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"लिंक-लिक्खाड़"

राम-भरोसे चल पड़े, फैलाने सुविचार । धर्म-विरोधी ले उठा, हाथों में हथियार ।हाथों में हथियार, कर्म तो गजब-घिनौने । इन सब से वे ठीक, बने जो आधे-पौने । धर्म न्याय विज्ञान, भूमि भी इनको कोसे । दुनिया यह तूफ़ान, झेलती राम-भरोसे ॥ ...
"लिंक-लिक्खाड़"...
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  March 15, 2016, 2:12 pm
गोटी दर गोटी पिटी, मिली हार पे हार।घाट घाट घाटा घटा, घुट घुट घोटी लार।घुट घुट घोटी लार, किया घाटे का सौदा। भूत रहा नाकाम, दाँव पर लगा घरौंदा।सतत दुखद परिणाम, लगे है किस्मत खोटी। भागे रविकर भूत, बचा ना सका लंगोटी।।...
"लिंक-लिक्खाड़"...
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  March 14, 2016, 10:58 am
नहीं कह रहा मैं इसे, कहता फौजी वीर |अंदर के खंजर सहन, या सरहद के तीर ||नहीं कह रहा मैं इसे, कह के गए बुजुर्ग |जायज है सब युद्ध में, रखो सुरक्षित दुर्ग ||नहीं कह रहा मैं इसे,कहें बड़े विद्वान |लिए हथेली पर चलो, देश धर्म हित जान ||नहीं कह रहा मैं इसे,कहते रहे कबीर |क्या लाया क्या ले गया...
"लिंक-लिक्खाड़"...
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  March 4, 2016, 9:04 am
सोया घोड़ा बेच के, लुटा माल असबाब |रोये माथा पीट के, टूट गए सब ख़्वाब |टूट गए सब ख़्वाब, उसे रविकर समझाते |निद्रा मृत्यु समान, नींद में पैर हिलाते |मान अन्यथा लाश, सजा दे चिता निगोड़ा |दुनिया तो बदनाम, बेचती सोया घोड़ा ||...
"लिंक-लिक्खाड़"...
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  February 29, 2016, 4:11 pm
(1)दो सौ इक्यावन लगे, फोन बुकिंग आरम्भ।दिखा करोड़ों का यहाँ, बेमतलब का दम्भ। बेमतलब का दम्भ, दर्जनों बुक करवाये।नोचे बिल्ली खम्भ, फोन आये ना आये।मुफ्तखोर उस्ताद, दूर रहता है कोसों।कौड़ी करे न खर्च, कहाँ इक्यावन दो सौ।।(2)धोखा खाने का मजा, तुम क्या जानो मित्र।नहीं भरोसा तु...
"लिंक-लिक्खाड़"...
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  February 23, 2016, 10:06 am
डंडे पर झंडे फहर, लहर लहर लहराय |देशद्रोहियों पे कहर, पर उनको ना भाय |पर उनको ना भाय, ब्लैक आउट कर देता |पप्पू भाय अघाय, आप अब्बा से नेता |रविकर रहा उबाल, खोज अफजल के अंडे |खाए नमक लगाय, गिने फिर जाके डंडे ||...
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  February 22, 2016, 12:25 pm
मिला समर्थन पाक से, जे एन यू में हर्ष।छात्र वहाँ के साथ में, काँखे भारत वर्ष।काँखे भारत वर्ष, "पाक"है साफ़ कन्हैया ।देशद्रोह आरोप, नकारे पाकी भैया।देवासुर संग्राम, करे वह सागर मंथन। अमृत रहा निकाल, तभी तो मिला समर्थन।।...
"लिंक-लिक्खाड़"...
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  February 19, 2016, 11:02 am
गौ माता का दूध तो, है ही अमृत तुल्य |तेरा गोबर मूत्र भी, औषधि रूप अमूल्य |औषधि रूप अमूल्य, गाय इक और दुधारू| ||करदाता वह गाय, हमेशा खुद पर भारू |कर शोषण सरकार, बनी है भाग्य विधाता |बकरी पीती दूध, दुही जाये गौ माता ||...
"लिंक-लिक्खाड़"...
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  February 17, 2016, 9:52 am
गौ माता का दूध तो, है ही अमृत तुल्य |जीवन भर देती रहे,गोबर मूत्र अमूल्य |गोबर मूत्र अमूल्य, दूसरी गौ सरकारी ||करदाता है नाम, बोझ भारी से भारी |शोषण पर भी आह, नहीं रविकर भर पाता |बकरी खातिर दूध, दुही जाये गौ माता ||...
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  February 17, 2016, 9:52 am
भ्रम फ़ैलाने में लगे, बड़े बड़े श्रीमंत।कहें हकीकत राय पर, अपना झूठ तुरंत।अपना झूठ तुरंत, नहीं होते शर्मिंदा।मरता गया जमीर, किन्तु गद्दारी जिन्दा।अफजल गुरु घंटाल, आजकल इसी बहाने।चले बहाने रक्त, सियासी भ्रम फ़ैलाने।।...
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  February 16, 2016, 10:58 am
घनाक्षरी श्वेत पट में लिपट, धवलहार धारिणीवीणा लिए पदम् पे, शारदे विराजती।पूजते त्रिदेव नित, इंद्र वक्रतुंड यमवरुण आदि साथ ले, उतारते आरती।अंधकार दूर कर, ज्ञान का उजेर भरमूढ़ द्वार पर पड़ा, त्राहिमाम भारती।पंचमी बसंत आज, चहुँओर रंग रासजड़ भी चैतन्य होय, जय हो उच्चारती।...
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  February 15, 2016, 11:01 am
बेटी दामाद के साथ हम दोनों कुण्डलियाँ छंद अभिभावक अभिभूत हैं, व्याह हुआ संपन्न । सदा सुहागिन मनु रहे,  जोड़ी रहें प्रसन्न। जोड़ी रहें प्रसन्न, दुलारी बिटिया रानी। करते कन्यादान, नहीं फिर भी बेगानी । पूरे फेरे सात, प्रज्वलित पावन पावक। रखो वचन ...
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  February 4, 2016, 5:37 pm
सुनते जब नव चुटकुला, हँसते हम तत्काल । किन्तु दुबारा क्यूँ  हंसें,  हुआ पुराना माल । हुआ पुराना माल, मगर चिंता जब आती। बिगड़ जाय सुरताल, हमें सौ बार रुलाती। भिन्न भिन्न व्यवहार, नहीं रविकर यूँ चुनते।चिंता उसी प्रकार, चुटकुला जैसे सुनते।।...
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  February 3, 2016, 3:41 pm
(१)पढ़ो वेदना वेद ना, कम कर दो परिमाण |रविकर तू परहित रहित, फिर कैसे निर्वाण ||(२)मुश्किल मे उम्मीद का, जो दामन ले थाम |जाये वह जल्दी उबर, हो बढ़िया परिणाम ||(३)छलिया तूने हाथ में, खींची कई लकीर |मैं भोला समझा किया, इनमे ही तक़दीर ||(४)करे बुराई विविधि-विधि, जब कोई शैतान |चढ़ी महत्ता आप...
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  February 2, 2016, 4:07 pm
देवदारों ने नहीं अब तक, भला कुछ भी किया  आम-इमली ही भले हैं, क्यों चढ़े हो चीड़ पे । गलतियों से जो नहीं, कुछ सीख पाये आजतक आज ऐसे ज्ञानियों की, क्या जरुरत नीड़ पे |हर तरफ संगीत की दीवानगी है शोर है मंडली लेकिन नई फंसती दिखे हर मीड़ पे ।  छूट जाते जब अध...
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  February 1, 2016, 11:44 am
आर्थिक-तंगी की वजह, गई पढाई छूट |आर्थिक तंगी की वजह, पी लेते दो घूँट | पी लेते दो घूँट, नशा छोड़ा ना जाये |देते रोज उड़ाय, कमाकर जो भी लाये |बड़ी बुरी तस्वीर, आइना देखे नंगी |रहा नशा नहिं छूट, वाह री आर्थिक तंगी ||...
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  January 31, 2016, 11:43 am
 गलती होने पर करो, दिल से पश्चाताप |हो हल्ला हरगिज नहीं, हरगिज नहीं प्रलाप |हरगिज नहीं प्रलाप, हवाला किसका दोगे |जौ-जौ आगर विश्व, हँसी का पात्र बनोगे |ऊर्जा-शक्ति सँभाल, नहीं दुनिया यूँ चलती |तू-तड़ाक बढ़ जाय, जीभ फिर जहर उगलती ||...
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  January 29, 2016, 10:15 am
इक झटके में टूटता, जमा हुआ विश्वास।जिसे बनाने में हमें, लगे अनगिनत मास।लगे अनगिनत मास, बड़ी मुश्किल से साधा।अब तक रखा सँभाल, दूर करके हर बाधा।अजब गजब विश्वास, बदल लेता झट खेमें।रविकर हुआ उदास, तोड़ता इक झटके में ||...
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  January 28, 2016, 11:27 am
मेरे हिन्दुस्तानियों, मेल-जोल का वक्त |मनमुटाव हरगिज नहीं, नहीं बहाना रक्त |नहीं बहाना रक्त,  बहाना नहीं बनाना |माना नाना भेद, किन्तु सबको समझाना |आतंकी माहौल, फटें बम साँझ-सवेरे  |सजग रहें हम लोग, सजग ज्यूँ योद्धा मेरे |-...
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  January 27, 2016, 4:34 pm
ऊपर वाले के यहाँ, कहाँ कभी अंधेर |सुनते थोड़ी देर से, वे भक्तों की टेर |वे भक्तों की टेर, जून की भीषण गरमी |भक्त मांगते ठंढ, हवा में थोड़ी नरमी |केवल महिने पाँच, आपकी इच्छा टाले |फिर दें छप्पर फाड़, ठंड फिर ऊपर वाले ||...
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  January 25, 2016, 12:21 pm
फेसबुक पर मेरी टिप्पणियां (१)कटवाने से क्या घटे, दुनिया में जेहाद।भर दुनिया में हैं डटे, बगदादी उस्ताद।बगदादी उस्ताद, वहाँ दाढ़ी कटवाई।गला काट आजाद, यहाँ कर देते भाई।अस्मत लेते लूट, और फिर देते बटवा।मिली धर्म से छूट, मौज फिर करते कटवा।(२)जीते जी तो ना मिली, किन्तु मिले ...
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  January 22, 2016, 10:15 am
(1)लाम बंद हैं सिरफिरे, फैलाएं आतंक।माँ-बहनों के बदन पर, स्वयं मारते डंक।स्वयं मारते डंक, मचाएं कत्लो-गारद।मुल्ला पंडित मौन, मौन विज्ञान विशारद। आएंगे बरबंड, तनिक रफ़्तार मंद है |  मियां म्यान दरम्यान, किया इस्लाम बंद है।(२)असली नकली में फंसा, कभी नही शैतान।जुल्म सदा श...
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  January 21, 2016, 4:40 pm
सज्जन रहते व्यस्त खुद, लंद-फंद से दूर |सत्ता को क्या फ़ायदा, बनते बोझ जरूर |बनते बोझ जरूर, काम के चोर-उचक्के |लोकतंत्र मगरूर, कार्यकर्ता ये पक्के |सत्ता की दुत्कार, इसी से सज्जन सहते |दुर्जन सत्ता पास, दूर अति सज्जन रहते ||...
"लिंक-लिक्खाड़"...
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  January 20, 2016, 11:15 am
जल्लू कट्टू पर रहे, फिर से उठा सवाल |लेकिन बकरा-ईद पर, सदा छुपाते खाल |सदा छुपाते खाल, इसी पेटा को ले लो |चाहे करो हलाल, किन्तु पशु से मत खेलो |प्रगतिशील ये लोग, किराये के हैं टट्टू |करते रहें प्रलाप, खेलिए जल्लू कट्टू ||...
"लिंक-लिक्खाड़"...
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  January 12, 2016, 4:06 pm
सोलह आना सत्य है, है अशांति चहुँओर |छली-बली से त्रस्त हैं, साधु-सुजन कमजोर | साधु-सुजन कमजोर, आइये होंय इकठ्ठा |उनकी जड़ में आज, डाल दें खट्टा-मठ्ठा |ऋद्धि-सिद्धि सम्पत्ति, होय फिर सुखी जमाना |मंगलमय नववर्ष, होय शुभ सोलह आना ||...
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  December 31, 2015, 10:32 am
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