही संस्कार पाश्चात्य सभ्यता के दानव ने अपने पाश में जकड लिए हैं . इन संस्कारों को पश्चिमी राक्षस से मुक्त कराने क्या परिवेर्तन लाने होंगे?यह आ... |
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September 3, 2012, 5:31 pm |
| यदि बेटी को ससुराल प्रतिकूल मिलता है तो वास्तविक अभिशाप उसे ही सबसे अधिक झेलना पड़ता है. माता-पिता अपनी बेटी को वंश परंपरान्तार्गत संस्कार देकर पढ़ाते-लिखाते है और उसे अपने पैरों पे खड़े होने की शिक्षा देते हैं की समय पड़ने पर वह अपने जीवनसाथी के साथ कंधे से कन्धा... |
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September 2, 2012, 7:33 pm |
| एक बूँद के प्यासे हम प्रेम तो जीवन का आधार है, धुरी है. केंद्र है. बिना प्रेम .स्नेह. अनुराग की भावना के जीवन निष्प्राण है. नीरस है . तनिष्क और सुजाता की शादी को लगभग पाँच साल हो गए थे. तनिष्क और उसकी माँ को सुजाता से दहेज के लेन-देन को लेकर शिकायत थी तनिष्क की माँ ने ... |
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August 24, 2012, 11:33 am |
| प्रेम तो जीवन का आधार है, धुरी है. केंद्र है. बिना प्रेम .स्नेह. अनुराग की भावना के जीवन निष्प्राण है. नीरस है. तनिष्क और सुजाता की शादी को लगभग पाँच साल हो गए थे. तनिष्क और उसकी माँ को सुजाता से दहेज के लेन-देन को लेकर शिकायत थी तनिष्क की माँ ने इसी बात पर सुजाता को मा... |
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August 24, 2012, 11:33 am |
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