| जिभ्या के बकवाद से, भड़के सारे दाँत |मँहगाई के वार से, सूखे छोटी आँत || आँखे ताकें रोटियां, दंगा करते दाँत । जिभ्या पूछे जात तो, टूटे दायीं पाँत ||मतनी कोदौं खाय के, माथा घूमें जोर |बेहोशी में जो पड़े, दे उनको झकझोर ||हाथों के सन्ताप से, बिगड़ गए शुभ काम |मजदूरी पावे नहीं, पड़े च... |
| दोहन हनन समान तब, जब मनमोहन मौन |हनवाना हरदिन करे, रोक सकेगा कौन |रोक सकेगा कौन, स्वयं कुदरत कुछ कर दे |करे स्वयं संतुलित, स्वयं कुछ ऐसा वर दे |सत्ता पाए शक्ति, सुधारे खुद के गोहन |रोके बन्दर बाँट, तभी रुक पाए दोहन ||... |
| कमतर कमकस कमिश्नर, नर-नीरज पर दाग -कमतर कमकस कमिश्नर, नर-नीरज पर दाग । कफ़नखसोटी में लगा, लगा रहा फिर आग । लगा रहा फिर आग, कमीना बना कमेला । संभले नहीं कमान, लाज से करता खेला । गृहमंत्रालय ढीठ, राज्य की हालत बदतर । करे आंकड़े पेश, बताये दिल्ली कमतर ॥ कमकस=कामचोर कमेला = कत्ल... |
| दहले दिल्ली देश, दरिंदा दुष्ट दहाड़े - छद्म वेश धर दुष्टता, पाए क्योंकर ठौर । बोझिल है वातावरण , जहर बुझा नव-दौर । जहर बुझा नव-दौर, गौर से दुष्ट परखिये । भरे पड़े हैवान, सुरक्षित बच्चे रखिये । दादा दादी चेत, पुन: ले जिम्मा रविकर । विश्वासी आश्वस्त, लूटते छद्म वेश धर ॥ ... |
| Hookah not a harmless alternative to cigrettes'Virendra Kumar Sharma कबीरा खडा़ बाज़ार में हुक्का नियमित गुड़गुड़ा, हुकुर-पुकर कर साँस |नित बीडी सिगरेट सा, मौत बुलाये पास | मौत बुलाये पास, रास क्योंकर आता है |बढ़ जाता क्या रोब, तरस रविकर खाता है | हुक्का-पानी बंद, जोर का मारो मुक्का |कर तम्बाकू दूर, दूर कर बीड़ी हुक्क... |
| बेचारा रविकर फँसा, इक टिप्पण आतंक ।जैसे बैठा सिर मुड़ा, ओले पड़ते-लंक । ओले पड़ते-लंक, इंद्र कर गया सियासत ।पहलवान अब गधा, बाप कह रही रियासत ।बेनी जाती टूट, किंवारा खुलता सारा ।पड़ता पर्दा टाट, हुआ रविकर बे-चारा । ... |
| सन्देश: 31 मार्च तक ब्लॉग जगत से दूर हूँ-रविकर शुभ-होलीबेचारा रविकर फँसा, इक टिप्पण आतंक ।जैसे बैठा सिर मुड़ा, ओले पड़ते-लंक । ओले पड़ते-लंक, करुण कर गया हिमाकत ।पहलवान हो गधा, बाप अब कहे सियासत।बेनी जाती टूट, किंवारा खुलता सारा ।दिखता पर्दा टाट, हुआ चारा बे-चारा । मुर्दा ... |
| आधुनिक भारत की एक वीरांगना जिसने इस्लामिक आतंकियों से लगभग 400 यात्रियों की जान बचाते हुए अपना जीवन बलिदान कर दिया।भारत योगी BharatYogi.net * भारत योगी* जय जय जय जय नीरजा, चंडीगढ़ की शान |गन प्वाइंट पे ले चुके, आतंकी इक यान |आतंकी इक यान, सभी की जान बचाती |डाक टिकट सम्मान, शहादत दे... |
| (1) लड़का कालेज छोड़ता, भाँप रिस्क आसन्न |क्लास-मेट को हर समय, करना पड़े प्रसन्न |करना पड़े प्रसन्न, धौंस हर समय दिखाती |काला चश्मा डाल, केस का भय दिखलाती |है इसका क्या तोड़, रोज देती हैं हड़का |लूंगा आँखे फोड़, आज बोल है लड़का ||(2)बेटा भूलो नीति को, काला चश्मा डाल । दुनिया के करते चलो, सा... |
| प्रत्युत्तर भाई हिस्सा बाँटकर, करते रहते मौज |भौजी की अपनी बड़ी, लम्बी चौड़ी फौज | लम्बी चौड़ी फौज, भतीजे नहीं सुहाएँ |सौ चूल्हे कन्नौज, राग अपना ही गायें | साली सरहज सार, नहीं कुछ भी बटवाई |वैसे भी अधिकार, धर्म-पत्नी का भाई ||... |
| मदिरा सवैया"सेहत" से हत" भाग्य सखी सितकारत सेवत स्वामि सदा |"कीमत" सेंदुर "की मत" पूछ, चुकावत किन्तु न होय अदा |रंग गुलाल उड़ावत लोग उड़ावत रंग बढ़े विपदा |लालक लाल लली लहरी लखिमी कय किस्मत काह बदा ??"ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक - 29 दोहे रंग रँगीला दे जमा, रँगरसया रंगरूट |रंग-महल रँगर... |
| 1 टली वापसी सिरों की, पाक-जियारत पूर । मछुवारों के मौत का, अभी फैसला दूर । अभी फैसला दूर, मिली नहिं चॉपर फ़ाइल । कातिल गए स्वदेश, फंसा इक और मिसाइल । भेजे सुप्रिम-कोर्ट, देखिये बढ़ी बेबसी । कातिल नातेदार, नहीं देगा अब इटली ॥ 2नारा की नाराजगी, जगी आज की भोर- नारा की नाराजग... |
| भाये ए सी की हवा, डेंगू मच्छर दोस्त ।फल दल पादप काटते, काटे मछली ग़ोश्त ।काटे मछली ग़ोश्त, बने टावर के जंगल ।टूंगे जंकी टोस्ट, रोज जंगल में मंगल ।खाना पीना मौज, मगन मनुवा भरमाये ।काटे पादप रोज, हरेरी ज्यादा भाये ।। ... |
| मोटी चमड़ी मनुज की, महाचंट मक्कार । कोताही कर्तव्यमें, मांगे नित अधिकार । मांगे नित अधिकार, हुआ है आग-बबूला । बोये पेड़ बबूल, आम पर झूले झूला । दे दूजे को सीख, रखे खुद नीयत खोटी । रविकर इन्हें सुधार, मार के चपत *चमोटी ॥ *चाबुक ... |
| कर इनको आजाद, अन्यथा तोड़े खूंटा -औरत रत निज कर्म में, मिला सफलता मन्त्र । सेहत से हत भाग्य पर, नरम सुरक्षा तंत्र । नरम सुरक्षा तंत्र, जरायम बढ़ते जाते । करता हवश शिकार, नहीं कामुक घबराते । जिन्सी ताल्लुकात, तरक्की करता भारत । शादी बिन बारात, बिचारी अब भी औरत ॥ ... |
| दादी दिल दिखता दुखित, द्रवित दिव्यतम तेज । देख पार्टी की दशा, रही लानतें भेज । रही लानतें भेज, किया था प्राण निछावर । सत्ता लोलुप लोग, चाहते केवल पावर । कल बेटा कुर्बान, टले पोते की शादी । लगा वंश पर दाँव, दुखी हो जाए दादी ॥ ... |
| सन्नाटा पसरा प्रकट, अन्तर हाहाकार । नैना पथराते गए, हारे हठ-हुंकार । हारे हठ-हुंकार, यार हुशियार निकलता । करे सरहदें पार, बढ़ाता जाय विकलता । परम-प्रताड़क प्रेम, पड़ा रविकर मरघाटा । उत उमंग उत्साह, इधर पसरा सन्नाटा ॥ ... |
| पहला पहला यंत्र है, इस दुनिया का चाक । बना प्रवर्तक यंत्र का, कुम्भकार की धाक । कुम्भकार की धाक, पूर्वज मुनि अगस्त्य है । मिटटी पावक पाक, मृत्यु पर अटल सत्य हैं । देता कृति आकार, रचयिता सहला सहला । कुम्भकार भगवान्, प्रवर्तक सबसे पहला ॥ मिटटी रौंधे प्रेम से, करें पुंस... |
| बड़ा बटोरा आज तक, लोलुपता ने माल |बेंच बेंच दूल्हा किया, शादीघर बदहाल |शादीघर बदहाल, सुता चैतन्य आज है । बढ़ा चढ़ा विश्वास, स्वयं पर उसे नाज है । रविकर चाल सुधार, नहीं तो क्वांरा छोरा । नहीं सकेगा भोग, माल जो बड़ा बटोरा ॥ ... |
| उच्चस्तर पर सम्पदा, रहे भद्रजन लूट । संचित जस-तसधन करें, खुली मिली हैछूट । खुली मिली है छूट, बटे डीरेक्ट कैश अब । मनरेगा से वोट, झपटता पंजा सरबस । लेकिन मध्यम वर्ग, गिरे गश खा कर रविकर । मंहगाई-कर जोड़, छुवें दोनों उच्चस्तर ॥ ये किसान मजदूर, करे हैं नित बेइमानी -सकल घरे... |
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February 28, 2013, 4:20 pm |
| खोया खील खमीर खस, खंडसारी खटराग |खंड्पूरी खंडरा ख़तम, खखरा खेले फाग |(चन्द्र-विन्दु हैं)खखरा खेले फाग, खटा-खट राग रागनी |घर घर *रागविवाद, रंग में भंग चाशनी |*झगडा खुद का सारोकार, पर्व त्यौहार विलोया ||ठगे गए हम लोग, देख अपनापन खोया..||... |
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February 27, 2013, 4:10 pm |
| सौदायिक बिन व्याहता, करने चली सिंगार |गहने पहने मांग कर, लेती कई उधार |(भाजपा की ओर इशारा) लेती कई उधार, खफा पटना पटनायक | खानम खाए खार, करे खारिज खलनायक |(जदयू, बीजद , मुस्लिम) हौदा हाथी रहित, साइकिल बिना घरौंदा | नहीं हिन्दु में ताब, पटे ना मोदी सौदा ||(माया-मुलायम) सौदायिक= स... |
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February 26, 2013, 2:22 pm |
| "ओ बी ओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक-23सुंदरी सवैया बलुई कलकी ललकी पिलकी जल-ओढ़ सजी लटरा मुलतानी । मकु शुष्क मिले कुछ गील सने तल कीचड़ पर्वत धुर पठरानी । कुल जीव बने सिर धूल चढ़े, शुभ *पीठ तजे, मनुवा मनमानी । मटियावत नीति मिटावत मीत, हुआ *मटिया नहिं पावत पानी ||*देवस्थान / आसन ... |
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February 22, 2013, 5:50 pm |
| आज पूरे प्यार से साजन सजा दो ।उस सुनहरे ख़्वाब का पूरा पता दो ।।रात-दिन छलती रही कोरी किताबें -चिट्ठियां उनपर सटा के तो मजा दो ।। तंत्र रक्षा का गया अब तेल लेने -हर घुटाले में विपक्षी को फँसा दो ।। लालटेनों की ख़तम बाती हुई तो काट नारे को फटाफट लो जला दो ।।रोज उम्मीदे लग... |
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February 21, 2013, 5:01 pm |
| 1रागी है यह मन मिरा, तिरा बिना पतवार |इत-उत भटके सिरफिरा, देता बुद्धि नकार |देता बुद्धि नकार, स्वार्थी सोलह आने |करे झूठ स्वीकार, बनाए बड़े बहाने |विरह-अग्नि दहकाय, लगन प्रियतम से लागी |सकल देह जलजाय, अजब प्रेमी वैरागी || 2 तेरी मुरली चैन से, रोते हैं इत नैन । विरह अग्नि रह रह ह... |
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February 20, 2013, 9:37 am |
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