साहित्य प्रसून

 संस्कृत में एक श्लोक 'चाणक्य-नीति'/भर्तृहरिनीति में है-'दुर्जन: परिहर्तव्य: विद्या  लंकृटापि सन्, मणिना भूशितो सर्प: किमसौ न भयंकर:' अर्थात विद्या से सजा हुआ भी दुष्ट त्यागने योग्य ही होता है | विद्या जो विनाश करे, वह अविद्या ही है |दीपक जो आग लगाये तो अभिशाप है | सुशिक्...
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Tag :गीत(प्रतीक-दोहा-गीत)
  May 25, 2013, 10:04 pm
यह सर्ग (मीनार) वास्तव में एक  गम्भीर व्यंग्य  है इस लिये शब्द -शक्ति व्यंजना इस तरह इस में अभिधा और लक्षणा के साथ मिलाई गयी है कि  यथार्थ स्पष्ट  अर्थ  परिलक्षित कर रहा है|इस  रचना में आज कल केझूठे फैशन के आडम्बर की ओर  उँगली उठाई गयी है | कोई कोई व्यक्ति ऊँचाई के लोभ में दे...
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Tag :गीत(प्रतीक-दोहा-गीत)
  May 24, 2013, 4:43 pm
iइस सर्ग में यह बताया है कि विकास की मीनार बहत ऊंची, चमक दमक वाली शानदार है किन्तु भीतर से खोखली इन आचरण निष्ठा (वफ़ा) आदि  ठोसत्व के कारण बहुत कमज़ोर हैं | यानी विकास बनावटी है |केवल भौतिक पादार्थिक (materialistic) विकास ही क्या विकास है जब कि आध्यात्मिक मानसिक  सांस्कृतिक विकास म...
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Tag :गीत(रूपक-प्रतीक-दोहा-गीत)
  May 23, 2013, 5:26 pm
यज्ञ पाँच प्रकार के होते हैं |इन में से पैशाचिक यज्ञ सब से अनिष्टकारी व घिनौना होता है |अशुभ सामिग्री इस में हुती जाती है | अग्नि में जो कुछ हुत दें यज्ञ है | जैसा यज्ञ करें वैसा ही फल मिलेगा | नारी को जिन्दा जला कर क्या हम किसी शिव या शुभ शक्ति की कृपा की अपेक्षा कर सकते हैं | ...
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Tag :गीत(यथार्थ-प्रतीक-दोहा-गीत)
  May 22, 2013, 10:31 pm
================‘दर्द’  सह रहा  अनगिनत,  है  ‘आधा संसार’ |कितनी  पीड़ित  बेटियाँ,  सहतीं  ‘अत्याचार’  || ================================= देख  ‘सुता  की  दुर्दशा’,   कितना  रोता  बाप |‘मुआ’  अधमरा  कर गया,  ‘दहेज़ का सन्ताप’ ||यह  दहेज़  है  आजकल,  जैसे  ‘विष की बेलि’ |इसे  ‘सभ्यता’  किस  तरह, सकेगी बोलो  झेल ||...
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Tag :गीत (उपमा-रूपक-दोहा गीत)
  May 21, 2013, 5:04 pm
मुझे अच्छी तरह मालूम है कि दहेज़ देने वाला बाप कभी भी नहीं कहता कि उस ने दहेज़ दिया | बेटी के लिये वर ढूँढना भगवान ढूँढने से भी कठिन है | बेटी के विवाह के नाम पर माँ बाप बिक जाते हैं | हाँ कभी  कभी चमत्कार  की तरह बहुत  महान  उदार  बाप मिल जाता है जो दहेज़ नहीं मांगता | यह बात सब ...
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Tag :गीत (उपमा-रूपक-दोहा गीत)
  May 21, 2013, 5:04 pm
दहेज़ की भयानक प्रथा के कारण भाशंवाज़ी के युग में बेटी को बोझ माँ कर उतनी सुविधा नहीं जितनी बेटे को | बेटे की हज़ार गलतियाँ माफ |बेटी को प्रताडना | निर्धन परिवार में तो बेटी होते ही शोक सा दिखाई देता है |वैसे दिखावे में समानता की डींग हांकी जाती है | बहुत ऊँचे स्तर और वर्ग क...
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Tag :गीत (यथार्थ-दोहा-गीत)
  May 19, 2013, 4:12 pm
दहेज़  की आग में 'माँ की ममता'  पिटा का प्यार जल गया | दहेज़ का लोभ माँ को इतना ममता हीन बना देता है कि अपने बेटे के प्यार और उसकी पसंद को भी नहीं देखता है | बेटा बहू को चाहता है तो चाहे , पर  माँ बाप कोतो धन चाहिये नहीं तो मार देते हैं उस की प्रिया को निर्दयी लालची !!(सारे चित्...
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Tag :गीत(य्ठार्थ-प्रतीक-गीत)
  May 18, 2013, 6:05 pm
सर्ग का  यह दूसरा उपसर्ग 'दहेज़' आप की सेवा में प्रस्तुत है | नारी उत्पीडन का यह रूप शायद कभी समाप्त न हो क्यों कि घूस की ही तरह ही यह भी आज कल की गुप्त(भूमि-गत) संस्कृति में रच बस गया है | यह ऐसा अपराध है जिसे करने वाले अपने कद के अनुपात में कर रहे हैं और मानते भी नहीं | इसे अ...
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Tag :गीत(रूपक-दोहा-गीत)
  May 17, 2013, 4:05 pm
स्त्री  में ममता उसकी भावुकता के कारण है |उसे यह कल्याणकारी गुण 'दैवी प्रकृति' से उपहार में मिला है | नर-पिशाच  इस भावुकता का दुरुपयोग अपनी हविश के लिये उसकी  प्रवृत्ति को छल कपट पूर्वक  उभार कर उत्तेजित करके करता है | यद्यपि  ऐसा सदैव नहीं होता पर जब भी होता है भयानक रू...
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Tag :गीत(रूपक-यथार्थ-दोहा-गीत)
  May 16, 2013, 8:16 pm
निर्धनता के कारण बालिका का विवाह अपने से बहुत बड़े अमीर व्यक्तिके साथ होना सामान्य बात नहीं | अब यह परिस्थितियाँ नहीं हैं क्योंकि शिक्षा का प्रसार अब पर्याप्त है | उपेक्षित बहुत सर्वहारा वर्ग के परिवार  ने आर्थिक तंगी  भुखमरी से पीड़ित द्वारा धंसे बेटी चुरा छिपा कर अम...
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Tag :गीत(रूपक-दोहा-गीत)
  May 15, 2013, 11:06 pm
‘बाल-विवाह’ यद्यपि सम्भ्रान्त-विकसित देशों में न के  बराबर है किन्तु फिर भी चोरी छिपे  पैसे के लोभ में  कुछ परिवार अपनी बेटियों को  अमीरों या दबंगों के हाथ बेच देते हैं |  विदेशों की एकाध खबर बहुत ही वृद्ध अमीर पुरुष द्वारा अति छोटी आयु की लडकी के साथ विवाह की घटनाएँ प्...
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Tag :गीत(प्रतीक-रूपक-दोहा-गीत)
  May 14, 2013, 3:29 pm
ग्रन्थ-क्रम में पिछली तीन रचनाओं से कुछ 'वासना-रोगी' बिगड़े दिल अमीर शहजादों द्वारा ,विवाह का झाँसा देकर ज़रूरतमन्द कंगाल भोली कमसिन- 'अच्छे बुरे', 'उंच-नीच' से  अनजान किशोरियों -बालाओं को फांस कर उन्हें बरबाद कर के यौन-अपराधों की और संकेत किया गया है | 'सफ़ेद-पोश...
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Tag :गीत(रूपक-दोहा-गीत)
  May 13, 2013, 5:39 pm
आज मात्री-दिवस के अवसर पर 'मात्र-शक्ति' को शुभ कामना ! सर्ग  की सातवीं इस रचना में च्रीछिपे  शराफत का चोला उतार फेंक कर भोली भूख से मज़बूर बालाओं किशोरियों को झूठ प्रेम-जाल में फां कर  विवाह का झांसा दे कर बर्वाद करने वाले नराधमों की और संकेत है |(सारे चित्र 'गूगल-खोज'से स...
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Tag :गीत(रोपक-दोहा-गीत)
  May 12, 2013, 4:07 pm
अमीरों का उच्छ्रंखल जीवन भी यौन अपराधों का कारण है | इस से भी नारी उत्पीडन होता है |(सारे चित्र 'गूगल-खोज' से साभार)==========दरिद्रता-दुःख-दीनता,  निर्धनता  की मार |कितना पीड़ित विश्व में, है ‘आधा संसार’ || =============================‘पुत्र   कुबेरों  के’   कई,  ‘कारूँ  के  कुछ  लाल’ |जिनकी जेबों  म...
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Tag :गीत(प्रतीक-दोहा-गीत)
  May 11, 2013, 10:35 pm
ग्रन्थ-क्रम में प्रकाशित इस दोहा-गीत की विषय-वस्तु के स्रोत समाचारपत्रों के समाचार, आये दिन की जन-श्रुतियाँ,किम्वदंतियां और पारस्परिक चर्चायें या यदा कडा  दृष्टिगत घटनाये और सिनेमा-धारावाहिक हैं | 'भारत-पर्यटन' से मुझे सब से सहयोग मिला | इस प्रकार की घटनाओं के चित्र...
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Tag :गीत(यथार्थ-दोहा-गीत)
  May 10, 2013, 5:27 pm
लोग कहते है कि नारी -उत्पीडन पर रोक लग गयी है | पर क्या ऐसा वास्तव  में है ? अपने यौवन-काल  में मैने देखा-सुना  जो बातें  पहले पर्दे की आड़ में होंती थीं, उन बातों का एक बड़ा रूप  बदले परिवेश आज भी दिखाई द३एता है | नारी-भोग पर 'आधुनिक आवरण लग गया है' यह अलग बात है ! मैने पूरा भा...
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Tag :गीत (य्थार्थ्दोहा गीत)
  May 9, 2013, 4:48 pm
सर्ग के क्रम में प्रकाशित इस दोहा-गीत में 'मदांध कामी नशेड़ियों द्वारा छल-कपट से शिकार भोलीभाली अबोध बाला-किशोरी या ज़रूरतमंद नारियोंको फांस कर 'यौन-शोषण' का उल्लेख किया गया है | कभी ये उठावा लेते हैं ,तो कभी धन का चारा डाल कर फांसते है |और कभी बरगालालेते हैं | नारी का...
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Tag :गीत (यथार्थ-रूपक-दोहा-गीत)
  May 8, 2013, 4:44 pm
असम्वैधानिक  'यौन व्यापार' हर गरीब करे यह आवश्यक नहीं | यदि 'धर्म का स्तम्भ' ठीक से थाम लिया तो  गरीबी ''फकीरी' है  और 'ईश्वर लीन' करेगी  जैसा कि सुदामा का उदाहरण है, अन्यथा वह 'पापका  कारण | फिर इस 'कलि-काल' में जो कुछ पर्दे की आड़ में हो सकता है, वही उल्लिखित है ...
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Tag :' गीत (वर्णन-दोहा गीत)
  May 7, 2013, 5:58 pm
इस नए सर्ग में नारी उत्पीडन के अनेक कारणों में से अभावग्रस्त परिवार में नशाखोरी की ओर संकेत है |(सारे चित्र 'गूगल-खोज' से साभार)=============@@@@@@@@@@@@@@@कुछ ‘पश्चिम की सभ्यता’, कुछ ‘अभाव का भार’ |फँसा  ‘वासना - जाल’  में,  है  ‘आधा  संसार’ || @@@@@@@@@@@@@@@@@@@@महा नगर  में  देखिये,   अजब   निराली   शान |...
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Tag :गीत(यथार्थ-- -दोहा-गीत)
  May 6, 2013, 3:44 pm
तीन  दिनों तक कम्प्यूटर में खराबी के बाद आज पुन; आप के बीच में उपस्थित हूँ |इस सर्ग की  इस अन्तिम  रचना में  कुछ 'अमीर जादों'  के धन से खरीदे गये  धन लोलुप 'सौंदर्य'  द्वारा देह व्यापार तथा हॉट म्यूजिक के नाम पर  'यौन अनावरण' की और ध्यान केंद्रित किया गया है |(सारे चित्...
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Tag :गीत(यथार्थ-प्रतीक- -दोहा-गीत)
  May 5, 2013, 6:32 pm
 विषय  को पुष्ट करने के लिये चित्र यदि ईमानदारी से डालते तो 'प्रश्न चिन्ह' लग जाता अत: बीच का रास्ता अपनाया !वास्तव में अपने बच्चों के साथ हम जो प्रदर्शन हम देखते हैं उन में यौन का उबाल पैदा हो रहा है | वासना का ज्वालामुखी बच्चों में समय से पूर्व फूट रहा है | बलात्कार की  ...
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Tag :गीत(यथार्थ-दोहा-गीत)
  May 1, 2013, 5:45 pm
'ग्रन्थ-क्रम' में यह रचना बोलती है कि ब्लू फिल्म तथा सेंसर की छूट का अनुचित लाभ उठाने वाली कुछ फिल्में हद से गुजर रही है | संकेतों की बजाय सीधे आलिंगन चुम्बन आदि के प्रदर्शन कर के श्रृंगार रस का रूप घिनौना करे पाश्चात्य-संस्कृति का समर्थन कर के विनाश ही तो कर रही हैं | 'भा...
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Tag :गीत(यथार्थ-दोहा-गीत)
  April 30, 2013, 4:21 pm
इस रचना में अपने क्रम के अनुसार यह बताया गया है कि घटिया गन्दे विज्ञापनों और नशाखोरी  का समाज के 'भोले बचपन' पर क्या असर पडता है | (सारे चित्र 'गूगल-खोज' से साभार) =====================त्याग ‘आवरण लाज का’,  ‘शील के वसन’  उतार |‘रति’  मदिरा  पी कर  चली, लिये ‘वासना-ज्वार’ ||================================...
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Tag :गीत(यथार्थ-दोहा-गीत)
  April 28, 2013, 6:33 pm
इस रचना में @@@@@@@‘मन-सु-गगन’  में  ‘काम-घन, उठे ‘निरंकुश’  आज |जगी  ‘वासना की तड़ित’,  पशुवत ‘मनुज-समाज’ ||@@@@@@@@@@@@@@@@@@@@तज कर ‘सात्विक भोज’  को, ‘अति तामस आहार’ | अधिक मद्य  पी  मद-भरे, ‘पशुओं’  से व्यवहार  ||‘कामोत्तेजक चित्र’  लख ,   उठा   ‘वासना-ज्वार’ |फिर  ‘संयम के बाँध’  की,  टूट   ग...
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Tag :गीत(रूपक-दोहा-गीत)
  April 27, 2013, 6:23 am
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