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गूंजअनुगूंज

लाल बहादुर शास्त्री का जन्म 2 अक्तूबर,1904 को मुगलसराय में हुआ था। उनके पिता श्री शारदा प्रसाद श्रीवास्तव आदर्श अध्यापक थे। वे सहृदयी और उदार विचारों के थे। जिनका प्रभाव लाल बहादुर शास्त्री पर भी रहा। यद्यपि उन्हें उनका साथ लंबे समय तक नहीं मिला। जब वे मात्र 18 माह के थे,त...
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Tag :जीवन परिचय
  October 2, 2017, 12:21 pm
बहुत अच्छा लग रहा है कि आज हिंदी ब्लॉग जगत में फिर से हलचल तेज़ हुई है। जिन लोगों ने भी इसके लिए प्रयास किए हैं,वे सभी प्रशंसा के पात्र हैं। ब्लॉग विचार अभिव्यक्ति का सर्वोत्तम मंच है। इसे ताज़ा बनाए रखने के लिए जरूरी है कि सभी ब्लॉगर बंधु अपने-अपने ब्लॉग पर नियमित रूप से ल...
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Tag :
  July 1, 2017, 11:32 pm
मनोज कुमार पांडेय की सद्यःप्रकाशित पुस्तक ‘ख़जाना’ पढ़ी। यह कहानीसंग्रह है जिसमें कुल आठ कहानियां संकलित है,जो इस रूप में प्रकाशित होने से पूर्व तद्भव,पक्षधर,रचना समय,अभिनवकदम,कादंबिनी और पल-प्रतिपल पत्रिकाओं में छप चुकी हैं। संग्रह की तीन लंबीकहानियां हैं। ये हैं-च...
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Tag :खजाना
  May 14, 2017, 3:00 pm
एक कवि एक सुंदर बाग के एकांत में सरोवर तट पर एक लंबे घने वृक्ष के नीचे बैठा कविता लिख रहा था। आसपास कोई भी नहीं था। एक कोवा वृक्ष की डाल पर बैठा था। कवि अपनी पहली कविता कहता है : सारी दुनिया की संपत्ति का मैं मालिक सोलोमन का खजाना भी मैंने पा लिया कुबेर का खजाना भी मैंने पा ...
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Tag :कुबेर
  December 16, 2016, 10:23 pm
एक बार विद्वान लोगों के एक समूह ने ओशो को बोलने के लिए आमंत्रित किया। ओशो ने आमंत्रण सहर्ष स्वीकार किया और नियत दिन सभा को संबोधित करने पहुंचे। ओशो ने इस समूह के साथ चर्चा का जो विषय चुना वह था : "सिटनालटा- एक अनोखा समाज"। उन्होंने उस समाज के संबंध में बोलते हुआ कहा कि हमार...
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Tag :मनोज भारती
  December 8, 2016, 9:00 am
राम आश्रय सुरेश का बड़ा भाई गांव से एक कोस दूर दूसरे गांव में पढ़ने जाता था। बीच में एक अहिरों का खेत था। खेत में कूंआ था। कूएं के पास ही उनका घर था। एक दिन राम आश्रय ने स्कूल जाते हुए उनके वहां एक सुंदर कुत्ता देखा। जो बहुत बड़ा नहीं था। अहिरों ने उसे खेत और घर की सुरक्षा के ल...
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Tag :कुत्ता
  September 30, 2016, 12:29 am
एक दिन वह गांव की कच्ची गलियों में अपने हमउम्र  बच्चों के साथ खेल रहा था। खेलते-खेलते वह नीम की छांव तले  आ गया। पीछे-पीछे उसका दोस्त सुरेश भी आ गया। वह जमीन में देखने लगा। जमीन कभी गारे-गोबर से लीपी गई थी। जमीन में उसे दो चीज़ें दिखाई दी। जो गारे-गोबर के साथ जमीन में धंस ...
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Tag :बचपन
  September 20, 2016, 12:40 am
गतांक से आगे ...लेकिन सिद्धार्थ स्वयं खुश नहीं था। अंजीर के बाग की गुलाबी पगडंडियों पर घुमते हुए,बनी की नीली छाया में बैठकर चिंतन-मनन करते हुए ,प्रायश्चित के दैनिक स्नान के दौरान अपने अंग धोते हुए, आचरण की पूरी गरिमा के साथ छायादार अमराई में हवन करते हुए,सबके प्रिय,सबकी प...
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Tag :गूंज अनुगूंज
  September 4, 2016, 3:46 pm
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Tag :
  July 9, 2016, 9:50 am
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Tag :
  July 8, 2016, 11:28 pm
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Tag :
  July 8, 2016, 10:37 pm
हिंदी उपन्यासों में आए विभिन्न विदेशी पात्रों के माध्यम से समाज में आए विभिन्न परिवर्तनों और व्यक्ति की वैचारिक सोच को प्रतिबिंबित करती डॉ. सुप्रिया पी की पुस्तक "हिंदी उपन्यास के विदेशी पात्र"पढ़ने को मिली। पुस्तक में कुल पंद्रह ऐसे हिंदी  उपन्यास चुने गए हैं, जिनम...
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Tag :पुस्तक-समीक्षा
  June 12, 2016, 11:21 pm
सृष्टि (पृथ्वी)की आयु (अवधि) चार अरब बत्तीस करोड़ वर्ष है। अब तक यह एक अरब छयानवे करोड़ आठ लाख त्रेपन हजार एक सौ पंद्रह वर्ष की हो चुकी है और दो अरब पैंतीस करोड़ इक्यावन लाख छयालिस हजार आठ सौ पिचासी वर्ष प्रलय होने में शेष  हैं।विक्रम संवत्सर 2073 की हार्दिक बधाई एवं शुभकामना...
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Tag :
  April 8, 2016, 10:49 am
भाग-1ब्राह्मण का बेटा घर की छाया तले,नदी के किनारे,नावों के निकट धूप में साल और अंजीर की छांव में सिद्धार्थ ,ब्राह्मण का सुंदर बेटा, अपने मित्र गोविंदा के संग पला-बढ़ा। नदी किनारे उसके  पवित्र स्नान और पवित्र बलि-कर्म करते हुए भी सूर्य ने उसके छरहरे कंधों को सांवला बना...
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Tag :ओम
  February 28, 2016, 3:35 pm
रामदीन एक छोटे से गांव में गरीब घर में पैदा हुआ। गांव में कोई स्कूल,अस्पताल नहीं था। गांव को शहर से जोड़ने वाली कोई सड़क भी न थी। गांव में बिजली भी नहीं थी। गांव मूलभूत सुविधाओं से वंचित था। गांव से दो कोस दूरी पर एक दूसरे गांव में मिडिल स्कूल था। वहीं से रामदीन ने मिडिल स्...
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Tag :किफायत
  June 7, 2015, 3:47 pm
आत्मा  का आनंद कर्मशीलता में है। -शैले...
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Tag :आनंद
  May 3, 2015, 9:42 am
सृष्टि (पृथ्वी)की आयु (अवधि) चार अरब बत्तीस करोड़ वर्ष है। अब तक यह एक अरब छयानवे करोड़ आठ लाख त्रेपन हजार एक सौ चौदह वर्ष की हो चुकी है और दो अरब पैंतीस करोड़ इक्यावन लाख छयालिस हजार आठ सौ छियासी वर्ष प्रलय होने में शेष  हैं।विक्रम संवत्सर 2072 की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं...
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Tag :यजुर्वेद
  March 21, 2015, 12:14 pm
सेवानिवृत्ति के पश्चात गतिविधियां-प्रतिदिन अधिकतम पाने के सूत्रकल्पना कीजिए कि आप अलार्म घड़ी की आवाज सुन कर सुबह रात की नींद से उठते हैं और तभी आपको ख्याल आता है कि आज तो कहीं नहीं जाना है। सेवानिवृत्ति के बाद का पहला दिन जहां बहुत आश्चर्य वाला होता है वहीं यह दिन दु...
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Tag :गतिविधियां
  October 21, 2013, 11:12 am
सेवानिवृत्ति होने पर स्वास्थ्य/स्वास्थ्यकारक सेवानिवृत्तिसामान्यत: सेवानिवृत्ति क्रियाशील कार्यालयी जिंदगी से सापेक्षता धीमी गति का घोषित संक्रमण दौर है। यह स्वत: कम तनावों,मानसिक और शारीरिक क्रियाओं वाला समय है,इसलिए शरीर को भी कम कैलोरी की जरूरत होती है। कम हु...
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Tag :सेवानिवृत्ति
  October 16, 2013, 11:17 am
सेवानिवृत्त होने पर कैसे समायोजन करें?जीवन का उतार होते हुए भी हम सेवानिवृत्ति की खुशियों को देखते हैं,सेवानिवृत्त होना जीवन का एक महत्वपूर्ण परिवर्तन है। शोध बताता है कि बहुत से लोग संक्रमण के दौरान संघर्ष करते हैं। आप अपनी जिंदगी में क्या करें कि इस बदलाव को सकारा...
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Tag :
  September 28, 2013, 1:06 pm
                                                                                                                  सेवा निवृत्ति के लिए तैयार...
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Tag :
  September 22, 2013, 10:33 pm
आज वह अपने जीवन की 95वीं वर्ष गाँठ के छोर पर खड़ा अपने जीवन-प्रवाह के अतीत खंड को निहार रहा था।जब से होश सम्हाला था,तब से अब तक की जीवन-यात्रा के दृश्य उसकी आँखों के सामने से चलचित्र की तरह दौड़े जा रहे थे। वह न उनका मूल्यांकन कर रहा था और न ही उसे अपने जीवन के अतीत से कोई लगा...
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Tag :मनोज भारती
  November 21, 2012, 1:05 pm
आज वह अपने जीवन की 95वीं वर्ष गाँठ के छोर पर खड़ा अपने जीवन-प्रवाह के अतीत खंड को निहार रहा था।जब से होश सम्हाला था,तब से अब तक की जीवन-यात्रा के दृश्य उसकी आँखों के सामने से चलचित्र की तरह दौड़े जा रहे थे। वह न उनका मूल्यांकन कर रहा था और न ही उसे अपने जीवन के अतीत से कोई लगा...
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Tag :वह अकेला आदमी (उपन्यास)
  November 21, 2012, 1:05 pm
(यशपाल जी ने नई कहानी को परिभाषित करते हुए यह कहानी लिखी थी : प्रस्तुत है यह कहानी आपके समक्ष)मुफस्सिल की पैसेंजर ट्रेन चल पड़ने की उतावली में फुंकार रही थी. आराम से सेकंड क्लास में जाने के लिए दाम अधिक लगते हैं. दूर तो जाना नहीं था. भीड़ से बचकर,एकांत में नई कहानी के सम्बन...
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Tag :नई कहानी
  October 17, 2012, 11:37 pm
(किशोर युवती के मन को संजोती एक प्यारी सी,मासूम सी कहानी--गुड्डो, गुलज़ार की लिखी यह कहानी पढ़ने लायक है) कई बार उसे खुद भी ऐसा लगा कि वो अपनी उम्र से ज्यादा बड़ी हो गयी है। जब वो आठवीं में थी दसवीं जमात की लड़कियों की तरह बात करती थी। और नवीं में आने के बाद तो उसे ऐसा लगा जैस...
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Tag :गुलज़ार
  October 11, 2012, 5:38 pm
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