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"कुछ कहना है"

जब छोड़ कर जाते बड़े तो भाग्य छोटों का संवारे।भाई-बहन को कर प्रतिष्ठित स्वयं की वह चाह मारे।बच्चे मनाकर पर्व नौ नौ, बाप की बखिया उघारे।जब नारि रो के कम करे गम मर्द रोके अश्रु सारे।~ dhanyavaad ~...
"कुछ कहना है"...
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  January 19, 2017, 2:05 pm
रविकर यदि राशन दिया, दे वह भूख मिटाय।यदि मकान देते बना, घर बनाय वह भाय।घर बनाय वह भाय, भाय वह चौबिस घंटा।किन्तु करो यदि रार, करेगी वह भी टंटा।लल्लो चप्पो ढेर, करे हैं मर्द अधिकतर।हे बच्चों की माय, दंडवत करता रविकर।।😂😂~ dhanyavaad ~...
"कुछ कहना है"...
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  January 18, 2017, 10:31 am
हरिगीतिका छंदनौ माह तक माँ राह ताकी आह होंठो में दफन।दो साल तक दुद्धू पिला शिशु-लात खाई आदतन।माँ बुद्धि विद्या पुष्टता हित नित्य नव करती जतन ।फिर राह ताके प्रौढ़ माँ पर द्वार पर ओढ़े कफन।। ~ dhanyavaad ~...
"कुछ कहना है"...
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  January 16, 2017, 1:36 pm
तुम गुरूर में रह रही, सजा सजाया फ्लैट।रहता मैं औकात में, बिछा फर्श पर मैट। बिछा फर्श पर मैट, बसा था तेरे दिल में।रविकर आठों याम, जमाया रँग महफिल में।रहो होश में बोल, निकाली तुम सुरूर में।इधर होश औकात, उधर हो तुम गुरूर में।~ dhanyavaad ~...
"कुछ कहना है"...
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  January 12, 2017, 3:48 pm
देना हठ दरबान को, अहंकार कर पार्क |छोड़ व्यस्तता कार में, फुरसत पे टिक-मार्क |फुरसत पर टिक-मार्क, उलझने छोड़ो नीचे |लिफ्ट करो उत्साह, भरोसा रिश्ते सींचे |करो गैलरी पार, साँस लंबी भर लेना |प्रिया खौलती द्वार, प्यार से झप्पी देना ||~ dhanyavaad ~...
"कुछ कहना है"...
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  January 9, 2017, 3:15 pm
कुंडलियाँबेटी ठिठकी द्वार पर, बैठक में रुक जाय।लगा पराई हो गयी, पिये चाय सकुचाय। पिये चाय सकुचाय, आज वापस जायेगी।रविकर बैठा पूछ, दुबारा कब आयेगी।देखी पति की ओर , दुशाला पुन: लपेटी।लगा पराई आज, हुई है अपनी बेटी।।दोहाबेटी हो जाती विदा, लेकिन सतत निहार।नही पराई हूँ कहे, ज...
"कुछ कहना है"...
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  December 28, 2016, 11:17 am
तन्हाई में कर रही, यादें रविकर छेद।रिसे उदासी छेद से, टहले प्रेम सखेद।।मनमुटाव झूठे सपन, जोश भरें भरपूर।टेढ़ी मेढ़ी जिन्दगी, चलती तभी हुजूर।।बाज बाज आये नहीं, रहा अभी भी कूद।।यद्यपि बाजीगर करे, उन्हे नेस्तनाबूद।भजन सरिस रविकर हँसी, प्रभु को है स्वीकार।हँसा सके यदि अन्...
"कुछ कहना है"...
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  December 26, 2016, 11:15 am
रोपी गयी नव-खेत में जब धान की बेरन बड़ी।लल्ली लगा ले आलता लावा उछाली चल पड़ी।।अलमारियों में पुस्तकें सलवार कुरते छोड़ के।गुड़िया खिलौने छोड़ के चुनरी खड़ी है ओढ़ के।रो के कहारों से कहा रोके रहो डोली यहाँ।घर द्वार भाई माँ पिता को छोड़कर जाऊँ कहाँ।लख अश्रुपूरित नैन से बारातिय...
"कुछ कहना है"...
Tag :विदाई
  December 14, 2016, 11:17 am
रो रो के रोके प्रिया, फिर भी पिया अघाय।इक किडनी भी ले लिया, मर्दानगी दिखाय।भरो भरोसे हित वहाँ, चाहे तुम जल खूब।चुल्लू भर भी यदि लिया, कह देगी जा डूब।।चला कोहरा को हरा, कदम सटीक उठाय।धीरे धीरे ही सही, मंजिल आती जाय।।खा के नमक हराम का, रक्तचाप बढ़ जाय।रविकर नमकहराम तो, लेता क...
"कुछ कहना है"...
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  December 12, 2016, 2:28 pm
तू सर्व-व्यापी है मगर मैं खोजता-फिरता रहा।हर शब्द से तू तो परे पर नाम मैं धरता रहा ।तू सर्व ज्ञाता किन्तु इच्छा मैं प्रकट करता रहा।मैं पाप यह करता रहा वह कष्ट तू हरता रहा।।dohaरस्सी जैसी जिंदगी, तने तने हालात।एक सिरे पर ख्वाहिसें, दूजे पर औकात।।~ dhanyavaad ~...
"कुछ कहना है"...
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  November 21, 2016, 3:36 pm
टके टके पर टकटकी, खटके नोट हजार।बेखटके निर्धन डटे, खाय अमीरी खार।खाय अमीरी खार, बुखारी बदन गरम है।थमता नक्सलवाद, हुआ आतंक नरम है।भागा भ्रष्टाचार, पास अच्छे दिन फटके।लटके झटके देख, सुधरते जायें भटके ।।~ dhanyavaad ~...
"कुछ कहना है"...
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  November 10, 2016, 2:14 pm
करते काम गरीब तो, शोषण करे अमीर ।दोनों की रक्षा करे, क्रमश: सैनिक वीर।क्रमश: सैनिक वीर, इन्हें पाले करदाता।देख घुमक्कड़-ठाठ, पिये दारू मदमाता।बैंकर कसे नकेल, वकीलों से ये डरते।सबके बदले मौज, किन्तु ये नेता करते।।~ dhanyavaad ~...
"कुछ कहना है"...
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  November 8, 2016, 9:48 am
(1)भूसा पर क्यूँ लीपता, पता नहीं हे नाथ।पिता मुलायम हाथ से, आज खुजाता माथ।आज खुजाता माथ, चला जाता है बेटा।सत्ता का संघर्ष, वंश सम्पूर्ण लपेटा।बड़ा हुआ यह नाट्य, सूत्रधारी अब रूसा।दर्शक बनते पात्र, सुलगता गोबर भूसा।।(2)चरवाहों के स्वांग से, चढ़ा साधु को रोष।मूसल पैदा होयगा, ...
"कुछ कहना है"...
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  October 25, 2016, 1:49 pm
बिटिया रो के रह गई, शिक्षा रोके बाप।खर्च करे कल ब्याह में, ताकि अनाप-शनाप।।रिश्ता तोड़े भुनभुना, किया भुनाना बन्द।बना लिए रिश्ते नये, हैं हौसले बुलन्द।।काट हथेली को रही, हर पन्ने की कोर।खिंची भाग्य रेखा नई, खिंचा तुम्हारी ओर।।दो बिल्ली हर चौक पर, हैं जब से तैनात।भीड़ निय...
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  October 24, 2016, 1:26 pm
अधिक मिले पहले मिले, किस्मत वक्त नकार।इसी लालसा से व्यथित, रविकर यह संसार।।धर्म ग्रन्थ में जिन्दगी, कर लो मियां तलाश।साधो मन की ग्रन्थियां, हो अन्यथा विनाश।।चाहे जितना रंज हो, कसे तंज पर तंज।किन्तु कभी मारे नहीं, अपनों को शतरंज।।अनुभव का अनुमान से, हरदम तिगुना तेज।फल ...
"कुछ कहना है"...
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  October 7, 2016, 2:10 pm
संसाधन का कर रहे, जो बेजा उपयोग |महंगाई पर चुप रहें, वे दुष्कर्मी लोग ||दुश्मन घुसा दिमाग में, करे नियंत्रित सोच।जगह दीजिए दोस्त को, दिल में नि:संकोच।।हिचक बनी अब हिचकियाँ, मन हिचकोले खाय।खोले मन का भेद तो, बिखर जिंदगी जाय।।हिचक बनेगी हिचकियाँ, ले जायेगा गैर।इधर बचेंगी स...
"कुछ कहना है"...
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  October 1, 2016, 7:27 pm
रावण के दस शीश सयाने ।लाल मुढ़ैछा बांधे बायाँ, कामगार पटियाता है ।साफा हरा चाँद तारे से, दूजा शीश सजाता है ।दिखा तीसरा पट्टी बांधे, झट कानून बताता है ।चौथे सिर की लम्बी कलमें, सुलझी लट उलझाता है ।उसकी ढपली उसके गाने ।रावण के दस शीश सयाने ।।साधुवेश धर शीश पाचवां, सी...
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  September 28, 2016, 10:16 am
जब धाक धाकड़ आदमी छल से जमाना सीख ले |सारा जमाना नाम धन-दौलत कमाना सीख ले |ईमान रिश्ते दीन दुख जब बेंच खाना सीख ले |तू कर बहाना बैठकर आंसू बहाना सीख ले ||~ dhanyavaad ~...
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  September 27, 2016, 9:29 am
बुरा-भला खोटी खरी, क्षमा करूँ अज्ञान।अगर जान लेते मुझे, मियाँ छिड़कते जान।।उड़ो नहीं ज्यादा मियां, धरो धरा पर पैर।गुरु-गुरूर देगा गिरा, उड़ो मनाते खैर ।।कच्चे घर सच्चे मनुज, गये समय की बात।रहे घरौंदे जो बना, उन्हें बचा ले तात।।आगे पीछे बगल में, आशा अनुभव सत्य।।दिल में दृढ़-...
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  September 23, 2016, 9:57 am
(1)माने मूरख स्वयं को, यदि मूरख इंसान। निश्चय ही वह बन सके, मूरख से विद्वान्। मूरख से विद्वान्, सुनी हैं कई कथाएं।लेकिन यदि विद्वान्, स्वयं को विज्ञ बताएं।कह रविकर विद्वान, उक्ति कह गये सयाने।बन सकता वह मूर्ख, बदल फिर जाए माने।।(2)ताले की दो कुंजिका, कर्म भाग्य दो नाम।म...
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  September 5, 2016, 10:40 am
आसमान में दूर तक, तक तक हारा जंतु । पानी तो पूरा पड़ा, प्यासा मरा परन्तु । करे फैसला क्रोध यदि, वादा कर दे हर्ष।शर्मसार होना पड़े, रविकर का निष्कर्ष।।असफल जीवन पर हँसे, रविकर धूर्त समाज।किन्तु सफलता पर यही, ईर्ष्या करता आज।।विकट समस्या देख वो, गुणा-भाग कर भाग।भाग-दौड़ कर...
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  September 2, 2016, 4:01 pm
कौआ को कर दे दुखी, श्वेत बतख का रंग |हरा रहा तोता हरा, वहीँ बतख को जंग |वहीँ बतख को जंग, किन्तु तोता यूँ कहता |रंग-विरंगा मोर, नाचता हरदम रहता |बदसूरत ये पैर, जरा रविकर तो ताको |मान रहा खुशहाल, मोर तो इस कौआ को ||~ dhanyavaad ~...
"कुछ कहना है"...
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  August 31, 2016, 10:30 am
धर्म-कर्म पर जब चढ़े, अर्थ-काम का जिन्न |मंदिर मस्जिद में खुलें, नए प्रकल्प विभिन्न ||1||मजे मजे मजमा जमा, दफना दिया जमीर |स्वार्थ-सिद्ध सबके हुवे, लटका दी तस्वीर ||2||शीलहरण पे पढ़ रही, भीड़ व्याह के मन्त्र |सहनशील-निरपेक्ष मन, जय जय जय जनतंत्र ||1||हीन-भावना का चढ़ा, नशा बड़ा गम्भीर |किन...
"कुछ कहना है"...
Tag :
  August 30, 2016, 10:57 am
हरिगीतिकाजय देवकी जसुमति जयतु जय राधिके जय रुक्मनी।जय गोपियाँ जय द्रोपदी जय जय सुभद्रे सद्गुनी।पटरानियाँ कुल रानियाँ कुंती बुआ जय जय जयतु |कृष्णा जयतु दाऊ जयतु जय नन्द वसुदेवा जयतु ||सम्पूर्ण गीता सार (१९-दोहे)अर्जुन उवाच-भिक्षाटन करके जिऊँ, नहीं करूँ मैं युद्ध |सरक ...
"कुछ कहना है"...
Tag :
  August 25, 2016, 2:27 pm
चुपके से मन पोट ली, ली पोटली तलाश |यादों के पन्ने पलट, पाती लम्हे ख़ास |पाती लम्हे ख़ास, प्रेम पाती इक पाती |कोरा दर्पण-दर्प, और फिर प्रिया अघाती |शंख सीप जल रत्न, कौड़ियां गिनती छुपके |मन के मनके जोड़, विहँसती चुपके चुपके ||~ dhanyavaad ~...
"कुछ कहना है"...
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  August 23, 2016, 4:51 pm
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