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Blog: Chashmebaddoor

Blogger: Aparajita
                               जब हम इतने छोटे थे कि                                चल तो सकते थे ,पर                                चलने की समझ नहीं थी,                               तब गर्मियों की छुट्टियों में                               दिल्ली की दिवालिया दुपहरियों से निकालकर                                माँ हमें नानी-घर ले जातीं....          ... Read more
clicks 228 View   Vote 0 Like   3:27pm 29 Jul 2012 #
Blogger: Aparajita
चार दीवारों के भीतरवे दोनोँ मौजूद थे कभी जिनके मौन में भी थीं ढेर सारी बातें !!जिनकी आँखें भीड़ में भी पल भर को टकराकररचती थीं आख्यानक !!जिनके बीच संवादों, अभिव्यक्तियों के दौर चला करते थे,कम लगती थी जिन्हें जिंदगी अपनी बातों के लिए, चार दीवारों के भीतर मौजूद वे दोनों ... Read more
clicks 172 View   Vote 0 Like   5:24pm 1 Mar 2012 #
Blogger: Aparajita
बस स्टैंड पर बैठी लड़की कि नज़रडूबते सूरज कि लालिमा पर पड़ी और उसकी आँखे चमक उठीउसने तुरंत उस बेहद दिलकश नज़ारे को साझा करने के लिएबगल ही में बैठे प्रेमी से कहादेखो मुझे उसमे तुम ही दिख रहे हो.....तुम्हारा नाम आसमान कि लाल बिंदी बन गया है......प्रेमी ने उसकी उत्सुक आँखों में ... Read more
clicks 133 View   Vote 0 Like   11:54am 8 Dec 2011 #
Blogger: Aparajita
बाज़ार में बिक रही थीहत्या करके लायी गई मछलियाँ ढेर पर ढेर लगी मरी मछलियाँ धड़ कटा-खून सना बदबू फैलाती बाज़ार भर में.मरी मछलियों पर जुटी भीड़ हाथों में उठाकर भांपती उनका ताज़ापनलाश का ताज़ापन.भीड़ जुटी थी मुर्गे की दूकान पर बड़े-बड़े लोहे के पिंजरों म... Read more
clicks 134 View   Vote 0 Like   1:13pm 15 Nov 2011 #
Blogger: Aparajita
बातेंसायास नहींअनायास की जाए तो ज़्यादा सुंदर होती हैं.बातेंलफ़्ज़ों से नहींआँखों से की जाए तोज़्यादा मार्मिक होती हैं.बातेंहिचक से परेहृदय के उच्छवास से आये तो ज़्यादा स्थान लेती हैं.बातें क्षणिक प्रतिक्रिया से नहीं स्वप्न के आशियाने में सजे तो ज़्यादा उम्र पाती हैं.इस... Read more
clicks 191 View   Vote 0 Like   6:57am 29 Nov 2010 #
Blogger: Aparajita
माँ से पहले मैंन तत्व थीन अस्तित्व थान जान थीन जीवन थामाँ ने दिया सब कुछ मुझेहे माँ अपर्ण हर पल तुम्हेंजीवन में आने से पहलेमाँ ने मुझे अपना गर्भ दियाजीवन में आने पर मुझे अपने तन से भोजन दियाजीवन का हर एक पलआपके कर्ज में डूबा हुआजीवन का हर पल आपकेप्यार से सींचा हुआमहिमा ... Read more
clicks 179 View   Vote 0 Like   6:49am 7 Oct 2010 #
Blogger: Aparajita
मायके से लेते हुए विदा,बस यही ले आई थी साथजो कि रह सकेगा उम्र भरमेरा ‘अपना’  लेकिन परम्परा, रीति के नाम परवह भी मुझसे छीन लिया जायेगा !!जैसे छीन लियाबाबा कोआई कोभाई-बहन कोउस आँगन कोजिसमें महक रहा होगामेरा अस्तित्व आज भी!!छोड़ दिया अगर इसे भी- तो खत्म हो जाएगी मेरे जन्म की ... Read more
clicks 141 View   Vote 0 Like   9:13am 8 Sep 2010 #
Blogger: Aparajita
"क्या है! जब भी किताब लेकर बैठती हूँ दरवाजे पर घंटी ज़रूर बजती है. खोलने भी कोई नहीं आएगा." दरवाजा खोला तो सामने दस-बारह साल की एक छोटी लड़की फटे मैले फ्रॉक में खड़ी थी. शरीर और बालों पर गर्द इतनी जमी थी मानों सालों से पानी की एक बूँद ने भी इसे नहीं छूआ..."क्या है?" मैंने एक ही पल ... Read more
clicks 154 View   Vote 0 Like   8:52am 21 Aug 2010 #
Blogger: Aparajita
तुम्हारी कनखियों में कहींआज भी छिपी बैठी हैमेरी मुस्कान....जिसे तुम्हारी आँखों की चमक से,चुरा लिया था मैंने !!अब भी तुम्हारे हाथों में रची हैमेरे तन की महकमेरी नम हथेलियों परअब भी महक उठता है,तुम्हारा चमकीला स्वेद....!!मेरी उलझी लटेंअब भी यकायक निहारने लगती हैंतुम्हारी भ... Read more
clicks 122 View   Vote 0 Like   7:26am 8 Aug 2010 #
Blogger: Aparajita
हरी घास के दरीचों परजहाँ मेरे तुम्हारे बीचदुनिया का अस्तित्व नहीं होता थातुम कितने प्रेम भरे अंदाज़ में कहतेकरो जो करना चाहती होबस एक बार आवाज़ देनामैं तुम्हारे साथ खड़ा रहूँगातब तो तुम प्रेमी थे, ना!सफ़र बहुत लम्बा नहीं थापर हमने दूरियाँ बहुत सी तय कर लींजब मैं परे... Read more
clicks 129 View   Vote 0 Like   3:40am 16 Jul 2010 #
Blogger: Aparajita
नौकरी की अर्जी भरते हुएबैंक की पर्ची भरते हुएपरिचय के समय नाम बताते हुएमुझसे क्यों कहा जाता है“पूरा नाम बताइए”क्यों नाम के लिए जातिकिसी पूरक का काम करती हैक्यों संविधान ने आरक्षण लागू कियापर नहीं बनाया वह कानूनजिसमें मोटे-मोटे अक्षरों में लिखा जाता“केवल नाम लिखें,... Read more
clicks 134 View   Vote 0 Like   5:00pm 7 May 2010 #
Blogger: Aparajita
खाली कैनवास पर पहलेपेंसिल से कुछ बनाती हूँताकि गलती हो तो मिटा सकूँजचे न तो हटा सकूँफिर संभल संभल करतैयार किए रंग भरती हूँअब गलती की कोई गुंजाइश नहींक्योंकि मैं जानती हूँमुझे अलग नहीं सामान्य के बीच रहना है... Read more
clicks 122 View   Vote 0 Like   4:46am 27 Apr 2010 #
Blogger: Aparajita
हरी-हरी घास के दरीचों परघने-घने पेड़ों के साये मेंबैठी हैं चिड़ियाँजिनका कोई एक ठिकाना नहींएक जगह से उड़कर यहाँ आई हैंयहाँ से उड़कर फिर कहीं जाएँगीहँसी से गूँजतेखुस-फुसाहट और बातों से भरेकोने-कोने को चिरजीवा करअमरता का नया राग गातीकॉलेज की लड़कियाँ.... Read more
clicks 133 View   Vote 0 Like   2:43pm 23 Apr 2010 #
Blogger: Aparajita
चुगलख़ोर सुर्ख गुलाबखोल गया मेरे सीने में दफ़्न राज़यूं तो आंखों से छलकता थातुमने देखा नहींहोंठों पर थिरकता थातुमने सुना नहींरोम रोम में उछलता थातुमने छुआ नहींऔर चुगलख़ोर गुलाब नेसब कह दिया!... Read more
clicks 145 View   Vote 0 Like   2:01pm 17 Feb 2010 #
Blogger: Aparajita
थक गई हूँ रोज-रोजपतझड को बुहारते बुहारते,गिर जाने दोजमीं परसारे पत्तों कोएक एक कर,किमैं समेट सकूँएक साथ सबको।... Read more
clicks 137 View   Vote 0 Like   7:19am 7 Feb 2010 #
Blogger: Aparajita
अगर मैं दिल हूँ तुम्हारा,तो मुझे ये दिल दे दो.मैं माफ़ी नहीं चाहती,बस हाथों में हाथ दे दो.ज़िन्दगी भर न भूलूँ जो मैं,वो अहसास दे दो.बख्श दो मुझको - यूँ पल,तुम तड़पाओ ना,सोने से पहलेअपना एक ख्वाब दे दो.आती-जाती सांसों मेंएक शब्द सा सुनती हूँ,इन धुंधले शब्दों को सुन सकूं मैं,ऐ... Read more
clicks 131 View   Vote 0 Like   1:20pm 2 Feb 2010 #
Blogger: Aparajita
कुछ बंद दरवाजे हैंकुछ रोज़ सुनी जाने वाली आवाज़ेंदीवारें हैं,और बहुत कुछ है बिखरा हुआजिसे रोज़ समेटती हूँबस यही तो करती हूँअपनी ज़िन्दगियों को “हमारी” बनाने की कोशिश मेंजितनी बार मुँह खोलतीबाँहें फैलातीउतनी बार नासमझ करार दी जातीउलटबाँसियों से दबा दिया जाताउछलत... Read more
clicks 152 View   Vote 0 Like   5:11am 30 Dec 2009 #
Blogger: Aparajita
दिन उगता है तो उम्मीद करती हूँदोपहर होने पर उम्मीद करती हूँदिन ढलने पर भी उम्मीद करती हूँरात को उसी उम्मीद के साथअपने बिस्तर परकम्बल में लिपटकरसो जाते हैंमैं और मेरी उम्मीद !... Read more
clicks 151 View   Vote 0 Like   8:08am 27 Dec 2009 #
Blogger: Aparajita
वे कुछ कहना चाहते हैंकहने के लिए बहाना चुन लियाहाथी कानाक, कान, सूँड़, पूँछपर नाम न कह सकेहाथी कासब कह कर पहेली गढ़ दीउत्तर में मुझ से भीनाम सुनना चाहाहाथी का!... Read more
clicks 155 View   Vote 0 Like   6:32am 10 Sep 2009 #
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