POPULAR ENGLISH+ SIGNUP LOGIN

Blog: Sarasach.com

Blogger: www.sarasach.com
मांग करने लायककुछ नहीं बचामेरे अंदरना ख्याल , ना हीकोई जज्बातबस ख़ामोशी हैहर तरफ अथाह ख़ामोशीवो शांत हैंवहाँ ऊपरआकाश के मौन मेंफिर भी आंधी, बारिशधूप ,छाँव  मेंअहसास करता हैखुद के होने काउसके होने पर भीनहीं सुन पाती मैंवो मौन ध्वनिआँधी में उड़तेउन पत्तों में भी नहीं... Read more
clicks 218 View   Vote 0 Like   8:47am 1 Jul 2013 #साहित्य
Blogger: www.sarasach.com
स्त्री होने का दर्दकसिटता हैकचोटता है मन के भीतरअनगिनत तारों कोवो रो नहीं सकतीकुछ कह नहीं सकतीबाहर निकली तोमर्यादा का डर ,सबसे ज्यादा घर से मिलेसंस्कारों का डरतो कभीआलोचना का डर ,नियमों का डर ,कायदों का डरजो गिर देता हैं आत्मविश्वासफिर भी हँसती हैवो छटपटाती है औरअपन... Read more
clicks 190 View   Vote 0 Like   8:10am 30 Jun 2013 #विचार मंच
Blogger: www.sarasach.com
मैं लम्बे समय से दाम्पत्य सलाहकार के रूप में जरूरतमंदों को अपनी सेवाएँ प्रदान करता रहा हूँ। जिससे प्राप्त अनुभवों को मैं विभिन्न सन्दर्भों में व्यक्त करता रहता हूँ! इसी कड़ी में यहाँ कुछ विचार व्यक्त हैं:- हमारे देश में आदिकाल से सतीत्व को स्त्री का आभूषण माना जाता ... Read more
clicks 188 View   Vote 0 Like   11:27am 29 Jun 2013 #विचार मंच
Blogger: www.sarasach.com
तू क्या हैं /?? क्या होना चाहता था अभी !इंसान के बोलने से पहले इश्वर खेल खेल गया~~कैसे तेल का दिया जलाऊ अपने आँगन मेंउनके घर का तो चिराग ही बुझ गया~~अभी तक सिर्फ पठारों में जीते थे हमअब तो सीने पर ही पत्थर रख दिया~~रोती हुए आवाज़े सिसकियो मैं बदल रही हैंलोग कहते हैं उसने अब सब्... Read more
clicks 155 View   Vote 0 Like   3:08pm 28 Jun 2013 #साहित्य
Blogger: www.sarasach.com
आवाज़ जोधरती से आकाश तकसुनी नहीं जातीवो अंतहीन मौन आवाज़हवा के साथ पत्तियोंकी सरसराहट मेंबस महसूस होती हैपर्वतों को लांघकरसीमाएं पार कर जाती हैंउस पर चर्चायें की जाती हैंपर रात के सन्नाटे मेंवो आवाज़ सुनी नहीं जातीदबा दी जाती हैसुबह होने परघायल परिंदे कीअंतिम सा... Read more
clicks 185 View   Vote 0 Like   10:00am 26 Jun 2013 #साहित्य
Blogger: www.sarasach.com
जब अन्याय और अत्याचार चर्म परपहुँचता है तो नक्सलवाद जन्मता है! महाराष्ट्र के एक गॉंव में एक आततायी द्वारा कई दर्जन महिलाओं के साथ जबरन बलात्कार किया जाता रहा। पुलिस कुछ करने के बजाय बलात्कारी का समर्थन करती रही। अन्तत: एक दिन सारे गॉंव की महिलाओं ने मिलकर उस बलात्कार... Read more
clicks 190 View   Vote 0 Like   9:45am 24 Jun 2013 #विचार मंच
Blogger: www.sarasach.com
एक पूरी की पूरी स्पेशल ट्रेन को रेलवे की भाषा में सेलून कहते हैं। बिटीश जमाने में अंग्रेज अधिकारी इसमें सफर किया करते थे। आज भी रेल मंत्री , रेल राज्य मंत्री , रेल महाप्रबंधक व रेलवे बोर्ड के अधिकारी इसमें यात्रा करते देखे जाते थे। ऐसे ही र्बिटेन में एक सनकी व्यक्ति ने ... Read more
clicks 197 View   Vote 0 Like   10:39am 22 Jun 2013 #देश-विदेश
Blogger: www.sarasach.com
तुम स्त्री हो!माँ !तुम दुनिया की सबसे सुंदर स्त्री होऔर तुमसे ही मैं हूँयह मैंने कब कहालेकिन फिर भी पत्नी ने सुन लियाहे मेरी प्राण प्रिये!दिल से कहते -सुनते हुए भीमुखर होयह मैंने कब कहाकिसी अपरिणीता कोलेकिन फिर भी माँ ने सुन लियाहे स्त्री!इसी तरह बेटी ,बहिन ,बहू,दादी ,बु... Read more
clicks 189 View   Vote 0 Like   12:19pm 21 Jun 2013 #साहित्य
Blogger: www.sarasach.com
जो भी हो देश के सामने ये बात स्पष्ट हो गयी कि राजनीति में अब न तो नैतिक मुद्दे कोई मायने रखते हैं और न हीं बड़े राजनेता। यदि कुछ बड़ा है तो वह है-एक मात्र ‘‘सत्ता’’ पाना। जिसके लिये कभी भी और किसी भी किसी भी सिद्धान्त को तिलांजलि दी जा सकती है। ये भाजपा ही नहीं हर पार्टी मे... Read more
clicks 187 View   Vote 0 Like   11:14am 21 Jun 2013 #देश-विदेश
Blogger: www.sarasach.com
यारों इस बरसतो गर्मी खूब हैइसी लिए अपनेदिमागी की बत्तीएकदम फ्यूज हैकशमकश मेंअपनी ज़िन्दगी हैदिल का करेंवो भी कन्फूज हैकनेक्ट करने कीजो कोशिश कीहर कनेक्शन काफ्यूज भी लूज़ हैआलम अब तोज़िन्दगी का जे है कीअपनों के साथ भीडिस-कनेक्शनहो रहा हैकहीं भी कुछ भीक्लिक नहीं हो ... Read more
clicks 176 View   Vote 0 Like   11:30am 20 Jun 2013 #साहित्य
Blogger: www.sarasach.com
खुरचे हुए शब्दनाखूनों से , दांतो सेऔर निगाहों सेबेजान हैं जान नहीं बचीवो अंडे भी तो टूट चुके हैंउस घोंसले में बेवक़्तऔर ढो रहा है भारवो घोंसलाउन टूटे अंडों काऔर तब से अब तक उसमेंकोई नया अंडा नहीं जन्माकहीं खुरच तो नहीं गया ??वो घोंसला भीशब्दों की तरहये शब्द तो पढे नहीं ... Read more
clicks 198 View   Vote 0 Like   9:16am 20 Jun 2013 #समाज
Blogger: www.sarasach.com
मित्रों, पितृ दिवस पर कितने ही लोगों ने लिख डाला है। पाश्चात्य का एक और प्रभाव लोगों के दिलो दिमाग पर राज करने लगा है। क्या पिता को मनाने के लिए किसी खास दिन की जरुरत होती है? यह नई सोच पता नहीं कहां से उपजी है। हमारे ग्रंथ एवं विद्वानों का मानना है कि माता धरती के समान है, ... Read more
clicks 205 View   Vote 0 Like   9:04am 19 Jun 2013 #विचार मंच
Blogger: www.sarasach.com
 एक छाँव का छाता                        कड़ी धूप से बचाताएक प्रबल सबल                       प्राय: दोनो हाथ लुटाताएक पर्वत अचल                       अडिग साहस जगाताएक चमकीला सूर्य                       रोशनी का अंबार लगाताएक अनंत आकाश                       ऊँचाई की राह बताताएक कठोर शिला                       नाजुक क्षणो... Read more
clicks 182 View   Vote 0 Like   12:21pm 17 Jun 2013 #साहित्य
Blogger: www.sarasach.com
कब तक बदहवास मेंचलती रहोगीएक ही धूरी सेएक ही रेखा परधागे भी टूट जाते हैंसीधा खींचते रहने परअंधेरा नहीं हैतो पैर नहीं डगमगायेंगेपर ये धूरी बदल रही हैसीधी ना होकर गोल हो गयी हैतुम्हारी चाल के अनुरुपउसी दिशा में प्रत्यक्षतुम्हारी धूरी  परबस मैं ही खडा हूँ । -दीप्ति शर्... Read more
clicks 209 View   Vote 0 Like   7:03am 12 Jun 2013 #साहित्य
Blogger: www.sarasach.com
इस समतल पर पॉव रखवो चल दी है आकाश की ओरहवाओं का झूला औरघाम का संचय करशाम के बादलों से निमित्त रास्ते सेअपने गूंगेपन के साथवो टहनियों में बांधकरआंसूओं की पोटली ले जा रही हैटटोलकर कुछ बादलों कोवो सौंप देगी ये पोटलीफिर चली आयेगी उसी राह सेफडफडाती आंखों की चमक के साथइसी उ... Read more
clicks 204 View   Vote 0 Like   2:57pm 10 Jun 2013 #साहित्य
Blogger: www.sarasach.com
मेरे ब्लॉग के पिछले पोस्ट पर मेरे एक बेटे का कहना था कि कहानी के पात्र को बदल दिया जाये तो पुरुष की जगह महिला होगी सज़ा की हकद्दार ….उन्हे कहना चाहती हूँ …. किसी भी ऐसी घटना में दोषी दोनों होते हैं , बराबर के …. क्यूँकि ऐसी किसी वारदात तो दोनों के शामिल होने से ही घटित होती ह... Read more
clicks 197 View   Vote 0 Like   12:14pm 8 Jun 2013 #साहित्य
Blogger: www.sarasach.com
 ध्यान(योग)की सारी विधियाँ जागरण की विधियाँ ही होती हैं ….कैसे भी हो बस जाग जाना है ….कोई अलार्म लगा कर जाग जाता है … कोई पड़ोसी से कह देता है कि द्वार पर दस्तक दे दे कर जगा दे ….कोई अपने घर के ही अन्य सदस्य को कह देता है कि आँख पर ठंढे पानी की छीटें मार-मार कर जगा दे ….और जिसे ... Read more
clicks 220 View   Vote 0 Like   8:39am 3 Jun 2013 #साहित्य
Blogger: www.sarasach.com
एक पत्नी जब भी अपने पति का mobile छूती …. उसके पति झपाटा मार कर mobile छिन लेते और अक्सर डांट पड़ती पत्नी को कि वो पति का mobile ना छूए …. किसी का फोन आए तो वह फोन ना उठाए …. ऐसा मौका कम ही मिलता …. जब कभी वो mobile छूए और उसके पति आस-पास ना हों …. लेकिन पत्नी को भी ,पति का फोन छूना – देखना अपना हक़ स... Read more
clicks 218 View   Vote 0 Like   10:26am 1 Jun 2013 #समाज
Blogger: www.sarasach.com
रामायण में एक प्रसंग है कि राम जब वनवास में थे और एक बार नदी पार करने के क्रम में मल्लाह उनके पैर धो कर नाव में चढ़ने का अनुरोध करता है ,क्यों कि राम जी पैर के धूल लगने से पत्थर भी औरत हो गई थी ….खैर ….प्रश्न उठता है कि दूसरी स्त्री क्यों किसी विवाहित पुरुष को चुनती है ?इसके क... Read more
clicks 241 View   Vote 0 Like   2:02pm 31 May 2013 #साहित्य
Blogger: www.sarasach.com
दिल लगे तब दुःख होता हैदुःख होता है तो तू रोता हैजो रोता है तो चैन से सोता हैसोता है तो सपनो में खोता हैबातें जो तप चुकी दिन मेंशब्द जो पक चुके मन मेंअब सपनो में दिख जाते हैसियाह रात में बहे जाते हैबाल सफ़ेद हो गए तेरेकाले अनुभवों के लिए घेरेकब तक तू यह सह पायेगा  ?क्या आं... Read more
clicks 170 View   Vote 0 Like   6:11pm 29 May 2013 #साहित्य
Blogger: www.sarasach.com
(डॉ. नीरज भारद्वाज) 21वीं सदी के भारत में विकास को लेकर बहुत सारी बातें हो रही है। 21वीं सदी को लोग सूचना, विज्ञान, प्रौद्योगिकी आदि की सदी भी कह रहे हैं। इतना ही नहीं लोग चारों ओर अपने लाभ तथा विकास की बातें कर रहे हैं। सरकारें विकास के नाम पर वाह-वाई लूट रही हैं। लेकिन विकास... Read more
clicks 228 View   Vote 0 Like   7:09am 24 May 2013 #समाज
Blogger: www.sarasach.com
कल मोनू रास्ते में मिला और मुझसे पूछा, कि भैया पुलिस में भर्ती होना चाहता हूँ. मैंने कहा अच्छी बात है तैयारी करो. उसने पूछा कि पुलिस में भर्ती होने के लिए क्या-क्या करना पड़ेगा? मैंने उससे बोला कि वह इस बारे में अपने पिता से क्यों नहीं पूछता, तो वह बोला, “ पिता जी पूछा था, ले... Read more
clicks 207 View   Vote 0 Like   12:51pm 21 May 2013 #विचार मंच
Blogger: www.sarasach.com
परिवार ,समाज की एक इकाई अंग है ….. परिवार , हर इन्सान की जन्म-से मृत्यु तक की जरुरत है …. जैसा परिवार ,वैसा उस परिवार में रहने वाले इन्सान का व्यक्तित्व  होता है …..घर में दिया न जलाया और मंदिर में दिया जलाने पहुँच गए तो वो कुबूल नहीं होता है …परिवार की ही बात करनी है ….. क्यूँ न... Read more
clicks 222 View   Vote 0 Like   7:00am 20 May 2013 #समाज
Blogger: www.sarasach.com
 बृहत् प्रामाणिक हिंदी कोश की समीक्षारिपोर्टः- शीर्षकः- बृहत् प्रामाणिक हिन्दी कोश। प्रकाशनः- लोकभारती प्रकाशन, दरबारी बिल्डिंग, एम. जी. रोड़, इलाहाबाद।मूल संपादकः- आचार्य रामचन्द्र वर्मा।संशोधन-परिवर्धनः- डॉ. बदरीनाथ कपूर।पृष्ठ संख्याः- 1088.शब्द संख्याः- लगभग 49000.शब... Read more
clicks 169 View   Vote 0 Like   11:01am 19 May 2013 #विचार मंच
Blogger: www.sarasach.com
वर्तमान समय में शिक्षक को लेकर बहुत सारे नए मत और विचार उभर कर आ रहे है। उन विचारों तथा विषयों पर चर्चा, परिचर्चा आदि भी हो रही है। लेकिन इन सब बातों से दूर एक विचार यह भी है कि शिक्षक राष्ट्र का निर्माता होता है। इस विचार से यह स्पष्ट होता है कि एक शिक्षक अपने पूरे जीवन का... Read more
clicks 270 View   Vote 0 Like   7:12am 16 May 2013 #समाज
[ Prev Page ] [ Next Page ]


Members Login

Email ID:
Password:
        New User? SIGN UP
  Forget Password? Click here!
Share:
  • Latest
  • Week
  • Month
  • Year
  हमारीवाणी.कॉम पर ब्लॉग पंजीकृत करने की विधि बहुत सरल हैं। इसके लिए सबसे पहले प्रष्ट के सबसे ऊपर दाईं ओर लिखे ...
  हमारीवाणी पर ब्लॉग-पोस्ट के प्रकाशन के लिए 'क्लिक कोड' ब्लॉग पर लगाना आवश्यक है। इसके लिए पहले लोगिन करें, लोगिन के उपरांत खुलने वाले प...
और सन्देश...
कुल ब्लॉग्स (3916) कुल पोस्ट (192559)