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अरुण कुमार निगम (हिंदी कवितायेँ)

अरुण के दुमदार दोहे -हमें लगे तो रीत है, उन्हें लगे तो चोट।हम सस्ते-से नारियल, वे महँगे अखरोट।।मगर हम मान दिलाते।चोट हम नहीं दिखाते।।हम दुर्बल से बाँस हैं, वे सशक्त सागौन।जग के काष्ठागार में, हमें पूछता कौन ?शोर हम नहीं मचाते।बाँसुरी मधुर सुनाते।।उनके सीने पर पदक, नयनो...
अरुण कुमार निगम (हिंदी कविताये...
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  June 4, 2019, 7:19 pm
"मैं की बीमारी" - अरुण कुमार निगममैं मैं मैं की बीमारी हैखुद का विपणन लाचारी है।मीठी झील बताता जिसकोदेखा चख कर वह खारी है।पैर कब्र में लटके लेकिनआत्म-प्रशंसा ही जारी है।कई बार यह भ्रम भी होता मनुज नहीं वह अवतारी है।सभागार में लोग बहुत परमाइक से उसकी यारी है।है जुगाड़ मं...
अरुण कुमार निगम (हिंदी कविताये...
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  June 3, 2019, 11:40 pm
कोचिंग सेंटर पर शायद एक दकियानूसी विचार.......हमने साठ के दशक में प्राथमिक शाला के पाठ्यक्रम में बालभारती के अलावा सुलभ बाल कहानियाँ भी पढ़ीं। इनमें नैतिक शिक्षा देती हुई कहानियाँ हुआ करती थीं। इस युग में नैतिकता को पाठ्यक्रम में स्थान शायद नहीं है।पहले हम बाजार की दुका...
अरुण कुमार निगम (हिंदी कविताये...
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  May 28, 2019, 2:01 pm
"मैं"का मोहजिस तरह किसी ब्याहता के हृदय में "मैका-मोह"समाया होता है, उसी तरह इस नश्वर संसार के हर क्षेत्र में "मैं-का"मोह चिरन्तन काल से व्याप्त है। जिसने इस मोह पर विजय प्राप्त कर ली, समझो कि उसने मोक्ष को प्राप्त कर लिया। एक अति बुजुर्ग साहित्यकार की रुग्णता का समाचार मि...
अरुण कुमार निगम (हिंदी कविताये...
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  May 22, 2019, 9:55 pm
प्रकृति-सौंदर्य के कुशल चितेरे, छायावाद के प्रमुख स्तंभ कवि सुमित्रानंदन पंत की जयंती पर कुछ अरुण-दोहे :पतझर जैसा हो गया, जब ऋतुराज वसंत।अरुण! भला कैसे बने, अब कवि कोई पंत।।वृक्ष कटे छाया मरी, पसरा है अवसाद।पनपेगा कंक्रीट में, कैसे छायावाद।।बहुमंजिला इमारतें, खातीं नि...
अरुण कुमार निगम (हिंदी कविताये...
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  May 20, 2019, 6:59 pm

"छत्तीसगढ़ी भाखा महतारी - आरती गीत"गीतकार - अरुण कुमार निगम, छत्तीसगढ़ी भाखा महतारी, पइयाँ लागँव तोरपइयाँ लागँव तोर ओ दाई, पइयाँ लागँव तोर तहीं आस अस्मिता हमर अउ, तहीं आस पहिचानआखर अरथ सबद के दे दे, तँय  मोला वरदान।।खोर गली मा छत्तीसगढ़ के, महिमा गावँव तोर…पइयाँ लागँव त...
अरुण कुमार निगम (हिंदी कविताये...
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  May 13, 2019, 2:52 pm
दुमदार दोहे -गर्मी का मौसम रहे, सिर पर रहे चुनाव।अल्लू-खल्लू भी अकड़, गजब दिखाएँ ताव।।राज आपस के खोलेंवचन सब कड़ुवे बोलें।।1।।मंचों के भाषण लगें, ज्यों लू-झोंके गर्म।इनकी गर्मी देखकर, ऋतु को आई शर्म।।अजेंडा चुगली-चारीभीड़ भाड़े की भारी।।2।।अरुण कुमार निगमआदित्य नगर, दुर्...
अरुण कुमार निगम (हिंदी कविताये...
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  April 26, 2019, 4:20 pm
जुगनुओं को क्या पड़ी है ?दिन चुनावी चल रहे हैंमोम में सब ढल रहे है।प्रेम-प्याला है दिखावावस्तुतः सब छल रहे हैं।छातियों की नाप छोड़ोमूँग ही तो दल रहे हैं।आस्तीनों में न जानेसाँप कितने पल रहे हैं।घूमते कुछ हाथ जोड़ेहाथ भी कुछ मल रहे हैं।जुगनुओं को क्या पड़ी हैबुझ रहे कुछ जल...
अरुण कुमार निगम (हिंदी कविताये...
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  April 4, 2019, 10:17 am
छत्तीसगढ़ निवासी, देश के प्रतिष्ठित व्यंग्यकार श्री वीरेंद्र सरल के सानिध्य से अनायास खिला एक फूल - “अप्रैल फूल” एक अप्रैल को रेडियो सिलोन से एक गीत प्रसारित होता था - एप्रिल फूल बनाया,तुमको गुस्सा आया तो मेरा क्या कसूर, जमाने का कसूर जिसने दस्तूर बनाया….. इस ग...
अरुण कुमार निगम (हिंदी कविताये...
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  April 1, 2019, 2:58 pm
पिता उवाच ….मैं क्या जानूँ गंगा-जमुना, सरस्वती है मेरे मन मेंमैं ही जानूँ कब बहती है, यह अन्तस् के सूने वन में।।पारस हूँ, पाषाण समझ कररौंद गए वे स्वर्ण हो गएउनमें से कुछ तो दुर्योधनकुछ कुन्ती कुछ कर्ण हो गए।मैं बस बंशी रहा फूँकता, चारागाहों में निर्जन मेंमैं क्या जानूँ ...
अरुण कुमार निगम (हिंदी कविताये...
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  March 17, 2019, 9:49 am
“विश्व महतारी भाषा दिवस” - छत्तीसगढ़ीघर के जोगी जोगड़ा, आन गाँव के सिद्ध - तइहा के जमाना के हाना आय। अब हमन नँगत हुसियार हो गे हन, गाँव ला छोड़ के शहर आएन, शहर ला छोड़ के महानगर अउ महानगर ला छोड़ के बिदेस मा जा के ठियाँ खोजत हन। जउन मन बिदेस नइ जा सकिन तउन मन विदेसी संस्कृति ला अपन...
अरुण कुमार निगम (हिंदी कविताये...
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  February 21, 2019, 10:41 am
आलेख - “प्रेम सप्ताह का अंत (वेलेंटाइन डे) बनाम जोड़ों का दर्द”एक फिल्मी गीत याद आ रहा है - सोमवार को हम मिले, मंगलवार को नैनबुध को मेरी नींद गई, जुमेरात को चैनशुक्र शनि कटे मुश्किल से,आज है ऐतवारसात दिनों में हो गया जैसे सात जनम का प्यार।।अब इससे ज्यादा शॉर्टकट और भला क्या ...
अरुण कुमार निगम (हिंदी कविताये...
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  February 14, 2019, 1:05 pm
गजल - अन्नदाता याद आयागजल - अन्नदाता याद आया गाँव का इक सर्वहारा छटपटाता याद आया।पाँवों से खिसकी जमीं तो अन्नदाता याद आया।।एक तबका है रईसी मुफलिसी के बीच में भीयकबयक उससे जुड़ा कुछ तो है नाता याद आया।।काठ की हाँडी दुबारा चढ़ रही चूल्हे पे देखोबीरबल फिर से कहीं खिचड़ी पका...
अरुण कुमार निगम (हिंदी कविताये...
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  February 2, 2019, 3:16 pm
"कृषक पर एक गीत"कृषक रूप में हर प्राणी को, धरती का भगवान मिला।कृषि-प्रधान यह देश किन्तु क्या,कृषकों को सम्मान मिला ?(1)सुख सुविधा का मोह त्याग कर, खेतों में ही जीता है।विडम्बना लेकिन यह देखो, उसका ही घर रीता है।कर्म भूमि में उसके हिस्से, मौसम का व्यवधान मिला।कृषि-प्रधान यह ...
अरुण कुमार निगम (हिंदी कविताये...
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  December 27, 2018, 2:54 pm
*अच्छे दिन आ गए* !!!!!पहले डाकिए की आहट भी किसी प्रेमी या प्रेयसी की आहट से कम नहीं होती थी। लंबी प्रतीक्षा के बाद महकते हुए रंगबिरंगे लिफाफों में शुभकामनाओं को पाकर जो खुशी मिलती थी वह संबंधित त्यौहार या अवसर की खुशी से कमतर नहीं होती थी। लिफाफे के रूप में प्रेषक बिल्कुल स...
अरुण कुमार निगम (हिंदी कविताये...
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  November 9, 2018, 2:06 pm
हिन्दी गजल -आपसी दुर्भावना है, एकता दिखती नहींरूप तो सुन्दर सजे हैं, आत्मा दिखती नहीं।।घोषणाओं का पुलिंदा, फिर हमें दिखला रहेहम गरीबों की उन्हें तो, याचना दिखती नहीं।।हर तरफ भ्रमजाल फैला, है भ्रमित हर आदमीसिद्ध पुरुषों ने बताई, वह दिशा दिखती नहीं।।संस्कारों की जमीं प...
अरुण कुमार निगम (हिंदी कविताये...
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  November 2, 2018, 3:26 pm
कौवा नजर आता नहीं........घर की चौखट पर कोई बूढ़ा नजर आता नहींआश्रमों में भीड़ है बेटा नजर आता नहीं।बैंक के खाते बताते आदमी की हैसियतप्यार का दिल में यहाँ जज़्बा नजर आता नहीं।दफ़्न आँगन पत्थरों में, खेत पर बंगले खड़ेअब दरख्तों का यहाँ साया नजर आता नहीं।पूर्वजों के पर्व पर हैं दा...
अरुण कुमार निगम (हिंदी कविताये...
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  October 8, 2018, 1:01 pm
*जलहरण घनाक्षरी*(विधान - परस्पर तुकांतता लिए चार पद/ 8, 8, 8, 8 या 16, 16 वर्णों पर यति/ अंत में दो लघु अनिवार्य)धूल धूसरित तन, केश राशि श्याम घनबाल क्रीड़ा में मगन, अलमस्त हैं किसन।छनन छनन छन, पग बजती पैजनलिपट रही किरण, चूम रही है पवन।काज तज देवगण, देख रहे जन-जनपुलकित तन-मन, निर्निमेष ...
अरुण कुमार निगम (हिंदी कविताये...
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  September 18, 2018, 9:14 am
*हिन्दी फिल्मों के गायक कलाकार*गायक कलाकार फिल्मों के, रहते हैं पर्दे से दूरकिन्तु नायिका नायक को वे, कर देते काफी मशहूर।।सहगल पंकज मलिक जोहरा, राजकुमारी और खुर्शीदतीस और चालीस दशक की जनता इसकी हुई मुरीद।।रफी मुकेश किशोर सचिन दा, मन्नाडे हेमंत सुबीरकभी शरारत कभी निव...
अरुण कुमार निगम (हिंदी कविताये...
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  September 15, 2018, 11:05 am
"हिन्दी भाषा भारत के लिए परम हितकारी है"(जनकवि कोदूराम "दलित"जी की ताटंक छन्द आधारित हिन्दी कविता)सरल सुबोध सरस अति सुंदर, लगती प्यारी-प्यारी हैदेवनागरी लिपि जिसकी सारी लिपियों से न्यारी हैऋषि-प्रणीत संस्कृत भाषा जिस भाषा की महतारी हैवह हिन्दी भाषा भारत के लिए परम हित...
अरुण कुमार निगम (हिंदी कविताये...
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  September 14, 2018, 8:58 am
हाकी के जादूगर मेजर ध्यानचंद के जन्मदिन, विश्व खेल दिवस पर.....शत-शत नमनहॉकीहाकी कल पहचान थी, आज हुई गुमनामखेल स्वदेशी खो गये , सिर चढ़ बैठा दामसिर चढ़  बैठा  दाम , शुरू  अब सट्टेबाजीलाखों लाख कमायँ,नहीं भरता उनका जीकलुषित है माहौल , कहाँ  सच्चाई बाकीकरें पुन: शुरुवात, उ...
अरुण कुमार निगम (हिंदी कविताये...
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  August 29, 2018, 9:46 am
"रेडियो श्रोता दिवस - 20 अगस्त, छत्तीसगढ़ के श्रोताओं द्वारा घोषित दिवस"   - संस्मरणआज रेडियो श्रोता दिवस पर मैं सत्तर के दशक के अपने अनुभव साझा कर रहा हूँ, मुझे विश्वास है कि उस दौर के श्रोता मित्र लगभग पचास वर्ष पुरानी स्मृतियों में जरूर खो जाएंगे। बाद के दशकों के श्रो...
अरुण कुमार निगम (हिंदी कविताये...
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  August 22, 2018, 8:32 am
गजल -सत्य जेल में पड़ा हुआ हैझूठ द्वार पर खड़ा हुआ है।।बाँट रहा वह किसकी दौलतकहाँ खजाना गड़ा हुआ है।।उस दामन का दाग दिखे क्याजिस पर हीरा जड़ा हुआ है।।अब उससे उम्मीदें कैसीवह तो चिकना घड़ा हुआ है।।पाप कमाई, बाप कमाएबेटा खाकर बड़ा हुआ है।।लोकतंत्र का पेड़ अभागापत्ता पता झड़ा हु...
अरुण कुमार निगम (हिंदी कविताये...
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  July 15, 2018, 12:06 pm
बहर221 1222, 221 1222कुछ काम नहीं करता, हर बार मिली कुर्सीमंत्री का भतीजा है, उपहार मिली कुर्सी।।गत सत्तर सालों में, कई रोग मिले तन कोजाँचा जो चिकित्सक ने, बीमार मिली कुर्सी।।पाँवो को हुआ गठिया, है पीठ भी टेढ़ी-सीलकवा हुआ हाथों को, लाचार मिली कुर्सी।।फिर भी इसे पाने को, हर शख्स मचलत...
अरुण कुमार निगम (हिंदी कविताये...
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  July 13, 2018, 5:38 pm
हे कॉपी-पेस्ट सन्त !!! हे आधुनिक जगत के अवैतनिक दूत !!!  आपका समर्पण स्तुत्य है। सूर्योदय काल से रात्रि नीम विश्राम बेला तक आपका परोपकारी व्यक्तित्व, पराई पोस्ट को कॉपी-पेस्ट करते नहीं थकता। इस व्यस्तता में आप स्वयं सृजन शून्य हो जाते हैं। शून्य ही तो सम्पूर्ण ब्रम्हाण...
अरुण कुमार निगम (हिंदी कविताये...
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  March 26, 2018, 1:33 pm
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