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Blog: विभाव ( VIBHAAV )

Blogger: Bhaskar
लीक पर चलकेलीक को समझोलीक छोड़ फिरलीक रचो तुमलीक हो ऐसेलीक के जैसालीक से हटकेलीक लगो तुम ... Read more
clicks 17 View   Vote 0 Like   10:23am 21 Jan 2019 #
Blogger: Bhaskar
पेड़ से मिली छाया फल भी फूल भी उसके डाल ने हिलायाझुलाया सुलायाअनगिनत रूप दिए मन से निहारता रहा अनगिनत गंध दिए नस में उतारता रहा छोटे-मोटे रचे-बसे देख कई घोसलों से सपने मिले उदकती फुदकती चहकती दुबकती रंग विरंगे अंग संग अपने मिले हर अकेले लम... Read more
clicks 169 View   Vote 0 Like   5:05pm 3 May 2016 #
Blogger: Bhaskar
ऐसा कर देने सेज़्यादा सरल हैऐसा कह देनाऐसा कह देने सेज़्यादा सरल हैऐसा सोच लेनालेकिन ये कतई सरल नहींइस सोच के आने कीसही वजह समझ लेना.... Read more
clicks 145 View   Vote 0 Like   5:52pm 7 Mar 2016 #
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(लघुकथाएँ)1.एक राजा की तीन रानियाँ। एक थी,एक है और एक होनेवाली है। तीनों रानी हैं एक दूसरे से दूर,एक दूसरे से अपरिचित।2.एक राजा की तीन रानियाँ। तीनों अशिक्षित। राजा अपने कामों में इतने व्यस्त कि रानियों के लिए कोई समय नहीं। एक रानी टी.वी. की धारावाहिकों में मस्त रहती हैं। ... Read more
clicks 154 View   Vote 0 Like   3:54pm 2 Dec 2011 #
Blogger: Bhaskar
मैं भूल सकता हूँतुम्हारे कपड़ों का रंगजिसे तुमने उस दिन पहना थामैं वह दिन भी भूल सकता हूँजब तुम मुझे पहली बार मिली थीतुमने क्या कहा था...क्या किया थाऔर मुझे कैसा लगा थाभूल सकता हूँ मैंभूल सकता हूँतुम्हारे सहेलियों के नामतुम्हारे रिश्तेदारों का अता-पतातुम्हारा पसंद-न... Read more
clicks 152 View   Vote 0 Like   4:35pm 13 Nov 2011 #
Blogger: Bhaskar
कलम में भरी है स्याहीपर निब में नहीं आतीझटकना पड़ता था कई बार पहलेअब तो उसका भी असर नहींलगता है कुछ ज्यादा ही खफ़ा है मुझसेउसके इस रवैये से दुखी बहुत हूँपर गुस्सा नहीं करता मैंकुछ देर के लिए रख देता हूँकुछ देर बाद उठा के पता लगाता हूँकरता हूँ प्रयास कि हो जाये ठीकहो भी जा... Read more
clicks 130 View   Vote 0 Like   12:02pm 8 Apr 2011 #
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कुछ चेहरों को सामने से नहींबगल से देखोकुछ के नज़दीक मत जाओउन्हें दूर से देखोकुछ चेहरों को देखो सिर्फ़'डिजीटल डिवाइसेज़'(अंकीय उपकरणों) मेंवह ज़्यादा सुंदर लगेगासौंदर्य भी बदल लेता है अपनी उपस्थिति का अंदाज़ प्रदर्शन की भंगिमा याउसे मजबूर कर दिया जाता है ऐसा होने को 'वर्च... Read more
clicks 159 View   Vote 0 Like   9:29am 6 Dec 2010 #
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हमारी संगति मेंसंगीत बना रहे।चुनमुन चिड़ैये कावह छोटा सा घोंसलाकितना अच्छा हो किसजा रहेपेड़ सुखने के बाद भीऔर भलापेड़ भी सूखे क्यों?जब हम उसे पानी से नहींअमृत से सींचते हैंअमृत वह विश्वास हैजिसे हमने हासिल किया हैरोज़मर्रा के सुख दुख मेंइस तरह की ज़रूरत नहीं पड़ती... Read more
clicks 147 View   Vote 0 Like   5:55pm 29 Aug 2010 #
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आज यानी एक ही दिन में सुनने को मिली दो ख़बर। एक, 3 जी स्पेक्ट्रम की निलामी से सरकार को मिली 70 हजार करोड़ रूपये। दूसरी तरफ, सीएनजी की कीमत में 20 प्रतिशत का इज़ाफ़ा। 70 हजार करोड़ रूपये पा कर भी ये कैसा नुकसान या मजबूरी है कि कीमतें बढ़ाई जा रही है? वैसे ही मंहगाई की जाल में फंसे... Read more
clicks 149 View   Vote 0 Like   4:07pm 19 May 2010 #
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आओ और आकरमार डालो मुझे!इस महान् देश में जीकरकोई क्या करेजहाँ महान् होने के लिएजरूरी होता जा रहा हैधनवान होना,और धनवान होने के लिएचोर, डाकू, लूटेरासाथ हीदोगला, अवसरवादी और नाशवान होना...जहाँ किसी पर विश्वास करने के लिएऔर किसी के लिए विश्वसनीय होने कीएक मात्र कसौटी सार्... Read more
clicks 163 View   Vote 0 Like   11:06am 14 Oct 2009 #
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याद आता हैअक्सर..तेज बारिश के झोंको मेंउम्मीद से छोटीऔरऔक़ात से मामूलीछतरी के नीचेउसे मजबूती से थामेहमाराभींगना......भींगते जानाएक दूसरे की आँखों मेंलगभग अपलक देखते हुए।गुज़रे हुए सुखद क्षणों कोएक स्थिति की तरह नहींमैं इसे प्रतीककी तरह याद करना चाहता हूँताकि दिख सक... Read more
clicks 190 View   Vote 0 Like   3:03pm 11 Sep 2009 #
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जिसे ढूँढता रहासागर की गहराइयों में,पर्वतों की गुफाओं में,ग्रहों में, नक्षत्रों में,और न जाने कहाँ-कहाँ.उसे देखता हूँ मैंतुम्हारे आँखों में सजेनिश्छल सौन्दर्य केअविकल भावों में.जिसमें बसा है वह जो मिलता है,जुते ज़मीन पर गिरेचार बूँद पानी में,नवजात बच्चों के मस्तभरी ... Read more
clicks 151 View   Vote 0 Like   12:31pm 3 Sep 2009 #
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सूखी ही सहीदो रोटी और दो चुल्लू पानी के लिएये दोनों भिगोये जाते हैं पसीने मेंदिन भर, और कठिनतम परिश्रमों मेंगूंथकरतपाये जाते हैंतुच्छ स्वार्थियों की लोलुपता में.रात की गहरी खमोशीइनका बच्चा रोता हैपहले धीरेफिर जोर सेफिर वह चिल्लाता हैजोर-जोर से,लेकिन कुछ ही देर में... Read more
clicks 139 View   Vote 0 Like   12:09pm 28 Jun 2009 #
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(आज की देखी एक घटना पर आधारित)"बिहारी" कोगालीवाचक शब्दों में प्रयोग करनेवाले नागरिकों परइस सत्य और तथ्य काकाई असर नहीं पड़ताकिवह कितना कर्मठ हैकितना ज्ञानी और विद्वानमुफ़लस व्यवस्था के इन निवासियों मेंकैसी है आचरण की सभ्यताव्यवहारिक मूल्यों की मानवता।दरअसलअह्म (... Read more
clicks 163 View   Vote 0 Like   3:37pm 24 Jun 2009 #
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दिन दूनी रात चौगुनीतरक्की की लालसा मेंआम आदमीभीड़ में बिगड़ती, खोती पहचानबचाने बनाने की लालसा मेंआम आदमीजीवन में हर घड़ीसूअर की तरह मरता हैसाथियों के अभाव में।आम आदमी मेंज्ञान का अभाव नहींमूल्य भी अपार हैलेकिन इसका नपुंसक हो जाना हीआज आम आदमी की पहचान है।... Read more
clicks 141 View   Vote 0 Like   2:30pm 14 Jun 2009 #
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परिस्थितिजन्य मजबूरियों में व्यस्तकुछ आकुलकुछ व्याकुलकुछ में झुंझलाहट बहुत है जोडर से परे नहीं,चेहरे से है नदारतकृत्रिम श्रृंगार की चमक,आज प्राकृतिक दमक नेउन्हें आम बना दिया है,आज उनकी पहचान हैभाषिक अभिव्यक्ति मूलक भ्रम में नहींबल्किहस्तलिपि के सौन्दर्य में।कु... Read more
clicks 168 View   Vote 0 Like   5:08pm 13 Jun 2009 #
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वे पढ़ाते हैं और पढ़ाने की कमाई खाते हैंलेकिन नहीं चाहते पढ़ानापढ़ना तो बिल्कुल नहीं चाहतेकमाई चाहते हैंकमाने का यह माध्यम तो बहुत ज्यादा पसंद है।उन्हें कुछ साधनों से बहुत लगाव हैलक्ज़री होने तकलेकिन साधना से हिकारत हैउसके तो इर्द गिर्द भी नहीं होते।इस तरह के “वे”... Read more
clicks 150 View   Vote 0 Like   7:33am 8 May 2009 #
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जीवन को पारिभाषित करने की असंख्य कोशिशों का जो भी परिणाम होमैं जीवन के कसरत की चारदीवारी में कैदअपने विवशता की गिड़गिड़ाहट कोपशु होने से बचाने के प्रयत्न मेंनश्वर जगत केमिथ्या आस्थाओं का सहारा लेता हूँ।मैं संबंधों के कशमकश मेंभावनाओं की भूमिका कोइन सहारों के सहार... Read more
clicks 143 View   Vote 0 Like   3:01pm 30 Apr 2009 #
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आज की राजनीति परमन नहीं कर रहा कुछ कहने कामन नहीं कर रहा कुछ लिखने कामन नहीं कर रहा कुछ सोचने काअब तोकुछ सुनने से भी बचता हूँकुछ देखने से भी बचता हूँकुछ करना तो बहुत दूर की बात हैअर्थात्मैं नागरिक कर्तव्य की अवहेलना कर रहा हूँयानीमैं भी "राजनीति" कर रहा हूँ।... Read more
clicks 120 View   Vote 0 Like   4:50am 27 Apr 2009 #
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नींद मेरी जीवन कथा मेंएक ऐसी नायिका की तरह हैजो विवाह से पूर्व प्रेयसी कीभाव-भंगिमाओं में जगाती रहीविवाहोपरांत स्त्री कीअहं-भावी भृकुटि सेप्रतिशोध के परिणाम के तहतसोने नहीं देती है।मैं अपने कलम के साथउसी के सहारे गुफ्तगू कर रहा हूँरात के चार बजेपर नींद नायिका काअप... Read more
clicks 118 View   Vote 0 Like   1:54pm 18 Apr 2009 #
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पिता घर के कोने में बैठे सन्न थे. माता रो रही थी. भाई ने बहन को झन्नाटेदार थप्पर लगाया. सबको आज ही जानकारी मिली थी कि वह किसी लड़के से प्रेम करती है. बहन गुस्से में काँपती हुई भाई को गालियाँ सुनाए जा रही थी, उस भाई को जो बड़ा है और जिसने अब तक मोबाइल की फ़र्माइश पूरी नहीं की, फ... Read more
clicks 140 View   Vote 0 Like   6:26am 13 Mar 2009 #
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कभी बड़े उमंग और उल्लास में पूरे हुए थे फेरे सात. पर आज वह पास तो है लेकिन साथ नहीं. पास भी इसलिए है क्योंकि पास रहने को विवश किया है वस्तुओं ने, पदार्थों ने, सौन्दर्य प्रसाधनों ने, विलासिता के उपकरणों ने. और इन्हीं चीजों ने ही शायद उसके साथ नहीं रहने दिया. इन्हीं से उत्पन्... Read more
clicks 152 View   Vote 0 Like   6:24am 13 Mar 2009 #
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वोजिन्हें लगता हैकि वे कभी गलत नहीं होतेउन्हें गुस्सा बहुत आता हैगुस्सा बहुत आता है उन्हेंजिनके पास पद होता हैपद की ताकत होती हैताकत का मद होता हैमद की मस्ती होती हैऔर होती है ज़िन्दगीमस्त…..मस्त………..उन्हें गुस्सा बहुत आता हैजो नचाना चाहते हैं सबकोअपनी ऊँगलियों के इ... Read more
clicks 167 View   Vote 0 Like   8:57am 10 Sep 2008 #
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