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Blog: "लिंक-लिक्खाड़"

Blogger: dinesh chandra gupta ravikar
हुआ #नाकामबन्दा तो, करे वह #इश्ककी पूजा।बदलकर नाम अपना वह रखे उपनाम ही दूजा।गजल गाता, घुमक्कड़ बन, सदा दारू पिये उम्दा-#मुकम्मल#इश्कफेरे में, रहे हर वक्त मुँह सूजा।।... Read more
clicks 14 View   Vote 0 Like   3:48am 2 Aug 2019 #
Blogger: dinesh chandra gupta ravikar
सुगर बढा तो बढ़ गया, रविकर अंतरद्वंद।मीठा खाना ही नहीं, अपितु बोलना बन्द।।बेवकूफ वाचाल है, समझदार हैं मौन।उस संस्था परिवार को, बचा सके फिर कौन।।वृद्धावस्था का नहीं, सही सहारा पूत।सही सहारा तो बहू, दे सुख-शांति अकूत।।अगर शिकायत एक से, करिये वार्तालाप।किन्तु कई से है अगर... Read more
clicks 11 View   Vote 0 Like   9:28am 8 Jul 2019 #
Blogger: dinesh chandra gupta ravikar
नानी के घर ही नहीं, छुट्टी किया व्यतीत।दादी के घर भी गया, तोड़ पुरातन रीत।।प्यार एकतरफा जहाँ, पुष्पित होती चाह।दोतरफे का हश्र तो, रविकर केवल व्याह।।😊सदियों से रविकर बड़े, रहे बड़प्पन ओढ़।अगर बिछाते तो कभी, उन्हें न होता कोढ़।।हर साया घोषित करे, खुद को असली राम।इंतजार रविकर ... Read more
clicks 10 View   Vote 0 Like   11:17am 19 Jun 2019 #
Blogger: dinesh chandra gupta ravikar
अॉफिस समय से आ गया, आखिर खुशी का मामला।दिनभर लतीफे, मौज-मस्ती, चाय-पानी भी चला।हँसते हुए रविकर प्रफुल्लित, एक दिन लौटा मगरकारण बताते रात बीती, पर न टल पाई बला।रहते हुए मेरे भला, कैसे प्रफुल्लित हो रहेहै कौन जिसने दी खुशी पति हो रहा क्यों बावला।पत्नी परेशां प्यार से पुचक... Read more
clicks 43 View   Vote 0 Like   6:07am 22 Nov 2018 #
Blogger: dinesh chandra gupta ravikar
खुशी तो हड़बड़ी में थी, घरी भर भी नहीं ठहरी।मगर गम को गजब फुरसत, करे वो मित्रता गहरी।।उदासी बन गयी दासी दबाये पैर मुँह बायेसुबह तक तो गिने तारे, कटे काटे न दोपहरी।।हुआ यूँ शान्तिमय जीवन, तड़प मिट सी गई तन की।सहन ताने करे नियमित, व्यथा कैसे कहे मन की।सवेरे काम पर जाता, अँधेरे ... Read more
clicks 31 View   Vote 0 Like   6:46am 23 Oct 2018 #
Blogger: dinesh chandra gupta ravikar
खुद से नाड़ा बाँध ले, वो ही बाल सयान।ढीला होने दे नहीं, वही तरुण बलवान।।मित्र सुदामा के चरण, धुलें द्वारिकानाथ।शक्ति कहाँ थी अन्यथा, बैठ सके वो साथ।।जब #दारू हर सोच को, करे प्रकट बिंदास।तब अपनी #दारा करे, बन्द सकल बकवास।।करें न सज्जन खुद प्रकट, नापसन्द व्यवहार।दे... Read more
clicks 29 View   Vote 0 Like   5:47am 16 Oct 2018 #
Blogger: dinesh chandra gupta ravikar
रंगमंच पर दो जमा, रविकर ऐसा रंग। अश्रु बहे, पर्दा गिरे, ताकि तालियों संग।।रस्सी जैसी जिंदगी, तने तने हालात |एक सिरे पे ख्वाहिशें, दूजे पे औकात ||धत तेरे की री सुबह, तुझ पर कितने पाप।ख्वाब दर्जनों तोड़ के, लेती रस्ता नाप।।चंद चुनिंदा मित्र रख, जिंदा रख हर शौक।हारे तब बढ़ती उ... Read more
clicks 62 View   Vote 0 Like   9:14am 4 Jun 2018 #
Blogger: dinesh chandra gupta ravikar
शुभ अवसर देता सदा, सूर्योदय रक्ताभ।हो प्रसन्न सूर्यास्त यदि, उठा सके तुम लाभ।।रविकर उफनाती नदी, उफनाता सद्-प्यार।कच्चा घट लेकर करे, वो वैतरणी पार।।सूर्य उगा प्रेमी मिले, आलिंगन मजबूत।अस्ताचल को चल पड़े, आ पहुँचे यमदूत।।जीवन की संजीवनी, हो हौंसला अदम्य |दूर-दृष्टि, प्र... Read more
clicks 63 View   Vote 0 Like   5:06am 4 Jun 2018 #
Blogger: dinesh chandra gupta ravikar
ड्राफ्ट दोहा दुर्बल शाखा वृक्ष की, पर "गुरु-पर"पर नाज | कभी नहीं नीचे गिरे, उड़े खूब परवाज ||  कुछ तो गुरु में ख़ास है, ईर्ष्या करते आम | वृक्ष देख फलदार वे, लेते पत्थर थाम ||शब्द-शब्द में भाव का, समावेश उत्कृष्ट |शिल्प देखते ही बने, हर रचना सारिष्ट ||यूँ ही गुरुवर रचें , ... Read more
clicks 52 View   Vote 0 Like   5:32am 11 May 2018 #
Blogger: dinesh chandra gupta ravikar
बत्ती कली सुबुद्धि जब, गुल हो जाय हुजूर।चोर भ्रमर दीवानगी, मौज करें भरपूर।।कलियों के सौंदर्य का, करे मधुप गुणगान।गुल बनते ही वह कली, करे कैद ले जान।तेज छात्र मैं मैथ का, करना कठिन प्रपोज़।तुम हो मेरी प्रियतमा, करता रोज सपोज।।बिजली गुल, गुल का नशा, और शोर-गुल तेज।बाँट गुल... Read more
clicks 90 View   Vote 0 Like   10:10am 2 May 2018 #
Blogger: dinesh chandra gupta ravikar
उधर तमन्ना रो उठी, इधर सिसकती पीर।कहाँ करे फरियाद फिर, रविकर अधर अधीर।।लगी "महान गरीयसी", सोच महानगरीय।किन्तु महानगरीय दिल, की हालत दयनीय।।उछल-उछल अट्टालिका, ले शहरों को घेर।वायु-अग्नि-क्षिति-जल-गगन, आँखे रहे तरेर।।सोते सूखे प्राकृतिक, भोजन डब्बा बंद।करे शोरगुल शाँत... Read more
clicks 68 View   Vote 0 Like   5:07am 11 Apr 2018 #
Blogger: dinesh chandra gupta ravikar
सह सकता सारे सितम, सुन सम्पूरक स्नेह।किन्तु कृपा-करुणा-दया, सह न सके यह देह।।इंद्रजाल पर भी किया, जो कल तक विश्वास।उसे हकीकत भी नहीं, अब आती है रास।।हौले हौले हौसले, हों प्रियतम के पस्त।हो ली होली में प्रिया, भाँग छान अलमस्त।।पहले कुल पत्ते झड़े, फिर गिरते फल-फूल।पुन: यत्... Read more
clicks 60 View   Vote 0 Like   10:54am 22 Mar 2018 #
Blogger: dinesh chandra gupta ravikar
शुभ अवसर देता सदा, सूर्योदय रक्ताभ।हो प्रसन्न सूर्यास्त यदि, उठा सके तुम लाभ।।असफलता बोती रहे, नित्य सफलता बीज।उगे बढ़े निश्चय फले, रे रविकर मत खीज।।रविकर इच्छा स्वप्न का, यूँ मत करना खून।बल्कि काट नाखून सम, पा ले खुशी सुकून।रस्सी जैसी जिंदगी, तने तने हालात |एक सिरे पे ख... Read more
clicks 64 View   Vote 0 Like   7:51am 26 Feb 2018 #
Blogger: dinesh chandra gupta ravikar
अदालत में गवाही हित निवेदन दोस्त ठुकराया।रहे चौबीस घण्टे जो, हमेशा साथ हमसाया।सुबह जो रोज मिलता था, अदालत तक गया लेकिनवहीं वह द्वार से लौटा, समोसा फाफड़ा खाया।बहुत कम भेंट होती थी, रहा इक दोस्त अलबेलाअदालत तक वही पहुंचा, हकीकत तथ्य बतलाया।बदन ही दोस्त है पहला, पड़ा रहता ... Read more
clicks 59 View   Vote 0 Like   10:10am 19 Feb 2018 #
Blogger: dinesh chandra gupta ravikar
कैलाश पति त्रिपुरारि भोलेनाथ भीमेश्वर नमः।नटराज गोरापति जटाधारी किरातेश्वर नमः।जागेश बैजूनाथ पशुपति सोम-नागेश्वर नमः।भूतेश त्रिपुनाशक नमः भद्रेश रामेश्वर नमः।।... Read more
clicks 60 View   Vote 0 Like   9:49am 13 Feb 2018 #
Blogger: dinesh chandra gupta ravikar
पानी मथने से नहीं, निकले घी श्रीमान |साधक-साधन-संक्रिया, ले सम्यक सामान ||सत्य बसे मस्तिष्क में, होंठों पर मुस्कान।दिल में बसे पवित्रता, तो जीवन आसान।।खड्ग तीर चाकू चले, बरछी चले कटार।कौन घाव गहरा करे, देखो ताना मार ।।मार बुरे इंसान को, जिसकी है भरमार।कर ले खुद से तू शुरू, ... Read more
clicks 118 View   Vote 0 Like   4:40am 5 Feb 2018 #
Blogger: dinesh chandra gupta ravikar
मुल्क सुपर पावर बने, जनगणमन धनवान।सारे भोंपू बेंच दे, यदि यह हिंदुस्तान।|करे आत्महत्या कृषक, दे किस्मत को दोष।असली दोषी मस्त क्यों, क्यों विपक्ष में रोष।।रस्सी रिश्ते एक से, अधिक ऐंठ उलझाय।हो जाये यदि ऐंठ कम, लड़ी-लड़ी खुल जाय ।।रस्सी जैसी जिंदगी, तने तने हालात।एक सिरे प... Read more
clicks 84 View   Vote 0 Like   9:22am 15 Jan 2018 #
Blogger: dinesh chandra gupta ravikar
मैंने* तुझसे कहा, तूने* मुझसे कहा।तू तो* समझी नहीं, मैं भी* उलझा रहा।।देती* चेतावनी, ठोकरें भी लगींतू तो* पत्थर उठा किन्तु देती बहा।तंग करती रही, हिचकियां भी मे*री पानी* पी पी मगर तू तो* लेती नहा।दाँत के बीच मे जीभ मेरी फँसीपर लगाती रही तू सदा कहकहा।।देख रविकर रहा, गम के आंस... Read more
clicks 81 View   Vote 0 Like   9:28am 8 Jan 2018 #
Blogger: dinesh chandra gupta ravikar
सच्चे शुभचिंतक रखें, तारागण सा तेज़।अँधियारे में झट दिखें, रविकर इन्हें सहेज।।शीशा सिसकारी भरे, पत्थर खाये भाव।टकराना हितकर नहीं, बेहतर है अलगाव।।खोज रहा बाहर मनुज, राहत चैन सुकून।ताप दाब मधुमेह कफ़, अन्दर करते खून।।ठोकर खा खा खुद उठा, रविकर बारम्बार।लोग आज कहते दिखे... Read more
clicks 78 View   Vote 0 Like   9:16am 30 Nov 2017 #
Blogger: dinesh chandra gupta ravikar
जब मैल कानों में भरा, आवाज देना व्यर्थ तब।आवाज़ कब अपनी सुने, मन में भरा हो मैल जब।करता नजर-अंदाज खुद की गलतियाँ रख पीठ पे-पर दूसरे की गलतियों पर रह सका वह मौन कब।।... Read more
clicks 114 View   Vote 0 Like   8:25am 9 Nov 2017 #
Blogger: dinesh chandra gupta ravikar
जिंदा मिला तो मारते, हम सर्प चूहा देश में।लेकिन उसी को पूजते, पत्थर शिला के वेश में।कंधा दिया जब लाश को तो प्राप्त करते पुण्य हमयद्यपि सहारे बिन जिया वह लाश के ही भेष में।।खिचड़ीहुआ गीला अगर आटा, गरीबी खूब खलती है।करो मत बन्धुवर गलती, नहीं जब दाल गलती है।लफंगे देश दुनिया... Read more
clicks 98 View   Vote 0 Like   2:47am 7 Nov 2017 #
Blogger: dinesh chandra gupta ravikar
प्रवंचक दे रहे प्रवचन सुने सब अक्ल के अंधे।बड़े उद्योग में शामिल हुये अब धर्म के धंधे।।अगर जीवन मरण भगवान के ही हाथ में बाबा।सुरक्षा जेड श्रेणी की चले क्यों साथ में बाबा।हमेशा मोह माया छोड़ना रविकर सिखाते जबबना क्यों पुत्र को वारिस बिठाते माथ पे बाबा।।समस्यायें सुना... Read more
clicks 84 View   Vote 0 Like   8:43am 6 Nov 2017 #
Blogger: dinesh chandra gupta ravikar
तलाशे घूर में रोटी, गरीबी व्यस्त रोजी में।अमीरी दूर से ताके डुबा कर रोटियाँ घी में।प्रकट आभार प्रभु का कर, धनी वो हाथ फिर जोड़े।गरीबी वाकई रविकर, कहीं का भी नहीं छोड़े।।विचरते एक पागल को गरीबी दूर से ताकी।कई पागल पड़े पीछे, बड़े बूढ़े नहीं बाकी।प्रकट आभार प्रभु का कर, गरीबी ... Read more
clicks 89 View   Vote 0 Like   9:10am 30 Oct 2017 #
Blogger: dinesh chandra gupta ravikar
जद्दोजहद करती रही यह जिंदगी हरदिन मगर।ना नींद ना कोई जरूरत पूर्ण होती मित्रवर।अब खत्म होती हर जरूरत, नींद तेरा शुक्रियायह नींद टूटेगी नहीं, री जिंदगी तू मौजकर।।व्यवहार घर का शुभ कलश, इंसानियत घर की तिजोरी।मीठी जुबाँ धन-संपदा, तो शांति लक्ष्मी मातु मोरी।पैसा सदा मेहम... Read more
clicks 84 View   Vote 0 Like   5:50am 16 Oct 2017 #
Blogger: dinesh chandra gupta ravikar
दानवीर भरसक भरें, रविकर भिक्षा-पात्र।करते इच्छा-पात्र पर, किन्तु कोशिशें मात्र।।भरता भिक्षा-पात्र को, दानी बारम्बार।लेकिन इच्छा-पात्र पर, दानवीर लाचार।।है सामाजिक व्यक्ति का, सर्वोत्तम व्यायाम।आगे झुककर ले उठा, रविकर पतित तमाम।रखे सुरक्षित जर-जमीं, रविकर हर धनवान... Read more
clicks 79 View   Vote 0 Like   7:41am 26 Sep 2017 #
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