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GUNDA DARSHAN

सबसे पहले तो यही सवाल खड़ा हो जाता है की आखिर पूंजीवाद गरीबों के लिए उत्पीडन है या सहभागिता और सामाजिक न्याय का रास्ता! इसपर लगातार बहस चल रही है और मज़े की बात है की बहस में पूंजीवाद की लगातार जीत ही होती है! मगर पूंजीवाद के विरोधियों और सामाजिक स्थिति ने एक बात साफ़ कर ...
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Tag :हमारी विचारधाराएँ कैसे बनती हैं
  April 15, 2012, 2:35 pm
how came the untimely strom and behold there rises lalgarh how shall we live with dignity how shall we save our children somewhere, a bomb goes offand makes everyone blind prisons handging over our headshow shall we save our children a child died in the womb was it guilty as well ??we're beaten and denied life how shall we save our children the untimely tempest dragseven our women out of homensthe abymal storm has dragged look how police room our villages prisons loom over our heads we;re beaten and we must die how the troops storm our homes how shall we save 'em children??...
GUNDA DARSHAN...
Tag :तमाशा मेरे आगे
  April 14, 2012, 9:33 pm
A few weeks ago I met an old ladyEighty four she was, for death getting readyHer body fragile, her energy feebleHer mind clear, her soul nimble.Lived a good life, she saidNow its time to go, be deadWhy fear death and go screamingWhen I am grateful, gloating, gleamingMy body is weak, its job is doneNo point in staying, its time to runIf I hang on, I'll deteriorate and drownQuit while ahead, go with a saintly crown.She glowed with the light of a saintThough her eyes dim, her voice faintShe was a walking inspirationIn spite of her failing respirationFor she showed how to let go, releaseWithout bitterness, remorse, with perfect ease.For to die is to be born anewOut of this womb where foetal spir...
GUNDA DARSHAN...
Tag :मनोदशा
  February 7, 2012, 7:57 am
वो ख़तजो मैंने तुम्हें लिखे थेहाँ, वो अनकहे ख़तमैंने आज भी सहेज कर रखे हैंमेरी अलमारी में बिछेअखबार की तहों के भीतरआज अचानकवो फिर हाथ लग गयेखो गयी थी मैंउन पुरानी बातों मेंमैंने देखामेरी सुधियों का चीर थामेतुम आज भी निर्भीकवहीँ खड़े थेछोड़ आई थी जहाँ मैंतुम्हें बरस...
GUNDA DARSHAN...
Tag :
  February 7, 2012, 7:52 am
जीवन का बुत बनाना काम नहीं है शिल्पकार का उसका काम है पत्थर को जीवन देनामत हिचको, ओ, शब्दों के जादूगर ! जो जैसा है, वैसा कह दो ताकि वह दिल को छू ले आक्रोश भरे गीतों की धुनवेदना के स्वर में सम्भव नहींख़ून से रंगे हाथों की बातें ज़ोर-ज़ोर से चीख़-चीख़ कर छाती पीटकर कही जाती ...
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Tag :कविता
  January 17, 2012, 12:00 am
                           डाक्टर जाकिर हुसैन के भाषण का सम्पादित अंश प्यारे विद्यार्थियों ,मुझे मालूम नहीं कि दुनियां तुम क्या करना चाहते हो? हो सकता है कि तुम्हारा हौसला हो व्यापार और कारोबार या नौकरी करके बहुत सारी दौलत कमायें और चैन से अपनी और अपने ख़ानदान की जिन्दगी बिताने ...
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Tag :हमारी विचारधाराएँ कैसे बनती हैं
  December 14, 2011, 7:50 pm
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