Hamarivani.com

विभाव ( VIBHAAV )

पेड़ से मिली छाया फल भी फूल भी उसके डाल ने हिलायाझुलाया सुलायाअनगिनत रूप दिए मन से निहारता रहा अनगिनत गंध दिए नस में उतारता रहा छोटे-मोटे रचे-बसे देख कई घोसलों से सपने मिले उदकती फुदकती चहकती दुबकती रंग विरंगे अंग संग अपने मिले हर अकेले लम...
विभाव ( VIBHAAV )...
Tag :
  May 3, 2016, 10:35 pm
ऐसा कर देने सेज़्यादा सरल हैऐसा कह देनाऐसा कह देने सेज़्यादा सरल हैऐसा सोच लेनालेकिन ये कतई सरल नहींइस सोच के आने कीसही वजह समझ लेना....
विभाव ( VIBHAAV )...
Tag :
  March 7, 2016, 11:22 pm
(लघुकथाएँ)1.एक राजा की तीन रानियाँ। एक थी,एक है और एक होनेवाली है। तीनों रानी हैं एक दूसरे से दूर,एक दूसरे से अपरिचित।2.एक राजा की तीन रानियाँ। तीनों अशिक्षित। राजा अपने कामों में इतने व्यस्त कि रानियों के लिए कोई समय नहीं। एक रानी टी.वी. की धारावाहिकों में मस्त रहती हैं। ...
विभाव ( VIBHAAV )...
Tag :
  December 2, 2011, 9:24 pm
मैं भूल सकता हूँतुम्हारे कपड़ों का रंगजिसे तुमने उस दिन पहना थामैं वह दिन भी भूल सकता हूँजब तुम मुझे पहली बार मिली थीतुमने क्या कहा था...क्या किया थाऔर मुझे कैसा लगा थाभूल सकता हूँ मैंभूल सकता हूँतुम्हारे सहेलियों के नामतुम्हारे रिश्तेदारों का अता-पतातुम्हारा पसंद-न...
विभाव ( VIBHAAV )...
Tag :
  November 13, 2011, 10:05 pm
कलम में भरी है स्याहीपर निब में नहीं आतीझटकना पड़ता था कई बार पहलेअब तो उसका भी असर नहींलगता है कुछ ज्यादा ही खफ़ा है मुझसेउसके इस रवैये से दुखी बहुत हूँपर गुस्सा नहीं करता मैंकुछ देर के लिए रख देता हूँकुछ देर बाद उठा के पता लगाता हूँकरता हूँ प्रयास कि हो जाये ठीकहो भी जा...
विभाव ( VIBHAAV )...
Tag :
  April 8, 2011, 5:32 pm
कुछ चेहरों को सामने से नहींबगल से देखोकुछ के नज़दीक मत जाओउन्हें दूर से देखोकुछ चेहरों को देखो सिर्फ़'डिजीटल डिवाइसेज़'(अंकीय उपकरणों) मेंवह ज़्यादा सुंदर लगेगासौंदर्य भी बदल लेता है अपनी उपस्थिति का अंदाज़ प्रदर्शन की भंगिमा याउसे मजबूर कर दिया जाता है ऐसा होने को 'वर्च...
विभाव ( VIBHAAV )...
Tag :
  December 6, 2010, 2:59 pm
हमारी संगति मेंसंगीत बना रहे।चुनमुन चिड़ैये कावह छोटा सा घोंसलाकितना अच्छा हो किसजा रहेपेड़ सुखने के बाद भीऔर भलापेड़ भी सूखे क्यों?जब हम उसे पानी से नहींअमृत से सींचते हैंअमृत वह विश्वास हैजिसे हमने हासिल किया हैरोज़मर्रा के सुख दुख मेंइस तरह की ज़रूरत नहीं पड़ती...
विभाव ( VIBHAAV )...
Tag :
  August 29, 2010, 11:25 pm
आज यानी एक ही दिन में सुनने को मिली दो ख़बर। एक, 3 जी स्पेक्ट्रम की निलामी से सरकार को मिली 70 हजार करोड़ रूपये। दूसरी तरफ, सीएनजी की कीमत में 20 प्रतिशत का इज़ाफ़ा। 70 हजार करोड़ रूपये पा कर भी ये कैसा नुकसान या मजबूरी है कि कीमतें बढ़ाई जा रही है? वैसे ही मंहगाई की जाल में फंसे...
विभाव ( VIBHAAV )...
Tag :
  May 19, 2010, 9:37 pm
आओ और आकरमार डालो मुझे!इस महान् देश में जीकरकोई क्या करेजहाँ महान् होने के लिएजरूरी होता जा रहा हैधनवान होना,और धनवान होने के लिएचोर, डाकू, लूटेरासाथ हीदोगला, अवसरवादी और नाशवान होना...जहाँ किसी पर विश्वास करने के लिएऔर किसी के लिए विश्वसनीय होने कीएक मात्र कसौटी सार्...
विभाव ( VIBHAAV )...
Tag :
  October 14, 2009, 4:36 pm
याद आता हैअक्सर..तेज बारिश के झोंको मेंउम्मीद से छोटीऔरऔक़ात से मामूलीछतरी के नीचेउसे मजबूती से थामेहमाराभींगना......भींगते जानाएक दूसरे की आँखों मेंलगभग अपलक देखते हुए।गुज़रे हुए सुखद क्षणों कोएक स्थिति की तरह नहींमैं इसे प्रतीककी तरह याद करना चाहता हूँताकि दिख सक...
विभाव ( VIBHAAV )...
Tag :
  September 11, 2009, 8:33 pm
जिसे ढूँढता रहासागर की गहराइयों में,पर्वतों की गुफाओं में,ग्रहों में, नक्षत्रों में,और न जाने कहाँ-कहाँ.उसे देखता हूँ मैंतुम्हारे आँखों में सजेनिश्छल सौन्दर्य केअविकल भावों में.जिसमें बसा है वह जो मिलता है,जुते ज़मीन पर गिरेचार बूँद पानी में,नवजात बच्चों के मस्तभरी ...
विभाव ( VIBHAAV )...
Tag :
  September 3, 2009, 6:01 pm
सूखी ही सहीदो रोटी और दो चुल्लू पानी के लिएये दोनों भिगोये जाते हैं पसीने मेंदिन भर, और कठिनतम परिश्रमों मेंगूंथकरतपाये जाते हैंतुच्छ स्वार्थियों की लोलुपता में.रात की गहरी खमोशीइनका बच्चा रोता हैपहले धीरेफिर जोर सेफिर वह चिल्लाता हैजोर-जोर से,लेकिन कुछ ही देर में...
विभाव ( VIBHAAV )...
Tag :
  June 28, 2009, 5:39 pm
(आज की देखी एक घटना पर आधारित)"बिहारी" कोगालीवाचक शब्दों में प्रयोग करनेवाले नागरिकों परइस सत्य और तथ्य काकाई असर नहीं पड़ताकिवह कितना कर्मठ हैकितना ज्ञानी और विद्वानमुफ़लस व्यवस्था के इन निवासियों मेंकैसी है आचरण की सभ्यताव्यवहारिक मूल्यों की मानवता।दरअसलअह्म (...
विभाव ( VIBHAAV )...
Tag :
  June 24, 2009, 9:07 pm
दिन दूनी रात चौगुनीतरक्की की लालसा मेंआम आदमीभीड़ में बिगड़ती, खोती पहचानबचाने बनाने की लालसा मेंआम आदमीजीवन में हर घड़ीसूअर की तरह मरता हैसाथियों के अभाव में।आम आदमी मेंज्ञान का अभाव नहींमूल्य भी अपार हैलेकिन इसका नपुंसक हो जाना हीआज आम आदमी की पहचान है।...
विभाव ( VIBHAAV )...
Tag :
  June 14, 2009, 8:00 pm
परिस्थितिजन्य मजबूरियों में व्यस्तकुछ आकुलकुछ व्याकुलकुछ में झुंझलाहट बहुत है जोडर से परे नहीं,चेहरे से है नदारतकृत्रिम श्रृंगार की चमक,आज प्राकृतिक दमक नेउन्हें आम बना दिया है,आज उनकी पहचान हैभाषिक अभिव्यक्ति मूलक भ्रम में नहींबल्किहस्तलिपि के सौन्दर्य में।कु...
विभाव ( VIBHAAV )...
Tag :
  June 13, 2009, 10:38 pm
वे पढ़ाते हैं और पढ़ाने की कमाई खाते हैंलेकिन नहीं चाहते पढ़ानापढ़ना तो बिल्कुल नहीं चाहतेकमाई चाहते हैंकमाने का यह माध्यम तो बहुत ज्यादा पसंद है।उन्हें कुछ साधनों से बहुत लगाव हैलक्ज़री होने तकलेकिन साधना से हिकारत हैउसके तो इर्द गिर्द भी नहीं होते।इस तरह के “वे”...
विभाव ( VIBHAAV )...
Tag :
  May 8, 2009, 1:03 pm
जीवन को पारिभाषित करने की असंख्य कोशिशों का जो भी परिणाम होमैं जीवन के कसरत की चारदीवारी में कैदअपने विवशता की गिड़गिड़ाहट कोपशु होने से बचाने के प्रयत्न मेंनश्वर जगत केमिथ्या आस्थाओं का सहारा लेता हूँ।मैं संबंधों के कशमकश मेंभावनाओं की भूमिका कोइन सहारों के सहार...
विभाव ( VIBHAAV )...
Tag :
  April 30, 2009, 8:31 pm
आज की राजनीति परमन नहीं कर रहा कुछ कहने कामन नहीं कर रहा कुछ लिखने कामन नहीं कर रहा कुछ सोचने काअब तोकुछ सुनने से भी बचता हूँकुछ देखने से भी बचता हूँकुछ करना तो बहुत दूर की बात हैअर्थात्मैं नागरिक कर्तव्य की अवहेलना कर रहा हूँयानीमैं भी "राजनीति" कर रहा हूँ।...
विभाव ( VIBHAAV )...
Tag :
  April 27, 2009, 10:20 am
नींद मेरी जीवन कथा मेंएक ऐसी नायिका की तरह हैजो विवाह से पूर्व प्रेयसी कीभाव-भंगिमाओं में जगाती रहीविवाहोपरांत स्त्री कीअहं-भावी भृकुटि सेप्रतिशोध के परिणाम के तहतसोने नहीं देती है।मैं अपने कलम के साथउसी के सहारे गुफ्तगू कर रहा हूँरात के चार बजेपर नींद नायिका काअप...
विभाव ( VIBHAAV )...
Tag :
  April 18, 2009, 7:24 pm
पिता घर के कोने में बैठे सन्न थे. माता रो रही थी. भाई ने बहन को झन्नाटेदार थप्पर लगाया. सबको आज ही जानकारी मिली थी कि वह किसी लड़के से प्रेम करती है. बहन गुस्से में काँपती हुई भाई को गालियाँ सुनाए जा रही थी, उस भाई को जो बड़ा है और जिसने अब तक मोबाइल की फ़र्माइश पूरी नहीं की, फ...
विभाव ( VIBHAAV )...
Tag :
  March 13, 2009, 11:56 am
कभी बड़े उमंग और उल्लास में पूरे हुए थे फेरे सात. पर आज वह पास तो है लेकिन साथ नहीं. पास भी इसलिए है क्योंकि पास रहने को विवश किया है वस्तुओं ने, पदार्थों ने, सौन्दर्य प्रसाधनों ने, विलासिता के उपकरणों ने. और इन्हीं चीजों ने ही शायद उसके साथ नहीं रहने दिया. इन्हीं से उत्पन्...
विभाव ( VIBHAAV )...
Tag :
  March 13, 2009, 11:54 am
वोजिन्हें लगता हैकि वे कभी गलत नहीं होतेउन्हें गुस्सा बहुत आता हैगुस्सा बहुत आता है उन्हेंजिनके पास पद होता हैपद की ताकत होती हैताकत का मद होता हैमद की मस्ती होती हैऔर होती है ज़िन्दगीमस्त…..मस्त………..उन्हें गुस्सा बहुत आता हैजो नचाना चाहते हैं सबकोअपनी ऊँगलियों के इ...
विभाव ( VIBHAAV )...
Tag :
  September 10, 2008, 2:27 pm
[ Prev Page ] [ Next Page ]

Share:
  हमारीवाणी.कॉम पर ब्लॉग पंजीकृत करने की विधि बहुत सरल हैं। इसके लिए सबसे पहले प्रष्ट के सबसे ऊपर दाईं ओर लिखे ...
  हमारीवाणी पर ब्लॉग-पोस्ट के प्रकाशन के लिए 'क्लिक कोड' ब्लॉग पर लगाना आवश्यक है। इसके लिए पहले लोगिन करें, लोगिन के उपरांत खुलने वाले प...
और सन्देश...
कुल ब्लॉग्स (3661) कुल पोस्ट (164705)