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Blogger: sushil kumar
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clicks 160 View   Vote 0 Like   11:56am 2 Sep 2014 #
Blogger: sushil kumar
जागोमोहन जागो जागो रे मन जागोजागो जीवन जागो जागना है तुम्हें जगाना है तुम्हें जगजगाना है तुम्हें तुम देह नहीं माटी नहीं तुम  न कोई दु:ख हो तुम्हारी स्वांस छू रहा कोई तुममें कोई स्वर कोई अनहद बज रहा तुम अद्भूत मात्र एक हो तुम यात्रा हो तुम पथिक हो तुम खोजी हो तुम चेतना  त... Read more
clicks 256 View   Vote 0 Like   7:32am 7 Sep 2012 #कविता
Blogger: sushil kumar
योग-मुद्रा जीउठा हूँ फिर से उर्जस्वित होकरसाँस की प्राण-वायु अपनी रग-रग में भरकर स्वयं का संधान कर स्वयं में अंतर्लीन होकर यह प्रयाण जरूरी था मेरे लिये –न कोई रंग न कोई हब-गबजीवन सादा पर सक्रिय है यहाँदैनिक क्रियाएँ सरल हैं स्वर जैसे थम गया होहृदय-वीणा के तार जैस... Read more
clicks 167 View   Vote 0 Like   3:44am 4 Aug 2012 #
Blogger: sushil kumar
इसपन आकर मुझेइलहाम हुआ किहृदय भी एक हाथ था मेराअरसे से मेरी पीठ से बँधा फ़िजूल बंधनों से नधा हृदय हां, अब भीएक हाथ है मेरामुझ आँख के अंधे की      लाठीइस अंधेर दुनिया के भटकन में और देखो, वहबुला रहा है मुझेऔर तुम्हें भी उसकी आवाज़ गौ़र से सुनोइस तन-तंबूरे मेंकह रहा ... Read more
clicks 201 View   Vote 0 Like   4:18am 28 Jul 2012 #
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