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गूंजअनुगूंज

राम आश्रय सुरेश का बड़ा भाई गांव से एक कोस दूर दूसरे गांव में पढ़ने जाता था। बीच में एक अहिरों का खेत था। खेत में कूंआ था। कूएं के पास ही उनका घर था। एक दिन राम आश्रय ने स्कूल जाते हुए उनके वहां एक सुंदर कुत्ता देखा। जो बहुत बड़ा नहीं था। अहिरों ने उसे खेत और घर की सुरक्षा के ल...
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Tag :कुत्ता
  September 30, 2016, 12:29 am
एक दिन वह गांव की कच्ची गलियों में अपने हमउम्र  बच्चों के साथ खेल रहा था। खेलते-खेलते वह नीम की छांव तले  आ गया। पीछे-पीछे उसका दोस्त सुरेश भी आ गया। वह जमीन में देखने लगा। जमीन कभी गारे-गोबर से लीपी गई थी। जमीन में उसे दो चीज़ें दिखाई दी। जो गारे-गोबर के साथ जमीन में धंस ...
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Tag :बचपन
  September 20, 2016, 12:40 am
गतांक से आगे ...लेकिन सिद्धार्थ स्वयं खुश नहीं था। अंजीर के बाग की गुलाबी पगडंडियों पर घुमते हुए,बनी की नीली छाया में बैठकर चिंतन-मनन करते हुए ,प्रायश्चित के दैनिक स्नान के दौरान अपने अंग धोते हुए, आचरण की पूरी गरिमा के साथ छायादार अमराई में हवन करते हुए,सबके प्रिय,सबकी प...
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Tag :गूंज अनुगूंज
  September 4, 2016, 3:46 pm
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Tag :
  July 9, 2016, 9:50 am
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Tag :
  July 8, 2016, 11:28 pm
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Tag :
  July 8, 2016, 10:37 pm
हिंदी उपन्यासों में आए विभिन्न विदेशी पात्रों के माध्यम से समाज में आए विभिन्न परिवर्तनों और व्यक्ति की वैचारिक सोच को प्रतिबिंबित करती डॉ. सुप्रिया पी की पुस्तक "हिंदी उपन्यास के विदेशी पात्र"पढ़ने को मिली। पुस्तक में कुल पंद्रह ऐसे हिंदी  उपन्यास चुने गए हैं, जिनम...
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Tag :पुस्तक-समीक्षा
  June 12, 2016, 11:21 pm
सृष्टि (पृथ्वी)की आयु (अवधि) चार अरब बत्तीस करोड़ वर्ष है। अब तक यह एक अरब छयानवे करोड़ आठ लाख त्रेपन हजार एक सौ पंद्रह वर्ष की हो चुकी है और दो अरब पैंतीस करोड़ इक्यावन लाख छयालिस हजार आठ सौ पिचासी वर्ष प्रलय होने में शेष  हैं।विक्रम संवत्सर 2073 की हार्दिक बधाई एवं शुभकामना...
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Tag :
  April 8, 2016, 10:49 am
भाग-1ब्राह्मण का बेटा घर की छाया तले,नदी के किनारे,नावों के निकट धूप में साल और अंजीर की छांव में सिद्धार्थ ,ब्राह्मण का सुंदर बेटा, अपने मित्र गोविंदा के संग पला-बढ़ा। नदी किनारे उसके  पवित्र स्नान और पवित्र बलि-कर्म करते हुए भी सूर्य ने उसके छरहरे कंधों को सांवला बना...
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Tag :ओम
  February 28, 2016, 3:35 pm
रामदीन एक छोटे से गांव में गरीब घर में पैदा हुआ। गांव में कोई स्कूल,अस्पताल नहीं था। गांव को शहर से जोड़ने वाली कोई सड़क भी न थी। गांव में बिजली भी नहीं थी। गांव मूलभूत सुविधाओं से वंचित था। गांव से दो कोस दूरी पर एक दूसरे गांव में मिडिल स्कूल था। वहीं से रामदीन ने मिडिल स्...
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Tag :किफायत
  June 7, 2015, 3:47 pm
आत्मा  का आनंद कर्मशीलता में है। -शैले...
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Tag :आनंद
  May 3, 2015, 9:42 am
सृष्टि (पृथ्वी)की आयु (अवधि) चार अरब बत्तीस करोड़ वर्ष है। अब तक यह एक अरब छयानवे करोड़ आठ लाख त्रेपन हजार एक सौ चौदह वर्ष की हो चुकी है और दो अरब पैंतीस करोड़ इक्यावन लाख छयालिस हजार आठ सौ छियासी वर्ष प्रलय होने में शेष  हैं।विक्रम संवत्सर 2072 की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं...
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Tag :यजुर्वेद
  March 21, 2015, 12:14 pm
सेवानिवृत्ति के पश्चात गतिविधियां-प्रतिदिन अधिकतम पाने के सूत्रकल्पना कीजिए कि आप अलार्म घड़ी की आवाज सुन कर सुबह रात की नींद से उठते हैं और तभी आपको ख्याल आता है कि आज तो कहीं नहीं जाना है। सेवानिवृत्ति के बाद का पहला दिन जहां बहुत आश्चर्य वाला होता है वहीं यह दिन दु...
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Tag :गतिविधियां
  October 21, 2013, 11:12 am
सेवानिवृत्ति होने पर स्वास्थ्य/स्वास्थ्यकारक सेवानिवृत्तिसामान्यत: सेवानिवृत्ति क्रियाशील कार्यालयी जिंदगी से सापेक्षता धीमी गति का घोषित संक्रमण दौर है। यह स्वत: कम तनावों,मानसिक और शारीरिक क्रियाओं वाला समय है,इसलिए शरीर को भी कम कैलोरी की जरूरत होती है। कम हु...
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Tag :सेवानिवृत्ति
  October 16, 2013, 11:17 am
सेवानिवृत्त होने पर कैसे समायोजन करें?जीवन का उतार होते हुए भी हम सेवानिवृत्ति की खुशियों को देखते हैं,सेवानिवृत्त होना जीवन का एक महत्वपूर्ण परिवर्तन है। शोध बताता है कि बहुत से लोग संक्रमण के दौरान संघर्ष करते हैं। आप अपनी जिंदगी में क्या करें कि इस बदलाव को सकारा...
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Tag :
  September 28, 2013, 1:06 pm
                                                                                                                  सेवा निवृत्ति के लिए तैयार...
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Tag :
  September 22, 2013, 10:33 pm
आज वह अपने जीवन की 95वीं वर्ष गाँठ के छोर पर खड़ा अपने जीवन-प्रवाह के अतीत खंड को निहार रहा था।जब से होश सम्हाला था,तब से अब तक की जीवन-यात्रा के दृश्य उसकी आँखों के सामने से चलचित्र की तरह दौड़े जा रहे थे। वह न उनका मूल्यांकन कर रहा था और न ही उसे अपने जीवन के अतीत से कोई लगा...
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Tag :मनोज भारती
  November 21, 2012, 1:05 pm
आज वह अपने जीवन की 95वीं वर्ष गाँठ के छोर पर खड़ा अपने जीवन-प्रवाह के अतीत खंड को निहार रहा था।जब से होश सम्हाला था,तब से अब तक की जीवन-यात्रा के दृश्य उसकी आँखों के सामने से चलचित्र की तरह दौड़े जा रहे थे। वह न उनका मूल्यांकन कर रहा था और न ही उसे अपने जीवन के अतीत से कोई लगा...
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Tag :वह अकेला आदमी (उपन्यास)
  November 21, 2012, 1:05 pm
(यशपाल जी ने नई कहानी को परिभाषित करते हुए यह कहानी लिखी थी : प्रस्तुत है यह कहानी आपके समक्ष)मुफस्सिल की पैसेंजर ट्रेन चल पड़ने की उतावली में फुंकार रही थी. आराम से सेकंड क्लास में जाने के लिए दाम अधिक लगते हैं. दूर तो जाना नहीं था. भीड़ से बचकर,एकांत में नई कहानी के सम्बन...
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Tag :नई कहानी
  October 17, 2012, 11:37 pm
(किशोर युवती के मन को संजोती एक प्यारी सी,मासूम सी कहानी--गुड्डो, गुलज़ार की लिखी यह कहानी पढ़ने लायक है) कई बार उसे खुद भी ऐसा लगा कि वो अपनी उम्र से ज्यादा बड़ी हो गयी है। जब वो आठवीं में थी दसवीं जमात की लड़कियों की तरह बात करती थी। और नवीं में आने के बाद तो उसे ऐसा लगा जैस...
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Tag :गुलज़ार
  October 11, 2012, 5:38 pm
एक नदी है नाम है उसका मोत्सू। वैसे तो वह भी अन्य नदियों की तरह ही है। परंतु उसमें कुछ खास है तो वह है उसका शीतल जल और उसके किनारों पर सुंदर हरियाली। कहतें हैं यह दिव्य नदी है जो रूप बदल सकने में सक्षम है और कभी भी अपना रूप आकार बदल कर आस-पास के जीवन को प्रभावित कर सकती है।इस...
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Tag :रहस्य
  August 24, 2012, 2:09 am
हिंदुस्तान में दो विपरीत ढंग के प्रयोग पचास सालों से चले। (वर्ष 1967). एक प्रयोग गांधी ने किया। एक प्रयोग श्री अरविंद ने। गांधी ने एक-एक मनुष्य के चरित्र को ऊपर उठाने का प्रयोग किया। उसमें गांधी सफल होते हुए दिखाई पड़े,लेकिन बिलकुल असफल हो गए। जिन लोगों को गांधी ने सोचा था ...
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Tag :विवेकानंद
  August 16, 2012, 12:20 am
शायद आपको पता नहीं होगा,स्त्री पुरुषों से ज्यादा सुंदर क्यों दिखाई पड़ती है? शायद आपको खयाल न होगा,स्त्री के व्यक्तित्व में एक राउन्डनेस,एक सुडौलता क्यों दिखाई पड़ती है? वह पुरुष के व्यक्तित्व में क्यों नहीं दिखाई पड़ती? शायद आपको खयाल में न होगा कि स्त्री के व्यक्तित...
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Tag :स्त्री-पुरुष
  August 9, 2012, 1:59 am
ऐसी कथा है कि एक सर्वाधिक महत्वपूर्ण शिष्य सारिपुत्र बुद्ध से दूर दूर बैठता था। जबकि स्वभावतः लोग पास-पास बैठने कि कोशिश करते हैं। सारिपुत्र छिप छिपकर बैठता था , कहीं झाड़ कि आड़ में, कहीं भीड़ कि आड़ में। और १०००० शिष्यों में बहुत आसान था छिप छिपकर बैठ जाना। एक दिन आखि...
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Tag :बुद्धत्व
  July 4, 2012, 1:23 pm
( ध्यानमय जीवन के लिए अब तक हमने पिछली पोस्टों में सरलता,सजगता की बात की है। आज की इस पोस्ट में प्रस्तुत है ध्यानमय जीवन  का तीसरा सूत्र: शून्यता) तीसरा सूत्र है: शून्यता। जितना शून्य होंगे उतनी सजगता गहरी होगी। सरलता उत्पन्न होती है सजगता से     और सजगता उत्पन्न होती है ...
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Tag :होना और बनना
  June 24, 2012, 12:03 pm
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