| एक तूफ़ान की तरह आया था तेरा इश्कअपनी सारी हदें लांघता हुआडुबो डाला था मेरा सारा वजूद.नामंजूर था मुझे खुद को खो देनानामंजूर था मुझे तेरा नमक!सो लौटा दिया मैंने वो तूफ़ान वापस समंदर कोबस रह गए कुछ मोती, अटके मेरी पलकों परजो लुढ़क आये गालों तक...कि नाकाम इश्क की निशानियाँ भी क... |
my dreams 'n' expressions.....याने मेरे दिल से...
| मैंने पहुंचाया था प्रेम तुम तक,सम्हाल कर ,एहतियात से पैक करके..सभी आवश्यक निर्देशों के साथकि -ये हिस्सा ऊपर (दिस साइड अप)हैंडल विथ केयरब्रेकेबलडु नॉट रोल और फोल्ड!!मगर देखो नआज छिन्न भिन्न है हमारा प्रेम...बिखर गया कतरा कतरातुम्हारी लापरवाही से.आज समझी किप्रेम के दिए जा... |
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| वो देखता रहता उस पनीली आँखों वाली लडकी को,रेत के घरौंदे बनाते और बिगाड़ते.....उसे मोहब्बत हो चली थी थी इस अनजान,अजीब सी लडकी से...जो अक्सर लाल स्कार्फ बांधे रहती.....कभी कभी काला भी...बरसों से समंदर किनारे रहते रहते इस मछुआरे को पहले कभी न इश्क हुआ था न कभी ऐसी कोई लडकी दिखी थी.जा... |
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| मेरे कमरे मेंदीवारें नहीं हैं.बस खिड़कियाँ हैं,खिड़कियाँ ही खिड़कियाँ ....हर खिड़की एक मौसम की ओर खुलतीकिसी खिड़की से आतीं बारिश की मीठी बूँदें तो किसी से जाड़े की कच्ची धूप भीतर झांकतीया कभी भीतर आकर धुंध मेरा अंतर्मन भिगोती....एक खिड़की पर बसंत झूला करता है (और उसकी ओट में छिप... |
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| बीती रात ख्वाब में मैं एक चिड़िया थी........ चिडे नेचिड़िया से मांगे पंख,प्रेम के एवज में.औरपकड़ा दिया प्यार चिड़िया की चोंच में !चिड़िया चहचहाना चाहती थीउड़ना चाहती थी...मगर मजबूर थी,मौन रहना उसकी मजबूरी थीया शर्त थी चिडे की, पता नहीं....नींद टूटी, ख्वाब टूटा,सुबह हुई......मैं एक चिड़िय... |
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| मेरी डायरी का एक पन्ना....माय शेटर्ड ड्रीम्स एंड .....टेटर्ड एक्सप्रेशंसउसकी यादमेरी डायरी का एक पन्ना हैवो पन्ना,जिसे मोड़ रखा था मैंनेकिनारे से..ताकि खो न जाय.जब किसी रात यकायक चौंक कर उठती तब खुद-ब-ख़ुद खुल जाता वो पन्ना...और लफ्ज़ तैरने लगते सूने कमरे मेंस्मृतियाँ पन्ने से... |
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| यदि प्रेम एक संख्या है तो निश्चित हीविषम संख्या होगी....इसे बांटा नहीं जा सकता कभीदो बराबर हिस्सों में.[प्रेम का गणित ]~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~ तुम्हारे प्रेम में डूब गयी....नहीं चाहती थी डूबनाडूब कर अपना अस्तित्व खोना मुझे नापसंद थाउत्प्लवन के सिद्धांत तय करते हैं शर्तें - तैरते रह... |
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| इन दिनों,सांझ ढले,आसमान सेपरिंदों का जानाऔर तारों का आना अच्छा नहीं लगतागति से स्थिर हो जाना साअच्छा नहीं लगता.....~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~इन दिनों, कुछ दिनों मेंबीत गए कितने दिनमानों ढलें हो कई कई सूरज हर एक शाम... ~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~इन दिनों दहका पलाश दर्द देता है.भरमाता है इसका चटकीला रंगजीवन... |
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| आगे बढ़ते बढ़तेअनायासकोई खींचता है पीछे....मुझे बेबस सा करता हुआ. एक कदम पीछे रखती हूँ औरधंसती चली जाती हूँयादों के दलदल मेंगहरे, बहुत गहरे...डूबती उतराती हूँछटपटाती हूँ बाहर आने को...कभी मिल जाता है किसी हाथ का सहाराकभी खुद-ब-खुद निकल आती हूँलगा देती हूँ अपनी पूरी शक्तिचल प... |
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| मैंने बोया था उस रोज़कुछ,बहुत गहरे, मिट्टी मेंतुम्हारे प्रेम का बीज समझ कर.और सींचा था अपने प्रेम सेजतन से पाला था. देखो !उग आयी है एक नागफनी...कहो!तुम्हें कुछ कहना है क्या??~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~``परेशां हूँ जाने कहाँ खो सी गयी हूँ...खोजती हूँ खुद कोयहाँ/वहां/खुद में/तुम मेंहैरां हूँ..तु... |
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| वो उदास आँखों वाली लड़कीसुर्ख फूल सब्ज़ पत्तेनर्म हवारुकी रुकी बारिशऔर मिट्टी की सौंधी महक को चाहने वाली,माहताब से बदन वाली वो लड़की...उदास रहती थीपतझड़ में.उसे सूखी ज़मीन और नीला आसमान ज़रा नहीं भातेउसकी आँखों को चूमे बिना हीचखा है मैंनेकोरों पर जमे नमक को...एक रात नींद में ... |
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| ये मेरी डायरी का वो पन्ना है जिसे मैं शायद फिर कभी न पढना चाहूँ.....दिल बेशक गुनगुनाता रहेगा !!!(कविता दिवस पर -कुछ पंक्तियाँ उन्हें समर्पित जिन्होंने उँगलियाँ पकड़ कर लिखना सिखाया ...)बचपन से सुनती आयी थीवो अटपटी सी कवितान अर्थ जानती थीन सुर समझती....कविता थी या गीत ???मचलती आवा... |
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| सफ़र में होंगे कांटें भीइस बात से बेखबर न थेमगर खबर न थीके चुभेंगे इस कदर कि तय न हो सकेंगी ये लम्बी दूरियां कभी.....(या कौन जाने ,कोई चुनता रहा हो कांटे मेरी राह के अब तक.... पैरों तले मखमली एहसास यूँ ही तो नहीं था अब तक.......यकायक मंजिल दूर चली गयी हो जैसे....)अनु ... |
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| लहु बिखरा था समूचे आकाश में दम तोडती थी शाम....उस रक्तवर्णी शामतुमने भी तोड़े थे बंधन...बंधन मोह माया के.अस्त हुआ था सूरज !!~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~उस खालीपन में...निर्वात में जीवन संभव न था....जीने की वजह खोजीतो पाया एक तारा....रात के सूने आकाश में टिमटिमाता सबसे चमकीला तारा... जो मुस... |
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| जंगली फूलों सी लड़कीमुझे तेरी खुशबू बेहद पसंद हैउसने कहा था..."मुझे तेरा कोलोन ज़रा नहीं भाता"बनावटी खुशबु वाले उस लड़के सेमोहब्बत करतीलडकी ने मन ही मन सोचा....(इश्क के नाकाम होने की क्या यही वजह होगी ??)लड़का प्रेम में थाउस महुए के फूल जैसी लडकी के.वो उसे पी जाना चाहता था शराब क... |
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February 26, 2013, 1:01 pm |
| आज मेरा ये ब्लॉग एक साल का हो गया.....घुटनों घुटनों सरकते आज अपने पैरों पर चल रहा है...डगमगाते क़दमों से ही सही :-)ब्लॉग की पहली पोस्ट की पहली पंक्तियाँ यूँ थीं-आपके सामने है मेरे दिल का एक पन्ना ....धीरे धीरे सारी किताब पढ़ लेंगे...तब जान भी जायेंगे मुझे....कभी चाहेगे...कभी नकारेंग... |
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February 23, 2013, 9:57 am |
| मैं प्रेम में हूँइसका सीधा अर्थ हैमैं नहीं हूँकहीं और.प्रेम स्वार्थी होता हैये दीवारें खड़ी करता हैप्रेमियों और शेष दुनिया के बीचऔर जब ये नहीं होता हैतब ये दीवार गिरती नहींबस,सरक कर आ जाती हैदोनों प्रेमियों के बीच.मैं प्रेम में हूँइसका अर्थ हैमैं उड़ रहा हूँ...प्रेम पंख... |
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February 19, 2013, 1:40 pm |
| हे सृष्टिकर्ता !तुम दाता होजो तुमने है दिया मुझको वो मेरा हैकोई कैसे छीन सकता है मुझसेजो मेरा है..........कर दे वो मुझको बेघर ,बेशक छीन ले मेरे सर से छत पर जगमग तारों से भरा वो आसमान तो मेरा है ......न मिलें मुझे वो गहनेवो हीरे-पन्ने जो औरों ने पहने..मगर सुबह-सुबह जो झरा वो हरसिंग... |
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February 12, 2013, 7:57 pm |
| कितना सोचते हो तुम ? आखिर कितनी मोहब्बतें मुक्कमल मकाम पाती हैं आजकल ? क्यूँ उसका ख़याल अब तक संजो रखा है तुमने? कुछ तो कहो....यूँ घुटते न रहो...मेरा कहा मानो ,भूल जाओ उसे...इक वही तो नहीं इस सारे जहां में??? उसके ख़याल से बाहर निकलो तो क्या पता कोई करीब ही दिख जाए जो तुमसे न जाने कब स... |
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February 5, 2013, 7:20 pm |
| तेरी सूरत चस्पा हैमेरी आँखों की पुतलियों मेंमेरी तस्वीर तेरीपुरानी किसी दराज में नहीं..... जानती हूँ , मैं तेरी कुछ नहीं लगती !तेरा ज़िक्र मैं करती रहीहर बात में हर सांस में पढ़ कर मेरी नज़्म कोईतू कभी चौंका ही नहीं ..... जानती हूँ , मैं तेरी कुछ नहीं लगती !तेरे इश्क में मैं... |
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January 31, 2013, 8:50 am |
| [28 जनवरी के भास्कर भूमि मे प्रकाशित]मिलोगे तुम मुझे अब ?जाने कितने अरसे बाद....लगता है सदियाँ बीत गयीं,बात कल की नही है,मानों किसी पिछले जन्म का किस्सा था.जाने कैसे पहचानूंगी तुम्हेंतुम भी कैसे जानोगेकि ये मैं ही हूँ ??जिन्हें तुम झील सी शरबती आँखें कहते थे,अब पथरा सी गयीं... |
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January 26, 2013, 1:28 pm |
| (कुछ बिखरे जज्बातों को समेत कर रख दिया है, बस .......)स्नेह की मृगतृष्णामिटती नहीं...रिश्तों का मायाजाल कभी सुलझता नहीं.तो मत रखो कोई रिश्ता मुझसेमत बुलाओ मुझे किसी नाम से...प्रेम का होना ही काफी नहीं है क्या ??~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~सबसे है राब्ता मगर तुम कहाँ हो..मेरी भटकती हुई निगाह कोक... |
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January 17, 2013, 1:19 pm |
| प्रेम मेंरख दिये थे उसनेदो तारे मेरी हथेली परऔर कस ली थी मैंनेअपनी मुट्ठियाँ....भींच रखे थे तारेतब भी ,जब न वो पास था न प्रेम....जुदाई के बरसों बरसउसकी निशानी मान कर.तब कहाँ जानती थीकि मुरादों के पूरा होने की दुआहथेलियाँ खोल करटूटते तारों से मांगनी होगी...मगरउस आखरी निशा... |
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January 13, 2013, 1:14 pm |
| ज़िन्दगी नेक्यों पहन लियाये काला लिबास...जाने किस बात कामातम मनाती है ज़िदगी.ज़िन्दगी के करीबकोई मर गया लगता है.यूँ रोती रही ज़िन्दगीतो किस तरहजी पाएगी ज़िन्दगी ?घुट घुट कर इक रोजखुद भी मर जायेगी ज़िन्दगी.मरते एहसासों को साँसें देना हैसंवेदनाओं को आवाज़ देकर जगाना हैरंगना ह... |
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| तुम्हारे लिए प्यार थाज़मीं से फलक तक साथ चलने का वादाऔर मैं खेत की मेड़ों पर हाथ थामे चलने कोप्यार कहती रही....तुम चाँद तारे तोड़ करदामन में टांकने की बात को प्यार कहते रहेमैं तारों भरे आसमां तलेबेवजह हँसने और बतियाने कोप्यार समझती रही….तुम सारी दुनिया की सैर करवाने कोप्... |
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