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प्रारंभ से पढें कुकुर कोटना से आगे बढ़ने पर मुझे सूखी हुई वह घास दिखाई दी, जिसे मेले ठेले में लोग संजीवनी बूटी कह कर बेचते हैं। यह सूखी घास पानी में डालने पर फ़िर से हरी हो जाती है। रामकुमार ने बताया कि इसे भठेलिया (लाल खरगोश) चारा कहते हैं, यह भठेलियों का भोजन है।  भालुओं क...
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Tag :छत्तीसगढ़
  December 22, 2016, 4:30 am
प्रारंभ से पढें चलते-चलते बन्नु सिंह अपनी कथा कहता जा रहा था "मुझसे धनी कोई नहीं है, ये पत्थर देखो। एक-एक पत्थर कितना मंहगा है। ये पेड़ देखो, जिसे दीमक खा रही है, यह कितना मूल्यवान है। जंगल वाले ही सारा जंगल काट कर ले गए। अब तो जलाऊ के लायक भी लकड़ी नहीं दिखाई देती।  बन्नु सि...
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Tag :छत्तीसगढ़
  December 21, 2016, 4:30 am
प्रारंभ से पढें,  भालु खांचा से आगे बढने पर घना जंगल प्रारंभ हो जाता है, पेड़ों पर लटकती लताओं की बेलें मोटी हो जाती हैं। दीमक की बांबियाँ आठ-दस फ़ुट ऊंची हो जाती हैं। इन बांबियों में सांपों का बसेरा रहता है और भालू भी इनके आस पास दीमकों की तलाश में पहुंचते हैं।  पदयात्रा ...
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Tag :छत्तीसगढ़
  December 20, 2016, 4:30 am
प्रारम्भ से पढ़ें  कंकालीन मंदिर में पक्का हाल भी बना हुआ है, वहाँ रात काटने के लिए हमने रामकुमार से चर्चा की तो वह हमें स्थान देने के लिए तैयार हो गया और एक दरी हमारे सोने के लिए भी बिछा दी। रात बातचीत करते हुए सुबह का कार्यक्रम बनाते हुए गहरी होती गई।  सफ़र का साथी पोयाम ...
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Tag :छत्तीसगढ़
  December 19, 2016, 4:30 am
वनांचल के निवासी निरंतर प्रकृति से जुड़े रहते हैं, नदी, पर्वत, वन एवं वन्य पशुओं के साथ अपनी संस्कृति एवं परम्पराओं के पोषक होते हैं। शुद्ध वायु के साथ हरियाली सेहत को बनाए रखती है। शहर का व्यक्ति भी प्रकृति से जुड़ना चाहता है, उसे देखना, समझना एवं परखना चाहता है, परन्तु जी...
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Tag :यात्रा वृतांत
  December 18, 2016, 4:30 am
धरती के सभी प्राणियों का जीवन कठिनाईयों से भरा है। जीवन जीने के लिए नाना प्रकार के उद्यम सभी को करने पड़ते हैं। शास्त्रोक्त जरायुज, अंडज, स्वेदज एवं उद्भिज जातियाँ धरा पर हैं, इनमें मानव ही एकमात्र बुद्धिमान योनि मानी गई है, जिसका सभी प्राणियों से अलग जीवन अपनी संस्कृत...
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Tag :यात्रा वृतांत
  December 15, 2016, 4:00 am
रायपुर से 70 किमी की दूरी पर फ़िंगेश्वर कस्बे में त्रिआयतन शैली का प्राचीन शिवालय है। त्रिआयतन से तात्पर्य है कि तीन गर्भगृह और संयुक्त मंडप। इन तीन गर्भ गृहों में मुख्य में फ़णीकेश्वर महादेव विराजे हैं और द्वितीय में शंख, गदा, पद्म चक्रधारी विष्णु स्थानक मुद्रा में हैं...
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Tag :पुरातत्व
  September 30, 2016, 4:30 am
कभी आप वनों में उबड़-खाबड़ पथरीले रास्तो के साथ बहती किसी अल्हड़ सी नदी के साथ-साथ चले हैं? नहीं न। फ़िर आज चलते हैं प्राकृतिक सुषमा के बीचे वनों से आच्छादित भूधरा पर प्रवाहित सलिला खारुन नदी के साथ उसके उद्गम के सफ़र पर।  कंकालिन मंदिर पेटेचुवा खारुन नदी रायपुर शहर की जीवन...
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Tag :छत्तीसगढ़
  September 26, 2016, 4:00 am
राजधानी रायपुर से 352 किलोमीटर अम्बिकापुर एवं अम्बिकापुर से 45 किलोमीटर छत्तीसगढ़ का शिमला एवं निर्वासित तिब्बतियों की शरण स्थली मैनपाट स्थित है।  मैनपाट के ग्राम कमलेश्वरपुर के इर्द गिर्द शरणार्थी तिब्बतियों के कैम्प हैं। यहीं पर पर्यटन विभाग के शैला रिसोर्ट से लगभ...
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Tag :मैनपाट
  September 9, 2016, 4:00 am
नगर में मीना बाज़ार लगा हुआ है, सांझ होते ही उदय भैया का मन मीना बाजार घूमने का करता है। यहाँ  मनोरंजन के कई साधन जुटाए गए  हैं। जिसमें कई तरह के झुले, मौत का कुंआ, नाचने वाली सोलह साल की नागिन के साथ खिलौनों, टिकुली फ़ुंदरी की दुकान एवं  खाने के लिए चाट पकौड़ी की दुकाने भी लगी ...
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Tag :मीना बाज़ार
  September 8, 2016, 4:00 am
सरगुजा भ्रमण के दौरान सुरजपुर जिले के प्रतापपुर के प्राचीन मंदिरों का छायांकन किया। यहाँ राजा के बनवाए हुए कई मंदिर हैं जो सतत पूजित हैं। साथी अजय चतुर्वेदी एक स्थान पर मुझे ले गए जो अम्बिकापुर रोड़ पर एक रिहायशी मकान के पीछे था।  यहाँ चबूतरे पर गोल पाषाण की एक चट्टान ...
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Tag :बलोचिस्तान
  September 7, 2016, 4:00 am
छत्तीसगढ़ के प्रसिद्ध 7वीं शताब्दी ईस्वीं में ईष्टिका निर्मित मंदिर (लक्ष्मण मंदिर) का निर्माण महारानी (राजमाता) वासटा ने करवाया था। मंदिर निर्माण एवं उसकी व्यवस्था को लेकर एक शिलालेख खंडित मंदिर का मलबा साफ़ करते हुए प्राप्त हुआ था।  महाशिवगुप्त बालार्जुन की माता वा...
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Tag :पर्यटन
  September 6, 2016, 4:45 am
मंदिरों में देवी-देवताओं के अतिरिक्त ग्राम्य जीवन की झांकी भी शिल्पांकित की जाती थी। जिससे पता चलता था कि उस काल का रहन सहन एवं पहनावा किस तरह का है।  वाण वंश के राजा विक्रमादित्य द्वारा 870-900 ईंस्वीं में निर्मित पाली जिला कोरबा छत्तीसगढ़ के शिवालय में करदर्पण देख कर मां...
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Tag :पाली
  September 5, 2016, 4:40 am
तीवरदेव विहार सिरपुर छत्तीसगढ़ की द्वार शाखा का शिल्पांकन नयनाभिराम है, इस पर इतने सारे रचना शिल्प अंकित किए गए हैं कि द्वार शाखा के शिल्प का बखान करते हुए ही एक किताब लिखी जा सकती है। जिसमें जातक कथाओं से लेकर पशुमैथुन तक को विषय बनाया गया है।  शिल्पकार शास्त्र विधान ...
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Tag :आलिंगन भेद
  September 3, 2016, 4:35 am
छत्तीसगढ अंचल में जैन धर्मावलंबियों का निवास प्राचीन काल से ही रहा है। अनेक स्थानों पर जैन मंदिर एवं उत्खनन में तीर्थंकरों की प्रतिमाएं प्राप्त होती हैं।  सरगुजा के रामगढ़ की गुफ़ा जोगीमाड़ा के भित्ति चित्रों से लेकर बस्तर तक जैन उपस्थिति दर्ज होती है। चित्र में दिखा...
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Tag :छत्तीसगढ़
  September 2, 2016, 4:24 am
विश्व हिन्दी सम्मेलन के बाद 13 सितम्बर 2015 को सांची होते हुए उदयगिरि जाना हुआ। उदयगिरि विदिशा से वैसनगर होते हुए भी पहुँचा जा सकता है। नदी से यह गिरि लगभग 1 मील की दूरी पर है। पहाड़ी के पूरब की तरफ पत्थरों को काटकर गुफाएँ बनाई गई हैं। इन गुफाओं में प्रस्तर- मूर्तियों के प्र...
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Tag :पर्यटन
  September 1, 2016, 4:11 am
अजंता (अजिंठा लेणी) की दूरी एलोरा से लगभग 101 किलोमीटर है, हम एलोरा से घाट चढ़ कर अजंता पहुंचे। जो एलोरा देखने जाता है वह अजंता भी पहुचता है। मेरी यह यात्रा 1994 के दौरान की है, और चित्र भी उसी समय के रोल कैमरे से खींचे गए हैं। यहाँ चट्टानों को काटकर बनाए गए बौद्ध गुफ़ा मंदिर व म...
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Tag :गुफ़ा
  August 31, 2016, 3:25 am
छत्तीसगढ़ प्रदेश का प्राकृतिक सौंदर्य अद्वितीय होने के साथ यहाँ का इतिहास भी उतना ही समृद्ध है। प्रदेश के सरगुजा अंचल हरित वनों, पर्वतों, नदियों का सौंदर्य रमणीय है। प्रत्येक स्थान पौराणिक इतिहास से भरा पुरा है और यहाँ सुरम्यता रमणीय है। रायपुर से हम इस अंचल के कैलाश ...
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Tag :गहिरा गुरु
  August 30, 2016, 3:23 am
भूली बिसरी यादों के पन्नों से एलोरा की कैलाश मंदिर गुफ़ा की आज याद आई। 1994 में मैने कुछ दिन अजंता एवं एलोरा की गुफ़ाएं देखने में बिताए थे। गजब का अनुभव था इन गुफ़ाओं को देखने का।  एलोरा की गुफ़ाएं तीन प्रकार की हैं 1 -महायानी बौद्ध गुफ़ाएँ, 2 - पौराणिक हिंदू गुफ़ाएँ, 3- दिगंबर जैन ...
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Tag :महाराष्ट्र
  August 29, 2016, 3:13 am
प्राचीन काल से छत्तीसगढ के वन हाथियों की आदर्श शरण स्थली रहे हैं। विशेषकर सरगुजा अंचल हाथियों के लिए प्रसिद्ध रहा है। मान्यता है कि इंद्र के एरावत जैसे सुंदर गजों के स्वर यहां के वनों में गूंजने के कारण इस अंचल का नाम सरगजा (surgaja) लोक प्रसिद्ध हुआ। यहां के हाथियों का दर्...
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Tag :रायगढ़
  August 28, 2016, 3:30 am
आरम्भ से पढ़ें  यात्रा की थकान काफ़ी हो गई थी, एक दिन आराम करने के बाद अगले दिन बैंगलोर भ्रमण का कार्यक्रम बनाया गया। बैंगलोर  काफ़ी बड़ा है और भीड़ भरी सड़कों पर ही सारा समय निकल जाता है। पर्यटन करने के लिए वैसे बैंगलोर  में बहुत कुछ है, परन्तु पर्यटन अपनी रुचि के हिसाब से हो...
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Tag :mud fort
  March 23, 2016, 4:30 am
आरम्भ से पढ़ें  बैंगलोर में हिन्दी ब्लॉगर बिरादरी भी रहती है, यह तो हम वर्षों से जानते थे और यहाँ पहुंचने के पूर्व भी ब्लॉगर मिलन का कार्यक्रम बन गया था। सोचा यह था कि एक दिन सभी किसी नियत स्थान पर एकत्रित हो जाएं तो सभी से मिलन हो सकता है। परन्तु हमारे प्रवास के दिनों में...
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Tag :गपशप
  March 21, 2016, 4:30 am
आरम्भ से पढ़ें  गोलकुंडा दर्शन करते हुए ग्यारह बज चुके थे, शहर से बाहर आते  हुए साढे ग्यारह बज गए। अब हमारी स्मार्ट कार बंगलोर के लिए हाईवे पर दौड़ रही थी। हमारी मंजिल यहाँ से 587 किमी थी और जीपीएस वाली बाई बता रही थी कि जिस गति से हम चल रहे हैं, लगातार उसी गति से चलते रहे तो  सा...
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Tag :पथकर
  March 20, 2016, 6:11 am
आरम्भ से पढ़ें  बारहदरी से थोड़ी दूर पर देवी का प्राचीन मंदिर है, इसके द्वार पर महाकाली मंदिर लिखा हुआ है। इसका नाम मदन्ना मंदिर है। अब्दुलहसन तानाशाह के एक मंत्री के नाम पर इसका नामकरण किया गया है। यहां महाकाली ग्रेनाईट की बड़ी चट्टानों के बीच विराजित हैं, जिन्हें अब पत...
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Tag :south india
  March 19, 2016, 4:00 am
आरम्भ से पढ़ें  सुबह हमने होटल छोड़ दिया और रात्रि कालीन सभा में गोलकुंडा भ्रमण के प्रस्ताव के अनुमोदन के पश्चात हमें गोलकुंडा किले के दर्शनार्थ जाना था। सुबह के साढे सात बज रहे थे। हैदराबाद में ट्रैफ़िक सुबह ही शुरु हो जाता है। हमारे होटल से गोलकुंडा तक हमें लगभग 20 किमी ...
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Tag :आंध्रप्रदेश
  March 18, 2016, 4:30 am
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