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ग़ज़ल गुलदस्ता

ग़ज़ल १७ सोना सच्चा न हुआ गल जायेगाआग में मत हाथ रख जल जायेगा अफवाहों का दौर आया है शहर में खोटा सिक्का भी यहाँ चल जायेगातेजी से गुजरने की बात मत करना वक्त न पकड़ा तो निकल जायेगा मोम का पुतला बना हर शख्स है धूप में मजबूत तन पिघल जायेगा इन्शानियाँ की लाश वो ढोते यहाँ कैसे स...
ग़ज़ल गुलदस्ता...
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  May 22, 2012, 3:22 pm
ग़ज़ल :१६ पीने का पानी जहाँ ठहरा हुआ है उतना ही कड़ा वहाँ पहरा हुआ है खुले आकाश को देखे सालों हो गए आज चारो तरफ ही कोहरा हुआ है चिरागों की चेतना ये समा पी गयी और अँधेरा आज फिर गहरा हुआ है अनजाने हम इस गुलामी में फस गए पर ये तिरंगा शान से फहरा हुआ हैये प्रजा अपनी शिकायतें करे ...
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  May 22, 2012, 3:08 pm
ग़ज़ल :१५ सालों से बंधी जख्म की पट्टी को खोलिएआपने देखा है जो सच उसको आज बोलिए सूर्य से चुराकर मै यहाँ लाया हूँ एक किरण इन नज़रो के पैमाने में उजालों को तौलिये खुद बखुद ये बिजलियाँ चमक कर गिरेंगी आप अपने विचारो को चेतना से घोलिये समुन्दर भी चला आएगा प्यासे लबों तकपहले क...
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  May 22, 2012, 2:58 pm
ग़ज़ल :१४ साहिल में सूना सा एक घर बना है.आकाश में फैला अँधेरा भी घना है दिन में इन आँखों को सुकून दे देना यहाँ पूरी रात ही तुमको जागना हैबस्तियों में नकाबपोश है आयेसेवा करके मांग लो जो माँगना है इस आँगन में तुम ना करो हलचलेयहाँ पे पुराना सा खोखला तना है मर्यादाओं की सीमा ...
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  May 22, 2012, 2:42 pm
 ग़ज़ल :१३प्यार करना और निभाना है बहुत कठिन यारोइस ज़िन्दगी में मुस्कुराना है बहुत कठिन यारोदिल के संग खिलवाड़ करना चलता है रात दिन इस रूठते दिल को मनाना है बहुत कठिन यारो वक्त के संग इसप्यार के मायने है बदलने लगेहर वक्त इसे समझ पाना है बहुत कठिन यारोऐतबार करना अब हमें ...
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  May 21, 2012, 9:24 am
ग़ज़ल :१२ कुछ राज छिपाए है सम्हलता हुआ चेहरा.अच्छा नहीं लगता है बदलता हुआ चेहरा,चेहरों में है नकाब यहाँ इस कदर लगे हुए तूफ़ान को समेटे है ये बहलता हुआ चेहरा,सच्चाई देखी हमने जब भी सूरमाओं की मोम सा  दिखता है पिघलता हुआ चेहरा मासूम निगाहें है और चुपचाप है ये लबहर रात में ज...
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  May 21, 2012, 9:10 am
ग़ज़ल :११ बहुत दूर था अपना एक सहारा मेरा .... क्या करता दरिया का किनारा मेरा . . फिर से था तूफ़ा का पैगाम यारो था . बेबस था किस्मत का सितारा मेरा लुटेरे मजे करते होगे अपने घर में जो लूट ले गए सामान सारा मेरा इसी तरह जी रहा हूँ हर पल यहाँ सातवें आसमाँ में है अब पारा मेरा चलो कही ...
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  May 19, 2012, 4:02 pm
ग़ज़ल :१० तमन्ना जब किसी की नाकाम हो जाती है .जिन्दगी उसकी उदास शाम हो जाती है . दिल के साथ दौलत का होना भी जरूरी हैगरीब की मोहब्बत नीलाम हो जाती है . जब इसे मुकम्मल मुकाम नहीं मिलताइसी बहाने मोहब्बत बदनाम हो जाती है कोई क्या जाने क्या गुजरती है उस वख्त खास चीज जो बाजार में...
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  May 19, 2012, 3:48 pm
ग़ज़ल :०९कितने साहिल किनारों की तलाश में है.मेरी आवाजें भी दरारों की तलाश में है इस कस्ती को खेने वाले का है इंतज़ारतूफाँ में वह मझ्धारों की तलाश में है किस्मत ने लिख दिया है जुदाई मुझको कोई मेरे जैसे सितारों की तलाश में है उनकी दुआयें भी मुस्कान नहीं देती ऩजर कुछ खास ...
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  May 19, 2012, 3:23 pm
ग़ज़ल :०८ हम उनसे मिले अजनबी की तरह मासूमियत लिए ज़िन्दगी की तरहसिर्फ मजबूरियों का था तूफाँ वहाँख्वाब भी सच लगे बंदगी की तरह लफ्ज़ दिल से निकल गुमशुदा हो गए हम तडपते ही रहे तिस्नगी की तरह हमने उनको कहा अपनी मजबूरियाँबस बातें की उसने बानगी की तरहदर्द का अयान ऐसा आलम रह...
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  May 19, 2012, 3:09 pm
ग़ज़ल :०७आंशुओं की गलियों में ज़िन्दगी के फूल.रोती हुयी कलियाँ भी हो रही है शूल मन के तन ने आज ओढ़ लिया लिवाज़पीड़ा भी कहे सबसे सदियों की भूलसोने की चिड़िया हो गयी बुजुर्ग सीमा के रस्ते उड़े तोपों की धूलजनता का मंदिर क्यों मौन हो गयापरिधि ही भूल गयी केंद्रीय मूल ...
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  May 18, 2012, 9:28 am
ग़ज़ल : ०६इस युग में कहाँ सभी इन्शान बन गए किरदार गवाही के अब ईमान बन गए हौसले सब जज्बाती जंग हारने लगे जज़्बात इस दिल की बेईमान बन गए.नफरतों से दिलदारी को काटना चाहाउस दरमियाँ दोस्त मेरे हैवान बन गए. बदलाव यहाँ रातो रात अयान हो गया निर्गुणी सभी यहाँ गुणवान बन गए ...
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  May 18, 2012, 9:09 am
ग़ज़ल:०५ ;आँधी आई तो डर गए पत्ते.शाख से यूँ बिखर गए पत्ते.ढूँढने ज़िन्दगी के लम्हों को.किस किसके घर गए पत्ते ये मुकद्दर भी रेत जैसा है बयां खुल के कर गए पत्तेहार जीत के रिवाजों में आज ख़त्म किस्सा कर गए पत्तेवख्त ने हरा दिया उनको भी कोशिश करके मर गए पत्ते एक इबादत क...
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  May 18, 2012, 9:01 am
ग़ज़ल: ०४ मस्त आँखों के सहारे जी रहे है जैसे दरिया में किनारे जी रहे है.हुनर कुछ खोज कर दे दे मौला जीतकर हम भी हारे जी रहे है. हाल ए दिल कुछ ऐसा हो गया है.ख्वाब ए दिल बहुत सारे जी रहे है.दूर होकर पास है मेरे वो आज भीइस आसमां में जैसे तारे जी रहे है.दिल की दुनिया है छोटी सी अयान ...
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  May 18, 2012, 8:40 am
ग़ज़ल -०३ कभी लबो का मुस्कुराना ज़िन्दगी है.कभी पलकों को भीगना ज़िन्दगी है.उसने कभी मुझको समझा ही नही है.अपने घर में मात खाना ज़िन्दगी है.टूट जाये इस दिल के सारे हौसले जबयादों का हिम्मत दिलाना ज़िन्दगी है.संग अपने ले गए हम खुशियाँ दिखानेखाली हाथ उस मेले से आना ज़िन्दगी...
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  May 18, 2012, 6:46 am
ग़ज़ल .-०२ अनिल अयान ग़म अपने भी पराये हो गए.मुद्दतो मुस्कुराये हो गए.जब भी सीमा लांघना चाहा खौफनाक मेरे साये हो गए अश्कों की तेज बारिशे रहीमेहमां बिन बुलाये हो गए .उजड़े चमन के वासिंदे है हममुद्दतो घर बसाये हो गए उजड़ी महफिले है अयान कितने पल इन्हें सजाये हो गए ....
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  May 17, 2012, 8:39 pm
ग़ज़ल .०१ सोचा था शाम संग सवेरा नहीं जाता.देखा तो जुदा होकर ये डेरा नहीं जाता.दर्द दफ़न हो गया जो जिगर जमीन में चाहते हुए भी इसको उकेरा नहीं जाता .दिल मेरा चाहे की वो राहों को छोड़ दे.अफ़सोस है की उनका बसेरा नहीं जाता.खुशबू दोस्ती और इश्क का है एक गुर इनको बार बार बिखेरा नहीं ...
ग़ज़ल गुलदस्ता...
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  May 17, 2012, 8:27 pm
wakht ke saath sab badal jata hai. na pooch kaun kab badal jata hai. Bahut sikwa hota hai usse ayaan vo bin bataye jab badal jata hai...
ग़ज़ल गुलदस्ता...
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  May 12, 2012, 7:26 am
KISI KI YAAD SATAYE TO KYA KARE.VO EK PAL KO YAAD AAYE TO KYA KARE.MINNATE KARKE JO CHALA JATA HO..KHUD NA HAAL SUNAYE TO KYA KARE.HAMESHA JO HAAL CHAL LETA RAHE,,NA VO  AWAJ LAGAYE TO KYA KARE.BAS ISI TARAH HALE DIL BAYAN HO UNKA JO HAI PARAYE TO KYA KARE....
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  May 8, 2012, 3:19 pm
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