ग़ज़लकुञ्ज

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ग़ज़लकुञ्ज...
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  September 23, 2012, 6:37 am
ग़ज़लकुञ्ज: गज़ल-कुञ्ज(गज़ल संग्रह)-(र) बाज)-(२)आतंक (एक अप्रक...:                                                                                 आतंक जैसे उड़ते हुये चील हुए हैं | जनता के भोले लोग अबाब......
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  July 21, 2012, 6:24 pm
 पठारों से हृदय के पथरीले मंज़र देखिये |दया, करुणा के लिये ये हुए ये बंजर देखिये || बुलबुलों,मैनाओं ने है विवश समझौता किया -सोने, चाँदी के बड़े मजबूत पिंजर देखिये ||    Q    पंकजों में छुपे भँवरे, तितलियाँ व्याकुल हुये-ताल में घुस आये भूखे कई कुंजर देखिये ||   मीत बनने के लिये, ...
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Tag :गज़ल(प्रतीकों में एक हकीक़त)
  July 21, 2012, 6:12 pm
बंजर दिल की धरती।(  ह्कीक़त की एक गज़ल )प्यार का फूटा नहीं है ,एक अंकुर देखिये।दिल की धरती हो गयी है,कितनी बंजर देखिये।।खाद,पानी 'प्रेरणा' के हो गये हैंसब विफल-आचरण की स्थली अब बहुत ऊसर देखिये||     सबके जज्वातों की चोटों का असर मुझ पर हुआ-दर्द का छलका है आँखों में समुन्दर ...
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Tag :गज़ल(प्रतीकात्मक रूपक)
  July 20, 2012, 8:07 pm
मधुवनों में शान्ति का होता विभंजन् देखिये |                                                  बाजों से कितने डरे हैं, भोले खंजन देखिये ||  हिरण भागे,शशक दुबके और अब तो थम गये - तितलियों की थिरकनें,भ्रमरों के गुंजन देखिये ||  न्याय तोले किस तरह, इंसाफ की दूकान में -डगमगाया है 'तराजू' का समंजन देखि...
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Tag :गज़ल(प्रतीकों में आतंक की झलक्)
  July 14, 2012, 5:35 pm
 ये परिन्दे प्यार के कितने हुए मायूस हैं |उकाबों का डर इन्हें कितना हुआ महसूस है ||  देखने में बाड़, ऊपर से बड़ी मजबूत है |हकीक़त में यह बड़ी कमज़ोर, गलती फूस है ||अपने घर के लोग अपने घर से ही बागी हुये -बन गये ये शत्रुओं के घरों के जासूस हैं ||   आ गया कोई जलजला शान्ति के इस सदन म...
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Tag :गज़ल (हकीकत की गज़ल)
  July 8, 2012, 11:07 pm
उकाबों की सेहतें,पहले से बेहतर देखिये |डरे, सहमे हकों के हैं कितने तीतर देखिये ||                                                                                                            'जुल्म' के पत्थर से करना चोट उनका खेल है -चोट खा कर गिर पड़े कितने कबूतर देखिये ||     नुमायश करते हैं मीठे बोल की हम आये दिन-  पैनी ...
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Tag :गज़ल (प्रतीकात्मक गज़ल)
  July 7, 2012, 2:23 pm
    खरगोर्शों में ऊदबिलाव |झरबेरी के पास गुलाब ||  गले मिले जब बन कर यार हुए कँटीले मीठे ख़्वाब || बेदर्दी की हद हो पार -कोमलता पर निठुर दबाव || भोले खंजन पर कर वार-चोंच से घायल करे उकाब ||t हो कैसे दोनों में प्यार !इक शरबत,दूजा तेजाब ||  अब पछताना है बेकार |किया दोस्त का गलत चुनाव...
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Tag :गज़ल (हकीकत की गज़ल)
  July 6, 2012, 7:08 am
 रहे गुलाब दुखी हो बोल |"ऐ झरबेरी धीरे डोल || "तू तो अपनी मौज में है-घायल मेरे अधर कपोल || "चुभते तेरे शूल मुझे -मत कर इतना निठुर किलोल ||  "तू खुशियों में झूम रही- मेरी खुशियाँ  डाबाडोल ||   "काँटों का दोनों का तन - तेरा मेरा एक न मोल!!"तू घायल कर देता है-लेता जिसका बदन टटोल || "गु...
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Tag :गज़ल(वेदना-गज़ल)
  July 5, 2012, 2:16 pm
        आइये मेरे पड़ोसी को नज़र भर देखिये |देखिये इसकी अदायें, इसके तेवर देखिये || भवन इनका काँच का है, किन्तु वे निश्चिन्त है -फेंकते वे मेरे घर पर कितने पत्थर देखिये ! पत्थरों का हृदय,पत्थर का कलेजा हो गया -अक्ल पर उनके पड़े हैं कितने पत्थर देखिये !!        प्यार से भरने हमे...
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Tag :गज़ल(हकीकत की गज़ल)
  July 2, 2012, 3:23 pm
     चुभन भरे दर्द मेरे अंक लगे हैं |बिच्छुओं के,ततैओं के डंक लगे हैं || रूपवती,लाजवती सभ्यता के अब-चाँद जैसे चेहरे कलंक लगे हैं ||       उड़ रहे हैं बेहिसाब दिशा- हीन से-'कामना' के सीमा-हीन पंख लगे हैं ||           मन हुए हैं बद रंग मैले मैले से -                                                               ...
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Tag :गज़ल (हकीक़त की गज़ल)
  July 1, 2012, 10:20 pm
 -किसने करुणा-सदय-हृदय में पैना शूल चुभोया |किसने फूलों के मधुवन में कंटालों को बोया ||    स्वतन्त्रताके इन वर्षों में कितने तूफां आये !सोचो पल भर और विचारो,क्या पाया क्या खोया !!   संस्कृति और सभ्यता वाली यह भारत की नौका -की पतवारें तोड़ तोड़  कर कि सने   इसे डुबोया ?  हँसती ...
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Tag :गज़ल (हकीक़तकी गज़ल)
  July 1, 2012, 5:53 pm
महकती थीं कभी जिसमें प्रीति की कलियाँ सुमन |उन बसन्ती हवाओं में भर गयी कितनी तपन !!कोमलांगी बेलि,पादप,बल्लरी मुरझा गये -देख लो,जलने झुलसने लगा है सारा चमन || ओ रसीली मधुर पूरब की सुखद पुरबाई सुन!बन न तू तपती हुई लू, जेठ की पछुवा पवन !! ओ शहर,अपने ह्रदय का अब न तुम उगलो ज़हर |हुआ...
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Tag :गज़ल(यथार्थ की गज़ल)
  June 30, 2012, 4:18 pm
अन्धेरे में मुस्कराएं,खिलखिलायें |आओ मिल कर दीप हम ऐसे जलायें ||बन गया है शहर काजल कोठरी अब -दाग काले,ह्रदय के कितने दिखायें ||      भूल कर उद्देश्य मानव-उन्नयन का -स्वर्ण में उलझी हैं सारी संस्थायें ||    दृष्टिकोणों में न व्यापकता अभी तक -बहुत उथली खोखली हैं भावनायें ||     ...
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Tag :गज़ल(यथार्थ गज़ल )
  June 29, 2012, 6:05 pm
       बहूत पापिन हो गयी हैं ये हवायें |सांस लेने किस गली गुलशन में जायें||किस तरह हम स्वस्थ मन,जीवन सँवारें-विषैली हैं जिस्म की,मन की दवायें ||  देख कर यह धुआँ ज़हरीला गगन में -हँसें?गायें? मुस्करायें?? खिलखिलाएं ??? सी लिये मुहँ, ओढ़ ली चुप्पी सभी ने-पहेली या प्रश्न किससे हम ब...
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Tag :गज़ल (यथार्थ-गज़ल)
  June 29, 2012, 4:19 pm
    तुम करते जीवन का सुधार |हे गुरु करते मन का सुधार ||     हर, मलिन धूल आचरणों की -बरसाते सुबोध रस सु-धार || ईश्वर के तुम जन- प्रतिनिधि हो -हरते व्यवहारों के विकार || तुम 'रजक' भावना वसनों के -मन- चादर का करते निखार ||     तुम ज्ञान- विवेक के मार्तण्ड-हरते तुम चित् का अन्धकार ||  यदि त...
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Tag :गज़ल (आराधना गज़ल)
  June 25, 2012, 9:06 am
    तुम करते जीवन का सुधार |हे गुरु करते मन का सुधार ||     हर, मलिन धूल आचरणों की -बरसाते सुबोध रस सु-धार || ईश्वर के तुम जन- प्रतिनिधि हो -हरते व्यवहारों के विकार || तुम 'रजक' भावना वसनों के -मन- चादर का करते निखार ||     तुम ज्ञान- विवेक के मार्तण्ड-हरते तुम चित् का अन्धकार ||  यदि त...
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Tag :गज़ल (आराधना गज़ल)
  June 25, 2012, 9:06 am
 प्रियतमा जननि !तुमको प्रणाम !!हर सुख दुःख मेरा तेरे नाम !!तेरी हर सरिता सुधा वती |है तेरा सुअंक सुखद धाम ||   तेरे वन, बाग सुभाग सुभग - इस पर वारी हैं कोटि काम ||      तेरी गोदी में पले सभी-हो शीत छाँव या तची घाम ||  सब ने पाया है सुख तुम से -क्या पीर फ़कीर क्या राम श्याम ||           वर ...
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Tag :गज़ल (आराधना गज़ल)
  June 25, 2012, 6:32 am
हे प्रिय जननी भारती धरा |तेरा तन मन है हरा भरा ||   वन, बाग, तडाग, नदी,सर में-हर ओर रूप तेरा बिखरा ||            तैयार तुम्हारी रक्षा को-उत्तर में हिम गिरि दे पहरा ||तन  धोता, दे कर मानसून -है तीन ओर सागर गहरा ||आ  गया तुम्हारे आँगन जो -उसका बिगरा जीवन सँवरा ||    तुमने सब को अपनाया है -स...
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Tag :गज़ल(आराधना गज़ल)
  June 21, 2012, 8:16 pm
 ओ प्रियतमा! ओ प्रियतमा !!जीवों में तुम हो आत्मा !!                महिमा तुम्हारी माप ले -ऐसी न कोंई है विमा ||  परमा शिवा भव-सुन्दरी -सत्या हो तुम हो उत्तमा|| रक्षक विष्णु की लक्ष्मी -शिव की शिवानी तुम उमा || हो ज्योति सूर्य में तुम्हीं -तुम से ही चमका चन्द्रमा || नैराश्य रजनी से जननि!...
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Tag :गज़ल (आराधना गज़ल )
  June 20, 2012, 6:40 pm
  तुम जाने पहंचानेप्रियतम !पर लगते अनजाने प्रियतम !!यह सारा जग भटक रहा है -प्यार तुम्हारा पाने प्रियतम ||        कोकिल भ्रमरों ने पाये मृदु -स्वर हैं तुम्हें रिझाने प्रियतम ||   सह ली विरह -वेदना,फिर भी -गाये मधुर तराने प्रियतम ||         तुम्हें याद कर बिता दिए हैं -कुछ पल आने ज...
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Tag :गज़ल(आराधना गज़ल)
  June 20, 2012, 6:21 pm
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