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रविकर की कुण्डलियाँ

ताले की दो कुंजिका, कर्म भाग्य दो नाम।कर्म कुंजिका तू लगा, भली करेंगे राम।भली करेंगे राम, भाग्य की चाभी थामे।निश्चय ही हो जाय, सफलता तेरे नामे।तू कर सतत प्रयास, कहाँ प्रभु रुकने वाले।भाग्य कुंजिका डाल, कभी भी खोलें ताले।।...
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  February 27, 2017, 10:10 am
इंसानी छलछंद को, करते अक्सर मंद।हास्य-व्यंग्य सुंदर विधा, रचे प्रभावी छंद।रचे प्रभावी छंद, खोट पर चोट करे है।प्रवचन कीर्तन सूक्ति, भजन संदेश भरें हैं।सुने-गुने धर-ध्यान, नहीं है रविकर सानी।किन्तु दृष्टिगत भेद, दिखे फितरत इंसानी।।...
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  February 19, 2017, 1:19 pm
रिश्ते को तितली समझ, ले चुटकी में थाम।पकड़ोगे यदि जोर से, भुगतोगे अंजाम।भुगतोगे अंजाम, पंख दोनो टूटेंगे ।दो थोड़ी सी ढील, रंग मोहक छूटेंगे।भर रिश्ते में रंग, चुकाओ रविकर किश्तें।तितली भ्रमर समेत, भरेंगे रंग फरिश्ते।...
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  February 13, 2017, 10:22 am
सामाजिक मुखड़े पे मुखड़े चढ़े, चलें मुखौटे दाँव |शहर जीतते ही रहे, रहे हारते गाँव |रहे हारते गाँव, पते की बात बताता।गया लापता गंज, किन्तु वह पता न पाता।हुआ पलायन तेज, पकड़िया बरगद उखड़े |खर-दूषण विस्तार, दुशासन बदले मुखड़े ||जौ जौ आगर विश्व में, कान काटते लोग।गलाकाट प्रतियोगित...
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  February 8, 2017, 4:53 pm
मुखड़े पे मुखड़े चढ़े, चलें मुखौटे दाँव |शहर जीतते ही रहे, रहे हारते गाँव |रहे हारते गाँव, पते की बात बताता।गया लापता गंज, किन्तु वह पता न पाता।हुआ पलायन तेज, पकड़िया बरगद उखड़े |खर-दूषण विस्तार, दुशासन बदले मुखड़े ||...
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  February 8, 2017, 11:09 am
अभ्यागत गतिमान यदि, दुर्गति से बच जाय।दुख झेले वह अन्यथा, पिये अश्रु गम खाय।पिये अश्रु गम खाय, अतिथि देवो भव माना।लेकिन दो दिन बाद, मारती दुनिया ताना।कह रविकर कविराय, करा लो बढ़िया स्वागत।शीघ्र ठिकाना छोड़, बढ़ो आगे अभ्यागत।।...
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  February 7, 2017, 10:05 am
रोमन में हिन्दी लिखी, रो मन बुक्का फाड़।देवनागरी स्वयं की, रही दुर्दशा ताड़।रही दुर्दशा ताड़, दिखे मात्रा की गड़बड़।पाश्चात्य की आड़, करे अब गिटपिट बड़ बड़।सीता को बनवास, लगाये लांछन धोबन।सूर्पनखा की जीत, लिखें खर दूषण रोमन।।तप गृहस्थ करता कठिन, रविकर सतत् अबाध।संयम सेवा सहि...
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  January 12, 2017, 3:50 pm
दाढ़ी झक्क सफेद है, लेकिन फर्क महीन।सैंटा देता नोट तो, मोदी लेता छीन।मोदी लेता छीन, कमाई उनकी काली।कितने मिटे कुलीन, आज तक देते गाली।हुई सुरक्षित किन्तु, कमाई रविकर गाढ़ी।सुखमय दिया भविष्य, बिना तिनके की दाढ़ी।।...
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  December 27, 2016, 2:41 pm
(1)विनती सम मानव हँसी, प्रभु करते स्वीकार।हँसा सके यदि अन्य को, करते बेड़ापार।करते बेड़ापार, कहें प्रभु हँसो हँसाओ।रहे बुढ़ापा दूर, निरोगी काया पाओ।हँसी बढ़ाये उम्र, बढ़े स्वासों की गिनती।रविकर निर्मल हास्य, प्रार्थना पूजा विनती।।(2)बानी सुनना देखना, खुश्बू स्वाद समेत।पाँ...
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  December 26, 2016, 10:44 am
पानी भर कर चोंच में, चिड़ी बुझाये आग ।फिर भी जंगल जल रहा, हंसी उड़ाये काग।हंसी उड़ाये काग, नहीं तू बुझा सकेगी।कहे चिड़ी सुन मूर्ख, आग तो नहीं बुझेगी।किंतु लगाया कौन, लिखे इतिहास कहानी।मैं तो रही बुझाय, आग पर डालूं पानी ।।...
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  December 19, 2016, 2:58 pm
क्षरण छंद में हो रहा, साहित्यिक छलछंद।किन्तु अभी भी कवि कई, नीति नियम पाबंद।नीति नियम पाबंद, बंद में भाव कथ्य भर।शिल्प सुगढ़ लय शुद्ध, मिलाये तुक भी बेह'तर।लो कुंडलियां मान, निवेदन करता रविकर।मिला आदि शब्दांश, अंत के दो दो अक्षर।।...
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  December 13, 2016, 10:29 am
लादें औलादें सतत, मातायें नौ माह।लात मारती पेट में, फिर भी हर्ष अथाह।फिर भी हर्ष अथाह, पुत्र अब पढ़ने जाये।पेट काट के बाप, उसे नौकरी दिलाये।पुन: वही हालात, बची हैं केवल यादें।किन्तु मार के लात, रुलाती अब औलादें।।...
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  October 24, 2016, 1:33 pm
पोता जब पैदा हुआ, बजा नफीरी ढोल ।नतिनी से नफरत दिखे, दिखी सोच में झोल।दिखी सोच में झोल, परीक्षण पूर्ण कराया |नहीं कांपता हाथ, पेट पापी गिरवाया ।कह रविकर कविराय, बैठ के बाबा रोता |बहू खोजता रोज, कुंवारा बैठा पोता ।।...
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  October 7, 2016, 2:09 pm
पंडित का सिक्का गिरा, देने लगा अजान।गहरा नाला क्यूं खुदा, खुदा करो अहसान ।खुदा करो अहसान, सन्न हो दर्शक साराहनुमत रविकर ईष्ट, उन्हें क्यों नही पुकारा ।इक सिक्के के लिए, करूं क्यों भक्ति विखंडित।क्यूं कूदें हनुमान, प्रत्युत्तर देता पंडित।।...
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  September 26, 2016, 9:39 am
1)कृष्णा तेरी कृपा की, सदा रही दरकार।दर दर मैं भटकूँ नहीं, बस गोकुल से प्यार।बस गोकुल से प्यार, हृदय में श्याम विराजा।बरसाने रसधार,जरा बरसाने आजा।राधे राधे बोल, जगत से हुई वितृष्णा।प्रेम तनिक ले तोल, बैठ पलड़े पे कृष्णा।।2)बाधाएँ हरते रहे, भक्तों की नित श्याम।कुपित इंद्र...
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  September 6, 2016, 1:06 pm
पहले तो करते रहे, अब होती तकलीफ।बेगम बोली क्यों नहीं, मियां करे तारीफ।मियां करे तारीफ, संगमरमर सी काया।पत्थर एक तराश, प्रभू! क्या खूब बनाया।चला फूँकने प्राण, किन्तु कर बाल सुनहले।था पत्थर जो शेष, अक्ल पर रख दे पहले।...
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  July 28, 2016, 6:15 pm
उदासीनता की तरफ, बढ़ते जाते पैर ।रोको रविकर रोक लो, जीवन से क्या बैर । जीवन से क्या बैर, व्यर्थ ही जीवन त्यागा ।कर अपनों को गैर, अभागा जग से भागा |दर्द हार गम जीत, व्यथा छल आंसू हाँसी ।जीवन के सब तत्व, जियो जग छोड़ उदासी ।।...
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  July 26, 2016, 10:52 am
जल के जल रक्षा करे, जले नहीं तब दुग्ध।गिरे अग्नि पर उबलकर, दुग्ध कर रहा मुग्ध।दुग्ध कर रहा मुग्ध, मूल्य जल का बढ़ जाता।रखे परस्पर ख्याल, नजर फिर कौन लगाता।आई बीच खटास, दूध फट जाय उबल के।जल भी मिटता जाय, आग पर रविकर जल के।।...
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Tag :दोस्त
  July 25, 2016, 5:45 pm
प्रश्नों के उत्तर कठिन, नहीं आ रहे याद |स्वार्थ-सिद्ध मद-मोह-सुख, भोगवाद-उन्माद |भोगवाद-उन्माद , नशे में बहके बहके |लेते रहते स्वाद, अनैतिक चीजें गहके |नीति-नियम-आदर्श, हवा के ताजे झोंके |चौथेपन में आज, लिखूँ उत्तर प्रश्नों के ||...
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  July 19, 2016, 10:39 am
कैसे थप्पड़ मारता, झूठे को रोबोट।पेट दर्द के झूठ पे, बच्चा खाये चोट।बच्चा खाये चोट, कभी मैं भी था बच्चा।कहा कभी ना झूठ, बाप को पड़ा तमाचा।मम्मी कहती आय, बाप बेटे इक जैसे।थप्पड़ वह भी खाय, बताओ रविकर कैसे।।...
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  July 13, 2016, 3:17 pm
चिमटा अब लाता नहीं, माँ के लिए हमीद।ऑटोमैटिक गन चला, रहा मनाता ईद।रहा मनाता ईद, खरीदे थे हथगोले।रहा आयते पूछ, सुना पाये ना भोले।देता गर्दन काट, उन्हें झट देता निपटा।ईदगाह में जाय, ख़रीदे काहे चिमटा।।...
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  July 8, 2016, 2:29 pm
रचना कर इन्सान की, दुखी दिखा भगवान |रचना कर भगवान की, खुश होता इन्सान |खुश होता इन्सान, शुरू हैं गोरख-धंधे |अरबों करते दान, अक्ल के पैदल अंधे |फिर हो भोग-विलास, किन्तु रविकर तू बचना |लेकर उसका नाम, लूटते उसकी रचना ||...
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  July 5, 2016, 5:44 pm
काव्य में किन परिस्थितयों में अश्लील दोष भी गुण हो जाता है.और वह शृंगार 'रस'के घर में न जाकर 'रसाभास'की दीवारें लांघता हुआ दिखायी देता है.(1)स्वर्ण-शिखा सी सज-संवर, मानहुँ बढ़ती आग ।छद्म-रूप मोहित करे, कन्या-नाग सुभाग ।कन्या-नाग सुभाग, हिस्स रति का रमझोला ।झूले रमण दिमाग, भूल ...
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  June 30, 2016, 5:49 pm
खानापूरी हो चुकी, बेशर्मी भी झेंप । खेप गए नेता सकल, भेज  रसद की खेप। भेज रसद की खेप, अफसरों की बन आई । देखी भूख फरेब, डूब कर जान बचाई। पानी पी पी मौत, उठा दुनिया से दाना ।बादल-दल को न्यौत, चले जाते मयखाना ॥...
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  June 29, 2016, 10:43 am
नारी अब अबला नहीं, कहने लगा समाज । है घातक हथियार से, नारि सुशोभित आज ।नारि सुशोभित आज, सुरक्षा करना जाने । रविकर पुरुष समाज, नहीं जाए उकसाने ।किन्तु नारि पे नारि, स्वयं ही पड़ती भारी | पहली ढाती जुल्म, तड़पती दूजी नारी ।|...
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  June 2, 2016, 10:46 am
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