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"लिंक-लिक्खाड़" : View Blog Posts
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"लिंक-लिक्खाड़"

जब मैल कानों में भरा, आवाज देना व्यर्थ तब।आवाज़ कब अपनी सुने, मन में भरा हो मैल जब।करता नजर-अंदाज खुद की गलतियाँ रख पीठ पे-पर दूसरे की गलतियों पर रह सका वह मौन कब।।...
"लिंक-लिक्खाड़"...
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  November 9, 2017, 1:55 pm
जिंदा मिला तो मारते, हम सर्प चूहा देश में।लेकिन उसी को पूजते, पत्थर शिला के वेश में।कंधा दिया जब लाश को तो प्राप्त करते पुण्य हमयद्यपि सहारे बिन जिया वह लाश के ही भेष में।।खिचड़ीहुआ गीला अगर आटा, गरीबी खूब खलती है।करो मत बन्धुवर गलती, नहीं जब दाल गलती है।लफंगे देश दुनिया...
"लिंक-लिक्खाड़"...
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  November 7, 2017, 8:17 am
प्रवंचक दे रहे प्रवचन सुने सब अक्ल के अंधे।बड़े उद्योग में शामिल हुये अब धर्म के धंधे।।अगर जीवन मरण भगवान के ही हाथ में बाबा।सुरक्षा जेड श्रेणी की चले क्यों साथ में बाबा।हमेशा मोह माया छोड़ना रविकर सिखाते जबबना क्यों पुत्र को वारिस बिठाते माथ पे बाबा।।समस्यायें सुना...
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  November 6, 2017, 2:13 pm
तलाशे घूर में रोटी, गरीबी व्यस्त रोजी में।अमीरी दूर से ताके डुबा कर रोटियाँ घी में।प्रकट आभार प्रभु का कर, धनी वो हाथ फिर जोड़े।गरीबी वाकई रविकर, कहीं का भी नहीं छोड़े।।विचरते एक पागल को गरीबी दूर से ताकी।कई पागल पड़े पीछे, बड़े बूढ़े नहीं बाकी।प्रकट आभार प्रभु का कर, गरीबी ...
"लिंक-लिक्खाड़"...
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  October 30, 2017, 2:40 pm
जद्दोजहद करती रही यह जिंदगी हरदिन मगर।ना नींद ना कोई जरूरत पूर्ण होती मित्रवर।अब खत्म होती हर जरूरत, नींद तेरा शुक्रियायह नींद टूटेगी नहीं, री जिंदगी तू मौजकर।।व्यवहार घर का शुभ कलश, इंसानियत घर की तिजोरी।मीठी जुबाँ धन-संपदा, तो शांति लक्ष्मी मातु मोरी।पैसा सदा मेहम...
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  October 16, 2017, 11:20 am
दानवीर भरसक भरें, रविकर भिक्षा-पात्र।करते इच्छा-पात्र पर, किन्तु कोशिशें मात्र।।भरता भिक्षा-पात्र को, दानी बारम्बार।लेकिन इच्छा-पात्र पर, दानवीर लाचार।।है सामाजिक व्यक्ति का, सर्वोत्तम व्यायाम।आगे झुककर ले उठा, रविकर पतित तमाम।रखे सुरक्षित जर-जमीं, रविकर हर धनवान...
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  September 26, 2017, 1:11 pm
बहस माता-पिता गुरु से, नहीं करता कभी रविकर ।अवज्ञा भी नहीं करता, सुने फटकार भी हँसकर।कभी भी मूर्ख पागल से नहीं तकरार करता पर-सुनो हक छीनने वालों, करे संघर्ष बढ़-चढ़ कर।।किसी की राय से राही पकड़ ले पथ सही रविकर।मगर मंज़िल नही मिलती, बिना मेहनत किए डटकर।तुम्हें पहचानते बेशक...
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  September 18, 2017, 10:33 am
जो जंग जीती औरतों ने आज भी आधी-अधूरी ।नाराज हो जाये मियाँ तो आज भी है छूट पूरी।शादी करेगा दूसरी फिर तीसरी चौथी करेगा।पत्नी उपेक्षा से मरेगी वह नही होगी जरूरी।पड़ी जब आँख पर पट्टी, निभाती न्याय की देवी।तराजू ले सदी चौदह, बिताती न्याय की देवी।मगर जब देवियाँ जागीं, मिला अध...
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  August 26, 2017, 11:39 am
सुना दो राग दरबारी हृदय आघात टल जाये।अनिद्रा दूर हो जाए अगर तू भैरवी गाये।हुआ सिरदर्द कुछ ज्यादा सुना दो राग भैरव तुममगर अवसाद में तो राग मधुवंती बहुत भाये।विहागी राग गा लेना अगर वैराग्य आये तो।अजी मल्हार गा लेना गरम ऋतु जो सताये तो।जलाया राग दीपक से दिया संगीत कारो...
"लिंक-लिक्खाड़"...
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  August 26, 2017, 11:37 am
सरासर झूठ सुन उसका उसे कौआ नहीं काटा।चपाती बिल्लियों को चंट बंदर ठीक से बाँटा।परस्पर लोमड़ी बगुला निभाते मेजबानी जब।घड़े में खीर यह खाया उधर वह थाल भी चाटा।युगों से साथ गेंहूँ के सदा पिसता रहा जो घुन बनाया दोस्त चावल को नहीं जिसका बने आटा।।मरा हीरा कटा मोती किसानों क...
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  August 26, 2017, 11:35 am
कहीं बेनाम हैं रिश्ते, कहीं बस नाम के रिश्ते।चतुर मानुष बनाते हैं हमेशा काम से रिश्ते।मुहब्बत मुफ्त में मिलती सदा माँ बाप से लेकिनलगाये दाम की पर्ची धरे गोदाम में रिश्ते।शुरू विश्वास से होते समय करता इन्हे पक्काअगर धोखा दिया इनको गये फिर काम से रिश्ते।।रहो चुपचाप ग...
"लिंक-लिक्खाड़"...
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  August 22, 2017, 2:24 pm
ग्राहक तुम्हें मिलते रहें, हर मौत के सामान के ।व्यापार खुब फूले फले संग्राम बर्बर ठान के।जब जर जमीं जोरू सरीखे मंद कारक हो गये।तब युद्ध छेड़े जाति के कुछ धर्म के कुछ आन के।विध्वंश हो होता रहे नुकसान मत रविकर सहो।।हथियार के सौदागरों यूँ खून तुम पीते रहो।।आदेश दे उपदेश द...
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  August 14, 2017, 11:09 am
अजी अब देर क्यों करते, चले आओ चले आओ।प्रतीक्षा हो रही लम्बी, भुलाओ मत चले आओ।।यहाँ तू शर्तिया आये,खबर सुन मौत की मेरी।दुखी जब सब सुजन मेरे, सुनें वे सांत्वना तेरी।नहीं मैं सुन सकूँगा तब, अभी आके सुना जाओ।अजी अब देर क्यों करते, चले आओ चले आओ।करोगे माफ मरने पर, हमारे पाप तु...
"लिंक-लिक्खाड़"...
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  August 14, 2017, 11:05 am
पुचकारते पापा मगर भाई लताड़े मर्द ताड़े।आँखे तरेरे पुत्र भी तो आ रहा पति दम्भ आड़े।जब पैर की जूती कहे जग अक्ल चोटी में बताये।नारी कटा के चोटियाँ तब चोटियाँ चढ़कर दिखाये।।...
"लिंक-लिक्खाड़"...
Tag :
  June 29, 2017, 11:24 am
इनके मोटे पेट से, उनका मद टकराय।कैसे मिल पाएं गले, रविकर बता उपाय ।।सरिता जैसी जिन्दगी, रास्ता रोके बाँध।करो सिंचाई रोशनी, वर्ना बढ़े सड़ाँध।।है पहाड़ सी जिन्दगी, हैं नाना व्यवधान।रविकर झुक के यदि चढ़ो, होवे आत्मोत्थान।।रस्सी जैसी जिन्दगी, तने तने हालात्।एक सिरे पर ख्वा...
"लिंक-लिक्खाड़"...
Tag :दोहे
  May 16, 2017, 10:50 am
झाड़ी में हिरणी घुसी, प्रसव काल नजदीक।इधर शिकारी ताड़ता, उधर शेर की छींक।उधर शेर की छींक, गरजते बादल छाये।जंगल जले सुदूर, देख हिरणी घबराये।चूक जाय बंदूक, शेर को मौत पछाड़ी। मेह बुझाए आग, सुने किलकारी झाड़ी।।...
"लिंक-लिक्खाड़"...
Tag :
  May 8, 2017, 10:25 am
😂😂पूरे होंगे किस तरह, कहो अधूरे ख्वाब।😂😂😂सो जा चादर तान के, रविकर दिया जवाब।।😂😂😂😂क्वांरेपन से शेर है, रविकर अति खूंखार ।किन्तु हुआ अब पालतू, दुर्गा हुई सवार।।😂😂कइयों की कलई खुली, उड़ा कई का रंग।हुई धुलाई न्याय की, घूमें मस्त मलंग।।जी भर के कर प्यार तू, कह रविकर चितल...
"लिंक-लिक्खाड़"...
Tag :
  February 19, 2017, 1:23 pm
बापू को कंधा दिया, बस्ता धरा उतार।तेरह दिन में हो गया, रविकर जिम्मेदार।।कर्तव्यों का निर्वहन, किया बहन का ब्याह।भाई पैरों पर खड़ा, बदले किन्तु निगाह ।।मैया ले आती बहू, पोती रही खिलाय।खींचतान सहता रहा, सूझे नही उपाय।।आँगन में दीवाल कर, बँधी खेत में मेड़।पट्टीदारों से हुई...
"लिंक-लिक्खाड़"...
Tag :
  February 13, 2017, 10:19 am
 नारि भूप गुरु अग्नि के, रह मत अधिक करीब।रहमत की कर आरजू, जहमत लिखे नसीब।।सर्प व्याघ्र बालक सुअर, भूप मूर्ख पर-श्वान।नहीं जगाओ नींद से, खा सकते ये जान।।कठिन समस्या के मिलें, समाधान आसान।परामर्शदाता शकुनि, किंवा कृष्ण महान।।शिल्पी-कृत बुत पूज्य हैं, स्वार्थी प्रभु-कृ...
"लिंक-लिक्खाड़"...
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  February 6, 2017, 10:23 am
भेड़-चाल में फिर फँसी, पड़ी मुफ्त की मार।सत्ता कम्बल बाँट दे, उनका ऊन उतार।पैसे पद से जो जुड़े, सुख मे ही वे साथ।जुड़ वाणी व्यवहार से, ताकि न छूटे हाथ।।आ जाये कोई नया, अथवा जाये छोड़।बदल जाय तब जिंदगी, रविकर तीखे मोड़।।नीम-करैले का चखे, बेमन स्वाद जुबान।लेकिन खुद कड़ुवी जुबाँ, रह...
"लिंक-लिक्खाड़"...
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  January 30, 2017, 1:40 pm
बातों में लफ्फाजी देखो।छल छंदों की बाजी देखो।।मत दाता की सूरत ताको।नेता से नाराजी देखो।।लम्बी चैटों से क्या होगा।पंडित देखो काजी देखो।।अंधा राजा अंधी नगरी।खाजा खा जा भाजी देखो।।लंगड़ी मारे अपना बेटाबप्पा चाचा पाजी देखो।।पैसा तो हरदम जीता हैरविकर घटना ताजी देखो।...
"लिंक-लिक्खाड़"...
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  January 12, 2017, 3:49 pm
गुणकारी है स्वास्थ सुधारे।नीम करेला मित्र हमारे।लेकिन जिभ्या रही मचलती।दोनों की कड़ुवाहट खलती।आंखे देखें घूर के।लड्डू मोतीचूर के।।१।।दिखा झूठ का स्वाद अनोखा।खुद बोलो तो लगता चोखा।किन्तु दूसरा जब भी बोले।कड़ुवाहट काया में घोले।तेवर दिखें हुजूर के।लड्डू मोती चूर...
"लिंक-लिक्खाड़"...
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  December 28, 2016, 11:19 am
खले चाँदनी चोर को, व्यभिचारी को भीड़।दूजे के सम्मान से, कवि को ईर्ष्या ईड़।कवि को ईर्ष्या ईड़, बने अपने मुंह मिट्ठू।कवि सुवरन बिसराय, कहे सरकारी पिट्ठू।रविकर तू भी सीख, किन्तु पहले तो छप ले।मांगे मिले न भीख, जरा चमचई परख ले।।...
"लिंक-लिक्खाड़"...
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  December 26, 2016, 11:16 am
छपने का अखबार में, जिन्हें रहा था चाव।समय बीतने पर बिके, वे रद्दी के भाव।।रोलावे रद्दी के भाव, बनाये ठोंगा कोई।जो रचि राखा राम, वही रविकर गति होई।मिर्ची नमक लपेट, पेट पूजा कर फेका।कोई दिया जलाय, नाम मत ले छपने का।।...
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  December 23, 2016, 11:34 am
टाइम रिटायरमेंट का ज्यों पास आता जा रहा ।उत्साह बढ़ता जा रहा, आकाश नीचे आ रहा । खाया कमाया जिंदगी भर पितृ-ऋण उतरे सभी । संतान को इन्सां बनाया अब नहीं भटके कभी । ख्वाहिश तमन्ना शौक सारे आज हम पूरी करें। चाहे रहे जिन्दा युगों तक आज ही या हम मरें । कविमन हुआ मदम...
"लिंक-लिक्खाड़"...
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  December 16, 2016, 2:11 pm
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