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Blog: अरुण कुमार निगम (हिंदी कवितायेँ)

Blogger: अरुण कुमार निगम
दोहा छन्द - सम्मान मांगे से जो मिल रहा, वह कैसा सम्मान।सही अर्थ में सोचिये, यह तो है अपमान।।राजाश्रय जिसको मिला, उसे मिला सम्मान।किसे आज के दौर में, हीरे की पहचान।।आज पैठ अनुरूप ही, होता है गुणगान।अनुशंसा से मिल रहे, इस युग में सम्मान।।मूल्यांकन करता समय, कर्म न जाता व्य... Read more
clicks 9 View   Vote 0 Like   12:57pm 17 Oct 2019 #
Blogger: अरुण कुमार निगम
 "अलविदा अमन"अपनी लाश का बोझ उठाऊं, नामुमकिनमौत से पहले ही मर जाऊं, नामुमकिन- अमन चाँदपुरीआज मन बहुत ही विचलित है। कल ही कुंवर कुसुमेश जी ने उनकी हालत का जिक्र किया था। शाम को मुकेश कुमार मिश्र ने फोन पर हालत का नाजुक होना बताया था और आज सुबह अमन के निधन के अविश्वसनीय सम... Read more
clicks 0 View   Vote 0 Like   4:35pm 11 Oct 2019 #
Blogger: अरुण कुमार निगम
पिछले साल किसे मारा था ?फिर रावण को मार रहे हो !पिछले साल किसे मारा था ?देख सको तो देखो अब भी, कितने रावण घूम रहे हैं।धन-सत्ता की मदिरा पीकर, अपने मद में झूम रहे हैं।।अब भी रावण जीवित है तोतुमने किसको संहारा था ?फिर रावण को मार रहे हो !पिछले साल किसे मारा था ?विजयादशमी आई जब-जब... Read more
clicks 0 View   Vote 0 Like   1:23pm 8 Oct 2019 #
Blogger: अरुण कुमार निगम
"तब के गीत और अब के गीत"मित्रों का सहमत होना जरूरी नहीं है किंतु मेरा मानना यह है किश्वेत-श्याम फिल्मों के दौर में जिंदगी के रंगों को सिनेमा के पर्दे पर सजीव करने के लिए गायक, गीतकार, संगीतकार, निर्देशक और कलाकार बेहद परिश्रम करते थे। परिश्रम का यह रंग ही श्वेत-श्याम फिल्... Read more
clicks 0 View   Vote 0 Like   6:22am 7 Oct 2019 #
Blogger: अरुण कुमार निगम
आज 26 सितम्बर 2019 को भारतीय फिल्म संगीत के महान संगीतकार और गायक हेमन्त कुमार की पुण्यतिथि है। उनका निधन 26 सितम्बर 1989 को हुआ था। संजोग से उनमें निधन के समाचार की पेपर कटिंग मुझे मेरी फाइलों में मिली है, साझा कर रहा हूँ .....हम अपने प्रिय संगीतकार व गायक हेमन्त कुमार की पुण्यति... Read more
clicks 1 View   Vote 0 Like   9:33am 26 Sep 2019 #
Blogger: अरुण कुमार निगम
गीत - "क्या जाने कितने दिन बाकी"क्या जाने कितने दिन बाकीछक कर आज पिला दे साकी।।आगे पीछे चले गए सब, मधुशाला में आने वालेधीरे-धीरे मौन हो गए, झूम-झूम के गाने वाले।अपनी बारी की चाहत में, बैठा हूँ मैं भी एकाकी।।क्या जाने कितने दिन बाकीछक कर आज पिला दे साकी।।जाने वाले हर साथी क... Read more
clicks 33 View   Vote 0 Like   10:59am 18 Sep 2019 #
Blogger: अरुण कुमार निगम
चुटकुलों से हँसाने लगे हैं।मंच पे खूब छाने लगे हैं।।इल्म तो है नहीं शायरी का।खुद को ग़ालिब बताने लगे हैं।।हुक्मरानों पे पढ़ के कसीदे।खूब ईनाम पाने लगे हैं।।मसखरे लॉबियों में परस्पर।रिश्ते-नाते निभाने लगे हैं।।जुगनुओं की हिमाकत तो देखो।आँख "अरुण"को दिखाने लगे हैं।।- ... Read more
clicks 28 View   Vote 0 Like   8:44am 8 Sep 2019 #
Blogger: अरुण कुमार निगम
विश्व फोटोग्राफी दिवस पर मेरे मोबाइल के कैमरे से खींची गई एक तस्वीर। यह वृक्ष न जाने कितने पंछियों का बसेरा है और न जाने कितने जीवों को शीतल छाँव प्रदान कर रहा है।फोटो खींचने की तारीख - 08 जून 2019अरुण कुमार निगमआदित्य नगर, दुर्ग, छत्तीसगढ़... Read more
clicks 5 View   Vote 0 Like   3:21pm 19 Aug 2019 #
Blogger: अरुण कुमार निगम
221 2122 221 2122होगा किसान भूखा किस काम की तरक्कीकागज के आँकड़ों में बस नाम की तरक्की।खलिहान की फसल को तो ले गया महाजनइस साल फिर हुई है गोदाम की तरक्की।शहरों पे ध्यान सबका पनपे महानगर नितहरदम रही उपेक्षित हर ग्राम की तरक्की।नित भाषणों की खातिर पंडाल मंच सजतेदेखी नहीं अभी तक ख़य... Read more
clicks 11 View   Vote 0 Like   12:55pm 9 Aug 2019 #
Blogger: अरुण कुमार निगम
221 1222 221 1222जो चैन से सोने दे उस धन को कहाँ ढूँढेंसंसार में भटका है उस मन को कहाँ ढूँढें।वन काट दिए सारे हर सू है पड़ा सूखाअब पूछ रहे हो तुम सावन को कहाँ ढूँढें।माँ-बाप की छाया में, बचपन को बिताया थाउस घर को कहाँ ढूँढें आँगन को कहाँ ढूँढें।पढ़ने की न चिन्ता थी साथी थे खिलौने थेना... Read more
clicks 11 View   Vote 0 Like   8:56am 27 Jul 2019 #
Blogger: अरुण कुमार निगम
"चंदैनी गोंदा के प्रमुख स्तंभ"*दाऊ रामचन्द्र देशमुख, खुमानलाल साव, लक्ष्मण मस्तुरिया और कविता वासनिक*दाऊ रामचंद्र देशमुख की कला यात्रा "देहाती कला विकास मंच", "नरक और सरग", "जन्म और मरण", "काली माटी"आदि के अनुभवों से परिपक्व होती हुई 1971 में चंदैनी गोंदा के जन्म का कारण बनी। "... Read more
clicks 27 View   Vote 0 Like   12:24pm 22 Jun 2019 #
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अरुण के दुमदार दोहे -हमें लगे तो रीत है, उन्हें लगे तो चोट।हम सस्ते-से नारियल, वे महँगे अखरोट।।मगर हम मान दिलाते।चोट हम नहीं दिखाते।।हम दुर्बल से बाँस हैं, वे सशक्त सागौन।जग के काष्ठागार में, हमें पूछता कौन ?शोर हम नहीं मचाते।बाँसुरी मधुर सुनाते।।उनके सीने पर पदक, नयनो... Read more
clicks 50 View   Vote 0 Like   1:49pm 4 Jun 2019 #
Blogger: अरुण कुमार निगम
"मैं की बीमारी" - अरुण कुमार निगममैं मैं मैं की बीमारी हैखुद का विपणन लाचारी है।मीठी झील बताता जिसकोदेखा चख कर वह खारी है।पैर कब्र में लटके लेकिनआत्म-प्रशंसा ही जारी है।कई बार यह भ्रम भी होता मनुज नहीं वह अवतारी है।सभागार में लोग बहुत परमाइक से उसकी यारी है।है जुगाड़ मं... Read more
clicks 22 View   Vote 0 Like   6:10pm 3 Jun 2019 #
Blogger: अरुण कुमार निगम
कोचिंग सेंटर पर शायद एक दकियानूसी विचार.......हमने साठ के दशक में प्राथमिक शाला के पाठ्यक्रम में बालभारती के अलावा सुलभ बाल कहानियाँ भी पढ़ीं। इनमें नैतिक शिक्षा देती हुई कहानियाँ हुआ करती थीं। इस युग में नैतिकता को पाठ्यक्रम में स्थान शायद नहीं है।पहले हम बाजार की दुका... Read more
clicks 83 View   Vote 0 Like   8:31am 28 May 2019 #
Blogger: अरुण कुमार निगम
"मैं"का मोहजिस तरह किसी ब्याहता के हृदय में "मैका-मोह"समाया होता है, उसी तरह इस नश्वर संसार के हर क्षेत्र में "मैं-का"मोह चिरन्तन काल से व्याप्त है। जिसने इस मोह पर विजय प्राप्त कर ली, समझो कि उसने मोक्ष को प्राप्त कर लिया। एक अति बुजुर्ग साहित्यकार की रुग्णता का समाचार मि... Read more
clicks 23 View   Vote 0 Like   4:25pm 22 May 2019 #
Blogger: अरुण कुमार निगम
प्रकृति-सौंदर्य के कुशल चितेरे, छायावाद के प्रमुख स्तंभ कवि सुमित्रानंदन पंत की जयंती पर कुछ अरुण-दोहे :पतझर जैसा हो गया, जब ऋतुराज वसंत।अरुण! भला कैसे बने, अब कवि कोई पंत।।वृक्ष कटे छाया मरी, पसरा है अवसाद।पनपेगा कंक्रीट में, कैसे छायावाद।।बहुमंजिला इमारतें, खातीं नि... Read more
clicks 87 View   Vote 0 Like   1:29pm 20 May 2019 #
Blogger: अरुण कुमार निगम
"छत्तीसगढ़ी भाखा महतारी - आरती गीत"गीतकार - अरुण कुमार निगम, छत्तीसगढ़ी भाखा महतारी, पइयाँ लागँव तोरपइयाँ लागँव तोर ओ दाई, पइयाँ लागँव तोर तहीं आस अस्मिता हमर अउ, तहीं आस पहिचानआखर अरथ सबद के दे दे, तँय  मोला वरदान।।खोर गली मा छत्तीसगढ़ के, महिमा गावँव तोर…पइयाँ लागँव त... Read more
clicks 20 View   Vote 0 Like   9:22am 13 May 2019 #
Blogger: अरुण कुमार निगम
दुमदार दोहे -गर्मी का मौसम रहे, सिर पर रहे चुनाव।अल्लू-खल्लू भी अकड़, गजब दिखाएँ ताव।।राज आपस के खोलेंवचन सब कड़ुवे बोलें।।1।।मंचों के भाषण लगें, ज्यों लू-झोंके गर्म।इनकी गर्मी देखकर, ऋतु को आई शर्म।।अजेंडा चुगली-चारीभीड़ भाड़े की भारी।।2।।अरुण कुमार निगमआदित्य नगर, दुर्... Read more
clicks 26 View   Vote 0 Like   10:50am 26 Apr 2019 #
Blogger: अरुण कुमार निगम
जुगनुओं को क्या पड़ी है ?दिन चुनावी चल रहे हैंमोम में सब ढल रहे है।प्रेम-प्याला है दिखावावस्तुतः सब छल रहे हैं।छातियों की नाप छोड़ोमूँग ही तो दल रहे हैं।आस्तीनों में न जानेसाँप कितने पल रहे हैं।घूमते कुछ हाथ जोड़ेहाथ भी कुछ मल रहे हैं।जुगनुओं को क्या पड़ी हैबुझ रहे कुछ जल... Read more
clicks 33 View   Vote 0 Like   4:47am 4 Apr 2019 #
Blogger: अरुण कुमार निगम
छत्तीसगढ़ निवासी, देश के प्रतिष्ठित व्यंग्यकार श्री वीरेंद्र सरल के सानिध्य से अनायास खिला एक फूल - “अप्रैल फूल” एक अप्रैल को रेडियो सिलोन से एक गीत प्रसारित होता था - एप्रिल फूल बनाया,तुमको गुस्सा आया तो मेरा क्या कसूर, जमाने का कसूर जिसने दस्तूर बनाया….. इस ग... Read more
clicks 101 View   Vote 0 Like   9:28am 1 Apr 2019 #
Blogger: अरुण कुमार निगम
पिता उवाच ….मैं क्या जानूँ गंगा-जमुना, सरस्वती है मेरे मन मेंमैं ही जानूँ कब बहती है, यह अन्तस् के सूने वन में।।पारस हूँ, पाषाण समझ कररौंद गए वे स्वर्ण हो गएउनमें से कुछ तो दुर्योधनकुछ कुन्ती कुछ कर्ण हो गए।मैं बस बंशी रहा फूँकता, चारागाहों में निर्जन मेंमैं क्या जानूँ ... Read more
clicks 115 View   Vote 0 Like   4:19am 17 Mar 2019 #
Blogger: अरुण कुमार निगम
“विश्व महतारी भाषा दिवस” - छत्तीसगढ़ीघर के जोगी जोगड़ा, आन गाँव के सिद्ध - तइहा के जमाना के हाना आय। अब हमन नँगत हुसियार हो गे हन, गाँव ला छोड़ के शहर आएन, शहर ला छोड़ के महानगर अउ महानगर ला छोड़ के बिदेस मा जा के ठियाँ खोजत हन। जउन मन बिदेस नइ जा सकिन तउन मन विदेसी संस्कृति ला अपन... Read more
clicks 41 View   Vote 0 Like   5:11am 21 Feb 2019 #
Blogger: अरुण कुमार निगम
आलेख - “प्रेम सप्ताह का अंत (वेलेंटाइन डे) बनाम जोड़ों का दर्द”एक फिल्मी गीत याद आ रहा है - सोमवार को हम मिले, मंगलवार को नैनबुध को मेरी नींद गई, जुमेरात को चैनशुक्र शनि कटे मुश्किल से,आज है ऐतवारसात दिनों में हो गया जैसे सात जनम का प्यार।।अब इससे ज्यादा शॉर्टकट और भला क्या ... Read more
clicks 42 View   Vote 0 Like   7:35am 14 Feb 2019 #
Blogger: अरुण कुमार निगम
गजल - अन्नदाता याद आयागजल - अन्नदाता याद आया गाँव का इक सर्वहारा छटपटाता याद आया।पाँवों से खिसकी जमीं तो अन्नदाता याद आया।।एक तबका है रईसी मुफलिसी के बीच में भीयकबयक उससे जुड़ा कुछ तो है नाता याद आया।।काठ की हाँडी दुबारा चढ़ रही चूल्हे पे देखोबीरबल फिर से कहीं खिचड़ी पका... Read more
clicks 40 View   Vote 0 Like   9:46am 2 Feb 2019 #
Blogger: अरुण कुमार निगम
"कृषक पर एक गीत"कृषक रूप में हर प्राणी को, धरती का भगवान मिला।कृषि-प्रधान यह देश किन्तु क्या,कृषकों को सम्मान मिला ?(1)सुख सुविधा का मोह त्याग कर, खेतों में ही जीता है।विडम्बना लेकिन यह देखो, उसका ही घर रीता है।कर्म भूमि में उसके हिस्से, मौसम का व्यवधान मिला।कृषि-प्रधान यह ... Read more
clicks 140 View   Vote 0 Like   9:24am 27 Dec 2018 #
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