| धन हो तब मनुष्य धनवान कहलाता है, कुछ लोग दिवाली इसी विचार से मनाते हैं। यह संसार की साधारण परिभाषा है, लेकिन अध्यात्म बताता है बिना धन के धनवान कैसे बनें? दौलत को ही धन न समझा जाए। लक्ष्मी के अनेक स्वरूप हैं। लोग लक्ष्मी के संदर्भ में केवल संपत्ति पर टिक गए। स्वस्थ शर... |
Anoop Mandloi (Paliwal) Sendhwa...
| कुछ पाकर खो देने का डर,कुछ न पा सकने का भय,ज़िन्दगी के पटरी से उतर जाने की चिंता..इन्हीं छोटे-छोटे डरों से घिरी रहती है ज़िन्दगी, लेकिन जिस वक्त हम ठान लेते हैं.. कुछ नया करना है, तभी जन्म लेता है साहस! और फिर कदम कभी नहीं रुकते। मंजिलों तक ले जाता हैसिर्फ साहस। कोई भी संकल्... |
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| 1. अपनी अंतरात्मा की सुनें दुनिया के कुछ बहुत साहसी लोग इस श्रेणी में इसलिए शामिल हो पाए, क्योंकि उन्होंने अपनी अंतरात्मा की आवाजसुनी और आसपास घटित बातों को अनदेखा नहीं किया। महात्मा गांधी से बड़ा उदाहरण इस मामले में और क्या हो सकता है। उन्होंने जब दक्षिण अफ्रीका में... |
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| कोई भी मूल्य एवं संस्कृति तब तक जीवित नहीं रह सकती जब तक वह आचरण में नहीं है.-कौटिल्यजिनमें स्थितिओंको बदलने का साहस नहीं होता उन्हें स्थितिओंको सहना पड़ता है. .-कौटिल्य... |
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| !!!! भारत का स्वर्णिम अतीत !!!!!एक फ्रांस के इतिहासकार फ्रंस्वापिराध (1711) में भारत आकर अपनी किताब में लिखा की भारत में 36 तरह के उद्योग चल रहे थे और भारत पिछले 3000 वर्सो से एक्सपोर्टिंग कण्ट्री रहा है। इसी तरह कुछ और दुनिया के इतिहासकार भारत को एक अदभुत व सोने -चांदी का महासागर ... |
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| तुम जब मुड़े थे,मुड़ गया था समय...अपनी धुरी से...मेरे इंद्रधनुष छूट गए तुम्हारे पास...और एक चमकीली हंसी भी...मेरे चेहरे पर सूरज ने मल दी उदासी,जो धूप के हर टुकड़े में पूरी नज़र आती है...तुम ये कभी देख नहीं पाए शायद...कि जो छूट गया वो तुम थे,जो मेरे पास रहा, वो भी तुम ही थे...पत्थर समय ... |
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| पत्थर बिन दीवार बनाना, इन्सानों ने सीख लियापत्थर दिल इन्सान बनाना, भगवानों ने सीख लिया.दूर हुए सब रिश्ते-नाते,दूर हुआ मिलना-जुलनाअपनों का किरदार निभाना बेगानों ने सीख लियाप्रेम के इजहारों के दिन भी, त्यौहारों में बदले हैंइनसे भी अब लाभ कमाना, बाज़ारों ने सीख लियाकौन है... |
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| कहते है कि मानव जीवन अमूल्य है, इसे प्राप्त करना सहज नहीं है लेकिन क्या हमने सोचा कि आज की इस आपाधापी में हमने इंसान बन कर क्या पाया है. आइये जरा इसका हिसाब करके देखते है :आज हमारे पास बड़ी बड़ी इमारते तो है लेकिन सहनशक्ति थोड़ी सी है.चौड़े रास्ते तो है लेकिन मानसिकता संकीर्ण... |
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| तब दोस्तों से घंटो बाते होती थी,अब मोबाइल SMS से हाय हैलो होती है तब क्रिकेट का बैट हाथ में होता था और सड़क पर क्रिकेट खेलने लग जाया करते थे,अब लेपटोप और मोबाइल साथ में होता है और सड़क पर ही टिपियाने लग जाते हैतब शांत खड़े होकर चिड़िया और कोयल की आवाज़ सुना करते थे, अब कंप्यूटर पर m... |
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| जिस दिन दुनिया सी चालाकी सीख जाएँगेउस दिन हम अपना वजूद खो देंगे... ... |
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| मेरे वजूद का रिश्ता ही आसमान से हैन जाने क्यूँ उन्हें शिकवा मेरी उड़ान से हैमुझे ये ग़म नहीं शीशा हूँ हश्र क्या होगामेरी तो जंग ही किसी चट्टान से है... |
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| - चित्तवृतियों का निरोध करना यानी चित्त की चंचलता को रोके रखना ही योग है।- योग के आठ अंग हैं -यम, नियम, आसन, प्राणायाम, प्रत्याहार, धारणा, ध्यान और समाधि।- अगर किसी शख्स को ज्ञान मिल जाए तो वह अपना मन नियंत्रित कर सकता है।- शोक, मोह, ईर्ष्या, द्वेष से परे रहने वाला शख्स ही असल... |
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| कुछ लोग चांदी के चम्मच में किस्मत की चड्डी पहन कर पैदा होते है .....जो काबिलियत की नाड़ी से बंधी रहती है... |
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| पर नारी पेनी छुरी, तीन ठोर से खायधन हरे, योवन हरे और नरक ले जाये ... |
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| काबिलियत वो दुकान है जंहा आप के गुण और हुनर के साथ किस्मत मुफ्त मिलती है ... |
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| अगर आप आशीर्वाद को मानते होतो आप को श्राप, हालाकला को भी मनना होगा .... इस लिए अपने कर्म को सोच समझ कर ही करे ... |
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| पतन नहीं उत्थान करो रण का तुम आह्वान करो लक्ष्य भले ही दुष्कर हो अर्जुन सा शर-संधान करो भय का जो अंधियारा हो विफल प्रयास जो सारा हो एक ध्येय पर अड़ जाओ देह की मानासीमा है अन्तर की सीमा मत बांधो श्राप को भी वरदान करो - Sonal Rastogi....... |
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| अक्सर हम दुनिया जीतने निकल पड़ते हैं लेकिन खुद पर ही भरोसा नहीं होता। खुद पर भरोसे का मतलब है आत्म विश्वास से। जब भी कोई मुश्किल काम करने जाते हैं तो एक बार सभी के हाथ कांप ही जाते है। सफलता का पहला सूत्र आत्म विश्वास ही है। अगर हम खुद पर ही भरोसा नहीं कर सकते, खुद की योग... |
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| हर पद अपने साथ नई जिम्मेदारियां लेकर आता है। जैसे-जैसे आप आगे बढ़ते हैं, आपको रुटीन कामों के अलावा कंपनी की नीति से तालमेल बिठाते हुए कई प्रबंधकीय कार्य भी करने पड़ते हैं। कई महत्वपूर्ण फैसले लेने होते हैं। आज आप भले ही अपनी पहली या दूसरी नौकरी कर रहे हैं, पर भविष्य मे... |
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February 21, 2012, 6:48 pm |
| संतोष अर्थात सभी सुखों का दाता। संतोष का गुण ही जीवन में सुख-शांति लाने की उत्तम औषधि है. कहा भी गया है कि जिस मनुष्य के पास संतोषरूपी गुण है, उसे पानी की बूँद भी समुद्र के समान प्रतीत होती है और जिसके पास यह गुण नहीं उसे समुद्र भी बूँद के समान प्रतीत होता है।चींटी चावल ल... |
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February 21, 2012, 5:06 pm |
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