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Blog: अरुण कुमार निगम (हिंदी कवितायेँ)

Blogger: अरुण कुमार निगम
 "वासंती फरवरी"कम-उम्र बदन से छरहरीलाई वसंत फिर फरवरी।शायर कवियों का दिल लेकरशब्दों का मलयानिल लेकरगाती है करमा ब्याह-गीतपंथी पंडवानी भरथरीलाई वसंत फिर फरवरी।गुल में गुलाब का दिवस लिएइक प्रेम-दिवस भी सरस लिएहै पर्यावरण प्रदूषित परबातें इसकी हैं मदभरीलाई वसंत फि... Read more
clicks 31 View   Vote 0 Like   4:42am 2 Feb 2021 #
Blogger: अरुण कुमार निगम
#  मधुर छत्तीसगढ़ी गीतों का स्वर्णिम इतिहास #"मोर संग चलव........" (भाग - 2)मोर संग चलव श्रृंखला भाग 1 के अंत में मैंने लिखा था -"मोर संग चलव"गीत ने वर्ष 1982 में छत्तीसगढ़ी गीत और संगीत को न केवल  छत्तीसगढ़ के गाँव-गाँव तक पहुँचाने में क्रांतिकारी भूमिका निभायी बल्कि देश की सीमाओं से... Read more
clicks 56 View   Vote 0 Like   10:28am 1 Aug 2020 #
Blogger: अरुण कुमार निगम
🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹विगत पाँच दशकों से छत्तीसगढ़ी गीत और संगीत के शिखर पर विराजमान "जनकवि लक्ष्मण मस्तुरिया की 71 वीं जन्म-जयंती (07 जून 2020) के अवसर पर छत्तीसगढ़ के 32 नवोदित समर्थ कवियों ने अपने गीतों व छन्दों के माध्यम से कुल 64 काव्य-सुमन समर्पित किए"। यह ऐतिहासिक संकलन आपके... Read more
clicks 56 View   Vote 0 Like   4:30pm 19 Jun 2020 #
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सम्हलने, समझने, सीखने, सुधरने का संकेत समझा रहा है कि.........समझ प्रकृति के तेवर -Now   Or   Neverकाम    नहीं    आएंगेधन, संपत्ति और जेवर- अरुण कुमार निगम#कोरोना-कहर... Read more
clicks 58 View   Vote 0 Like   12:54pm 30 May 2020 #
Blogger: अरुण कुमार निगम
प्रकृति-सौंदर्य के कुशल चितेरे, छायावाद के प्रमुख स्तंभ कवि सुमित्रानंदन पंत की जयंती पर कुछ अरुण-दोहे :पतझर जैसा हो गया, जब ऋतुराज वसंत।अरुण! भला कैसे बने, अब कवि कोई पंत।।वृक्ष कटे छाया मरी, पसरा है अवसाद।पनपेगा कंक्रीट में, कैसे छायावाद।।बहुमंजिला इमारतें, खातीं ... Read more
clicks 74 View   Vote 0 Like   3:21pm 20 May 2020 #
Blogger: अरुण कुमार निगम
"लोकल"लोकल में है दम बहुत, लोकल के कम दामदे हाथों को काम यह, आता भी है काम।आता भी है काम, सम्हालता अर्थ-व्यवस्थाहै लोकल की आज, बड़ी दयनीय अवस्था।चलो विदेशी जिन्न, भरें फिर से बोतल मेंमानें मेरी बात, बहुत दम है लोकल में।।- अरुण कुमार निगमआदित्य नगर, दुर्ग (छत्तीसगढ़)... Read more
clicks 62 View   Vote 0 Like   4:52am 14 May 2020 #
Blogger: अरुण कुमार निगम
"श्रमिक दिवस की शुभकामनाएँ"छत्तीसगढ़ी कविताओं में मजदूर - छत्तीसगढ़ी किसानों और मजदूरों का प्रदेश है। यहाँ के कवियों ने किसानों और मजदूरों की संवेदनाओं को महसूस किया है और उन्हें अपनी कविताओं और गीतों के माध्यम से अभिव्यक्त किया है। इन कविताओं और गीतों में कर्म की आर... Read more
clicks 53 View   Vote 0 Like   6:23am 2 May 2020 #
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"पृथ्वी दिवस - अर्थ डे"हरी भरी वसुंधरा पर नीला नीला ये गगनकि जिसपे बादलों की पालकी उड़ा रहा पवनदिशाएँ देखो रंग भरी चमक रहीं उमंग भरीये किसने फूल फूल से किया श्रृंगार हैये कौन चित्रकार है ये कौन चित्रकार ?(भरत व्यास)नील गगन के तले, धरती का प्यार पले(साहिर लुधियानवी)वसुन्धर... Read more
clicks 65 View   Vote 0 Like   5:32am 22 Apr 2020 #
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पिता ….मैं क्या जानूँ गंगा-जमुना, सरस्वती है मेरे मन मेंमैं ही जानूँ कब बहती है, यह अन्तस् के सूने वन में।।पारस हूँ, पाषाण समझ कररौंद गए वे स्वर्ण हो गएउनमें से कुछ तो दुर्योधनकुछ कुन्ती कुछ कर्ण हो गए।मैं बस बंशी रहा फूँकता, चारागाहों में निर्जन मेंमैं क्या जानूँ गंगा-... Read more
clicks 56 View   Vote 0 Like   7:08am 17 Mar 2020 #
Blogger: अरुण कुमार निगम
❤💞💓😘😍🥰🚘🚑🚑😪😢😭💔💔"प्रॉमिज़-डे"का "प्रॉमिज़"❤💞💓😘😍🥰🚘🚑🚑😪😢😭💔💔"प्रॉमिज़-डे"पर "डे"का "प्रॉमिज़""लंच-ब्रेक"में "ब्रेक"हुआ।प्यार-मोहब्बत की गाड़ी का, "फ्रण्ट-ग्लास"ही "क्रेक"हुआ।।"एक्सीडेंट"भी "एक्सीलेन्ट"था,आशिक़, शायर बन बैठा।"प्रेम-फरारी"का बेचारा,"पंचर-टायर"बन बैठा।।"हन... Read more
clicks 88 View   Vote 0 Like   12:45pm 11 Feb 2020 #
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ROSE DAY पर एक रचनामेरे गीतों में गुलाबों की महक पाओगेरोज़ डे तुम तो मनाना ही भूल जाओगे ।खार की कुछ तो चुभन हाँ ! तुम्हें सहनी होगीबाद में तुम भी गुलाबों से खिलखिलाओगे ।साथ पूरब के रहो आसमाँ पे दमकोगेराह पश्चिम की धरे, तय है डूब जाओगे ।अरुण कुमार निगमआदित्य नगर, दुर्ग(हमारे आँ... Read more
clicks 52 View   Vote 0 Like   1:50am 7 Feb 2020 #
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कम-उम्र बदन से छरहरीलाई वसंत फिर फरवरी।शायर कवियों का दिल लेकरशब्दों का मलयानिल लेकरगाती है करमा ब्याह-गीतपंथी पंडवानी भरथरीलाई वसंत फिर फरवरी।गुल में गुलाब का दिवस लिएइक प्रेम-दिवस भी सरस लिएहै पर्यावरण प्रदूषित परबातें इसकी हैं मदभरीलाई वसंत फिर फरवरी।इसकी भी ... Read more
clicks 51 View   Vote 0 Like   2:13pm 2 Feb 2020 #
Blogger: अरुण कुमार निगम
"ग़ज़लनुमा दोहा छन्द"-इर्द गिर्द उनके फिरें, ऐसे वैसे लोगसम्मानित होने लगे, कैसे कैसे लोग ।।मूल्यवान पत्थर हुआ, हुए रत्न बेभावगुदड़ी में ही रह गए, हीरे जैसे लोग।।चन्दा लेकर हो रहा, प्रायोजित सम्मानवहाँ लुटाने जा रहे, अपने पैसे लोग।।कुछ हंसों के बीच में, बगुले भी रख साथखुशि... Read more
clicks 67 View   Vote 0 Like   12:57am 31 Oct 2019 #
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अब की बार दीवाली में........(विष्णु पद छन्द)अब की बार दीवाली में हम, कुछ नूतन कर लेंकिसी दीन के घर में जाकर, उसका दुख हर लें ।अब की बार दीवाली में हम, देशी अपनाएँलुप्त हो रही परम्परा को, फिर से सिरजाएँ ।अब की बार दीवाली में हम, यह संकल्प करेंदूषित वातावरण हो रहा, कायाकल्प करें।अ... Read more
clicks 68 View   Vote 0 Like   3:54am 28 Oct 2019 #
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"दीप-पर्व की शुभकामनाएँ" - "अप्प दीपो भव"मशीखत के जहाँ जेवर वहाँ तेवर नहीं होतेजमीं से जो जुड़े होते हैं उनके पर नहीं होते।जिन्हें शोहरत मिली वो व्यस्त हैं खुद को जताने मेंवरगना आपकी नजरों में हम जोकर नहीं होते।अहम् ने इल्म पर कब्जा किया तो कौन पूछेगाहरिक दिन एक जैसे तो क... Read more
clicks 64 View   Vote 0 Like   12:58am 26 Oct 2019 #
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दोहा छन्द - सम्मान मांगे से जो मिल रहा, वह कैसा सम्मान।सही अर्थ में सोचिये, यह तो है अपमान।।राजाश्रय जिसको मिला, उसे मिला सम्मान।किसे आज के दौर में, हीरे की पहचान।।आज पैठ अनुरूप ही, होता है गुणगान।अनुशंसा से मिल रहे, इस युग में सम्मान।।मूल्यांकन करता समय, कर्म न जाता व्य... Read more
clicks 126 View   Vote 0 Like   12:57pm 17 Oct 2019 #
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 "अलविदा अमन"अपनी लाश का बोझ उठाऊं, नामुमकिनमौत से पहले ही मर जाऊं, नामुमकिन- अमन चाँदपुरीआज मन बहुत ही विचलित है। कल ही कुंवर कुसुमेश जी ने उनकी हालत का जिक्र किया था। शाम को मुकेश कुमार मिश्र ने फोन पर हालत का नाजुक होना बताया था और आज सुबह अमन के निधन के अविश्वसनीय सम... Read more
clicks 77 View   Vote 0 Like   4:35pm 11 Oct 2019 #
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पिछले साल किसे मारा था ?फिर रावण को मार रहे हो !पिछले साल किसे मारा था ?देख सको तो देखो अब भी, कितने रावण घूम रहे हैं।धन-सत्ता की मदिरा पीकर, अपने मद में झूम रहे हैं।।अब भी रावण जीवित है तोतुमने किसको संहारा था ?फिर रावण को मार रहे हो !पिछले साल किसे मारा था ?विजयादशमी आई जब-जब... Read more
clicks 65 View   Vote 0 Like   1:23pm 8 Oct 2019 #
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"तब के गीत और अब के गीत"मित्रों का सहमत होना जरूरी नहीं है किंतु मेरा मानना यह है किश्वेत-श्याम फिल्मों के दौर में जिंदगी के रंगों को सिनेमा के पर्दे पर सजीव करने के लिए गायक, गीतकार, संगीतकार, निर्देशक और कलाकार बेहद परिश्रम करते थे। परिश्रम का यह रंग ही श्वेत-श्याम फिल्... Read more
clicks 63 View   Vote 0 Like   6:22am 7 Oct 2019 #
Blogger: अरुण कुमार निगम
आज 26 सितम्बर 2019 को भारतीय फिल्म संगीत के महान संगीतकार और गायक हेमन्त कुमार की पुण्यतिथि है। उनका निधन 26 सितम्बर 1989 को हुआ था। संजोग से उनमें निधन के समाचार की पेपर कटिंग मुझे मेरी फाइलों में मिली है, साझा कर रहा हूँ .....हम अपने प्रिय संगीतकार व गायक हेमन्त कुमार की पुण्यति... Read more
clicks 75 View   Vote 0 Like   9:33am 26 Sep 2019 #
Blogger: अरुण कुमार निगम
गीत - "क्या जाने कितने दिन बाकी"क्या जाने कितने दिन बाकीछक कर आज पिला दे साकी।।आगे पीछे चले गए सब, मधुशाला में आने वालेधीरे-धीरे मौन हो गए, झूम-झूम के गाने वाले।अपनी बारी की चाहत में, बैठा हूँ मैं भी एकाकी।।क्या जाने कितने दिन बाकीछक कर आज पिला दे साकी।।जाने वाले हर साथी क... Read more
clicks 140 View   Vote 0 Like   10:59am 18 Sep 2019 #
Blogger: अरुण कुमार निगम
चुटकुलों से हँसाने लगे हैं।मंच पे खूब छाने लगे हैं।।इल्म तो है नहीं शायरी का।खुद को ग़ालिब बताने लगे हैं।।हुक्मरानों पे पढ़ के कसीदे।खूब ईनाम पाने लगे हैं।।मसखरे लॉबियों में परस्पर।रिश्ते-नाते निभाने लगे हैं।।जुगनुओं की हिमाकत तो देखो।आँख "अरुण"को दिखाने लगे हैं।।- ... Read more
clicks 115 View   Vote 0 Like   8:44am 8 Sep 2019 #
Blogger: अरुण कुमार निगम
विश्व फोटोग्राफी दिवस पर मेरे मोबाइल के कैमरे से खींची गई एक तस्वीर। यह वृक्ष न जाने कितने पंछियों का बसेरा है और न जाने कितने जीवों को शीतल छाँव प्रदान कर रहा है।फोटो खींचने की तारीख - 08 जून 2019अरुण कुमार निगमआदित्य नगर, दुर्ग, छत्तीसगढ़... Read more
clicks 81 View   Vote 0 Like   3:21pm 19 Aug 2019 #
Blogger: अरुण कुमार निगम
221 2122 221 2122होगा किसान भूखा किस काम की तरक्कीकागज के आँकड़ों में बस नाम की तरक्की।खलिहान की फसल को तो ले गया महाजनइस साल फिर हुई है गोदाम की तरक्की।शहरों पे ध्यान सबका पनपे महानगर नितहरदम रही उपेक्षित हर ग्राम की तरक्की।नित भाषणों की खातिर पंडाल मंच सजतेदेखी नहीं अभी तक ख़य... Read more
clicks 88 View   Vote 0 Like   12:55pm 9 Aug 2019 #
Blogger: अरुण कुमार निगम
221 1222 221 1222जो चैन से सोने दे उस धन को कहाँ ढूँढेंसंसार में भटका है उस मन को कहाँ ढूँढें।वन काट दिए सारे हर सू है पड़ा सूखाअब पूछ रहे हो तुम सावन को कहाँ ढूँढें।माँ-बाप की छाया में, बचपन को बिताया थाउस घर को कहाँ ढूँढें आँगन को कहाँ ढूँढें।पढ़ने की न चिन्ता थी साथी थे खिलौने थेना... Read more
clicks 83 View   Vote 0 Like   8:56am 27 Jul 2019 #
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