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Blog: बैसवारी baiswari

Blogger: संतोष त्रिवेदी
हमारा देश जब आज़ाद हुआ था तो इसके आधारमें धर्मनिरपेक्ष गणतंत्र की अवधारणा मुख्य रूप से थी ।उस समय देश के नव-निर्माण और सृजन में जो लोग अगुवाई कर रहे थे,उनने कुछ विरोधों के बावजूद ऐसा स्वरुप स्वीकाराथा ,जो आगे चलकर हमारे देश की मुख्य पहचान (यूएसपी) सिद्ध हुई ।किसी देश ... Read more
clicks 358 View   Vote 0 Like   4:19am 21 Oct 2013 #धर्मनिरपेक्षता
Blogger: संतोष त्रिवेदी
जब नारी-शक्ति की बात होती है तो सामान्य लोग इसे लैंगिक आधार पर देखने लगते हैं। इस तरह उनको लगता है कि यह स्त्री के पुरुष से अधिक शक्ति की बात है,जबकि ऐसा नहीं है। नारी सृजन का पर्याय है और सृष्टि में संतुलन के लिए वह अपनी शक्ति का प्रयोग करती है। इसमें सृजन और संहार दोनों ... Read more
clicks 365 View   Vote 0 Like   4:34am 9 Oct 2013 #नारी
Blogger: संतोष त्रिवेदी
महात्मा गाँधी अंतर राष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय ,वर्धा द्वारा आयोजित हिंदी ब्लॉगिंग पर  दो दिवसीय संगोष्ठी (२०-२१ सितम्बर २०१३) कई मायनों में अविस्मरणीय और उपलब्धिपूर्ण रही.हिंदी ब्लॉगिंग और सोशल मीडिया के इस पर होने वाले प्रभावों पर जमकर बहस और चर्चा हुई.विशेष&nb... Read more
clicks 253 View   Vote 0 Like   3:52am 25 Sep 2013 #सोशल मीडिया
Blogger: संतोष त्रिवेदी
मोदी के सर ताज है,अडवाणी कंगाल।खुद का बोया काटते,काहे करें मलाल ?काहे करें मलाल,बताया जिन्ना सेकुलर।तिकड़म  सब बेकार, रहे ना हिन्दू कट्टर।अब काहे रिरियांय,फसल जो पहले बो दी।कट्टरता का खेत, काटने आए मोदी।। ... Read more
clicks 251 View   Vote 0 Like   1:37pm 16 Sep 2013 #भाजपा
Blogger: संतोष त्रिवेदी
हमले की सारी तैयारियाँ हो चुकी हैं,रुक्के हाथ में आ गए हैं,सबकी सहमति दर्ज़ कर ली गई है,मित्र देशों ने गरदनें हिला दी हैंबस ,अब अंकल सैम का हाथ मिसाइल की बटन दबाने को बेताब है,फिर सीरिया में धमाके के साथ शांति और सारे संसार में चुप्पी छा जाएगी,इस तरह दुनिया खुशहाल हो जाएगी ... Read more
clicks 315 View   Vote 0 Like   2:07pm 7 Sep 2013 #मुक्तक
Blogger: संतोष त्रिवेदी
चौदह दिन बैकुंठ में,रहे अप्सरा संग।बाबा पूर्ण पवित्र हो,नहीं शील हो भंग।।:)चोला ओढ़े संत का, सीख जगत को देत। पुड़िया बेचें धरम की,जनता बनी अचेत।जनता बनी अचेत,हो रहे हैं सब अन्धे। नेता, बाबा संग,चलातेअपने धन्धे। ईश्वर भी हैरान,देख मन ही मन बोला।मनुज नहीं ये ... Read more
clicks 280 View   Vote 0 Like   2:03pm 2 Sep 2013 #दोहा
Blogger: संतोष त्रिवेदी
१) बड़ी देर भई नंदलाला,तेरी राह तके हर ग्वाला.....!देश की जनता भूखी-प्यासी,मौज उड़ायें लाला।तुमने एक कंस मारा था,यमुना विषधर काला, आज सर्प सर्वत्र विराजे,जनता बने निवाला।फिर मुरलीधर चक्र सुदर्शन,उर वैजन्ती माला,त्राहिमाम्, अब शरण तिहारी, तू ही है रखवाला।।बड़ी देर भई नंदलाला... Read more
clicks 291 View   Vote 0 Like   1:57pm 28 Aug 2013 #मोहन
Blogger: संतोष त्रिवेदी
बादल झाँकें दूर से,टिलीलिली करि जाँय। बरसें प्रीतम के नगर,हम प्यासे रह जाँय।। माटी की सोंधी महक,हमें रही बौराय। बदरा प्रियतम सा लगे,जाते तपन बुझाय।। बारिश आखिर आ गई,भीगा सारा अंग। चोली चिपकी बदन ते,रति के संग अनंग।। सत्ता की कुर्सी मिले,रामलला की ओट। राघव कारागार में... Read more
clicks 295 View   Vote 0 Like   2:10pm 5 Aug 2013 #बरसात
Blogger: संतोष त्रिवेदी
'कलयुग के भगवान तुम्हारी जय हो ! तुम्हारे पास चमचमाती कार है, आलीशान बंगला है ढेर सारा रूपया है ... लजीज व्यंजन खाते हो ... विदेशी शराबऔर अर्द्धनगन सुन्दरियां तुम्हारी शाम को हसीन बनाती है।तुम्हारी काबिलियत तुम्हारे पुरुषार्थ की पृष्ठभूमि है ....कौन है इस जग में भूप ,जो तु... Read more
clicks 292 View   Vote 0 Like   4:02am 26 Jul 2013 #धरतीपकड़
Blogger: संतोष त्रिवेदी
 कई बार यह बहस उठती है कि अभिव्यक्ति के लिए कौन-सा माध्यम उचित है या सबसे उत्तम है,पर मेरी समझ से मूल प्रश्न यह होना ही नहीं चाहिए। हर माध्यम की अपनी सम्प्रेषणता होती है और पहुँच भी। बदलते समय और नई तकनीक के साथ इसमें भी उत्तरोत्तर बदलाव हो रहा है। यह सहज और स्वाभाविक प्र... Read more
clicks 354 View   Vote 0 Like   5:27am 27 Jun 2013 #सरोकार
Blogger: संतोष त्रिवेदी
ओ मेरे पितातुमने हर दुःख सहामाँ से भी ना कहाकंधे पर लादकरबोझ मेरा सहा।घोड़ा बने,संग खेले मेरे,मैंने मारी दुलत्तीसब खिलौने मेरे।मुझको मेला घुमायाहर कुसंग से बचायादिल के अंदर भरे प्यार कोसारे जग से छुपाया।मुझमें उम्मीद दीरोशनी दी हमें,मेरे अस्तित्व कोएक पहचान दी।खु... Read more
clicks 317 View   Vote 0 Like   7:09am 16 Jun 2013 #मुक्तक
Blogger: संतोष त्रिवेदी
'नई दुनिया' में १५/०६/२०१३ को प्रकाशित ! जब से हमने यह सुना है कि थोड़े ही दिनों में ‘तार’ यानी टेलीग्राम का अस्तित्व समाप्त हो जायेगा,दिल भारी हो रहा है।वैसे तो इस ‘तार’ से हमारे तार बहुत पहले ही टूट चुके थे,फ़िर भी उसका ऐसे जाना खल रहा है।पहले फिक्स फ़ोन और फ़िर मोबाइल फ़ोन क... Read more
clicks 265 View   Vote 0 Like   1:21am 15 Jun 2013 #नई दुनिया
Blogger: संतोष त्रिवेदी
जब से हमने यह सुना है कि थोड़े ही दिनों में ‘तार’ यानी टेलीग्राम का अस्तित्व समाप्त हो जायेगा,दिल भारी हो रहा है।वैसे तो इस ‘तार’ से हमारे तार बहुत पहले ही टूट चुके थे,फ़िर भी उसका ऐसे जाना खल रहा है।पहले फिक्स फ़ोन और फ़िर मोबाइल फ़ोन के वज़ूद में आने के बाद से ही ‘तार’ का चलन स... Read more
clicks 317 View   Vote 0 Like   1:21am 15 Jun 2013 #तार
Blogger: संतोष त्रिवेदी
जिस समय देश के सभी नेता आने वाले समय में लोकतंत्र और देश की सेवा के नाम पर होने वाले पांच-साला पाखंड की तैयारियों में व्यस्त हैं, वहीं देश की राजधानी दिल्ली से एक ऐसी खबर आती है, जिससे इन सबका कोई सरोकार नहीं है। राजधानी की अनधिकृत बस्ती में रहने वाले एक निम्नवर्गीय परिव... Read more
clicks 271 View   Vote 0 Like   4:36pm 8 Jun 2013 #आम आदमी
Blogger: संतोष त्रिवेदी
जिस समय देश के सभी नेता आने वाले समय में लोकतंत्र और देश की सेवा के नाम पर होने वाले पांच-साला पाखंड की तैयारियों में व्यस्त हैं,वहीँ देश की राजधानी दिल्ली से एक ऐसी खबर आती है,जिससे इन सबकाकोई सरोकार नहीं है। राजधानी की अनधिकृत बस्ती में एक निम्नवर्गीय परिवार का मुखिय... Read more
clicks 337 View   Vote 0 Like   4:36pm 8 Jun 2013 #पानी
Blogger: संतोष त्रिवेदी
जिस समय देश के सभी नेता आने वाले समय में लोकतंत्र और देश की सेवा के नाम पर होने वाले पांच-साला पाखंड की तैयारियों में व्यस्त हैं, वहीं देश की राजधानी दिल्ली से एक ऐसी खबर आती है, जिससे इन सबका कोई सरोकार नहीं है। राजधानी की अनधिकृत बस्ती में रहने वाले एक निम्नवर्गीय परिव... Read more
clicks 273 View   Vote 0 Like   4:36pm 8 Jun 2013 #पानी
Blogger: संतोष त्रिवेदी
(1)मृत्यु घिन आती है ऐसे समाज सेजहाँ हक की लड़ाईजमीन और जंगल के बहानेजान लेने पर उतारू है।जिस जमीन पर गिरता है पानीवहां बहाया जाता है रक्त।फसल में धान और सरसों की जगहलहलहाती हैं लाशें।उर्वर मानव-समाज को बंजर कर रहे जमीन की तरह...अपनी पीढ़ियों को उजाड़करबना रहे हैं ठूँठजंग... Read more
clicks 304 View   Vote 0 Like   6:03am 31 May 2013 #बचपन
Blogger: संतोष त्रिवेदी
ब्लॉग-जगत से मेरी अनियमितता लगातार जारी है.इस बात को मैं काफ़ी समय पहले पहचान गया था.जब से टेढ़ी उँगली   के चक्कर में पड़ा,सीधा लेखन बंद-सा हो गया.हाँ,इस बीच फेसबुकवा में ज़रूर डुबकी लगाना जारी रहा,पता नहीं ससुर उससे कब निजात मिलेगी.इस व्यस्तता के चलते हम ब्लॉग-पोस्टों पर टी... Read more
clicks 298 View   Vote 0 Like   12:45pm 28 May 2013 #सम्मान
Blogger: संतोष त्रिवेदी
ब्लॉग-जगत से मेरी अनियमितता लगातार जारी है.इस बात को मैं काफ़ी समय पहले पहचान गया था.जब से टेढ़ी उँगली   के चक्कर में पड़ा,सीधा लेखन बंद-सा हो गया.हाँ,इस बीच फेसबुकवा में ज़रूर डुबकी लगाना जारी रहा,पता नहीं ससुर उससे कब निजात मिलेगी.इस व्यस्तता के चलते हम ब्लॉग-पोस्टों पर टी... Read more
clicks 223 View   Vote 0 Like   12:45pm 28 May 2013 #सम्मान
Blogger: संतोष त्रिवेदी
(१) सुख और दुःखऐसा वक्त कब आएगा जब हम खुशी मेंबचे रहेंगे सरल और दर्द में अविकल न खुशी में चहकेंगे और  न ही दुःख में होंगे विह्वल क्या हमारे जीते जी ऐसा वक्त आएगा जब हम चीजों को एक नज़र से देखने लगेंगे ?                                                         (२ )  कवि बनना स्थगित कर दिया ... Read more
clicks 295 View   Vote 0 Like   12:43pm 13 May 2013 #क्षणिकाएं
Blogger: संतोष त्रिवेदी
दिल्ली का मौसम बदला है।आदम से शैतान भला है।। तुमने अपना तीर चलाया।अब तक कितनी बार छला है। खुले-आम घूमते शिकारी।अपनों से हारी अबला है।। ये मौसम भी बदलेगा अब।घटा घिरी है,पवन चला है।। जाने सब कुछ,फ़िर भी नादाँ।कच्ची उमर ,जुर्म पहला है।। हम कुछ समझ नहीं पाते।नए ज़माने का म... Read more
clicks 293 View   Vote 0 Like   3:49am 26 Apr 2013 #गज़ल
Blogger: संतोष त्रिवेदी
गरम हवा अगिया रही,बरस रहे अंगार !चैत महीना हाल यह,आगे हाहाकार !!(१)सूरज हमसे दूर हो,चंदा आए पास !पंछी पानी ढूँढते,नहीं बुझाती प्यास !!(२)पकी फसल को चूमता,हँसिया लिए किसान !माथे पर चिंता लदी,बिटिया हुई जवान !!(३)सोना गिरे बजार में,हरिया मुख-मुस्कान !गेहूँ सोना ही लगे ,जब  आए खलिह... Read more
clicks 300 View   Vote 0 Like   2:12pm 18 Apr 2013 #गर्मी
Blogger: संतोष त्रिवेदी
 हम फ़िलहाल घनी फुरसत में हैं,तो सोचा कि थोड़ा मौजिया लिया जाए। मौज लेने का सबसे ताज़ा मौका ई ज़र्मनी वाला डायचे-वेले दे रहा है। पता नहीं ऊ वेला है या वो समझता है कि हम ही वेल्ले हैं ? फ़ोकट में ही ऐसा प्रोग्राम बनाया है कि उसकी साईट पे रोज़ हम हिट करते रहें ,इससे और कोई हिट हो न हो,... Read more
clicks 313 View   Vote 0 Like   11:45pm 10 Apr 2013 #डायचे-वेले
Blogger: संतोष त्रिवेदी
परिकल्पना-पुरस्कारों के बाद अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर इस समय डायचे-वेले ने श्रेष्ठ ब्लॉगर नामित करने का अभियान चलाया हुआ है.जिन मुद्दों को लेकर परिकल्पना की आलोचना की गई थी,वे इसमें भी मौजूद हैं.सबसे ज़्यादा आपत्तिजनक बात 'नारी'  ब्लॉग के नामांकन को लेकर है.इसे सामूहि... Read more
clicks 361 View   Vote 0 Like   3:30am 9 Apr 2013 #ब्लॉग
Blogger: संतोष त्रिवेदी
कुण्डलियाँफागुन गच्चा दे रहा,रंग रहे भरमाय।आँगन में तुलसी झरे,आम रहे बौराय।।आम रहे बौराय,नदी-नाले सब उमड़े।सुखिया रहा सुखाय,रंग चेहरे का बिगड़े।। सजनी खम्भा-ओट , निहारे फिर-फिर पाहुन।अपना होकर काट रहा ये बैरी फागुन।।(१)होली में देकर दगा,गई हसीना भाग ,पिचकारी खाली हुई ,न... Read more
clicks 233 View   Vote 0 Like   3:08pm 23 Mar 2013 #कुण्डलियाँ
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