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Blog: काग़ज़ की नाव (मेरे गीत)

Blogger: अज्ञात
सूरज आग उगलता जाता।नभ में घन का पता न पाता।१।जन-जीवन है अकुलाया सा,कोमल पौधा मुर्झाया सा,सूखा सम्बन्धों का नाता।नभ में घन का पता न पाता।२।सूख रहे हैं बाँध सरोवर,धूप निगलती आज धरोहर,रूठ गया है आज विधाता।नभ में घन का पता न पाता।३।दादुर जल बिन बहुत उदासा,चिल्लाता है चातक ... Read more
clicks 77 View   Vote 0 Like   6:29am 29 Aug 2016
Blogger: अज्ञात
सूरज की भीषण गर्मी से,लोगो को राहत पहँचाता।।लू के गरम थपेड़े खाकर,अमलतास खिलता-मुस्काता।।डाली-डाली पर हैं पहनेझूमर से सोने के गहने,पीले फूलों के गजरों का,रूप सभी के मन को भाता।लू के गरम थपेड़े खाकर,अमलतास खिलता-मुस्काता।।दूभर हो जाता है जीना,तन से बहता बहुत पसीना,शीत... Read more
clicks 121 View   Vote 0 Like   6:14am 14 May 2016
Blogger: अज्ञात
जब तक तन में प्राण रहेगा, हार नहीं माँनूगा।कर्तव्यों के बदले में, अधिकार नहीं माँगूगा।।टिक-टिक करती घड़ी, सूर्य-चन्दा चलते रहते हैं,अपने मन की कथा-व्यथा को, कभी नहीं कहते हैं,बिना वजह मैं कभी किसी से, रार नहीं ठाँनूगा। कर्तव्यों के बदले में, अधिकार नहीं माँगूगा।।जीवन ... Read more
clicks 102 View   Vote 0 Like   2:49pm 22 Nov 2015
Blogger: अज्ञात
रंग-रंगीली इस दुनिया में, झंझावात बहुत गहरे हैं।कीचड़ वाले तालाबों में, खिलते हुए कमल पसरे हैं।।पल-दो पल का होता यौवन,नहीं पता कितना है जीवन,जीवन की आपाधापी में, झंझावात बहुत उभरे हैं।कीचड़ वाले तालाबों में, खिलते हुए कमल पसरे हैं।।सागर का पानी खारा है,नदिया की मीठी धा... Read more
clicks 148 View   Vote 0 Like   1:47pm 27 Sep 2015
Blogger: अज्ञात
चमक और दमक में, कहीं खो न जाना!कलम के मुसाफिर, कहीं सो न  जाना!जलाना पड़ेगा तुझे, दीप जगमग, दिखाना पड़ेगा जगत को सही मग, तुझे सभ्यता की, अलख है जगाना!! कलम के मुसाफिर, कहीं सो न  जाना!सिक्कों की खातिर कलम बेचना मत,कलम में छिपी है ज़माने की ताकत,भटके हुओं को सही पथ दिखान... Read more
clicks 144 View   Vote 0 Like   2:08am 30 May 2015
Blogger: अज्ञात
गीत सुनाती माटी अपने, गौरव और गुमान की।दशा सुधारो अब तो लोगों, अपने हिन्दुस्तान की।।खेतों में उगता है सोना, इधर-उधर क्यों झाँक रहे?भिक्षुक बनकर हाथ पसारे, अम्बर को क्यों ताँक रहे?आज जरूरत धरती माँ को, बेटों के श्रमदान की।दशा सुधारो अब तो लोगों, अपने हिन्दुस... Read more
clicks 124 View   Vote 0 Like   2:15pm 24 Apr 2015
Blogger: अज्ञात
 मधुमेह हुआ जबसे हमको, मिष्ठान नही हम खाते हैं।बरफी-लड्डू के चित्र देखकर,अपने मन को बहलाते हैं।। आलू, चावल और रसगुल्ले,खाने को मन ललचाता है,हम जीभ फिराकर होठों पर,आँखों को स्वाद चखाते हैं।मधुमेह हुआ जबसे हमको,मिष्ठान नही हम खाते हैं।।  गुड़ की डेली मुख में रखकर... Read more
clicks 209 View   Vote 0 Like   5:50am 5 Mar 2015
Blogger: अज्ञात
नया वर्ष स्वागत करता है , पहन नया परिधान ।सारे जग से न्यारा अपना , है गणतन्त्र महान ॥ज्ञान गंग की बहती धारा ,चन्दा , सूरज से उजियारा ।आन -बान और शान हमारी -संविधान हम सबको प्यारा ।प्रजातंत्र पर भारत वाले करते हैं अभिमान ।सारे जग से न्यारा अपना , है गणतन्त्र महान ॥शीश मुकुट ... Read more
clicks 202 View   Vote 0 Like   8:25am 1 Jan 2015
Blogger: अज्ञात
मधुर पर्यावरण जिसने, बनाया और निखारा है,हमारा आवरण जिसने, सजाया और सँवारा है।बहुत आभार है उसका, बहुत उपकार है उसका,दिया माटी के पुतले को, उसी ने प्राण प्यारा है।।बहाई ज्ञान की गंगा, मधुरता ईख में कर दी,कभी गर्मी, कभी वर्षा, कभी कम्पन भरी सरदी।किया है रात को रोशन, दिय... Read more
clicks 181 View   Vote 0 Like   2:17pm 29 Nov 2014
Blogger: अज्ञात
जो हैं कोमल-सरल उनको मेरा नमन।जो घमण्डी हैं उनका ही होता पतन।।पेड़ अभिमान में थे अकड़ कर खड़े, एक झोंके में वो धम्म से गिर पड़े, लोच वालो का होता नही है दमन।जो घमण्डी हैं उनका ही होता पतन।।सख्त चट्टान पल में दरकने लगी, जल की धारा के संग में लुढ़कने लगी, छोड़ देना पड़... Read more
clicks 179 View   Vote 0 Like   10:54am 29 Oct 2014
Blogger: अज्ञात
जब भी सुखद-सलोने सपने,  नयनों में छा आते हैं।गाँवों के निश्छल जीवन की, हमको याद दिलाते हैं।सूरज उगने से पहले, हम लोग रोज उठ जाते थे,दिनचर्या पूरी करके हम, खेत जोतने जाते थे,हरे चने और मूँगफली के, होले मन भरमाते हैं।गाँवों के निश्छल जीवन की, हमको याद दिलाते हैं... Read more
clicks 204 View   Vote 0 Like   2:03pm 30 Sep 2014
Blogger: अज्ञात
गजल और गीत क्या है,नहीं कोई जान पाया है।हृदय की बात कहने को,कलम अपना चलाया है।।मिलन की जब घड़ी होती,बिछुड़ जाने का गम होता, तभी पर्वत के सीने से,निकलता  धार बन सोता,उफनते भाव के नद को,करीने से सजाया है।हृदय की बात कहने को,कलम अपना चलाया है।।बिछाएँ हों किसी ने जब,वफा की ... Read more
clicks 204 View   Vote 0 Like   9:42am 20 Sep 2014
Blogger: अज्ञात
गन्दुमी सी पर्त ने ढक ही दिया आकाश नीला देखकर घनश्याम को होने लगा आकाश पीला छिप गया चन्दा गगन में, हो गया मज़बूर सूरज पर्वतों की गोद में से बह गया कमजोर टीला बाँटती सुख सभी को बरसात की भीनी फुहारें बरसता सावन सुहाना हो गया चौमास गीला   पड़ गये झूले पुराने न... Read more
clicks 156 View   Vote 0 Like   12:01pm 26 Jul 2014
Blogger: अज्ञात
वक्त सही हो तो सारा, संसार सुहाना लगता है।बुरे वक्त में अपना साया भी, बेगाना लगता है।।यदि अपने घर व्यंजन हैं, तो बाहर घी की थाली है,भिक्षा भी मिलनी मुश्किल, यदि अपनी झोली खाली है,गूढ़ वचन भी निर्धन का, जग को बचकाना लगता है।बुरे वक्त में अपना साया भी, बेगाना लगता... Read more
clicks 178 View   Vote 0 Like   12:40pm 11 Jul 2014
Blogger: अज्ञात
गन्दुमी सी पर्त ने ढक ही दिया आकाश नीला देखकर घनश्याम को होने लगा आकाश पीला छिप गया चन्दा गगन में, हो गया मज़बूर सूरज पर्वतों की गोद में से बह गया कमजोर टीला बाँटती सुख सभी को बरसात की भीनी फुहारें बरसता सावन सुहाना हो गया चौमास गीला  पड़ गये झूले पुराने नीम ... Read more
clicks 172 View   Vote 0 Like   1:14pm 1 Jul 2014
Blogger: अज्ञात
जो हैं कोमल-सरल उनको मेरा नमन।जो घमण्डी हैं उनका ही होता पतन।।पेड़ अभिमान में थे अकड़ कर खड़े,एक झोंके में वो धम्म से गिर पड़े,लोच वालों का होता नही है दमन।जो घमण्डी हैं उनका ही होता पतन।।सख्त चट्टान पल में दरकने लगी,जल की धारा के संग में लुढ़कने लगी,छोड़ देना पड़ा कंकड़ों को वतन... Read more
clicks 181 View   Vote 0 Like   1:36pm 25 Jun 2014
Blogger: अज्ञात
मित्रों।फेस बुक पर मेरे मित्रों में एक श्री केवलराम भी हैं। उन्होंने मुझे चैटिंग में आग्रह किया कि उन्होंने एक ब्लॉगसेतु के नाम से एग्रीगेटर बनाया है। अतः आप उसमें अपने ब्लॉग जोड़ दीजिए। मैेने ब्लॉगसेतु का स्वागत किया और ब्लॉगसेतु में अपने ब्लॉग जोड़ने का प्रय... Read more
clicks 145 View   Vote 0 Like   5:33am 24 Jun 2014
Blogger: अज्ञात
चार दिनों का ही मेला है, सारी दुनियादारी।लेकिन नहीं जानता कोई, कब आयेगी बारी।।अमर समझता है अपने को, दुनिया का हर प्राणी,छल-फरेब के बोल, बोलती रहती सबकी वाणी,बिना मुहूरत निकल जायेगी इक दिन प्राणसवारी।लेकिन नहीं जानता कोई, कब आयेगी बारी।।ठाठ-बाट और महल-दुमहले, साथ न तेरे ... Read more
clicks 162 View   Vote 0 Like   1:56pm 8 Jun 2014
Blogger: अज्ञात
अमृत रास न आया हमको,गरल भरा हमने गागर में।कैसे प्यास बुझेगी मन की,खारा जल पाया सागर में।।कथा-कीर्तन और जागरण,रास न आये मेरे मन को।आपाधापी की झंझा में,होम कर दिया इस जीवन को।वन का पंछी डोल रहा है,भिक्षा पाने को घर-घर में।कैसे प्यास बुझेगी मन की,खारा जल पाया सागर में।।आज ध... Read more
clicks 163 View   Vote 0 Like   11:37am 5 May 2014
Blogger: अज्ञात
इन्साफ की डगर पर, नेता नही चलेंगे।होगा जहाँ मुनाफा, उस ओर जा मिलेंगे।।दिल में घुसा हुआ है,दल-दल दलों का जमघट।संसद में फिल्म जैसा,होता है खूब झंझट।फिर रात-रात भर में, आपस में गुल खिलेंगे।होगा जहाँ मुनाफा उस ओर जा मिलेंगे।।गुस्सा व प्यार इनका,केवल दिखावटी है।और देश... Read more
clicks 187 View   Vote 0 Like   2:38pm 23 Apr 2014
Blogger: अज्ञात
 भटक रहा है आज आदमी, सूखे रेगिस्तानों में।चैन-ओ-अमन, सुकून खोजता, मजहब की दूकानों में।चौकीदारों ने मालिक को, बन्धक आज बनाया है,मिथ्या आडम्बर से, भोली जनता को भरमाया है,धन के लिए समागम होते, सभागार-मैदानों में।पहले लूटा था गोरों ने, अब काले भी लूट रहे,धर्मभीरु भक्तों को, ... Read more
clicks 204 View   Vote 0 Like   8:00am 18 Apr 2014
Blogger: अज्ञात
बाँटता ठण्डक सभी को, चन्द्रमा सा रूप मेरा।तारकों ने पास मेरे, बुन लिया घेरा-घनेरा।।रश्मियों से प्रेमियों को मैं बुलाता,चाँदनी से मैं दिलों को हूँ लुभाता,दीप सा बनकर हमेशा, रात का हरता अन्धेरा।तारकों ने पास मेरे, बुन लिया घेरा-घनेरा।।मैं मुसाफिर हूँ-विहग हूँ रात का,संय... Read more
clicks 181 View   Vote 0 Like   8:50am 13 Feb 2014
Blogger: अज्ञात
धनु से मकर लग्न में सूरज, आज धरा पर आया।गया शिशिर का समय और ठिठुरन का हुआ सफाया।।गंगा जी के तट पर, अपनी खिचड़ी खूब पकाओ,खिचड़ी खाने से पहले, निर्मल जल से तुम नहाओ,आसमान में खुली धूप को सूरज लेकर आया।गया शिशिर का समय और ठिठुरन का हुआ सफाया।।स्वागत करो बसन्त ऋतु का, जीवन में ... Read more
clicks 171 View   Vote 0 Like   12:51pm 14 Jan 2014
Blogger: अज्ञात
अपना देश महान बनायें।आओ नूतन वर्ष मनायें।। मातम भी था और हर्ष था,मिला-जुला ही गयावर्ष था,भूल-चूक जो हमने की थीं,उन्हें न फिर से हम दुहरायें। अपना देश महान बनायें।आओ नूतन वर्ष मनायें।। कभी न हो कोई दिन काला,सूरज-चन्दा लाये उजाला,छँटे कुहासा-हटे हताशा,ग़म के बादल कभ... Read more
clicks 174 View   Vote 0 Like   1:16am 29 Dec 2013
Blogger: अज्ञात
गजल और गीत क्या है,नहीं कोई जान पाया है।हृदय की बात कहने को,कलम अपना चलाया है।।मिलन की जब घड़ी होती,बिछुड़ जाने का गम होता, तभी पर्वत के सीने से,निकलता  धार बन सोता,उफनते भाव के नद को,करीने से सजाया है।हृदय की बात कहने को,कलम अपना चलाया है।।बिछाएँ हों किसी ने जब,वफा की ... Read more
clicks 221 View   Vote 0 Like   12:57pm 21 Dec 2013
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