| माँ,जब भी मैं तुम्हारी प्रतिमा को देखती हूँ तो ,एक प्रश्न उठता है मन में,तुम शक्ति का स्वरूप हो ,खडग,त्रिशूल, गदा धारण किये,सिंह पर सवार हो,पुरुष तुम्हारे आगे शीश झुकाते हैं,लेकिन तुम्हारी ही जैसी तुम्हारी बेटियाँ फिर क्यों इतनी कमजोर हैं,दबी हुई ,डरी हुई ,पुरुषों के आ... |
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October 21, 2012, 3:24 pm |
| अब के हम बिछड़े तो शायद फिर ख़्वाबों में मिले।...... क्या हमने कभी सोचा था कि ये बात गलत साबित हो जाएगी। अब वो जमाना नहीं रहा कि प्यार करने वाले लोग एक बार बिछड़ते थे तो फिर कभी नहीं मिलपाते थे। फेसबुक और ऑरकुट जैसी साइट्स ने हमारे जीवन से विरह रस को तो जैसे स्टीम इंजन क... |
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September 2, 2012, 7:55 pm |
| खूंटे से बंधी गाय को देखा है कभी?निःशब्द निर्विरोध करती रह्ती है भरण पोषण ,अपने बछड़ो का ही नहींदूसरों के बच्चों का भी,भूखे पेट रह कर भीलाठियां सह कर भीनहीं करती प्रतिकार,क्योंकि उसे मालूम है किउसका जन्म ही हुआ है दूसरों के लिए,कहलाती है मातापूजी जाती है यदा कदा ,उप... |
| कभी कभी ऐसा लगता है की दिमाग विचारों की एक फैक्टरी है जिसमें से हर रोज बेतहाशा हजारों विचार निकलते रहते हैं।बहुत कोशिश करती हूँ खुद को व्यस्त रख कर दिमाग के प्रोडक्शन हाउस से होने वाली विचारों की इस अनलिमिटिड सप्लाई को रोकने की लेकिन ये है कि रूकती ही नहीं। और विचा... |
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August 14, 2012, 11:53 am |
| तुम्हारे न होने का अहसास ,तुम्हारे होने के एहसास से कहीं बेहतर है,उसमें कम से कम,बिछड़ जाने का डर तो नहीं है,सुकून है तुम्हारे न होने में,क्योंकि जब तुम होते हो, तो भी कहाँ होते हो,एक सुकून सा देता है,तुम्हारा न होना, सत्य असहनीय होता है ,मुझे पसंद है,कल्पनाओ की स्वछंद उड... |
| जिन्दगी आज तू खामोश क्यों है,कुछ तो सुना ,कुछ नया,कुछ अनसुना,कोई सुने न सुने,में हूँ यहाँ,इस गुफ्तगू में ही बता ,क्या है तेरे दिल में छुपा,हो दर्द या कोई गिला, या कोई ख्वाब हो अनकहा,जिसे भूल बैठी हूँ आज मैं , कोई वादा अगर हो तुझसे किया,जो तू चाहती थी वो नहीं हुआ , जो तू सोचत... |
| <img alt="" height="200" src="data:image/png;base64,iVBORw0KGgoAAAANSUhEUgAAAW4AAAHoCAIAAADmKZIdAAAgAElEQVR4nOTdP4gi29Y//AlPOKFhpRUKv+AVbnCFEwwywSBM0EIHCgYKBiIGIgYiBiIGgh0IGghlIoVBU0xwwV/WoWGnhoYdTvwG+99aa6+9a1d3z7n35YXF0KenZ87M89z+nO9ae9WuL/FDKX6kVVY/lpulcrNUflTVBJ+E1S6V26VKO1IVV9pxpRNXO2VZvUq1V6n1KrVOtdYTVRNV79XqvXq9V6/3GvVeo9EX1QLVbQ11DbqiRuPuaDyQNYM1Hi3Hk+V4sqE13Yynm9lkN5vsZlNYia4lqpSpiapRuhylG1cNvdVPN/10M8w2w0x+bJfnp8iX6Rplm1G2G11MTUS97KZczXEtrqhWul5369dk/ZqsX3fr1+RJ1RbX/uasA64jVydYr8npdXd83R1fdydXXXen60bX+bo5vWxOL0tZl+XpsjxlM1np7Aw+PqXjUzo+JeNTMj7txqfdwNRmcNp0T8vuadk9LrvHWfc4bh3HreOgdRw0Dl1Qrfq+Vd83rKrX9/UarK0q8481WU+yqqLWtdq6Vl1XqytQC1mVRaUyVzWtVKaV8rRcnqga... |
| यादें........ कहने भर को यादें होती हैं, वर्ना जिन्दगी से कुछ इस तरह जुडी होती हैं कि वर्तमान के ऊपर अतीत भारी पड़ने लगता है, काश दिमाग में भी कम्प्यूटर की तरह कोई अन-डू कमांड होती जो चीजो को दिमाग से पूरी तरह डिलीट कर सके।पर नहीं दिमाग कोई मशीन नहीं बल्कि इन्सान के शरीर का... |
| उस पुराने मकान में क्या अब भी मेरे बचपन की पर्रछाइयाँ होंगी। वो कमरे वो दीवारें जहाँ मैंने अपनी उम्र का एक लम्बा हिस्सा बिताया था, क्या आज भी मेरी आवाज वहां गूंजती होगी?............ मेरे आँगन में लगे पेड़ क्या अब भी हरे होंगे,क्या अब भी बारिश में हमारे कचनार पर बैगनी रंग के फूल ... |
| रोज शाम होते ही आ बैठती हूँ, बालकनी में ,अपने हिस्से के आसमान सेथोड़ी हवा की उम्मीद में,सड़क से उडती धूल , रोज रेलिंग पर जम जाती है ,पर ऐसा कभी नहीं हुआ कि ,साफ किया हो मैने उसे,शाम होते ही ,अपनी कोहनियाँ जमाये बैठ जाती हूँ वहीं ,और रोज वो मिटटी, मेरी कोहनियों पे लग जाती ह... |
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