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Blog: बूंद-बूंद इतिहास

Blogger: मनोज भारती
प्रयोगवाद और नई कविता की प्रवृत्तियों में कोई विशेष अंतर नहीं दिखाई देता। फिर भी कथ्य की व्यापकता और दृष्टि की उन्मुक्तता,ईमानदार अनुभूति का आग्रह,सामाजिक एवं व्यक्ति पक्ष का संश्लेष,रोमांटिक भावबोध से हटकर नवीन आधुनिकता से संपन्न भाव-बोध एक नए शिल्प को गढ़ता है। व... Read more
Blogger: मनोज भारती
प्रयोगवाद व नई कविता में भेद रेखा स्पष्ट नहीं है। एक प्रकार से प्रयोगवाद का विकसित रूप ही नई कविता है। प्रयोगवाद को इसके प्रणेता अज्ञेय कोई वाद नहीं मानते। वे तार-सप्तक(1943) की भूमिका में केवल इतना ही लिखते हैं कि संगृहीत सभी कवि ऐसे होंगे जो कविता को प्रयोग का विषय मानत... Read more
Blogger: मनोज भारती
प्रयोगवाद के कवियों में हम सर्वप्रथम तारसप्तक के कवियों को गिनते हैं और इसके प्रवर्तक कवि सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन अज्ञेय ठहरते हैं। जैसा कि हम पहले कह आए हैं कि तारसप्तक 1943 ई. में प्रकाशित हुआ। इसमें सातकवियों को शामिल किए जाने के कारण इसका नाम तारसप्तक रखा गय... Read more
Blogger: मनोज भारती
प्रयोगवादी कविता में मुख्य रूप से निम्नलिखित प्रवृत्तियां देखी गई हैं:-1. समसामयिक जीवन का यथार्थ चित्रण:प्रयोगवादी कविता की भाव-वस्तु समसामयिक वस्तुओं और व्यापारों से उपजी है। रिक्शों के भोंपू की आवाज,लाउड स्पीकर का चीत्कार,मशीन के अलार्म की चीख,रेल के इंजन की सीटी ... Read more
Blogger: मनोज भारती
प्रयोग शब्द का सामान्य अर्थ है, 'नई दिशा में अन्वेषण का प्रयास'। जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में प्रयोग निरंतर चलते रहते हैं। काव्य के क्षेत्र में भी पूर्ववर्ती युग की प्रतिक्रिया स्वरूप या नवीन युग-सापेक्ष चेतना की अभिव्यक्ति हेतु प्रयोग होते रहे हैं। सभी जागरूक कवियो... Read more
clicks 283 View   Vote 0 Like   1:37pm 22 Jan 2012 #
Blogger: मनोज भारती
प्रगतिवादी कवियों को हम तीन श्रेणियों में रख सकते हैं: एक,वे कवि जो मूल रूप से पूर्ववर्ती काव्यधारा छायावाद से संबद्ध हैं, दूसरे वे जो मूल रूप से प्रगतिवादी कवि हैं और तीसरे वे जिन्होंने प्रगतिवादी कविता से अपनी काव्य-यात्रा शुरु की लेकिन बाद में प्रयोगवादी या नई कवित... Read more
clicks 366 View   Vote 0 Like   4:32pm 15 Jan 2012 #
Blogger: मनोज भारती
समाज और समाज से जुड़ी समस्याओं यथा गरीबी,अकाल,स्वाधीनता,किसान-मजदूर,शोषक-शोषित संबंध और इनसे उत्पन्न विसंगतियों पर जितनी व्यापक संवेदनशीलता इस धारा की कविता में है,वह अन्यत्र नहीं मिलती। यह काव्यधारा अपना संबंध एक ओर जहां भारतीय परंपरा से जोड़ती है वहीं दूसरी ओर भा... Read more
clicks 299 View   Vote 0 Like   8:29pm 12 Jan 2012 #
Blogger: मनोज भारती
जिस प्रकार द्विवेदी युग की इतिवृत्तात्मकता,उपदेशात्मकता और स्थूलता के प्रति विद्रोह में छायावाद का जन्म हुआ,उसी प्रकार छायावाद की सूक्ष्मता,कल्पनात्मकता, व्यक्तिवादिता और समाज-विमुखता की प्रतिक्रिया में एक नई साहित्यिक काव्य धारा का जन्म हुआ। इस धारा ने कविता को... Read more
clicks 307 View   Vote 0 Like   9:50am 6 Jan 2012 #साहित्य में प्रगतिवाद
Blogger: मनोज भारती
छायावादी युग में कवियों का एक वर्ग ऐसा भी था जो सूर,तुलसी,सेनापति,बिहारी और घनानंद जैसी समर्थ प्रतिभा संपन्न काव्य-धारा को जीवित रखने के लिए ब्रज-भाषा में काव्य रचना कर रहे थे। भारतेंदु युग में जहां ब्रज भाषा का काव्य प्रचुर-मात्रा में लिखा गया वहीं छायावाद आते-आते ब्... Read more
clicks 180 View   Vote 0 Like   6:45pm 1 Jan 2012 #
Blogger: मनोज भारती
छायावादी युग में हास्य व व्यंग्यात्मक काव्य रचनाओं का सृजन भी हुआ और इस विधा ने एक विशिष्ट रूप धारण किया। कुछ कवियों ने तो केवल हास्य-व्यंग्य की ही काव्य रचनाएं की जबकि अन्य कवियों ने प्रसंगवश या गद्य रचनाओं में इस प्रकार की व्यंग्यात्मक कविताएं रची।'मनोरंजन' पत्रिक... Read more
clicks 205 View   Vote 0 Like   6:29pm 27 Dec 2011 #
Blogger: मनोज भारती
छायावादी युग में राष्ट्रीय-सांस्कृतिक कविता प्रमुख रूप से लिखी गई।इन कवियों के बारे में हम पिछली पोस्ट में चर्चा कर चुके हैं। आज इस पोस्ट में हम इन कवियों की काव्य कृतियों के संबंध में जानकारी दे रहे हैं:-माखन लाल चतुर्वेदी (1888-1970): काव्य रचनाएं: 1.हिमकिरीटिनी 2. हिमतरंगिण... Read more
clicks 197 View   Vote 0 Like   3:51pm 16 Dec 2011 #
Blogger: मनोज भारती
छायावादी युग(सन्1917 से 1936)एक ऐसा कालखंड है जिसमें कविता विविध विषयों के साथ अवतरित हुई।जिस प्रकार रीतिकाल में रीतिबद्ध शृंगार कविता के साथ-साथ वीर रस प्रधान काव्य-धारा का प्रवाह होता रहा,उसी प्रकार आधुनिक काल के इस चरण में राष्ट्रीय काव्यधारा छायावादी और वैयक्तिक कवि... Read more
clicks 248 View   Vote 0 Like   4:48pm 8 Dec 2011 #
Blogger: मनोज भारती
आज की पोस्ट में हम हालावादी कवियों की रचनाओं का परिचय दे रहे हैं। पिछली पोस्ट में हमने जाना कि हालावाद के प्रवर्तक कवि हरिवंश राय बच्चन जी है। अन्य हालावादी कवियों में भगवती चरण वर्मा,रामेश्वर शुक्ल अंचल और नरेंद्र शर्मा प्रभृति हैं।1.हरिवंश राय बच्चन(1907-2003): काव्य रचना... Read more
clicks 229 View   Vote 0 Like   9:54am 4 Dec 2011 #
Blogger: मनोज भारती
छायावादी काव्य का एक पक्ष स्वच्छंदतावाद प्रखर होकर व्यक्तिवादी-काव्य में विकसित हुआ। इस काव्य में समग्रत: एवं संपूर्णत: वैयक्तिक चेतनाओं को ही काव्यमय स्वरों और भाषा में संजोया-संवारा गया है।डॉ.नगेन्द्र ने छायावाद के बाद और प्रगतिवाद के पूर्व को 'वैयक्तिक कविता' कह... Read more
clicks 307 View   Vote 0 Like   11:11am 27 Nov 2011 #मांसलवाद
Blogger: मनोज भारती
रहस्य की खोज में साधक अनेक अवस्थाओं से गुजरता है।प्राचीन रहस्यवादियों की साधनागत विभिन्न स्थितियों और अवस्थाओं के समान आधुनिक रहस्यवाद में भी उन विभिन्न स्थितियों और अवस्थाओं के दर्शन होते हैं। अधिकांश विद्वद जनों ने रहस्यवाद की कम से कम तीन अवस्थाएं स्वीकार की ह... Read more
clicks 134 View   Vote 0 Like   7:10am 10 Nov 2011 #
Blogger: मनोज भारती
द्विवेदी युग के अनंतर हिंदी कविता में एक ओर छायावाद का विकास हुआ वहीं दूसरी ओर रहस्यवाद और हालावाद का प्रादुर्भाव हुआ। वस्तुत: रहस्यवाद, बल्कि कहना चाहिए आधुनिक रहस्यवाद छायावादी काव्य-चेतना का ही विकास है। प्रकृति के माध्यम से मात्र सौंदर्य-बोध तक सीमित रहने वाली औ... Read more
clicks 268 View   Vote 0 Like   2:33pm 5 Nov 2011 #रहस्यवाद
Blogger: मनोज भारती
छायावादी काव्य का विश्लेषण करने पर हम उसमें निम्नांकित प्रवृत्तियां पाते हैं :-1. वैयक्तिकता : छायावादी काव्य में वैयक्तिकता का प्राधान्य है। कविता वैयक्तिक चिंतन और अनुभूति की परिधि में सीमित होने के कारण अंतर्मुखी हो गई, कवि के अहम् भाव में निबद्ध हो गई। कवियों ने ... Read more
clicks 349 View   Vote 0 Like   7:04pm 27 Oct 2011 #
Blogger: मनोज भारती
छायावाद के प्रमुख कवि हैं- सर्वश्री जयशंकर प्रसाद,सुमित्रानंदन पंत,सूर्यकांत त्रिपाठी'निराला' तथा महादेवी वर्मा। अन्य कवियों में डॉ.रामकुमार वर्मा, हरिकृष्ण'प्रेमी',जानकी वल्लभ शास्त्री,भगवतीचरण वर्मा,     उदयशंकर भट्ट,नरेन्द्र शर्मा,रामेश्वर शुक्ल 'अंचल' के न... Read more
clicks 476 View   Vote 0 Like   5:35pm 21 Oct 2011 #
Blogger: मनोज भारती
द्विवेदी युग के पश्चात हिंदी साहित्य में जो कविता-धारा प्रवाहित हुई, वह छायावादी कविता के नाम से प्रसिद्ध हुई। छायावाद की कालावधि सन् 1917 से 1936 तक मानी गई है। वस्तुत: इस कालावधि में छायावाद इतनी प्रमुख प्रवृत्ति रही है कि सभी कवि इससे प्रभावित हुए और इसके नाम पर ही इस युग ... Read more
clicks 429 View   Vote 0 Like   7:54pm 18 Oct 2011 #छायावाद की परिभाषा
Blogger: मनोज भारती
पिछली पोस्ट में हमने द्विवेदी युग की प्रस्तावना को जाना। इस पोस्ट में हम द्विवेदी युग की प्रवृत्तियों पर चर्चा करेंगे:-1. राष्ट्रीय-भावना या राष्ट्र-प्रेम - इस समय भारत की राजनीति में एक महान परिवर्तन दृष्टिगोचर होता है। स्वतंत्रता प्राप्ति के प्रयत्न तेज और बलवान हो ... Read more
clicks 322 View   Vote 0 Like   2:28pm 15 Oct 2011 #
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