पगडण्डी के रास्ते.......आसमाँ तक

जब आज है सुंदर सृजन,  मन घूमता है क्यों विकल?तम को ह्रदय में बांध जड़, लखता नहीं क्यों ज्योति पल?पलकों तले संसार रचढल गए दो-चार पल, आँखें ठगी-सी रह गयींदेख विधि का कलित छल।एक मीठी रागिनी मेंसुर उठे जब दूर से, बंध गए विश्वास  सारेसरगमों में गूंज के।गुनगुनी सी धूप सिमटीसांझ ...
पगडण्डी के रास्ते.......आसमाँ तक...
Tag :
  July 29, 2012, 5:48 pm
लौट आ, ओ प्रात!बुझ रही है लौ दिये की ताक पर।कृष्ण-पक्ष की रात दोहरी हो रही,चाँदनी किस ओर  जाने छिप गयी!क्षीण होती लौ दिये  की कांपती,सज रही अर्थी मधुरमय साध की।झर रहा है फूल हरसिंगार का,कर रहा है मन तनिक श्रृंगार-सा!राह से गुजरा पथिक यह सोचता-"आह! यह सुरभित कहाँ डोला चला?"लौट ...
पगडण्डी के रास्ते.......आसमाँ तक...
Tag :
  June 23, 2012, 8:16 pm
[ Prev Page ] [ Next Page ]

Share:
Hot List (1 Like = 2 Views)
  • ताज़ा
  • 7 दिन
  • 30 दिन
  • अब तक
  हमारीवाणी पर ब्लॉग-पोस्ट के प्रकाशन के लिए 'क्लिक कोड' ब्लॉग पर लगाना आवश्यक है। इसके लिए पहले लोगिन करें, लोगिन के उपरांत खुलने वाले प...
  हमारीवाणी.कॉम पर ब्लॉग पंजीकृत करने की विधि बहुत सरल हैं। इसके लिए सबसे पहले प्रष्ट के सबसे ऊपर दाईं ओर लिखे ...
और सन्देश...
कुल ब्लॉग्स (2757) कुल पोस्ट (71549)