| दो कदम ही चला था अभी,रास्ते पथरीले हो गए।।कटीले और उबड़ खाबड़,सोचा तो था कि,रास्ते मैदानी होंगे, सीधे और सपाट,हवाएं भी सांथ देंगी।।पर ये तो ख्वाब था,ख्वाबों का भी क्या दोष,ये न होते तो,आरम्भ ही न होता।।हकीकत का अंदाजा न होता।।पर अब तो चलना है हकीक़त में,बादलों को ताकने स... |
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| वक़्त,सृजन से काल तक।निरंतर चलता हुआ,न रुके कभी न थमे कभी,ज़िन्दगी को रफ़्तार देता हुआ।। यही जख्म दे यही मलहम बने,यही तन्हा करे यही हमदम बने।।आज इसका तो कल उसका,आज बुरा तो कल भला।।वक़्त वक़्त की ही बात है कि,वक़्त नहीं लगता वक़्त बदलने में।।बेवक्त बदल जाता है,ये ... |
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| उसका वो मुस्कुरा कर नजरों को झुका लेना,जैसे कोई नयी कली कुम्हलाई हो।।।उसका दुपट्टे को गिराकर फिर उठा लेना,मानो चली कोई मद्धम पुरवाई हो।।वो चले तो उसकी कमर का वो बल खाना,जैसे मौसम ने ले ली अंगड़ाई हो।।वो उसका खिल खिला के हंस पड़ना बात बात पे,मानो रिमझिम फुहारों संग ... |
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| आज गलियों में फिर पानी भरा है ,आज फिर से आसमां रोया बहुत है।। बड़ी लम्बी होतीं हैं मुहब्बत में रातें,कि हमने भी रातों में तकियों को भिगोया बहुत है।।उसकी मुहब्बत, उसकी बेरुखी से ज्यादा दर्द दे गयी,कि वो मेरे क़रीब भी रहा बहुत है।।तक़लीफ़ देने लगतीं हैं धड्कनें भी ज... |
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February 25, 2013, 10:57 pm |
| कुछ भीगा भीगा सा था मौसम,कुछ सर्द हवाएं भी थी नम।।लहराई शाखें पेड़ों की संग हवा के,रफ़्तार से करने लगी बातें हवाएं।।पत्तों पे अटकी बूदों को छिटकते हुए,निकली सर्द हवाएं गालों को छुते हुए।। बूदें कुछ इस तरह पड़ी गालों पे,इक सिरहन सी पैदा कर गयी बदन में।।थम गये थे मेघ ... |
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January 16, 2013, 9:45 pm |
| हर पल मेरी मुहब्बत का इम्तहान लेने वाले .....मेरी नफरत में भी वही शिद्दत है ......जो कभी मेरी मुहब्बत मे हुआ करती थी।।।।... |
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December 21, 2012, 11:08 pm |
| "sympathy is the worst thing which we can give to anyone...it makes us great and stronger than him/her and make him/her weaker...ultimately it leads to inequality...i think encouragement is better option.." ... |
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November 1, 2012, 6:12 pm |
| सोच सोचकर बीती बातेंकटने लगी हैं अब तो रातें।अब तो नींद भी रुसवा है हमसे,आती सारी रात नहीं।मासूमियत की हद तो देखिए ; मुस्कुरा के कह दिया कि,तुम्हें तो आदत ही है जागने की; कोई बड़ी बात नहीं।... |
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October 28, 2012, 12:35 am |
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| मुहब्बत हो तो एसी हो .... कि कहना न पढ़ जाये मुहब्बत है तुमसे ................ ... |
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September 15, 2012, 12:47 am |
| बेचैनी इधर भी है,तो बेताब वो भी हैं।नाराज़ हम भी हैं तो,खफ़ा वो भी हैं।रहा हमसे भी नहीं जाता उनके बिन तो,तड़पन उधर भी है तन्हापन की ।चाहत है कि,पिघला दो बर्फ नाराजगी की,प्यार की गर्मी से।खींच दो डोर को कि,खुल जाये ये गांठ अहम की।छा जाने दो प्यार की रौशनी को,कि हट जाय... |
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September 2, 2012, 7:04 pm |
| बांवरा मन उड़ चला है,बेलगाम, हवा से करे बातें....उठता कभी, गिरता कभी,देखे न दिन और रातें ...वक्त और बेवक्त,क्या सही और क्या गलत,कुछ भी न तो ये जाने..हकीकत के मोतियों को,ख्वाब में पिरोते हुए,अपनी ही बस ये माने...देखता है एक कोने में,चुप चाप बैठा ये ह्रदय ..धडकनों को लयबद्ध करता,सुरील... |
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| What is marriage?Marriage is a social contract between two individuals that unites their lives legally, economically, and emotionally. This is the definition which I got when I gone through various literatures related to marriages. It seems quite diplomatic definition to me because adding a word emotion in the definition is not quite enough to describe the emotional description of marriage. Marriage is a phenomenon or I would say it’s a kind of process by which two individuals share every aspect of their lives with each other. The two individuals who take part in this process, in this institution, are often of opposite sex (male and female). It is understood that after marriage both the i... |
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August 10, 2012, 12:05 am |
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| ये तन्हाई ....अकेले देख के मुझको ,चली आती है सताने..सांथ में लेके यादो को ,दुःख में सांथ देने चली आती है ...ये तन्हाई ...रंग, ख़ुशी, खुशबु,सबके मायने बदल देती है..वक्त से ये बेखबर,वक्त बेवक्त आकर,मुझे मेरे होने का एहसास करा देती है..मनो कह रही हो मुझसे,पगले तू क्यों दीवाना है...दुन... |
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| भीगी हुई ये जमीं,बहती हुई ये सर्द हवाएं .....कह रही हैं कि बरसे हैं बदरा अभी अभी,कि रोया है ये अभी अभी....उमड़ घुमड़ कर अठखेलियाँ करते बादलों को खोकर,नम हैं ये हवाएं, नम है ये मौसम.....नम है ये ऑंखें भी आज,अधूरेपन का एहसास दिल में लिए,मनभावन फुहारों के बीच तेरी यदों को लिए.......नमी ... |
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| ख़ामोशी...बेजुबां होकर भी कितना कुछ कह जाती है... अनेकों रंग हैं इसके भी ,कभी नाराजगी जता जाती है ये,तो कभी दिल में मच रही हलचल का द्योतक है ..कभी दिल के चैन का जरुरत ये बनती है ,तो कभी बेचैनी और और बेताबी का सबब ये है .तूफान के आने से पहले भी ये है ,तूफां के चले जाने ... |
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| समझने - समझाने से जो कुछ होता ग़र , तो इन्सान गलतियाँ ही न करता.....ये तो ठोकरें हैं पग - पग पर , जो चलना सिखातीं हैं......... |
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| समझने - समझाने से जो कुछ होता ग़र , तो इन्सान गलतियाँ ही न करताये तो ठोकरें हैं पग - पग पर , जो चलना सिखातीं हैं... |
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| ढूंढता हूँ खुद में खुद को,खोया सा हूँ न जाने कहाँ ...खुद ही उत्सुक नयी आकाँक्षाओं को लिए ,खुद ही बेबस अपनी अकर्मण्यता से ..........रेत के खुबसूरत महल की भांति,मगर पवन वेग न सह पाए ...........बांस सा सशक्त मगर खोखला ...अंधेरो में आँखें मूदकर चलता हुआ सा ,उमीदों के भंवर में डूबता हुआ स... |
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| एक अजीब कशमकश है ये ख्वाब भी....एक उम्मीद की किरण से,आने वाले पल को कल्पित करते.. आगाज और अंजाम के बीच जद्दोजहद करते हुए..रोशनी की अभिलाषा लिये ,अंधेरो के डर के साँथ..टूटे ग़र ये तो तोड़ के रख दें....हकीकत की दुनिया में पल बढ़कर,एक काल्पनिक दुनिया में रखते हैं....उन्मादि... |
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| Ashufit pkklsdfhisnkv vkncvihdfn nkfhi... |
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| Ek ajeeb kashmkash hn y khwab bhi,Ek ummeed ki kiran se,Ane wal pal ko kalpit karti….Aagaaj aur anjam ke bech jaddojahad krte hue……..Roshani ki abhilasha liye,Andhero k dar k santh …….Tute gar y to tod k rakh de….Haquiqat ki duniya m pal badhkar, ek kalpnik duniya m rakhti hn…unmadit , prafullit ,anandmay aur ashanvit karte hue,ankhir m haquiqat ka ehsas bi kra jate hn..y khwab…... |
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