रविकर की कुण्डलियाँ

बातें करते हवा से, हवा हुई सरकार |हवा-हवाई घोषणा, भूले भ्रष्टाचार |भूले भ्रष्टाचार, भूल जाते मँहगाई |करने लगे प्रचार, उन्हीं सेक्युलर की नाई |पानी पी पी कोस, होंय खुश कई जमातें |देखो अपने दोष, बनाओ यूँ ना बातें ||...
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  March 7, 2014, 9:33 am
कड़े बयानों के लिए, चुलबुल करती दाढ़ |छोड़ केकड़े को पड़ा, मकड़े पीछे साँढ़ |मकड़े पीछे सांढ़ ,जाल मकड़ा फैलाये |करवाये दल बदल, बैल तेरह बहकाये |किन्तु बचे नौ बैल, चार मकड़े ने जकड़े |मारे मन का मैल, मरे तू भी ऐ मकड़े ||...
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  February 26, 2014, 11:25 am
तालू से लगती नहीं, जिभ्या क्यूँ महराज |हरदिन पलटी मारते,  झूँठों के सरताज  |झूँठों के सरताज, रहे सर ताज सजाये |एकमात्र  ईमान, किन्तु दुर्गुण सब आये |मिर्च-मसाला झोंक, पकाई सब्जी चालू ।दे *दिल्ले में आग, बिगाड़े आप रतालू ॥*किवाड़ के पीछे लगा  लकड़ी का च...
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  February 25, 2014, 1:45 pm
पाना-वाना कुछ नहीं, फिर भी करें प्रचार |ताना-बाना टूटता, जनता करे पुकार |जनता करे पुकार, गरीबी उन्हें मिटाये  |राजनीति की मार, बगावत को उकसाए |आये थे जो आप, मिला था एक बहाना |किन्तु भगोड़ा भाग, नहीं अब माथ खपाना ||साही की शह-मात से, है'रानी में भेड़ |खों खों खों भालू करे, दे गीदड़ ...
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  February 24, 2014, 12:01 pm
दखलंदाजी खेल में, करती खेल-खराब |खले खिलाड़ी कोच को, लेकिन नहीं जवाब |लेकिन नहीं जवाब, प्रशासक नेता हॉबी |हॉबी सट्टेबाज, पूँछ कुत्तों की दाबी |ताकें दर्शक मूर्ख, हारते रविकर बाजी |बड़ी व्यस्त सरकार, करे क्यूँ दखलंदाजी --...
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  February 22, 2014, 9:38 am
खरी खरी कह हर घरी, खूब जमाया धाक |अपना मतलब गाँठ के, किया कलेजा चाक |किया कलेजा चाक, देश भर में अब घूमे |दिल्ली दिखी अवाक, आप मस्ती में झूमे |डाल गए मझधार, धोय साबुन से कथरी |मत मतलब मतवार, महज कर रहे मसखरी || ...
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  February 20, 2014, 10:49 am
(१)खाँसी की खिल्ली उड़े, खीस काढ़ते आप |खुन्नस में मफलर कसे, गया रास्ता नाप |गया रास्ता नाप, नाव मझधार डुबाये |सहा सर्द-संताप, गर्म लू सदा सताये |अब चुनाव आसन्न, व्यस्त फिर भारतवासी |जन-गण दिखें प्रसन्न, हुई संक्रामक खाँसी॥ ...
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  February 19, 2014, 12:11 pm
भारत का भुरता बना, खाया खूब अघाय |भरुवा अब तलने लगे, सत्तारी सौताय |सत्तारी सौताय, दलाली दूजा खाये |आम आदमी बोल, बोल करके उकसाए |इज्जत रहा उतार, कभी जन-गण धिक्कारत  |भागे जिम्मेदार, अराजक दीखे भारत ||अंतर-तह तहरीर है, चौक-चाक में आग-अंतर-तह तहरीर है, चौक-चाक में आ...
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  January 21, 2014, 12:05 pm
"ओ बी ओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव"अंक-34दोहादारु दाराधीन पी, हुआ नदारद मर्द  |दारा दारमदार ले, मर्दे गिट्टी गर्द ||कंकरेत कंकर रहित, काष्ठ विहीन कुदाल |बिन भार्या के भवन सम, मन में सदा मलाल ||अड़ा खड़ा मुखड़ा जड़ा, उखड़ा धड़ा मलीन |लीन कर्म में उद्यमी, कभी दिखे ना दीन ||*कृतिकर-...
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  January 20, 2014, 12:20 pm
असम में हिंदीभाषी हुए हमले के शिकार जागरण - ६ घंटे पहलेचिंदी-चिंदी तन-बदन, पांच मरे इक साथ । *बोड़ा निगले जिंदगी, हिंदी हुई अनाथ ॥ *अजगर हिंदी हुई अनाथ, असम-पथ ऊबड़-खाबड़ । है सत्ता कमजोर, धूर्त आतंकी धाकड़ । हिंदी-भाषी पाय, बना माथे पर बिंदी । अपने रहे निकाल, यहा...
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  January 19, 2014, 4:07 pm
सपने नयनों में पले, वाणी में अरदास |बुद्धि बनाये योजना, करे कर्म तनु ख़ास |करे कर्म तनु ख़ास, पूर्ण विश्वास भरा हो |शत-प्रतिशत उद्योग, भाग्य को तनिक सराहो |पाय सफलता व्यक्ति, लक्ष्य पा जाये अपने |रविकर इच्छा-शक्ति, पूर्ण कर देती सपने ||...
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  January 18, 2014, 9:09 am
लासा मंजर में लगा, आह आम अरमान |मौसम दे देता दगा, है बसन्त हैरान |है बसन्त हैरान, कोयलें रोज लुटी हैं |गिरगिटान मुस्कान, लोमड़ी बड़ी घुटी है |गीदड़ की बारात, दिखाता सिंह तमाशा |बन्दर की औकात, बताता नया खुलासा ||...
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  January 17, 2014, 8:55 am
खिले खिले बच्चे मिले, रहे खिलखिला रोज । बुझे-बुझे माँ-बाप पर, रहे मदर'सा खोज । रहे मदरसा खोज, घूस की दुनिया आदी। भावी रहे सुधार, शहर ला दादा-दादी। पैतृक घर दे बेंच, मिले उपयुक्त राशि ले ।  करे सुरक्षित सीट, आज यूँ मिलें दाखिले ॥ ...
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  January 15, 2014, 10:16 am
खतरे से खिलवाड़ पर, कारण दिखे अनेक |थूक थूक कर चाटना, घुटने देना टेक |घुटने देना टेक, अगर हो जाए हमला |होवे आप शहीद, जुबाँ पर जालिम जुमला |भाजप का अपराध, उसी पर कालिख लेसे |रविकर ले हित-साध, आप मत डर खतरे से ||...
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  January 13, 2014, 2:12 pm
भारत बांगला-देश में, बहुत बड़ा है फर्क |यहाँ स्वर्ग इनके लिए, वहाँ बनाया नर्क |वहाँ बनाया नर्क, अल्पसंख्यक आबादी |करते नहीं कुतर्क, यहाँ हैं अम्मा दादी |कई नरक से भाग, हजारों स्वर्ग-सिधारत |है चोटी में खोट, करे चिंता क्यूँ भारत ||पूरण खण्डेलवालचुनावों के बाद बांग्लादेश में ह...
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  January 11, 2014, 1:47 pm
मुफ़्तखोर है इस देश कि जनताZEAL  ZEALदिल्ली की सरकार में, पी एम् केजरिवाल |गृहमंत्री भूषण बने, ले कश्मीर सँभाल |ले कश्मीर सँभाल, जैन की क्रान्ति गुलाबी |राखी का कल्याण, गला बच्चे का दाबी |जुड़े आप से लोग, तोड़ती छींका बिल्ली |जाय भाड़ में देश, भाड़ में जाए दिल्ली ||आप छुवे आकास, खे...
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  January 10, 2014, 4:41 pm
234567ठंड से ठिठुरती दिल्लीरैन बसेरे में बसे, मिले नहीं पर आप |आम मिला इमली मिली, रहे अभी तक काँप |रहे अभी तक काँप, रात थी बड़ी भयानक |होते वायदे झूठ, गलत लिख गया कथानक |पड़े शीत की मार, आप ही मालिक मेरे  |तनिक दीजिये ध्यान, सुधारें रैन बसेरे ||...
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  January 9, 2014, 9:30 am
कुछ पॉलिटिकल  (१)आओ जब मैदान में, समझ बूझ हालात |मजे मजे मजमा जमे, जमघट जबर जमात |जमघट जबर जमात, आप करिये तैयारी |क़ाबलियत कर सिद्ध,  निभाओ जिम्मेदारी |रविकर लंगड़ी मार, ख़िलाड़ी नहीं गिराओ |अहंकार व्यवहार, बाज बड़बोले आओ ||(२)बहना बह ना भाव में, हवा बहे प्रतिकूल |दिग्गज अपन...
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  January 8, 2014, 2:55 pm
फरी फरी मारा किया, घरी घरी हड़काय । मरी मरी जनता रही, दपु-दबंग मुस्काय । दपु-दबंग मुस्काय, साधु को रहा सालता। लेकिन लगती हाय, साल यह बला टालता । परिवर्तन का दौर, काल की घूमी चकरी । अब जनता सिरमौर, कालिका उनपर बिफरी ॥ ...
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  January 3, 2014, 4:17 pm
संतोष त्रिवेदीतलवारें भांजने वाले जरूर पढ़ें !What Khurshid Anwar's suicide should tell the mediarediff.comIt is absolutely essential to prevent an atmosphere of trial and execution from being created on the larger issue of sexual assault, so that there can be a dispassionate understanding of every case, instead of irresponsible outpourings on television channels run by unaccountable anchors, says Seema…माने इसके गूढ़ हैं, इसी बहाने मौत |कातिल होती मीडिया, मौत रही नित न्यौत |मौत रही नित न्...
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  December 20, 2013, 11:36 am
रायशुमारी फिर करें, दे सन्देश नकार |तीस फीसदी वोट पा, करे आप व्यभिचार |करे आप व्यभिचार, तवज्जो पुन: सभा को |आप बड़े बेचैन, जरा अंतर्मन झांको |फिक्स किया है गेम, किन्तु नौटंकी जारी |बना नहीं सरकार, बताती रायशुमारी || ...
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  December 19, 2013, 10:29 am
काना राजा भी भला, हम अंधे बेचैन |सहमत हम सब मतलबी, प्यासे कब से नैन |प्यासे कब से नैन, सात सौ लीटर पानी |गै पानी मा भैंस, शर्त की की नादानी |सत्ता को अब तलक, मात्र मारा है ताना |पाय खुला भू-फलक, नहीं अब "आप"छकाना |डुबकी आप लगाय, लगा लो बस यह टोपी-टोपी बिन पहचान में, नहीं आ रहे आप |लगे ...
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  December 17, 2013, 9:21 am
"ओ बी ओ लाइव महा उत्सव"अंक-38आशा अपने राम को, नारायण आशीष । खड़ा बड़ा साम्राज्य हो, दर्शन की हो फीस । जोड़े रकम अकूत । नाम करेगा पूत ।। १॥ राहु-केतु लेते चढ़ा, खींच खींच आस्तीन । दोष दूसरे पर मढ़े, दंगाई तल्लीन ।  जीते पर यमदूत । नाम करेगा पूत ॥ २॥ छींका ट...
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  December 16, 2013, 9:37 am
१६ दिसम्‍बर क्रान्तिVikesh Badola हथेली में तिनका छूटने का अहसासकौंधे तीखे प्रश्न क्यूँ, क्यूँ कहते हो व्यर्थ |जीवन के अपने रहे, सदा रहेंगे अर्थ |सदा रहेंगे अर्थ, रहेगी मनुज मान्यता |बने अन्यथा देव, यही है मित्र सत्यता |सदाचार है शेष, अन्यथा गिरते औन्धे |वह सोलह की रात, आज भी अक...
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  December 15, 2013, 8:12 pm
प्रोपेगंडा कर रहे, शर्त अनाप-शनाप |वोट-बैंक में वृद्धि हित, लगे रात-दिन आप |लगे रात दिन आप, पिछड़ती जाए दिल्ली |देखो छींका टूट , भाग्यशाली यह बिल्ली |इक इमान की बात, बनाया बढ़िया फण्डा |नहीं करेंगे काम, करेंगे प्रोपेगंडा ||...
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  December 14, 2013, 1:33 pm
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