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"लिंक-लिक्खाड़"

बेटी दामाद के साथ हम दोनों कुण्डलियाँ छंद अभिभावक अभिभूत हैं, व्याह हुआ संपन्न । सदा सुहागिन मनु रहे,  जोड़ी रहें प्रसन्न। जोड़ी रहें प्रसन्न, दुलारी बिटिया रानी। करते कन्यादान, नहीं फिर भी बेगानी । पूरे फेरे सात, प्रज्वलित पावन पावक। रखो वचन ...
"लिंक-लिक्खाड़"...
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  February 4, 2016, 5:37 pm
सुनते जब नव चुटकुला, हँसते हम तत्काल । किन्तु दुबारा क्यूँ  हंसें,  हुआ पुराना माल । हुआ पुराना माल, मगर चिंता जब आती। बिगड़ जाय सुरताल, हमें सौ बार रुलाती। भिन्न भिन्न व्यवहार, नहीं रविकर यूँ चुनते।चिंता उसी प्रकार, चुटकुला जैसे सुनते।।...
"लिंक-लिक्खाड़"...
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  February 3, 2016, 3:41 pm
(१)पढ़ो वेदना वेद ना, कम कर दो परिमाण |रविकर तू परहित रहित, फिर कैसे निर्वाण ||(२)मुश्किल मे उम्मीद का, जो दामन ले थाम |जाये वह जल्दी उबर, हो बढ़िया परिणाम ||(३)छलिया तूने हाथ में, खींची कई लकीर |मैं भोला समझा किया, इनमे ही तक़दीर ||(४)करे बुराई विविधि-विधि, जब कोई शैतान |चढ़ी महत्ता आप...
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  February 2, 2016, 4:07 pm
देवदारों ने नहीं अब तक, भला कुछ भी किया  आम-इमली ही भले हैं, क्यों चढ़े हो चीड़ पे । गलतियों से जो नहीं, कुछ सीख पाये आजतक आज ऐसे ज्ञानियों की, क्या जरुरत नीड़ पे |हर तरफ संगीत की दीवानगी है शोर है मंडली लेकिन नई फंसती दिखे हर मीड़ पे ।  छूट जाते जब अध...
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  February 1, 2016, 11:44 am
आर्थिक-तंगी की वजह, गई पढाई छूट |आर्थिक तंगी की वजह, पी लेते दो घूँट | पी लेते दो घूँट, नशा छोड़ा ना जाये |देते रोज उड़ाय, कमाकर जो भी लाये |बड़ी बुरी तस्वीर, आइना देखे नंगी |रहा नशा नहिं छूट, वाह री आर्थिक तंगी ||...
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  January 31, 2016, 11:43 am
 गलती होने पर करो, दिल से पश्चाताप |हो हल्ला हरगिज नहीं, हरगिज नहीं प्रलाप |हरगिज नहीं प्रलाप, हवाला किसका दोगे |जौ-जौ आगर विश्व, हँसी का पात्र बनोगे |ऊर्जा-शक्ति सँभाल, नहीं दुनिया यूँ चलती |तू-तड़ाक बढ़ जाय, जीभ फिर जहर उगलती ||...
"लिंक-लिक्खाड़"...
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  January 29, 2016, 10:15 am
इक झटके में टूटता, जमा हुआ विश्वास।जिसे बनाने में हमें, लगे अनगिनत मास।लगे अनगिनत मास, बड़ी मुश्किल से साधा।अब तक रखा सँभाल, दूर करके हर बाधा।अजब गजब विश्वास, बदल लेता झट खेमें।रविकर हुआ उदास, तोड़ता इक झटके में ||...
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  January 28, 2016, 11:27 am
मेरे हिन्दुस्तानियों, मेल-जोल का वक्त |मनमुटाव हरगिज नहीं, नहीं बहाना रक्त |नहीं बहाना रक्त,  बहाना नहीं बनाना |माना नाना भेद, किन्तु सबको समझाना |आतंकी माहौल, फटें बम साँझ-सवेरे  |सजग रहें हम लोग, सजग ज्यूँ योद्धा मेरे |-...
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  January 27, 2016, 4:34 pm
ऊपर वाले के यहाँ, कहाँ कभी अंधेर |सुनते थोड़ी देर से, वे भक्तों की टेर |वे भक्तों की टेर, जून की भीषण गरमी |भक्त मांगते ठंढ, हवा में थोड़ी नरमी |केवल महिने पाँच, आपकी इच्छा टाले |फिर दें छप्पर फाड़, ठंड फिर ऊपर वाले ||...
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  January 25, 2016, 12:21 pm
फेसबुक पर मेरी टिप्पणियां (१)कटवाने से क्या घटे, दुनिया में जेहाद।भर दुनिया में हैं डटे, बगदादी उस्ताद।बगदादी उस्ताद, वहाँ दाढ़ी कटवाई।गला काट आजाद, यहाँ कर देते भाई।अस्मत लेते लूट, और फिर देते बटवा।मिली धर्म से छूट, मौज फिर करते कटवा।(२)जीते जी तो ना मिली, किन्तु मिले ...
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  January 22, 2016, 10:15 am
(1)लाम बंद हैं सिरफिरे, फैलाएं आतंक।माँ-बहनों के बदन पर, स्वयं मारते डंक।स्वयं मारते डंक, मचाएं कत्लो-गारद।मुल्ला पंडित मौन, मौन विज्ञान विशारद। आएंगे बरबंड, तनिक रफ़्तार मंद है |  मियां म्यान दरम्यान, किया इस्लाम बंद है।(२)असली नकली में फंसा, कभी नही शैतान।जुल्म सदा श...
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  January 21, 2016, 4:40 pm
सज्जन रहते व्यस्त खुद, लंद-फंद से दूर |सत्ता को क्या फ़ायदा, बनते बोझ जरूर |बनते बोझ जरूर, काम के चोर-उचक्के |लोकतंत्र मगरूर, कार्यकर्ता ये पक्के |सत्ता की दुत्कार, इसी से सज्जन सहते |दुर्जन सत्ता पास, दूर अति सज्जन रहते ||...
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  January 20, 2016, 11:15 am
जल्लू कट्टू पर रहे, फिर से उठा सवाल |लेकिन बकरा-ईद पर, सदा छुपाते खाल |सदा छुपाते खाल, इसी पेटा को ले लो |चाहे करो हलाल, किन्तु पशु से मत खेलो |प्रगतिशील ये लोग, किराये के हैं टट्टू |करते रहें प्रलाप, खेलिए जल्लू कट्टू ||...
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  January 12, 2016, 4:06 pm
सोलह आना सत्य है, है अशांति चहुँओर |छली-बली से त्रस्त हैं, साधु-सुजन कमजोर | साधु-सुजन कमजोर, आइये होंय इकठ्ठा |उनकी जड़ में आज, डाल दें खट्टा-मठ्ठा |ऋद्धि-सिद्धि सम्पत्ति, होय फिर सुखी जमाना |मंगलमय नववर्ष, होय शुभ सोलह आना ||...
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  December 31, 2015, 10:32 am
 बन्दर-भालू-सर्प बिन, मरा मदारी आज |पशु-अधिकारों पे उठी, जब से ये आवाज |जब से ये आवाज, हुवे खुश कुत्ता बिल्ली |अभयारण में बाघ, सुरक्षित करती दिल्ली |किन्तु विरोधाभास, देश-दुनिया के अंदर |होते जीव हलाल, बैठ के देखें बन्दर ||...
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  October 12, 2015, 5:13 pm
सालाना जलसे किये, खूब बढ़ाई शाख |पर बुढ़ऊ भाये नहीँ, उनको फूटी आँख | उनको फूटी आँख, रोज बच्चों से अम्मा |कहती आँख तरेर, तुम्हारा बाप निकम्मा । रविकर मन हलकान, निठल्ला फेरे माला |वह तो रही सुनाय, लगा के मिर्च-मसाला ||...
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  September 2, 2015, 11:21 am
योगी भोगी योगमय, अच्छा है संयोग |बिना दवा सेहत सही, तन मन रहे निरोग |तन मन रहे निरोग, दवा के बचते पैसे |फिर भी हैं कुछ लोग, मिले हैं ऐसे-वैसे |इनमे से ही एक, मिला है रविकर ढोंगी |करता हर दिन योग, किन्तु है बड़ा वियोगी ||...
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  June 23, 2015, 8:46 am
(1)ओवर-कॉन्फिडेंट हैं, इस जग के सब मूढ़ |विज्ञ दिखे शंकाग्रसित, यही समस्या गूढ़ || (2)चौथेपन तक समझ पर, उँगली रही उठाय । माँ पत्नी क्रमश: बहू, किन्तु समझ नहिं आय ॥ ...
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  May 6, 2015, 4:32 pm
हारे पापा हर समय, रहे जिताते पूत |मुड़कर पीछे देखते, बिखरे पड़े सुबूत |बिखरे पड़े सुबूत, आज नाराज विधाता |हर दुख से हर बार, उबारी अपनी माता |आज वही माँ-बाप, भटकते मारे मारे |कह रविकर घबराय, परस्पर बने सहारे || ...
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  February 16, 2015, 5:47 pm
हारे पापा हर समय, रहे जिताते पूत |मुड़कर पीछे देखते, बिखरे पड़े सुबूत |बिखरे पड़े सुबूत, आज नाराज विधाता |हर दुख से हर बार, उबारी थी जो माता |बेचारे माँ-बाप, भटकते मारे मारे |कह रविकर घबराय, परस्पर बने सहारे || ...
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  February 16, 2015, 5:47 pm
मेरी टिप्पणियां (२)ताने बेलन देख के, तनी-मनी घबराय  |पर ताने मारक अधिक, सुने जिया ना जाय |सुने जिया ना जाय, खाय ले मन का चैना |रविकर गया अघाय, खाय के चना च बैना |मनमाने व्यवहार, नहीं ब्रह्मा भी जाने |जब ताने में धार, व्यर्थ क्यों बेलन ताने || (१)सिहरे रविकर तन-बदन, भयकारी यह च...
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  February 5, 2015, 3:04 pm
जलती जाए जिंदगी, ज्योति न जाया जाय । आँच साँच को दे पका, कठिनाई मुस्काय । कठिनाई मुस्काय, जिंदगी कागद लागे । अपनी मंजिल पाय,  देखते उससे आगे । गूढ़ कहानी आप, यहाँ स्वाभाविक चलती । फैला रही प्रकाश, चिता जब धू धू जलती॥ ...
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  January 19, 2015, 10:00 am
http://kushkikritiyan.blogspot.in/नहाकर नज्म निकली है, बालकोनी में आज अपनी ।मेरी कलम को मिली वज्म , बालकोनी में आज अपनी ॥ बन गया चाय का कप, अचानक मदिरा का प्याला उम्र भर की फ़िक्र हुई ख़त्म,  बालकोनी में आज अपनी । करे आजाद जुल्फों को, खींचकर तौलिया ऐसे गिरा बिजुली दिया है जख्म, बालकोनी ...
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  December 26, 2014, 10:28 am
पगला बनकर के करें, अगर नौकरी आप । सकल काम अगला करे, बेचारा चुपचाप । बेचारा चुपचाप, काम से डरना कैसा । बने रहो नित कूल, मिलेगा पूरा पैसा । करो काम का जिक्र, फ़िक्र क्या करना रविकर । उंगली चुगली सीख, मौज कर पगला बनकर ॥ ...
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  December 11, 2014, 10:16 am
अ मन भर सोना देह पे, सोना घोड़ा बेंच । राम राज्य आ ही गया, जी ले तू बिन पेंच ।1। हक़ है झक मारौ फिरौ, बिना झिझक दिन रात |लानत भेजौ पुलिस पर, गर कुछ घटै बलात |2। सब मर्जों की दवा है, पुलिस फ़ौज सरकार ।  सावधान खुद क्यों रहें,  इसकी क्या दरकार।3| जीती बाजी बाज ने, नहीं ...
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  December 9, 2014, 1:55 pm
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