| हमारे एक परिचित आजकल बहुत परेशान रहते हैं, वो इतना टूट गये हैं कि ज़िन्दगी से ही मुख मोड़ लिया है उन्होंने। बार-२ एक ही बात उन्हें झकझोरती है कि क्यों नहीं उन्होंने हमारी बात मान ली थी, जो हमने उनसे २ साल पहले कही थी। हमने उन्हें Health Insurance कराने की सलाह दी थी, जो उन्होंने हँसते ... |
नीड़ का निर्माण फिर-फिर......
| किसी का जरा सा लालच और हम में से ही कुछ लोगों की ज़रा सी बेफ़िक्री कितनी बडी घटना और तबाही का वायस हो सकती है, यह अभी हाल की ही एक घटना से प्रकाश में आया है। एक प्राइवेट हास्पीटल की एक नर्स के लालच से एक हँसता-खेलता परिवार तबाह हो गया। वह नर्स हास्पीटल के ब्लड-बैंक में तैनात थ... |
नीड़ का निर्माण फिर-फिर......
|
|
|
December 1, 2012, 2:35 pm |
| आज मैं उस विषय पर संक्षेप में लिखने जा रही हूँ, जो अक्सर ही मेरे मर्म को भेदता है... मैंने ये महसूस किया है कि लोगों के बीच में गाँधी की बस इतनी सी पहचान है कि उन्होंने भगत सिंह को मरवा दिया, अंग्रेज सरकार से उन्हें बचाने के लिए भीख नहीं मांगी...इस विषय में मैं इतना ही कहूँग... |
नीड़ का निर्माण फिर-फिर......
|
|
|
November 27, 2012, 4:33 pm |
| मुझे उनकी काया पाषाण की तरह लगती थी हमेशा। क्योंकि उस काया में सोच के ही बवंडर उठते थे, वो सोच जिसका रास्ता सिर्फ मस्तिष्क से होकर जाता था। उस रास्ते पर दूर-2 तक कोई पगडंडी नहीं दिखाई देती थी, जो दिल को छू कर भी गुजरती हो। जिन्दगी के हर फलसफे को तराजू में तौल कर देख... |
नीड़ का निर्माण फिर-फिर......
|
|
|
October 29, 2012, 10:31 am |
| एक बार एक कहानी पढी थी, जो आज तक मेरे ज़ेहन से नहीं निकली है और जब-तब मेरे मस्तिष्क को झकझोरती रहती है... एक सवाल बार-२ उठता है मेरे मन में, क्या प्यार सिर्फ साथ-२ हंसने-खेलने का नाम है ? शायद नहीं................जब तक एक की आँख का आंसू दूसरे की आँख से ना निकले, तब तक प्यार की इब्तिदा नहीं ... |
नीड़ का निर्माण फिर-फिर......
| अभी कुछ दिनों से एक अलग तरह की बयार फिजां में तैर रही है कि बच्चों को किस तरह संस्कार दिए जाएँ तथा कैसे उनमें अपने माता-पिता के प्रति प्यार एवं आदर उत्पन्न किया जाये...इसकी एक बानगी फिल्म 'फेरारी की सवारी'में भी देखने को मिलती है... ऐसा नहीं है कि ये समस्या अभी हाल में ही उत... |
नीड़ का निर्माण फिर-फिर......
| आपने अक्सर लोगों को नारी स्वतंत्रता के विषय में बात करते सुना होगा और शायद लोगों की नज़र में काफी हद तक नारी स्वतन्त्र हो भी चुकी है, पर क्या ये स्वतंत्रता सही मायने में नारी-स्वातंत्र्य है... क्या वेशभूषा, भाषा में क्रांतिकारी बदलाव, घूमना-फिरना, मनमानी आज़ादी यही नारी स... |
नीड़ का निर्माण फिर-फिर......
| विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की एक रिपोर्ट के अनुसार भारत में प्रत्येक ५ मिनट पर एक व्यक्ति आत्महत्या करता है... जहाँ पहले आत्महत्या का कारण मानसिक अवसाद एवं मानसिक बीमारियाँ हुआ करती थीं, वहीँ अब छोटी-२ बातों को लेकर लोग आत्महत्या करने लगे हैं... लोगों की सहनशक्ति धीरे-२ क... |
नीड़ का निर्माण फिर-फिर......
| कभी एक सड़क के किनारे एक भिखारी बैठा करता था... वो हमेशा भीख में १ रु. का सिक्का ही लेता था, कोई ज्यादा देना भी चाहे, तो मना कर देता था... एक दिन एक व्यक्ति उसकी परीक्षा लेने के उद्देश्य से उसके पास गया और उसे १०००/- का नोट निकाल कर देने लगा...उस भिखारी ने इंकार की मुद्रा में सिर ह... |
नीड़ का निर्माण फिर-फिर......
| बचपन से मेरी एक आदत रही है कि जहाँ कही भी मुझे ऐसी पंक्तियाँ या विचार दिखाई देते थे, जिनसे मुझे प्रेरणा मिलती थी, तो मै उन्हें अपनी डायरी में लिख लेती थी...इन विचारों ने मेरे व्यक्तित्व निर्माण में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई... अचानक ख्याल आया कि इन विचा... |
नीड़ का निर्माण फिर-फिर......
नीड़ का निर्माण फिर-फिर......
[ Prev Page ] [ Next Page ]
|
|
|