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Blog: क्षितिज

Blogger: kshitij ranjan
बचपन से लेकर आज तक,मेरा जीवन,         आधा है।जब भी पूर्ण   करना चाहा,मिले मुझको कई बाधा है।जो प्राण मिला वो आधा था,ना जानू मैं,  क्या बाधा था।शायद,  रोग हज़ार था,पर उसका  उपचार था।उपचार हुआ  आधा ही,रोग गया    बाधा नहीं।हर- दिन, हर -पल, मृत्यु पग चल ,बाधा   से... Read more
clicks 83 View   Vote 0 Like   3:36pm 18 Mar 2018 #
Blogger: kshitij ranjan
दो टुकड़े इज़्ज़त के कैसे लाऊँतिनका कहाँ से ढूँढू कैसे आशियाना बनाऊं इस खूंखार जंगल में दो पल चैन कहाँ पाऊँ समुद्र के बीच हूँ फिर भी प्यासा हूँ कैसे बारीश बुलाऊँ अपनी प्यास बुझाऊँ धुप से बदन जल पड़ा है कहाँ पेड़ लगाऊँ कब छाह मैं पाऊँ दो गज़ ज़मीं खोद लूँ कब... Read more
clicks 165 View   Vote 0 Like   8:01pm 18 Apr 2015 #
Blogger: kshitij ranjan
हर रोज दौड़ताखुद को झंझोड़ताबेड़ियों से बांध करबेड़ियों को तोड़ताखुशियों की चाह मेंग़मों को छोरतागम जो मिल जाए तोख़ुशी का दिल तोड़ताफिर सँभालने दिल कोखुद दिलों को जोड़ताटूटे ना दिल फिर सेसो दुनिया से मुह मोड़तालोगों से मुह मोड़ लूँतो ये लोग मुझसे बोलतामेरी हैसियत को दुनियाअप... Read more
clicks 148 View   Vote 0 Like   1:41pm 23 Feb 2015 #
Blogger: kshitij ranjan
हे कृष्ण जरा तू बतलानाक्यों सीखा माखन चुरानाक्या स्वाद का आकर्षण थाया माखन में तेरा जीवन थागर तू माखन चोर थाफिर क्यों इसका शोर थासब जान गयें वो चोरी क्याकि ज्यादा हो या थोरी क्यातेरे जीवन के दर्पण मेंदेखूँ मैं खुद के मन कोमैं भी तो माखन चोर थाजब भी करता पकड़ा जाताफिर त... Read more
clicks 185 View   Vote 0 Like   1:04pm 4 Feb 2015 #
Blogger: kshitij ranjan
तेरे मांग में लगा सिंदूर देखातेरे हाथों में तेरा खून देखाखुश हूँ आज मैं जो तू खुश हैअब तो तेरे पास सबकुछ हैमैंने कबका तुझे विसार दियाजिन्दा थी फिर भी तुझे मार दियामैं कनहिया तू मेरी मीरा थीमिलन नहीं हुई इसी की पीड़ा थीजग को यही बात बताता थाअटूट प्रेम गाथा सुनाता थामैं ... Read more
clicks 153 View   Vote 0 Like   9:40pm 29 Dec 2014 #
Blogger: kshitij ranjan
बहुत बना ली जलेबीखा-ली, समोसा और कचौरीकर ली दौरा दौड़ीअब सांस लेता हूँ मै थोड़ीसुनाता हूँ मै दिल की बातहुआ मेरे साथ जो पिछली रातमहानगर की सड़कों पेअकेला विचरण करता मैछोटी छोटी मलिन बस्तियों कोअट्टालिकाओं पे धरता मैलेकर सहर्ष सा स्वभावखाया करता था बड़ा पावन स्वाद था ना ज... Read more
clicks 167 View   Vote 0 Like   7:20am 29 Dec 2014 #
Blogger: kshitij ranjan
सुबह -सुबह  वो जाग करकोयले के ढेर में जाते हैउन ढेरों में से छांट करजरुरत के टुकड़े लाते हैकल रात की हुई बारिश मेंकोयला भी गीला -गीला हैचूल्हे की भींगी राख भीथोड़ा सख्त और गठीला हैफिर भी चूल्हे को जलाना हैरोजी -रोटी तो कमाना हैचाय के जो दिवाने हैंउनको तो चाय पिलाना  हैं... Read more
clicks 204 View   Vote 0 Like   9:17am 9 Oct 2014 #
Blogger: kshitij ranjan
ठिक बरसात से पहलेसारे मेहतर एकत्र हुएहर के , एक से  अपनेलोक लुभावन अस्त्र हुएहर कोई नाले का ढक्कन उठाते हैबासी रसगुल्ला नई चाश्नी में लाते हैकहते है,  आधुनिक औज़ार नया ताज़ा हैपिछले मेहतर से साफ़ करने कि क्षमता ज्यादा हैढक्क्न हटाकर बदबू फैलाते हैहर टोले -मोहल्ले ... Read more
clicks 242 View   Vote 0 Like   4:31pm 4 Oct 2014 #
Blogger: kshitij ranjan
बड़ा सोया , सोया सा थाखुद के सपनों में खोया सा था।फ्यूचर का एहसास हुआजागने का प्रयास हुआऐसा नहीं M.B.B.S. कठिन थाEngineering हमारी मेहनत से भिन्न था।फिर भी उसको छोड़  चलाअपने सपनो कि ओर चला।थोड़ा दौड़ा थोड़ा भागाथोड़ा कर लिया रेस्ट।दोस्तों वक्त हो चला थाफॉर्म भरा , दिया Entrence Test.टेस्ट रूम ... Read more
clicks 150 View   Vote 0 Like   11:29am 1 Mar 2014 #
Blogger: kshitij ranjan
हुँकार     हो     अब, ना      धैर्य      धरूँ हुए       शत्रू       तो, मै        बैर       करू क्रोद्ध     को   कम  ना   होने   दो शोलों    को   तुम   ना  सोने   दो चिंगारी   कहीं     भी    हो     यदि उसको    भड़का   तू     अभी यही... Read more
clicks 191 View   Vote 0 Like   5:12am 9 Aug 2013 #
Blogger: kshitij ranjan
गर्मी के मौसम में बिजली गई रोशन में पसीने की बौछार हुई घर में अंधकार  हुई दिया  सलाई धुंध लो इन्वर्टर का स्विच ऑन करो इन्वर्टर  जब फेल हो जाए छत पर सारे रेल हो जाए  ठंडी हवाओं का मेल हो जाए  चटाई बिछा अब कोई खेल हो जाए अन्ताराक्षरी का प्रोग्राम हो गाना सरे आम हो  जो जीत... Read more
clicks 222 View   Vote 0 Like   3:37pm 18 May 2013 #
Blogger: kshitij ranjan
सुबह सुबह जब जागा मै फटी कमीज में आधा मै मुंह पर चुपरा इन्द्रधनुष फिर भी लोगों मै  था खुश सोचा जाके साफ करूँ नल के पास वॉश  करूँ ठंडी ठंडी जल को  ले अपने चेहरे पर उड़ेले मन ही मन मुस्काने लगा दर्पण के निकट जाने लगा तभी मुझे मलाल हुआ मेरा चेहरा तो लाल हुआ पानी में भी घोट... Read more
clicks 213 View   Vote 0 Like   5:52am 27 Mar 2013 #
Blogger: kshitij ranjan
खुश हूँ मै तो आज बस है किसी का जन्म दिवस सारा  शहर सजा रखा है दिल को अपने खिला  रखा है मेलों सा माहौल है  जाने कितने लगे स्टाल है हर पसंद का टेस्ट है कोई लेता नहीं आज रेस्ट है सभी घूम के आयेंगे बिहार दिवस मनाएंगे मंत्री जी का भाषण होगा लेज़र शो प्रदर्शन होगा राज्य गीत क... Read more
clicks 190 View   Vote 0 Like   8:17pm 22 Mar 2013 #
Blogger: kshitij ranjan
काफी दिनों से  मौन था कविताओं की दुनियां से गौण था ।अचानक हस्क्षतेप हुआ सुनने में आया की रेप हुआ ।बात फ़ैल गई चारो ऒर सजा दिलाओ यही था शोर। आओ सूली चढ़ा देते है सरेआम उसे जला देते है ।बनायें कुछ नया कानून हर जुबान पर इसी की  धुन ।जंगल में आग सी लग गई गिडरों की भगदर मच गई ... Read more
clicks 231 View   Vote 0 Like   7:52pm 19 Jan 2013 #
Blogger: kshitij ranjan
मेरे शब्द कही खो  गए  हैशयद जुबां  में हि सो गए है।ना जाने क्यूं कविता नहीं बनतीमन में क्यूं इच्छा नहीं जगती ।की लिखू   क्या   आज  मैबने कोई आवाज लय ।की कोई कल्पना कर पाता नहींनई कोई रचना आता नहीं ।कविताये  और भी पुराने है मेरेपर वो भी आधे उकेरे  से है रे ।मुझे कतई ग्लानि न... Read more
clicks 192 View   Vote 0 Like   7:33pm 14 Nov 2012 #
Blogger: kshitij ranjan
हर साल की भांति इस साल भीप्रतियोगी परीक्षाएं शुरू हो गयीं ।टी . वी  का स्विच आफ हुआकिताबे   गुरु   हो        गयी ।दाखिले    को     है सब परेशानकट- आफ ने ले ली सबकी जान IIT,    IIM    पहाड़   बन गयाकोचिंग  फी बुखार बान  गया ।रेगुलर कोर्स   के   तो    लाले हैवोकेशनल ने ही हमें सम्हाले हैइसमे... Read more
clicks 195 View   Vote 0 Like   2:50am 12 Oct 2012 #
Blogger: kshitij ranjan
हर      रात    सोने   से    पहलेजब   पूरी   दुनिया   सन्नाटे मेंगुम       हो       जाती          है ।तब मेढको की महफ़िल जमती है ,और       कोव्वाली        गाती    है ।बिस्तर           पर           परे - परेसुकून        का      शोर    सुनते है ,और     ये         मेढक       अपनाताना        बाना         बुनत... Read more
clicks 237 View   Vote 0 Like   6:46am 21 Jul 2012 #
Blogger: kshitij ranjan
क्षितिज: निर्दोष सब्जियों का कष्टपूर्ण जीवन... Read more
clicks 184 View   Vote 0 Like   9:32am 25 Apr 2012 #
Blogger: kshitij ranjan
कल रात  के भयंकर दंगे  ने ,जानेकितने मासूमों  को निगल लिया ।उनके  अध्   कटे  अंग  सड़क परयहाँ - वहां, जहाँ-तहां बिखरे धर।इन   गुलाम   सब्जियों   की रोजबोली लगातें कसाई  सामान ग्राहकउन्हें बेचते खूंखार निर्मम सब्जीवाले ।वो   टुकुर -  टुकुर  देखती थी परवलगोभियों   की   भी  ... Read more
clicks 237 View   Vote 0 Like   9:04am 25 Apr 2012 #
Blogger: kshitij ranjan
जब नींद ही देर से खुलेगी तो दोस्तों   देर तो होगी ही सुना है   दुर्घटना से    देरी भली पर    जिन्दगी    देर    बनजाये तो    दुर्घटना    बन    जाती   है हर दुर्घटना जाम का कारण होती है । चाहे  सड़क  हो या जिन्दगी जाम      तो    लगेगी      ही  कभी रास्ते जाम  होते    है  तो  कभी ख्वाहिश... Read more
clicks 225 View   Vote 0 Like   2:35pm 3 Feb 2012 #
Blogger: kshitij ranjan
सन्नाटा क्या होता है सिर्फ मन का गूंगा पनक्योंकि शोर तो सन्नाटे में  भी होता  है जिसमें आवाज नहीं आने की डर हमें सताती है और अगर कोई आवाज कानो तक पहुचे उसकी इन्तेजार में ही सहम जातें हैपर कोई भी लब्ज़  हमें सुनाई नहीं देती है तेज बारिश में ,सुनसान सड़क पर किसी के ना होन... Read more
clicks 221 View   Vote 0 Like   2:31pm 7 Jan 2012 #
Blogger: kshitij ranjan
मै बहुत ही नीच किस्म का कवी हूँ |कभी भी अच्छे स्वर उचारित अथवा प्रकाशित करने की छमता नहीं है मुझमें ,हमेसा ओछी शब्दों के पीछे भागता रहा हूँ |जहाँ भी जाता हूँ ये शब्द मेरे साथ रहें  है, और सहारा के नाम पे इसने मेरा शोषण किया है| हर बार सोचता हूँ मेरे शब्दों में वो जादू क्यों ... Read more
clicks 260 View   Vote 0 Like   3:23pm 6 Jan 2012 #
Blogger: kshitij ranjan
हर रात बिस्तर से आस लगता हूँकि कल सवेरा ना होऔर मैं ता उम्र या इसके बाद भीगहरी नींद में सो जाऊं तो फिक्र ही न होगी मेरे आने वाले वर्तमान किऔर नाही चिंता सताती मेरी शेष बचे अभिमान कीपर यह संभव तो है  नहीं इसलिए सुबह होने से पहले नींद खुल जाती है और रोजगार की बात याद दिलाती ... Read more
clicks 196 View   Vote 0 Like   11:46am 17 Nov 2011 #
Blogger: kshitij ranjan
जब भी होती हो आस पास तुझे देखने की रहती है प्यास नज़रें सख्त चट्टान साथ करती है दीदार साँस दर साँस पलकों का पीछा करते गीरे जैसे आकाश और उस अँधेरे में ख्याल है तेरा खास और उठे तो खोले खजाने का कपाट... जिससे बढ़ जाती है फिर मेरी दीदार की प्यास खज़ाना देख लालच किसे ना होता  मै... Read more
clicks 183 View   Vote 0 Like   1:04pm 6 Nov 2011 #रोमांटिक
Blogger: kshitij ranjan
वो जंगलों के नाम सेथा कभी मशहूर क्यूँ,?हाँ शेर तो थे कई पर इतना भी गुरुर क्यूँ,?सीखे थे सब पथिकयहीं से चलना दूर क्यूँ? जो ज्ञान कहीं नहीं मिली यहीं मिला हुजुर क्यूँ? हुकुमत-ऐ-हिंदुस्तान तेरे रजा-इन्द्र यहीं के थे| जय घोष जय प्रकाश केफूल भी यहीं खिले |वो नीली गायों के लिए दौ... Read more
clicks 188 View   Vote 0 Like   1:33pm 9 Oct 2011 #
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