"लिंक-लिक्खाड़"

नारायणी दरिद्रता, अच्छे दिन की चाह ।कंगाली कर बैठती, आटा गीला आह ।आटा गीला आह, करम में लोढ़ा पत्थर ।कैसे फिर नरनाह, यहाँ लाये दिन सुन्दर ।भारत दुर्दिन झेल, भाग्य का तू तो मारा ।पॉलिटिक्स ले खेल, लगा के रविकर नारा ॥ ...
"लिंक-लिक्खाड़"...
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  July 18, 2014, 10:27 am
मारे मारे फिर रहे, कृषक उद्यमी लोग । बेमानी लगते हमें, अच्छे दिन के योग । अच्छे दिन के योग, चाइना मुस्काता है । बढ़ा रहा उद्योग, उद्यमी भरमाता है । सस्ता चीनी माल, बिक रहा द्वारे द्वारे । रविकर रहा खरीद, माल ना बिके हमारे ॥ ...
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  July 13, 2014, 7:57 pm
कोरी लफ्फेबाजियां, फौरी करे निदान । यह ढफोरशंखी क्रिया, करे राह आसान । करे राह आसान, बैठ के गप्प मारिये । भली करें भगवान, पीढ़ियाँ सात तारिये । बुरा उद्यमी व्यक्ति, भला करता जो चोरी । कालिख से ही रंग, रखे क्यों चादर कोरी ।। ...
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  July 11, 2014, 6:03 pm
फिरे सड़क पर सिरफिरे, आँखें रहे तरेर । लूट रहे रमणी मणी, गली गली अंधेर । गली गली अंधेर, क्वाँर के ये उन्मादी ।मना रहे नित जश्न, त्रस्त आधी-आबादी । करे नियंत्रित कौन, मौन मत रहना रविकर । कुत्तों को पहचान, जोर से मारो पत्थर ॥ ...
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  July 9, 2014, 11:02 am
छुवे हौसला आसमाँ, लाया तारे तोड़ । जोड़-तोड़ में धूर्त-जन, शकुनि-नीति से होड़। शकुनि नीति से होड़, दौड़ में शशक हमेशा। रहा युगों से हार, यही दे रहा सँदेसा । हारे अति-विश्वास, बहाये रविकर टसुवे । कर उद्यम अनवरत, जीतते हरदम कछुवे ॥ ...
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  July 1, 2014, 12:34 pm
टके टके पे टकटकी, लटके झटके देख ।मटके मँहगाई मुई, व्याकुल पंडित शेख । व्याकुल पंडित शेख, आज भी भारत भूखा। घाटे का आलेख, स्रोत्र आमद का सूखा ।  संभावना अपार, बढे आगे बेखटके । सत्ता करे सुधार, करे कुछ निर्णय हट के ।। ...
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  June 30, 2014, 11:55 am
दुनिया की सबसे बड़ी, बीमारी है भूख । दवा समझ खा रोटियां, देह अन्यथा सूख। देह अन्यथा सूख, नित्य परहेज जरूरी।है संक्रामक रोग, मिटा के रविकर दूरी ।चल चूल्हे पर सेंक, करोड़ों रोगी बाकी । रोटी एक खिलाय, चिकित्सा कर दुनिया की ॥ ...
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  June 9, 2014, 11:18 am
कैसे होव दुर्दशा, कैसे होव मौत । आशंका होवे सही, विभीषिका तू न्यौत । विभीषिका तू न्यौत, करा दे भारी दंगा । नहिं मोदी सरकार, नहीं इतराय तिरंगा । जन गण में हो खौफ, देश कुछ बिगड़े ऐसे । मैं हो जाऊं सत्य, नाम मेरा हो कैसे ॥ ...
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  June 7, 2014, 6:53 pm
दासी सा बर्ताव भी, नहीं दिलाता ताव |किन्तु उपेक्षा से मिलें, असहनीय से घाव |असहनीय से घाव, उदासी झट पहचाने |वह संवेदनशील, पराये अपने जाने |मकु आकर्षण प्यार, लगे उसको आभासी । लेकिन लेती ताड़, उपेक्षा और उदासी ॥ ...
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  June 6, 2014, 9:57 am
गुस्सा आता है जिन्हें, उनको सच्चा मान |झूठे लेकर घूमते,  मुखड़े पर मुस्कान |मुखड़े पर मुस्कान, चार सौ बीसी करते |मुख में रहते राम, बगल में छूरी धरते |रविकर मीठा बोल, नित्य धोखा दे जाता |वह तो है अतिधूर्त, उसे कब गुस्सा आता -...
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  June 5, 2014, 10:55 am
बोकारो में बम फटे, लोकतंत्र पर घाव |गिरीडीह में पर हुवे, अच्छे भले चुनाव |अच्छे भले चुनाव, करें उत्पात नक्सली |रविकर पीठासीन, देह में मची खलबली |साथ फीसदी वोट, शक्ति मतदाता झोंका |खा बैलट की चोट, मरेगा नक्सली बोका ||...
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  April 18, 2014, 1:17 pm
हवा हवाई योजना, हवा हवाई बात |भूला सारी मुश्किलें, यह मानुष बदजात |यह मानुष बदजात, चुनावी बेला आई |भूला भ्रष्टाचार, भूल बैठा मँहगाई |हुआ नशे में चूर, कुँआ देखे ना खाईं | जाति-धर्म पर वोट, बुद्धि-बल हवा-हवाई ||...
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  March 21, 2014, 10:56 am
होली की शुभकामनायें- रविकर प्रवास पर झाड़ू झूमे अर्श पर, पंजे में लहराय |लेकिन कूड़ा फर्श पर, कैसे बाहर जाय-कैसे बाहर जाय, डाल दे पानी इसपर |पड़ा पड़ा सड़ जाय, होय कीचड़ सा सड़कर |कीचड़ में फिर कमल, कमल लक्ष्मी पग चूमे |पवन चले उनचास, मास दो झाड़ू झूमे ||...
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  March 14, 2014, 10:21 am
करे 'करेला'रैलियां, दूर करे मधु'मेह | छोड़-छाड़ के खा'मियाँ, चढ़ा हरेरी देह |चढ़ा हरेरी देह, छोड़ दे चीकू केला | छोड़ो आलू 'आम', 'हाथ'का छोड़ो ठेला |हराहरा दे साग, शरीफा मीठा अखरे |कर रविकर रसपान, करेला दिल से तक रे ||...
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  March 5, 2014, 10:45 am
 रविकर भकुआ एक, आपकी लेत बलैयाभैया भ्रष्टाचार भी, भद्रकार भरपूर |वाँछित करे विकास यह, मुँह में मियाँ मसूर |मुँह में मियाँ मसूर, कर्मरत कई आलसी | देश-काल गतिमान, बदलना नहीं पॉलिसी |रविकर भकुआ एक, "आप"की लेत बलैया |रहा जमाना देख, दाग भी अच्छे भैया ॥  रा...
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  February 26, 2014, 9:19 am
केजरीवाल की खुजली और गैस के दामZEAL  ZEAL  बानी केजरि वाल की, प्रश्न रही है दाग |नमो न मो दी गैस नूँ , आग लगा के भाग |आग लगा के भाग, भाग सरकार छोड़ के |गुणा-भाग में लाग, नियम कानून तोड़ के |है सांसत में जान, बिगड़ती राम-कहानी |खाँसी से नादान, भगाएगा अम्बानी ||दे गीदड़ भी छेड़, ताकती ती...
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  February 24, 2014, 12:16 pm
कौआ लाय सुराज, सफल कोयल मन्सूबे-कौआ कोयल बाज में, होड़ मची है आज |कोयल के अंडे पले, कौआ लाय सुराज |  कौआ लाय सुराज, सफल कोयल मन्सूबे |हर सूबे में खेल, घोसला साला डूबे |बाज आय नहिं बाज, आज भी इसका हौवा |बहुमत कैसे पाय, उधर कौआता कौआ ||  दिल्ली दिखी अवाक, आप मस्ती में झूमे-...
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  February 22, 2014, 9:46 am
दिल्ली दिखी अवाक, आप मस्ती में झूमे-खरी खरी कह हर घरी, खूब जमाया धाक |अपना मतलब गाँठ के, किया कलेजा चाक |किया कलेजा चाक, देश भर में अब घूमे |दिल्ली दिखी अवाक, आप मस्ती में झूमे |डाल गए मझधार, धोय साबुन से कथरी |मत मतलब मतवार, महज कर रहे मसखरी || हमारे महानगरों में कूड़ा कचरा एक भ...
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  February 21, 2014, 10:16 am
कोई नया नहीं है बहुत पुराना है फिर से आ रहा है वही दिनसुशील कुमार जोशी  उल्लूक टाईम्सभैया जी शुभकामना, रहे आज तक झेल |चले पचासों वर्ष यह, तुम दोनों का खेल |तुम दोनों का खेल, मेल यह दौड़े सरपट |जनम जनम की जेल, मुहब्बत-खटपट चटपट |रविकर बाइस साल, कृपा कर दुर्गे मैया |सकुशल कुल ...
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  February 19, 2014, 9:20 am
भैया भ्रष्टाचार भी, भद्रकार भरपूर |वाँछित करे विकास यह, रहे व्यर्थ तुम घूर |रहे व्यर्थ तुम घूर, कर्मरत कई आलसी |करे देश गतिमान, बिगाड़ो नहीं पॉलिसी |रविकर भकुआ एक, आपकी लेत बलैया |रहा जमाना देख, दाग हैं अच्छे भैया ॥ ...
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  February 18, 2014, 10:03 am
"ओ बी ओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव"अंक-35 कुण्डलियाँ(१)दीखे अ'ग्रेसर खड़ा, छात्रा छात्र तमाम ।करें एकश: अनुकरण, आवश्यक व्यायाम ।आवश्यक व्यायाम, भंगिमा किन्तु अनोखी ।कई डुबाएं नाम, हरकतें नइखे चोखी ।वहीँ ईंट पर बाल, लगन से रविकर सीखे ।ऊँची भरे उड़ान, सहज अनुकर्ता द...
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  February 17, 2014, 9:07 am
स्वर्णयोनिः वृक्षः शमीराजीव कुमार झा देहात  रोचक है यह तरु शमी, यहाँ अग्नि का वास |यज्ञ धर्म इतिहास में, रखे जगह यह ख़ास ||दारु दाराधीन पी, हुआ नदारद मर्द-"ओ बी ओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव"अंक-34दोहादारु दाराधीन पी, हुआ नदारद मर्द  |दारा दारमदार ले, मर्दे गिट्टी गर्द ||...
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  January 23, 2014, 9:20 am
 कुक्कुर खाँसी आपको, किन्तु परेशां देश |*कूटशासनी व्यवस्था, बढ़ा रही नित क्लेश |*धोखे का राज्य बढ़ा रही नित क्लेश, पेश कर कपट नीतियां-झपट रहे विश्वास, अनोखी अजब रीतियाँ-लोकसभा हित व्यग्र, दिखे आडम्बर आतुर |करने चला शिकार, शिकारी बनता कुक्कुर || भागे जिम्मेदार, अराजक द...
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  January 21, 2014, 4:33 pm
गोली मारो पुलिस को, नहीं कटाओ नाक |धाक जमाने को गिरे, आप गिरेबाँ झाँक  |आप गिरेबाँ झाँक, अराजक सोच दीखती |नक्सल सा आतंक, मचाना आप सीखती |फेल हुई सरकार, विपक्षी जैसी बोली |धरना कारोबार, शुरू है देना गोली || दारु दाराधीन पी, हुआ नदारद मर्द-"ओ बी ओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव"अंक...
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  January 20, 2014, 2:19 pm
बेंचे धर्म-इमान, ख़रीदे कुल मुख्तारी -हमाहमी हरहा हिये, लिये जाति-च्युत होय |ऐसी अवसरवादिता, देती साख डुबोय |देती साख डुबोय, प्रबंधन कौशल भारी |बेंचे धर्म-इमान, ख़रीदे कुल मुख्तारी |रविकर जाने मर्म, आप की जाने महिमा |आम आदमी तंग, वक्त भी सहमा सहमा || राहुल ने कहा,गंज...
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  January 19, 2014, 11:08 am
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