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अमरकंटक मेकलसुता रेवा का उद्गम स्थल है, यह पुण्य स्थली प्राचीन काल से ही ॠषि मुनियों की साधना स्थली रही है। वैदिक काल में महर्षि अगस्त्य के नेतृत्व में ‘यदु कबीला’ इस क्षेत्र में आकर बसा और यहीं से इस क्षेत्र में आर्यों का आगमन शुरू हुआ।  वैदिक ग्रंथों के अनुसार विश...
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Tag :इतिहास
  January 12, 2018, 4:00 am
छत्तीसगढ़ अंचल की प्राकृतिक सुंदरता का कोई सानी नहीं है। नदी, पर्वत, झरने, गुफ़ाएं-कंदराएं, वन्य प्राणी आदि के हम स्वयं को प्रकृति के समीप पाते हैं। अंचल के सरगुजा क्षेत्र पर प्रकृति की विशेष अनुकम्पा है, चारों तरफ़ हरितिमा के बीच प्राचीन स्थलों के साथ रमणीय वातावरण मनुष...
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Tag :पुरातत्व
  January 11, 2018, 4:30 am
अमरकंटक मेकलसुता रेवा का उद्गम स्थल है, यह पुण्य स्थली प्राचीन काल से ही ॠषि मुनियों की साधना स्थली रही है। वैदिक काल में महर्षि अगस्त्य के नेतृत्व में ‘यदु कबीला’ इस क्षेत्र में आकर बसा और यहीं से इस क्षेत्र में आर्यों का आगमन शुरू हुआ। वैदिक ग्रंथों के अनुसार विश्वा...
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Tag :कर्ण मंदिर
  January 10, 2018, 4:30 am
छत्तीसगढ़ के बालोद जिला मुख्यालय से लगभग दस किमी दूर दिसम्बर 2010 में एक गांव में कुम्हार परिवार से मिलने गया था। गांव का नाम भूल रहा हूँ। उस कुम्हार ने मिट्टी के भाण्डों को नवोन्मेष कर नया रुप दिया था।  उपरोक्त चित्र में दिख रहा मिट्टी का कूकर उसने तैयार किया था, जो धातु...
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Tag :लेख
  January 9, 2018, 4:30 am
चतुर शिल्पकार वही होता है जो निर्माण सामग्री व्यर्थ न होने दे। ऐसी ही कुछ शिल्पकार की चतुराई हमें हम्पी के विट्ठल मंदिर स्थित विष्णु रथ में दिखाई देती है। विष्णु रथ का निर्माण एकाश्म शिला की बजाय पृथक पृथक खंड में हुआ है। जैसे #काष्ठ रथ का निर्माण होता है उसी तरह प्रस्...
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Tag :हम्पी विष्णुरथ
  January 8, 2018, 4:30 am
मल्हार नगर छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले में अक्षांक्ष 21 90 उत्तर तथा देशांतर 82 20 पूर्व में 32 किलोमीटर की दूरी पर दक्षिण-पश्चिम में स्थित है। बिलासपुर से रायगढ़ जाने वाली सड़क पर 18 किलोमीटर दूर मस्तूरी है। मल्हार की मौर्यकालीन अद्भुत  विष्णु प्रतिमा  वहां से मल्हार, 14 कि. मी. द...
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Tag :मल्हार
  January 7, 2018, 3:30 am
पंख झाड़ चुका मोर, यह चित्र मध्य नवम्बर माह में पुष्कर राजस्थान के पास अजयपाल के मंदिर के समीप का है। इस समय मोर अपने सारे पंख झाड़ चुका था और नए पंख निकल रहे थे।  वैसे वर्ष में एक बार अगस्त माह के आस पास मोर अपने सारे पंख झाड़ देता है और ग्रीष्म काल आते तक उसके सारे पंख पुन: ...
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Tag :राष्ट्रीय पक्षी मोर
  January 6, 2018, 4:00 am
प्राचीन शिल्प में विश्राम हेतु बाजवट/खाट या शय्या प्रयोग दिखाई देता है। खाट या शय्या का मनुष्य के दैनिक जीवन में कब से प्रवेश हुआ, इसकी जानकारी तो स्पष्ट रुप से नहीं है, परन्तु शिल्पांकन में अवश्य दिखाई देती है।   खजुराहो के लक्ष्मण मंदिर की भित्ति शिल्पांकन में शय्य...
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Tag :शय्या खाट
  January 5, 2018, 4:00 am
प्राचीनकाल के मंदिरों की भित्ति में जड़ित प्रतिमाओं से तत्कालीन सामाजिक गतिविधियाँ एवं कार्य ज्ञात होते हैं। शिल्पकारों ने इन्हें प्रमुखता से उकेरा है। इन प्रतिमाओं से तत्कालीन समाज में स्त्रियों के कार्य, दिनचर्या एवं मनोरंजन के साधनों का भी पता चलता है।   कंदुक ...
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Tag :स्त्री मनोविनोद
  January 4, 2018, 4:30 am
शिकार द्वारा मनोरंजन वैदिक काल से समाज में विद्यमान रहा है एवं प्राचीन काल के मनोरंजन के साधनों का अंकन मंदिरों की भित्तियों में दिखाई देता है। मंदिरों की भित्तियों में अंकित प्रतिमाओं से ज्ञात होता है कि प्राचीन काल के समाज में किस तरह के मनोरंजन के साधन प्रचलित थे...
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Tag :पुरातत्व
  January 3, 2018, 3:30 am
सौंदर्य के प्रति मानव प्राचीन काल से ही सजग रहा है, देह के अलंकरण में उसने कोई कोर कसर नहीं छोड़ी एवं नख सिख से लेकर गुह्यांग तक अलंकरण करने के लिए नवोन्मेष किए। सौंदर्य वृद्धि के लिए किए गए भिन्न भिन्न अलंकरण हमें तत्कालीन प्रतिमा शिल्प में दिखाई देते हैं।   क्या मुखड़...
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Tag :पुरातत्व
  January 2, 2018, 4:00 am
अरसे से मृतप्राय ब्लॉगजगत को एक बार पुनः जीवन देने का आह्वान पुराने ब्लॉगरों ने फेसबुक के माध्यम से किया। इस आह्वान पर कुछ ब्लॉगरों ने ध्यान दिया और एक जुलाई को पोस्ट भी लगाकर श्रीगणेश भी किया। मेरे व्यक्तिगत संकलक के हिसाब से चौबीस घंटों में 70 ब्लॉग अपडेट भी हुए। कु...
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Tag :हिन्दी ब्लॉग
  January 1, 2018, 4:30 am
तीखे तीखे नयन…। नायिका के नयनों की सुंदरता का वर्णन करते हुए कवियों ने खूब कागज काले किए एवं इन्हें विभिन्न उपमाओं से विभुषित किया। आँखे ही वह रास्ता है, जहाँ से कामदेव का प्रवेश हृदय में होता है और रोम रोम रोमांचित हो जाता है, लग जाती है लगन। कवि बिहारीे सुंदरियों के ऐ...
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Tag :पुरातत्व
  December 30, 2017, 5:30 am
खजुराहो के विश्वनाथ मंदिर में शिल्पकार ने स्त्री के पैर के तलुए में गड़ी शूल देखते एवं उसे निकालते हुए चिकित्सक का प्रदर्शन किया है। यह इस मंदिर का महत्वपूर्ण शिल्प है। घर-बार दैनिक जीवन में कार्य करते हुए शूल गड़ना सहज बात है, परन्तुं वह शूल किसी कोमलांगी को गड़ जाए तो उस...
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Tag :पुरात्त्व
  December 29, 2017, 5:30 am
वन मुर्गा जंगल सफ़ारी के दौरान कई बार दिखाई देता है, परन्तु आहट सुनकर जल्दी ही झाड़ियों में गायब हो जाता है। राजा जी नेशनल पार्क चिल्ला रेंज में दिखाई दिया और इसने फ़ोटो लेने का भरपूर अवसर भी दिया। अपने रंगों के प्रभाव के कारण यह बहुत सुंदर दिखाई देता है। वन मुर्गी धूसर रं...
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Tag :वन्य जीवन
  December 28, 2017, 9:49 am
बुंदेलखंड के दो प्राचीन नगर हैं, ओरछा एवं गढकुंढार। गढ कुंढार तो नहीं देख सके पर गत वर्ष पहाड़ों से लौटते हुए ओरछा जाना हुआ और इस वर्ष भी पहाड़ों से लौटते हुए ओरछा पहुंच गए। वैसे तो ओरछा का इतिहास 8 वीं सदी से प्रारंभ होता है, परन्तु यहां रौनक बुंदेलाओं के कार्यकाल में आई ए...
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Tag :गढकुंढार
  December 27, 2017, 4:00 am
सद्यस्नाता नाभिदर्शना का खजुराहो के मंदिर शिल्पकला में अनुपम प्रदर्शन हैं। वह एक दौर था जब प्रतिमा शिल्प में देह सौष्ठव, वस्त्रादि अलंकरण एवं लावण्यता का विशेष ध्यान रखा जाता था।   मंदिर की भित्तियों पर दिनचर्या का विशेष तौर पर अंकन किया गया है। जिसमें स्नानोपरा...
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Tag :सद्यस्नाता नाभिदर्शना
  December 26, 2017, 5:30 am
वर्तमान में जल संकट का सामना ग्रामीण क्षेत्रों से लेकर शहरों तक मनुष्य को करना पड़ रहा है। नदियाँ सूख रही हैं, कूप एवं तालाब सूख जाते हैं, बांधों में जल का स्तर कम हो जाता है, घर घर में बोरवेल के कारण भूजल का स्तर भी रसातल तक पहुंच रहा है। जहाँ दस हाथ की खुदाई से जल निकल आता थ...
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Tag :लेख
  December 25, 2017, 4:30 am
छत्तीसगढ़ के राजनांदगाँव जिले के गंडई ग्राम में फणी नागवंशीकालीन 13 वीं शताब्दी का प्रस्तर निर्मित शिवालय है। इसकी बाह्य भित्तियों में प्रतिमा अलंकरण है। भित्तियों में विभिन्न पौराणिक प्रसंगों को लेकर बनाई गयी प्रतिमाएँ जड़ी हुई हैं। मोबाईल पर बात करती स्त्री  इ...
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Tag :मोबाईल
  December 24, 2017, 3:30 am
सांप और नेवले की कहानी महाभारत से लेकर हितोपदेश तक उपलब्ध होती है। बचपन में सांप एवं नेवले की लड़ाई खूब देखी परन्तु वर्तमान में वन्य प्राणी कानून होने के बाद सांप एवं नेवले की लड़ाई दिखाने वाले दिखाई नहीं देते।  नारायणपुर (कसडोल-छत्तीसगढ़) के मंदिर की भित्ति में सांप एव...
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Tag :सांप नेवला
  December 23, 2017, 4:00 am
प्रारंभ से पढें कुकुर कोटना से आगे बढ़ने पर मुझे सूखी हुई वह घास दिखाई दी, जिसे मेले ठेले में लोग संजीवनी बूटी कह कर बेचते हैं। यह सूखी घास पानी में डालने पर फ़िर से हरी हो जाती है। रामकुमार ने बताया कि इसे भठेलिया (लाल खरगोश) चारा कहते हैं, यह भठेलियों का भोजन है।  भालुओं क...
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Tag :छत्तीसगढ़
  December 22, 2016, 4:30 am
प्रारंभ से पढें चलते-चलते बन्नु सिंह अपनी कथा कहता जा रहा था "मुझसे धनी कोई नहीं है, ये पत्थर देखो। एक-एक पत्थर कितना मंहगा है। ये पेड़ देखो, जिसे दीमक खा रही है, यह कितना मूल्यवान है। जंगल वाले ही सारा जंगल काट कर ले गए। अब तो जलाऊ के लायक भी लकड़ी नहीं दिखाई देती।  बन्नु सि...
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Tag :छत्तीसगढ़
  December 21, 2016, 4:30 am
प्रारंभ से पढें,  भालु खांचा से आगे बढने पर घना जंगल प्रारंभ हो जाता है, पेड़ों पर लटकती लताओं की बेलें मोटी हो जाती हैं। दीमक की बांबियाँ आठ-दस फ़ुट ऊंची हो जाती हैं। इन बांबियों में सांपों का बसेरा रहता है और भालू भी इनके आस पास दीमकों की तलाश में पहुंचते हैं।  पदयात्रा ...
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Tag :छत्तीसगढ़
  December 20, 2016, 4:30 am
प्रारम्भ से पढ़ें  कंकालीन मंदिर में पक्का हाल भी बना हुआ है, वहाँ रात काटने के लिए हमने रामकुमार से चर्चा की तो वह हमें स्थान देने के लिए तैयार हो गया और एक दरी हमारे सोने के लिए भी बिछा दी। रात बातचीत करते हुए सुबह का कार्यक्रम बनाते हुए गहरी होती गई।  सफ़र का साथी पोयाम ...
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Tag :छत्तीसगढ़
  December 19, 2016, 4:30 am
वनांचल के निवासी निरंतर प्रकृति से जुड़े रहते हैं, नदी, पर्वत, वन एवं वन्य पशुओं के साथ अपनी संस्कृति एवं परम्पराओं के पोषक होते हैं। शुद्ध वायु के साथ हरियाली सेहत को बनाए रखती है। शहर का व्यक्ति भी प्रकृति से जुड़ना चाहता है, उसे देखना, समझना एवं परखना चाहता है, परन्तु जी...
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Tag :यात्रा वृतांत
  December 18, 2016, 4:30 am
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