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"लिंक-लिक्खाड़"

देना है तो दान दो, लेना है तो ज्ञान।अगर निगलना ही पड़े, निगलो निज अपमान।निगलो निज अपमान, चलो गम खाना सीखो।पीना सीखो क्रोध, नहीं बेमतलब चीखो।त्याग लोभ धर धैर्य, मान रविकर रख लेना।कर लेना यश प्राप्त, फेंक मद ईर्ष्या देना ।।...
"लिंक-लिक्खाड़"...
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  November 15, 2016, 10:51 am
दिया दूसरों ने जनम, नाम, काम, सद्ज्ञान।ले जायें शमशान भी, तू क्यों करे गुमान ।।दनदनाय दौड़े मदन, चढ़े बदन पर जाय।खजुराहो को देखकर, काशी भी पगलाय।।कैसे कोई अन्न जल, कर सकता बरबाद।संसाधन साझे सकल, रखना रविकर याद।।शशि में सुंदरता दिखे, दिखे सूर्य में शक्ति।सुंदरतम कृति ईश की...
"लिंक-लिक्खाड़"...
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  November 8, 2016, 9:52 am
व्यापारी फिल्मी जगत, कलाकार चुपचाप।डाक्टर अधिवक्ता मगन, एक्टीविस्ट प्रलाप।एक्टीविस्ट प्रलाप, खिलाड़ी नेता सारे।इति अंधा कानून, बाँधता हाथ हमारे।मरते रहे जवान, होय तेरह दिन स्यापा।इसीलिए आतंक, विश्व भर मे है व्यापा।।...
"लिंक-लिक्खाड़"...
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  October 24, 2016, 1:34 pm
हँसकर विद्यालय गई, घर आई चुपचाप |देरी होती देख माँ, करती शुरू प्रलाप |करती शुरू प्रलाप, देवता-देवि मनाये |सभी लगाएं दौड़, थके-माँदे-घबराये |मिलते ही मुस्कात, बहन माँ भाई रविकर |चिंता रहे छुपाय, पिताजी मिले विहँसकर ||...
"लिंक-लिक्खाड़"...
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  October 7, 2016, 2:11 pm
बोलियों से चोट खाया है कलेजा।ऐ शराफत अब जरा तशरीफ लेजा।।शब्द भेजा खा रहे थे अब तलक वोक्यूं ललक से यूं पलट पैगाम भेजा।।जो गले मिलते रहे थे प्यार से तबखाट पर बैठे, पड़ो उनके गले जा।जब चुगी चिड़िया हमारा खेत साराहाथ पर यूं हाथ रखकर मत मले जा।दुष्ट करते खोखला खा कर यहीं कागा ...
"लिंक-लिक्खाड़"...
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  October 1, 2016, 7:28 pm
पी ओ के की गन्दगी, सैनिक रहे हटाय।इसी स्वच्छता मिशन से, पाक साफ हो जाय।।पी ओ के अपनी धरा, धरो मगज में बात।आते जाते हम रहें, दिन हो चाहे रात।।चौड़ी छाती हो गयी, रविकर छप्पन इंच।धूर्त मीडिया को करे, वार-सर्जिकल पिंच।वार सर्जिकल पिंच, रखैलें बरखा दत्ती।रही खोजती लोच, जला के द...
"लिंक-लिक्खाड़"...
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  September 30, 2016, 9:54 am
डाटा जैसे अॉन हो, हे दाता भगवान।प्राप्त परमगति झट करे, यह मूरख इंसान।यह मूरख इंसान, ध्यान योगासन रोजा।भूले धर्म विभेद, खुदा डाटा में खोजा।परिजन स्वजन बिसार, चाहता है सन्नाटा।दाता अपने नाम, भेजते रहिए डाटा।।...
"लिंक-लिक्खाड़"...
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  September 26, 2016, 9:40 am
हो सर्व-व्यापी किन्तु मैं तो खोजता-फिरता रहा।तुम शब्द से भी हो परे पर नाम मैं धरता रहा ।हो सर्व ज्ञाता किन्तु इच्छा मैं प्रकट करता रहा।अपराध ये करता रहा पर कष्ट तू हरता रहा।।...
"लिंक-लिक्खाड़"...
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  September 23, 2016, 9:54 am
दुर्मुख असुर दारुण दुखों से साधु मन छलने लगा।वरदान पा कर दुष्ट आ कर विश्व को दलने लगा।ब्रहमा वरुण यम विष्णु व्याकुल इंद्र को खलने लगा।सुर साधु बल-पौरुष घटा विश्वास जब ढलने लगा।तब हो इकट्ठा देवता कैलास पर्वत पर गये।गौरा विराजे रूप छाजे सर्व आनंदित भये।बोले सकल सुर एक...
"लिंक-लिक्खाड़"...
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  September 19, 2016, 3:05 pm
रात दिन जीवन मुझे खलता रहा | प्यार और विश्वास भी छलता रहा | क्या बुझाएगी हवा उस दीप को जो सदा तूफान में जलता रहा | तेल की बूंदे इसे मिलती रही मुश्किलों का दौर यूँ टलता रहा -- कुछ थी हिम्मत और कुछ थे हौंसले अस्थिया-चमड़ी-वसा गलता रहा खून के वे आखिरी कतरे चुए जिस बदौलत दीप यह प...
"लिंक-लिक्खाड़"...
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  August 30, 2016, 2:39 pm
सुने प्रशंसा मूर्ख से, यह दुनिया खुश होय |डाँट खाय विद्वान की, रोष करे दे रोय |रोष करे दे रोय, सहे ना समालोचना |शुभचिंतक दे खोय, करे फिर बंद सोचना |विद्वानों से डाँट, सुने रविकर की मंशा |करता रहे सुधार,  और फिर  सुने प्रशंसा ||...
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  July 28, 2016, 4:53 pm
मुर्गे की इक टांग पे, कंठी-माला टांग |उटपटांग हरकत करो, कूदो दो फर्लांग |कूदो दो फर्लांग, बाँग मुर्गा जब देता |चमचे धूर्त दलाल, विषय के पंडित नेता |रहे चापते माल, सोचते हैं आगे की |गले हमेशा दाल, टांग चापे मुर्गे की ||...
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  July 19, 2016, 10:37 am
पापा सब कुछ जानते, वे तो हैं विद्वान।बच्चा बच्चों से कहे, मेरे पिता महान ।मेरे पिता महान, शान में पढ़े कसीदे।कहता किन्तु किशोर, ध्वस्त जब हो उम्मीदें।कम व्यवहारिक ज्ञान, किया चिड़चिड़ा बुढ़ापा।पड़ा तरुण तब बोल, अलग रहिये अब पापा।।...
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  July 18, 2016, 5:52 pm
पानी ढोने का करे, जो बन्दा व्यापार |मुई प्यास कैसे भला, उसे सकेगी मार ||प्रगति-पंख को नोचता, भ्रष्टाचारी-बाज |लेना-देना कर रहा, फिर भी सभ्य-समाज ||मोटी-चमड़ी में करें, खटमल जब भी छेद |तड़प तड़प के झट मरे, पी के खून-सफ़ेद ||गुण-अवगुण की खान तन, मन संवेदनशील ।इसीलिए इंसान हूँ, रविकर मस्त...
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  July 13, 2016, 10:50 am
दिनेश चन्द्र गुप्ता रविकर1 घंटा · बत्ती सी कौंधी सुबह, जब देखी यह टैग।गई खुमारी सब उतर, आधा दर्जन पैग।आधा दर्जन पैग, मुबारक वर्षगाँठ हो।तीस साल व्यतीत, हमारे और ठाठ हों।रहो स्वस्थ सानन्द, लगे कुछ यहाँ कमी सी।...अधिक देखेंManu Gupta, Swasti Medha और 2 अन्य लोग के साथ.1 घंटा · ...
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  July 12, 2016, 3:07 pm
झुकते झुकते झुक गयी, कमर सहित यह रीढ़ |मुश्किल से रिश्ता बचा, बची तुम्हारी ईढ़ |बची तुम्हारी ईढ़, तभी भरदिन गुर्राती |करो गलत नित सिद्ध, लगी लत कैसे जाती |रविकर सही तथापि, सही हर झिड़की रुक रुक।मलती फिर तुम हाथ, जिया जब सम्मुख झुक झुक।।...
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  July 6, 2016, 4:09 pm
सत्ता री मत बैठ तू,  सत्तारी हर वक्त |जन-गण-मन मरता दिखा, रोक बहाना रक्त |रोक बहाना रक्त,  खोज मत नया-बहाना |दुष्ट सजा ना पाय, शुरू कर फौज सजाना |सत्तावन सी क्रान्ति, करे जन-मन तैयारी |शेष बची ना भ्रान्ति, बैठ मत अब सत्तारी ||...
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  July 4, 2016, 11:19 am
मुसीबत खड़ी सामने हो कभी,कौन जाता वहाँ से यही देखिये |बड़ा मतलबी है हमारा शहर कौन रुकता वहाँ पर नहीं देखिये |डटो सामने तुम करो सामना जो साधन वहाँ पर वही देखिये |मिलेगी विजय और पहचान होगी गलत देखिये कुछ सही देखिये ||...
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  June 29, 2016, 5:47 pm
मैं माँ का अनमोल खिलौना । नन्हा मुन्हा प्यारा छौना । थपकी दे माथा सहलाती लोरी गाती दूध पिलाती हरदिन अपने पास सुलाती |सूखे में सरकाती जाती - भीगा माँ का रहे बिछौना । मैं माँ का अनमोल खिलौना ।।असमय जागा असमय रोया |असमय माँ का बदन भिगोया |मालिस करके वह नहलाती |इक प...
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  June 8, 2016, 5:21 pm
ठीक-ठाक कोशिश करो, बुरा कहे ना कोय।बुरा-भला मुँह पर कहे, अगर खता कुछ होय।अगर खता कुछ होय, करे आकलन अद्यतन।पर मरने के बाद, व्यर्थ जीवन-मूल्यांकन।पहुँचा कब्रिस्तान, सुने कुछ गल्प अनूठी ।रविकर अस्वीकार, करे तारीफें झूठी ॥  ...
"लिंक-लिक्खाड़"...
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  May 30, 2016, 3:31 pm
राम-भरोसे चल पड़े, फैलाने सुविचार । धर्म-विरोधी ले उठा, हाथों में हथियार ।हाथों में हथियार, कर्म तो गजब-घिनौने । इन सब से वे ठीक, बने जो आधे-पौने । धर्म न्याय विज्ञान, भूमि भी इनको कोसे । दुनिया यह तूफ़ान, झेलती राम-भरोसे ॥ ...
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  March 15, 2016, 2:12 pm
गोटी दर गोटी पिटी, मिली हार पे हार।घाट घाट घाटा घटा, घुट घुट घोटी लार।घुट घुट घोटी लार, किया घाटे का सौदा। भूत रहा नाकाम, दाँव पर लगा घरौंदा।सतत दुखद परिणाम, लगे है किस्मत खोटी। भागे रविकर भूत, बचा ना सका लंगोटी।।...
"लिंक-लिक्खाड़"...
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  March 14, 2016, 10:58 am
नहीं कह रहा मैं इसे, कहता फौजी वीर |अंदर के खंजर सहन, या सरहद के तीर ||नहीं कह रहा मैं इसे, कह के गए बुजुर्ग |जायज है सब युद्ध में, रखो सुरक्षित दुर्ग ||नहीं कह रहा मैं इसे,कहें बड़े विद्वान |लिए हथेली पर चलो, देश धर्म हित जान ||नहीं कह रहा मैं इसे,कहते रहे कबीर |क्या लाया क्या ले गया...
"लिंक-लिक्खाड़"...
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  March 4, 2016, 9:04 am
सोया घोड़ा बेच के, लुटा माल असबाब |रोये माथा पीट के, टूट गए सब ख़्वाब |टूट गए सब ख़्वाब, उसे रविकर समझाते |निद्रा मृत्यु समान, नींद में पैर हिलाते |मान अन्यथा लाश, सजा दे चिता निगोड़ा |दुनिया तो बदनाम, बेचती सोया घोड़ा ||...
"लिंक-लिक्खाड़"...
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  February 29, 2016, 4:11 pm
(1)दो सौ इक्यावन लगे, फोन बुकिंग आरम्भ।दिखा करोड़ों का यहाँ, बेमतलब का दम्भ। बेमतलब का दम्भ, दर्जनों बुक करवाये।नोचे बिल्ली खम्भ, फोन आये ना आये।मुफ्तखोर उस्ताद, दूर रहता है कोसों।कौड़ी करे न खर्च, कहाँ इक्यावन दो सौ।।(2)धोखा खाने का मजा, तुम क्या जानो मित्र।नहीं भरोसा तु...
"लिंक-लिक्खाड़"...
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  February 23, 2016, 10:06 am
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