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क्षितिज

दो टुकड़े इज़्ज़त के कैसे लाऊँतिनका कहाँ से ढूँढू कैसे आशियाना बनाऊं इस खूंखार जंगल में दो पल चैन कहाँ पाऊँ समुद्र के बीच हूँ फिर भी प्यासा हूँ कैसे बारीश बुलाऊँ अपनी प्यास बुझाऊँ धुप से बदन जल पड़ा है कहाँ पेड़ लगाऊँ कब छाह मैं पाऊँ दो गज़ ज़मीं खोद लूँ कब...
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  April 19, 2015, 1:31 am
हर रोज दौड़ताखुद को झंझोड़ताबेड़ियों से बांध करबेड़ियों को तोड़ताखुशियों की चाह मेंग़मों को छोरतागम जो मिल जाए तोख़ुशी का दिल तोड़ताफिर सँभालने दिल कोखुद दिलों को जोड़ताटूटे ना दिल फिर सेसो दुनिया से मुह मोड़तालोगों से मुह मोड़ लूँतो ये लोग मुझसे बोलतामेरी हैसियत को दुनियाअप...
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  February 23, 2015, 7:11 pm
हे कृष्ण जरा तू बतलानाक्यों सीखा माखन चुरानाक्या स्वाद का आकर्षण थाया माखन में तेरा जीवन थागर तू माखन चोर थाफिर क्यों इसका शोर थासब जान गयें वो चोरी क्याकि ज्यादा हो या थोरी क्यातेरे जीवन के दर्पण मेंदेखूँ मैं खुद के मन कोमैं भी तो माखन चोर थाजब भी करता पकड़ा जाताफिर त...
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  February 4, 2015, 6:34 pm
तेरे मांग में लगा सिंदूर देखातेरे हाथों में तेरा खून देखाखुश हूँ आज मैं जो तू खुश हैअब तो तेरे पास सबकुछ हैमैंने कबका तुझे विसार दियाजिन्दा थी फिर भी तुझे मार दियामैं कनहिया तू मेरी मीरा थीमिलन नहीं हुई इसी की पीड़ा थीजग को यही बात बताता थाअटूट प्रेम गाथा सुनाता थामैं ...
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  December 30, 2014, 3:10 am
बहुत बना ली जलेबीखा-ली, समोसा और कचौरीकर ली दौरा दौड़ीअब सांस लेता हूँ मै थोड़ीसुनाता हूँ मै दिल की बातहुआ मेरे साथ जो पिछली रातमहानगर की सड़कों पेअकेला विचरण करता मैछोटी छोटी मलिन बस्तियों कोअट्टालिकाओं पे धरता मैलेकर सहर्ष सा स्वभावखाया करता था बड़ा पावन स्वाद था ना ज...
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  December 29, 2014, 12:50 pm
सुबह -सुबह  वो जाग करकोयले के ढेर में जाते हैउन ढेरों में से छांट करजरुरत के टुकड़े लाते हैकल रात की हुई बारिश मेंकोयला भी गीला -गीला हैचूल्हे की भींगी राख भीथोड़ा सख्त और गठीला हैफिर भी चूल्हे को जलाना हैरोजी -रोटी तो कमाना हैचाय के जो दिवाने हैंउनको तो चाय पिलाना  हैं...
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  October 9, 2014, 2:47 pm
ठिक बरसात से पहलेसारे मेहतर एकत्र हुएहर के , एक से  अपनेलोक लुभावन अस्त्र हुएहर कोई नाले का ढक्कन उठाते हैबासी रसगुल्ला नई चाश्नी में लाते हैकहते है,  आधुनिक औज़ार नया ताज़ा हैपिछले मेहतर से साफ़ करने कि क्षमता ज्यादा हैढक्क्न हटाकर बदबू फैलाते हैहर टोले -मोहल्ले ...
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  October 4, 2014, 10:01 pm
बड़ा सोया , सोया सा थाखुद के सपनों में खोया सा था।फ्यूचर का एहसास हुआजागने का प्रयास हुआऐसा नहीं M.B.B.S. कठिन थाEngineering हमारी मेहनत से भिन्न था।फिर भी उसको छोड़  चलाअपने सपनो कि ओर चला।थोड़ा दौड़ा थोड़ा भागाथोड़ा कर लिया रेस्ट।दोस्तों वक्त हो चला थाफॉर्म भरा , दिया Entrence Test.टेस्ट रूम ...
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  March 1, 2014, 4:59 pm
हुँकार     हो     अब, ना      धैर्य      धरूँ हुए       शत्रू       तो, मै        बैर       करू क्रोद्ध     को   कम  ना   होने   दो शोलों    को   तुम   ना  सोने   दो चिंगारी   कहीं     भी    हो     यदि उसको    भड़का   तू     अभी यही...
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  August 9, 2013, 10:42 am
गर्मी के मौसम में बिजली गई रोशन में पसीने की बौछार हुई घर में अंधकार  हुई दिया  सलाई धुंध लो इन्वर्टर का स्विच ऑन करो इन्वर्टर  जब फेल हो जाए छत पर सारे रेल हो जाए  ठंडी हवाओं का मेल हो जाए  चटाई बिछा अब कोई खेल हो जाए अन्ताराक्षरी का प्रोग्राम हो गाना सरे आम हो  जो जीत...
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  May 18, 2013, 9:07 pm
सुबह सुबह जब जागा मै फटी कमीज में आधा मै मुंह पर चुपरा इन्द्रधनुष फिर भी लोगों मै  था खुश सोचा जाके साफ करूँ नल के पास वॉश  करूँ ठंडी ठंडी जल को  ले अपने चेहरे पर उड़ेले मन ही मन मुस्काने लगा दर्पण के निकट जाने लगा तभी मुझे मलाल हुआ मेरा चेहरा तो लाल हुआ पानी में भी घोट...
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  March 27, 2013, 11:22 am
खुश हूँ मै तो आज बस है किसी का जन्म दिवस सारा  शहर सजा रखा है दिल को अपने खिला  रखा है मेलों सा माहौल है  जाने कितने लगे स्टाल है हर पसंद का टेस्ट है कोई लेता नहीं आज रेस्ट है सभी घूम के आयेंगे बिहार दिवस मनाएंगे मंत्री जी का भाषण होगा लेज़र शो प्रदर्शन होगा राज्य गीत क...
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  March 23, 2013, 1:47 am
काफी दिनों से  मौन था कविताओं की दुनियां से गौण था ।अचानक हस्क्षतेप हुआ सुनने में आया की रेप हुआ ।बात फ़ैल गई चारो ऒर सजा दिलाओ यही था शोर। आओ सूली चढ़ा देते है सरेआम उसे जला देते है ।बनायें कुछ नया कानून हर जुबान पर इसी की  धुन ।जंगल में आग सी लग गई गिडरों की भगदर मच गई ...
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  January 20, 2013, 1:22 am
मेरे शब्द कही खो  गए  हैशयद जुबां  में हि सो गए है।ना जाने क्यूं कविता नहीं बनतीमन में क्यूं इच्छा नहीं जगती ।की लिखू   क्या   आज  मैबने कोई आवाज लय ।की कोई कल्पना कर पाता नहींनई कोई रचना आता नहीं ।कविताये  और भी पुराने है मेरेपर वो भी आधे उकेरे  से है रे ।मुझे कतई ग्लानि न...
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  November 15, 2012, 1:03 am
हर साल की भांति इस साल भीप्रतियोगी परीक्षाएं शुरू हो गयीं ।टी . वी  का स्विच आफ हुआकिताबे   गुरु   हो        गयी ।दाखिले    को     है सब परेशानकट- आफ ने ले ली सबकी जान IIT,    IIM    पहाड़   बन गयाकोचिंग  फी बुखार बान  गया ।रेगुलर कोर्स   के   तो    लाले हैवोकेशनल ने ही हमें सम्हाले हैइसमे...
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  October 12, 2012, 8:20 am
हर      रात    सोने   से    पहलेजब   पूरी   दुनिया   सन्नाटे मेंगुम       हो       जाती          है ।तब मेढको की महफ़िल जमती है ,और       कोव्वाली        गाती    है ।बिस्तर           पर           परे - परेसुकून        का      शोर    सुनते है ,और     ये         मेढक       अपनाताना        बाना         बुनत...
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  July 21, 2012, 12:16 pm
क्षितिज: निर्दोष सब्जियों का कष्टपूर्ण जीवन...
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  April 25, 2012, 3:02 pm
कल रात  के भयंकर दंगे  ने ,जानेकितने मासूमों  को निगल लिया ।उनके  अध्   कटे  अंग  सड़क परयहाँ - वहां, जहाँ-तहां बिखरे धर।इन   गुलाम   सब्जियों   की रोजबोली लगातें कसाई  सामान ग्राहकउन्हें बेचते खूंखार निर्मम सब्जीवाले ।वो   टुकुर -  टुकुर  देखती थी परवलगोभियों   की   भी  ...
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  April 25, 2012, 2:34 pm
जब नींद ही देर से खुलेगी तो दोस्तों   देर तो होगी ही सुना है   दुर्घटना से    देरी भली पर    जिन्दगी    देर    बनजाये तो    दुर्घटना    बन    जाती   है हर दुर्घटना जाम का कारण होती है । चाहे  सड़क  हो या जिन्दगी जाम      तो    लगेगी      ही  कभी रास्ते जाम  होते    है  तो  कभी ख्वाहिश...
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  February 3, 2012, 8:05 pm
सन्नाटा क्या होता है सिर्फ मन का गूंगा पनक्योंकि शोर तो सन्नाटे में  भी होता  है जिसमें आवाज नहीं आने की डर हमें सताती है और अगर कोई आवाज कानो तक पहुचे उसकी इन्तेजार में ही सहम जातें हैपर कोई भी लब्ज़  हमें सुनाई नहीं देती है तेज बारिश में ,सुनसान सड़क पर किसी के ना होन...
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  January 7, 2012, 8:01 pm
मै बहुत ही नीच किस्म का कवी हूँ |कभी भी अच्छे स्वर उचारित अथवा प्रकाशित करने की छमता नहीं है मुझमें ,हमेसा ओछी शब्दों के पीछे भागता रहा हूँ |जहाँ भी जाता हूँ ये शब्द मेरे साथ रहें  है, और सहारा के नाम पे इसने मेरा शोषण किया है| हर बार सोचता हूँ मेरे शब्दों में वो जादू क्यों ...
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  January 6, 2012, 8:53 pm
हर रात बिस्तर से आस लगता हूँकि कल सवेरा ना होऔर मैं ता उम्र या इसके बाद भीगहरी नींद में सो जाऊं तो फिक्र ही न होगी मेरे आने वाले वर्तमान किऔर नाही चिंता सताती मेरी शेष बचे अभिमान कीपर यह संभव तो है  नहीं इसलिए सुबह होने से पहले नींद खुल जाती है और रोजगार की बात याद दिलाती ...
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  November 17, 2011, 5:16 pm
जब भी होती हो आस पास तुझे देखने की रहती है प्यास नज़रें सख्त चट्टान साथ करती है दीदार साँस दर साँस पलकों का पीछा करते गीरे जैसे आकाश और उस अँधेरे में ख्याल है तेरा खास और उठे तो खोले खजाने का कपाट... जिससे बढ़ जाती है फिर मेरी दीदार की प्यास खज़ाना देख लालच किसे ना होता  मै...
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Tag :रोमांटिक
  November 6, 2011, 6:34 pm
वो जंगलों के नाम सेथा कभी मशहूर क्यूँ,?हाँ शेर तो थे कई पर इतना भी गुरुर क्यूँ,?सीखे थे सब पथिकयहीं से चलना दूर क्यूँ? जो ज्ञान कहीं नहीं मिली यहीं मिला हुजुर क्यूँ? हुकुमत-ऐ-हिंदुस्तान तेरे रजा-इन्द्र यहीं के थे| जय घोष जय प्रकाश केफूल भी यहीं खिले |वो नीली गायों के लिए दौ...
क्षितिज...
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  October 9, 2011, 7:03 pm
क्षितिज: बिहार के ज़ज्बात: वो जंगलों के नाम से था कभी मशहूर क्यूँ,? हाँ शेर तो थे कई पर इतना भी गुरुर क्यूँ,? सीखे थे सब पथिक यहीं से चलना दूर क्यूँ? जो ज्ञान कहीं नह......
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  October 9, 2011, 3:12 am
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