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"लिंक-लिक्खाड़"

बत्ती कली सुबुद्धि जब, गुल हो जाय हुजूर।चोर भ्रमर दीवानगी, मौज करें भरपूर।।कलियों के सौंदर्य का, करे मधुप गुणगान।गुल बनते ही वह कली, करे कैद ले जान।तेज छात्र मैं मैथ का, करना कठिन प्रपोज़।तुम हो मेरी प्रियतमा, करता रोज सपोज।।बिजली गुल, गुल का नशा, और शोर-गुल तेज।बाँट गुल...
"लिंक-लिक्खाड़"...
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  May 2, 2018, 3:40 pm
उधर तमन्ना रो उठी, इधर सिसकती पीर।कहाँ करे फरियाद फिर, रविकर अधर अधीर।।लगी "महान गरीयसी", सोच महानगरीय।किन्तु महानगरीय दिल, की हालत दयनीय।।उछल-उछल अट्टालिका, ले शहरों को घेर।वायु-अग्नि-क्षिति-जल-गगन, आँखे रहे तरेर।।सोते सूखे प्राकृतिक, भोजन डब्बा बंद।करे शोरगुल शाँत...
"लिंक-लिक्खाड़"...
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  April 11, 2018, 10:37 am
सह सकता सारे सितम, सुन सम्पूरक स्नेह।किन्तु कृपा-करुणा-दया, सह न सके यह देह।।इंद्रजाल पर भी किया, जो कल तक विश्वास।उसे हकीकत भी नहीं, अब आती है रास।।हौले हौले हौसले, हों प्रियतम के पस्त।हो ली होली में प्रिया, भाँग छान अलमस्त।।पहले कुल पत्ते झड़े, फिर गिरते फल-फूल।पुन: यत्...
"लिंक-लिक्खाड़"...
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  March 22, 2018, 4:24 pm
शुभ अवसर देता सदा, सूर्योदय रक्ताभ।हो प्रसन्न सूर्यास्त यदि, उठा सके तुम लाभ।।असफलता बोती रहे, नित्य सफलता बीज।उगे बढ़े निश्चय फले, रे रविकर मत खीज।।रविकर इच्छा स्वप्न का, यूँ मत करना खून।बल्कि काट नाखून सम, पा ले खुशी सुकून।रस्सी जैसी जिंदगी, तने तने हालात |एक सिरे पे ख...
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  February 26, 2018, 1:21 pm
अदालत में गवाही हित निवेदन दोस्त ठुकराया।रहे चौबीस घण्टे जो, हमेशा साथ हमसाया।सुबह जो रोज मिलता था, अदालत तक गया लेकिनवहीं वह द्वार से लौटा, समोसा फाफड़ा खाया।बहुत कम भेंट होती थी, रहा इक दोस्त अलबेलाअदालत तक वही पहुंचा, हकीकत तथ्य बतलाया।बदन ही दोस्त है पहला, पड़ा रहता ...
"लिंक-लिक्खाड़"...
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  February 19, 2018, 3:40 pm
कैलाश पति त्रिपुरारि भोलेनाथ भीमेश्वर नमः।नटराज गोरापति जटाधारी किरातेश्वर नमः।जागेश बैजूनाथ पशुपति सोम-नागेश्वर नमः।भूतेश त्रिपुनाशक नमः भद्रेश रामेश्वर नमः।।...
"लिंक-लिक्खाड़"...
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  February 13, 2018, 3:19 pm
पानी मथने से नहीं, निकले घी श्रीमान |साधक-साधन-संक्रिया, ले सम्यक सामान ||सत्य बसे मस्तिष्क में, होंठों पर मुस्कान।दिल में बसे पवित्रता, तो जीवन आसान।।खड्ग तीर चाकू चले, बरछी चले कटार।कौन घाव गहरा करे, देखो ताना मार ।।मार बुरे इंसान को, जिसकी है भरमार।कर ले खुद से तू शुरू, ...
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  February 5, 2018, 10:10 am
मुल्क सुपर पावर बने, जनगणमन धनवान।सारे भोंपू बेंच दे, यदि यह हिंदुस्तान।|करे आत्महत्या कृषक, दे किस्मत को दोष।असली दोषी मस्त क्यों, क्यों विपक्ष में रोष।।रस्सी रिश्ते एक से, अधिक ऐंठ उलझाय।हो जाये यदि ऐंठ कम, लड़ी-लड़ी खुल जाय ।।रस्सी जैसी जिंदगी, तने तने हालात।एक सिरे प...
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  January 15, 2018, 2:52 pm
मैंने* तुझसे कहा, तूने* मुझसे कहा।तू तो* समझी नहीं, मैं भी* उलझा रहा।।देती* चेतावनी, ठोकरें भी लगींतू तो* पत्थर उठा किन्तु देती बहा।तंग करती रही, हिचकियां भी मे*री पानी* पी पी मगर तू तो* लेती नहा।दाँत के बीच मे जीभ मेरी फँसीपर लगाती रही तू सदा कहकहा।।देख रविकर रहा, गम के आंस...
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  January 8, 2018, 2:58 pm
सच्चे शुभचिंतक रखें, तारागण सा तेज़।अँधियारे में झट दिखें, रविकर इन्हें सहेज।।शीशा सिसकारी भरे, पत्थर खाये भाव।टकराना हितकर नहीं, बेहतर है अलगाव।।खोज रहा बाहर मनुज, राहत चैन सुकून।ताप दाब मधुमेह कफ़, अन्दर करते खून।।ठोकर खा खा खुद उठा, रविकर बारम्बार।लोग आज कहते दिखे...
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  November 30, 2017, 2:46 pm
जब मैल कानों में भरा, आवाज देना व्यर्थ तब।आवाज़ कब अपनी सुने, मन में भरा हो मैल जब।करता नजर-अंदाज खुद की गलतियाँ रख पीठ पे-पर दूसरे की गलतियों पर रह सका वह मौन कब।।...
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  November 9, 2017, 1:55 pm
जिंदा मिला तो मारते, हम सर्प चूहा देश में।लेकिन उसी को पूजते, पत्थर शिला के वेश में।कंधा दिया जब लाश को तो प्राप्त करते पुण्य हमयद्यपि सहारे बिन जिया वह लाश के ही भेष में।।खिचड़ीहुआ गीला अगर आटा, गरीबी खूब खलती है।करो मत बन्धुवर गलती, नहीं जब दाल गलती है।लफंगे देश दुनिया...
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  November 7, 2017, 8:17 am
प्रवंचक दे रहे प्रवचन सुने सब अक्ल के अंधे।बड़े उद्योग में शामिल हुये अब धर्म के धंधे।।अगर जीवन मरण भगवान के ही हाथ में बाबा।सुरक्षा जेड श्रेणी की चले क्यों साथ में बाबा।हमेशा मोह माया छोड़ना रविकर सिखाते जबबना क्यों पुत्र को वारिस बिठाते माथ पे बाबा।।समस्यायें सुना...
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  November 6, 2017, 2:13 pm
तलाशे घूर में रोटी, गरीबी व्यस्त रोजी में।अमीरी दूर से ताके डुबा कर रोटियाँ घी में।प्रकट आभार प्रभु का कर, धनी वो हाथ फिर जोड़े।गरीबी वाकई रविकर, कहीं का भी नहीं छोड़े।।विचरते एक पागल को गरीबी दूर से ताकी।कई पागल पड़े पीछे, बड़े बूढ़े नहीं बाकी।प्रकट आभार प्रभु का कर, गरीबी ...
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  October 30, 2017, 2:40 pm
जद्दोजहद करती रही यह जिंदगी हरदिन मगर।ना नींद ना कोई जरूरत पूर्ण होती मित्रवर।अब खत्म होती हर जरूरत, नींद तेरा शुक्रियायह नींद टूटेगी नहीं, री जिंदगी तू मौजकर।।व्यवहार घर का शुभ कलश, इंसानियत घर की तिजोरी।मीठी जुबाँ धन-संपदा, तो शांति लक्ष्मी मातु मोरी।पैसा सदा मेहम...
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  October 16, 2017, 11:20 am
दानवीर भरसक भरें, रविकर भिक्षा-पात्र।करते इच्छा-पात्र पर, किन्तु कोशिशें मात्र।।भरता भिक्षा-पात्र को, दानी बारम्बार।लेकिन इच्छा-पात्र पर, दानवीर लाचार।।है सामाजिक व्यक्ति का, सर्वोत्तम व्यायाम।आगे झुककर ले उठा, रविकर पतित तमाम।रखे सुरक्षित जर-जमीं, रविकर हर धनवान...
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  September 26, 2017, 1:11 pm
बहस माता-पिता गुरु से, नहीं करता कभी रविकर ।अवज्ञा भी नहीं करता, सुने फटकार भी हँसकर।कभी भी मूर्ख पागल से नहीं तकरार करता पर-सुनो हक छीनने वालों, करे संघर्ष बढ़-चढ़ कर।।किसी की राय से राही पकड़ ले पथ सही रविकर।मगर मंज़िल नही मिलती, बिना मेहनत किए डटकर।तुम्हें पहचानते बेशक...
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  September 18, 2017, 10:33 am
जो जंग जीती औरतों ने आज भी आधी-अधूरी ।नाराज हो जाये मियाँ तो आज भी है छूट पूरी।शादी करेगा दूसरी फिर तीसरी चौथी करेगा।पत्नी उपेक्षा से मरेगी वह नही होगी जरूरी।पड़ी जब आँख पर पट्टी, निभाती न्याय की देवी।तराजू ले सदी चौदह, बिताती न्याय की देवी।मगर जब देवियाँ जागीं, मिला अध...
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  August 26, 2017, 11:39 am
सुना दो राग दरबारी हृदय आघात टल जाये।अनिद्रा दूर हो जाए अगर तू भैरवी गाये।हुआ सिरदर्द कुछ ज्यादा सुना दो राग भैरव तुममगर अवसाद में तो राग मधुवंती बहुत भाये।विहागी राग गा लेना अगर वैराग्य आये तो।अजी मल्हार गा लेना गरम ऋतु जो सताये तो।जलाया राग दीपक से दिया संगीत कारो...
"लिंक-लिक्खाड़"...
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  August 26, 2017, 11:37 am
सरासर झूठ सुन उसका उसे कौआ नहीं काटा।चपाती बिल्लियों को चंट बंदर ठीक से बाँटा।परस्पर लोमड़ी बगुला निभाते मेजबानी जब।घड़े में खीर यह खाया उधर वह थाल भी चाटा।युगों से साथ गेंहूँ के सदा पिसता रहा जो घुन बनाया दोस्त चावल को नहीं जिसका बने आटा।।मरा हीरा कटा मोती किसानों क...
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  August 26, 2017, 11:35 am
कहीं बेनाम हैं रिश्ते, कहीं बस नाम के रिश्ते।चतुर मानुष बनाते हैं हमेशा काम से रिश्ते।मुहब्बत मुफ्त में मिलती सदा माँ बाप से लेकिनलगाये दाम की पर्ची धरे गोदाम में रिश्ते।शुरू विश्वास से होते समय करता इन्हे पक्काअगर धोखा दिया इनको गये फिर काम से रिश्ते।।रहो चुपचाप ग...
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  August 22, 2017, 2:24 pm
ग्राहक तुम्हें मिलते रहें, हर मौत के सामान के ।व्यापार खुब फूले फले संग्राम बर्बर ठान के।जब जर जमीं जोरू सरीखे मंद कारक हो गये।तब युद्ध छेड़े जाति के कुछ धर्म के कुछ आन के।विध्वंश हो होता रहे नुकसान मत रविकर सहो।।हथियार के सौदागरों यूँ खून तुम पीते रहो।।आदेश दे उपदेश द...
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  August 14, 2017, 11:09 am
अजी अब देर क्यों करते, चले आओ चले आओ।प्रतीक्षा हो रही लम्बी, भुलाओ मत चले आओ।।यहाँ तू शर्तिया आये,खबर सुन मौत की मेरी।दुखी जब सब सुजन मेरे, सुनें वे सांत्वना तेरी।नहीं मैं सुन सकूँगा तब, अभी आके सुना जाओ।अजी अब देर क्यों करते, चले आओ चले आओ।करोगे माफ मरने पर, हमारे पाप तु...
"लिंक-लिक्खाड़"...
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  August 14, 2017, 11:05 am
पुचकारते पापा मगर भाई लताड़े मर्द ताड़े।आँखे तरेरे पुत्र भी तो आ रहा पति दम्भ आड़े।जब पैर की जूती कहे जग अक्ल चोटी में बताये।नारी कटा के चोटियाँ तब चोटियाँ चढ़कर दिखाये।।...
"लिंक-लिक्खाड़"...
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  June 29, 2017, 11:24 am
इनके मोटे पेट से, उनका मद टकराय।कैसे मिल पाएं गले, रविकर बता उपाय ।।सरिता जैसी जिन्दगी, रास्ता रोके बाँध।करो सिंचाई रोशनी, वर्ना बढ़े सड़ाँध।।है पहाड़ सी जिन्दगी, हैं नाना व्यवधान।रविकर झुक के यदि चढ़ो, होवे आत्मोत्थान।।रस्सी जैसी जिन्दगी, तने तने हालात्।एक सिरे पर ख्वा...
"लिंक-लिक्खाड़"...
Tag :दोहे
  May 16, 2017, 10:50 am
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