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Blog: शांता : श्री राम की बहन

Blogger: dinesh chandra gupta ravikar
Shanta (Ramayana)Shanta is a character in the Ramayana. She was the daughter of Dasharatha andKausalya, adopted by the couple Rompad and Vershini.[1] Shanta was a wife ofRishyasringa.[1] The descendants of Shanta and Rishyasringa are Sengar Rajputs who are called the only Rishivanshi rajputs.LifeShanta was a daughter of Maharajah Dasharatha and Kausalya, but was adopted by the king (rajah) of Angadesh, Raja Rompad, and her aunt Vershini, an elder sister ofKausalya. Vershini had no children, and, when at Ayodhya, Vershini jokingly asked for offspring. Dasharatha agreed to allow the adoption of his daughter. Howeve... Read more
clicks 125 View   Vote 0 Like   4:22am 27 Jun 2017 #
Blogger: dinesh chandra gupta ravikar
सर्ग-5अंतिम भाग पञ्च-रत्न शादी होती सोम से, शांता का आभार |कौला दालिम खुश हुए, पाती रूपा प्यार ||चाहत की कीमत मिली, अहा हाय हतभाग ।इक चितवन देती चुका, तड़पूं अब दिन रात । समाचार लेते रहे, शांता सृंगी व्यस्त  |दूरानुभूति सुख दे रही,  सूर्यदेव जब अस्त || परम बटुक को म... Read more
clicks 120 View   Vote 0 Like   7:30am 14 Jun 2017 #
Blogger: dinesh chandra gupta ravikar
  भाग-1 कौशिकी-कोसी सृन्गेश्वर महादेवभगिनी विश्वामित्र की, सत्यवती था नाम |षोडश सुन्दर रूपसी, बनी रिचिक की बाम ||  मत्तगयन्द सवैया नारि सँवार रही घर बार, विभिन्न प्रकार धरा अजमाई ।कन्यक रूप बुआ भगिनी घरनी ममता बधु सास कहाई ।सेवत नेह समर्पण से कुल, नित्य नयापन... Read more
clicks 117 View   Vote 0 Like   5:46am 12 Jun 2017 #
Blogger: dinesh chandra gupta ravikar
भाग-1शान्ता के चरणशान्ता चलती घुटुरवन, सारा महल उजेर |राजकुमारी को रहे, दास-दासियाँ घेर ||सबसे प्रिय लगती उसे, अपनी माँ की गोद |माँ उच्चारे तोतली, होवे परम-विनोद ||कौला दालिम जोहते, बैठे अपनी बाट |कौला पैरों को मले, हलके-फुल्के डांट ||दालिम टहलाता रहे, करवाए अभ्यास |डेढ़ वर्ष&n... Read more
clicks 110 View   Vote 0 Like   5:55am 2 May 2017 #
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 सर्ग-२ भाग-1जन्म-कथा हरिगीतिका भयभीत कौशल्या रहे चिंता-ग्रसित दिखती सदा । आतंक फैला शत्रु का, कैसे टले यह आपदा । कुलदेवता रक्षा करो, इस भ्रूण की तुम सर्वदा । अथ देवि-देवों को मनाती भाग्य में है क्या बदा ॥ दोहा धनदा-नन्दा-मंगला,  मातु कुमारी &nbs... Read more
clicks 107 View   Vote 0 Like   10:16am 8 Feb 2017 #
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सोरठा वन्दऊँ पूज्य गणेश, एकदंत हे गजबदन  |जय-जय जय विघ्नेश, पूर्ण कथा कर पावनी ||1||वन्दौं गुरुवर श्रेष्ठ, कृपा पाय के मूढ़-मति,गुन-गँवार ठठ-ठेठ, काव्य-साधना में रमा ||2||गोधन-गोठ प्रणाम, कल्प-वृक्ष गौ-नंदिनी |गोकुल चारो धाम, गोवर्धन-गिरि पूजता ||3||वेद-काल का साथ, गंगा सिन्धु सरस्... Read more
clicks 148 View   Vote 0 Like   12:16pm 2 Oct 2016 #
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दिनेश चन्द्र गुप्ता ,रविकर वरिष्ठ तकनीकी सहायक इंडियन स्कूल ऑफ़ माइंस धनबाद झारखण्डपिता:  स्व. सेठ लल्लूराम जी गुप्ता माता : स्व. मुन्नी देवी धर्म-पत्नी : श्रीमती सीमा गुप्ता सुपुत्र : कुमार शिवा ( सहायक प्रबंधक , TCIL,  नई  दिल्ली  )सुपुत्री : 1. मनु गुप्ता (ASE, TCS लखनऊ )2. स्वस्ति-मे... Read more
clicks 336 View   Vote 0 Like   10:34am 12 Feb 2013 #
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उन्नीस दग्धाक्षर हैं — ट, ठ, ढ, ण, प, फ़, ब, भ, म, ङ्, ञ,  त, थ, झ, र, ल, व, ष,  ह।  — इन उन्नीस वर्णों का पद्य के आरम्भ में प्रयोग वर्जित है. इनमें से भी झ, ह, र, भ, ष त्याज्य हैं-श्री राम की सहोदरी : भगवती शांता  भाग-1 सोरठा     वन्दऊँ श्री गणेश, एकदंत हे गजबदन  |जय-जय जय विघ्नेश, पूर्ण ... Read more
clicks 253 View   Vote 0 Like   11:14am 2 Nov 2012 #भगवती शांता
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श्री राम की सहोदरी : भगवती शांता पुन: प्रकाशित    भाग-1 कौशिकी-कोसी  सृन्गेश्वर महादेव भगिनी विश्वामित्र की, सत्यवती था नाम |षोडश सुन्दर रूपसी, हुई रिचिक की बाम ||  मत्तगयन्द सवैया नारि सँवार रही घर बार, विभिन्न प्रकार धरा अजमाई ।कन्यक रूप बुआ भगिनी घरनी ममता बधु सास कहाई ... Read more
clicks 308 View   Vote 0 Like   5:41am 13 Oct 2012 #खंड-काव्य
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Shanta (Ramayana)Shanta is a character in the Ramayana. She was the daughter of Dasharatha and Kausalya, adopted by the couple Rompad and Vershini.[1] Shanta was a wife of Rishyasringa.[1] The descendants of Shanta and Rishyasringa are Sengar Rajputs who are called the only Rishivanshi rajputs.LifeShanta was a daughter of Maharajah Dasharatha and Kausalya, but was adopted by the king (rajah) of Angadesh, Raja Rompad, and her aunt Vershini, an elder sister of Kausalya. Vershini had no children, and, when at Ayodhya, Vershini jokingly asked for offspring. Dasharatha agreed to allow the adoption of his daughter. However, the word of Raghukul was binding, and Shanta became the princess of Ang... Read more
clicks 431 View   Vote 0 Like   12:14pm 28 Sep 2012 #खंड-काव्य
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 सर्ग-3  भाग-1 भगिनी शांताशान्ता के चरणचले घुटुरवन शान्ता, सारा महल उजेर |दास-दासियों ने रखा, राज कुमारी घेर ||सबसे प्रिय उसको लगे, अपनी माँ की गोद |माँ बोले जब  तोतली, होवे महा विनोद ||कौला दालिम जोहते, बैठे अपनी बाट |कौला पैरों को मले, हलके-फुल्के डांट ||दालिम टहलाता रहे, करवाए... Read more
clicks 266 View   Vote 0 Like   8:20am 19 Sep 2012 #भगवती शांता
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भगवती शांता परम सर्ग-5 : इतिभगवती शांता परम सर्ग-4 : भार्या शांताभगवती शांता परम सर्ग-3 : भगिनी शांताभाग-1जन्म-कथा  कौशल्या भयभीत हो, ताके संबल एक |पावे रक्षक भ्रूण का,  दीखे शत्रु अनेक ||चारों  दिशा  उदास  हैं,  फैला  है आतंक |जिम्मेदारी कौन ले,   मारे  दुश्मन  डंक || सारे देवी-दे... Read more
clicks 340 View   Vote 0 Like   8:11am 19 Sep 2012 #खंड-काव्य
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 सोरठा    वन्दऊँ श्री गणेश, गणनायक हे एकदंत |जय-जय जय विघ्नेश, पूर्ण कथा कर पावनी ||वन्दऊँ गुरुवर श्रेष्ठ, कृपा पाय के मूढ़ मति,गुन-गँवार ठठ-ठेठ, काव्य-साधना में रमा ||गोधन-गोठ प्रणाम, कल्प-वृक्ष गौ-नंदिनी |गोकुल चारो धाम, गोवर्धन गिरि पूजता ||वेद-काल का साथ, गंगा सिन्धु सरस्वती... Read more
clicks 424 View   Vote 0 Like   10:25am 29 Jun 2012 #खंड-काव्य
Blogger: dinesh chandra gupta ravikar
भगवती शांता परम सर्ग-5 : इतिभगवती शांता परम सर्ग-4 : भार्या शांताभगवती शांता परम सर्ग-3 : भगिनी शांताभगवती शांता परम सर्ग-2 : शिशु - शांता... Read more
clicks 293 View   Vote 0 Like   10:05am 29 Jun 2012 #
Blogger: dinesh chandra gupta ravikar
भगवती शांता परम सर्ग-5 : इतिभगवती शांता परम सर्ग-4 : भार्या शांताभगवती शांता परम सर्ग-3 : भगिनी शांताभगवती शांता परम सर्ग-2 : शिशु - शांता... Read more
clicks 284 View   Vote 0 Like   10:04am 29 Jun 2012 #
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चंपा-सोम कई दिनों का सफ़र था, आये चंपा द्वार |नाविक के विश्राम का, बटुक उठाये भार ||राज महल शांता गई, माता ली लिपटाय |मस्तक चूमी प्यार से, लेती रही बलाय ||गई पिता के पास फिर, पिता रहे हरसाय |स्वस्थ पिता को देखकर,फूली नहीं समाय ||क्षण भर फिर विश्राम कर, गई सोम के कक्ष |रूपा पर मिलती... Read more
clicks 330 View   Vote 0 Like   5:55am 11 Dec 2011 #खंड-काव्य
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कौशिकी-कोसी  सृन्गेश्वर महादेव भगिनी विश्वामित्र की, सत्यवती था नाम |षोडश सुन्दर रूपसी, हुई रिचिक की बाम ||दुनिया का पहला हुआ, यह बेमेल विवाह |बुड्ढा खूसट ना करे, पत्नी की परवाह || वाणी अति वाचाल थी, हुआ शीघ्र बेकाम |दो वर्षों में चल बसा, बची अकेली बाम ||सत्यवती पीछे गई, स्वर्... Read more
clicks 249 View   Vote 0 Like   10:30am 5 Dec 2011 #खंड-काव्य
Blogger: dinesh chandra gupta ravikar
शान्ता के चरणचले घुटुरवन शान्ता, सारा महल उजेर |दास-दासियों ने रखा, राज कुमारी घेर ||सबसे प्रिय उसको लगे, अपनी माँ की गोद |माँ बोले जब  तोतली, होवे महा विनोद ||कौला दालिम जोहते, बैठे अपनी बाट |कौला पैरों को मले, हलके-फुल्के डांट ||दालिम टहलाता रहे, करवाए अभ्यास |बारह महिने  में ... Read more
clicks 284 View   Vote 0 Like   10:30am 5 Dec 2011 #खंड-काव्य
Blogger: dinesh chandra gupta ravikar
जन्म-कथा  कौशल्या भयभीत हो, ताके संबल एक |रक्षा होवे भ्रूण की,  दीखे शत्रु  अनेक ||चारों  दिशा  उदास  हैं,  फैला  है आतंक |जिम्मेदारी कौन ले,   मारे  दुश्मन  डंक || सारे देवी-देवता, चिंतित रही मनाय |चार दिनों से अनमयस्क, बैठे मन्दिर जाय  ||जीवमातृका  वन्दना, माता  के  सम पाल |जीवम... Read more
clicks 283 View   Vote 0 Like   7:42pm 4 Dec 2011 #खंड-काव्य
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सर्ग-1अथ - शांता  सोरठा     वन्दऊँ श्री गणेश, गणनायक हे एकदंत |जय-जय जय विघ्नेश, पूर्ण कथा कर पावनी ||1||वन्दऊँ गुरुवर श्रेष्ठ, जिनकी किरपा से बदल,यह गँवार ठठ-ठेठ, काव्य-साधना में रमा ||2||गोधन को परनाम , परम पावनी नंदिनी |गोकुल मथुरा धाम, गोवर्धन को पूजता ||3||वेद-काल का साथ, गंगा सिन्... Read more
clicks 340 View   Vote 0 Like   4:32pm 3 Dec 2011 #खंड-काव्य
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 मैं....तन्मय तन्मात्रा हो हे सखी, शब्द, रूप, रस, गन्ध |सस्पर्श पञ्च-भूतियाँ, सांख्य-मत से बन्ध ||कार्य में अपने हे सखी, रहो सदा लवलीन |तन्नी नित खुरचा करे, मन-पट हुई मलीन || हरिगीतिका छंद भारतीय नारी   बड़े-बुजुर्गों से मिले, व्यवहारिक सन्देश |पालन मन से जो करे, पावे मान विशेष ||... Read more
clicks 289 View   Vote 0 Like   10:38am 25 Oct 2011 #मेरी टिप्पणियां
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पत्नी और पतिदेवेन्द्र पाण्डेय बेचैन आत्मा  (1) करे आत्मा फिर हमें, अन्दर से बेचैन |ढूंढ़ दूसरी लाइए, निकसे अटपट बैन |निकसे अटपट बैन, कुकर की सीटी बाजी |समझे झटपट सैन, वहीँ से बकता हाँजी |गर रबिकर इक बार, कुकर का होय खात्मा |परमात्मा - विलीन, करे - बेचैन - आत्मा ||(2)  पैसे  पर  बिकत... Read more
clicks 280 View   Vote 0 Like   11:04am 18 Oct 2011 #मेरी टिप्पणियां
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चला बिहारी ब्लॉगर बननेबाद मरने के मेरे मर-मर के जी रहे हैं सालों से मित्र हम तो-वो मौत क्या अलहदा कुछ और कष्ट देगी ||जब आग में जलेगा, नब्बे किलो का लोथा- पानी-पवन गगन यह धरती भी अंश लेगी || मोबाइल हुआ जो स्थिर, तेरह दिनों तक देखा --तो फोन का वो गाना फिर ना सुनाई देंगा |जो काल ना ... Read more
clicks 278 View   Vote 0 Like   10:35am 3 Oct 2011 #मेरी टिप्पणियां
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आज अपने गिरेबान में झांक कर देखें- अज़ीज़ बर्नीखरी-खरी बातें कहीं, जज्बे को आदाब |स्वार्थी तत्वों को सदा, देते रहो जवाब ||बड़ी कठिन यह राह है,  संभल के चलिए राह |अपने  ही  दुश्मन  बने,  पचती  नहीं  सलाह ||भले नागरिक वतन को, करते हैं खुशहाल |बुरे   हमेशा   चाहते,  दंगे   क़त्ल    बवाल |... Read more
clicks 289 View   Vote 0 Like   4:40am 2 Oct 2011 #मेरी टिप्पणियां
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चर्चा -मंच  श्रम - सीकर अनमोल है,  चुका सकें न मोल |नत - मस्तक गुरुदेव है,  सारा यह भू-गोल ||मन और झील कभी नहीं भरतीमन-का  मनमथ-मनचला, मनका पावै ढेर |मनसायन वो झील ही,  करती रती  कुबेर |करती रती  कुबेर,  झील  लब-लबा  उठी  है |हुई  नहीं  अंधेर,  नायिका  सुगढ़  सुठी  है |दीपक  की बकवाद, सु... Read more
clicks 301 View   Vote 0 Like   1:54pm 25 Sep 2011 #मेरी टिप्पणियां
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