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Blog: Srijan

Blogger: rajendra sharrma"vivek"
गुरु शुरू से साथ रहे ,गुरु सत्ता असीम हे गुरु देवो नमो नम: ,लघुता कर दे भीम                           -गुरु तत्व चहु खींच रहा ,हो जाओ अब लीनज्यो ज्यो उसमे लीन हुआ ,हुआ कुशल प्रवीण                            -  गुरु चरणों की आस रही ,प्यासे रहते नैन दर्शन दो गुरुदेव हमें ,तव दर्शन से चैन     ... Read more
clicks 205 View   Vote 0 Like   4:17am 3 Jul 2012 #
Blogger: rajendra sharrma"vivek"
कर्म तेरी साधना है,कर्म ही आराधना हैकर्म मे निहीत रही है ,देवत्व की अवधारणा हैकर्म धर्म का है पूरक ,कर्महीन जड़मति मूरखकर्महीन जो भी रहा है,मिलती रही प्रताडना हैकर्म मे कर्तव्य रहता ,कर्तव्य ही मंतव्य कहतामंतव्य से गंतव्य तक की ,चिर प्रतिक्षित धारणा हैकर्म राम कर्म श्... Read more
clicks 140 View   Vote 0 Like   3:21pm 28 Jun 2012 #
Blogger: rajendra sharrma"vivek"
देख लिए जिन्होंने दिन में तारे है रास्ते अन्धेर्रो ने उनके सवारे है खो गई अचानक यूँ दिल की ख़ुशी लुट गई दिल की दौलत वे गए मारे है लौटा दे जो जिंदगी की सरगम  आंसू की नदीया है और वे किनारे है ले गए वे दिल दिलवर जाते जातेउनकी यादो में रोये है पल गुजारे है आसमान औरजमीन कहा मि... Read more
clicks 160 View   Vote 0 Like   3:27pm 27 Jun 2012 #
Blogger: rajendra sharrma"vivek"
धीरज धर सुखी रहे ,दुःख पाये अधीर जो दुःख में सुखी रहे ,कहलाता रणधीरनीरज का अज नीर है ,बनी दूध से खीर धन के हाथो नहीं बिका ,सत जिसकी जागीरराज्य बिना अवधूत रहे ,सूरमीरा  कबीर मुक्ति भक्ति के साथ रहे, टूटी भव जंजीर मिटटी की यह देह रही ,मिटटी की है गेहमिटटी पर जो मर मिटे ,मिटटी द... Read more
clicks 143 View   Vote 0 Like   3:33pm 25 Jun 2012 #
Blogger: rajendra sharrma"vivek"
मन की आशा टूट गई है ,नहीं देता है कोई दिलासा गगरी नाजुक फूट गई है ,जल बिन जीवन रहता प्यासा म्रगत्रष्णा सी रही जिन्दगी,मन मृग होकर खोजे पानीपडी जेठ की भीषण गर्मी, भीषण मौसम मुंह की खानीबूंद बूंद  सुख की जुट जाये, तो मरूथल मे जीवन आशाकर्म-धर्म का चला है फेरा ,सत्य धर्म का कह... Read more
clicks 135 View   Vote 0 Like   2:42am 23 Jun 2012 #
Blogger: rajendra sharrma"vivek"
पतझड़ पतझड़ हुई जवानी अल्हड आशा कुल्हड़ ​​​​​​पानी भावो की बदरी है बरसे ,घावो की पीड़ा है तरसे आ  भी जाओ बरखा रानी भीगी क्यों नहीं प्यारी चुनरिया आये क्यों नहीं मेरे सावरियारीत ऋतूअन की होती सुहानी काली प्यारी कोयल बोले मयूरा छलिया नाचे डोले छाए मेघा बरसे पानी पतझड़ से ... Read more
clicks 187 View   Vote 0 Like   1:54pm 8 Jun 2012 #
Blogger: rajendra sharrma"vivek"
मन के मृदु भावो से आती ,यह प्यार भरी मीठी बोली गम गीतों से होता मुखरित ,गठरी मन की किसने खोली प्रीती की होती मूक भाषा प्रियतम में रहती अभिलाषा भावो का पंछी रह प्यासा . हुई खुशियों की ओझल टोली जीवन में जंगल है ,दंगल ,जंगल ही देता है संबल धनबल के हाथो है  मंगल ,धनहीन को मिलत... Read more
clicks 151 View   Vote 0 Like   5:49am 21 May 2012 #
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माता से  है अनुपम रिश्ता,ममता मे रमता है ईशममता मे करूणा है रहती,करूणा मे रहती है टीसमाता की छाया मे जन्नत,बेटा तो है माँ की मन्नत माता के चरणो मे रहकर ,भगवन का मिलता आशीषमाता के छलके जब आंसू  भावो की हो गई बारिशमाता मे ईश्वर, की सत्ता ,माता के है शक्ति-पीठमाँ का प्यार न ज... Read more
clicks 130 View   Vote 0 Like   2:17pm 11 May 2012 #
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 होठो ने  ओढ़ी ख़ामोशी ,दृष्टि प्रीती को पाती है प्रीती  की सूरत है भोली पर ,मंद मंद मुस्काती है                                         - राह थकन ही देती है ,मुश्किल से मंजिल आती है जीवन है कांटो में पलता चाहत कुचली ही जाती है                                                              - ... Read more
clicks 151 View   Vote 0 Like   3:50pm 7 May 2012 #
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गीत गजल में प्रीत रहे ,करे भजन प्रभु लीनगजल नयन को सजल करे ,गजल करे गमगीन भजन सृजन मनोभाव  है, भज ले ईश प्रतिदिन सूरदास रैदास  हुए  ,मीरा  पद प्राचीन जीवन संध्या रात है ,बाल्यकाल प्रभात प्रतिदिन  बीता जात  रहा ,समय दे रहा मात सभी बलो में है उत्तम , आत्म का ही बल ... Read more
clicks 152 View   Vote 0 Like   7:59am 5 May 2012 #
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खिलखिलाई  सुबह होगी, झिलमिलाती शाम होगीतज थकन तू बढ मुसाफिर ,जिन्दगी वरदान होगीपत्थरों सा जो पड़ा है ,वह शिखर पर कब चढ़ा है जो चेतना रसपान करता ,तारे सा नभ में जड़ा है छोडकर मन की उदासी,मुस्कान न मेहमान होगी  उम्मीदो के आशियाने ,क्षितिज के उस पार हैघोर तम में कर परि... Read more
clicks 143 View   Vote 0 Like   3:53pm 25 Apr 2012 #
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मौसम ने तन-मन को लू से लपेटा हैबारिश का मौसम क्या ? गर्मी का बेटा हैजीव-जन्तु अकुलाये सहमे हुये है साये खग-दल है गुम सुम  ठहरे पल अलसाये चल-चल कर मरूथल मे भाग्य गया लेटा हैपतझड़ने झड़-झड़ कर पत्ते खूब बरसाये  तकदीर से लड़ -लड़ कर मंजिल को हम पाये दुःख दर्द हर  गम को आँचल मे स... Read more
clicks 147 View   Vote 0 Like   4:00am 13 Apr 2012 #
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खोजता चारो तरफ मै कहाँ मेरे कृष्ण है पंथ पर कठिनाईया है और ढेरो प्रश्न है ख़्वाब के जो थे किले वे खंडहर बन ढह गये भाग्य में जो दुख लिखे थे जिंदगी भर रह गये कुचलती सम्भावनाये,होते नहीं अब जश्न है पाने को उत्सुक रहा हूँ  इष्ट तेरी साधना है राधे भी तुम ही हो मेरे ,तू मेरी आरा... Read more
clicks 168 View   Vote 0 Like   4:23am 27 Mar 2012 #
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दीपक बन जलने से अंधियारा जीवन का दूर होता है जला नहीं गला जो केवल पिघल कर चूर होता है औरो से क्या जलना है ,स्वयं में ही पिघलना है दीपक सम जल कर गहन तिमिर निगलना होता है  इस्पाती इरादों के बल प्रतिपल  चलना होता है धधकते अंगारों के बीच लोहे सा ढलना होता है  परस्पर विश्वास ... Read more
clicks 132 View   Vote 0 Like   4:52am 25 Mar 2012 #
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चित्तौड़गढ़ वीरो की भूमि हैवीरो ने पराक्रम की पराकाष्ठाए चूमी हैपराक्रम की पराकाष्ठाए महाराणा के इर्द -गिर्द घूमी हैचित्तौड़गढ़ राणा प्रताप का भाला है अडिग रही आस्थाये दुर्बल निष्ठाओ का मुंह काला है लौटा है शक्ति सिंह फिर अपना घर सम्हाला है चेतक सा अश्व है जानवर ने ... Read more
clicks 171 View   Vote 0 Like   7:12am 18 Mar 2012 #
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कैसे बनी साधारण से असाधारण  नारिया पल्लवित हुई  उद्यान में  फूलो की क्यारिया   चारित्रिक संस्कारों से वे  थी भरपूर सभी कलाओं में प्रवीण ,बांधे पाँव में नुपुर चढ़ी हिमालय चोटी झेली कई दुश्वारिया अन्तरिक्ष की  वो थी कल्पना दे गई वेदना बहन सुनीता विलियम ने हमें दी संवेदन... Read more
clicks 138 View   Vote 0 Like   3:50pm 16 Mar 2012 #
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भक्ति से शक्ति मिले ,शक्ति से मिले शिव शिव शरणम में जो गया ,सजीवहो गया जीव -भावो में भक्ति रही ,नवधा भक्ति जान भक्ति से श्री हरी मिले , मिटे मिथ्य अभिमान- भक्त भजे भगवान् को ,भगवन बसे ह्रदय जो भगवन के ह्रदय बसे ,उसकी मुक्ति तय - मीरा सूर रैदास रहे ,कान्हा में विभोर तुलसी की ... Read more
clicks 153 View   Vote 0 Like   2:39pm 14 Mar 2012 #
Blogger: rajendra sharrma"vivek"
जब होठ सत्य न बोल सके तो ,तन बोले सत की भाषा है तन से तन की दूरी हो कितनी,मन बसती तव अभिलाषा है जब शब्द भाव न कह पाया हो ,टूटी फूटी कृश काया हो निस्तब्ध पीर की छाया हो ,मुख कुछ भी न कह पाया हो भक्ति भाव प्रियतम प्रीती की , गुप चुप सी होती भाषा है  चहु घनी घनी सी छाया हो नीम बरगद भ... Read more
clicks 164 View   Vote 0 Like   4:11pm 27 Feb 2012 #
Blogger: rajendra sharrma"vivek"
पिता विश्वास का आकाश है माता धरती सा आभास है पिता झरने का जल है जीवन की अरुणा हैमाता मिट्टी है वात्सल्य है एवम करुणा हैमाता देती काया है,पिता देते छत्र छाया हैमाता का गुण ईश्वर ने भी गाया है पिता से कुछ भी नही छुप पाया हैइसलिये पिता से कुछ भी मत छुपाओ कभी भी माता पिता को ... Read more
clicks 155 View   Vote 0 Like   1:10pm 25 Feb 2012 #
Blogger: rajendra sharrma"vivek"
पतवार खैकर बढ मुसाफिर ,उस तरफ एक गाँव  हैजिन्दगी ईश्वर ने दी है जो  निज आत्मा की नाव हैलहरों पर लहरे उठेगी  ,आँधिया कभी  न थमेगी संकल्प का दीपक जला ले ,नैया तेरी न डुबेगीतूफानों मे कर सृजन तू, यहाँ भावो का अभाव हैप्राण व्याकुल हो,विकल हो ,भावना तेरी शीतल हो लक्ष्य की तू प्... Read more
clicks 157 View   Vote 0 Like   3:17pm 17 Feb 2012 #
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