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Blog: चेतना के स्वर

Blogger: pradeep singh beedawat
प्रदीप है नित कर्म पथ परफिर अंधेरों से क्यों डरें!हम हैं जिसने अंधेरे काकाफिला रोका सदा,राह चलते आपदा काजलजला रोका सदा,जब जुगत करते रहे हमदीप-बाती के लिए,जलते रहे विपद क्षण मेंसंकट सब अनदेखा किए|प्रदीप हम हैं जोतम से सदा लड़ते रहे,हम पुजारी, प्रिय हमें हैज्योति की आर... Read more
clicks 178 View   Vote 0 Like   4:33pm 29 Oct 2016 #poem
Blogger: pradeep singh beedawat
मैं सुबह से देख ही रहा था - तमाम आये हुए संदेशों को ,वाट्सअप और फेसबुक पर -तमाम दूसरे लोगों और समूहों को फॉरवर्ड कर हम समारोहपूर्वक मदर्स डे मना रहेथे। ये हमारे फॉरवर्ड होने की निशानी भी कही जा सकती है। पर ऐसा करने में कोईबुराई भी नहीं है। -- यहाँ  मेरा सवाल दूसरा है।  मा... Read more
clicks 140 View   Vote 0 Like   5:10pm 8 May 2016 #मदर्स डे
Blogger: pradeep singh beedawat
एक 6 साल का छोटा सा बच्चा अक्सर भगवान से मिलने की जिद किया करता था। उसे भगवान् के बारे में कुछ भी पता नही था पर मिलने की तमन्ना, भरपूर थी।उसकी चाहत थी की एक समय की रोटी वो भगवान के सांथ खाये।1 दिन उसने 1 थैले में 5 ,6 रोटियां रखीं और परमात्मा को को ढूंढने निकल पड़ा।चलते चलते वो ब... Read more
clicks 93 View   Vote 0 Like   2:44pm 18 Apr 2016 #stories
Blogger: pradeep singh beedawat
जोरजी चंपावत कसारी गांव के थे,जो जायल से 10 किमी खाटू सान्जू रोड़ पर है। जहां जौरजी की छतरी भी है।एक दिन की बात है जोधपुर के महाराजा नें विदेश से एक बन्दूक मंगाई और दरबार मे उसका बढ चढ कर वर्णन कर रहे थे। संयोग से जोरजी भी दरबार मे मौजूद थे।दरबार ने जोरजी से कहा-' देखो जोरजी,... Read more
clicks 125 View   Vote 0 Like   6:08am 17 Apr 2016 #History
Blogger: pradeep singh beedawat
 बीते दो दिन में बड़ा नाटक चला। राम नाम की नाव में सवार पार्टी इन दिनों अम्बेडकर के चरणों में ‘फूल’ चढ़ा रही थी। दूसरी ओर कभी पार्टी से बाहर करके बाद में बाबा साहब के अनुयायी रामजी को हाथ जोड़ते नजर आए। फिर कौन कह रहा है कि भारत असहिष्णु है। बाबा साहब तो राम, दुर्गा जैसी... Read more
clicks 105 View   Vote 0 Like   8:01am 16 Apr 2016 #टिप्पणी
Blogger: pradeep singh beedawat
जिन्दल तुम तो मर ही गए होंगे...। नहीं...। फिर शर्म तो आई ही होगी..। क्या...! वह भी नहीं!!क्यों, शर्म आने के लिए भी कोई मैनेजर-डाइरेक्टर रख लिया? जिस तरह किसी अबला की जमीन, आबरू और जीवन लूटने के लिए रखे हैं? तुम कौन हो, मैं नहीं जानता? जानना चाहता भी नहीं। तुम व्यक्ति हो या कंपनी, यह भ... Read more
clicks 121 View   Vote 0 Like   9:43am 13 Apr 2016 #दुष्कर्म
Blogger: pradeep singh beedawat
मुस्कुराहट...सपने में परियां आईइसलिए बेटी मुस्कुराईये स्वप्न जब बड़े होंगेअपने पांव पर खड़े होंगेजब भावना की गोद से नीचे उतरकर पृथ्वी पर चलना सीखेंगेचांद तारों सी उंचाइयों के लिएरूठना मचलना सीखेंगेरोशनी के लिए ललचाएंगेहर दीए से उंगली जलाएंगेजब ये स्वप्न बड़े हों... Read more
clicks 105 View   Vote 0 Like   2:38pm 27 Feb 2016 #
Blogger: pradeep singh beedawat
मुस्कुराहट...सपने में परियां आईइसलिए बेटी मुस्कुराईये स्वप्न जब बड़े होंगेअपने पांव पर खड़े होंगेजब भावना की गोद से नीचे उतरकर पृथ्वी पर चलना सीखेंगेचांद तारों सी उंचाइयों के लिएरूठना मचलना सीखेंगेरोशनी के लिए ललचाएंगेहर दीए से उंगली जलाएंगेजब ये स्वप्न बड़े हों... Read more
clicks 96 View   Vote 0 Like   2:38pm 27 Feb 2016 #
Blogger: pradeep singh beedawat
जो शहीद हुए वतन पर लिए बिना कोई मोलआंसू से लिख, कलम आज उनकी जय बोलमुम्बई लहुलूहान हुई थी इसलिए 26 नवम्बर 2008 भुलाए नहीं भूलता। पर कसाब को फांसी दिए जाने के बाद उन्हें और अन्य शहीदों को भुला दिया जाना कितना जायज? शहीद अशोक काम्टे, विजय सालस्कर, हेमन्त करकरे, mejor sandeep unnikrishnan, कसाब क... Read more
clicks 140 View   Vote 0 Like   7:43am 27 Nov 2014 #
Blogger: pradeep singh beedawat
पाली। पाली शहर की औद्योगिक इकाइयों में प्रदूषण की मात्रा इतनी अधिक है कि अपराधियों को पकड़ने वाले प्रशिक्षित डॉग की घ्राणशक्ति भी जवाब दे जाती है। ऎसे में यहां काम करने वाले मजदूरों की हालत कैसी होती होगी अंदाजा सहज लगाया जा सकता है। औद्योगिक इकाइयों में होने वाली आ... Read more
clicks 152 View   Vote 0 Like   11:34am 6 Dec 2013 #
Blogger: pradeep singh beedawat
 Voters have funny names in Raniwara constituencyप्रदीप बीदावत पाली। जैपर, जैसलमेर, मद्रास, पाली और मुम्बई के वोट रानीवाड़ा में विधायक चुनते हैं! सुनकर चौंकना लाजिमी है, लेकिन बात ही जरा हटके है। हम बात शहरों की नहीं रानीवाड़ा कलां के मतदाताओं की कर रहे हैं। यहां मतदान केन्द्र संख्या 143 से 145 की मतद... Read more
clicks 156 View   Vote 0 Like   11:33am 6 Dec 2013 #
Blogger: pradeep singh beedawat
200 सदस्य विधानसभा में 184 की वैवाहिक तिथियां वेबसाइट पर 82 की शादी 21 या18 वर्ष (पुरूष अथवा महिला के अनुसार) की वैधानिक आयु से पहले 35 मंत्री और संसदीय सचिव 13 की शादी बाल-विवाह की श्रेणी में 47 विधायक कांग्रेस के बाल विवाह वाले 26 विधायक भाजपा के इस वर्ग में पाली। कम उम्र में विवाह ... Read more
clicks 206 View   Vote 0 Like   5:45pm 23 Apr 2012 #
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अकाल का मौसम होने के बावजूद चेहरे पर मुस्कराहट। यही जीवंतता है इस देश की। देशभर में दीपावली का त्योहार मनाया जा रहा है। नन्हे-नन्हे दीपक उजास का संदेश देते हुए तमस से लड़ने का आuान कर रहे हैं। दीपक प्रतीक है जीवंतता का। चैतन्यता का। कैसा जीवंत दर्शन है कि मिट्टी से बनन... Read more
clicks 172 View   Vote 0 Like   5:38pm 25 Oct 2011 #
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प्रदीप बीदावत @ पालीये हैं बाल दूल्हे सांसदताराचंद भगोरा (बांसवाड़ा) 18 वर्ष एक माहकिरोड़ीलाल मीणा (दौसा), 10 वर्षरामसिंह कस्वां (चूरू) : 20 वर्ष 10 माहमहादेवसिंह खण्डेला (सीकर) : 17 वर्ष 10 माहअर्जुनराम मेघवाल (बीकानेर), 14 वर्ष 4 माहरतनसिंह (भरतपुर), 9 वर्ष 4 माहराज्यसभा सांसद- अश्क... Read more
clicks 139 View   Vote 0 Like   12:25pm 7 May 2011 #
Blogger: pradeep singh beedawat
पाली। "पूत के पांव पालने में ही दिख जाते हैं" इस कहावत को झुठलाया है पाली जिले के गुड़ा केसरसिंह गांव के दलपतसिंह राठौड़ ने। बीए पास करने में सात साल लगाने वाले राठौड़ ने तीन प्रयासों में ही राजस्थान प्रशासनिक सेवा में 55वीं रेंक पर चयनित होकर औसत अकादमिक रिकॉर्ड वाले अ... Read more
clicks 166 View   Vote 0 Like   3:18pm 1 May 2011 #
Blogger: pradeep singh beedawat
खुश थे जब डाले झूठ-झूठ के ही हार गले मेंआइना सच का दिखाया तो तकरार में आ गएबिकने से बचाते रहे उनको अक्सर नीलामी मेंकीमत लगाने हमारी वे खुद बाजार में आ गएभूख अब हमारे घर के दरवाजे पर ही सोती हैआजादी के बाद आरक्षण के बुखार में आ गएघुटनों के बल चला करते थे रोते-लडख़ड़ाते‘खे... Read more
clicks 164 View   Vote 0 Like   1:07pm 2 Mar 2011 #ग़ज़ल
Blogger: pradeep singh beedawat
स्वागत है नव दशक के मिहीर तुम्हाराउजले चैतन्य स्वर गुंजाए संदेश हमारातिमिर हर, प्रकाश भर, जगमग जीवनखुशियों से आंचल भर नाचे जग सारापुष्पाच्छादित हों राह, पूरी हों सब चाहसभी के लिए स्वीकारें यही शुभत्व प्यारामरे महंगाई डायन ओ जले भ्रष्ट आचारहर गली कोने गूंजे भारतीयत... Read more
clicks 164 View   Vote 0 Like   1:36pm 31 Dec 2010 #शुभकामना
Blogger: pradeep singh beedawat
कल रात एक बालक ने बड़ा प्रभावित किया। यही तीन-चार वर्ष का रहा होगा। पिता बड़े ओहदेदार, माताजी सलीकेदार। माता-पिता की नजरों में यह उसकी उद्दण्डता अथवा जिद कही जा सकती है, लेकिन किनारे खड़े स्वतंत्र समीक्षक की भांति यही कहना चाहूंगा कि बच्चे के भाव उसकी आत्मा के भाव थे। ... Read more
clicks 131 View   Vote 0 Like   4:25pm 12 Nov 2010 #
Blogger: pradeep singh beedawat
ब्लॉग लिखने-पढऩे वाले सभी कलम धनिकों को शुभ दीपावली फिर वे गुब्बारे चंद सांसों में फूलेंगे हर बार थोड़े ऊंचे जा औकात भूलेंगे जहां खत्म होगा उनकी हद का सफर वहीं तो मंजिल के ठिकाने हम छू लेंगे जब खो देंगे रोशनी वाले सारे सहारे आत्मदीप से अंधेरे को हराने चलेंगे रोए हैं अक... Read more
clicks 158 View   Vote 0 Like   5:15pm 4 Nov 2010 #
Blogger: pradeep singh beedawat
इस दीवाली पर तुम्हारे लिए केवल खुशी की कामना मुझसे नहीं होगी सबको पता है खुशी अकेली नहीं होती उसी तरह जिस तरह उजाला, अंधेरे बिना नहीं होता उसी तरह जैसे सत्य! झूठ की बुनियाद पर खड़ा होकर उसी को हिलाता है। ठीक वैसे ही तुम्हारे लिए कामना है सत्य का उजास तुम्हें अंधेरे से ... Read more
clicks 190 View   Vote 0 Like   5:11pm 4 Nov 2010 #
Blogger: pradeep singh beedawat
इंसानों का चेहरा (1) कल था दशानन का दहन लगना था नाभि में तीर अगन उठाए धनुश राम खड़े थे। कमर पर हाथ धरे हनुमान भी अड़े थे। दैत्य मुंह की खाए धरा पर पड़े थे। कुछ दशानन ऐसे भी जो इंसानी चेहरा लिए भीड़ में खड़े थे।खुश क्यों आज (2). राम ने जैसे ही नाभिकुण्ड में दागा तीर महिला झुंड में बर... Read more
clicks 149 View   Vote 0 Like   3:06pm 18 Oct 2010 #
Blogger: pradeep singh beedawat
धनुष किसने तोडा ? एक दिन सरपंच साहब को जाने क्या सूझी कि चल पड़े स्कूल की ओर। यह जानने कि गांव के बच्चों का आईक्यू कैसा'क है। स्कूल पहुंचे तो एक भी अध्यापक कक्षा में नहीं। घंटी के पास उनींदे से बैठे चपरासी से जब पूछा सारे मास्टर कहां गए तो पता चला कि पशुगणना में ड्यूटी लगान... Read more
clicks 190 View   Vote 0 Like   3:32pm 5 Sep 2010 #
Blogger: pradeep singh beedawat
(1)खिलना चाहता था कहीं सुदूर व्योम में,बनना चाहता था समिधा किसी होम में।धूप में भी तो कभी नहीं वो हंस पायाहवा ओ अंधेरे ने जो 'प्रदीप' बुझाया।।(2)थरथराता धुआंजब मां मेरी बेरोजगारी पर आंसू बहाया करती है,चुपके से अपनी ही ओढ़नी में आंखें छुपाकर।।तब इक तीली की तरह ही जलती है उम्... Read more
clicks 106 View   Vote 0 Like   8:16am 10 Aug 2010 #poem
Blogger: pradeep singh beedawat
मैं दर्द होता तोआपकी आंखों से बहकर अपना अस्तित्व समाप्त करना चाहता उस खारे आंसू की तरह जो देश दुनिया की फिक्र से दूर बच्चों की आंखों से निश्चल बहा करता है। मैं खुशी होता तो आपकी मुस्कुराहट के रूप में होठों पर बिखरना चाहता उसी स्वच्छंद रूप में जब कोई नन्हा शावक मृगया क... Read more
clicks 149 View   Vote 0 Like   12:10pm 27 Jul 2010 #
Blogger: pradeep singh beedawat
बदल गया अब दौर पुराना, देखो आया नया जमाना। बेटी को रस्ते की ठोकर, कुत्तों को कंधे पे उठाना। वक्त ने बदसूरत कर डाला, मां का चेहरा बहुत सुहाना। जान निछावर अब पशुओं पर, संतानों को सजा दिलाना। दुश्मन जानी बने लोग तो, और पशुओं पर जान लुटाना। मां फिर बन जाओ मां जैसी, जो चेहरा जान... Read more
clicks 203 View   Vote 0 Like   12:44pm 12 Jul 2010 #
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