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रविकर की कुण्डलियाँ

विवेचना विस्तृत करे, हिन्दु सनातन धर्म |अणिमा महिमा सहित हैं, अष्ट सिद्धियां कर्म |अष्ट सिद्धियां कर्म, प्राप्तिका भारी गरिमा | है प्रकाम्य वैशित्व, बहुत ही हलकी लघिमा |फिर अंतर्मितित्व,  सिद्धि रविकर आलेखन |अंतिम है ईशित्व,  यही सम्पूर्ण विवेचन ||(१)हनुमत ...
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  February 3, 2016, 11:16 am
यादें मत विस्मृत करो, चाहे जैसा स्वाद |खट्टी-मीठी मस्त पर, दे कड़ुवी को दाद |दे कड़ुवी को दाद, इल्तिजा वो ठुकराये  |जाया की फरियाद, किन्तु कविता तो आये |कर, कविता कर याद, याद कर रविकर वादे |रहे सदा आबाद, बोल कर भाव नया दे  ||...
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  February 1, 2016, 11:51 am
रिश्ते तो रिसते रहे, बन बैठे नासूर |स्वार्थ सिद्ध होते गए, गए दूर अति दूर |गए दूर अति दूर, स्वयं को यूँ समझाया |वह तो अपना फर्ज, फर्ज था खूब निभाया |कर रविकर की बात, चुकाए अब भी किश्तें |अश्रु अर्ध्य हर रोज, हमेशा रिसते रिश्ते ||...
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  January 31, 2016, 12:15 pm
 हौले हौले हादसे, मित्र जाइये भूल। ईश्वर की मर्जी चले, करिये इसे कुबूल। करिये इसे कुबूल, सावधानी भी रखिये। दुर्घटना की मूल, चूक होने पे चखिए। कभी डाल मत हाथ, अगर रविकर जल खौले। हर गलती से सीख, सीख ले हौले हौले।।...
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  January 29, 2016, 10:13 am
उबले पानी क्रोध से, उड़े देह से भाप। कहाँ वास्तविकता दिखे, केवल व्यर्थ-प्रलाप | केवल व्यर्थ-प्रलाप, आग पानी में लागे |पानी पानी होय, चेतना रविकर जागे। इसीलिए रे मूर्ख, अरे माटी के पुतले। नहीं उस समय झाँक, जिस समय पानी उबले ||...
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  January 26, 2016, 10:05 am
(1)धरम नहीं आतंक का, किन्तु लाश की जात। गाजा पर गर्जना कर, हों सेक्युलर विख्यात। हों सेक्युलर विख्यात, जुल्म-कश्मीर नकारें। जल्लूकट्टू बंद, किन्तु बकरीद सकारें |रविकर ये गद्दार, बनाते रहते बौढ़म। सत्तासुख की चाह, भोगते रहिये अधरम ||(2)चौकस रह, रह बाख़बर, जबर शत्रु की फौ...
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  January 22, 2016, 4:40 pm
पूरा जब तक गाँठ का, पूरे तब तक ठाठ |चंट गाँठ के मित्रता, रहे पढ़ाते पाठ |रहे पढ़ाते पाठ, करे वह सदा दिखावा |आया आपद-काल, फुर्र हो उसका दावा |जब तक पाया लाभ, निभा सम्बन्ध अधूरा |बनकर रहता ख़ास, धूर्त वह रविकर पूरा || ...
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  January 21, 2015, 5:58 pm
मर कर पाये मोक्ष तू, बचने पर बेदाग़ |ख़ुशी ख़ुशी ख़ुदकुशी कर, खतम खलल खटराग | खतम खलल खटराग, नहीं अपराध ख़ुदकुशी |जा झंझट से भाग, असंभव जहाँ वापसी |जो रविकर कविराय, समस्या से भग जाए |वह भोगेगा नर्क,  शान्ति ना मरकर पाये || ...
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  December 12, 2014, 2:25 pm
मर कर पाये मोक्ष तू, बचने पर बेदाग़ |ख़ुशी ख़ुशी ख़ुदकुशी कर, खतम खलल खटराग | खतम खलल खटराग, नहीं अपराध ख़ुदकुशी |जा झंझट से भाग, असंभव जहाँ वापसी |जो रविकर कविराय, समस्या से भग जाए |वह भोगेगा नर्क,  शान्ति ना मरकर पाये || ...
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  December 12, 2014, 2:25 pm
बाजीगर सैनिक डटे, मौत सामने ठाढ़ |ग्राम नगर कश्मीर के, झेल रहे हैं बाढ़ |झेल रहे हैं बाढ़, देश राहत पहुँचाया |फौजी रहे बचाय, सामने जो भी आया |फ़ौजी का सम्मान, करो रे मुल्ला-काजी |तुर्क-युवक नादान, बंद कर पत्थरबाजी ||...
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  September 10, 2014, 9:01 am
घाटी की माटी बही, प्राणांतक सैलाब |कुछ भी न बाकी बचा, कश्मीरी बेताब |कश्मीरी बेताब, जान पर फौजी खेलें |सतलुज रावी व्यास, सिंधु झेलम को झेलें |राहत और बचाव, रात बिन सोये काटी |फौजी सच्चे दोस्त, समझ ना पाये घाटी ||...
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  September 9, 2014, 9:48 am
 भला भयातुर भी कहीं, कर सकता अपराध । इसीलिए तो चाहिए,  भय-कारक इक-आध । भय-कारक इक-आध, शिकारी खा ना पाये । चलता रहे अबाध, शांतिप्रिय जगत बनाये । धर्म-भीरु इस हेतु, डरे प्रभु से यह पगला । सँभला जीवन-वेग, आचरण सँभला सँभला । ...
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  September 6, 2014, 4:08 pm
गाली देते ही रहे, बीस साल तक धूर्त |अब गलबहियाँ डालते, सत्ता-सुख आमूर्त |सत्ता-सुख आमूर्त, देखिये प्यार परस्पर |गए गोद में बैठ, मंच पर बैठे सटकर |यह कोसी की बाढ़, इकट्ठा हुवे बवाली |एक नाँद पर ठाढ़, करें दो जीव जुगाली ||...
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  August 12, 2014, 4:23 pm
आदरणीय!! व्याकरण की दृष्टि से क्या यह कुण्डलियाँ छंद खरा उतरता है ?? आलोचक चक चक दिखे, सत्ता से नाराज । अच्छे दिन आये कहाँ, कहें मिटायें खाज । कहें मिटायें खाज, नाज लेखन पर अपने। रखता धैर्य समाज, किन्तु वे लगे तड़पने । बदलोगे क्या भाग्य ? मित्र मत उत्तर टालो ।...
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  July 19, 2014, 12:36 pm
ताना-बाना बिगड़ता, ताना मारे तन्त्र । भाग्य नहीं पर सँवरता,  फूंकें लाखों मन्त्र । फूंकें लाखों मन्त्र, नीयत में खोट हमारे । खुद को मान स्वतंत्र, निरंकुश होते सारे । साधे रविकर स्वार्थ, बंद ना करे सताना । कुल उपाय बेकार, नए कुछ और बताना ॥ ...
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  July 14, 2014, 4:38 pm
फ़री फ़री मारा किये, किया किये तफ़रीह । -परजीवी पीते रहे, दारु-रक्त पय-पीह। दारु-रक्त पय-पीह, नहीं चिंता कुदरत की। केवल भोग विलास, आत्मा भटकी भटकी । आगे अन्धा-मोड़, गली सँकरी अति सँकरी । रविकर मत कर होड़, मचेगी अफरा-तफरी ॥ ...
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  July 9, 2014, 9:30 pm
(1)पड़े हुवे हैं जन्म से, मेरे पीछे लोग । मरने भी देते नहीं, देह रहे नित भोग । देह रहे नित भोग, सुता भगिनी माँ नानी । कामुकता का रोग, हमेशा गलत बयानी । कोई देता टोक, कैद कर कोईअकड़े । कहीं चाल अश्लील, कहीं पर छोटे कपड़े ॥ (2)पड़ेहुवे हैं जन्म से मेरे पीछे मर्द |मरने भी देते न...
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  July 1, 2014, 2:14 pm
पड़े हुवे हैं जन्म से, मेरे पीछे लोग । मरने भी देते नहीं, देह रहे नित भोग । देह रहे नित भोग, सुता भगिनी माँ नानी । कामुकता का रोग, हमेशा गलत बयानी । कोई देता टोक, कैद कर कोईअकड़े । कहीं चाल अश्लील, कहीं पर छोटे कपड़े ॥ ...
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  July 1, 2014, 2:14 pm
पुरानी रचना पाई नाव चुनाव से, खर्चे पूरे दाम |लूटो सुबहो-शाम अब, बिन सुबहा नितराम |बिन सुबहा नितराम, वसूली पूरी करके |करके काम-तमाम, खजाना पूरा भरके |सात समंदर पार, चली रविकर अधमाई |थाम नाव पतवार,  जमा कर पाई पाई  ||लाज लूटने की सजा, फाँसी कारावास |देश लूटने पर मगर,  ...
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  June 29, 2014, 11:10 am
बैठा जाये दिल मुआ, कैसे बैठा जाय |उठो चलो आगे बढ़ो, कर लो उचित उपाय |कर लो उचित उपाय, अगर सुरसा मुंह बाई |राई लगे पहाड़, ताक मत राह पराई |उद्यम करता सिद्ध, बिगड़ते काम बनाये |धरे हाथ पर हाथ, नहीं अब बैठा जाये ||...
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  June 27, 2014, 10:40 am
थाने में उत्कोच दे, कोंच कोंच कंकाल । तन मन नोंच खरोच के, दे दरिया में डाल । दे दरिया में डाल, बड़े अच्छे दिन आये । कर ले भोग विलास, आधुनिकता उकसाये। रवि कर मत संकोच, पड़े सैकड़ों बहाने । व्यस्त आज-कल कृष्ण, नहीं कालिया नथाने ॥  ...
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  June 7, 2014, 6:16 pm
बातें करते हवा से, हवा हुई सरकार |हवा-हवाई घोषणा, भूले भ्रष्टाचार |भूले भ्रष्टाचार, भूल जाते मँहगाई |करने लगे प्रचार, उन्हीं सेक्युलर की नाई |पानी पी पी कोस, होंय खुश कई जमातें |देखो अपने दोष, बनाओ यूँ ना बातें ||...
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  March 7, 2014, 9:33 am
कड़े बयानों के लिए, चुलबुल करती दाढ़ |छोड़ केकड़े को पड़ा, मकड़े पीछे साँढ़ |मकड़े पीछे सांढ़ ,जाल मकड़ा फैलाये |करवाये दल बदल, बैल तेरह बहकाये |किन्तु बचे नौ बैल, चार मकड़े ने जकड़े |मारे मन का मैल, मरे तू भी ऐ मकड़े ||...
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  February 26, 2014, 11:25 am
तालू से लगती नहीं, जिभ्या क्यूँ महराज |हरदिन पलटी मारते,  झूँठों के सरताज  |झूँठों के सरताज, रहे सर ताज सजाये |एकमात्र  ईमान, किन्तु दुर्गुण सब आये |मिर्च-मसाला झोंक, पकाई सब्जी चालू ।दे *दिल्ले में आग, बिगाड़े आप रतालू ॥*किवाड़ के पीछे लगा  लकड़ी का च...
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  February 25, 2014, 1:45 pm
पाना-वाना कुछ नहीं, फिर भी करें प्रचार |ताना-बाना टूटता, जनता करे पुकार |जनता करे पुकार, गरीबी उन्हें मिटाये  |राजनीति की मार, बगावत को उकसाए |आये थे जो आप, मिला था एक बहाना |किन्तु भगोड़ा भाग, नहीं अब माथ खपाना ||साही की शह-मात से, है'रानी में भेड़ |खों खों खों भालू करे, दे गीदड़ ...
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  February 24, 2014, 12:01 pm
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