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ग़ज़लकुञ्ज

  ‘फूलों’ में ‘काँटे’ रहते हैं |वे इक-दूजे को सहते हैं ||  दोनों में ‘समझौता’ हो जब-‘सभ्यता’ इसी को कहते हैं ||  हम ‘भले-बुरे’ का निवाह कर-अनवरत ‘नदी’ से बहते हैं ||                                             जब तक न ‘मिलन’ हो ‘सागर’ से-तब तक क्या र...
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  November 14, 2014, 8:20 pm
(सारे चित्र''गूगल-खोज'से साभार) ‘सूरज’ से कभी जगमगाते रहिये !‘सितारों’ से कभी टिमटिमाते रहिये !!  ‘अन्धेरे’ की ‘रियासत’ में ‘मशाल’ जैसे-बनकर के ‘चाँद’ मुस्कुराते रहिये !!  ‘पतझर’ है कभी, तो ‘बहार’ है कभी-‘कोशिशों’ के ‘पौधे’ लगाते रहिये !!             मौजूद...
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  November 12, 2014, 3:13 pm
अपने ‘वतन’ को सुधारने की क़सम लीजिये !‘फूले चमन’ को सँवारने की क़सम लीजिये !! पी के ‘मद’,‘मदन’ का ‘रुप’ क्यों ‘कुरूप’ कर रहे?इसको ‘स्नेह’ में, उतारने की क़सम लीजिये !! ‘सभ्यता’ की ‘नाव’ देखो, आज डूबी जा रही !करके ‘यत्न’ इसको, तारने की क़सम लीजिये !!                    &nb...
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  November 8, 2014, 2:30 pm
गंगा-स्नान/नानक-जयन्ती(कार्त्तिक-पूर्णिमा) की सभी मित्रों को वधाई एवं तन-मन-रूह की शुद्धि हेतु मंगल कामना !                           (सारे चित्र''गूगल-खोज'से साभार)                                             मछलियाँ खाकर हरि के गीत गाने चल ...
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  November 6, 2014, 2:09 pm
‘वीर-सपूती धरा’ कह रही, ओ ‘भारत’ के ‘लाल’ सुनो !‘संस्कृति-गरिमा’ और ‘सभ्यता’, आज हुई ‘बेहाल’ सुनो !!भारत ‘दिव्य देश’ था सुन्दर, आज ‘दैत्य-गढ़’ बना हुआ !‘मन’, ‘सज्जनता’ के ‘शुभ धन’ से कितने हैं कंगाल’ सुनो !!‘विषम स्वार्थ, ‘लिप्सा’ के ‘लोभी’, ‘दानव-दल’ हैं पनप रहे !‘शस्त्र’ क...
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  November 5, 2014, 8:42 pm
(सरे चित्र 'गूगल-खोज'से साभार)                                              ‘नेकी’ का ‘रंग’ क्यों धुला दिया तुमने ?बदला क्यों ‘बदी’ से खुला दिया तुमने ?? ‘प्यार’ के ‘आँगन’ में ‘वफ़ा’ की ‘वारी’ थी –‘नामो-निशां’ उसका क्यों मिटा दिया तुमने ??  तुमने जो उ...
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  November 4, 2014, 9:09 pm
(सरे चित्र 'गूगल-खोज'से साभार)                                                                                                  वाह वाह ! क्या खूब भला किया तुमने !‘दर्द-चुभन’ का सिलसिला दिया तुमने !!  बढ़ गयीं ‘दूरियाँ’, ‘अपनों’ से ‘अप...
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  November 1, 2014, 8:54 pm
                                                 (सरे चित्र 'गूगल-खोज'से साभार)                                                                                                                               ...
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  October 31, 2014, 3:30 pm
जिसकी आँखों ‘मानवता’ का ‘नीर’ होता है !वह ‘मुफ़लिस’ भी, ‘दिल’ का तो ‘अमीर’ होता है !! बड़े-बड़े ‘फ़ौलादी’ जिस्मों को काट देता जो-लोहे का छोटा टुकड़ा ‘पतगीर’ होता है !! ‘शेर’, ज़ेर ‘फ़ील’ से है, यह तो माना है लेकिन-वही तमाम ‘जंगल’ में असीर होता है !!           ‘कोयले’ की ‘खान...
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  October 29, 2014, 4:57 pm
(सरे चित्र 'गूगल-खोज'से साभार)                                                                                                                        दौलत से कहीं कोई ‘अमीर’ होता है !‘अमीर’ वह, जिसका कोई ‘ज़मीर’ होता है !! लोहा ...
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  October 28, 2014, 9:08 pm
सरे चित्र 'गूगल-खोज'से साभार) नर्काचौदस-पर्व मनायें, अघ-आलस को मार !हरें धरा से समूल नाशें, ओघ-पाप का भार !!आचरणों की मैल निखारें, करें इन्हें हम साफ़ !सदाचार के रस से धोयें, सारे भ्रष्टाचार !!हर कर हर अज्ञान-अँधेरा, विद्या-दीपक वार-बुद्धि-हीनता दूर भगायें, करके ज्ञान-प्रसार !!...
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  October 22, 2014, 11:14 pm

(4) ग़ज़ल(धन-तेरस पर शुभ कामना)धन-तेरस का पर्व सभी का सुख मय बीते !हारा हुआ दाँव आज हर कर्मठ जीते !!फैलाएं जो आँचल अपना, किसी अर्थ हित-भरें सभी वे इच्छित वर से , रहें न रीते !!मिटे असुविधा, सुविधाओं से तुष्ट सभी हों- मिलें सभी को निज कामों के लिए सुभीते !!स्वास्थ्य सभी का अच्छा हो औ...
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  October 21, 2014, 7:28 pm
(सरे चित्र 'गूगल-खोज'से साभार)                                               ‘दिल’ के ‘मुफ़लिस’ लोग हैं. पर ‘ज़ेब’ के कितने ‘अमीर’ !!बहुत ‘ओछी सोच’ वाले, दिख रहे हैं ‘जहाँगीर’ !!  दास ‘कंचन’ के कई हैं, ‘कामिनी’ के हैं कई !इनके ‘माथे’ पर खिंची है, बस ‘तबाही...
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  October 11, 2014, 7:50 pm
‘कुण्ठा’ की हिमशिला’ पिघलने वाली है !‘जमी हुई’ हर ‘ताक़त’ गलने वाली है !!देखो तो,’रोशनी’ यहाँ होगी जगमग-बुझी ‘मोमबत्ती’ फिर जलने वाली है !!  ‘मानवता’ को हमने की ‘खुराकें’ दीं-इसे ‘ज़िंदगी’ फिर से मिलने वाली है !!  ‘साहस’ का संचार’, ‘हृदय’ में हुआ अभी-गिरती ‘हालत’ प...
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  October 9, 2014, 3:50 pm
(सरे चित्र 'गूगल-खोज'से साभार)                                             हिंसक कुछ ‘धर्मों के गिद्ध’ नज़र आते हैं !दुखी यों ‘गान्धी’, ’नानक’ ‘बुद्ध’ नज़र आते हैं !! ‘हिंसा’ का ‘धनुष’ लिये, ‘देवदत्त’ निकले हैं-‘स्नेह-हंस’, वानों से बिद्ध नज़र आते हैं !! ‘ब...
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  October 8, 2014, 8:15 am
(सरे चित्र 'गूगल-खोज'से साभार)                                         ‘जठर’ से बढ़ कर ‘गर्म आग है और नहीं  संसार में ! ‘तहज़ीबें’ जल जातीं इसके, बहक रहे ‘अंगार’ में !!जब जलती है ‘काम’ की ‘ज्वाला’, सारी ‘शान्ति’ जलाती है !आग लगा देती है ‘मीठे मीठे मोहक प्यार’...
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  October 4, 2014, 7:21 pm
(सरे चित्र 'गूगल-खोज'से साभार)                                         ‘जठर’ से बढ़ कर ‘गर्म आग है और नहीं  संसार में ! ‘तहज़ीबें’ जल जातीं इसके, दहक रहे ‘अंगार’ में !!जब जलती है ‘काम’ की ‘ज्वाला’, सारी ‘शान्ति’ जलाती है !आग लगा देती है ‘मीठे मीठे मोहक प्यार’...
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  October 4, 2014, 7:21 pm
(सरे चित्र 'गूगल-खोज'से साभार)                                          ‘तोते’ कहते, “आकर सुन ले, मेरे ‘मन्त्र’, ‘बटेर’ !”‘बटेर’ कहती, “ ‘पेट’ है खाली, मुझको अभी न टेर !!”   गाँव में ‘नेता’ ‘सम्मलेन’ की जब करते हैं ‘बात’-कहते ‘भीखू-मीकू’, “देखो हमको लिया ह...
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  October 3, 2014, 4:35 pm
(सरे चित्र 'गूगल-खोज'से साभार)जब तपती है कभी ‘उदर’ में, ‘भूख’ की तपती ‘आग’ !नहीं सुहाते ‘मल्हार-सावन’ के ‘रस-भीने राग’ !! ‘जठर-अनल’ की मज़बूरी से, ‘कलियाँ’ हैं लाचार !                           कामुक ‘भंवरों’ की ‘बाहों’ में ‘लुटते’ रोज़ ‘पराग’ !! ‘आटा-चावल’ उधा...
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  October 2, 2014, 3:55 pm
(सरे चित्र 'गूगल-खोज'से साभार)                                            ‘गंगाजल’ से ‘शीतल’ दिखते, इनके ‘मन’ में ‘आग’ भरी !‘कृमि’ से खाये ‘फल’ सी, ऊपर सुन्दर  भीतर ‘दाग’ भरी !!जीते हैं ये लोग ज़िंदगी, होती कुछ, पर दिखती कुछ-किसी ‘शिकारी’ की ‘वीणा’ से, घातक ‘छ...
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  September 27, 2014, 3:51 pm
(सरे चित्र 'गूगल-खोज'से साभार)बहा ‘पसीना’ किन्तु ‘पेट की आग’ जलाती है मन को !यह ‘बड़वानल’ सी लगती है, जला रही है ‘जीवन’ को !!बजाज का था उधार इतना, ‘रोम-रोम’ था बिका हुआ-अब की होली में यह ‘झबुआ’, ढँकता कैसे निज तन को ??सारा घर ‘तालाब’ बन गया, हर ‘सुख’ है ‘पानी-पानी’-‘मुआ जलाने आया ...
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  September 26, 2014, 5:46 pm
(सरे चित्र 'गूगल-खोज'से साभार)                                      यों तो ‘आंसू’ मन पखारते, ‘ गंगाजल' से होते हैं !पर मन में ‘सन्ताप’-ताप हो, ‘बड़वानल’ से होते हैं !!‘रेगिस्तानों’ में, यों तो बस, ‘तपती बालू’ मिलती है-पर इनमें जो ‘प्यास’ बुझा दें, वे ‘छागल’ स...
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  September 20, 2014, 6:38 pm
(सरे चित्र 'गूगल-खोज'से साभार)                                         ‘संघर्षों’ से हिलीं ‘डालियाँ’, ‘चन्दन-वन’ में ‘आग’ लगी !‘कलियाँ-सुमन-कोंपलें’ झुलसीं, इस ‘मधुवन’ में ‘आग’ लगी !!  ‘शीत फुहारें’ बरसाते हैं, मानों रोते हैं तप कर !तड़प रहीं ‘बिजली’ की ‘...
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  September 19, 2014, 5:51 pm
 (सरे चित्र 'गूगल-खोज'से साभार)                             ठण्डे-ठण्डे हृदयों में यों भीतर पनपी ‘आग’ !हरे-भरे ‘वन’ में ‘दावानल’ जैसे जाता जाग !!‘सुमनों की शैय्या’ पर सोती, ‘प्रिया’, ‘पिया’ के साथ-‘वित्त्वाद’ के ‘जाल’ में फँस कर, ‘लोभी’ हुआ ‘सुहाग’ !!  लेकर ...
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  September 17, 2014, 6:00 pm
 ‘उपदेशों’ की ‘खाद’ डाल कर, कोशिश कर के हार गये ! ‘आचरणों’ के ‘कृषकों’ के आयास सभी बेकार गये !!तुमने ‘द्वार’ न खोला मन का, ‘प्रीति-कपाटें'बन्द रहीं |कई ‘फ़रिश्ते’ दस्तक दे कर, लौटे, तुम्हें पुकार गये !!हमने सह लीं सारी ‘चोटें’, गले लगाया, प्यार किया |यद्यपि सारे ‘अतिथि’ फ़रेब...
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  September 15, 2014, 5:42 pm
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