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Blog: नीड़ का निर्माण फिर-फिर...

Blogger: डा. गायत्री गुप्ता 'गुंजन'
क्या आपने कभी होम्योपैथिक दवा बिना ये वाक्य कहे खाई है कि‘फ़ायदा तो होना नहीं है, फ़िर भी खा लेते हैं’ और केवल यही नहीं, जितने मुँह उतनी बातें; होम्योपैथी को लेकर इतने मिथक समाज में फ़ैले हैं कि बस पूछिए मत। ‘होम्योपैथी देर से असर करती है’या ‘असर ही नहीं करती’या ‘इन राई बरा... Read more
clicks 94 View   Vote 0 Like   3:41pm 9 Aug 2016 #Health
Blogger: डा. गायत्री गुप्ता 'गुंजन'
आज सुबह से ही सिद्धान्त चाय की दुकान पर आकर बैठ गया था। घर पर रुकने का मन ही नहीं हुआ उसका। रात भी तो जैसे-तैसे करवट बदल-२ कर ही काटी थी उसने। पूरी रात परेशान रहा वह। नींद भी उससे रूठी रही। सुबह उठते ही चप्पल पहन कर बाहर आ गया। जिस चाय की दुकान पर वो कभी-२ अपने दोस्तों से ही म... Read more
clicks 99 View   Vote 0 Like   9:59am 1 Jul 2016 #Kahani
Blogger: डा. गायत्री गुप्ता 'गुंजन'
आज पापा के जन्मदिन पर उन्हें याद करते हुये...---------------------------------------------------------- अभी कुछ दिनों से फ़ेसबुक पर # Song Blast  आया देख कर याद आया कि मैंने पापा के संगीत के प्रति प्रेम के बारे में तो कुछ लिखा ही नहीं। यदि ये कहें कि संगीत उनकी रगों में लहू की तरह बहता था, तो कोई अतिशयोक्ति नहीं होगी... Read more
clicks 99 View   Vote 0 Like   11:30pm 6 Jun 2016 #Remembrance
Blogger: डा. गायत्री गुप्ता 'गुंजन'
लोग ईश्वर को नहीं मानते!उनका कहना है कि अगर ईश्वर है, तो वो संसार में फ़ैले भ्रष्टाचार, अत्याचार, हिंसा, मारकाट, असहनशीलता और बुराइयों को क्यों नहीं रोकता?पर शायद आप नहीं जानते। ईश्वर कोई व्यक्ति नहीं है। ना ही वह हमारे द्वारा किये गये कार्यों के लिए उत्तरदायी है। ईश्वर, ... Read more
clicks 134 View   Vote 0 Like   7:26pm 19 May 2016 #Article
Blogger: डा. गायत्री गुप्ता 'गुंजन'
गूँगी..... आसपास के सभी लोग उसे इसी नाम से बुलाते थे। बोल-सुन नहीं पाती थी वो। मुझे लगा अपना नाम ना बता पाने की असमर्थता के चलते ही लोग उसे इस नाम से पुकारने लगे होंगे। पर एक दिन जब वो अपनी भतीजी के साथ होली का बायना लेने हमारे घर आई, तो उसकी भतीजी के द्वारा ही मुझे इस सच का पता ... Read more
clicks 113 View   Vote 0 Like   10:45am 27 Apr 2016 #Sansmaran
Blogger: डा. गायत्री गुप्ता 'गुंजन'
क्या आपको नहीं लगता कि हमारा (So called) समाज डार्विन के प्रचलित सिद्धान्त ‘योग्यतम की उत्तरजीविता’ (Survival of the fittest) पर कुछ ज्यादा ही यकीन करता है और लगभग अट्टाहस करता हुआ ऐलान करता है कि ‘जो डर गया, वो मर गया’। सच कहूँ, तो आप यकीन नहीं मानेंगे कि यही समाज फ़िर उन लोगों को डराने से बाज ... Read more
clicks 104 View   Vote 0 Like   11:30pm 30 Mar 2016 #Intolerance
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खुशी का साज़.. (कहानी) .. भाग-१खुशी का साज़.. (कहानी) .. भाग-२परन्तु मेरी खुशी अब भी अधूरी थी। लाख कोशिशों के बाद भी कुहू के मुँह से एक भी बोल नहीं फ़ूटा। हाँ, अस्फ़ुट स्वरों में पूरे दिन कुछ अजीब तरह की आवाजें जरूर निकालती रहती थी। मुझे लगा कि बिना कुछ बोले तो इसके लिए कोई भी राह आस... Read more
clicks 110 View   Vote 0 Like   11:00pm 23 Feb 2016 #Mentally Disabled
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खुशी का साज़.. (कहानी) .. भाग-१----------------------------------------शाम को डॉक्टर फ़िर आईं और मेरे चेहरे की तरफ़ देखते हुए आश्चर्यमिश्रित मुस्कान से पूछा,“बहुत फ़्रेश लग रही हैं आप?”“हाँ डॉक्टर! ज़िन्दगी से एक नई जंग लड़ने के लिए खुद को तैयार जो करना है।” ये कहते हुए अपने आप से फ़िर एक वादा किया, कभी घबर... Read more
clicks 97 View   Vote 0 Like   11:00pm 16 Feb 2016 #Mentally Disabled
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मेरे आँसू लगातार बहे जा रहे थे और मैं उन्हें रोकने का कोई प्रयास नहीं कर रही थी, क्योंकि मैं इन आँसुओं में अपने उन सारे दु:खों, खीजों, अपमान, तंज और लोगों द्वारा दिए गए बेचारगी के एहसास को बहा देना चाहती थी, जो पिछले अनगिनत सालों में मैंने अपने दिल पर झेले थे। पूरा सभागार त... Read more
clicks 191 View   Vote 0 Like   11:00pm 9 Feb 2016 #Mentally Disabled
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कुछ दिन पहले मैं अपनी बेटी के स्कूल पैरेन्ट्स-टीचर्स मीटिंग में गई थी। वहाँ मेरी मुलाकात मान्या और शशांक से हुई। दोनों भाई-बहन थे। दोनों ने मिलते ही मेरा दिल चुरा लिया। अब आप सोच रहे होंगे, ऐसी क्या खास बात थी दोनों में? जब मैं ये कहूँगी बहुत प्यारी बौंडिंग थी दोनों में, ... Read more
clicks 155 View   Vote 0 Like   11:19am 1 Jan 2016 #Mahatma Gandhi
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                          पापा के ६०वें जन्मदिन पर खींची गई फ़ोटो...आज ७ जून को पापा का जन्मदिन है। अगर आज वो होते और मैं हमेशा की तरह सुबह-२ उन्हें फ़ोन करती, तो उनका पहला वाक्य यही होता, “अरे! मुझे तो याद ही नहीं था, किसी ने बताया भी नहीं।” अपने जन्मदिन पर भी पूरे दिन ... Read more
clicks 130 View   Vote 0 Like   2:30am 7 Jun 2015 #Rememberance
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अचानक दरवाजे की घंटी बजी.....वो पिछले एक घण्टे से सोने का प्रयास कर रही थी; पर थकान की वजह से शायद नींद नहीं आ रही थी।पोस्टमैन होगा शायद, कहकर वो अनमने ढंग से दरवाजे की ओर बढ़ी।दरवाजा खोलकर देखा। पोस्टमैन ही था। एक लिफ़ाफ़ा डालकर गया था। उसने उलट-पुलट कर देखा, उस पर भेजने वा... Read more
clicks 117 View   Vote 0 Like   4:49pm 19 May 2015 #Maa
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मैं और मेरे पापा-१ (पापा कीयादों का कोलाज़)आज की कड़ी में बात करते हैं उन गलतियों की, जो कभी मेरे द्वारा, तो कभी पापा के द्वारा अनजाने में की गईं और हम दोनों ही बहुत बाद तक उन्हें लेकर पछताते रहे; क्योंकि दोनों ही एक-दूसरे को उन गलतियों की वजह से ब्लैकमेल करते थे। पर प्यार तो फ़... Read more
clicks 147 View   Vote 0 Like   10:14am 11 Apr 2015 #Remembrance
Blogger: डा. गायत्री गुप्ता 'गुंजन'
मि. काटजू,आप अक्सर अपने बयानों से विवादों में आते हैं और लोगों से भी आपको प्रतिक्रिया मिलती है, अच्छी हो या बुरी; क्योंकि आप उच्च पदस्थ हैं। अब आपने गाँधी को निशाना बनाया है, लोग अक्सर बनाते हैं और सब चुप रहते हैं। मैंने ही एक बार लिखा था कि “गाँधी के बारे में लोग उतना ही ज... Read more
clicks 166 View   Vote 0 Like   10:42am 11 Mar 2015 #Indian Independence
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आज स्कूल में बहुत चहल-पहल थी। लावण्या स्कूल में घुसते ही अपनी बड़ी-२ आँखों से चारों तरफ़ देख रही थी, पर फ़िर भी उसकी समझ में कुछ नहीं आ रहा था। चारों तरफ़ की तैयारियों को देख कर लगा तो उसे कि कोई विशेष बात है; पर दिमाग पर ज्यादा जोर ना देकर वो अपनी क्लास में चली गई। वहाँ भी किसी ल... Read more
clicks 136 View   Vote 0 Like   3:30am 18 Feb 2015 #School
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इससे पहले कि समय के विशालकाय पंजों में छटपटाते हुए मेरी याददाश्त दम तोड़ दे। पापा से जुड़ी हुई अपने मन की सुकोमल स्मृतियों को मैं अपने शब्दों के उपवन में सहेज लेना चाहती हूँ, जहाँ मील के पत्थर की भाँति जीवन के वे विटप खिले हैं, जिन्हें चाहे-अनचाहे मेरे कदमों ने पार किया है... Read more
clicks 143 View   Vote 0 Like   10:55am 2 Feb 2015 #Remembrance
Blogger: डा. गायत्री गुप्ता 'गुंजन'
दोपहर होने को आई थी, पर आँसू थे कि थमने का नाम ही नहीं ले रहे थे नीलेश के। वह सुबह से नीलू का हाथ थामे बैठा था, जो लगातार रोते हुए एक ही बात दोहराये जा रही थी,“मैं जीना चाहती हूँ नील। मैं तुमसे दूर नहीं जाना चाहती। जबसे तुमसे मिली हूँ, पहली बार ज़िन्दगी में जीने की ललक जगी है।... Read more
clicks 160 View   Vote 0 Like   3:30am 9 Jul 2014 #Love
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दुलारे भैया (संस्मरण): भाग-१ पढ़ने के लिए यहाँजाइये.....।एक विशेष बात जो उनके बारे में मैं बताना चाहूँगी, वो ये कि उनका सभी धर्मों में विश्वास था। उन्होंने गाड़ी में सभी धर्मों के आराध्यों के चित्र लगा रखे थे और रोज सुबह उठकर उनकी पूजा करते थे। एक ओर जहाँ ये माना जाता है कि मु... Read more
clicks 149 View   Vote 0 Like   3:30am 11 Jun 2014 #Muslim
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इस संस्मरण को लिखने के पीछे मेरा मुख्य मकसद एक प्रश्न है, जो अक्सर मेरे दिलो-दिमाग को झिंझोड़ता है कि आखिर क्यों हम मुसलमान और आतंकवाद को साथ-२ जोड़कर चलते हैं, क्यों हमें हर मुस्लिम में एक आतंकवादी ही दिखाई देता है; क्यों हम एक मुसलमान में एक भाई, एक पिता, एक बेटा, एक दोस्त औ... Read more
clicks 163 View   Vote 0 Like   4:17am 19 May 2014 #Muslim
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दुनिया से निराली प्रेम कहानी थी उनकी और ऐसे ही निराले थे वो, कुहू और कनिष्क। एक-दूसरे से बिल्कुल अलग, परन्तु दूध और पानी की तरह एक-दूसरे से मिले हुए। कुहू जब तक कनिष्क को अपने दिन भर की एक-२ बात न बता दे, उसे चैन नहीं पड़ता और कनिष्क भी उसकी छोटी से छोटी बात को बड़े प्यार से सुन... Read more
clicks 140 View   Vote 0 Like   3:30am 2 Apr 2014 #
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आज अपनी मुस्लिम कामवाली से होली खेलने के बारे में पूछने पर जो जवाब मिला, वो दिमाग ‘सुन्न’ कर देने वाला था।जब मैंने पूछा कि जब हम खुशी-२ ईद मनाते हैं, तो तुम लोग होली क्यों नहीं मनाते?ये सुनकर उसके चेहरे के भाव बिगड़े और थोड़ा चिढ़कर बोली:‘आप लोग हमारे ‘हुसैन’ के ‘खून’ से होल... Read more
clicks 171 View   Vote 0 Like   10:26am 16 Mar 2014 #
Blogger: डा. गायत्री गुप्ता 'गुंजन'
ये लेख मैंने १६ दिसम्बर २०१२ की घटना के बाद लिखा था, लेकिन उस समय चाह कर भी मैं इसे पोस्ट नहीं कर पाई; क्योंकि शायद तब लोग इस लेख की आत्मा को समझ ही नहीं पाते। आज ८ मार्च को ‘विश्व महिला दिवस’ के अवसर पर मन में कुछ आशाएँ लेकर इस लेख को पोस्ट कर रही हूँ और ये आशाएँ आप लोगों से ह... Read more
clicks 189 View   Vote 0 Like   3:30am 8 Mar 2014 #
Blogger: डा. गायत्री गुप्ता 'गुंजन'
 आज चिलचिलाती धूप में बाहर निकलना पड़ा, काम ही इतना जरूरी था; वरना तो अक्सर इस समय मैं कूलर के सामने बैठकर किताब पढ़ना ही ज्यादा पसन्द करती हूँ। घूमते-२ दो घण्टे होने को आए थे; जल्दी-२ में छाता लाना भी भूल गई थी। मुझे धूप में चलने की आदत नहीं, सिर दर्द से फ़टा जा रहा था और गला भ... Read more
clicks 207 View   Vote 0 Like   4:07am 27 Jan 2014 #
Blogger: डा. गायत्री गुप्ता 'गुंजन'
पिछले कुछ दिनों में मैसेज, टिप्पणी और फ़ोन के द्वारा लोगों के ‘सुन्दरता’ विषय पर अनेक विचारों से परिचित होने का अवसर प्राप्त हुआ। सभी लोगों का यही कहना है कि हम सभी को बराबर सम्मान देते हैं, पर सुन्दरता की तारीफ़ भी कर देते हैं। मैं उनसे सिर्फ़ यही कहना चाहती हूँ कि आप उन्ह... Read more
clicks 246 View   Vote 0 Like   5:15am 6 Jan 2014 #सुन्दरता
Blogger: डा. गायत्री गुप्ता 'गुंजन'
वो रोता बहुत था और अक्सर ही बरबस उन्हें रोकने की कोशिश के बावजूद आँसू उसकी आँखों में छलक ही आते थे। एक दिन रोते-२ परिमल, पीहू के चेहरे को अपने दोनों हाथों में थाम कर पूँछने लगा,‘जब तुम मेरे साथ हो, तो मुझे इतना रोना क्यों आता है?’जवाब में पीहू उसके चेहरे को पास ला के अपने लब... Read more
clicks 235 View   Vote 0 Like   8:41am 24 Dec 2013 #
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