| मैं अकेलेछत पर तन्हाई के साथ खड़ा हूँ ।बारिश की बूंदेंधीरे धीरे धरती के आगोश में समा रही हैं ।बादलों की गडगडाहटबिजली की चमकमनो ख़ुशी से नाच रहे हैं ।तालाबों, पोखरों मेंमेंडक उछल कूद करतेप्रेम गीत गा रहे है ।बच्चे माँ की डांट कोअनसुना कर बारिश मेंअटखेलियाँ कर रहे ... |
| दिल की आहट ब्लॉग पर ........ आप का हार्दिक स्वागत है !!!!!!!!!!!!!! ... |
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