| लोग कहते हैं बदनसीब हूँ मैं ,कोई भी साथ तक नहीं चलता ,जो भी आता है वो एहसान सा कर जाता है राह में दीप तक नहीं जलता,और तो और तू भी मेरा नहीं ,जिसके एहसास से मैं जिंदा हूँ ,पंख जिसके क़तर दिए हैं गए ,मैं वो टूटा हुआ परिंदा हूँ ,तुझको मालूम नहीं है शायद एक तू ही है मुझे छोड़ जो नहीं स... |
| मेरा आइना है तू ,तुझमे मैं खुद को ढूंढ लेती हूँ ,अपनी परछाईं भी पहचान नहीं पाती हूँ ,जब कभी सांस तेरी सांस के संग लेती हूँ |क्या बता पायेगा तू मुझको ,मुझको हर शय में नज़र किसलिए तू आता है ,तू मुझे दर्द भी देता है अगर जान मेरी ,तो भी तू जान से प्यारा क्यूँ हुआ जाता है ,तुझको न देखू... |
| ह्रदय में प्यार सच्चा हो तो ईश्वर जान लेता है,बुरे बन्दों की बदनीयती खुदा पहचान लेता है ,इरादे नेक हों तो राह हर आसान होती है,नहीं तो खुद खुदा राहों में पत्थर दल देता है.................. |
| मेरे दिल में इरादे हैं कि कुछ कर के दिखाऊँ मैं ,जो मुझको भूल बैठे हैं उन्हें फिर याद आऊँ मैं ,ये दुनिया आज जो पैसों पकी खातिर जी रही है बस,उसे फिर प्यार का मकसद समझा भी पाऊँ मैं.... |
| कहाँ तक साथ चलना है हमें बतला न पाया वो ,नहीं था प्यार हमसे ये कभी जतला न पाया वो ,हमारे प्यार में ताकत थी इतनी ऐ- जहाँ वालों ,कि हो कर गैर का भी हमको फिर ठुकरा न पाया वो |... |
| हमारी याद जब आये हमें आवाज़ दे देना ,हमारी ज़िंदगी को फिर नयी परवाज़ दे देना ,नफा नुक्सान से अब फर्क कोई भी नहीं हमको ,तू गर कुछ कर सके तो बस ज़रा सा मान दे देना |... |
| जो कहता था हमें अपना वही समझा नहीं हमको गया फिर छोड़ कर ऐसे कि तनहा कर गया हमको बहुत ही तेज कर आवाज़ को वो बोलता है ये कि दुनिया का हर एक ठग , झूठ कह कर ठग गया हमको |करी उम्मीद हमने जब कभी उससे कि वो थामे तुम्हारा कुछ नहीं हूँ मैं ये कह कर तज गया हमको |... |
| कब समझोगे तुम हमारे आने का मकसदअब तो किताब बंद करके जा रहे हैं हम |... |
| कुछ शाख से टूटे हुए पत्तों कि याद में इस बार दरख्तों ने नए फल नहीं दिए|... |
| मेरे नसीब में बस चंद अश्क लिखे हैं ,मुझे गिला है खुदा से कि क्यूँ कम लिखे हैं|... |
| कोई भी दूर तक साथ में नहीं चलता , करवों में अक्सर लोग बदल जाते हैं |मायने ज़िंदगी के होते हैं आसान बहुत ,इश्क हों जाये तो मुश्किल से नज़र आते हैं |... |
| किसी कि ज़िंदगी बन कर चले थे राह हम जिनकी , बदल कर राह उल्फत की वो काफ़िर हो गए हैं अब |... |
| आदतन मजबूर हैं हम साथ चलने के लिए ,और फिर खा करके धोखा हाथ मलने के लिए |हम गुनाहों से बहुत हैं दूर लेकिन क्या करें , हो गए मजबूर तुमको प्यार करने के लिए |वो हमारा हो न पाया हमने सब कुछ दे दिया,और वो जिंदा है हमको दर्द देने के लिए |तुम जो आये ज़िन्दगी मेरी मुकम्मल हो गयी,लोग क्य... |
| लुट गयी रात किसी कमसिन सी ,आसमां पर कोई भी चाँद न था ,फिर सितारों को आ गया रोना ,रुंध गयी वो गले की आवाजें ,देखा जब चाँद को धरती के साइंस दानों ने ,गुम हुआ अपने घर की नीली अंगनाई से ,तब हुआ दर्द जगी प्यास उससे मिलने की ,याद आया कोई था पास मेरे ,जिसको मई रोज़ ही ठुकराता था,आज जब रत ... |
| क्या तुम्हे एहसास है ये कोई रोता है कहीं जिस्म कि ख्वाहिश तुम्हे थी वो तुम्हे दिल दे गया |तुमने गलती कह दिया जिस पल को मेरे दोस्त सुन वो उसी पल से तुम्हारा बस तुम्हारा हो गया |... |
| बहुत अच्छा लगा है आज उसने हक जताया जब उसे अच्छा नहीं लगता हमारा गैर से मिलना |... |
| हमें तो दर्द का एहसास भी अब हो नहीं पाताहुआ है सुन्न सा ये मन कोई मन छू नहीं पाताजो तू छू ले तो संदल के सरीखा तन महक जाये नहीं तो हाले दिल ऐसा है कि मैं रो नहीं पाता |... |
| अगर तू साथ देदे तो मुकम्मल ये जहाँ होगा लबों पर मुस्कराहट और सपनों का शहर होगा मैं तेरी शहजादी और तू मेरा कुंवर बनकर रहेंगे साथ जब धरती पे जन्नत सा असर होगा |... |
| मैं धरती तू आकाश प्रिये ,जाने किस छोर मिलेंगे हम ,पर इतना है विश्वास हमें ,हर लम्हा साथ चलेंगे हम |... |
| बहुत से दोस्त होंगे आपके पर हम अकेले हैं किसी से आपका जुडना हमें अच्छा नहीं लगता |... |
| हंसी आती नहीं हमको कि अब तो हाल ऐसा है किसी अपने को खंजर मारते हमने भी देखा है |वो जो बैठे हैं संसद में है रखवाले सियासत के ,उन्ही को देश का परचम गिराते हमने देखा है |सुना था हमने दादी से कि सोने की था ये चिड़िया ,वतन जिस पर कि कर्जों का लगा अम्बार देखा है |जिसे हमने मसीहा मान क... |
| मेरी ही गलती है सारी तेरा कोई कसूर नहीं मरने का दस्तूर न आया जीने का भी शऊर नहीं |दिल के दरवाज़े पर सांकल न होती तो अच्छा था ,हर पल ये एहसास तो रहता तू थोड़ा मजबूर सही |दीवारों के कान नहीं थे इसका है अफ़सोस हमें ,वरना कोई ये तो बताता उसको हम मंज़ूर नहीं |पहली बार ये बारिश हमको अप... |
| ज़िंदगी का अंत हो जब साथ होना चाहती हूँ ,मैं तुम्हारी गोद में सर रख के सोना चाहती हूँ |तेरी बाँहों में सिमट कर ज़िंदगी मैंने है पाई ,तेरी बाँहों में ही छिप कर मौन होना चाहती हूँ |मैं तुम्हारी गोद में सर रख के सोना चाहती हूँ |मेरी आँखें तुझको देखे बिनना होने बंद पाएं ,मैं खुदा ... |
| एक लड़की जगती रहती है ,जब भी तू सोया रहता है वो तुझको तकती रहती है ,एक लड़की जगती रहती है |तू लड़ता और झगड़ता है ,उल्टा सीधा भी कहता है ,पर वो तेरी कडवी बातों को ,मधु सा चखती रहती है ,एक लड़की जगती रहती है |कितनी कोशिश भी कर ले तू ,वो तुझे छोड़ न जायेगी ,तू जितना उसे भगायेगा ,वो पास दौड क... |
| अभी
याद आते हैं वो दिन जब खाना खाने की तहज़ीब भी नहीं थी और
स्कूल पहुँच कर प्रिंसिपल सर की डांट से बचने के लिए अपने ही
रुमाल से अपने जूते साफ़ किया करते थे .और उनके जाते ही उनके पीछे उन्हें मुह चिढाया करते थे .सभी के जीवन की कुछ यादें ... |
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