| उर्दू से हिन्दी का शब्दकोश http://shabdvyuh.com/ग़ज़ल शब्दावली (उदाहरण सहित) - 2गीतिका छंदवीर छंद या आल्हा छंद'मत्त सवैया' या 'राधेश्यामी छंद' :एक परिचयसर्वोपरि दोहा लगे, अनुपम रूप-स्वरुप..(तेईस प्रकार के दोहे)'रूपमाला रूपसी है, रास करता छंद'. :मदन-छंद या रूपमालारोला छंद एक परिचय:छन्द...एक ... |
गंगा-दामोदर ब्लॉगर्स एसोसिये...
|
|
|
November 27, 2012, 12:01 pm |
| आदरणीय / आदरेया !!जन संस्कृति मंच का अखिल भारतीय सम्मलेन 4 नवम्बर को गोरखपुर में हो रहा है-सूचना मिली है कि धनबाद के हमारे वरिष्ठ ब्लॉगर और सहयोगी आदरणीय उमा जी इस कार्यक्रम में भाग लेने गोरखपुर जा रहे हैं-उनकी अनुपस्थिति से हमें अपनी गोष्ठी की तिथि (4 नवम्बर )आगे बढानी प... |
गंगा-दामोदर ब्लॉगर्स एसोसिये...
|
|
|
October 16, 2012, 4:26 pm |
| आदरणीय मित्रवर-धनबाद के ISM में दिनांक 4 नवम्बर 2012 को संध्या 3 pm पर एसोसियेशन के गठन के लिए बैठक रख सकते हैं क्या ??अपनी सहमति देने की कृपा करे ||सायंकाल 6 से 9 तक एक गोष्ठी का भी आयोजन किया जा सकता है || भोजन के पश्चात् रात्रि विश्राम की भी व्यवस्था रहेगी-... |
गंगा-दामोदर ब्लॉगर्स एसोसिये...
| कृपया क्लिक करें- भगवान् राम की सगी बहन की पूरी कथा - आप जानते हैं क्या ?? सर्ग-1अथ - शांता भाग-1 सोरठा वन्दऊँ श्री गणेश, गणनायक हे एकदंत |जय-जय जय विघ्नेश, पूर्ण कथा कर पावनी ||1||... |
गंगा-दामोदर ब्लॉगर्स एसोसिये...
| आज धनबाद के ब्लॉगर्स को माननीय देवेन्द्र गौतम जी का सानिध्य प्राप्त हुआ ।इस गोष्ठी में गंगा-दामोदर ब्लॉगर्स एसोसियेशनकी स्थापना की आवश्यकता महसूस की गयी । आपके विचार और सुझाव सादर आमंत्रित हैं । रविकर ... |
गंगा-दामोदर ब्लॉगर्स एसोसिये...
|
|
|
September 23, 2012, 5:33 pm |
| सोरठा वन्दऊँ श्री गणेश, गणनायक हे एकदंत |जय-जय जय विघ्नेश, पूर्ण कथा कर पावनी ||वन्दऊँ गुरुवर श्रेष्ठ, कृपा पाय के मूढ़ मति,गुन-गँवार ठठ-ठेठ, काव्य-साधना में रमा ||गोधन-गोठ प्रणाम, कल्प-वृक्ष गौ-नंदिनी |गोकुल चारो धाम, गोवर्धन गिरि पूजता ||वेद-काल का साथ, गंगा सिन्धु सरस्वती... |
गंगा-दामोदर ब्लॉगर्स एसोसिये...
Tag :खंड-काव्य-भगवती शांता
| बीबी बोकारो बसी, बैजू है बीमार ।देख दुर्दशा दीन की, देता रविकर तार ।।तार बोका रो-रो कर मरे, बोकारो न जाय ।सर्दी खांसी ज्वर बढ़ा, कोई नहीं सहाय ।।बैजू होता बावरा, सहे करेजे चोट ।बोकारो जाए कसक, लेके सौ का नोट ।।यह विछोह का घाव अब, उससे सहा न जाय ।गम की मक्खी भिनभिना, तड़पन र... |
गंगा-दामोदर ब्लॉगर्स एसोसिये...
|
|
|
February 22, 2012, 3:42 pm |
| पूरी कथा के लिए terahsatrah.blogspot.comपर आयें |-- रविकर कौला का वियोग अंग-अवध छूटे सभी, सृंगी के संग सैर |शांता साध्वी सी बनी, चाहे सबकी खैर || कौला मुश्किल से सहे, हुई शांता गैर | खट्टे-मिट्ठे दृश्य सब, गए आँख में तैर || चौपाई रावण की दारुण अय्यारी | कौशल्या पर पड़ती भारी ||कौशल्या का हरण करा... |
गंगा-दामोदर ब्लॉगर्स एसोसिये...
|
|
|
December 11, 2011, 11:30 am |
| भाग - 1 कौशल्या कन्या पाठशाला अंगराज के स्वास्थ्य को, ढीला-ढाला पाय |चम्पारानी की ख़ुशी, सारी गई बिलाय ||शिक्षा पूरी कर चुके, अपने राजकुमार |अस्त्र-शस्त्र सब शास्त्र में, पाया ज्ञान अपार ||व्यवहार-कुशल नीतिज्ञ, वय अट्ठारह साल |राजा चाहें सोम से, पद युवराज सँभाल ||शांता आगे ब... |
गंगा-दामोदर ब्लॉगर्स एसोसिये...
|
|
|
December 2, 2011, 4:56 pm |
| भाग-1 वन-विहारमाता संग गुरुकुल गई, बाढ़े भ्रात विछोह |दक्षिण की सुन्दर छटा, लेती थी मन मोह ||गंगा के दक्षिण घने, सौ योजन तक झाड़ |श्वेत बाघ मिलते उधर, झरने और पहाड़ ||मन की चंचलता विकट, इच्छा मारे जोर |रूपा के संग चल पड़ी, रथ लेकर अति भोर |वटुक-परम पीछे लगा, सबकी नजर बचाय |तीर धनु... |
गंगा-दामोदर ब्लॉगर्स एसोसिये...
|
|
|
November 29, 2011, 3:52 pm |
| शिक्षा और संस्कार भाग-1शान्ता के चरणचले घुटुरवन शान्ता, सारा महल उजेर |दास-दासियों ने रखा, राज कुमारी घेर ||सबसे प्रिय उसको लगे, अपनी माँ की गोद |माँ बोले जब तोतली, होवे महा विनोद ||कौला दालिम जोहते, बैठे अपनी बाट |कौला पैरों को मले, हलके-फुल्के डांट ||दालिम टहलाता रहे, करवाए अ... |
गंगा-दामोदर ब्लॉगर्स एसोसिये...
|
|
|
November 27, 2011, 8:01 pm |
| सर्ग-3 बाला-शांता भाग-1सम गोत्रीय विवाह फटा कलेजा भूप का, सुना शब्द विकलांग |ठीक करो मम संतती, जो चाहे सो मांग ||भूपति की चिंता बढ़ी, छठी दिवस से बोझ |तनया की विकृति भला, कैसे होगी सोझ ||रात-रात भर देखते, उसकी दुखती टांग |सपने में भी आ जमे, नटनी करती स्वांग ||गुरु वशिष्ठ ने एक दिन, भ... |
गंगा-दामोदर ब्लॉगर्स एसोसिये...
|
|
|
November 25, 2011, 10:03 am |
| सर्ग-२ सम्पूर्ण भाग-1महारानी कौशल्या-महाराज दशरथ और रावण के क्षत्रप सोरठा रास रंग उत्साह, अवधपुरी में खुब जमा |उत्सुक देखे राह, कनक महल सजकर खड़ा ||चौरासी विस्तार, अवध नगर का कोस में |अक्षय धन-भण्डार, हृदय कोष सन्तोष धन |पांच कोस विस्तार, कनक भवन के अष्ट कुञ्ज |इतने ही थ... |
गंगा-दामोदर ब्लॉगर्स एसोसिये...
|
|
|
November 22, 2011, 11:11 am |
| सर्ग-1 भाग-1 सोरठा वन्दऊँ श्री गणेश, गणनायक हे एकदंत |जय-जय जय विघ्नेश, पूर्ण कथा कर पावनी ||1||वन्दऊँ गुरुवर श्रेष्ठ, जिनकी किरपा से बदल,यह गँवार ठठ-ठेठ, काव्य-साधना में रमा ||2||गोधन को परनाम , परम पावनी नंदिनी |गोकुल मथुरा धाम, गोवर्धन को पूजता ||3||वेद-काल का साथ, पावन सिन्धु सर... |
गंगा-दामोदर ब्लॉगर्स एसोसिये...
|
|
|
November 15, 2011, 7:12 pm |
| पुरुष- प्रश्न कितने अपरचित ले गएधनिया उखाड़ कर -मैंने छुआ तो मुझको बाहर भगा दिया ?सब्जी बनाई थी खुश्बू भी आ सके -- ऐ बेमुरौवतक्यों ठोकर लगा दिया | स्त्री -उत्तर किचेन में तुम्हारी, तीन पीढ़ी से --क्या घर की कोई बेटी, खाना बनाई है ?तेरी न कोई फुफ्फी, बा... |
गंगा-दामोदर ब्लॉगर्स एसोसिये...
|
|
|
October 18, 2011, 12:10 pm |
| टुकड़े-टुकड़े था हुआ, सारा बड़ा कुटुम्ब, पाक, बांगलाब्रह्मबन, लंकासे जल-खुम्ब || (मेरा बड़ा परिवारबाबा, परबाबा के भाइयों बीच बँटना शुरू हो गया था )( प्राचीन अखंड भारत खंड-खंड हो गया था) अब घर छत्तीसगढ़हुआ,चंडीगढ़था यार,पांडिचेरी बन गया, बिखरा घर-परिवार ||(पत्नी के साथ ३... |
गंगा-दामोदर ब्लॉगर्स एसोसिये...
|
|
|
October 12, 2011, 10:03 pm |
| पति-अनुनय को कह धता, कुपित होय तत्काल |बरछी-बोल कटार-गम, दरक जाय मन-ढाल ||पत्नी पग-पग पर परे, पति पर न पतियाय |श्रीमन का मन मन्मथा, श्रीमति मति मटियाय ||हार गले की फांस है, किया विरह-आहार |हारहूर से तेज है, हार हूर अभिसार ||हारहूर=मद्य आहार-विरह=रोटी के लाले चमक... |
गंगा-दामोदर ब्लॉगर्स एसोसिये...
|
|
|
September 30, 2011, 2:09 pm |
| संदीप जी (जाट देवता ) के जन्म दिन पर समर्पित रचना अक्कड़-बक्कड़ बम्बे-बो, अस्सी नब्बे पूरे सौ ||अक्षय और अनंत ऊर्जा का, शाश्वत भण्डार सूर्य हो |मत्स्य-भेदते द्रुपद-सुता के, स्वप्नों के प्रिय-पार्थ-पूर्य हो || घुमक्कड़ी के संदीपक हो, मित्रों ने पाया उजिया... |
गंगा-दामोदर ब्लॉगर्स एसोसिये...
|
|
|
September 23, 2011, 9:49 am |
| पंजाब एवं बंग आगे, कट चुके हैं अंग आगे|लड़े बहुतै जंग आगे, और होंगे तंग आगे|हर गली तो बंद आगे, बोलिए, है क्या उपाय ??व्यर्थ हमने सिर कटाए, बहुत ही अफ़सोस, हाय !सर्दियाँ ढलती हुई हैं, चोटियाँ गलती हुई हैं |गर्मियां बढती हुई हैं, वादियाँ जलती हुई हैं |गोलियां चलती हुई ... |
गंगा-दामोदर ब्लॉगर्स एसोसिये...
|
|
|
September 18, 2011, 9:13 am |
| आलू यहाँ उबाले कोई |बना पराठा खा ले कोई ||तोला-तोला ताक तोलते,सोणी देख भगा ले कोई |जला दूध का छाछ फूंकताछाछे जीभ जला ले कोई |जमा शौक से करे खजाना आकर उसे चुरा ले कोई ||लेता देता हुआ तिहाड़ीपर सरकार बचा ले कोई ||"रविकर" कलम घसीटे नियमितआजा प्यारे गा ले कोई ||... |
गंगा-दामोदर ब्लॉगर्स एसोसिये...
|
|
|
September 14, 2011, 10:29 am |
| लक्ष्मण रेखालांघती, लिए हथेली जान बीस निगाहें घूरती, खुद रावण पहचान खुद रावण पहचान, नहीं ये तृण से डरता मर्यादा को भूल, हवस बस पूरी करता संगीता की सीख, ठीक पहचानो रावण खींचो खुदकी रेख, कहाँ ले खींचे लक्ष्मण... |
गंगा-दामोदर ब्लॉगर्स एसोसिये...
|
|
|
September 11, 2011, 8:53 pm |
[ Prev Page ] [ Next Page ]
|
|
|