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Blog: रविकर-पुंज

Blogger: dinesh chandra gupta ravikar
साथ जिंदगी के चले, काबिलियत किरदार।दोनों से क्रमशः मिले, लक्ष्य सुकीर्ति-अपार।।जीत अनैतिकता रही, रिश्ते हुए स्वछंद।लंद-फंद छलछंदता, हैं  हौसले बुलंद।।दुश्मन घुसा दिमाग में, करे नियंत्रित सोच।जगह दीजिए दोस्त को, दिल में नि:संकोच।।क्यूं दिमाग में घेरता, दुश्मन ज्या... Read more
clicks 84 View   Vote 0 Like   5:27am 15 Oct 2018 #
Blogger: dinesh chandra gupta ravikar
स्वर अपनों से होना खफा, बेशक है अधिकार।मान मनाने से मगर, यदि अपनों से प्यार।।बड़ा वक्त से कब कहाँ, कोई भी कविराज।कहाँ जिन्दगी सी गजब, कोई कविता आज।।अर्थ पिता से ले समझ, होता क्या संघर्ष।संस्कार माँ दे रही, दे बलिदान सहर्ष।।इश्क सरिस होता नहीं, रविकर घर का काम।दिन-प्रति-... Read more
clicks 120 View   Vote 0 Like   12:00pm 8 Oct 2018 #
Blogger: dinesh chandra gupta ravikar
बानी सुनना देखना, खुश्बू स्वाद समेत।पाँचो पांडव बच गये, सौ सौ कौरव खेत।सौ सौ कौरव खेत, पाप दोषों की छाया।भीष्म द्रोण नि:शेष, अन्न पापी का खाया ।लसा लालसा कर्ण, मरा दानी वरदानी।अन्तर्मन श्री कृष्ण, बोलती रविकर बानी ||1||देना हठ दरबान को, अहंकार कर पार्क |छोड़ व्यस्तता कार में... Read more
clicks 94 View   Vote 0 Like   5:21am 28 Jul 2017 #
Blogger: dinesh chandra gupta ravikar
कुछ हास्य-कुछ व्यंग (विधाता छंद) (१)चुनावी हो अगर मौसम, बड़े वादे किये जाते।कई पूरे हुवे लेकिन, कई बिसरा दिए जाते।किया था भेड़ से वादा मिलेगा मुफ्त में कम्बलकतर के ऊन भेड़ो का, अभी नेता लिये जाते।।(२)फटे बादल चढ़ी नदियाँ बहे पुल जलजला आया।बटे राहत डटे अफसर मगर आधा स्वयं खा... Read more
clicks 86 View   Vote 0 Like   11:27am 26 Jul 2017 #
Blogger: dinesh chandra gupta ravikar
Monday, 13 January 2014रविकर ले हित-साध, आप मत डर खतरे से-खतरे से खिलवाड़ पर, कारण दिखे अनेक |थूक थूक कर चाटना, घुटने देना टेक |घुटने देना टेक, अगर हो जाए हमला |होवे आप शहीद, जुबाँ पर जालिम जुमला |भाजप का अपराध, उसी पर कालिख लेसे |रविकर ले हित-साध, आप मत डर खतरे से ||News for arvind kejariwal comment on police'Delhi Police capable... Read more
clicks 278 View   Vote 0 Like   6:55am 20 Jan 2014 #
Blogger: dinesh chandra gupta ravikar
अब आप के कर्णधारों को सोचना चाहिएpramod joshi जिज्ञासा बानी है धमकी भरी, खफा खफा सरकार |सुनी तनिक खोटी-खरी, धरने को तैयार |धरने को तैयार, हमेशा टाँग अड़ाएं |करते रहे प्रचार, किन्तु अब मुँह की खाएं |वाह केजरीवाल, नहीं है तेरी सानी |नहीं गले अब दाल, चलो दे दो कुर्बानी ||... Read more
clicks 240 View   Vote 0 Like   11:13am 19 Jan 2014 #
Blogger: dinesh chandra gupta ravikar
हमाहमी हरहा हिये, लिये जाति-च्युत होय |ऐसी अवसरवादिता, देती साख डुबोय |देती साख डुबोय, प्रबंधन कौशल भारी |बेंचे धर्म-इमान, ख़रीदे कुल मुख्तारी |रविकर जाने मर्म, आप की जाने महिमा |आम आदमी तंग, वक्त भी सहमा सहमा || ... Read more
clicks 291 View   Vote 0 Like   3:45am 18 Jan 2014 #
Blogger: dinesh chandra gupta ravikar
तड़पन बढती ही गई, नमक नमक हर घाव -सरिताहिमनद भैया मौज में, सोवे चादर तान | सरिता बहना झेलती, पग पग पर व्यवधान |काटे कंटक पथ कई, करे पार चट्टान ।गिरे पड़े आगे बढे, किस्मत से अनजान ।सुन्दर सरिता सँवरती, रहे सरोवर घूर ।चौड़ा हो हिमनद पड़ा, सरिता बहना दूर ।समतल पर मद्धिम हुई, खटक... Read more
clicks 269 View   Vote 0 Like   9:43am 13 Jan 2014 #
Blogger: dinesh chandra gupta ravikar
गे-गूंगे के दौर में, मौन मुखर हो जाय |गूँ गूँ गे गे गड़गड़ी, सम्मुख रहा बजाय |सम्मुख रहा बजाय, आज जाकर लब खोला |जिसकी खाय कमाय, उन्हीं की जय जय बोला |नमो नमो का खौफ, लगे शहजादे चंगे |जल्दी कुर्सी सौंप, ताकि हों जल्दी नंगे || ... Read more
clicks 286 View   Vote 0 Like   11:05am 3 Jan 2014 #
Blogger: dinesh chandra gupta ravikar
दायें बायें जाय के, कैसे काटूं कान |कूट कूट कर जो भरा, काया में ईमान |काया में ईमान, बिठाया लोकपाल भी |बहुत बजाया गाल, दिया है साथ ताल भी |ताल-मेल का ताल, डुबकियां आप लगाएं | *कूटकर्म से मार, मछलियां दायें-बायें ||*छल धोखा टोपी बिन पहचान में, नहीं आ रहे आप |लगे अवांछित आ... Read more
clicks 310 View   Vote 0 Like   4:18am 17 Dec 2013 #
Blogger: dinesh chandra gupta ravikar
अड़ियल टट्टू आपका, अड़ा-खड़ा मझधार |लेना देना साथ भी, लागे भ्रष्टाचार |लागे भ्रष्टाचार, दीखने लगा *अड़ाड़ा |भाड़ा पूरा पाय, पढ़ाये आज पहाड़ा |ताके पूरा देश, हमेशा बेहतर दढ़ियल |टस से मस ना होय, महत्वाकांक्षी अड़ियल ||*आडम्बर, ढोंग ... Read more
clicks 313 View   Vote 0 Like   8:12am 10 Dec 2013 #
Blogger: dinesh chandra gupta ravikar
चुल्लू में उल्लू बने, धन्य समर्थक आप |कीचड़ में खिलते कमल, चालू क्रिया-कलाप |चालू क्रिया-कलाप, संभालो कुनबा अपना |माना उनसे बीस, किन्तु है अभी निबटना |साम-दाम मद लोभ, बदल ना जाँय निठल्लू |होय खरीद-फरोख्त, मँगा पानी इक चुल्लू ||चुल्लू में उल्लू बनना= थोड़ी सी भाँग पीकर बेसुध हो ज... Read more
clicks 294 View   Vote 0 Like   3:16pm 7 Dec 2013 #
Blogger: dinesh chandra gupta ravikar
अब्दुल्ला दीवानगी, देख बानगी एक |करे खिलाफत किन्तु फिर, देता माथा टेक |देता माथा टेक, नेक बन्दा है वैसे |किन्तु तरुण घबराय, लिफ्ट की लिप्सा जैसे |व्यर्थ रेप कानून, कहे इत खुल्लम खुल्ला |उसका राज्य विशेष, जानता उत अब्दुल्ला ||... Read more
clicks 306 View   Vote 0 Like   8:46am 6 Dec 2013 #
Blogger: dinesh chandra gupta ravikar
पेशी साईँ की इधर, फूल बिछाते फूल |सेना है नारायणी, साईँ करो क़ुबूल |साईँ करो क़ुबूल, किन्तु नहिं जुर्म कबूला |झोंक आँख में धूल, सतत दक्षिणा वसूला |बेशक नारा ढील, किन्तु फॉलोवर वेशी |भागा लाखों मील, हुई दिल्ली में पेशी ||... Read more
clicks 397 View   Vote 0 Like   9:14am 4 Dec 2013 #
Blogger: dinesh chandra gupta ravikar
आखिर क्यों :आसान नहीं रहता है औरतों का कामानन्द प्राप्त होनाVirendra Kumar Sharma  ram ram bhaiक्रीड़ा-हित आतुर दिखे, दिखे परस्पर नेह |पहल पुरुष के हाथ में, सम्पूरक दो देह | सम्पूरक दो देह, मगर संदेह हमेशा |होय तृप्त इत देह, व्यग्र उत रेशा रेशा |भाग चला रणछोड़, बड़ी देकर के पीड़ा |बनता कच्छप-यौ... Read more
clicks 346 View   Vote 0 Like   9:02am 30 Nov 2013 #
Blogger: dinesh chandra gupta ravikar
News: Former Indian cricketer Vinod Kambli suffers heart attackखा के झटका मित्र से, दिल का दौरा झेल |जिस भी कारण से हुई, हुई दोस्ती फेल |हुई दोस्ती फेल, कलेजा फिर से काँपे  |आ जा भारत रत्न, कांबळी रस्ता नापे |हुई दोस्त से भूल, माफ़ करदे अब आ के  |लागे व्यर्थ कलंक, अकेले पार्टी खा के ||... Read more
clicks 304 View   Vote 0 Like   8:52am 29 Nov 2013 #
Blogger: dinesh chandra gupta ravikar
करमहीन नर हैं सुखी, कर्मनिष्ठ दुःख पाय |बैठ हाथ पर हाथ धर, खुद लेता खुजलाय |खुद लेता खुजलाय, स्वयं पर रखें नियंत्रण |गर कोई उकसाय, तुरत ठुकराय निमंत्रण |टाले सकल बवाल, रहे मुर्गी से बचकर |खाये घर की दाल, मजे ले अक्सर रविकर ||नहीं छानना ख़ाक, बाँध कर रखो लंगोटाकेले सा जीवन जियो, ... Read more
clicks 296 View   Vote 0 Like   11:01am 28 Nov 2013 #
Blogger: dinesh chandra gupta ravikar
कुंडलियां (१)मानव समता पर लगे, प्रश्न चिन्ह सौ नित्य । रंग धर्म क्षेत्रीयता, पद मद के दुष्कृत्य । पद मद के दुष्कृत्य , श्रमिक रानी में अंतर । प्राण तत्व जब एक, दिखें क्यूँ भेद भयंकर ।रविकर चींटी देख, कभी ना बनती दानव । रखे परस्पर ख्याल, सीख ले इनसे मानव ॥ (२)बड़... Read more
clicks 295 View   Vote 0 Like   12:22pm 24 Nov 2013 #
Blogger: dinesh chandra gupta ravikar
मुआवजा नहि वेवजह, पीछे घातक सोच |खैरख्वाह इक वर्ग के, नीति-नियम में लोच |नीति-नियम में लोच, कोर्ट इनको फटकारे |इन्हें नहीं संकोच, दूसरा वर्ग नकारे |खाई जिसने चोट, इन्हें दे रहा बद्दुआ |कह इमाद एहसान, होय या लीडर रमुआ ||  ... Read more
clicks 324 View   Vote 0 Like   8:39am 22 Nov 2013 #
Blogger: dinesh chandra gupta ravikar
रखे ताजिया *जिया का, भैया अपने आप |अविश्वास रविकर नहीं, पर करता है बाप |पर करता है बाप, रही छवि अब ना उजली |कीचड़ में ही कमल, हाथ में चालू खुजली |चूर चूर विश्वास, किया क्या हाय शाजिया |अंतर दिया मिटाय, कहाँ हम रखें ताजिया ||*दीदी ... Read more
clicks 299 View   Vote 0 Like   2:03pm 21 Nov 2013 #
Blogger: dinesh chandra gupta ravikar
जिन्दा भारत-रत्न मैं, मैं तो बसूँ विदेश |पता नहीं यह मीडिया, खुलवा दे क्या केस |खुलवा दे क्या केस, करूँगा खुल के मस्ती |नहीं किसी को क्लेश, मटरगस्ती कुछ सस्ती |बना दिया भगवान्, करूं क्यूँकर शर्मिंदा |बनकर मैं इंसान, चाहता रहना जिन्दा ||सचिन घोंसला व्यग्र, अंजली अर्जुन सारा-Phot... Read more
clicks 233 View   Vote 0 Like   9:52am 19 Nov 2013 #
Blogger: dinesh chandra gupta ravikar
होतीजिनसे चूक है, कहते उन्हें उलूक |असत्यमेव लभते सदा, यदा कदा हो चूक |यदा कदा हो चूक, मूक रह कर के लूटो |कह रविकर दो टूक, लूट के झटपट फूटो |बोलो सतत असत्य, डूब के खोजो मोती |व्यवहारिक यह कथ्य, सदा जय इससे होती ||... Read more
clicks 264 View   Vote 0 Like   12:09pm 17 Nov 2013 #
Blogger: dinesh chandra gupta ravikar
ये क्या नमक फांकेगा ?Bamulahija dot Com Cartoon, Hindi Cartoon, Indian Cartoon, Cartoon on Indian Politcs: BAMULAHIJA  भूला रोटी प्याज भी, अब मिलती ना भीख |नमक चाट कर जी रहे, ले तू भी ले चीख |ले तू भी ले चीख, चीख पटना में सुनकर |हुआ खफा गुजरात, हमें लगता है रविकर |राहुल बाँटे अन्न, सकल जनतंत्र कबूला |मोदी छीने स्वाद, नमक भिजवाना भूल... Read more
clicks 312 View   Vote 0 Like   8:32am 16 Nov 2013 #
Blogger: dinesh chandra gupta ravikar
खलियाना खलता नहीं, चमड़ी धरो उतार |मँहगाई की मार से, बेहतर तेरी मार |बेहतर तेरी मार, बना के पहनो जूता |अंग अंग दे बेंच, देख रविकर का बूता |जीना हुआ मुहाल, भला है बूचड़-खाना -झटका अते हलाल, शुरू कर तू खलियाना ||... Read more
clicks 275 View   Vote 0 Like   8:28am 15 Nov 2013 #
Blogger: dinesh chandra gupta ravikar
CBI निदेशक का विवादास्पद ...cbi निदेशक का विवादास्पद बयान, सट्टेबाजी की तुलना रेप से कीhttp://zeenews.india.com/hindi/news/india/cbi-director-gives-controversial-statement-compare-betting-with-rape/194845सट्टेबाजी में लगा, खलनायक रंजीत |कानूनी जामा पहन, मिटटी करे पलीत |मिटटी करे पलीत, जबरदस्ती की आफत |कर लो उसमे मौज, अगर दुष्कर्मी सो... Read more
clicks 277 View   Vote 0 Like   9:01am 13 Nov 2013 #
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