चेतना के स्वर उजाले की ओर

पाली। पाली शहर की औद्योगिक इकाइयों में प्रदूषण की मात्रा इतनी अधिक है कि अपराधियों को पकड़ने वाले प्रशिक्षित डॉग की घ्राणशक्ति भी जवाब दे जाती है। ऎसे में यहां काम करने वाले मजदूरों की हालत कैसी होती होगी अंदाजा सहज लगाया जा सकता है। औद्योगिक इकाइयों में होने वाली आ...
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  December 6, 2013, 5:04 pm
 Voters have funny names in Raniwara constituencyप्रदीप बीदावत पाली। जैपर, जैसलमेर, मद्रास, पाली और मुम्बई के वोट रानीवाड़ा में विधायक चुनते हैं! सुनकर चौंकना लाजिमी है, लेकिन बात ही जरा हटके है। हम बात शहरों की नहीं रानीवाड़ा कलां के मतदाताओं की कर रहे हैं। यहां मतदान केन्द्र संख्या 143 से 145 की मतद...
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  December 6, 2013, 5:03 pm
200 सदस्य विधानसभा में 184 की वैवाहिक तिथियां वेबसाइट पर 82 की शादी 21 या18 वर्ष (पुरूष अथवा महिला के अनुसार) की वैधानिक आयु से पहले 35 मंत्री और संसदीय सचिव 13 की शादी बाल-विवाह की श्रेणी में 47 विधायक कांग्रेस के बाल विवाह वाले 26 विधायक भाजपा के इस वर्ग में पाली। कम उम्र में विवाह ...
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  April 23, 2012, 11:15 pm
अकाल का मौसम होने के बावजूद चेहरे पर मुस्कराहट। यही जीवंतता है इस देश की। देशभर में दीपावली का त्योहार मनाया जा रहा है। नन्हे-नन्हे दीपक उजास का संदेश देते हुए तमस से लड़ने का आuान कर रहे हैं। दीपक प्रतीक है जीवंतता का। चैतन्यता का। कैसा जीवंत दर्शन है कि मिट्टी से बनन...
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  October 25, 2011, 11:08 pm
प्रदीप बीदावत @ पालीये हैं बाल दूल्हे सांसदताराचंद भगोरा (बांसवाड़ा) 18 वर्ष एक माहकिरोड़ीलाल मीणा (दौसा), 10 वर्षरामसिंह कस्वां (चूरू) : 20 वर्ष 10 माहमहादेवसिंह खण्डेला (सीकर) : 17 वर्ष 10 माहअर्जुनराम मेघवाल (बीकानेर), 14 वर्ष 4 माहरतनसिंह (भरतपुर), 9 वर्ष 4 माहराज्यसभा सांसद- अश्क...
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  May 7, 2011, 5:55 pm
पाली। "पूत के पांव पालने में ही दिख जाते हैं" इस कहावत को झुठलाया है पाली जिले के गुड़ा केसरसिंह गांव के दलपतसिंह राठौड़ ने। बीए पास करने में सात साल लगाने वाले राठौड़ ने तीन प्रयासों में ही राजस्थान प्रशासनिक सेवा में 55वीं रेंक पर चयनित होकर औसत अकादमिक रिकॉर्ड वाले अ...
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  May 1, 2011, 8:48 pm
खुश थे जब डाले झूठ-झूठ के ही हार गले मेंआइना सच का दिखाया तो तकरार में आ गएबिकने से बचाते रहे उनको अक्सर नीलामी मेंकीमत लगाने हमारी वे खुद बाजार में आ गएभूख अब हमारे घर के दरवाजे पर ही सोती हैआजादी के बाद आरक्षण के बुखार में आ गएघुटनों के बल चला करते थे रोते-लडख़ड़ाते‘खे...
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Tag :ग़ज़ल
  March 2, 2011, 6:37 pm
स्वागत है नव दशक के मिहीर तुम्हाराउजले चैतन्य स्वर गुंजाए संदेश हमारातिमिर हर, प्रकाश भर, जगमग जीवनखुशियों से आंचल भर नाचे जग सारापुष्पाच्छादित हों राह, पूरी हों सब चाहसभी के लिए स्वीकारें यही शुभत्व प्यारामरे महंगाई डायन ओ जले भ्रष्ट आचारहर गली कोने गूंजे भारतीयत...
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Tag :शुभकामना
  December 31, 2010, 7:06 pm
कल रात एक बालक ने बड़ा प्रभावित किया। यही तीन-चार वर्ष का रहा होगा। पिता बड़े ओहदेदार, माताजी सलीकेदार। माता-पिता की नजरों में यह उसकी उद्दण्डता अथवा जिद कही जा सकती है, लेकिन किनारे खड़े स्वतंत्र समीक्षक की भांति यही कहना चाहूंगा कि बच्चे के भाव उसकी आत्मा के भाव थे। ...
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  November 12, 2010, 9:55 pm
ब्लॉग लिखने-पढऩे वाले सभी कलम धनिकों को शुभ दीपावली फिर वे गुब्बारे चंद सांसों में फूलेंगे हर बार थोड़े ऊंचे जा औकात भूलेंगे जहां खत्म होगा उनकी हद का सफर वहीं तो मंजिल के ठिकाने हम छू लेंगे जब खो देंगे रोशनी वाले सारे सहारे आत्मदीप से अंधेरे को हराने चलेंगे रोए हैं अक...
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  November 4, 2010, 10:45 pm
इस दीवाली पर तुम्हारे लिए केवल खुशी की कामना मुझसे नहीं होगी सबको पता है खुशी अकेली नहीं होती उसी तरह जिस तरह उजाला, अंधेरे बिना नहीं होता उसी तरह जैसे सत्य! झूठ की बुनियाद पर खड़ा होकर उसी को हिलाता है। ठीक वैसे ही तुम्हारे लिए कामना है सत्य का उजास तुम्हें अंधेरे से ...
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  November 4, 2010, 10:41 pm
इंसानों का चेहरा (1) कल था दशानन का दहन लगना था नाभि में तीर अगन उठाए धनुश राम खड़े थे। कमर पर हाथ धरे हनुमान भी अड़े थे। दैत्य मुंह की खाए धरा पर पड़े थे। कुछ दशानन ऐसे भी जो इंसानी चेहरा लिए भीड़ में खड़े थे।खुश क्यों आज (2). राम ने जैसे ही नाभिकुण्ड में दागा तीर महिला झुंड में बर...
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  October 18, 2010, 8:36 pm
धनुष किसने तोडा ? एक दिन सरपंच साहब को जाने क्या सूझी कि चल पड़े स्कूल की ओर। यह जानने कि गांव के बच्चों का आईक्यू कैसा'क है। स्कूल पहुंचे तो एक भी अध्यापक कक्षा में नहीं। घंटी के पास उनींदे से बैठे चपरासी से जब पूछा सारे मास्टर कहां गए तो पता चला कि पशुगणना में ड्यूटी लगान...
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  September 5, 2010, 9:02 pm
मैं दर्द होता तोआपकी आंखों से बहकर अपना अस्तित्व समाप्त करना चाहता उस खारे आंसू की तरह जो देश दुनिया की फिक्र से दूर बच्चों की आंखों से निश्चल बहा करता है। मैं खुशी होता तो आपकी मुस्कुराहट के रूप में होठों पर बिखरना चाहता उसी स्वच्छंद रूप में जब कोई नन्हा शावक मृगया क...
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  July 27, 2010, 5:40 pm
बदल गया अब दौर पुराना, देखो आया नया जमाना। बेटी को रस्ते की ठोकर, कुत्तों को कंधे पे उठाना। वक्त ने बदसूरत कर डाला, मां का चेहरा बहुत सुहाना। जान निछावर अब पशुओं पर, संतानों को सजा दिलाना। दुश्मन जानी बने लोग तो, और पशुओं पर जान लुटाना। मां फिर बन जाओ मां जैसी, जो चेहरा जान...
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  July 12, 2010, 6:14 pm
200 सदस्य विधानसभा में 184 की वैवाहिक तिथियां वेबसाइट पर82 की शादी 21 या18 वर्ष (पुरूष अथवा महिला के अनुसार) की वैधानिक आयु से पहले 35 मंत्री और संसदीय सचिव13 की शादी बाल-विवाह की श्रेणी में 47 विधायक कांग्रेस के बाल विवाह वाले26 विधायक भाजपा के इस वर्ग में पाली। कम उम्र में विवाह नह...
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Tag :बाल-विवाह
  May 23, 2010, 10:44 pm
भाषा विज्ञानियों के लिए भले ही पहला शब्द ‘ए’ अथवा ‘अ’ या फिर ‘अलीफ’ या ‘बे’ होता होगा, लेकिन व्यावहारिकता में यह फार्मूला बेमानी लगता है। दुनिया में किसी बच्चे के कंठों से फूटने वाली पहली किलकारी में ‘मां’ शब्द छिपा हुआ रहता है। कहना गलत नहीं होगा कि कोई शब्द इससे पहल...
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Tag :मदर्स डे
  May 9, 2010, 1:01 am
नजारा-एकछोटू जरा चाय लाना! आज श्रमिक दिवस है। चाय की एक थड़ी पर जमा चार लोग अखबार में छपी एक कृशकाय बच्चे की तस्वीर पर चर्चा कर रहे हैं। यह बच्चा बाल श्रमिक है, जो जवाहरात के नाजुक लेकिन खतरनाक काम को अपनी नन्ही अंगुलियों से बखूबी अंजाम दे रहा है। चारों की अलग-अलग राय है। ...
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Tag :बाल श्रमिक
  May 1, 2010, 8:49 pm
ग्रामीण विकास का आधार बन रही महिला शक्ति खुद मेहनत-मजदूरी कर बच्चों को शिक्षित करने का सपना साकार कर रही है|पारम्परिक परिधानों में लिपटी, संकुचाती घूंघटधारी ग्रामीण नारी अब गुजरे जमाने की बात हो चुकी है। ग्राम्य संस्कृति से ओत-प्रोत रहे मारवाड़ में कभी महिला का अकेल...
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Tag :नारी
  March 8, 2010, 5:27 pm
अल सुबह सूरज ने आँख खोली धरती के माथे कुंकुम  और रोली भँवरे गायें तो कलियाँ भी बोली ब्रज में घूमे रसिओं की टोली अब आपके चेहरे पर भी तो मीठी मुस्कराहट हिल डोली  तो बोलो हैप्पी होली, हैप्पी होली सभी ब्लॉगर बांधवों और पाठकों को होली की हार्दिक मंगलमयी शुभकामनायें...
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Tag :ग़ज़ल
  February 28, 2010, 4:43 pm
अक्सर प्रश्न उठता है कि प्रेम क्या है। आज तक प्रेम की कोई सर्वसम्मतपरिभाषा नहीं निकल पाई। इतना जरूर है कि प्रेम को ढाई अक्षरों का नाम देकर किताबों में समेट कर रखा नहीं जा सकता।जब सोणी ने महिवाल का हाथ थामा होगा अथवा हीर ने रांझे को चाहा होगा, तब कबीर लिखते हैं `ढाई आखर प्...
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Tag :उजाला
  February 14, 2010, 3:06 pm
 लोग कहते हैं जिंदगी तो हुई मौत से बदतरजीवन प्रतिमान तय करे वो मीना जरूरी है॥शान ए अमीरी चाहे औरों को नहीं दिखेगर फट जाए कपड़ा तो सीना जरूरी है॥जख्म भले कितने भी दर्दभरे और गहरेजीवन सार है यही कि सीना जरूरी है॥नीन्द चाहिए शाम को चादर तान करके तोदिनभर की मेहनत का पसीन...
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Tag :ग़ज़ल
  February 12, 2010, 7:52 pm
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  गूगल के द्वारा अपनी रीडर सेवा बंद करने के कारण हमारीवाणी की सभी कोडिंग दुबारा की गई है। हमारीवाणी "क्...
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