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सेवानिवृत्ति के पश्चात गतिविधियां-प्रतिदिन अधिकतम पाने के सूत्रकल्पना कीजिए कि आप अलार्म घड़ी की आवाज सुन कर सुबह रात की नींद से उठते हैं और तभी आपको ख्याल आता है कि आज तो कहीं नहीं जाना है। सेवानिवृत्ति के बाद का पहला दिन जहां बहुत आश्चर्य वाला होता है वहीं यह दिन दु...
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Tag :गतिविधियां
  October 21, 2013, 11:12 am
सेवानिवृत्ति होने पर स्वास्थ्य/स्वास्थ्यकारक सेवानिवृत्तिसामान्यत: सेवानिवृत्ति क्रियाशील कार्यालयी जिंदगी से सापेक्षता धीमी गति का घोषित संक्रमण दौर है। यह स्वत: कम तनावों,मानसिक और शारीरिक क्रियाओं वाला समय है,इसलिए शरीर को भी कम कैलोरी की जरूरत होती है। कम हु...
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Tag :सेवानिवृत्ति
  October 16, 2013, 11:17 am
सेवानिवृत्त होने पर कैसे समायोजन करें?जीवन का उतार होते हुए भी हम सेवानिवृत्ति की खुशियों को देखते हैं,सेवानिवृत्त होना जीवन का एक महत्वपूर्ण परिवर्तन है। शोध बताता है कि बहुत से लोग संक्रमण के दौरान संघर्ष करते हैं। आप अपनी जिंदगी में क्या करें कि इस बदलाव को सकारा...
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Tag :
  September 28, 2013, 1:06 pm
                                                                                                                  सेवा निवृत्ति के लिए तैयार...
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Tag :
  September 22, 2013, 10:33 pm
आज वह अपने जीवन की 95वीं वर्ष गाँठ के छोर पर खड़ा अपने जीवन-प्रवाह के अतीत खंड को निहार रहा था।जब से होश सम्हाला था,तब से अब तक की जीवन-यात्रा के दृश्य उसकी आँखों के सामने से चलचित्र की तरह दौड़े जा रहे थे। वह न उनका मूल्यांकन कर रहा था और न ही उसे अपने जीवन के अतीत से कोई लगा...
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Tag :मनोज भारती
  November 21, 2012, 1:05 pm
(यशपाल जी ने नई कहानी को परिभाषित करते हुए यह कहानी लिखी थी : प्रस्तुत है यह कहानी आपके समक्ष)मुफस्सिल की पैसेंजर ट्रेन चल पड़ने की उतावली में फुंकार रही थी. आराम से सेकंड क्लास में जाने के लिए दाम अधिक लगते हैं. दूर तो जाना नहीं था. भीड़ से बचकर,एकांत में नई कहानी के सम्बन...
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Tag :नई कहानी
  October 17, 2012, 11:37 pm
(किशोर युवती के मन को संजोती एक प्यारी सी,मासूम सी कहानी--गुड्डो, गुलज़ार की लिखी यह कहानी पढ़ने लायक है) कई बार उसे खुद भी ऐसा लगा कि वो अपनी उम्र से ज्यादा बड़ी हो गयी है। जब वो आठवीं में थी दसवीं जमात की लड़कियों की तरह बात करती थी। और नवीं में आने के बाद तो उसे ऐसा लगा जैस...
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Tag :गुलज़ार
  October 11, 2012, 5:38 pm
एक नदी है नाम है उसका मोत्सू। वैसे तो वह भी अन्य नदियों की तरह ही है। परंतु उसमें कुछ खास है तो वह है उसका शीतल जल और उसके किनारों पर सुंदर हरियाली। कहतें हैं यह दिव्य नदी है जो रूप बदल सकने में सक्षम है और कभी भी अपना रूप आकार बदल कर आस-पास के जीवन को प्रभावित कर सकती है।इस...
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Tag :रहस्य
  August 24, 2012, 2:09 am
हिंदुस्तान में दो विपरीत ढंग के प्रयोग पचास सालों से चले। (वर्ष 1967). एक प्रयोग गांधी ने किया। एक प्रयोग श्री अरविंद ने। गांधी ने एक-एक मनुष्य के चरित्र को ऊपर उठाने का प्रयोग किया। उसमें गांधी सफल होते हुए दिखाई पड़े,लेकिन बिलकुल असफल हो गए। जिन लोगों को गांधी ने सोचा था ...
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Tag :विवेकानंद
  August 16, 2012, 12:20 am
शायद आपको पता नहीं होगा,स्त्री पुरुषों से ज्यादा सुंदर क्यों दिखाई पड़ती है? शायद आपको खयाल न होगा,स्त्री के व्यक्तित्व में एक राउन्डनेस,एक सुडौलता क्यों दिखाई पड़ती है? वह पुरुष के व्यक्तित्व में क्यों नहीं दिखाई पड़ती? शायद आपको खयाल में न होगा कि स्त्री के व्यक्तित...
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Tag :स्त्री-पुरुष
  August 9, 2012, 1:59 am
ऐसी कथा है कि एक सर्वाधिक महत्वपूर्ण शिष्य सारिपुत्र बुद्ध से दूर दूर बैठता था। जबकि स्वभावतः लोग पास-पास बैठने कि कोशिश करते हैं। सारिपुत्र छिप छिपकर बैठता था , कहीं झाड़ कि आड़ में, कहीं भीड़ कि आड़ में। और १०००० शिष्यों में बहुत आसान था छिप छिपकर बैठ जाना। एक दिन आखि...
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Tag :बुद्धत्व
  July 4, 2012, 1:23 pm
( ध्यानमय जीवन के लिए अब तक हमने पिछली पोस्टों में सरलता,सजगता की बात की है। आज की इस पोस्ट में प्रस्तुत है ध्यानमय जीवन  का तीसरा सूत्र: शून्यता) तीसरा सूत्र है: शून्यता। जितना शून्य होंगे उतनी सजगता गहरी होगी। सरलता उत्पन्न होती है सजगता से     और सजगता उत्पन्न होती है ...
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Tag :होना और बनना
  June 24, 2012, 12:03 pm
अखंड जीवन ही सरल जीवन है। समग्र-इन्टीग्रेटेड-जीवन ही सरल जीवन है। इसे पहचानने का रास्ता है: सजगता। सजगता का अर्थ है:अवेयरनेस,होश,भान,आत्मभान। जिस व्यक्ति का आत्मभान जितना जागृत होगा वह उतना ही सरल और अखंड हो जाता है। आत्मभान का क्या अर्थ है? होश का क्या अर्थ है? आत्मभान ...
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Tag :अमूर्च्छा
  June 8, 2012, 1:38 am
एक भारतीय साधु सारी दुनिया की यात्रा करके वापस लौटा था। वह भारत आया और हिमालय की एक छोटी सी रियासत में मेहमान हुआ। उस रियासत के राजा ने साधु के पास जाकर कहा,"मैं ईश्वर से मिलना चाहता हूं। मैंने बहुत से लोगों के प्रवचन सुने हैं,बहुत सी बातें सुनी हैं,सब मुझे बकवास मालूम हो...
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Tag :सरलता
  June 4, 2012, 1:45 am
(पिछली पोस्ट में हमने जाना कि मनुष्य की सरलता खोती है उसके बनाए आदर्शों से,अनुकरण और अनुसरण से,अपने से अलग कुछ और बनने की कोशिश में। इस सरलता के खोने में एक और तत्त्व जिम्मेवार है और वह है तादात्म्य,आइए देखें कि तादात्म्य कैसे हमें जटिल बनाता है और खंडित करता है।)यह स्मर...
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Tag :महावीर
  May 25, 2012, 11:24 pm
ओशो ने चित्त की शांति के लिए तीन सूत्रों की बात बार-बार की है। ये सूत्र हैं:सरलता,सजगता और शून्यता। आज  की इस पोस्ट में हम समझेगें कि सरलता क्या है? सरलता क्या नहीं है? सरलता के मार्ग क्या हैं?सरलता कैसे आए?जो भी बाहर से ओढ़ा जाता है वह हमें जटिल बनाता है। बाहर से ओढ़ी गई सा...
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Tag :बनना
  May 20, 2012, 2:58 pm
सुबह-सुबह एक झील के किनारे से नौका छूटी। कुछ लोग उस पर सवार थे। नौका ने झील में थोड़ा ही प्रवेश किया होगा कि जोर का तूफान आ गया और बादल घिर आए। नौका डगमगाने लगी। आज की नौका नहीं थी,दो हजार वर्ष पहले की थी। उसके डूबने का डर पैदा हो गया। जितने लोग उस नौका पर थे,सारे लोग घबरा गए...
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Tag :जिसस क्राइस्ट
  May 17, 2012, 11:02 pm
हमारे चित्त की पूरी व्यवस्था ऐसी है कि वह कहता है कि कहीं चलो। पूरा चित्त ही इस तनाव से बना है कि कहीं चलो-वहां जहां कहीं दूर मंजिल है। मन जीवित रहता है तनाव में। यह तनाव गहरे में कहीं पहुंचने का तनाव है-चाहे धन हो,चाहे यश हो,चाहे मोक्ष।मन उस वक्त मर जाता है जिस वक्त आपने क...
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Tag :तनाव
  May 13, 2012, 7:50 pm
एक संन्यासी ने अपने शिष्य को एक दिन कहा कि तू बहुत दिन मेरे पास रहा है। अब मैं तुझे कहीं और भेजता हूं। ताकि मैंने तुझसे जो कहा है वह और ठीक से समझ ले। तो उसको एक दूसरे संन्यासी के पास भेजा कि तू जा और उसके पास रह और उसकी जीवन चर्या को देख।वह वहां गया। सुबह से शाम तक उसने दिनच...
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Tag :दिनचर्या
  May 10, 2012, 12:17 am
इस समय विश्व में महामारी के स्तर पर एक रोग उभर रहा है जिसके दस प्रतिशत से अधिक शिकार भारत में हैं। रोग का नाम है डिमेंशिया। यह एक सिंड्रोम है जिसके विकास में मस्तिष्क के बहुत से विकार सहायक होते हैं। इस सिंड्रोम के चलते धीरे-धीरे या कभी बहुत तेजी से मस्तिष्क का क्षय होन...
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Tag :जिबरिश
  May 6, 2012, 2:34 am
मजनू को उसके गांव के राजा ने पकड़वा लिया था। गांव भर में चर्चा थी कि वह पागल हो गया है लैला के लिए। उसने बार-बार लैला को देखने की कोशिश की। बड़ी मुश्किल में पड़ा। लैला बहुत साधारण लड़की थी। फिर भी मजनू पागल हो गया।राजा ने मजनू को बुलाया और कहा,"तू पागल तो नहीं है! लैला बड़ी ...
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Tag :मजनू
  May 4, 2012, 12:07 am
एक मुसलमान खलीफा था-उमर। सात वर्षों से एक दुश्मन के साथ उसकी लड़ाई चलती रही। यह संघर्ष बहुत भयंकर हो गया था। किसी के जीतने की कोई उम्मीद नहीं मालूम पड़ती थी। ऐसा नहीं लगता था कि कोई निर्णायक फैसला हो सकेगा। लेकिन सातवें वर्ष में निर्णायक फैसला होने के करीब आ गया। हाथ मे...
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Tag :चित्त की शांति
  May 1, 2012, 10:09 pm
‎" न कोई 'कर्म', न कोई 'किस्मत', न कोई 'ऐतिहासिक आदेश'- 'तुम्हारा जीवन तुम पर निर्भर है' | 'उत्तरदायी ठहराने के लिए कोई परमात्मा नहीं', 'सामाजिक पद्धति या सिद्धांत नहीं है' | 'ऐसी स्थिति में तुम इसी क्षण सुख में रह सकते हो या दुख में' |'स्वर्ग अथवा नरक कोई ऐसे स्थान नहीं हैं जहाँ तुम म...
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Tag :स्वधर्म
  April 29, 2012, 11:40 pm
हेनरी थोरो अमेरिका का एक बहुत बड़ा विचारक हुआ। वह मरने के करीब था। वह कभी चर्च में नहीं गया था। उसे कभी किसी ने प्रार्थना करते नहीं देखा था। मरने का वक्त था,तो उसके गांव का पादरी उससे मिलने गया। उसने सोचा यह मौका अच्छा है,मौत के वक्त आदमी घबड़ा जाता है। मौत के वक्त डर पैद...
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Tag :संधी
  April 25, 2012, 11:51 pm
स्वामी रामतीर्थ टोकियो गए थे। वहां एक बड़े भवन में आग लग गई थी। उस भवन के बाहर हजारों लोग इकट्ठे थे। रामतीर्थ भी खड़े होकर देखने लगे। भवन का मालिक खड़ा था। उसकी आंखें पथरा गई थी। वह देख रहा था,लेकिन उसे कुछ दिखाई नहीं पड़ रहा था। जिंदगी भर जो बनाया था,वह जल रहा था। नौकर-चा...
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Tag :स्व या शव
  April 22, 2012, 11:40 am
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