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अनुगूँज

विदा होकर डरी-सहमी सी वह सकुचाती लजाती हुई ससुराल के आंगन में कदम रख चुकी थी। भव्यता के साथ स्वागत हुआ नई बहु का। नई-नवेली दुल्हन को ले जाकर एक बड़े से कमरे में बैठा दिया गया। घर की सारी औरतें उसे घेरे बैठी थी। मुंहदिखाई की रस्म के साथ-साथ जान-पहचान भी हो रही थी। सहमी सी वह ...
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  January 2, 2018, 10:11 pm
राजीव चौक में हुडा सिटी सेंटर जाने वाली मेट्रो में अचानक सालों बाद निशि मिली, बिल्कुल आमने सामने। सार्थक को निशि को पहचानने में पल भर भी न लगे। निशि, सार्थक का पहला व अंतिम प्यार जिसे वह कई सालों से ढूंढ रहा था, उसके सामने थी। सार्थक ने उसे टोकना चाहा ही कि उसे निशि से अं...
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  January 2, 2018, 9:58 pm
अशोक बाबू बड़े उत्साह से आये मेहमानों को अपना नया घर  दिखा रहे थे । इस घर में तीन बेड रूम है ।  यह मेरा  बेडरूम है, ये  बेटे किसू  का स्टडी रूम और बगल में उसके लिए  एक सेप्रेट बेड रूम । बेटी के लिए भी यही अरेंजमेंट है । यह बड़ा सा हाल इसलिए बनवाया है कि घरे...
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  April 5, 2014, 9:11 am
पार्क के कोने में अपने प्रेमी संग बैठी हनी ने उसके डिमांड को मानने से इंकार कर दिया था | लड़का उसे समझाने की कोशिश कर रहा था, "तुम भी न बेहद दकियानूसी हो , केवल दिखती मॉडर्न हो | पुरानी सदियों में यह एक गुनाह समझा जाता था | अब तो सब चलता है |"अभी वह उसे कन्विंस करने की कोशिश कर ही ...
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  February 8, 2014, 11:38 am
सिग्नल ने रंग बदला और लाल हो गया | उसके सामने भागती- दौड़ती गाड़ियाँ एक-एक कर रूकती चली गयी |गाड़ियों के रूकते ही फेरीवालों का झुंड सलामती, दुआ के आफर के साथ किस्म -किस्म के सामान बेचने की जुगत में गाड़ियों के पास भिनभिनाने लगे | इसी रेलपेल में एक तेरह-चौदह साल की लड़की एक कार वाल...
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  February 1, 2014, 8:51 am
 लोकतंत्र की असली शक्ति 'जनादेश'है | एक लोक प्रसिद्ध जुमला है कि 'जनता है सब जानती है' | जनता सब समझती है और माकूल समय आने पर सत्ता को अपनी हैसियत भी समझा देती है | दिल्ली विधानसभा के चुनाव परिणाम में यह चरितार्थ होता दिखा है | दिल्ली विधानसभा का चुनाव परिणाम सबसे दिलचस्प औ...
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  December 9, 2013, 1:06 am
उसे पुराने सिक्के जमा करने का शौक था | आज वह पुराने सिक्कों को निकाल कर देख रहा था | एक दस पैसे का सिक्का पिछलकर नीचे कहीं गिर गया | काफी मशक्कत के बाद उसे वह सिक्का टेबल के नीचे मुस्कराता मिला | सिक्के को हाथ में लेते ही विस्मृत स्मृति ने उसे घेर लिया |"माँ , दस पैसे दो ना, लट्ठ...
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  December 5, 2013, 4:44 pm
आज हाट में खड़ा हुआ हूँ मैं,मेरे परिजन मोलजोल कर रहे हैं मेरा, आये ग्राहक के संग |'रेट तो पता ही है सबको आएइअस 1 करोड़ , पीओ की है 20 लाख '|हम आपसे ज्यादा कहाँ मांग रहे हैं |और हाँ "सौदा"हो मनभावन,गोरी, लंबी, छरहरी औरसंस्कारी सीता की तरह |उपजाऊ भी हो ताकि जन सके 'कुलदीपक' |जवाब मे...
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  November 28, 2013, 7:48 pm
पांच वर्षीया गुड़िया के साथ हुए दरिंदगी से समूचा देश-समाज स्तब्ध है | चहुँओंर जुगुप्सा कहकहे लगा रही है | मानवता शर्मशार है | इस जघन्य अपराध के प्रतिकार में जन हुजूम सड़कों पर उमड़ पड़ा है , ठीक वैसे ही जैसे दिसम्बर में दामिनी के साथ हुए हादसे के बाद एकजुट खड़ा हुआ था | विश...
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  April 27, 2013, 6:27 pm

                                                       उत्सव को धर्म से खतरा है उत्सव हमारे तंग-परेशान जिन्दगी में हंसी-ख़ुशी के कुछ पल लाते हैं और सांस्कृतिक विरासत का भान कराते हैं | राम-कृष्ण से जुड़े किस्से और उनके आदर्श का जनमानस पर गहरा प्रभा...
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  April 19, 2013, 11:07 am
हिन्दू  और हिन्दुस्तानी कौन हैं ? इसका फैसला कौन करेगा ? हिंदी, हिन्दू और हिन्दुस्तानी कल्चर पर हो-हल्ला करने और स्वयंभू निर्णायक  होने की जिम्मेवारी एक  समूह विशेष ने ले रखी  है । जो लोग मनुवादी सिस्टम  का समर्थन करे, अप्रासंगिक पुरानी मिथकों को परम्परा के ना...
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  April 21, 2012, 2:35 pm
आज कुछ लिखने का मन हो रहा है | किस विषय पर लिखूं ! एक व्यक्ति में छुपी असीम संभावनाओं पर या उसकी क्षुद्रता पर....| कृत्रिमता के आत्केंद्रित रवैये पर या फिर प्रकृति की विराट सृजनात्मकता पर....| कोलाहल के बीच कोने पर टंगी ख़ामोशी और 'आत्म-पहचान' की तलाश में भटकती जिन्दगी के साथ-स...
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  April 17, 2012, 3:34 pm
समालोचन: मति का धीर : निर्मल वर्मा...
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  April 3, 2012, 9:53 pm
राजनामा.कॉम। मैं सोच सकता हूँ , इसलिए मेरा अस्तित्व है”, रिनी देकार्ते के इस कथन को स्वीकार लेने मात्र से आदमी के चेतना और उसके अस्तित्व की सार्थकता की शुरुआत होती है | प्रकृति ने चिंतन -मनन की क्षमता केवल आदमी को दी है | उसकी अपनी संवेदनशीलता और चेतनशीलता ने प्रकृति की&...
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  October 12, 2011, 7:23 pm
 मनुष्य एक  जिज्ञासु व विवेकशील प्राणी है | अनुभवों से सीखना और किसी भी घटना पर अपनी राय बनाना उसकी सहज प्रवृति रही है | इसी रेसिनिलिती  ने उसे सामुदायिक जीवन की और प्रेरित किया |उसके तार्किक क्षमता व चुनौतियों से लड़ने के अनाहत जज्बा ने विकाश के कई अप्रतिम प्रतिमा...
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  June 19, 2011, 12:29 pm
शांत, स्नेहिल, निर्द्वंद , क्षण में,जब मेरी भावनाएं शुन्य से टकराकर ,वापस लौटती है,तो सहज कमी महसूस होती है ,एक मनमीत की ,जो समझ सके ,मर्म को ,मेरे जीवन संधर्भ  को .        आज मन मेरा सुधा रस पीकर ,        प्रेम की धारा से जुड़कर ,        तुम्हारा अनुराग चाहता ह...
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  January 2, 2011, 6:14 pm
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